- Your PIN
- Trending
- Following
816109
बरहरवा में 174 चोरी के मोबाइल के साथ दो गिरफ्तार, कीमत लगभग 58 लाख
Sahibganj, Jharkhand:मालदा रेल मण्डल और साहिबगंज जिला के बरहरवा आरपीएफ ने गुप्त सूचना के आधार पर वनांचल एक्सप्रेस ट्रेन के जनरल कोच से करीब 174 चोरी के मोबाइल के साथ दो लोगों को गिरफ्तार किया। मोबाइल फोन की अनुमानित कीमत लगभग 58,95,878 रुपये बताई जा रही है। सूचना के आधार पर आरपीएफ पोस्ट बरहरवा के इंस्पेक्टर संजीव कुमार के नेतृत्व में आरपीएफ टीम ने गुमानी स्टेशन से बरहरवा रेलवे स्टेशन तक विशेष जांच अभियान चलाया गया। जांच के दौरान जनरल कोच संख्या ER-104464 में दो संदिग्ध व्यक्ति पिट्ठू बैग के साथ पाए गए। छापामारी दल को देखकर दोनों चलती ट्रेन से उतरने का प्रयास करने लगे, जिन्हें आरपीएफ ने धर दबोचा। पूछताछ में दोनों ने अपना पहचान मोहम्मद नासरुद्दीन शेख (28 वर्ष) एवं मोहम्मद रहमत शेख (23 वर्ष), दोनों निवासी कलियाचक, जिला मालदा (पश्चिम बंगाल) का बताया। बरहरवा स्टेशन पर दोनों के बैगों की तलाशी लेने पर कुल 174 पुराने एवं प्रयुक्त एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए गए। इनमें से 85 मोबाइल फोन मोहम्मद नासरुद्दीन शेख तथा 89 मोबाइल फोन मोहम्मद रहमत शेख के कब्जे से प्राप्त हुए। बरामद मोबाइल का अनुमानित बाजार मूल्य ₹58,95,878/- (अट्ठावन लाख पचानवे हजार आठ सौ अठहत्तर रुपये) आंका गया है। दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।0
0
Report
SC ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर दखल से इनकार: अब विकल्प क्या हैं?
Noida, Uttar Pradesh:मीनाक्षी नटराजन की याचिका SC ने क्यों खारिज की? अब उनके पास क्या विकल्प हैं? राज्य सभा चुनाव में निर्वाचन अधिकारी की ओर से नामांकन रद्द करने के खिलाफ मीनाक्षी नटराजन की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से इंकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता चाहे तो हाई कोर्ट में इलेक्शन पिटिशन दाखिल कर सकती है सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में यह साफ है कि चुनावी प्रकिया के बीच में कोर्ट सीधे दखल नहीं दे सकता। ऐसे मामलो में इलेक्शन पिटिशन ही एककमात्र विकल्प है सिंघवी ने केस को अपवाद बताया, कोर्ट के दखल की मांग की मीनाक्षी नटराजन की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अपनी दलीलों के ज़रिये पूरी कोशिश की कि कोर्ट दखल दे दे। सिंघवी ने कहा कि इस मामले में नामांकन खारिज करने के निर्वाचन अधिकारी के आदेश में साफ तौर पर गंभीर खामी नज़र आती है। अधिकारी का आदेश पूरी तरह मनमाना है। ऐसे असाधारण मामलों में अपवादस्वरूप कोर्ट दखल दे सकता है। SC ने दखल देने से इंकार किया सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को नामंजूर करते हुए कहा कि यदि हम आपकी दलील को स्वीकार कर यह तय करने लगें कि कौन-सा नामांकन खारिज होना 'बहुत गलत' है जिसमें कोर्ट सीधे सुनवाई करें और कौन-सा 'कम गलत' जिसमे इलेक्शन पिटिशन दाखिल की जाए तो यह आर्टिल 329 में ऐसी व्यवस्था जोड़ना जो संविधान में लिखी ही नहीं है। क्या कहता है आर्टिकल 329 आर्टिकल 329 बी के तहत दरअसल यह प्रावधान है कि कि चुनाव प्रकिया पूरा होने से पहले अदालत चुनावी प्रक्रिया में दखल नहीं देगी। अगर किसी को चुनाव से शिकायत है, तो चुनाव खत्म होने के बाद केवल इलेक्शन पिटिशनके जरिए चुनौती दी जा सकती है。 क्यों खारिज हुआ मीनाक्षी नटराजन का नामांकन मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उन्होंने अपने नामांकन पत्र में तेलंगाना में लंबित एक आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई है। यह फैसला भाजपा नेताओं बीजेपी नेताजी महेश केवट और राहुल कोठारी की आपत्ति के मद्देनजर दिया था。 निजी शिकायत का खुलासा करना ज़रूरी नहीं- सिंघवी सिंघवी ने कहा कि कोर्ट ने सिर्फ निजी शिकायत पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 के तहत नोटिस जारी कर मीनाक्षी नटराजन से जवाब मांगा था। इस केस में कोर्ट ने संज्ञान नहीं लिया था। कोर्ट ने आरोप तय नहीं किए थे। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33A के तहत केवल उन्हीं आपराधिक मामलों की जानकारी देना जरूरी है, जिनमें कोर्ट ने आरोप तय किया हो।नटराजन के खिलाफ अभी कोई आपराधिक मामला कानूनी रूप से लंबित नहीं है। संज्ञान लेने से पहले जारी किया गया कोर्ट का नोटिस किसी 'लंबित आपराधिक मामले' के बराबर नहीं माना जा सकता।इसलिए इसका खुलासा करना क़ानूनन ज़रूरी नहीं था। बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट के वकील की दलील बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट की ओर से वकील मुकुल रोहतगी और चुनाव आयोग की ओर से वकील डीएस नायडू ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका का विरोध किया। मुकुल रोहतगी ने कहा कि चुनाव लड़ने का अधिकार कोई मूल अधिकार नहीं है। इसलिए मूल अधिकार के हनन का हवाला देते हुए आर्टिकल 32 के तहत यह याचिका सुनवाई लायक नहीं है। इस तरह के मामलों में सिर्फ इलेक्शन पिटिशन के ज़रिए ही चुनाव को चुनौती दी जा सकती है। रोहतगी ने आरोप लगाया कि नटराजन ने जानबूझ कर जानकारी को छिपाया, वह जानती थी कि उनके खिलाफ निजी शिकायत लंबित है। इस लिहाज से उनका नामांकन रद्द होना सही है आयोग के वकील की दलील चुनाव आयोग के वकील डीएस नायडू ने कहा कि जनप्रतिनिधत्व अधिनियम के सेक्शन 100 C में साफतौर पर इस बात का उल्लेख है कि नामांकन खारिज होने के बाद इलेक्शन पिटिशन ही दायर की जा सकती है, चुनाव आयोग इसमे दखल नहीं दे सकता है।नायडू ने कहा कि निर्वाचन अधिकारी ने नामांकन गलत तरीके से खारिज किया या नहीं, इसका फैसला चुनाव याचिका के जरिए हाई कोर्ट में होना चाहिए।आयोग हाईकोर्ट के अधिकार में दखल नहीं दे सकता। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने कानून के अनुसार ही चुनाव का परिणाम घोषित किया。0
0
Report
182148
ग्लोबल कश्मीरी पंडित टूर के साथ घाटी में वापसी की उम्मीदें जगीं
Chaka, EXCLUSIVE REPORT PANDITS TOUR TO OTHER PLACES SHOTS ARE ATTACHED TO 2C APP. 36 साल बाद 'ग्लोबल कश्मीरी पंडित हेरिटेज टूर एंड कॉन्क्लेव 2026' के तहत पहली बार कश्मीरी पंडितों का एक दल कश्मीर के दौरे पर है। इसका मकसद दुनिया भर में रह रहे कश्मीरी पंडितों को उनकी मातृभूमि से फिर से जोड़ना और उनकी वापसी के रास्ते खोजना। कश्मीरी पंडितों का एक दल अभी कश्मीर घाटी के दौरे पर है, ताकि ज़मीनी हालात का जायज़ा लिया जा सके और यह पता लगाया जा सके कि क्या हालात उनके पुश्तैनी घरों में लौटने के लिए अनुकूल हैं। आयोजकों का मानना है कि यह दौरा यादों, जुड़ाव और फिर से शुरुआत करने का एक भावनात्मक और ऐतिहासिक सफर है, साथ ही यह कश्मीरी पंडितों की अपनी मातृभूमि में वापसी के लिए एक रोडमैप भी तैयार कर रहा है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्य दुनिया के अलग-अलग हिस्सों, जैसे अमेरिका, यूरोप के देशों और भारत के विभिन्न इलाकों से आए हैं। इनमें से ज्यादातर लोग पिछले 36 सालों میں पहली बार घाटी लौट हैं। प्रतिनिधিমंडल कश्मीर के अलग-अलग इलाकों में जमीनी स्तर पर सर्वे कर रहा है। यह प्रतिनिधिमंडल घाटी के मौजूदा हालात के बारे में अपनी जानकारी जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल और मुख्यमंत्री को देंगे। प्रतिनिधिमंडल श्रीनगर में दो दिन के सम्मेलन में भी हिस्सा लेगा, जिसमें कश्मीरी पंडित समुदाय की वापसी और पुनर्वास की संभावनाओं पर चर्चा होगी। सम्मेलन के बाद, प्रतिनिधिमंडल अपनी जानकारी और सुझावों को इकट्ठा करेगा और प्रधानमंत्री व केंद्रीय गृह मंत्री को इसकी जानकारी देगा। उम्मीद है कि उनकी रिपोर्ट में मुख्य चिंताओं, सुझावों और कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी को आसान बनाने के संभावित उपायों का जिक्र होगा। इस दौरे में शामिल कश्मीरी पंडित समुदाय के सदस्यों ने मौजूदा हालात को लेकर उम्मीद जताई है और कहा है कि वापसी के लिए माहौल अनुकूल लग रहा है। इस दौरे के दौरान, प्रतिनिधिमंडल ने प्रतिभागी ऐतिहासिक तीर्थ स्थलों जैसे मंदिरों और शक्तिपीठों का दौरा किया। इनमें मार्तंड मंदिर, खीर भवानी, शारदा पीठ और ज़ीठशा देवी मंदिर शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि वापसी की किसी भी प्रक्रिया की सफलता काफी हद तक कश्मीर घाटी की बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी के समर्थन और स्वीकार्यता पर निर्भर करेगी, और साथ ही इस बात पर भी निर्भर है कि सरकार उन्हें कश्मीर में किस तरह की सुरक्षा प्रदान करती है। बाइट 'ग्लोबल कश्मीरी पंडित हेरिटेज टूर एंड कॉन्क्लेव' के सदस्य अशोकधर ने कहा, "इस प्रतिनिधिमंडल में वे लोग शामिल हैं जो पलायन के बाद कभी अपने घर नहीं लौट पाए क्योंकि उन्हें लौटने से डर लगता था। वे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों, जैसे अमेरिका से आए हैं। आज, उनमें से कई लोगों ने दशकों बाद पहली बार अपने घर देखे और वे अपने आँसू नहीं रोक पाए। हमने उन्हें हिम्मत देने की कोशिश की है, लेकिन आखिरकार कश्मीर के लोग ही उनकी वापसी सुनिश्चित करने में सबसे अहम भूमिका निभाएंगे।" "आज हालात अच्छे हैं, और अब यह कश्मीर के लोगों पर है कि वे समुदायों के बीच पहले रहे रिश्तों को फिर से बनाने में मदद करें। हमें उस दौर में वापस जाने की ज़रूरत है जब हम मिल-जुलकर रहते थे”। तीन दशक से जियादा समय के बाद घाटी में लौटने पर बचपन, दोस्ती और कश्मीर के अलग-अलग धार्मिक समूहों के बीच पहले रहे आपसी भाईचारे की यादें ताजा हो गईं। बाइट कश्मीरी पंडित समुदाय के एक सदस्य ने कहा, "मैंने अपना पूरा बचपन यहीं बिताया है, और मुझे हर दिन कश्मीर की याद आती है। पहले हमें वापस आने में डर लगता था, लेकिन इस बार हमने हालात में काफी सुधार देखा है। हमारी जड़ें यहीं हैं। अगर मैं और बोलूंगा तो भावुक हो जाऊंगा। मैं प्रार्थना करता हूं कि एक दिन हम अपने घरों में वापस आ सकें और फिर से यहीं रह सकें। जहां हम अभी रहते हैं, वहां हमारे पास सब कुछ है, लेकिन वह सुकून नहीं है जो अपनी मातृभूमि से जुड़े रहने से मिलता है। यहाँ मेरे ज़्यादातर दोस्त मुसलमान थे, और हमारे बीच बहुत एकता थी। हम सरकार से अपील करते हैं कि वे ऐसे कदम उठाएं जिनसे हमारी वापसी में मदद मिले। हम यहां वैसे ही रहना चाहते हैं जैसे पहले रहते थे, अपने साथी कश्मीरियों के साथ।" कश्मीरी पंडित प्रतिनिधिमंडल की दो और बाइट्स। श्रीनगर के SKICC में होने वाली प्रतिनिधिमंडल की कॉन्फ्रेंस में कश्मीरी पंडितों की विरासत को बचाने और उनकी भविष्य की पहचान के लिए इसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के तरीकों पर चर्चा और बहस की जाएगी। इन चर्चाओं से कश्मीरी पंडितों की अपनी मातृभूमि में लंबे समय से प्रतीक्षित वापसी और पुनर्वास के बारे में चल रही बातचीत में मदद मिलने की संभावना है। WT खालिद हुसैन गोपीनाथ आश्रम से, जहां प्रतिनिधिमंडल ने दौरा किया। बातचीत और आपसी समझ के लिए मुख्यधारा के राजनीतिक नेताओं और कश्मीरी मुस्लिम व सिख सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है। यह कॉन्फ्रेंस 13 और 14 जून को श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में आयोजित की जाएगी। खालिद हुसैन जी मीडिया कश्मीर0
0
Report
Advertisement
आंत स्वस्थ हो तो शरीर स्वस्थ: विशेषज्ञ से Gut Health के रहस्य
Delhi, Delhi:Gastroenterologist Questions- Dr Manish C Kak chairman & Head lever and digestive Sciences Yashoda hospital Kaha jata hai ki agar gut healthy hai to body healthy hai esa kyu? Mind or gut kya kya connection hai? Gut health khrab hone se body me kis tarah ke changes aa sakte hai? Gut ko kese healthy rakha jaye? Kya gut humari feelings ko prabhavit karta hai? Gut health ko lekr kya miss conceptions hai? Gut health kharab hone ke kya symptoms hote hai? Agar gut healthy nhi hai to mind ko kis tarah ke severe problems face karni pad sakti hai?0
0
Report
