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अधिवक्ता से की गई मारपीट को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट के बाहर अधिवक्ताओं ने किया प्रदर्शन, की नारेबाजी
Prayagraj, Uttar Pradesh
बाराबंकी जनपद के हैदरगढ़ टोल प्लाज़ा पर अधिवक्ता श्री रत्नेश शुक्ला के साथ टोल कर्मियों द्वारा की गई मारपीट के संबंध में दोषियों पर कठोर कार्यवाही, भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम, एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू किए जाने एवं अधिवक्ताओं से टोल टैक्स न लिए जाने के संबंध में।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि उत्तर प्रदेश के जनपद बाराबंकी स्थित हैदरगढ़ टोल प्लाज़ा पर अधिवक्ता श्री रत्नेश शुक्ला के साथ टोल कर्मियों द्वारा की गई मारपीट एवं अभद्रता की घटना अत्यंत निंदनीय, शर्मनाक एवं कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है। इस प्रकरण में एफ.आई.आर. दर्ज हो चुकी है, फिर भी यह घटना अधिवक्ताओं की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता उत्पन्न करती है।
यह घटना केवल एक अधिवक्ता पर हमला नहीं है, बल्कि संपूर्ण अधिवक्ता समाज की गरिमा, सम्मान एवं सुरक्षा पर सीधा आघात है। अधिवक्ता न्याय व्यवस्था के अभिन्न अंग हैं और यदि वे ही असुरक्षित रहेंगे तो आम नागरिकों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित होगी।
देशभर में अधिवक्ताओं के साथ लगातार हो रही ऐसी घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट जैसे विशेष कानून का अभाव अब एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या बन चुका है। अधिवक्ताओं का न्यायालयीन एवं शासकीय कार्यों के लिए निरंतर आवागमन होता है, जिसमें टोल प्लाज़ा पर उत्पन्न विवाद उनके कर्तव्यों में अनावश्यक बाधा उत्पन्न करते हैं।
अतः महामहिम से ससम्मान निम्नलिखित मांगें की जाती हैं—
हैदरगढ़ टोल प्लाज़ा प्रकरण में संलिप्त दोषी टोल कर्मियों एवं जिम्मेदार प्रबंधन के विरुद्ध कठोर एवं त्वरित कानूनी कार्यवाही की जाए।
प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों को उदाहरणात्मक दंड दिलाया जाए।
भविष्य में अधिवक्ताओं के साथ टोल प्लाज़ा अथवा किसी भी निजी/अर्धसरकारी संस्थान द्वारा किसी प्रकार की अभद्रता या हिंसा न हो, इसके लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को शीघ्र संपूर्ण भारत में लागू किया जाए।
अधिवक्ताओं को उनके वैध पहचान पत्र के आधार पर टोल टैक्स से मुक्त करते हुए सम्मानपूर्वक एवं निर्बाध आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
महोदय, यदि इस अत्यंत गंभीर विषय पर शीघ्र एवं प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई, तो विवश होकर अधिवक्ता समाज लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक दायरे में व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की होगी।
इस ज्ञापन का नेतृत्व एडवोकेट हन्जला फारूकी द्वारा किया गया, जिसमें मुख्य रूप से हाईकोर्ट अधिवक्ता फारीद उद्दीन ने तीव्र आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि यदि अधिवक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई तो यह आंदोलन प्रदेश स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक ले जाया जाएगा।
हमें पूर्ण विश्वास है कि महामहिम अधिवक्ताओं की सुरक्षा एवं न्यायहित में शीघ्र आवश्यक हस्तक्षेप करेंगे।
भवदीय,
समस्त जनपद प्रयागराज के
अधिवक्ता
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