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BRD मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम विवाद: मरीज की मौत के बाद तीमारदारों-डॉक्टरों के बीच हिंसक झड़प

Gorakhpur, Uttar Pradesh:गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज से बड़ी खबर है जहाँ सड़क हादसे में घायल मरीज की मौत के बाद पोस्टमार्टम की मांग को लेकर तीमारदारों और जूनियर डॉक्टरों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मारपीट के आरोप लग रहे हैं। मरीज के साथ आए तीमारदारों का आरोप है कि पोस्टमार्टम कराने की मांग करने पर विवाद बढ़ा और इसके बाद वार्ड की गैलरी का चैनल गेट बंद कर दिया गया... और उनके साथ मारपीट की गई। मामला सिर्फ मारपीट के आरोपों तक सीमित नहीं है... सवाल यह भी है कि हादसे में घायल मरीज की मौत के बाद पोस्टमार्टम कराने की प्रक्रिया में आखिर देरी क्यों हुई? घटना के बाद BRD मेडिकल कॉलेज में हंगामा चलता रहा। पुलिस पहुंची तो मामला शांत कराया गया। अब मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। घटना की शुरुआत: पूूरा मामला BRD मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन इमरजेंसी वार्ड नंबर-11 का है। संतकबीरनगर के तेनुहारी सोयम गांव के रहने वाले 45 वर्षीय उमाकांत चौधरी 3 अक्टूबर को सड़क हादसे में घायल हुए थे। हादसे के बाद उन्हें इलाज के लिए BRD मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। सिर में चोट होने के चलते उनका इलाज चल रहा था। लेकिन मंगलवार रात करीब 12 बजे इलाज के दौरान उमाकांत चौधरी की मौत हो गई। जिसके बाद यहीं से शुरू हुआ विवाद... डेथ सर्टिफिकेट और पोस्टमार्टम पर विवाद: परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद जूनियर डॉक्टरों ने मौत का कारण ब्रेन स्ट्रोक बताते हुए डेथ सर्टिफिकेट जारी किया और शव घर ले जाने के लिए कहा। लेकिन परिजनों का कहना था कि उमाकांत की हालत सड़क हादसे में घायल होने के बाद बिगड़ी थी और इलाज के दौरान उनकी मौत हुई है। ऐसे में परिजन पोस्टमार्टम कराने की मांग पर अड़ गए। इसी मांग को लेकर तीमारदारों और जूनियर डॉक्टरों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया। गेट बंद कर मारपीट का आरोप: तीमारदारों का आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद वार्ड नंबर-11 की गैलरी का चैनल गेट बंद कर दिया गया। आरोप है कि इसके बाद जूनियर डॉक्टरों ने तीमारदारों के साथ मारपीट की। परिजनों ने मेडिकल कॉलेज में तैनात गार्डों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि घटना के समय गार्ड मौजूद थे, लेकिन उन्होंने कथित मारपीट रोकने के लिए प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी प्रसारित हो रहा है। हालांकि जी मीडिया वायरल वीडियो में लगाए जाने वाले आरोपों की पुष्टि नहीं करता है। वीडियो में दिखाई दे रही परिस्थितियों और उसमें शामिल लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही साफ हो सकेगी। देर रात से सुबह तक चलता रहा हंगामा। घटना के बाद मेडिकल कॉलेज परिसर में काफी देर तक हंगामा चलता रहा। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया। लेकिन पोस्टमार्टम को लेकर विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। बताया गया कि शुरुआत में पोस्टमार्टम के लिए जरूरी पुलिस मेमो मेडिकल कॉलेज की ओर से पुलिस को नहीं भेजा गया था। इसके बाद बुधवार सुबह परिजन दोबारा वार्ड में पहुंचे और पोस्टमार्टम कराने की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मेडिकल कॉलेज की ओर से मेमो तैयार कर गुलरिहा पुलिस को भेजा गया। इसके बाद शव को मर्चरी भेजा गया और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू हो सकी। अब जांच कमेटी करेगी पूरे मामले की पड़ताल: घटना की शिकायत लेकर परिजन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र कुमार के पास पहुंचे। शिकायत के बाद प्राचार्य ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी है। कमेटी में प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अशोक यादव समेत अन्य अधिकारी शामिल हैं। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। यानी अब जांच में कई सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे—क्या तीमारदारों के साथ वास्तव में मारपीट हुई? अगर हुई तो मारपीट में कौन-कौन शामिल था? वार्ड का चैनल गेट क्यों बंद किया गया? क्या पोस्टमार्टम की मांग को लेकर परिजनों के साथ गलत व्यवहार हुआ? और सबसे अहम... सड़क हादसे में घायल मरीज की मौत के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में देरी आखिर क्यों हुई? BRD मेडिकल कॉलेज में हुई इस घटना ने इलाज और मरीज की मौत के बाद अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ परिजन डॉक्टरों पर मारपीट का आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी तरफ मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने जांच कमेटी गठित कर मामले की सच्चाई सामने लाने की बात कही है। अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर हैं... क्योंकि सवाल सिर्फ एक परिवार के हंगामे का नहीं है, बल्कि सवाल यह भी है कि मरीज की मौत के बाद उसके परिजनों की आशंकाओं और पोस्टमार्टम की मांग को लेकर अस्पताल में पूरी प्रक्रिया आखिर कितनी पारदर्शी रही?
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हरदा के निजी अस्पताल में नवजात की मौत, लापरवाही के आरोप

Harda, Khedi Mahmudabad, Madhya Pradesh:हरदा के निजी अस्पताल में नवजात की मौत, परिजनों ने लगाए इलाज में लापरवाही के आरोप हरदा_शहर के निजी बघेल हॉस्पिटल में एक नवजात के इलाज के दौरान कथित लापरवाही का मामला सामने आया है। नवजात की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे इलाज के लिए इंदौर रेफर किया गया, जहां उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि नवजात को बघेल हॉस्पिटल में करीब चार दिनों तक भर्ती रखकर इलाज किया गया। इस दौरान उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। बाद में अस्पताल प्रबंधन ने नवजात को इंदौर रेफर किया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। नवजात की मौत के बाद परिजनों ने निजी अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामले की शिकायत सिटी कोतवाली थाने में की है। शिकायतकर्ता अंकित जैन ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।मामले में पुलिस द्वारा शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है। बाइट 01 अंकित जैन, शिकायतकर्ता बाइट 02 रोशन लाल भारती,टीआई
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सूरजपुर माँ-बेटी हत्याकांड: मुख्य आरोपी कुलदीप समेत 3 को फांसी, एक को अंतिम सांस तक उम्रकैद

Surajpur, Chhattisgarh:Surajpur Double Murder: Special Court Sentences Prime Accused Kuldeep and 2 Others to Death, 1 Gets Life Term छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में हेड कॉन्स्टेबल की पत्नी और बेटी की नृशंस हत्या के मामले में स्पेशल कोर्ट ने सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत तीन दोषियों को फांसी की सजा दी है, जबकि चौथे आरोपी आर्यन विश्वकर्मा को अंतिम सांस तक उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। 14 अक्टूबर 2024 को आरोपियों ने बर्बरता की हदें पार करते हुए रेप के बाद दोनों की धारदार हथियारों से हत्या कर नग्न शव दूर फेंक दिए थे। 29 सितंबर को कोर्ट ने चारों को हत्या, रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी करार दिया था।
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