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रामनगर की तृप्ति शर्मा: फैशन से योग गुरु तक बनाईं जनआंदोलन

Noida, Uttar Pradesh:रामनगर में एंकर:-अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आज हम आपको रामनगर की एक ऐसी महिला की कहानी दिखाने जा रहे हैं, जिन्होंने जीवन की चुनौतियों को अवसर में बदला और योग को अपनी पहचान बना लिया,कभी फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र से जुड़ी रहीं तृप्ति शर्मा आज रामनगर में योग की अलख जगा रही हैं, पति के परिवार से मिली प्रेरणा, कठिन संघर्ष और अथक मेहनत के दम पर उन्होंने योगा रूट्स स्टूडियो की स्थापना की और आज प्रतिदिन 100 से 150 लोगों को स्वस्थ जीवन का मंत्र दे रही हैं,आइए देखते हैं संघर्ष से सफलता तक का यह प्रेरणादायक सफर. रामनगर की रहने वाली तृप्ति शर्मा की पहचान आज एक सफल योग शिक्षिका और "योगा रूट्स" स्टूडियो की संचालिका के रूप में है, लेकिन उनकी यह उपलब्धि वर्षों की मेहनत और संघर्ष का परिणाम है, शादी के बाद रामनगर आईं तृप्ति का योग से कोई विशेष संबंध नहीं था,उनका करियर फैशन डिजाइनिंग से जुड़ा था और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि योग ही एक दिन उनके जीवन का उद्देश्य बन जाएगा. तृप्ति बताती हैं कि उनके ससुर ने उन्हें योग शिक्षा के लिए प्रेरित किया,परिवार के सहयोग से उन्होंने योग का प्रशिक्षण लेना शुरू किया। शुरुआत में योग में उनकी रुचि कम थी, लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने योग को समझा, उसकी शक्ति को महसूस किया और उसे अपने जीवन में अपनाया, उनका नजरिया पूरी तरह बदला गया. तृप्ति शर्मा के पति डिफेंस में सिविल इंजीनियर हैं और वर्तमान में जम्मू में कार्यरत हैं,एक बेटी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपने सपनों को जीवित रखा,उन्होंने विद्यालय से प्रशिक्षण प्राप्त किया और अपने गुरु के मार्गदर्शन में योग सिखाने का कार्य शुरू किया. हालांकि शुरुआत बिल्कुल आसान नहीं थी, कई बार एक घंटे की कक्षा में केवल एक या दो छात्र ही पहुंचते थे,लोग योग सीखने के लिए घरों से बाहर नहीं निकलते थे,सर्दियों के कठिन दिनों में भी उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार लोगों को योग के प्रति जागरूक करती रहीं। तृप्ति कहती हैं कि उन्होंने एक-एक छात्र को भी पूरे समर्पण के साथ योग सिखाया और धीरे-धीरे लोगों का विश्वास जीतने में सफल रहीं. लगातार मेहनत और समर्पण का परिणाम यह रहा कि आज रामनगर में उनके "योगा रूट्स" स्टूडियो में प्रतिदिन लगभग 100 से 150 लोग योग सीखने पहुंचते हैं,इनमें महिलाओं की संख्या विशेष रूप से अधिक है. तृप्ति का कहना है कि योग केवल व्यायाम नहीं बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने की कला है,उनके अनुसार कई महिलाओं ने नियमित योग के माध्यम से अपने स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव महसूस किए हैं, पीसीओडी और पीसीओएस जैसी समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को भी योग और स्वस्थ जीवनशैली से लाभ मिला है. वे महिलाओं को घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर स्वयं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करती हैं, उनका मानना है कि स्वस्थ महिला ही स्वस्थ परिवार और समाज की नींव रख सकती है? योग का प्रभाव केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है बल्कि यह आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच भी विकसित करता है,इसका उदाहरण हैं मीना गर्ग, जो लंबे समय से तृप्ति शर्मा से योग सीख रही हैं. मीना गर्ग बताती हैं कि रामनगर में महिलाओं के लिए इस तरह का संगठित योग मंच पहले उपलब्ध नहीं था,योग से उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के लाभ मिले हैं, प्रतिदिन एक घंटा योग करने से पूरा दिन ऊर्जा और उत्साह से भर जाता है. उनका कहना है कि योग ने न केवल उनकी दिनचर्या को बेहतर बनाया बल्कि जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भी विकसित किया है. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योगा रूट्स द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व प्रदेश मंत्री राकेश नैनीवाल ने भी तृप्ति शर्मा के प्रयासों की सराहना की, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है और आज दुनिया के अनेक देशों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि रामनगर में तृप्ति शर्मा द्वारा किया जा रहा कार्य सराहनीय है,योगा रूट्स ने शहर के लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया है और बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़ रहे हैं. तृप्ति शर्मा का सफर यह साबित करता है कि यदि व्यक्ति के पास दृढ़ संकल्प, मेहनत और परिवार का सहयोग हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता,एक-दो छात्रों से शुरू हुई उनकी यात्रा आज सैकड़ों लोगों तक पहुंच चुकी है, योग को जीवन का उद्देश्य बनाकर उन्होंने न सिर्फ स्वयं को नई पहचान दी बल्कि समाज को भी स्वस्थ जीवन की दिशा में प्रेरित किया. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर उनका संदेश स्पष्ट है—जब तक स्वास्थ्य है, तभी जीवन की हर खुशी संभव है। इसलिए योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाइए और स्वस्थ, संतुलित तथा सकारात्मक जीवन की ओर कदम बढ़ाइए. फैशन डिजाइनिंग से योग गुरु बनने तक का तृप्ति शर्मा का यह सफर संघर्ष, समर्पण और सफलता की ऐसी कहानी है जो हर व्यक्ति को अपने सपनों के लिए लगातार प्रयास करते रहने की प्रेरणा देती है,रामनगर में योग की बढ़ती अलख और सैकड़ों लोगों का जुड़ाव इस बात का प्रमाण है कि मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती।
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12वें योग दिवस: सिरसा में कार्यक्रम, मोदी के प्रयासों से योग की वैश्विक पहचान

Sirsa, Haryana:एंकर रीड- 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सिरसा के शहीद भगत सिंह स्टेडियम में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में खिलाड़ियों, स्कूली बच्चों और आम नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में हरियाणा विधानसभा के उपाध्यक्ष कृष्ण मिड्ढा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और उपस्थित लोगों के साथ योगाभ्यास किया। वॉयस-01 कृष्ण मिड्ढा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों के कारण आज योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब भारत की प्राचीन योग परंपरा धीरे-धीरे लोगों के जीवन से दूर होती जा रही थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इसे पुनः जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। उनके प्रयासों के चलते आज दुनिया के अधिकांश देश योग को अपना रहे हैं और इसके महत्व को स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि स्वस्थ जीवनशैली का आधार है। योग व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है। उन्होंने देश के प्रत्येक नागरिक से प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट योग करने का आग्रह करते हुए कहा कि यदि लोग नियमित रूप से योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लें तो अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है और स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च भी कम होगा। योग दिवस कार्यक्रम के दौरान हजारों लोगों ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया। आयोजन में विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों, खेल संस्थाओं, सामाजिक संगठनों तथा नागरिकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर स्वस्थ, सशक्त और जागरूक समाज का निर्माण किया जा सकता है। वॉयस-02 कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए विधानसभा उपाध्यक्ष ने विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल को 12 वर्ष से अधिक समय होने संबंधी सवाल पर कहा कि यह अवधि देश के लिए "बेमिसाल" रही है। उन्होंने कहा कि इन वर्षों में देशभर में सड़कों का व्यापक नेटवर्क विकसित हुआ है और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों तक रेल सेवाओं का विस्तार हुआ है। भारत ने विश्व पटल पर अपनी अलग पहचान बनाई है और वैश्विक स्तर पर उसका प्रभाव बढ़ा है। मिड्ढा ने कहा कि आज भारत अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों और वैश्विक परिस्थितियों का सामना करने में पहले की तुलना में कहीं अधिक सक्षम हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री के विदेशी दौरों का बचाव करते हुए कहा कि ये यात्राएं केवल भ्रमण के लिए नहीं बल्कि देश के विकास, निवेश आकर्षित करने और भारत के हितों को मजबूत करने के उद्देश्य से की जाती हैं। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष की सोच सीमित है और वह राष्ट्रीय हितों के मुद्दों को भी राजनीतिक चश्मे से देखता है। वॉयस-03 मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिलों तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री या किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के काफिले को अनावश्यक रूप से कम करना देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने जैसा होगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जहां तक संभव हो, काफिलों के आकार को कम करने के प्रयास किए गए हैं। हवाई यात्राओं के संबंध में उन्होंने कहा कि समय की बचत और प्रशासनिक कार्यों की गति बनाए रखने के लिए कई बार हवाई यात्रा आवश्यक हो जाती है। पड़ोसी देश पाकिस्तान की स्थिति का उल्लेख करते हुए कृष्ण मिड्ढा ने कहा कि भारत में प्रधानमंत्री लोगों को सोने की खरीद कम करने जैसी आर्थिक सलाह देते हैं, जबकि पाकिस्तान में हालात ऐसे हैं कि वहां लोगों से गेहूं और चावल की खरीद तक सीमित करने की अपील करनी पड़ती है। इससे दोनों देशों की आर्थिक स्थिति का अंतर स्पष्ट होता है। वॉयस-04 पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर दिए गए बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए विधानसभा उपाध्यक्ष ने कहा कि अपराधियों की मानसिकता को पूरी तरह पढ़ पाना किसी भी सरकार के लिए आसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि अपराध हर सरकार के दौरान हुए हैं, लेकिन वर्तमान सरकार में अपराधियों की धरपकड़ और उनके खिलाफ कार्रवाई की गति तेज हुई है। कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। भूपेंद्र हुड्डा द्वारा विशेष विधानसभा सत्र बुलाने की मांग पर भी मिड्ढा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब विधानसभा का नियमित सत्र चलता है तो कांग्रेस कई बार उसका बहिष्कार कर देती है और सदन की पूरी कार्यवाही में शामिल नहीं होती। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बातों पर विशेष सत्र बुलाना व्यावहारिक नहीं है। उनके अनुसार विपक्ष को सदन के भीतर अपनी बात रखनी चाहिए, लेकिन कांग्रेस के नेताओं में सुनने की क्षमता की कमी है, जिसके कारण वे अक्सर बहिष्कार का रास्ता अपनाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए अनावश्यक मुद्दों को उठाता रहता है। वॉयस-05 रोहतक में हाल ही में हुई घटना पर बोलते हुए विधानसभा उपाध्यक्ष ने कहा कि प्रशासन ने पूरी तत्परता के साथ काम किया। उन्होंने माना कि कई स्थानों पर सड़कों पर अतिक्रमण होने के कारण राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित होते हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन और आम जनता दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि सार्वजनिक मार्गों को अतिक्रमण मुक्त रखा जाए ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई संभव हो सके। वॉयस-06 विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समय-समय पर सामने आने वाले विवादों के बारे में उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को संयम बरतना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए प्रोटोकॉल का सम्मान करना चाहिए। आपसी समन्वय और संवाद से अधिकांश समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। वॉयस-07 प्रदेश में बढ़ते नशे के मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कृष्ण मिड्ढा ने कहा कि केवल सरकार और प्रशासन के प्रयासों से इस समस्या का पूर्ण समाधान संभव नहीं है। इसके लिए समाज और आम जनता का सहयोग भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए परिवार, शैक्षणिक संस्थान, सामाजिक संगठन और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा। वॉयस-08 विकास कार्यों के संबंध में उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के सभी क्षेत्रों में समान रूप से विकास कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा प्रत्येक विधायक को विकास कार्यों के लिए पांच-पांच करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं ताकि अपने-अपने क्षेत्रों में आवश्यक परियोजनाओं को गति दी जा सके। उन्होंने कहा कि पार्कों और सड़कों की स्थिति को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी नगर परिषदों की है और विकास कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीं है। बाइट- कृष्ण मिढ़ा, उपाध्यक्ष, विधासभा।
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करuक्षेत्र के ज्योतिसर में योग दिवस: मंत्री बेदी ने स्वस्थ रहने का संदेश दिया

Kurukshetra, Haryana:कुरुक्षेत्र :- कुरुक्षेत्र के ज्योतिसर में योग दिवस पर जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन, कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी ने योग कर स्वस्थ रहने का दिया संदेश। एक साथ हजारों की तादाद में लोगों ने किया योगा। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के ज्योतिसर तीर्थ ​स्थित महाभारत अनुभव केंद्र के प्रांगण में में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी ने ​शिरकत की। इस दौरान कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी ने योग के बारे में लोगों को जागरूक किया और लोगों के साथ योगाभ्यास कर योग को स्वस्थ जीवन की कुंजी बताया। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि योग न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करता है। उन्होंने सभी लोगों से अपनी दिनचर्या में योग को शामिल करने की अपील की। इस दौरान उपायुक्त और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने भी योगासन कर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। इस योग कार्यक्रम में युवाओं, महिलाओं, बुजर्गों और बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
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अजमेर शरीफ में मौहर्रम की रस्मों में जायरीन का विशाल जलसा

Ajmer, Rajasthan:अजमेर शरीफ में मुस्लिम इलाक़ा में हज़रत इमाम हुसैन रदियल्लाहो तआला अन्हो की याद में अक़ीदत मंद नियाजो नज़र के साथ सबिले सकीना भी सजा रहे है। एक तरफ जहां कर्बला की सरज़मी पर यज़ीदी फौज ने नवासा ऐ रसूल और उनके ख़ानदान समेत 72 लोगो को भूखा प्यासा रखा और रेगिस्तान में उन पर ज़ुल्मो सितम किया तो वही हज़रत इमाम हुसैन के आशिक़ अजमेर मुअल्ला में गली मोहल्लों में पानी की सबिले सजा रहे है। शोहदाये कर्बला के नाम पर भूखों को खाना और प्यासों को ठंडा पानी पिलाया जा रहा है। अजमेर दरगाह के ख़ुदामें ख्वाजा और ख़ादिम हाजी सैय्यद महफूज़ चिश्ती ने ज़ायरीन की सोहलियत के लिए ठंडे पानी की मशीन मुहैया कराई है। इसी तरह दरगाह और उसके आस पास भी लंगरे आम का अहतेमाम भी किया जा रहा है। अजमेर शरीफ में कसीर तादाद में ज़ायरीन पहुंचे हुए है और मौहर्रम की रस्म रिवायत में शिरकत कर रहे है। दरगाह इलाके में अलम का जुलूस, ताजिए की सवारी,डोले शरीफ़ का दीदार,हाईदोस की रस्म और मर्सिया ख़्वानी,मुशायरा वगैरे प्रोग्राम मुनअक़िद होते है।
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