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SALMAN KHANSALMAN KHANFollow23m ago

राष्ट्र का चौथा स्तंभ : नाम बड़ा, पर क्या काम भी वैसा ही?

ACHALPUR, Uttar Pradesh:प्रतापगढ़ लोकतंत्र में पत्रकारिता को राष्ट्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। यह नाम सुनते ही मन में एक ऐसी संस्था की छवि उभरती है जो निष्पक्ष हो, निर्भीक हो, सत्य के पक्ष में खड़ी हो और जनहित को सर्वोपरि मानती हो। पत्रकारिता का मूल उद्देश्य भी यही है कि वह सत्ता और समाज के बीच एक सेतु का कार्य करे तथा जनता की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाए। जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया (रजि.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ. अनुराग सक्सेना ने एक गोष्ठी के दौरान अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि किन्तु जब हम इसकी धरातलीय वास्तविकता को देखने का प्रयास करते हैं तो स्थिति कुछ चिंताजनक दिखाई देती है। ऐसा प्रतीत होता है कि आज बहुत कम पत्रकार और मीडिया संस्थान अपने मूल स्वरूप को बचाए रखने में सफल हैं। यदि अनुमान लगाया जाए तो शायद केवल 20 से 25 प्रतिशत पत्रकारिता ही अपने वास्तविक दायित्वों का निर्वहन कर रही है, वह भी अनेक चुनौतियों और दबावों के बीच। प्रश्न यह उठता है कि आखिर वह कौन-सा अज्ञात भय है जो राष्ट्र के चौथे स्तंभ को भीतर ही भीतर खोखला कर रहा है? क्या यह राजनीतिक दबाव है? क्या यह आर्थिक निर्भरता है? क्या यह विज्ञापनों की मजबूरी है? या फिर बढ़ते मुकदमों, धमकियों और सामाजिक दबावों का परिणाम है? कारण चाहे जो भी हों, इतना स्पष्ट है कि इन परिस्थितियों ने पत्रकारिता की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को प्रभावित किया है। आज का पत्रकार कई मोर्चों पर संघर्ष कर रहा है। एक ओर उसे सत्य सामने लाने का दायित्व निभाना है, तो दूसरी ओर संस्थागत दबावों, आर्थिक असुरक्षा और व्यक्तिगत जोखिमों का सामना भी करना पड़ता है। ऐसे में अनेक पत्रकार विवश होकर समझौते का मार्ग चुन लेते हैं, जबकि कुछ साहसी पत्रकार तमाम कठिनाइयों के बावजूद सत्य की मशाल जलाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। यह भी सत्य है कि पत्रकारिता का संकट केवल पत्रकारों का संकट नहीं है, बल्कि यह पूरे लोकतंत्र का संकट है। जब समाचार निष्पक्ष नहीं होंगे, जब जनहित के मुद्दे पीछे छूट जाएंगे और जब सत्य दबने लगेगा, तब समाज सही दिशा में निर्णय लेने की क्षमता खोने लगेगा। इसलिए पत्रकारिता की स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा करना केवल मीडिया की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। आज आवश्यकता इस बात की है कि पत्रकारिता अपने मूल मूल्यों—सत्य, निष्पक्षता, साहस और जनहित—की ओर पुनः लौटे। साथ ही पत्रकारों को सुरक्षित और स्वतंत्र वातावरण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे बिना किसी भय या दबाव के अपना कर्तव्य निभा सकें। राष्ट्र का चौथा स्तंभ तभी मजबूत रह सकता है जब उसकी नींव सत्य और स्वतंत्रता पर टिकी हो। यदि यह स्तंभ कमजोर होगा तो लोकतंत्र की पूरी इमारत प्रभावित होगी। इसलिए समय की मांग है कि पत्रकारिता को खोखला करने वाली शक्तियों की पहचान की जाए और उसे पुनः उसकी गरिमा एवं सम्मान के साथ स्थापित किया जाए। तभी चौथा स्तंभ वास्तव में अपने नाम के अनुरूप राष्ट्र और समाज की सेवा कर सकेगा।
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201301
PParveenFollow1h ago

गौतमबुद्धनगर पुलिस को मोटरसाइकिल चोरी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश

Noida, Uttar Pradesh:गौतमबुद्धनगर पुलिस को मोटरसाइकिल चोरी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करने में सफलता मिली है। थाना सेक्टर-20 पुलिस ने मैनुअल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए दो शातिर चोरों को सेक्टर-28 नोएडा क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान सोनू हलदर और नाजिम के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी चोरी की मोटरसाइकिलों को अलग-अलग स्थानों पर छिपाकर रखते थे और बाद में उन्हें बेचने की फिराक में थे। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर चोरी की 11 मोटरसाइकिलें बरामद की हैं। बरामद वाहनों में दिल्ली और गौतमबुद्धनगर क्षेत्र से चोरी की गई बाइकें शामिल हैं। इसके अलावा आरोपी सोनू हलदर के कब्जे से एक अवैध .315 बोर तमंचा और एक जिंदा कारतूस भी बरामद किया गया है। जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपियों का पहले भी आपराधिक इतिहास रहा है और इनके खिलाफ चोरी, आर्म्स एक्ट तथा अन्य मामलों में मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने दोनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं तथा चोरी के वाहनों की खरीद-फरोख्त का नेटवर्क कितना बड़ा है। बाइट// नोएडा एडीसीपी मनीषा सिंह
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उत्तराखंड लोकायुक्त के अध्यक्ष-सदस्यों के चयन के लिए सर्च कमेटी बनी

Noida, Uttar Pradesh:उत्तराखंड | उत्तराखंड में लोकायुक्त के अध्यक्ष और सदस्यों के चयन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए एक सर्च कमेटी (खोज समिति) का गठन किया गया है। कार्मिक और सतर्कता विभाग के सचिव शैलेश बगौली ने यह जानकारी दी। यह निर्णय उत्तराखंड लोकायुक्त अधिनियम, 2014 के तहत गठित पांच सदस्यीय चयन समिति की बैठक में हुई चर्चा और अधिनियम की धारा 4(3) के तहत की गई sिफारिशों के आधार पर लिया गया है। सर्च कमेटी को लोकायुक्त के अध्यक्ष और सदस्यों के तौर पर नियुक्ति के लिए उपयुक्त उम्मीदवारों का एक पैनल तैयार करने और उसे चयन समिति को सौंपने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सर्च कमेटी में नैनीताल हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस (रिटायर्ड) आलोक वर्मा अध्यक्ष के तौर पर; उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडे सदस्य के तौर पर; उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार सदस्य के तौर पर; उत्तराखंड की पूर्व मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी सदस्य के तौर पर; और देहरादून की दून यूनिवर्सिटी की वाइस-चांसलर प्रो. सुरेखा डंगवाल सदस्य के तौर पर शामिल हैं। उत्तराखंड लोकायुक्त अधिनियम, 2014 की धारा 4(4) के तहत तय प्रक्रिया के अनुसार, सर्च कमेटी लोकायुक्त अध्यक्ष और सदस्यों के पदों के लिए उपयुक्त उम्मीदवारों का एक पैनल तैयार करेगी और उसे चयन समिति के अध्यक्ष को सौंपेगी。
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