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AKAtul KumarJust now

मैनपुरी के ग्रामीणों को नदी पार के लिए अस्थाई नाव से स्थायी पुल चाहिए: 2000 बीघा जमीन दांव पर

Mainpuri, Uttar Pradesh:79 साल बाद भी नाव के सहारे जिंदगी! 2000 बीघा खेतों तक पहुंचने के लिए रोज नदी पार करते ग्रामीण आजादी के बाद से अब तक ग्रामीण एक नदी को पार करने के लिए नाव के सहारे हैं। नदी के दूसरी तरफ ग्रामीणों की करीब 2000 बीघा खेती है, जहां रोजाना किसानों को आना-जाना पड़ता है। हालात ये हैं कि जिस नाव से ग्रामीण नदी पार करते हैं, उसकी हालत भी बेहद खराब है। कई बार हादसे हो चुके हैं, बच्चे नदी में डूब चुके हैं और उन्हें किसी तरह बचाया गया। बावजूद इसके आज तक नदी पर पुल नहीं बन सका। अब ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर जिम्मेदारों से पुल निर्माण की मांग उठाई है। तस्वीर मैनपुरी के विकास खंड किशनी के ग्राम परतापुर की है और ये तस्वीर उस व्यवस्था की है, जहां आजादी के दशकों बाद भी ग्रामीणों की जिंदगी नदी के भरोसे है। नदी पार करने के लिए ग्रामीणों के पास एक नाव का ही सहारा है। ग्रामीणों का आरोप है कि नाव की हालत बेहद खराब है, बावजूद इसके मजबूरी में इसी नाव से नदी पार करनी पड़ती है। इतना ही नहीं, नाव से नदी पार करने के बदले एक सीजन में हर ग्रामीण को करीब 20 किलो अनाज भी देना पड़ता है। सबसे बड़ी चिंता बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर है। नदी पार करते समय हर वक्त हादसे का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों के मुताबिक कई बार बच्चे नदी में डूब चुके हैं। किसी तरह उन्हें बाहर निकाला गया और कुछ मामलों में अस्पताल तक भर्ती कराना पड़ा। इसके बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण के लिए कई बार अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक गुहार लगाई गई है। यहां तक कि सांसद के सामने भी पुल बनवाने की मांग रखी गई, लेकिन सालों गुजर गए और नदी पर पुल नहीं बन सका। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन नदी के उस पार है, लेकिन वहां पहुंचने के लिए आज भी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। बारिश और नदी का जलस्तर बढ़ने के दौरान खतरा और बढ़ जाता है। अब ग्रामीण प्रदर्शन कर साफ कह रहे हैं कि उन्हें जर्जर नाव नहीं, नदी पर एक स्थायी पुल चाहिए। सवाल ये है कि जब ग्रामीणों की करीब 2000 बीघा खेती नदी के उस पार है और रोजाना उन्हें नदी पार करनी पड़ती है, तो आखिर कब तक नाव के सहारे जिंदगी चलती रहेगी? हादसों के बावजूद आखिर नदी पर पुल कब बनेगा?
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बहराइच में अधिशासी अभियंता के भ्रष्टाचार के खिलाफ सिविल डिप्लोमा इंजीनियर संघ का ज्ञापन प्रदर्शन

Bite, Kebbi:बहराइच. सिविल डिप्लोमा इंजीनियर संघ, देवीपाटन मंडल गोंडा के बैनर तले इंजीनियरों ने अधिशासी अभियंता के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ के मंडल अध्यक्ष हंसराज के नेतृत्व में चल रहे संघर्ष कार्यक्रम के पांचवें दिन जोरदार प्रदर्शन करते हुए ज्ञापन सौंपा गया। संघ का मुख्य आरोप है कि सिंचाई निर्माण खंड सिद्धार्थनगर में तैनात अधिशासी अभियंता सतीश कुमार विभागीय आदेशों की लगातार अवहेलना कर रहे हैं और भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। इसके साथ ही मंडल में कार्यरत पदाधिकारियों व कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किए जाने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है। अध्यक्ष हंसराज ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आरोपी अधिशासी अभियंता के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो पूरा प्रांत चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। इस प्रदर्शन में संघ से जुड़े कई प्रमुख अभियंता और पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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IAImran AjijJust now

बगहा में विजय सहनी हत्या: अशोक यादव को आजीवन कारावास

Bagaha, Bihar:बगहा से आ रही है जहाँ रामनगर के चर्चित विजय सहनी हत्याकांड में अदालत ने शुक्रवार को दोषसिद्ध मुख्य अभियुक्त अशोक यादव को उम्र कैद की सजा सुनाई। जिला अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने अशोक यादव को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड समेत धारा 201 के तहत सात वर्ष सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा का एलान किया। अर्थदंड का भुगतान नहीं करने पर दोनों धाराओं में अलग-अलग छह माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। अदालत ने जेल में बिताई गई अवधि को सजा की अवधि में समायोजित करने का आदेश दिया है। दरअसल पूरा मामला रामनगर थाना कांड संख्या 189/2022 से जुड़ा है। घटना एक मई 2022 की है। ज़ब मृतक विजय सहनी की पत्नी आशा देवी ने चार मई को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अभियोजन के मुताबिक विजय सहनी को पोखरा विवाद सुलझाने के बहाने फोन कर बुलाया गया। वह बाइक से घर से निकले लेकिन वापस घर नहीं लौटे। लिहाजा परिजनों ने काफी तलाश के बाद पुलिस को सूचना दी। बताने जा रहा है की साजिशन हत्या की इस घटना के करीब सात दिन बाद आरोपी महफूज अंसारी और तेतर राम की निशानदेही पर गोवर्धना जंगल में एक गड्ढे से विजय सहनी का शव बरामद किया गया। शव की पहचान अंगूठी और घड़ी से की गईं। जांच के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। एपीपी जीतेन्द्र भारती के मुताबिक अभियोजन पक्ष ने 10 गवाहों को कोर्ट में पेश किया। इनमें मृतक की पत्नी आशा देवी, बेटे राहुल कुमार सहनी, चिकित्सक डॉ. विनय कुमार और अनुसंधानकर्ता संतोष कुमार जायसवाल प्रमुख थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट, कॉल डिटेल, मोबाइल और बाइक समेत अन्य साक्ष्यों को भी अदालत के समक्ष रखा गया। यहीं वजह है की आज कोर्ट ने अपना अहम फैसला सुनाते हुए सम्पत्ति की लालच में कलयुगी बहन द्वारा प्रेमी संग साज़िश कर भाई की निर्मम हत्या मामले में आजीवन कारावास और एक लाख जुर्माना देने का आदेश पारित किया है। बयां दें की गत पांच सितंबर को इसी मामले में हत्या कांड में शामिल महफूज अंसारी, राजकिशोर महतो, तेतर राम उर्फ साधु, श्री मुशहर और गीता देवी को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। एपीपी जितेंद्र भारती ने बताया की संपत्ति की लालच में गीता देवी ने अपने भाई विजय सहनी के हत्या की साजिश रची थी लिहाजा न्यायालय का फैसला वैसे अपराधियों के लिए सबक होगा जो लोग कानून को हाथ में लेकर किसी घटना को अंजाम देते हैं। बाइट - जीतेन्द्र भारती, एपीपी, सिविल कोर्ट बगहा
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वाराणसी में ईवीएम की स्टेप: UP के चुनाव आयुक्त ने FLC वर्कशॉप की तैयारी बताई

Noida, Uttar Pradesh:वाराणसी: UP के चीफ इलेक्शन कमिश्नर, नवदीप रिनवा ने कहा, "हम कह सकते हैं कि आज उत्तर प्रदेश में आने वाले असेंबली इलेक्शन के लिए हमारी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की तैयारी का पहला स्टेप है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के छह डिविजन से डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर्स को FLC वर्कशॉप के लिए वाराणसी बुलाया गया है... हमारे BL इंजीनियर्स इस पूरे प्रोसेस को देखते हैं, और मान्यता प्राप्त पॉलिटिकल पार्टियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है... मशीनों सहित पूरे प्रोसेस को भी समझाया जाता है, और यह सुनिश्चित किया जाता है कि लोग हर तरह से संतुष्ट हों कि आने वाले इलेक्शन में इस्तेमाल होने वाली मशीनें ठीक से काम कर रही हैं... इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के निर्देशों का अक्षरशः पालन किया जाएगा, और जब यह FLC होगी, तो दूसरे राज्यों के ऑफिसर्स भी वहां मौजूद रहेंगे... डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर हर दिन एक FLC सुपरवाइजर, जो एक सीनियर लेवल का ऑफिसर होता है, के ज़रिए FLC प्रोसेस को मॉनिटर करते हैं, लेकिन डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर हर दिन यह देखने के लिए भी विजिट करते हैं कि कोई गलती तो नहीं हो रही है..."
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सीतापुर में अतिक्रमण हटाने के बाद तनाव बढ़ा; मंत्री राठौर के समर्थक हिरासत पर बयान

Noida, Uttar Pradesh:सीतापुर, उत्तर प्रदेश: रम्पा महल-वल्दा रोड पर सड़क चौड़ी करने और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुए झगड़े के बाद सीतापुर में तनाव बढ़ गया। शहरी विकास राज्य मंत्री राकेश राठौर 'गुरु' हिरासत में लिए गए बीजेपी कार्यकर्ताओं के समर्थन में गुरुवार देर रात कोतवाली पुलिस स्टेशन पहुंचे। सीतापुर, UP: राज्य मंत्री राकेश राठौर 'गुरु' ने कहा, "मैंने हमेशा इस समुदाय के लिए बिना किसी भेदभाव के काम किया है, लेकिन मुझे बहुत दुख हुआ: अगर पार्टी का कार्यकर्ता सुरक्षित नहीं है, तो संघर्ष का क्या मतलब है?... एक माफिया, जिसके खिलाफ करीब 32 केस हैं, उसे पावर का पद दिया गया...यह पार्टी कार्यकर्ता की इज्जत का मामला है। मैं उस इज्जत की खातिर यहां हूं... रजिस्ट्री ऑफिस के रिकॉर्ड देखो; जांचो कि इतनी बड़ी रकम कहां से आई और कहां गई...मैं पार्टी कार्यकर्ता की तरफ से माफी मांगता हूं शायद वह बस किसी को हटने के लिए कह रहा था। हालांकि उसे अपने कामों के लिए नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं, लेकिन इससे माफिया को पावर सौंपना सही नहीं है..."
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