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रांची में मोदी के जन्मदिन पर मुस्लिम समुदाय ने खास कार्यक्रम

Ranchi, Jharkhand:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन आज राजधानी रांची में खास अंदाज में मनाया जा रहा है प्रधानमंत्री का जन्मदिन मुस्लिम समाज के लोग प्रधानमंत्री मोदी का कट आउट लेकर जुग जुग जियो मोदी जी की दे रहे हैं दुआ मुस्लिम समाज ने जन्मदिन की मौके पर राजधानी रांची में कांटा बर्थडे केक प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर रांची में विशेष कार्यक्रम मुस्लिम समाज के भाई-बहनों की ओर से मनाया जन्मदिन धुर्वा सेक्टर-3 पार्क में आयोजित हुआ कार्यक्रम भाजपा नेता जॉनी वॉकर खान के नेतृत्व में बनाया गया प्रधानमंत्री मोदी का बर्थडे 76वें यौमे पैदाइश के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी को दी गई जन्मदिन की शुभकामनाएं
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भिवानी की अनशुल कटारिया ने ट्रिपल जंप में सिल्वर मेडल, अंतरराष्ट्रीय लक्ष्य तय

Bhiwani, Haryana:भिवानी भिवानी की अंशुल कटारिया ने जीता सिल्वर मेडल, 10.95 मीटर लगाया ट्रिपल जंप, पिता से प्रेरणा लेकर चुना गेम, 7 साल पहले खेलना शुरू किया भिवानी के विद्या नगर निवासी अंशुल कटारिया ने उत्तराखंड के देहरादून में आयोजित नॉर्थ जोन नेशनल 2026 के ट्रिपल जंप में सिल्वर मेडल जीता है। उन्होंने 10.95 मीटर का ट्रिपल जंप लगाया है। वहीं अब उनका लक्ष्य इंटरनेशनल लेवल पर भारत का नाम रोशन करना है। मेडल जीतकर भिवानी में लौटने पर अंशुल कटारिया का स्वागत किया गया। अंशुल कटारिया के पिता विद्या नगर निवासी विनोद कुमार ने कहा कि उनको 3 बच्चे हैं। जिनमें से अंशुल सबसे बड़ी बेटी है। वह खुद 400 मीटर हर्डल रेस का नेशनल प्लेयर रहे हैं। लेकिन आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण वे आगे नहीं बढ़ पाए। लेकिन वे अब सिंचाई विभाग में जॉब करते हैं और अपने बच्चों को अंतर्राष्ट्रीय प्लेयर बनाने में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि करीब 7-8 साल पहले जब वे प्रैक्टिस करने जाते थे, तो उनकी बेटी भी साथ जाने लगी और अभ्यास करने लगी। अंशुल ने शुरूआत में हर्डल रेस में भाग लेना शुरू किया था। लेकिन अंशुल ट्रिपल जंप अच्छा लगाती थी। इसलिए उसको ट्रिपल जंप की प्रैक्टिस करवाने लगे। अंशुल की मां सुमन ने कहा कि उसकी बेटी के मेडल जीतने पर पूरे परिवार में खुशी है। बेटी ने कड़ी मेहनत से इस मुकाम को हासिल किया है। 7-8 साल से प्रैक्टिस कर रही मेडल जीतकर भिवानी पहुंची अंशुल कटारिया ने कहा कि पिछले महीने स्टेट लेवल की चैंपियनशिप हुई थी, उसमें गोल्ड मेडल जीता था। जिसके बाद उनका चयन नॉर्थ जोन नेशनल चैंपियनशिप में चयन हुआ था। उन्होंने इसमें बेहतर करने का प्रयास किया। वहीं उनका लक्ष्य अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करना व मेडल दिलाना है। उन्होंने बताया कि वे पिछले 7-8 साल से गेम कर रही हैं और अब दो-ढाई घंटे प्रैक्टिस करती है। पिता से प्रेरणा लेकर खेल चुना अंशुल ने कहा कि उनके पिता खुल नेशनल खिलाड़ी रहे हैं। शुरूआत में उनके साथ स्टेडियम में जाती थी, उनको देखकर खुद भी उनके साथ प्रैक्टिस करने लगी। शुरूआत में उन्होंने अपने पिता से प्रेरणा लेकर हर्डल रेस शुरू की। केंद्रीय विद्यालय के स्कूली गेम में भाग लिया। जिसमें 100 मीटर हर्डल रेस में गोल्ड मेडल जीता। हालांकि बाद में उन्होंने गेम चेंज किया और ट्रिपल जंप अच्छा होने के कारण वह चुन लिया। वे खेल के साथ-साथ सीबीएलयू से BPES (बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स) में तृतीय वर्ष की छात्रा हैं। काफी मेहनती हैं अंशुल धीरज कौशिक ने कहा कि अंशुल उनकी भतीजी है और वे शुरूआत से अंशुल को देखते हुए आ रहे हैं। वह अपने पिता के साथ खेल की प्रैक्टिस करती रहती थी। खेलने की काफी लग्न थी और इनके पिता भी अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। जो हर रोज 30-35 बच्चों को निशुल्क प्रैक्टिस करवाते हैं। अपने खुद के खर्चे से बच्चों को बाहर भी खिलाने के लिए लेकर जाते हैं। अंशुल काफी मेहनती है। इससे पहले अंशुल कटारिया स्कूली गेम में भी मेडल जीतकर आई है। वहीं पिछले दिनों स्टेट लेवल की चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल जीता था, जिसकी बदौलत उनका इस प्रतियोगिता में चयन हुआ। बाइट्स,अंशुल कटारिया,विनोद कुमार पिता व सुमन कटारिया माँ,धीरज कौशिक
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