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मधेपुरा: ट्रैक्टर टक्कर से बाइक सवार युवक की मौत, किशोर घायल

Madanpur, Bihar:मधेपुरा जिले के कुमारखंड थाना क्षेत्र अंतर्गत बिशनपुर बाजार पंचायत के देवनस्थान चौक के समीप शनिवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में बाइक सवार युवक की मौत हो गई, जबकि उसके साथ बैठा एक किशोर गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना जदिया-मीरगंज मुख्य मार्ग स्थित स्टेट हाईवे-91 पर हुई। प्राप्त जानकारी के अनुसार जदिया वार्ड संख्या 10 निवासी रामविलास साह का 19 वर्षीय पुत्र सौरभ कुमार तथा दिलीप साह का 15 वर्षीय पुत्र शाहिल कुमार अपाचे बाइक (BR-50AB-2972) से टिकुलिया की ओर से अपने घर जदिया लौट रहे थे। इसी दौरान देवनस्थान चौक के पास सामने से आ रही एक तेज रफ्तार अज्ञात ट्रैक्टर ने बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर मारने के बाद ट्रैक्टर चालक वाहन सहित मौके से फरार हो गया। हादसे में बाइक चला रहे सौरभ कुमार की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि पीछे बैठे शाहिल कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से घायल को तत्काल इलाज के लिए त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल भेजा गया। घटना की सूचना मिलते ही कुमारखंड थानाध्यक्ष रंजन कुमार, एसआई अतुल कुमार, एसआई रविकांत कुमार, एसआई जीउत राम तथा जदिया थाना पुलिस मौके पर पहुंचे और दोनों को अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में चिकित्सकों ने सौरभ कुमार को मृत घोषित कर दिया, जबकि प्राथमिक उपचार के बाद शाहिल कुमार को बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क पर किसानों द्वारा मक्का सुखाया जा रहा था। आशंका जताई जा रही है कि बाइक मक्का पर फिसल गई, जिससे चालक का संतुलन बिगड़ गया और वह तेज रफ्तार ट्रैक्टर की चपेट में आ गया। हालांकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है। थानाध्यक्ष रंजन कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घायलों को अस्पताल पहुंचाया। उन्होंने कहा कि हादसे में एक युवक की मौत हुई है तथा दूसरा घायल है। दुर्घटनाग्रस्त बाइक को जब्त कर थाना लाया गया है। परिजनों से आवेदन प्राप्त होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद मृतक के परिजनों में कोहराम मचा हुआ है और पूरे इलाके में शोक की लहर व्याप्त है।
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भोपाल मौत केस: लिगेचर जप्ती से SIT पर सवाल, जाँच में नया मोड़

Bhopal, Madhya Pradesh:भोपाल ट्विशा मौत केस में बड़ा खुलासा फांसी के फंदे लिगेचर को लेकर उठे सवाल 13 मई को सुबह 9:42 बजे सब इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा ने लिगेचर को जब्त किया था जब्ती के समय आरोपी गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह ने लिगेचर की पहचान नहीं की थी जब्ती दस्तावेज़ में लिगेचर की पहचान करने वाले व्यक्ति का विवरण नहीं है दस्तावेज के 5 नंबर कॉलम में सिर्फ घटना स्थल से लिखकर खानापूर्ति की सब इंस्पेक्टर ने लिगेचर को अपनी कार में रखा समय पर एम्स में लिगेचर नहीं भेजा लिगेचर से संबंधित जब्ती दस्तावेज़ केस डायरी का हिस्सा था और दोनों आरोपी उसमें शामिल नहीं थे आरोपियों का जांच एजेंसी SIT पर पूरा नियंत्रण था 13 मई को ही तीन अन्य जब्ती बनाई गई तीनों जप्ती में समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह का उचित विवरण था इस मामले में जांच एजेंसी SIT ने शुरू से ही आरोपियों के प्रभाव में काम किया
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केशियाड़ी में ग्रीन साथी साइकिल वितरण को लेकर स्कूल के बाहर प्रदर्शन

Kharagpur, West Bengal:সবুজসাথীর সাইকেল বিক্রির অভিযোগে কেশিয়াড়ীর গগনেশ্বর বিদ্যামন্দিরে উত্তেজনা, স্কুলে বিক্ষোভ গ্রামবাসীদের কেশিয়াড়ী, সরকারের ‘সবুজসাথী’ প্রকল্পের সাইকেল ছাত্রছাত্রীদের না দিয়ে স্থানীয় সাইকেল সরাই মিস্ত্রিদের কাছে বিক্রি করার অভিযোগকে কেন্দ্র করে উত্তেজনা ছড়াল পশ্চিম মেদিনীপুর জেলার কেশিয়াড়ী ব্লকের গগনেশ্বর এলাকায়। শনিবার সকালে গগনেশ্বর বিদ্যামন্দির হাই স্কুলের সামনে জড়ো হয়ে বিক্ষোভ প্রদর্শন করেন গ্রামবাসী ও অভিভাবকরা। অভিযোগ, নবম শ্রেণিতে উত্তীর্ণ হওয়ার পর নিয়ম মেনে ফর্ম পূরণ করলেও বহু ছাত্রছাত্রী এখনও পর্যন্ত government's দেওয়া সবুজসাথীর সাইকেল পায়নি। অথচ সেই সাইকেলগুলি স্কুল কর্তৃপক্ষ স্থানীয় সাইকেল সরাই মিস্ত্রীদের কাছে বিক্রি করে দিয়েছে বলে দাবি অভিভাবকদের। স্থানীয় সূত্রে জানা_guyেছে, শুক্রবার বিকেলে খবর ছড়িয়ে পড়ে że ছাত্রছাত্রীদের জন্য বরাদ্দ সাইকেল কয়েকজন সাইকেল সরাই মিস্ত্রির কাছে বিক্রির জন্য পৌঁছেছে। অভিযোগ, স্থানীয় দুই সাইকেল সরাই মিস্ত্রি সুশান্ত মান্না ও লালু সিং স্কুল কর্তৃপক্ষের কাছ থেকে ওই সাইকেলগুলি কিনে নিয়ে আসেন। পরে সেগুলি এলাকার এক ব্যক্তির বাড়ির ছাদে লুকিয়ে রাখা হয় বলে অভিযোগ ওঠে। খবর পেয়ে এলাকার বাসিন্দারা ওই বাড়ি ঘিরে ফেলেন এবং কেশিয়াড়ী থানায় খবর দেন। পুলিশ ঘটনাস্থলে পৌঁছে সাইকেলগুলি উদ্ধার করে থানায় নিয়ে যায়। পাশাপাশি জিজ্ঞাসাবাদের জন্য দুই ব্যবসায়ীকেও আটক করা হয়েছে বলে স্থানীয় সূত্রের দাবি। সাইকেল সরাই মিস্ত্রি দের অভিযোগ, তাঁরা স্কুলের প্রধান শিক্ষক দিবাকর পাত্র এবং স্কুলের করণিক স্বরবীন্দু দত্তের কাছ থেকে নগদ টাকার বিনিময়ে সাইকেলগুলি কিনেছিলেন। তবে এই অভিযোগের সত্যতা এখনও প্রশাসনের তরফে নিশ্চিত করা হয়নি। এদিকে, অভিভাবকদের দাবি, ছাত্রছাত্রীদের প্রাপ্য সাইকেল তাঁদের হাতে তুলে না দিয়ে বিক্রি করে দেওয়া হয়েছে। তাঁদের প্রশ্ন, যদি কোনও কারণে সাইকেল বিতরণ সম্ভব না হয়, তাহলে সেগুলি সংশ্লিষ্ট প্রশাসনিক দপ্তরে ফেরত পাঠানো হল না কেন? এছাড়াও প্রধান শিক্ষক ও করণিকের বিরুদ্ধে অতীতেও অনিয়মের অভিযোগ রয়েছে বলেও দাবি করেছেন বিক্ষোভকারীরা। শনিবার সকালে ক্ষুব্ধ গ্রামবাসীরা স্কুলের সামনে বিক্ষোভে সামিল হন। অভিযোগ, স্কুল ছুটির পর গেটে তালা লাগিয়ে দেওয়া হয়, ফলে ভেতরে থাকা শিক্ষক-শিক্ষাকর্মীরা আটকে পড়েন। বিক্ষোভকারীদের দাবি ছিল, অভিযুক্ত প্রধান শিক্ষক দিবাকর পাত্র ও করণিক স্বরবীন্দু দত্ত ঘটনাস্থলে না আসা পর্যন্ত কাউকে বের হতে দেওয়া হবে না। পরিস্থিতি উত্তপ্ত হয়ে উঠলে কেশিয়াড়ী থানার পুলিশ ঘটনাস্থলে পৌঁছে হস্তক্ষেপ করে। পুলিশ বিক্ষোভকারীদের সঙ্গে কথা বলে পরিস্থিতি নিয়ন্ত্রণে আনে এবং আটকে পড়া শিক্ষক-শিক্ষিক들을 বের করে আনার ব্যবস্থা করে। তবে শনিবার অভিযুক্ত প্রধান শিক্ষক ও করণিক দুজনেই স্কুলে অনুপস্থিত ছিলেন। তাঁদের অনুপস্থিতির কারণ জানা যায়নি। এই ঘটনাকে কেন্দ্র করে গোটা গগনেশ্বর এলাকায় চাঞ্চল্য ও চাপা উত্তেজনা ছড়িয়ে পড়েছে। প্রশাসনের তদন্তের দিকে তাকিয়ে রয়েছেন অভিভাবক ও স্থানীয় বাসিন্দারা.
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चांगड़ाबांधा होल्डिंग सेंटर में बांग्लादेशी शरणार्थी, लौटाने की तैयारी शुरू

Jalpaiguri, West Bengal:চ্যাংড়াবান্ধা হোল্ডিং সেন্টারে আশ্রয় নিলো বেশ কয়েকজন বাংলাদেশী, তাদের বাংলাদেশে ফেরত পাঠানোর উদ্যোগ শুরু করলো BSF ও পুলিশ ও প্রশাসন। যদিও বারংবার চেষ্টা করা হলে জেলা পুলিশ ও প্রশাসন এ বিষয়ে মুখ খুলতে নারাজ। কোচবিহার জেলার মেখলিগঞ্জ এর চ্যাংড়াবান্ধায় জেলা প্রশাসনের উদ্যোগে হোল্ডিং সেন্টারে আশ্রয় নিলো বেশ কয়েকজন বাংলাদেশী। তারা দেশের ফেরত যাওয়ার জন্য বিএসএফের কাছে আত্মসমর্পণ করে। বিএসএফ তাদের চ্যাংড়াবান্ধা ট্রাক অনার্স অ্যাসোসিয়েশনের কার্যালয়ে তৈরি করা হোল্ডিং সেন্টারে রাখা হয়। শনিবার বিকেলে চ্যাংড়াবান্ধা ট্রাক অ্যাসোসিয়েশনে কার্যালয়ে বেশ কয়েকজন অবৈধ বাংলাদেশিকে আনা হয়েছে। তাদের জন্য নিরাপত্তার জন্য কেন্দ্রীয় এবং রাজ্য পুলিশ রয়েছে।
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ठाणे के जिलाधिकारी ने गाँव में घोंगड़ी बैठक से लोगों की शिकायतें सुनीं

Thane, Maharashtra:फाईलींच्या पलीकडचं प्रशासन: जेव्हा ठाणे जिल्हाधिकारी 'घोंगडीवर' बसून लोकांचे अश्रू पुसतात aktar शासकीय कार्यालय म्हटलं की, डोळ्यांसमोर येतात त्या फाईलींचे ढीग, टेबल-खुर्च्या, साहेबांची केबिन आणि दारात उभी असलेली सामान्य माणसांची गर्दी. पण विचार करा, जर हेच कार्यालय थेट तुमच्या गावात, तुमच्यासोबत जमिनीवर, एका साध्या 'घोंगडीवर' बसून तुमचे प्रश्न ऐकू लागले तर? होय, हा कोण्या चित्रपटामधला प्रसंग नाही, तर ठाणे जिल्हा महसूल प्रशासनाने शहापूर तालुक्यातील दुर्गम भागात घडवून आणलेली एक मूक क्रांती आहे. ठाण्याचे जिल्हाधिकारी डॉ.श्रीकृष्ण पांचाळ यांच्या संकल्पनेतून आणि अप्पर जिल्हाधिकारी हरिश्चंद्र पाटील, निवासी उपजिल्हाधिकारी डॉ. संदीप माने, भिवंडी प्रांताधिकारी अमित सानप, शहापूरचे तहसिलदार परमेश्वर कासुळे यांच्या पुढाकारातून शहापूरच्या आदिवासी आणि ग्रामीण भागात आयोजित करण्यात आलेली ही 'घोंगडी बैठक' आज संपूर्ण महाराष्ट्रात कौतुकाचा आणि चर्चेचा विषय ठरत आहे. या ऐतिहासिक प्रसंगाची पार्श्वभूमी अत्यंत उत्कंठावर्धक होती. दिवसभराच्या शेतीच्या कामानंतर थकलेला शेतकरी आणि गावकरी रात्रीच्या वेळी एका ठिकाणी जमले होते. एरवी रात्रीच्या वेळी शासकीय अधिकारी दुर्गम भागात फिरकत नाहीत, असा एक सर्वसामान्य समज असतो. मात्र, या उपक्रमाचे सर्वात मोठे वैशिष्ट्य हेच होते की, ही बैठक रात्रीच्या वेळी थेट गावातच आयोजित करण्यात आली होती. जिल्हाधिकारी महोदयांचे गावात आगमन होताच पारंपारिक ढोल-ताशांच्या गजरात आणि नृत्याने ग्रामस्थांनी त्यांचे अत्यंत उत्साहात व आपुलकीने स्वागत केले. गावकरी आणि प्रशासकीय अधिकारी यांच्यातील हे दृश्य नात्याची एक नवी वीण घट्ट करणारे होते. कोनताही बडेजाव नाही, व्ही.आय.पी. संस्कृतीचा लवलेषही नाही, अशा अत्यंत साध्या,पारंपारिक वातावरणात या घोंगडी बैठकीची सुरुवात झाली. एका बाजूला जिल्हाधिकारी डॉ.श्रीकृष्ण पांचाळ हे स्वतः जमिनीवर सर्वसामान्य लोकांसोबत एका घोंगडीवर बसले होते.रात्रीच्या अंधारात एका साध्या बल्बच्या उजेडात सुरू असलेला हा थेट संवाद म्हणजे केवळ एक शासकीय औपचारिकता नव्हती, तर प्रशासन आणि जनतेमधील तुटत चाललेल्या विश्वासाला जोडणारा एक भक्कम सेतू होता. या बैठकीला शहापूर तालुक्यातील ग्रामस्थांचा उदंड आणि उत्स्फूर्त प्रतिसाद लाभला. वर्षानुवर्षे मनात साचलेले प्रश्न घेऊन आशेने डोळे लावून बसलेले नागरिक आणि महिला मोठ्या संख्येने या ठिकाणी हजर होत्या. बैठकीत ग्रामस्थांनी पिण्याच्या पाण्याचा बिकट प्रश्न, दळणवळणासाठी खराब झालेले रस्ते, वीजपुरवठा, वनहक्क दाव्यांमधील अडचणी, शासकीय योजनांचा प्रत्यक्ष लाभ मिळणे आणि जमीनविषयक गुंतागुंतीचे प्रश्न अशा स्थानिक विकासकामांबाबतच्या अनेक समस्या थेट मांडल्या. संवेदनशील जिल्हाधिकाऱ्यांनी प्रत्येक विषयाची स्वतः सविस्तर नोंद घेतली आणि फाईलींच्या चौकटीबाहेर पडून कामाला गती दिली. कार्यालयात वातानुकूलित केबिनमध्ये बसून फाईली पाहिल्या जातात, निर्णय घेतले जातात; पण गावात येऊन लोकांचे चेहरे, त्यांच्या डोळ्यांतील अपेक्षा आणि त्यांचे वास्तविक प्रश्न समजून घेणं जास्त महत्त्वाचं असतं, म्हणूनच अशा घोंगडी बैठकी लोकशाहीला अधिक बळकट करतात, असा दृढ विश्वास जिल्हाधिकारी डॉ. श्रीकृष्ण पांचाळ यांनी यावेळी व्यक्त केला. गावात जाऊन घोंगडीवर बसून झालेला हा थेट संवाद अधिकारी आणि जनता यांच्यातील अंतर कमी करतो, परस्पर विश्वास वाढवतो आणि अपेक्षा, कृती तसेच समन्वयातून विकासाचा मार्ग अधिक सुकर करतो, हेच या बैठकीने दाखवून दिले. हा केवळ एका व्यक्तीचा उपक्रम नव्हता, तर ठाणे जिल्हा प्रशासनाच्या सामूहिक संवेदनशीलतेचे आणि उत्कृष्ट टीम वर्कचे हे उत्तम उदाहरण होते. जिल्हाधिकारी डॉ. श्रीकृष्ण पांचाळ यांच्या या लोककल्याणकारी मोहिमेला गती देण्यासाठी ठाणे जिल्ह्याचे जिल्हाधिकारी डॉ.पांचाळ, भिवंडीचे उपविभागीय अधिकारी अमित सानप आणि स्थानिक तहसिलदार परमेश्वर कासुळे यांच्यासह संपूर्ण महसूल यंत्रणेतील महत्त्वाचे अधिकारी आणि विविध विभागांचे प्रतिनिधी या घोंगडीवर रात्री उशिरापर्यंत ठाणे मांडून बसले होते. अधिकाऱ्यांनी केवळ लोकांच्या तक्रारी ऐकल्या नाहीत, तर शासनाच्या विविध कल्याणकारी योजनांची माहिती थेट तळागाळातील लोकांपर्यंत पोहोचवली आणि "प्रशासन तुमच्या पाठीशी खंबीरपणे उभे आहे," हा विश्वास प्रत्येक ग्रामस्थाच्या मनात निर्माण केला. लोकशाहीचा चौथा स्तंभ समजला जाणाऱ्या प्रसारमाध्यमांनीदेखील या उपक्रमाचे अत्यंत सकारात्मक आणि प्रेरणादायी स्वागत केले आहे. फाईलींमधील कोरड्या अक्षरांपेक्षा माणसांच्या चेहऱ्यावरचे भाव वाचणं हेच खऱ्या संवेदनशील प्रशासनाचं लक्षण आहे, अशा शब्दांत प्रसारमाध्यमांनी या घोंगडी बैठकीचे कौतुक केले असून हा लोकाभिमुख प्रशासनाचा एक आदर्श वस्तुपाठ ठरत असल्याचे म्हटले आहे. आजवर आम्ही साहेबांना भेटायला शहरात जायचो, तासनतास लायनित थांबायचो, पण आज साहेब स्वतः आमच्या घोंगडीवर येऊन बसले आणि आमचं सुख-दुःख त्यांनी आपलं मानलं, अशी भावुक प्रतिक्रिया एका ज्येष्ठ ग्रामस्थाने दिली. शहापूर तालुक्यातील हा उपक्रम केवळ एका रात्रीपुरता मर्यादित नसून, तो राज्याच्या संपूर्ण प्रशासकीय व्यवस्थेला एक नवी सकारात्मक दिशा दाखवणाऱ्या प्रकाशस्तंभ ठरला आहे. विशेष म्हणजे या घोंगडी बैठकीनंतर "डोळखांब" या गावात स्वतः जिल्हाधिकाऱ्यांसह सर्व अधिकारी मुक्कामास होते. विकास प्रक्रियेत अंतिम घटकाचा सहभाग वाढवण्यासाठी असे उपक्रम मैलाचा दगड ठरतील यात शंका नाही. माणसांच्या चेहऱ्यावर हसू फुलवणाऱ्या या 'घोंगडी बैठकी'ला आणि ठाणे जिल्हा महसूल प्रशासनाच्या या कौतुकास्पद पुढाकाराला मनापासून शुभेच्छा, प्रशासनाचा हाच 'ठाणे पॅटर्न' उद्याच्या समृद्ध महाराष्ट्राची ओळख बनो, हीच सदिच्छा!
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