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बिहार विधान परिषद चुनाव में महागठबंधन में दरार, आर-पार की भिड़ंत

Patna, Bihar:पटना ब्रेकिंग बिहार विधान परिषद चुनाव में महागठबंधन में दरार कांग्रेस ने भी पांच विधान परिषद सीटों के लिए उम्मीदवार की घोषणा कर दी है अब राष्ट्रीय जनता दल कांग्रेस आमने-सामने लड़ेंगे बिहार विधान परिषद के चुनाव में महागठबंधन के दो बड़े दल आमने-सामने हो गए हैं दरभंगा टीचर निर्वाचन क्षेत्र से डॉक्टर मदन मोहन झा को उम्मीदवार बनाया गया है जबकि कोसी ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र से श्री मनोज कुमार जायसवाल को उम्मीदवार बनाया गया है दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से श्री रजनीकांत पाठक को उम्मीदवार बनाया गया है पटना टीचर निर्वाचन क्षेत्र से संजय यादव को उम्मीदवार बनाया गया है पटना ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र से असादुल्लाह खान को उम्मीदवार बनाया गया है राष्ट्रीय जनता दल ने पहले ही इन सीटों पर उम्मीदवार की घोषणा कर दिया था अब इंडिया गठबंधन में बिहार विधान परिषद के चुनाव में दो बड़े दल में आर पार की लड़ाई हो गई है
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हर रात शहर की सफाई की परीक्षा: मेयर ने रात का निरीक्षण किया

Jaipur, Rajasthan:दिनभर ग्राहकों से गुलजार रहने वाले चारदीवारी के बाजार रात में बंद हुए तो पीछे सड़कों पर कचरा छोड़ गए। बुधवार रात मेयर सुनील कोठारी फील्ड में उतरे। सांगानेरी गेट हनुमान मंदिर से शुरू हुए दौरे में मेयर ने यह देखा कि बाजार बंद होने के बाद सड़कों से कचरा कितनी तेजी से उठ रहा है, कितने सफाई कर्मचारी मौके पर हैं और उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल हो रहा है या नहीं। निरीक्षण के दौरान सांसद मंजू शर्मा भी मेयर के साथ रहीं। चारदीवारी इलाके में सड़क पर कचरा नजर आया तो सांसद ने खुद झाड़ू थाम ली और सफाई करने लगीं। इस दौरान बाजार बंद होने के बाद दुकानों और आसपास से निकलने वाले कचरे की स्थिति भी सामने आई। चारदीवारी में दिनभर दुकानों, ठेलों और बाजारों की गतिविधियों के बाद रात को बड़ी मात्रा में कचरा निकलता है। ऐसे में रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था इसलिए अहम है कि सुबह बाजार खुलने से पहले सड़कें साफ मिलें। मेयर ने इसी व्यवस्था को मौके पर जाकर परखा। सफाई कर्मचारियों की मौजूदगी के साथ वाहनों और दूसरे संसाधनों की उपलब्धता भी देखी। मेयर पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद कोठारी लगातार सफाई व्यवस्था को लेकर फील्ड में दिखाई दे रहे हैं। इससे पहले तालकटोरा और पौंड्रिक पार्क का निरीक्षण करने के साथ सांगानेर और मानसरोवर जोन की समीक्षा में भी सफाई व्यवस्था पर अधिकारियों से जवाब मांगा था। अब रात्रिकालीन निरीक्षण के जरिए यह जानने की कोशिश की गई कि बैठकों और निर्देशों का असर जमीन पर कितना दिखाई दे रहा है। सवाल अब यही है रात में मेयर के निरीक्षण के दौरान दिखी सक्रियता क्या रोज की व्यवस्था बनेगी...क्योंकि शहर की असली सफाई की परीक्षा निरीक्षण वाली रात नहीं, हर रात होती है।
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गंडक बाढ़ से एनएच-722 जलमग्न, हजारों लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पहुंचे

Chapra, Bihar:ANCHOR: गंडक की बाढ़ से एनएच-722 जलमग्न, 3 से 5 फीट पानी में डूबा हाईवे, हजारों परिवार प्रभावित मकेर में बाढ़ का भयावह मंजर, जान जोखिम में डालकर सुरक्षित ठिकानों की ओर जाते दिखे लोग, रेस्क्यू में जुटी एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की सात टीमें, गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर ने सारण जिले में तबाही मचा दी है। बाढ़ का पानी अब छपरा-मुजफ्फरपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-722 तक पहुंच गया है। मकेर में करीब तीन से चार किलोमीटर तक हाईवे पूरी तरह जलमग्न हो गया है। सड़क पर तीन से पांच फीट तक पानी बह रहा है, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को अपनी जान बचाने के लिए घर-बार छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन करना पड़ रहा है। गंडक की बाढ़ ने मकेर इलाके में भयावह स्थिति पैदा कर दी है। बीती रात से तेजी से बढ़ रहे पानी ने देखते ही देखते कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। छपरा-मुजफ्फरपुर एनएच-722 पर कई किलोमीटर तक पानी भर जाने से सड़क पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है। बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को मोटरबोट के साथ राहत और बचाव कार्य में लगाया है। लेकिन बाढ़ की विभीषिका के बीच राहत और बचाव कार्य को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी भी देखने को मिली। बाढ़ पीड़ितों का आरोप है कि जिस बड़े पैमाने पर लोग बाढ़ में फंसे हैं, उसकी तुलना में बचाव दलों की संख्या कम है। कुछ ग्रामीणों ने रेस्क्यू के दौरान पैसे के लेनदेन का भी आरोप लगाया है। बाइट : बाढ़ पीड़ित ग्राउंड जीरो पर बाढ़ की भयावह तस्वीरें सामने आईं। कहीं लोग अपने बच्चों को लेकर सुरक्षित ठिकानों की ओर भागते दिखे, तो कहीं मवेशियों को बचाने के लिए लोग उफनते पानी के बीच जान जोखिम में डालते नजर आए। जिन लोगों को समय पर सरकारी नाव नहीं मिल सकी, वे तेज बहाव के बीच पैदल ही सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर दिखे। इस दौरान एक पुलिसकर्मी भी दो छोटे बच्चों को गोद में उठाकर बाढ़ के पानी से बाहर निकलता नजर आया। बाढ़ के बीच जिंदगी बचाने की जद्दोजहद कर रहे लोगों के चेहरों पर बेबसी और भय साफ दिखाई दे रहा था। ग्रामीणों का कहना है कि मकेर के हैजलपुर में बांध क्षतिग्रस्त होने के बाद इलाके में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई। वर्ष 2020 में भी एनएच-722 पर बाढ़ का पानी चढ़ा था, लेकिन इस बार नुकसान कहीं अधिक हुआ है। हजारों परिवारों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है। बाइट : बाढ़ पीड़ित बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने बताया कि जिले की 18 पंचायतों में बाढ़ का असर है और करीब एक लाख 70 हजार की आबादी प्रभावित हुई है। प्रशासन की पहली प्राथमिकता बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है। जिले में तीन जगह गंडक नदी का तटबंध और एक जगह जमींदारी बांध क्षतिग्रस्त हुआ है। बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की सात टीमें लगातार काम कर रही हैं। वहीं, प्रभावित लोगों के भोजन के लिए 28 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। बाइट : वैभव श्रीवास्तव, जिलाधिकारी, सारण उधर, बाढ़ प्रभावित इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और लोगों की सुरक्षा को लेकर पुलिस भी अलर्ट है। एसएसपी रौशन कुमार ने बताया कि पुलिस की टीमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और तटबंधों पर लगातार पेट्रोलिंग कर रही हैं। सड़कों के किनारे शरण लिए बाढ़ पीड़ितों की सुरक्षा को देखते हुए यातायात को डायवर्ट किया गया है। पुलिस स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय बनाकर काम कर रही है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। बाइट : रौशन कुमार, एसएसपी, सारण गंडक के बढ़ते जलस्तर ने मकेर में जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। जलमग्न एनएच-722 से लेकर डूबते गांवों तक हर तरफ तबाही का मंजर है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने की है。
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