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धूप मिलते ही गेहूं की फसल में खर पतवार नाशक डालने लगे किसान
Chaugorwa, Uttar Pradesh
तराई और ग्रामीण अंचलों में लगातार चार दिनों तक घने कोहरे, ठंड और बादलों की मौजूदगी के बाद रविवार को जैसे ही तेज धूप निकली, किसानों ने राहत की सांस ली। मौसम साफ होते ही गेहूं की फसल में खरपतवार नियंत्रण का कार्य तेज हो गया। खेतों में हरकत बढ़ गई और बड़ी संख्या में किसान अपने-अपने खेतों में खरपतवार नाशकों का छिड़काव करते नजर आए।
पिछले कई दिनों से मौसम प्रतिकूल बना हुआ था। लगातार ठंड और धुंध के कारण किसान खरपतवार नाशकों के छिड़काव को टाल रहे थे। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ठंड, कोहरा और नमी के दौरान दवा का असर सही नहीं पड़ता, जिससे फसल को नुकसान की आशंका बनी रहती है। ऐसे में किसानों को मौसम साफ होने का इंतजार था। चार दिन बाद जैसे ही धूप निकली और तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी हुई, किसानों ने तुरंत खेतों का रुख किया।
गेहूं की फसल में बढ़ रहे खरपतवार
किसानों का कहना है कि इस वर्ष गेहूं की बुवाई के बाद पर्याप्त नमी मिलने से फसल तो अच्छी हुई, लेकिन इसके साथ ही खेतों में खरपतवार भी तेजी से पनपे। गेहूं की शुरुआती अवस्था में खरपतवार फसल के लिए सबसे बड़ा खतरा माने जाते हैं। यदि समय पर इन्हें नष्ट न किया जाए तो ये पौधों से पोषक तत्व, पानी और धूप छीन लेते हैं, जिससे पैदावार पर सीधा असर पड़ता है।
खेतों में मुख्य रूप से बथुआ, जंगली जई, गुल्ली डंडा, सेंजी और चौलाई जैसे खरपतवार देखे जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि 25 से 35 दिन के भीतर इन पर नियंत्रण न किया जाए तो बाद में इन्हें खत्म करना मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से धूप निकलते ही किसानों ने बिना समय गंवाए छिड़काव शुरू कर दिया।
दवाओं का चयन और सावधानी
किसान अपनी-अपनी जमीन और खरपतवार की किस्म के अनुसार दवाओं का चयन कर रहे हैं। कुछ किसान चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार के लिए अलग दवा का प्रयोग कर रहे हैं, तो कुछ घास वर्गीय खरपतवार के लिए उपयुक्त खरपतवार नाशक का छिड़काव कर रहे हैं। वहीं कई किसान मिश्रित खरपतवार को ध्यान में रखते हुए मिश्रित दवाओं का उपयोग कर रहे हैं।
कृषि विभाग और जानकार किसानों की सलाह है कि छिड़काव हमेशा साफ मौसम में किया जाए। हवा की रफ्तार कम हो, ताकि दवा उड़कर अन्य फसलों पर न गिरे। साथ ही निर्धारित मात्रा में ही दवा का प्रयोग करना चाहिए, अधिक मात्रा फसल को नुकसान पहुंचा सकती है।
मौसम खुलने से बढ़ी उम्मीद
धूप निकलने से न सिर्फ किसानों का कार्य आसान हुआ, बल्कि फसल की बढ़वार में भी तेजी आने की उम्मीद जगी है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड के बाद धूप निकलने से गेहूं की पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया तेज होती है, जिससे पौधे मजबूत होते हैं। यदि इस समय खरपतवार पर नियंत्रण कर लिया जाए तो फसल का विकास बेहतर होगा और बालियों में दाने भरने की क्षमता भी बढ़ेगी।
कई किसानों ने बताया कि चार दिन तक खेतों में जाना भी मुश्किल हो गया था। कोहरे और ठंड के कारण सुबह के समय दृश्यता कम रहती थी, जिससे छिड़काव जोखिम भरा हो सकता था। अब मौसम साफ होने से खेतों में ट्रैक्टर और स्प्रे मशीनों की आवाजें गूंजने लगी हैं।
ग्रामीण इलाकों में बढ़ी चहल-पहल
मौसम साफ होते ही गांवों में फिर से कृषि गतिविधियों में तेजी आ गई है। सुबह से ही किसान अपने खेतों की ओर निकल रहे हैं। स्प्रे पंप, दवा और पानी लेकर खेतों में काम चल रहा है। कई जगहों पर किसान आपस में सलाह-मशविरा करते भी नजर आए कि किस खेत में कौन सी दवा उपयुक्त रहेगी।
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