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Pinewz
201307
AdityaAdityaFollow31m ago

जालौन के कोच बस स्टैंड पर टायर की दुकान में लगी भीषण आग, इलाके में मचा हड़कंप,

Noida, Uttar Pradesh:कोच बस स्टैंड पर टायर की दुकान में लगी भीषण आग, इलाके में मचा हड़कंप उरई, जालौन। नगर के कोच बस स्टैंड पर उमंग मेडिकल स्टोर के पीछे स्थित टायर की दुकान में अचानक आग लगने से आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग की सूचना मिलते ही आसपास के लोगों में हड़कंप की स्थिति बन गई। दुकान में आग लगने की घटना से मौके पर हलचल मच गई। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। आग की चपेट में आकर दुकान में रखे सामान को कितना नुकसान हुआ है, इसकी भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल आग से हुए नुकसान और आग पर काबू पाने को लेकर विस्तृत जानकारी का इंतजार है। घटना के संबंध में अधिक जानकारी मिलने पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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EC का हलफनामा: CEC अकेले फैसले नहीं लेते; फॉर्म-6 में बदलाव नहीं

Noida, Uttar Pradesh:'अकेले फैसले नहीं लेते CEC': सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का हलफनामा, फॉर्म-6 पर भी दी सफाई चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर इस आरोप को खारिज किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अकेले ही फैसले ले रहे हैं। आयोग ने कहा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े तीनों आदेश जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में आयोग के सभी सदस्यों की सहमति से जारी किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी किए थे। अब मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने अलग-अलग हलफनामा दाखिल करने के बजाय संयुक्त हलफनामा दाखिल किया है। *फाइल पर दिया गया सुझाव आयोग का आधिकारिक फैसला नहीं* चुनाव आयोग ने हलफनामे में कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त या अन्य चुनाव आयुक्तों की ओर से दूसरे आयुक्तों अथवा आयोग के किसी अधिकारी को दिया गया सुझाव, विचार या सवाल अपने-आप में आयोग का आधिकारिक निर्णय नहीं माना जा सकता। आधिकारिक निर्णय वही होगा, जो कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आयोग द्वारा लिया गया हो। आयोग ने आगे कहा कि किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पहले अधिकारियों और चुनाव आयुक्तों के सुझावों, विचारों तथा सवालों पर विचार किया जाता है। सभी संबंधित पहलुओं पर विचार करने के बाद आयोग के सक्षम सदस्य निर्णय लेते हैं और उसके अनुसार आदेश जारी किए जाते हैं। *ऐसे आगे बढ़ती है आयोग की फाइल* हलफनामे के मुताबिक, चुनाव आयोग की फाइल पहले एक निर्वाचन आयुक्त, फिर दूसरे निर्वाचन आयुक्त और अंत में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पास भेजी जाती है। मंजूरी मिलने के बाद निर्णय को आयोग की फाइल में दर्ज किया जाता है और संबंधित आयुक्तों के हस्ताक्षर लिए जाते हैं। इसके बाद चुनाव आयोग का सचिवालय निर्णय की सूचना जारी करता है और उसे लागू करता है। *चुनाव आयुक्तों और कैबिनेट सचिव के बीच पत्राचार पर सफाई* चुनाव आयोग ने चुनाव आयुक्तों और कैबिनेट सचिव के बीच हुए पत्राचार को लेकर लगाए गए आरोपों को गलतफहमी पर आधारित बताया है। हलफनामे में कहा गया है कि आयोग में आंतरिक कार्य-विभाजन 23 सितंबर 2025 के पुराने ऑफिस आर्डर के मुताबिक जारी था। 28 जुलाई 2026 को चुनाव आयोग में प्रतिनियुक्ति पर तैनात अतिरिक्त सचिव स्तर के एक IAS अधिकारी ने आंतरिक कार्य-विभाजन से संबंधित ऑफिस आर्डर जारी किया। इसके अगले दिन, 29 जुलाई 2026 को दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस आदेश और संबंधित अधिकारी के आचरण के संबंध में कैबिनेट सचिव को अलग-अलग पत्र लिखे। इसके बाद, दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से 30 जुलाई 2026 को संयुक्त निर्देश जारी किए गए। आयोग के अनुसार, इस वजह से 28 जुलाई 2026 को जारी आदेश कभी लागू नहीं हुआ। *फॉर्म-6 में बदलाव नहीं,डिक्लरेशन फॉर्म अलग दस्तावेज* चुनाव आयोग ने इस आरोप को खारिज किया है कि SIR से संबंधित आदेशों के जरिए फॉर्म-6 में संशोधन किया गया था। आयोग ने कहा कि फॉर्म-6 में बदलाव करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है।डिक्लेरेशन फॉर्म एक अलग दस्तावेज है। हालांकि, आयोग ने स्वीकार किया कि ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म-6 और डिक्लेरेशन फॉर्मको इस तरह प्रदर्शित किया गया था कि ऐसा लग सकता था कि फॉर्म-6 में बदलाव किया गया है। इस स्थिति को स्पष्ट करने के लिए 21 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को दो अलग-अलग हिस्सों में बांटने की बात कही गई है। इनमें पहला फॉर्म-6 और दूसरा घोषणा-पत्र होगा। *डिक्लेरेशन फॉर्ममें बदलाव से शुरू हुई मैपिंग की व्यवस्था* आयोग के अनुसार डिक्लेरेशन फॉर्म में बदलाव करके मैपिंग की व्यवस्था शुरू की गई, ताकि आवेदक अपनी या अपने माता-पिता अथवा दादा-दादी की वर्ष 2002–2003 की पुरानी मतदाता सूची में दर्ज जानकारी दे सकें। इस व्यवस्था का उद्देश्य पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जानकारी का मिलान करना और अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की जरूरत को कम करना था, ताकि मतदाताओं को सुविधा मिल सके। *CEC के कामकाज पर रोक लगाने की मांग बेमानी* चुनाव आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को सुनवाई योग्य नहीं बताया है। हलफनामे में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी प्रक्रिया से हटाया जा सकता है, जैसा सुप्रीम कोर्ट के जजों को हटाने के लिए किया जाता है। आयोग ने कहा कि तीन सदस्यीय व्यवस्था का मकसद है कि मतभेद होने की स्थिति में बहुमत के आधार पर निर्णय हो। आयोग सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर ही फैसला ले सकता है। इसलिए, मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज पर रोक लगाने से आयोग की निर्णय लेने की प्रक्रिया बाधित होगी और यह कानून में निर्धारित व्यवस्था के विपरीत होगा।
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Pinewz
201015
UMA RAGHAVUMA RAGHAVFollow1h ago

हापुड - लोन एजेंट की प्रताड़ना से परेशान होकर, व्यक्ति ने ज़हर खाकर की खुदकुशी।

Masuri, Uttar Pradesh:हापुड़ के सिंभावली से एक दर्दनाक खबर है, जहां लोन एजेंट की प्रताड़ना से तंग आकर एक व्यक्ति ने जहर खा लिया और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि किस्त एक-दो दिन लेट होने पर एजेंट घर आकर गाली-गलौज और धमकाता था। मामला थाना सिंभावली क्षेत्र के माधापुर गांव का है। बताया जा रहा है कि गांव निवासी जयप्रकाश ने किसी कंपनी से ऋण लिया था। किस्त समय पर जमा न होने पर फाइनेंस कंपनी का एजेंट उसके घर आया और कथित तौर पर उसे डराया-धमकाया। बेटे का कहना है कि पिछले 15 दिनों से पिता मानसिक रूप से परेशान थे। इसी तनाव में उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया। परिजनों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा है।
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यूपी बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति घोषित: ब्रिजभूषण सिंह के बेटे शामिल नहीं, कई नेता चयनित

Gonda, Uttar Pradesh:एंकर- भारतीय जनता पार्टी यूपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी द्वारा आज सोमवार देर रात प्रदेश कार्यसमिति सदस्य,स्थायी आमंत्रित सदस्य और विशेष आमंत्रित सदस्यों की सूची जारी कर दी है। जहां गोंडा के कैसरगंज से पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह को भारतीय जनता पार्टी द्वारा यूपी बीजेपी का प्रदेश कार्यसमिति सदस्य बनाया गया है। जबकि गोंडा से बीजेपी सांसद व विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह उर्फ राजा भैया को यूपी भाजपा द्वारा स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया गया। इसके साथ ही साथ गोंडा जिले के मनकापुर विधानसभा से भाजपा विधायक व पूर्व कैबिनेट मंत्री रमापति शास्त्री, गोंडा के पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष सूर्य नारायण तिवारी, पूर्व जिला अध्यक्ष पीयूष मिश्रा, इसके साथ ही साथ भाजपा नेता राम उदार वर्मा,डॉक्टर रंजन शर्मा और राजकुमार दुबे को भी प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य बनाया गया है। वहीं भारतीय जनता पार्टी के यूपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी द्वारा बृजभूषण के सांसद बेटे करण भूषण सिंह और विधायक बेटे प्रतीक भूषण सिंह को कोई भी सदस्य नहीं बनाया गया है। गोंडा के भाजपा नेताओं को यूपी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष द्वारा अपने टीम में शामिल किए जाने पर अब सोशल मीडिया पर लगातार बधाई दी जा रही है।
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