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सरकारी जमीन पर कब्जा प्रधान ने लगाया आरोप विकाश कार्य में बाधा डालने के लिये जिलाधिकारी को दिया पत्र

Padrauna, Uttar Pradesh:ग्राम सभा की नवीन परती भूमि पर कथित अवैध कब्जा, पट्टा आवंटन के लिए दबाव, जान-माल की धमकी तथा सरकारी विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न किए जा रहे हैं ग्राम प्रधान देवदत्त सिंह, पुत्र रामदरश सिंह ने ग्राम सभा क्षेत्र के धर्मेंद्र कुमार सिंह, पुत्र पारस सिंह एवं उनके अन्य भाइयों के संबंध में प्रार्थी का आरोप है कि वे दबंगई के बल पर ग्राम सभा के कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप करते हैं। प्रार्थी द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, उक्त व्यक्तियों के विरुद्ध पूर्व में जमीनी विवाद के दौरान चाकूबाजी की घटना के संबंध में धारा 307 आदि के तहत न्यायालय में मुकदमा विचाराधीन है। इस संबंध में वास्तविक स्थिति अभिलेखों से सत्यापित की जा सकती है। सहजवलिया स्थित गाटा संख्या 197, जो राजस्व अभिलेखों में नवीन परती भूमि के रूप में दर्ज है, पर उक्त व्यक्तियों द्वारा कथित रूप से जबरन मकान का निर्माण करा लिया गया है। आरोप है कि वे उक्त भूमि का पट्टा अपने पक्ष में कराए जाने के लिए प्रार्थी पर दबाव बना रहे थे। नियमानुसार कार्रवाई किए बिना पट्टा आवंटित करने से इनकार किए जाने पर वे विवाद करने पर आमादा हो रहे हैं तथा प्रार्थी को जान-माल की क्षति होने की आशंका बनी हुई है। उक्त व्यक्तियों द्वारा ग्राम सभा में संचालित विकास कार्यों में बार-बार बाधा उत्पन्न की जा रही है, जिससे सरकारी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इस स्थिति के कारण प्रार्थी को अपने दायित्वों का निर्वहन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। निष्पक्ष जांच राजस्व एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से कराते हुए नवीन परती भूमि की पैमाइश एवं अभिलेखों का सत्यापन कराया जाए। यदि भूमि पर अवैध कब्जा अथवा अनधिकृत निर्माण पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, प्रार्थी को प्राप्त धमकी एवं सरकारी विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न किए जाने के आरोपों की जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए तथा प्रार्थी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
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जयपुर की पांच पंचायत समितियों में मतदान से गांव की तस्वीर बदली

Jaipur, Rajasthan:एंकर-घूंघट की ओट से निकला वोट...लाठी के सहारे लोकतंत्र की चौखट तक पहुंचे बुजुर्ग...और पहली बार ईवीएम का बटन दबाने का युवाओं में क्रेज। जयपुर की 5 पंचायत समितियों में जिला।परिषद और पंचायत समितियो सदस्यो (गांव की सरकार) चुनने के लिए मतदान केंद्रों पर लोकतंत्र के अलग-अलग रंग नजर आए। किसी ने व्हीलचेयर पर पहुंचकर वोट डाला, तो कोई अपनों का सहारा लेकर मतदान केंद्र पहुंचा। दूसरे चरण में 69.41 फीसदी मतदान हुआ, जो पहले चरण से ज्यादा रहा। हालांकि मतदान के दौरान 20 ईवीएम यूनिट बदलनी पड़ीं। अब सवाल ये है कि जिन ग्रामीणों ने घंटों कतार में लगकर अपना फर्ज निभाया, क्या उनके चुने हुए जनप्रतिनिधि अगले पांच साल उनकी उम्मीदों पर खरे उतरेंगे? क्योंकि वोटरों ने तो ईवीएम का बटन दबा दिया...अब गांव के विकास का बटन दबाने की बारी जनप्रतिनिधियों की है। VO-1- किसी महिला ने घूंघट की ओट से ईवीएम का बटन दबाकर गांव की सरकार चुनी, तो कोई बुजुर्ग लाठी के सहारे मतदान केंद्र पहुंचा। कोई व्हीलचेयर पर आया तो किसी ने परिजनों का सहारा लेकर लोकतंत्र में अपनी भागीदारी निभाई। पहली बार मतदान करने पहुंचे युवाओं में भी खासा उत्साह नजर आया। जयपुर जिले की पांच पंचायत समितियों के 81 वार्डो और जिला परिषद के 11 वार्डो में दूसरे चरण में गांव की सरकार चुनने के लिए मतदान केंद्रों पर कुछ ऐसी ही तस्वीरें दिखाई दीं। सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक चले मतदान में 3 लाख 78 हजार 364 मतदाताओं में से 2 लाख 62 हजार 641 ने वोट डाले। अंतिम मतदान प्रतिशत 69.41 रहा, जो पहले चरण के 68.29 प्रतिशत से 1.12 प्रतिशत अंक ज्यादा है। जिले की आमेर, जालसू, रामपुरा डाबड़ी, शाहपुरा और अमरसर पंचायत समितियों के 81 वार्डों में मतदान हुआ। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की आवाजाही शुरू हो गई। ग्रामीण महिलाएं घरेलू कामकाज निपटाकर मतदान करने पहुंचीं। कई मतदान केंद्रों पर घूंघट में महिलाओं की कतारें दिखाई दीं। बुजुर्गों ने भी उम्र और शारीरिक परेशानियों को मतदान के आड़े नहीं आने दिया। युवाओं में पहली बार ईवीएम का बटन दबाने को लेकर उत्साह रहा। दूसरे चरण में शाहपुरा पंचायत समिति मतदान प्रतिशत के मामले में सबसे आगे रही। यहां 57 हजार 160 मतदाताओं में से 41 हजार 200 ने मतदान किया। मतदान प्रतिशत 72.08 रहा। जालसू में 71.95 प्रतिशत, आमेर में 68.33 प्रतिशत, रामपुरा डाबड़ी में 67.98 प्रतिशत और अमरसर में सबसे कम 67.89 प्रतिशत मतदान हुआ। सबसे ज्यादा और सबसे कम मतदान वाली पंचायत समितियों के बीच 4.19 प्रतिशत अंक का अंतर रहा。 VO-2-मतदान के आंकड़ों में भी दिलचस्प तस्वीर सामने आई। सुबह 10 बजे तक जिले में महज 15.02 प्रतिशत मतदान हुआ था। दोपहर 1 बजे तक यह आंकड़ा 33.12 प्रतिशत और दोपहर 3 बजे तक 49.45 प्रतिशत पहुंचा। यानी आठ घंटे में आधे मतदाताओं ने भी वोट नहीं डाला था। लेकिन इसके बाद मतदान ने रफ्तार पकड़ी। दोपहर 3 बजे तक 1 लाख 87 हजार 109 वोट पड़े थे, जबकि अंतिम आंकड़ा 2 लाख 62 हजार 641 पहुंचा। इस तरह दोपहर 3 बजे के बाद अंतिम आंकड़ों तक 75 हजार 532 अतिरिक्त वोट दर्ज हुए। सुबह 10 बजे तक जालसू में सबसे ज्यादा 16.45 प्रतिशत मतदान हुआ। दोपहर 1 बजे तक शाहपुरा 37.03 प्रतिशत के साथ आगे निकल गया। दोपहर 3 बजे भी शाहपुरा में सबसे ज्यादा 52.02 प्रतिशत वोटिंग हुई। शाम 6 बजे की रिपोर्ट में शाहपुरा 71.87 प्रतिशत पर था। अंतिम आंकड़ों में यह बढ़कर 72.08 प्रतिशत हो गया। वहीं जालसू का मतदान 70.10 से बढ़कर 71.95 प्रतिशत पहुंचा। मतदान प्रक्रिया के दौरान ईवीएम की तकनीकी खराबी भी सामने आई। मॉक पोल और वास्तविक मतदान के दौरान कुल 14 कंट्रोल यूनिट और 6 बैलेट यूनिट बदलनी पड़ीं। मतदान शुरू होने से पहले मॉक पोल के दौरान 11 कंट्रोल यूनिट और 3 बैलेट यूनिट बदली गईं। वही वास्तविक मतदान के दौरान भी 3 कंट्रोल यूनिट और 3 बैलेट यूनिट बदलनी पड़ीं। जिला निर्वाचन अधिकारी संदेश नायक और जयपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक हनुमान प्रसाद मीणा ने मतदान केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। अधिकारियों ने मतदान प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था और मतदाताओं को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। जिला प्रशासन की टीमें भी मतदान प्रक्रिया की निगरानी में जुटी रहीं। बहरहाल,घूंघट की ओट से निकला वोट हो या कांपते हाथों से दबाया गया ईवीएम का बटन, हर मतदाता की उम्मीद अपने गांव की तस्वीर बदलने की है। किसी को घर तक पानी पहुंचने का इंतजार है, तो कोई टूटी सड़कों की मरम्मत और गांव में बेहतर सुविधाओं की उम्मीद लगाए बैठा है। मतदाताओं ने कतारों में लगकर लोकतंत्र के प्रति अपना फर्ज निभा दिया। अब चुनाव जीतकर आने वाले जनप्रतिनिधियों के सामने अगले पांच साल गांव के विकास और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की जिम्मेदारी होगी। सवाल यही है कि ईवीएम में दर्ज ग्रामीणों की उम्मीदें क्या अगले पांच साल में जमीन पर विकास बनकर दिखाई देंगी...
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