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MLC चुनाव: डीएम-एसपी ने लिया मतदान केंद्रों का जायजा, स्नातक में 55.17% व शिक्षक सीट पर 73.93% वोट
Farrukhabad, Uttar Pradesh:फर्रुखाबाद में आगरा खण्ड स्नातक एवं शिक्षक एमएलसी चुनाव शांतिपूर्ण संपन्न हुआ। मतदान के दौरान जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर एवं एसपी आरती सिंह ने म्यूनिशिपल इण्टर कॉलेज और बीडीओ दफ्तरों समेत विभिन्न केंद्रों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाएं परखीं। जिले में निष्पक्ष व पारदर्शी माहौल के बीच स्नातक निर्वाचन में 55.17% तथा शिक्षक निर्वाचन में 73.93% मतदान दर्ज किया गया।0
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Jamia Millia Islamia में स्लोगन: सलमान खुरशीद बोले पोस्टर लगाने वाला बताए
Noida, Uttar Pradesh:Delhi: Salman Khurshid (Congress) on reports of slogans and graffiti reading 'Free Kashmir,' 'Free Sharjeel Imam,' 'Free Palestine,' and 'RSS Go Back' appeared on the walls of Jamia Millia Islamia. नहीं नहीं नहीं。 पोस्टर जो लगाएगा उससे पूछिए ना, मैं नहीं पोस्टर लगाऊंगा पूछ रहे हैं मुझसे। तो जो पोस्टर लगाएगा उससे पूछिए ना, आप सतर्क रहिए, कोई पोस्टर लगा दे तो उससे पूछिए ये पोस्टर。 Speaker 1: पोस्टर जो लगाएगा उससे पूछिए ना, मैं नहीं पोस्टर लगाऊंगा पूछ रहे हैं मुझसे। तो जो पोस्टर लगाएगा उससे पूछिए ना, आप सतर्क रहिए, कोई पोस्टर लगा दे तो उससे पूछिए ये पोस्टर。0
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वाराणसी: राजातालाब में बालिकाओं ने निकाली जागरूकता रैली, भ्रूण हत्या और बाल विवाह के खिलाफ उठाई आवाज
Varanasi, Uttar Pradesh:मयंक कश्यप/ जक्खिनी / राजातालाब, वाराणसी। आशा ट्रस्ट के तत्वावधान में शुक्रवार को ढढ़ोरपुर गांव में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ बालिकाओं ने रैली निकाली। रैली में लड़कियों ने कन्या भ्रूण हत्या, बाल विवाह, दहेज और यौन उत्पीड़न के खिलाफ नारेबाजी की — भीख नहीं अधिकार चाहिए, जीने का सम्मान चाहिए। रैली ढढ़ोरपुर, जयापुर, चंदापुर, भीखमपुर, असवारी, बूड़ापुर, कोइलीपुर आदि गांवों की सैकड़ों किशोरियों की भागीदारी से निकली। जो कोइलीपुर-ढढ़ोरपुर की बस्तियों से होते हुए आशा सिलाई-कढ़ाई केंद्र पहुंची, जहां बालिका महोत्सव आयोजित हुआ। महोत्सव में लड़कियों ने नाटक, भाषण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए कुरीतियों पर प्रहार किया। कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि महेंद्र सिंह पटेल ने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था ने सबको समान अधिकार दिया है, लेकिन सामाजिक व्यवस्था में बदलाव जरूरी है। सामाजिक कार्यकर्ता रंजीत दहुरी ने कहा कि कानून सख्त होने के बाद भी महिलाओं के खिलाफ अपराध चिंताजनक है। महिला संगठन संयोजिका अनीता पटेल ने लड़कियों से अपने हक के लिए खुद आगे आने की अपील की।0
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संकिसा बौद्ध महोत्सव: डीआईजी ने की शांति और सद्भाव की अपील, व्यवस्थाओं का लिया जायजा
Farrukhabad, Uttar Pradesh:फर्रुखाबाद के संकिसा में शरद पूर्णिमा पर आयोजित होने वाले बौद्ध महोत्सव मेले को लेकर डीआईजी यमुना प्रसाद की अध्यक्षता में बैठक सम्पन्न हुई। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर और एसपी आरती सिंह की उपस्थिति में सनातनी व बौद्ध पक्षों से आपसी सौहार्द, शांति और सहयोग की अपील की गई। डीआईजी ने बिसारी देवी मंदिर, बौद्ध स्तूप व धम्मलोक बौद्ध विहार का निरीक्षण कर सुरक्षा व सुविधाओं से जुड़े निर्देश दिए।0
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जयपुर के जंतर-मंतर में पत्थरों से बना विज्ञान, समय और आकाश का अद्भुत हिसाब
Jaipur, Rajasthan:जयपुर- न घड़ी, न मोबाइल… फिर भी वक्त का हिसाब सेकंड तक! सूर्य की छाया से समय और विशाल यंत्रों से ग्रह-नक्षत्रों की गणना। जयपुर का जंतर-मंतर, जहां करीब 300 साल पहले पत्थरों में विज्ञान उतारा गया। यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल जंतर-मंतर आज भी बताता है कि हमारे पूर्वज आसमान को सिर्फ देखते नहीं थे,बल्कि उसकी हर चाल का हिसाब भी रखते थे। देखिए ये खास रिपोर्ट। यह पत्थर नहीं, विज्ञान के औजार हैं। हर कोण, हर निशान और हर संरचना के पीछे एक गणना है। जयपुर का जंतर-मंतर इस बात की गवाही है कि सदियों पहले भी आसमान को समझने के लिए वैज्ञानिक प्रयोग किए जाते थे। ये कोई आम इमारतें नहीं… हर आकार, हर कोण और हर निशान के पीछे छिपा है विज्ञान। कहीं सूर्य की छाया से समय का पता चलता है, तो कहीं ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति का अध्ययन होता है। जयपुर के जंतर-मंतर में बने विशाल यंत्र इस बात का प्रमाण हैं कि सदियों पहले भी खगोल विज्ञान और गणित की समझ कितनी विकसित थी। इस वैज्ञानिक विरासत के पीछे हैं जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय। 18वीं सदी में उन्होंने खगोलीय गणनाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से पांच वेधशालाएं बनवाईं। जयपुर की वेधशाला इन पांचों में सबसे बड़ी और बेहतर संरक्षित मानी जाती है। यहां पत्थर और धातु को इस तरह आकार दिया गया कि वे आकाशीय घटनाओं के अध्ययन में मदद कर सकें। जंतर-मंतर का वृहद सम्राट यंत्र इसकी सबसे बड़ी पहचान है। विशाल त्रिकोणीय संरचना और उसके आसपास बने माप-चिह्नों की मदद से स्थानीय समय की गणना की जाती है। इसकी गणना की सटीकता दो सेकंड तक बताई गई है। वहीं, लघु सम्राट यंत्र से लगभग 20 सेकंड की सटीकता तक समय मापा जा सकता है। यानी आधुनिक डिजिटल घड़ियों से सदियों पहले समय को मापने की ऐसी व्यवस्था तैयार की गई, जो आज भी लोगों को हैरान करती है। यहां हर यंत्र की अपनी भूमिका है। नाड़ीवलय यंत्र सूर्य की स्थिति और स्थानीय समय बताता है। जयप्रकाश यंत्र से आकाशीय पिंडों की स्थिति समझी जाती है। राशिवलय यंत्र के 12 अलग-अलग उपकरण राशियों से संबंधित खगोलीय गणनाओं के लिए बनाए गए। राम यंत्र से आकाशीय पिंडों की ऊंचाई और दिशा का अध्ययन किया जाता है। यानी एक ही परिसर में आसमान को समझने के लिए कई तरह की वैज्ञानिक व्यवस्थाएं विकसित की गईं। जंतर-मंतर की खूबसूरती सिर्फ इसके आकार में नहीं, इसकी बनावट में भी है। कहीं विशाल पत्थर की संरचनाएं हैं, तो कहीं धातु की डिस्क और संगमरमर पर उकेरे गए माप। हर यंत्र को एक खास उद्देश्य के लिए तैयार किया गया। इनकी बनावट में गणित, दिशा निर्धारण, माप और स्थापत्य का ऐसा मेल दिखाई देता है, जो इस वेधशाला को दुनिया की दूसरी ऐतिहासिक इमारतों से अलग पहचान देता है। जंतर-मंटर को 31 जुलाई 2010 को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। यहां आने वाले पर्यटक सिर्फ ऐतिहासिक इमारतें नहीं देखते, बल्कि उस वैज्ञानिक परंपरा को समझने का मौका भी पाते हैं, जिसमें आकाशीय घटनाओं को गणना और यंत्रों के जरिए समझने का प्रयास किया गया। आज समय हमारी कलाई पर बंधी घड़ी और मोबाइल में कैद है, लेकिन जयपुर का जंतर-मंतर याद दिलाता है कि कभी सूर्य की छाया ही समय की सबसे बड़ी गवाह हुआ करती थी। ये यंत्र इतिहास के अवशेष भर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक जिज्ञासा, गणितीय समझ और भारतीय स्थापत्य कौशल की जीवंत मिसाल हैं। पत्थरों में दर्ज यह विज्ञान आज भी दुनिया को भारत की समृद्ध वैज्ञानिक विरासत से रूबरू करा रहा है। नोट-इस खबर की फीड ओएफसी से स्लग से भेजी गई है।0
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