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Vishesh Kr GurejaVishesh Kr GurejaFollow2h ago

सहारनपुर विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष सूरज पटेल ने दिखाई अपनी तपिश,कई कोचिंग सेंटर किए सील।

Saharanpur, Uttar Pradesh:सहारनपुर।* लखनऊ के अलीगंज मे एक कोचिंग सेंटर लाइब्रेरी मे लगी भीषण आग और उसमें छात्रों की दुखद मृत्यु के बाद सहारनपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष सूरज पटेल ने भी दिखाई अपनी तपिश। इस हादसे से सबक लेते हुए सहारनपुर प्राधिकरण ने शहर के विभिन्न जोनों में अवैध और असुरक्षित रूप से संचालित हो रहे कोचिंग सेंटरों और लाइब्रेरियों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है। इसी क्रम में, नियमों को ताक पर रखकर बिना स्वीकृत मानचित्र और बिना मुख्य अग्निशमन अधिकारी से फायर एनओसी प्राप्त किए चल रहे परिसरों पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। जोन-4 के अंतर्गत हाथी गेट वाली गली, गिल कॉलोनी मे आदित्य सिंह के परिसर की दूसरी मंजिल पर चल रहे एक कोचिंग सेंटर को पूरी तरह सील कर दिया गया। प्राधिकरण के अनुसार, यह सेंटर सुरक्षा मानकों को पूरा किए बिना और पर्याप्त अग्निशामक यंत्रों के बिना चलाया जा रहा था। विकास प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि छात्रों की जान से खिलवाड़ करने वाले ऐसे किसी भी अवैध संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा।
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व्यापमं घोटाले के लिए जीआरएमसी में MBBS डिग्री बिना प्रक्रिया के देने के आरोप

Morena, Madhya Pradesh:व्यापमं घोटाले की परतें एक बार फिर खुलती नजर आ रही हैं। ग्वालियर की जीवाजी विश्वविद्यालय और गजराराजा मेडिकल कॉलेज यानी जीआरएमसी में बड़ा आरोप सामने आया है। आरोप है कि व्यापमं कांड में बर्खास्त किए गए कुछ छात्रों को बिना बहाली, बिना अटेंडेंस और बिना परीक्षा दिए ही MBBS की डिग्री दे दी गई। इतना ही नहीं, 16-16 लाख रुपये लेकर डिग्री देने के आरोपों वाला एक ऑडियो भी सामने आया है। शिकायत के बाद अब कॉलेज प्रशासन और जीवाजी यूनिवर्सिटी मामले की जांच की बात कह रहे हैं। ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस डिग्री वितरण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। व्यापमं कांड में बर्खास्त पूर्व छात्र संदीप लहारिया ने राज्यपाल, जीवाजी यूनिवर्सिटी और जीआरएमसी प्रबंधन को लिखित शिकायत देकर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि व्यापमं फर्जीवाड़े में बर्खास्त किए गए कुछ छात्रों को नियमों को ताक पर रखकर एमबीबीएस की डिग्री जारी कर दी गई। गौरतलब है कि साल 2006 से 2010 के बीच व्यापमं फर्जीवाड़े से जुड़े करीब 150 छात्रों पर एफआईआर दर्ज की गई थी। इनमें 30 से 35 एमबीबीएस छात्रों को संदिग्ध मानते हुए जांच के दायरे में लिया गया था। बाद में वर्ष 2017 में गठित न्यू हाई पावर एक्शन कमेटी ने जांच के आधार पर 30 से अधिक छात्रों को बर्खास्त कर दिया था। उस समिति के अध्यक्ष डॉ. एस.एन. आयंगर थे, जिनका अब निधन हो चुका है। वहीं पूरा मामला अभी भी सीबीआई कोर्ट में लंबित है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि छात्र शाखा यूजी के प्रभारी प्रशांत चतुर्वेदी और उनके सहायक पंकज कुशवाह ने नियमों की अनदेखी करते हुए बर्खास्त छात्रों को डिग्री दिलाने में भूमिका निभाई। मामले से जुड़ा एक ऑडियो भी सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर 16-16 लाख रुपये लेकर डिग्री दिलाने के आरोपों की चर्चा सुनाई दे रही है। संदीप लहारिया का दावा है कि उनके पास कई ऑडियो और वीडियो सबूत मौजूद हैं, जो पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा कर सकते हैं। शिकायत में जीवाजी यूनिवर्सिटी के कुछ अधिकारियों और गोपनीय शाखा के कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों के सामने आने के बाद जीआरएमसी के डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ और जीवाजी यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू करने की बात कही है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर व्यापमं कांड में बर्खास्त छात्र वास्तव में बिना वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए डॉक्टर बन गए, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? क्या मेडिकल शिक्षा व्यवस्था में फिर कोई बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे, लेकिन फिलहाल इस मामले ने मेडिकल शिक्षा व्यवस्था और यूनिवर्सिटी प्रशासन दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यापमं घोटाले की गूंज एक बार फिर सुनाई देने लगी है। आरोप बेहद गंभीर हैं और यदि इनमें सच्चाई पाई जाती है तो यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि लोगों की जिंदगी से जुड़ा बड़ा मामला होगा। अब सभी की नजर जांच पर टिकी है कि आखिर बिना परीक्षा और बिना वैधानिक प्रक्रिया के डिग्री देने के आरोपों में कितनी सच्चाई है.
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