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201304

बाघ सड़क पर दौड़े: राष्ट्रीय राजमार्ग 309 पर दो टाइगर वीडियो वायरल

Noida, Uttar Pradesh:नेशनल हाईवे 309 पर दो टाइगर, कार के आगे-आगे दौड़ते रहे बाघ—वीडियो आया सामने. तराई पश्चिमी वन प्रभाग के हेमपुर प्रतापपुर रोड से नेशनल हाईवे 309 पर देर रात सड़क पर अचानक दो बाघ आ गए। एक कार सवार भी वहां से गुजर रहा था; जैसे ही बाघ दिखाई दिए, चालक ने दूरी बनाए रखते हुए vehicle को आगे बढ़ाया। वीडियो में स्पष्ट है कि दोनों बाघ सड़क के आगे-आगे दौड़ते रहे, जिससे सड़क पर रहने वाले लोगों को खतरे का अहसास हुआ। जंगल से निकलकर सड़क पर आए दोनों बाघों को इतनी नजदीक से देखकर घटना रोमांचक भी थी और जोखिमपूर्ण भी। फिलहाल किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। तराई पश्चिमी वन क्षेत्र में अक्सर जंगल से वन्यजीव सड़क पर आते रहते हैं, अतः रात के समय जंगल के किनारे स्थित मार्गों पर वाहन चालकों को सतर्क रहते हुए बाघ जैसे बड़े वन्यजीवों को रास्ता देना चाहिए।
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रामनगर-रानीखेत मार्ग पर डंपर हादसे में चालक की मौत, सड़क चौड़ीकरण पर चर्चा तेज

Noida, Uttar Pradesh:रामनगर-रानीखेत मार्ग पर दर्दनाक हादसा, कुमेरिया और सौराल के बीच एक डंपर अनियंत्रित होकर पहाड़ी से नीचे गिरा, हादसा इतना भीषण था कि डंपर चालक वाहन और पेड़ के बीच बुरी तरह दब गया, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, चालक को बाहर निकालने के लिए मौके पर कटर मंगवाया गया है, हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई है. रामनगर-रानीखेत मार्ग पर कुमेरिया और सौराल के बीच हुए इस हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई, बताया जा रहा है कि एक डंपर अचानक अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे पहाड़ी की ओर जा गिरा, नीचे गिरने के बाद डंपर एक पेड़ से जा टकराया और चालक वाहन तथा पेड़ के बीच बुरी तरह फंस गया. हादसे में चालक की दर्दनाक मौत हो गई। चालक को डंपर से बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू टीम द्वारा कटर मंगवाया गया है, जिसके बाद वाहन को काटकर चालक के शव को बाहर निकालने की कार्रवाई की जा रही है. हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया गया. हादसे के कारणों की भी जांच की जा रही है। गौर करने वाली बात यह है कि रामनगर-रानीखेत मार्ग की बदहाल स्थिति और सड़क के चौड़ीकरण को लेकर लंबे समय से स्थानीय लोगों द्वारा मांग उठाई जाती रही है, इस मार्ग पर कई स्थानों पर सड़क संकरी होने के साथ ही जर्जर हालत में है। सड़क चौड़ी न होने के कारण वाहन चालकों को कई जगहों पर परेशानी का सामना करना पड़ता है और हादसों का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस महत्वपूर्ण मार्ग के चौड़ीकरण और सुधारीकरण की दिशा में गंभीरता से कदम उठाए जाने की जरूरत है, ताकि लगातार हो रहे सड़क हादसों पर अंकुश लगाया जा सके. फिलहाल पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर है और चालक के शव को बाहर निकालने की कार्रवाई जारी है, हादसे के बाद एक बार फिर रामनगर-रानीखेत मार्ग की सुरक्षा और चौड़ीकरण का मुद्दा चर्चा में आ गया है.
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यूपी बीजेपी का मास्टर प्लान: बूथ स्तर पर 2027 चुनाव की तैयारी तेज

Noida, Uttar Pradesh:इससे वाक थ्रू गया है इससे बाईट गयी है यूपी में कमजोर बूथों की हुई पहचान,भाजपा का इन बूथों पर बना मास्टर प्लान एंकर---यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी बूथ स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। पार्टी का बूथ प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही उन बूथों पर खास फोकस होगा जो 2022 और 2024 के बीच उसके हाथ से निकल गए थे। भाजपा सूत्रों का कहना है कि राज्य में ऐसे लगभग 18900 बूथ हैं जिन्हें पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनावों में जीता था, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों में हार गई। वीओ--2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को यूपी में काफी झटका लगा, जब वे 33 सीटों पर सिमट गई थी, जबकि 2019 में भाजपा ने 62 सीटों पर कब्जा किया था। इस तरह ये अंतर काफी बढ़ गया था। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने 37 सीटें जीतीं, जो कि 2019 में जीती 5 सीटों के मुकाबले बहुत बड़ा अंतर था। भाजपा के लिए बूथ स्तर पर सबसे बड़ा नुकसान ग्रामीण क्षेत्रों में हुआ, इन बूथों में से लगभग 80 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों में स्थित हैं। बाइट --राजेश चौधरी प्रदेश मंत्री यूपी भाजपा आंकड़ों पर गौर करें तो भाजपा को सबसे अधिक बूथों का नुकसान अवध और पूर्वांचल क्षेत्रों में हुआ है। 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने अवध क्षेत्र की 154 सीटों में से 101 और पूर्वांचल की 102 सीटों में से 53 सीटों पर जीत दर्ज की थी। अवध में भाजपा को अमेठी, फैजाबाद, कन्नौज, सुल्तानपुर और सीतापुर में बूथ स्तर पर भारी नुकसान उठाना पड़ा। पूर्वांचल में, गैर-यादव ओबीसी वोटों का एक बड़ा हिस्सा सपा की ओर खिसक गया, जिसके परिणामस्वरूप जौनपुर, गाजीपुर, मछलीशहर, चंदौली और ग्रामीण प्रयागराज में बूथों का नुकसान हुआ। पश्चिम यूपी और रुहेलखंड की 128 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने 2022 में 87 सीटें जीती थीं। 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी केवल 65 विधानसभा सीटों पर ही अपनी बढ़त बनाए रख सकी। बुंदेलखंड में भाजपा ने 2022 की 19 विधानसभा सीटों में से 14 पर जीत दर्ज की थी। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी केवल नौ सीटों पर ही बढ़त बनाई। एंटी-इंकमबेंसी के अलावा, बुंदेलखंड में स्थानीय मुद्दे बड़े कारक रहे जिसकी वजह से पार्टी ने अपनी पकड़ खो दी। सपा के पीडीए (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) कार्ड की वजह से भाजपा के पारंपरिक कुर्मी, कुशवाहा और अन्य ओबीसी वोटों में भी सेंध लगी। वाक थ्रू यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से काफी पहले बीजेपी जिस तरह संगठन को सक्रिय कर रही है, उससे संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी चुनावी मशीनरी को समय रहते पूरी तरह तैयार करना चाहती है. अब आने वाले दिनों में बूथ समीक्षा बैठकों के जरिए इसकी तस्वीर और साफ होगी.
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