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गाजीपुर के कई गांवों में बच्चों के दिव्यांग होने मामला आया सामने,मचा हड़कंप,डीएम ने दिए जांच के आदेश
Ghazipur, Uttar Pradesh
गाजीपुर के मनिहारी, सदर और देवकली ब्लॉक के कई गांवों में दर्जनों बच्चे मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग होने का मामला सामने आया है। हैरान करने वाली बात यह है कि ये बच्चे जन्म के समय पूरी तरह स्वस्थ थे, लेकिन कुछ महीनों बाद तेज बुखार के बाद दिव्यांग हो गए। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है। डीएम ने मामले में जांच और इलाज के लिए सीएमओ को आदेश दिया है। मामले में डीएम अविनाश कुमार ने प्राथमिक जांच में वायरल फीवर और प्रेग्नेंसी कॉम्प्लिकेशन की आशंका जताई है।
बता दें कि गाजीपुर जिले के मनिहारी, सदर और देवकली ब्लॉक के करीब 15 से 20 गांवों में बच्चों के दिव्यांग होने का मामला सामने आया है। इन गांवों में दर्जनों बच्चे मानसिक और शारीरिक रूप से अक्षम पाए गए हैं। परिजनों के अनुसार, बच्चे जन्म के समय पूरी तरह स्वस्थ होते हैं, लेकिन चार से छह महीने की उम्र में अचानक तेज बुखार आता है। बुखार ठीक होने के बाद बच्चे न तो ठीक से बोल पाते हैं और न ही चल-फिर पाते हैं। फतेहुल्लापुर, हरिहरपुर, पठानपुर, हाला, शिकारपुर, धरी कला, अगस्ता, भोरहा, भिक्केपुर, तारडीह, गोला और रठूली समेत कई गांवों में हर गांव में लगभग 8 से 10 बच्चे इस गंभीर समस्या से पीड़ित हैं। इलाज के अभाव और आर्थिक तंगी के कारण परिजन बेहद परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि कुछ परिवारों को मानसिक रूप से अस्वस्थ बच्चों को रस्सी और जंजीरों से बांधकर रखने को मजबूर होना पड़ रहा है। हमारा बच्चा पैदा होते समय बिल्कुल ठीक था। चार महीने बाद बुखार आया, उसके बाद से बच्चा कुछ समझ नहीं पा रहा। इलाज कराने के लिए पैसे नहीं हैं, बहुत परेशानी है। वहीं बच्चों की इस पीड़ा को देखते हुए जिले के सामाजिक कार्यकर्ता सिद्धार्थ राय ने पूरे मामले को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल तक पहुंचाया। राज्यपाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
राज्यपाल के विशेष कार्य अधिकारी एवं अपर मुख्य सचिव डॉ. सुधीर एम. बोबडे ने जिलाधिकारी गाजीपुर को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई और रिपोर्ट सचिवालय को भेजने के निर्देश दिए। इस दौरान समाजिक कार्यकर्ता सिद्धार्थ राय ने बताया कि यह सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि मानवता का मुद्दा है। इतने बच्चे एक साथ दिव्यांग हो रहे हैं। इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए और बच्चों को तुरंत बेहतर इलाज मिलना चाहिए। मामला राज्यपाल के संज्ञान में आते ही जिला प्रशासन हरकत में आया। जिलाधिकारी ने पूरे मामले की जांच मुख्य चिकित्साधिकारी को सौंपी है। प्राथमिक जांच में स्वास्थ्य अधिकारियों को आशंका है कि प्रेग्नेंसी कॉम्प्लिकेशन और कुछ तरह के वायरल फीवर के कारण बच्चों में यह समस्या उत्पन्न हुई है। मामले में डीएम अविनाश कुमार ने मामले को गंभीरता से लिया गया है। सीएमओ और दिव्यांग कल्याण अधिकारी को जांच और बच्चों के समुचित इलाज व सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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