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AI वीडियो बयान पर JDU ने शिकायत दर्ज कराई; नीतीश-प्रशांत के बीच भिड़ंत
Patna, Bihar:पटना सन्नी\n\nप्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार के वीडियो को AI वीडियो बताया जिसको लेकर JDU नेता नीरज कुमार शिकायत करने शास्त्री नगर थाना पहुंचे.... नीरज कुमार ने थाना में वीडियो साक्ष्य देकर जाँच की मांग की.... नीरज कुमार ने कहा की कायराना राजनीतिक हमला किया है तो कानून जवाब देना आवश्यक है...हमने आवेदन दिया है कानून के धारा के आधार पर जांच कीजिए अगर गुनाह किया है तो उन पर मामला दर्ज कीजिए हमने वीडियो उपलब्ध कराया है जो बयान नीतीश कुमार का है और जो बयान प्रशांत किशोर ने जारी किया है वह जिस भाषा में सुनेगे उसी भाषा में जवाब देंगे....\n\nIv- नीरज कुमार JDU MLC...0
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इटावा में रोमित पाल का स्वर्ण पदक जीत पर भव्य स्वागत
Etawah, Uttar Pradesh:एंकरइंट्रो:- इटावा के सैफई मेजर ध्यानचंद्र स्पोर्ट्स कॉलेज के छात्र ने नाम रोशन किया, एशिया कप हॉकी में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाले हॉकी खिलाड़ी रमित पाल का भव्य स्वागत किया गया इस दौरान भाजपा विधायक ने भी स्वागत कर बधाई दी है। वी. ओ.:- इटावा जनपद के सैफई स्थित मेजर ध्यानचंद्र स्पोर्ट्स कॉलेज में पढ़ने वाले गाजीपुर के छात्र रोमित पाल ने खेल की दुनिया में नाम रोशन किया है रोमित पाल ने जापान में एशिया कप खेला और ओमान में में हुए मुकाबला में स्वर्ण पदक जीता है सरकार के सहयोग से खिलाड़ियों को इतने बड़े मुकाम तक पहुंच पाया है। इटावा रेलवे स्टेशन जंक्शन पर पहुंचने पर ढोल नगाड़ों के बीच भव्य स्वागत किया गया है इस दौरान क्षेत्र में खुशी का माहौल देखने को मिला है। बाइट :- रोमित पाल - स्वर्ण पदक विजेता हॉकी प्लेयर बाइट:- मोहम्मद जियाउर रहमान - प्रशिक्षक0
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नैमिषारण्य में गुरु पूर्णिमा उत्सव: शिष्यों ने गुरु की पूजा की
Sitapur, Uttar Pradesh:सीतापुर ब्रेक गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर शिष्यों ने की गुरु की पूजा. नैमिषारण्य के वेदव्यास धाम में धूमधाम से मनाया गया गुरु पूर्णिमा का पर्व. वैदिक काल से चला आ रहा है गुरु शिष्य परंपरा का पर्व. व्यास पीठाधीश अनिल कुमार शास्त्री का शिष्यों ने किया पूजन ली गुरु दीक्षा. भगवान वेदव्यास के जन्म उत्सव के रूप में मनाया जाता है गुरु पूर्णिमा का पर्व.0
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Mathura
450 साल पुरानी विरह गाथा: गोवर्धन की मुड़िया शोभायात्रा फिर से निकली
Mathura, Uttar Pradesh:450 साल पुराना इतिहास: सनातन गोस्वामी जी के विरह में संतों ने मुड़वाए थे केश, जानिए गोवर्धन की 'मुड़िया शोभायात्रा' की अमर गाथा मथुरा। ब्रजधाम गोवर्धन में प्रतिवर्ष आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) के अवसर पर आयोजित होने वाली विश्वप्रसिद्ध 'मुड़िया शोभायात्रा' न केवल आस्था का महापर्व है, बल्कि इसका अपना एक अत्यंत भावुक और ऐतिहासिक महत्व भी है। लगभग 450 वर्षों से निरंतर चली आ रही यह परंपरा गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय के महान संत श्रीमद् सनातन गोस्वामी जी के प्रति अगाध श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है。 ### क्या है मुड़िया शोभायात्रा का इतिहास? इतिहास और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चैतन्य महाप्रभु के परम शिष्य श्रीमद् सनातन गोस्वामी जी महाराज ने अपने जीवन का अंतिम समय गोवर्धन के मानसी गंगा तट पर भजन-साधना में व्यतीत किया था। संवत 1615 (सन 1558 ई.) में आषाढ़ पूर्णिमा के दिन सनातन गोस्वामी जी ने अपना भौतिक देह त्याग कर नित्य लीला में प्रवेश किया था। जब उनके तिरोभाव (देवलोक गमन) का समाचार उनके परम शिष्य संत जीव गोस्वामी और अन्य वैरागी संतों को मिला, तो संपूर्ण ब्रज मंडल शोक में डूब गया। अपने पूज्य गुरुदेव के विरह में व्याकुल होकर संतों ने अपने केश मुड़वा (मुंडित करवा) लिए और गुरुदेव के श्रीविगृह को गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा कराते हुए अंतिम नमन किया। चूंकि संतों ने सिर मुड़वाकर गुरुदेव की स्मृति में परिक्रमा की थी, इसीलिए वे 'मुड़िया संत' कहलाए और तभी से इस पावन परंपरा को 'मुड़िया पूर्णिमा' या 'मुड़िया मेला' के नाम से जाना जाने लगा。 ### धूमधाम से निकली शोभायात्रा इसी ऐतिहासिक परंपरा का निर्वहन करते हुए इस वर्ष भी चकलेश्वर स्थित श्री राधा श्याम सुंदर मंदिर से भव्य मुड़िया शोभायात्रा निकाली गई। संत राम कृष्ण दास जी के नेतृत्व में सैकड़ों मुड़िया संतों ने परंपरा अनुसार अपने केश त्यागकर सिर मुड़वाया। इसके बाद ढोल, मृदंग, कड़ताल और बैंड-बाजों की मधुर धुनों पर 'राधे-राधे' और 'हरे कृष्णा' का संकीर्तन करते हुए संतों ने श्री गिरिराज जी की 21 किलोमीटर (सप्तकोसीय) परिक्रमा की। संतों के इस भावुक नृत्य और हरिनाम संकीर्तन से संपूर्ण ब्रज धाम भक्ति के अनूठே रंग में रंगा नजर आया। ### देश-विदेश से उमड़ा आस्था का जनसैलाब मुड़िया संतों के दर्शन और ऐतिहासिक परिक्रमा का साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु गोवर्धन पहुंचे। परिक्रमा मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों द्वारा पुष्प वर्षा कर मुड़िया संतों का भव्य स्वागत किया गया। 450 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी ब्रज संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और निष्काम भक्ति का.sजीव उदाहरण बनी हुई है।0
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