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जेल जीवन मिशन घोटाले में महेश जोशी की मुश्किलें बढ़ीं; राज्यपाल ने अभियोजन स्वीकृति दी
ACAshish Chauhan
Jan 09, 2026 12:12:18
Jaipur, Rajasthan
जयपुर-जल जीवन मिशन घोटाले में पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी की मुश्किलें बढ़ गई हैं. राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रथम दृष्टया अपराध प्रमाणित होने पर अभियोजन स्वीकृति प्रदान की है. राज्य सरकार इस केस में सक्षम न्यायालय में अभियोग चलाएगी. इस घोटाले में कैसे मुश्किलें बढ़ेंगी, देखें इस रिपोर्ट में! मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अभियोजन- राजस्थान में जल जीवन मिशन घोटाले में पूर्व मंत्री महेश जोशी की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही. 7 महीने तक जेल की सलाखों में रहने के बाद महेश जोशी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी. अब राज्यपाल ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अभियोजन स्वीकृति दे दी है. पूरे मामले में राज्य सरकार भी पक्षकार होगी. राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने महेश जोशी के विरुद्ध धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 के अंतर्गत प्रथम दृष्टया अपराध प्रमाणित होने पर अभियोजन स्वीकृति प्रदान की है. कांग्रेस राज में जल जीवन मिशन में करोड़ों का घोटाला हुआ, जिसमें दो फर्मों के जरिए खुलकर भ्रष्टाचार किया. इस मामले में ED ने पूर्व मंत्री महेश जोशी को 24 अप्रैल को गिरफ्तार किया था. मंत्री झाबर सिंह खर्रा का कहना है कि इस मामले में दोष तय करने के लिए सक्षम न्यायालय में केस चलेगा. किसी भी बख्शा नहीं जाएगा. सभी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. पाँच पॉइंट में समझें, क्या है जल जीवन मिशन घोटाला? पहलाः ग्रामीण पेयजल योजना के तहत सभी ग्रामीण इलाकों में पेयजल की व्यवस्था होनी थी जिस पर राज्य सरकार और केंद्र सरकार को 50-50 प्रतिशत खर्च करना था. इस योजना के तहत डीआई आयरन पाइपलाइन डाली जानी थी. इसकी जगह HDPE की पाइपलाइन डाली गई. दूसरा: पुरानी पाइपलाइन को नया बता कर पैसा लिया गया, जबकि पाइपलाइन डाली ही नहीं गई है. तीसरा: कई किलोमीटर तक आज भी पानी की पाइपलाइन डाली ही नहीं गई है, लेकिन ठेकेदारों ने जलदाय विभाग के अधिकारियों से मिल कर उसका पैसा उठा लिया. चौथा: ठेकेदार पदमचंद जैन हरियाणा से चोरी के पाइप लेकर आया और उन्हें नए पाइप बता कर बिछा दिया और सरकार से करोड़ों रुपए ले लिए. पांचवां: ठेकेदार पदमचंद जैन ने फर्जी कंपनी के सर्टिफिकेट लगाकर टेंडर लिया, जिसकी अधिकारियों को जानकारी थी. इसके बाद भी उसे टेंडर दिया गया, क्योंकि वह एक राजनेता का दोस्त था. SIT कर रही जांच- JJM घोटाले में 200 इंजीनियर SIT के रडार पर है. चीफ इंजीनियर से लेकर JEN तक एसीबी के जांच के घेरे में है. इस घोटाले में SIT 4 मसलों को लेकर गहनता से जांच कर रही है. जिसमें 20 हजार करोड़ के स्पेशल प्रोजेक्ट में 20 टैंडरों में शर्तें नियम बदलकर बड़ी फर्मों को अनुचित लाभ देने की कोशिश की गई. टैंडरों में साइड इंस्पेक्शन की शर्त लगाई थी, जिसमें टैंडर से पहले ही भाग लेने वाली फर्मों को साइट इंस्पेक्शन करना था और एक्सईएन को इसका प्रमाण पत्र देना था. दूसरा इरकॉन कंपनी के नाम से फर्जी प्रमाण बनाने में किस किस की भूमिका रही. इंजीनियरों ने श्री श्याम और गणपति ट्यूबवेल फर्म के लिए फर्जी प्रमाण पत्रों से 900 करोड़ के टैंडर दिए थे. तीसरा बिना काम के 55 करोड़ के फर्जी पेमेंट में किया गया. जिसमें 139 इंजीनियर जांच के दायरे में है. इंजीनियर ने जयपुर जिला सर्किट में 10 करोड़, कोटपूतली बहरोड में 14 करोड़, दौसा में 19, अलवर में 3, नीमकाथाना और झुंझुनू में 2.50-2.50 करोड़ का फर्जी पेमेंट किया गया. घोटाले में चौथा मामला ठेकेदारों के दफ्तर-घर से 178 से ज्यादा मेजरमेंट बुक मिलने की जांच की जा रही है. इस मामले में अब तक 5 गिरफ्तारियां हो चुकी है.
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