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दिल्ली के दस में से एक सरकारी स्कूल की बिल्डिंग खतरनाक, 108 भवन असुरक्षित

Noida, Uttar Pradesh:दिल्ली राजधानी के सरकारी स्कूलों की बिल्डिंगों के बारे में एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। दिल्ली सरकार की एक रिपोर्ट बताती है कि हर 10 में से 1 सरकारी स्कूल की बिल्डिंग खतरनाक हालत में है। वीडियो-आडियो में टूटी दीवारें, झड़ता प्लास्टर और क्लासरूम के बाहर लगा डेंजर का बोर्ड दिखाई देता है; यह तस्वीरें किसी खंडहर की नहीं, बल्कि राजधानी दिल्ली के सरकारी स्कूलों की हैं। यह खुलासा दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा दिल्ली के सभी पुराने सरकारी स्कूल बिल्डिंगों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने के निर्देश के बाद हुआ है। ऑडिट के अनुसार दिल्ली में हर 10 में से 1 सरकारी स्कूल की बिल्डिंग छात्रों के लिए असुरक्षित और खतरनाक है, जिनमें से 7 को जल्द गिराने की संभावना है। आने वाले महीनों में गिराए जाने वाले इन 7 स्कूलों में CM SHRI स्कूल (चिल्ला गांव), गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल (GGSSS), जसोला गांव, सर्वोदय कन्या विद्यालय (कराला), गवर्नमेंट बॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल (बापरोला), SKV मटियाला, GGSSS नेब सराय और GGSSS शिवाजी पार्क शामिल हैं। दिल्ली में लगभग 1100 सरकारी स्कूल हैं; ऑडिट में इनमें से 108 सरकारी/सहायता प्राप्त स्कूल बिल्डिंगों को असुरक्षित और खतरनाक श्रेणी में चिन्हित किया गया है, जिनमें से 54 इमारतें बेहद जर्जर स्थिति में पाई गईं, जिनके ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है। LG ने इन 7 स्कूल बिल्डिंगों को गिराने की अनुमति दे दी है और अगले कुछ महीनों में इन्हें गिराया जा सकता है।
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दिल्ली सरकार ने होली इनोसेंट स्कूल के खिलाफ नोटिस जारी किया, अधिग्रहण की संभावना

Delhi, Delhi:दिल्ली सरकार ने विकासपुरी स्थित होली इनोसेंट पब्लिक स्कूल के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई शुरू करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। शिक्षा निदेशालय (डीओई) की औचक जांच में स्कूल में छात्रों की सुरक्षा, भवन निर्माण, फीस, शिक्षकों के वेतन और मान्यता से जुड़ी कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन को सात दिन के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम (डीएसईए), 1973 की धारा-20 के तहत विद्यालय का सरकारी अधिग्रहण किया जाएगा। साथ ही रियायती दर पर आवंटित जमीन का पट्टा निरस्त कराने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को भी सिफारिश भेजी जाएगी। जांच में सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि विद्यालय के पास केवल 39 कमरों के लिए अग्नि सुरक्षा अनापत्ति प्रमाणपत्र (फायर एनओसी) है, जबकि परिसर में 82 कमरों का संचालन किया जा रहा था। यानी 43 कक्षाएं बिना फायर एनओसी के संचालित हो रही थीं। आपातकालीन घटना में विद्यार्थियों की जान को गंभीर खतरा जाँच टीम ने पाया कि स्कूल ने बिना अनुमति 30 कमरों का टीन शेड, अवैध बेसमेंट और तीसरी मंजिल का निर्माण भी कर रखा है। कई कक्षाओं में केवल एक ही निकास द्वार मिला, जबकि अग्निशमन वाहनों और अन्य आपातकालीन सेवाओं के लिए निर्धारित रास्ता भी अवरुद्ध था। सरकार का कहना है कि ऐसी स्थिति में किसी भी आपातकालीन घटना में विद्यार्थियों की जान को गंभीर खतरा हो सकता था। दिल्ली सरकार ने अधिकारियों को विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि कोई विद्यालय अवैध निर्माण कर, सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर और कानून का उल्लंघन करते हुए हजारों विद्यार्थियों के जीवन को जोखिम में डालता है तो सरकार उसके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करेगी, आवश्यकता पड़ने पर विद्यालय का प्रबंधन भी अपने हाथ में लिया जाएगा।
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