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सैदपुर ब्लॉक प्रमुख के कार्यालय में मारपीट, सुरक्षा मांग के साथ योगी से मदद की अपील

Ghazipur, Uttar Pradesh:गाजीपुर सपा ब्लॉक प्रमुख की पिटाई, मुख्यमंत्री योगी से लगाई सुरक्षा की गुहार, एसपी सिटी ने की मारपीट की पुष्टि। सैदपुर ब्लॉक प्रमुख हीरा सिंह यादव के कार्यालय में घुसकर मारपीट, फायरिंग का भी आरोप, पुलिस जांच में जुटी सैदपुर ब्लॉक प्रमुख हीरा सिंह यादव के कार्यालय में घुसकर मारपीट का आरोप देवराज सिंह उर्फ ठाकुर सिंह, उनके पुत्र और समर्थकों पर गंभीर आरोप ब्लॉक प्रमुख ने फायरिंग की कोशिश और जान से मारने की धमकी का लगाया आरोप। दोनों ही सपा के समर्थक एसपी सिटी राकेश कुमार मिश्रा ने मौके पर पहुंचकर घटना की पुष्टि की, जांच शुरू
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साहिबगंज में संताल परगना पुलिस खेलकूद प्रतियोगिता का उद्घाटन DIG अम्बर लकड़ा ने किया

Sahibganj, Jharkhand:साहिबगंज में आज से तीन दिनों तक चलने वाला संताल परगना क्षेत्रीय पुलिस खेलकूद प्रतियोगिता का शुभारम्भ दुमका के डीआईजी अम्बर लकड़ा ने किया. इस प्रतियोगिता में संताल के सभी छह जिलों से पुलिस खिलाडी भाग ले रहे हैं. पहली बार पुलिस खेल में आउट दूर, इंडोर खेल के साथ साथ डे नाईट क्रिकेट मैच को भी शामिल किया गया. इस खेल को लेकर साहिबगंज के पुलिस लाइन मैदान में पूरी व्यवस्था की गई. जिसमे हर खेल के मनको को तय रखा हैं. डीआईजी अम्बर लकड़ा ने उद्घाटन सत्र में खिलाड़ियों को सम्बोधित करते हुए कहा खेल केवल आपकी शारीरिक दक्षता को ही नहीं बढ़ता बल्कि आपमें अनुशासन भी लाता हैं. इसलिए हर पुलिस जवान को फिजिकल गेम जरूर खेलना चाहिए. इससे आप चुस्त दुरुस्त रहेंगे. इस मौके पर उन्होंने ने सभी खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन की शुभकामनायें दिया. इससे पूर्व डीआईजी अम्बर लकड़ा, डीसी दीपक दुबे, एस पी अमित कुमार सिंह सहित सभी अतिथियों ने शहीद स्मारक पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया और कबूतर उड़ा कर गेम का शुरुआत किया. इस खेल में लॉन्ग जम्प, रिले दौड़, 1500 मीटर महिला दौड़, 1500 मीटर पुरुष दौड़, शॉट पुट पुरुष, शॉट पुट महिला सहित कई अन्य गेम को शामिल किया गया हैं.
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सुप्रीम कोर्ट ने दीपक प्रकाश की मंत्रीपद नियुक्ति पर नोटिस जारी किया

Patna, Bihar:बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की मंत्री के तौर पर दोबारा नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया कोर्ट ने बिहार सरकार, दीपक प्रकाश और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया। राकेश कुमार सिंह नाम के व्यक्ति की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि दीपक प्रकाश विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं और संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत गैर-विधायक को मंत्री पद पर बने रहने के लिए मिली छह महीने की छूट केवल एक बार के लिए होती है। दीपक प्रकाश की मंत्री पद पहली नियुक्ति की तारीख 20 नवंबर 2025 की हुई थी। इस लिहाज से मंत्री पद पर बने रहने के लिए विधायक /विधान परिषद सदस्य बनने की छह महीने की अवधि 20 मई 2026 को समाप्त हो जाती है। ऐसे में दोबारा नियुक्ति करके उन्हें अतिरिक्त समय देने की कोशिश की गई है। अब इसको लेकर RLM के प्रवक्ता राम पुकार सिन्हा ने कहा कि कोर्ट केस के मामले में अभी तक हम लोगों को कोई अधिकारिक जानकारी नहीं आई है। जब कोई अधिकारिक जानकारी आएगी तो हम मीडिया के भाइयों को सूचना देंगे कि मुझे क्या करना है हमारी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा क्या करेगी। यह मैटर जो है अभी ऑनरेबल सुप्रीम कोर्ट के अंतर्गत विचाराधीन है। कोर्ट ने अभी नोटिस जारी किया है यह कोई अंतिम फैसला तो अभी हुआ नहीं है। लेकिन एक बात तो सत्य है कि हमारी सरकार हमेशा ही चाहे वह निर्णय करे या काम करे, हमेशा संविधान और कानून के दायरे में ही रहकर के काम करती रही है। चूंकि ऑनरेबल कोर्ट ने जब नोटिस जारी किया है तो हमारी सरकार बिफोर द कोर्ट अपीयर होकर के अपने पक्ष को निश्चित रूप से रखेगी और जो तथ्य है जो सत्य है वह सबके सामने होंगे। चूंकि मैटर अभी अ बिफोर द बेंच बिफोर द कोर्ट सबजूडिस है, तो इस पर किसी भी तरह की टिप्पणी करना कहीं से भी उचित नहीं है और यह कोई अभी अंतिम फैसला नहीं इस पर हुआ है। RJD के प्रवक्ता ऐजाज अहमद ने कहा की नवंबर में उनको पहली बार बिना विधायक और विधानसभा परिषद का सदस्य हुए मंत्री बनाया गया था। लेकिन दोबारा मंत्रिमंडल में पुनः स्थान देकर के कहीं ना कहीं जो 164 (4) धारा है उसका वॉयलेशन करके इनको मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया है। बिहार सरकार जवाब दे कि 20 मई 2026 के बाद भी दीपक प्रकाश मंत्री कैसे बने हुए हैं। अब बिहार सरकार में बैठे हुए लोग इस बात का भी जवाब दें कि जनप्रतिनिधित्व कानून का उल्लंघन करके सरकार और सरकार में बैठे हुए लोग किस तरह की राजनीति कर रहे हैं। जिस तरह की राजनीति बिहार में चल रही है ऐसा लगता है कि बिहार में लोकतंत्र और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लोकतांत्रिक अधिकार को लोकतांत्रिक व्यवस्था को कहीं ना कहीं दीपक प्रकाश जैसे लोगों को राजनीतिक लाभ के लिए मंत्री बनाकर रखा गया है और इससे राजनीतिक लाभ लेने की मंशा स्पष्ट रूप से सरकार में बैठे हुए लोगों की दिख रही है। आखिर क्या कारण है कि 20 मई 2024 को ही उनकी समय सीमा जो जनप्रतिनिधित्व कानून 164 (4) के तहत है वो समाप्त हो गई है और उसके बाद भी वो मंत्रिमंडल में बने हुए हैं और उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जी कहते हैं कि अभी समय सीमा समाप्त नहीं हुआ है। तो इस तरह का जो राजनीति किया जा रहा है, इस तरह का जो जनप्रतिनिधित्व कानून का उल्लंघन किया जा रहा है, सरकार में बैठे हुए लोग और माननीय मुख्यमंत्री जी आप जवाब दीजिए बिहार की जनता और माननीय सर्वोच्च न्यायालय भी वो जवाब चाहती है जो जवाब आज तक बिहार सरकार नहीं दे पा रही है। एजाज अहमद प्रवक्ता RJD कॉंग्रेस प्रवक्ता स्नेहाशीष वर्धन ने कहा निश्चित तौर पर बिहार में संवैधानिक संकट उत्पन्न करने की कोशिश की गई है और कहीं ना कहीं लोकतंत्र की हत्या भी एनडीए के द्वारा की गई है। आखिर एक व्यक्ति जो किसी भी सदन का सदस्य नहीं है उसे मंत्री बना दिया जाता है, एक बार के बाद दोबारा बनाया जा रहा है तो कहीं ना कहीं ये निश्चित तौर पर स्पष्ट करता है कि बिहार में लोकतंत्र का चीर हरण करने की जो कवायद एनडीए ने की है वो उसका एग्जांपल है। ऐसे लोगों को मंत्री पद से दूर रखना चाहिए, हां भारतीय जनता पार्टी ने तो उनका हिसाब कर ही दिया, एमएलसी नहीं बनाया है। अब देखना है कि मंत्री रहते हैं या नहीं रहते हैं और कुशवाहा जी कितने दिन टिकते हैं इस एनडीए गठबंधन में।
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तीसरी संतान मामले में अशोक सिंह परिहार के विरुद्ध सेवा-रक्षा, अपील पर रोक

Singrauli, Madhya Pradesh:सिंगरौली ब्रेकिंग तीसरी संतान मामले में बर्खास्त उप पंजीयक को बड़ी राहत... अशोक सिंह परिहार की सेवा समाप्ति पर शासन ने लगाई रोक... अपील के बाद बर्खास्तगी आदेश हुआ स्थगित... 23 साल पुराने मामले में कार्रवाई पर अब लगा ब्रेक... अंतिम फैसला आने तक नौकरी से नहीं हटाए जाएंगे परिहार... दो-संतान नियम के मामले में नया मोड़, शासन ने दिया अंतरिम राहत... 11 जून का सेवा समाप्ति आदेश फिलहाल प्रभावहीन... उप मुख्यमंत्री के समक्ष अपील के बाद मिली बड़ी राहत... तीसरे संतान विवाद में अब अपील के फैसले पर टिकी निगाहें... बर्खास्तगी के चार दिन बाद शासन ने बदला रुख, आदेश पर रोक.... सिंगरौली....… मध्यप्रदेश सरकार के पंजीयन विभाग में पदस्थ सिंगरौली के उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार के तीसरी संतान मामले में नया मोड़ आ गया है। हाल ही में विभाग द्वारा उन्हें सेवा से बर्खास्त किये जाने के बाद अब मध्यप्रदेश शासन के वाणिज्यिक कर विभाग ने उनके सेवा समाप्ति आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। शासन ने स्पष्ट किया है कि अपील प्रकरण के अंतिम निराकरण तक बर्खास्तगी संबंधी आदेश प्रभावी नहीं रहेगा। गौरतलब है कि महा निरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, मध्यप्रदेश द्वारा जारी आदेश में विभागीय जांच के आधार पर अशोक सिंह परिहार को सेवा से पृथक कर दिया गया था। जांच में पाया गया है कि शासकीय सेवा में रहते हुए उनकी तीसरी संतान का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था, जो तत्कालीन दो-संतान नियम का उल्लंघन माना गया। सिंगरौली कलेक्टर द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट और विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद वर्ष 2025 में आरोप पत्र जारी किया गया तथा पूरी प्रक्रिया के बाद 11 जून 2026 को उनकी सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया गया। यह कार्रवाई उस समय चर्चा का विषय बन गई थी, क्योंकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 9 जून 2026 को दो-संतान नियम समाप्त करने की घोषणा करते हुए सामान्य प्रशासन विभाग को संबंधित प्रावधान हटाने के निर्देश दिए थे। ऐसे में 23 वर्ष पुराने मामले में दो दिन बाद हुई बर्खास्तगी को लेकर प्रशासनिक और कानूनी हलकों में सवाल उठने लगे थे। इसी बीच अशोक सिंह परिहार ने 15 जून 2026 को शासन के समक्ष अपील प्रस्तुत की। अपील में उन्होंने कहा कि तीसरे बच्चे के जन्म को आधार बनाकर उनकी सेवा समाप्त की गई है। इसके बाद वे वाणिज्यिक कर विभाग से संबंधित मामलों की सुनवाई कर रहे उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के समक्ष भी उपस्थित हुए। शासन द्वारा जारी नए आदेश में कहा गया है कि अपील प्रकरण के अंतिम निराकरण में समय लग सकता है तथा इस दौरान सेवा समाप्ति आदेश से अपूरणीय क्षति होने की संभावना है। इसी आधार पर महा निरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक द्वारा 11 जून 2026 को जारी सेवा समाप्ति आदेश को अंतिम निर्णय तक स्थगित कर दिया गया है। अब इस मामले पर सभी की निगाहें अपील के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि यह मामला न केवल दो-संतान नियम की व्याख्या बल्कि उसके समाप्त होने के बाद लंबित मामलों पर होने वाली कार्रवाई को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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