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202002

अलीगढ़ के सिंचाई विभाग में एंटी करप्शन ने 6 हजार रिश्वत लेते अधिकारी को रंगे हाथ पकड़ लिया

Aligarh, Uttar Pradesh:अलीगढ ब्रेकिंग सिंचाई विभाग वरिष्ठ सहायक जीएफ चतुर्थ श्रेणी आशीष माथुर को एंटी करप्शन की टीम ने 6 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा, रिटायर्ड कर्मचारी भूप Singh से 3 लाख रुपए जीपीएफ निकालने के एवज में लिए गए 6 हजार रुपए, रिटायर्ड कर्मचारी भूप Singh की शिकायत पर एंटी करप्शन की टीम ने सिंचाई विभाग में पहुंच कर बाबू को रंगे हाथ पकड़ा, एंटी करप्शन थाना इंचार्ज अनिल कुमार यादव के नेतृत्व में टीम के द्वारा की गई बड़ी कार्रवाई, अलीगढ़ के थाना सिविल लाइन इलाके सिंचाई विभाग कार्यालय का मामला,
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डोमनपुरा हादसे पर अजय राय ने मुआवजे व केबल सुरक्षा की मांग की

Mau, Uttar Pradesh:मऊ, उत्तर प्रदेश: जिले के डोमनपुरा इस्लामाबाद इलाके में टेंट लगाते समय हाई-टेंशन तार की चपेट में आने से तीन लोगों की दर्दनाक मौत के बाद उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय पीड़ितों के आवास पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर अपनी गहरी शोक संवेदना व्यक्त की। मऊ, उत्तर प्रदेश: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा, "यूपी बिजली विभाग के मंत्री एके शर्मा जी भी यहीं के हैं। उनके क्षेत्र में इतना बड़ा हादसा हो गया। तीन बुनकर समाज के लोगों की मृत्यु हो गई। उनके घर से खुले बिजली के तार गुज़र रहे हैं। बिजली मंत्री अपने क्षेत्र की व्यवस्था नहीं सुधार पा रहे हैं तो पूरे प्रदेश की क्या ही सुधारेंगे? इन लोगों की मांग हैं कि केबल डलवाई जाए। यहां फिर लोग मरेंगे तो एके शर्मा यहां आकर केवल खानापूर्ति करेंगे। 1-1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता क्या है? आप हाथी के मुंह में ज़ीरा डाल रहे हो। यहां आकर दिखावा कर रहे हो। मदद करनी है तो परिवार को 50-50 लाख रुपये दीजिए, नौकरी दीजिए, केबल डलवाएं। दोषियों पर कार्रवाई की जाए..."
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जोधपुर हादसे के बाद फायर कर्मियों के PPE और प्रशिक्षण अनिवार्य, प्रणाली पर सवाल

Jaipur, Rajasthan:Anchor:आग बुझाने वाले ही सुरक्षित नहीं...तो शहर को आग से कौन बचाएगा..जोधपुर में आग बुझाने गए तीन फायरकर्मियों की मौत के बाद स्वायत्त शासन विभाग ने आदेश निकाला है कि बिना ट्रेनिंग और PPE के किसी कर्मचारी को आग में नहीं उतारा जाए। लेकिन इस आदेश ने व्यवस्था पर ही बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या अब तक बिना पर्याप्त ट्रेनिंग के फायरकर्मियों को आग बुझाने भेजा जा रहा था और जब फायर स्टेशनों पर PPE किट पर्याप्त नहीं, हेलमेट-ग्लव्स पुराने हैं और आग की प्रकृति के मुताबिक सुरक्षा संसाधन तक पूरे नहीं हैं, तो सिर्फ आदेश से फायरकर्मी कितना सुरक्षित हो जाएगा। जोधपुर हादसे के बाद निकले आदेश ने समाधान के साथ सिस्टम की कमियां भी सामने ला दी हैं। Bite-झाबर सिंह खर्रा, UDH मंत्री पहला सवाल: PPE ही नहीं तो आदेश की पालना कैसे? स्वायत्त शासन विभाग के आदेश में फायर सूट, ड्रेस, हेलमेट, ग्लव्स, सेफ्टी शूज-बूट, सुरक्षात्मक चश्मे, फेस प्रोटेक्शन सहित काम की प्रकृति के मुताबिक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की बात कही गई है। यहां तक कहा गया है कि जरूरी पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) के बिना कर्मचारी को फायर फाइटिंग में नहीं भेजा जाए। यहीं सवाल खड़ा होता है। जिन फायर स्टेशनों पर पर्याप्त और मानक PPE उपलब्ध नहीं हैं, वहां आग लगने की सूचना आने पर क्या होगा। फायरकर्मी बिना पूरे सुरक्षा उपकरणों के जाएगा या संसाधन आने तक आग बुझाने का काम रुकेगा? दूसरा सवाल: क्या अब तक बिना ट्रेनिंग वाले बुझा रहे थे आग? आदेश का सबसे चौंकाने वाला पहलू प्रशिक्षण को लेकर है। अब स्पष्ट निर्देश देना पड़ा है कि निर्धारित फायर ट्रेनिंग और जरूरी डिप्लोमा, प्रमाण-पत्र नहीं रखने वाले कर्मचारियों को अग्निशमन और प्रत्यक्ष फायर फाइटिंग में नहीं लगाया जाए। इससे सवाल उठता है क्या प्रदेश के निकायों में अब तक बिना निर्धारित प्रशिक्षण या योग्यता वाले कर्मचारियों को भी आग बुझाने के लिए भेजा जा रहा था। तीसरा सवाल: प्रशिक्षित फायरमैन दूसरी ड्यूटी पर क्यों? आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रशिक्षित और डिप्लोमाधारी फायरकर्मियों की सेवाएं मूल रूप से अग्निशमन कार्य में ली जाएं। दूसरी ड्यूटी लगाने पर यह सुनिश्चित किया जाए कि फायर ब्रिगेड की उपलब्धता और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रभावित नहीं हो। यह निर्देश भी मौजूदा व्यवस्था पर सवाल छोड़ता है। क्या प्रशिक्षित फायरकर्मियों को लिपिकीय या दूसरे कामों में लगाकर फायर स्टेशनों पर दूसरे कर्मचारियों से काम कराया जा रहा था? चौथा सवाल: आग की ‘प्रकृति’ अब क्यों याद आई? आदेश में कहा गया है कि फायरकर्मी को घटनास्थल पर भेजने से पहले आग की प्रकृति, जोखिम के प्रकार और संभावित खतरे को देखते हुए जरूरी सुरक्षा संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। इस निर्देश ने पुरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या अब तक हर आग से एक ही तरीके से लड़ा जा रहा था....केमिकल, इलेक्ट्रिकल, गैस, मैटल या सामान्य आग में जोखिम और जरूरी सुरक्षा संसाधन अलग हो सकते हैं। ऐसे में हादसे से पहले आग की प्रकृति के मुताबिक फायरकर्मियों की सुरक्षा और संसाधनों की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी, इसकी समीक्षा भी जरूरी है。 5 सीधे सवाल कितने फायरकर्मियों के पास निर्धारित प्रशिक्षण और वैध डिप्लोमा/प्रमाण-पत्र हैं? कितने फायर स्टेशनों पर प्रत्येक कर्मचारी के लिए पूरी और मानक PPE किट उपलब्ध है? पुराने हेलमेट, ग्लव्स और फायर सूट की फिटनेस/एक्सपायरी का आखिरी ऑडिट कब हुआ? आग की अलग-अलग प्रकृति के मुताबिक विशेष सुरक्षा उपकरण कितने स्टेशनों पर मौजूद हैं? यदि PPE उपलब्ध नहीं है तो आदेश के मुताबिक आग बुझाने कौन जाएगा और जवाबदेही किसकी होगी? बहरहाल, सुरक्षा निर्देशों की अनदेखी कर फायरकर्मी को जरूरी उपकरणों के बिना जोखिमपूर्ण काम में लगाया और दुर्घटना हुई तो संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सवाल है जिम्मेदारी हादसे के बाद ही क्यों.....आयुक्त और अधिशासी अधिकारियों को अब फायर स्टेशनों में ट्रेनिंग, PPE और सुरक्षा संसाधनों की समीक्षा कर कमी dist दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि अब तक फायर स्टेशनों में PPE और प्रशिक्षण का नियमित ऑडिट कौन कर रहा था......कमी थी तो पहले क्यों नहीं पकड़ी गई और संसाधन उपलब्ध कराते की जवाबदेही किसकी थी। दीपक गोयल जी मीडिया जयपुर
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