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महोबा - नहर का पानी छोड़े जाने से एक दर्जन किसानों की कई बीघा गेहूं की फसल हुई जलमग्न ।
Mahoba, Uttar Pradesh
महोबा जिले के कबरई विकासखंड में सिंचाई विभाग की बड़ी लापरवाही का मामला प्रकाश में आया है । जहां बरीपुरा मौजा में नहर का पानी छोड़े जाने से एक दर्जन किसानों की कई बीघा गेहूं की फसल जलमग्न हो गई है। आरोप है कि पूर्व प्रधान ने अपने फायदे के लिए नहर को ज्यादा खोल दिया, जिससे खेत तालाब बन गए। फसल डूबने से परेशान किसान अब सरकार से मुआवजे की मांग कर न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
महोबा के कबरई विकासखंड के बरीपुरा मौजा में सिंचाई विभाग की लापरवाही ने एक दर्जन किसानों को खून के आंसू रुला दिए है। दरअसल बरीपुरा नहर का पानी अनियंत्रित तरीके से छोड़े जाने के कारण किसानों की करीब 12 बीघा गेहूं की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई है । डढ़हत माफ गांव निवासी किसानों का आरोप है कि पूर्व ग्राम प्रधान हरिचरन ने अपने निजी स्वार्थ के लिए नहर के पानी को क्षमता से अधिक खोल दिया। नतीजा यह हुआ कि नहर का पानी खेतों में घुस गया और देखते ही देखते खेत तालाब में तब्दील हो गए। कहीं-कहीं तो पानी का स्तर चार फिट तक पहुंच गया है, जिससे गेहूं की खड़ी फसल डूबकर बर्बाद होने की कगार पर है। हैरानी की बात यह है कि जब खेतों में पानी भरना शुरू हुआ, तो पीड़ित किसानों ने तत्काल सिंचाई विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। किसानों ने गुहार लगाई कि पानी को रोका जाए या कम किया जाए, लेकिन जिम्मेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी और अधिकारियों की उदासीनता एवं पूर्व प्रधान की मनमानी के कारण आशाराम, मनसुख, सुमेरा, लखनलाल, केसरदास और राधारानी जैसे तमाम किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया है। आज ये किसान अपने खेतों के किनारे खड़े होकर अपनी डूबी हुई फसल को बेबसी से देख रहे हैं। जिस फसल से इन्हें घर चलाने और कर्ज चुकाने की उम्मीद थी, वह आज सरकारी तंत्र की लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। अब पीड़ित किसान प्रशासन से न्याय की गुहार लगा कर मुआबजा की मांग कर रहे है ।
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