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Vijay Kumar SinghVijay Kumar SinghFollow26 Dec 2024, 10:23 am

Amethi - चोरों ने तीन दुकानों को बनाया निशाना , हजारों के माल पर किया हाथ साफ

Pindara Thakur, Uttar Pradesh:

चोरों ने तीन दुकानों को बनाया निशाना,हजारों के माल पर किया हाथ साफ. मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र के गौरीगंज चौराहे पर बीती रात चोरों ने तीन दुकानों को निशाना बनाया .ज्वैलरी, ऑटो पार्ट्स और किराने की दुकानों के दरवाजे और शटर तोड़कर चोर लाखों रुपये का सामान और हजारों रुपये नकदी लेकर फरार हो गए। दुकान मालिकों ने सुबह शटर टूटे देख मामले की जानकारी पुलिस को दी। सूचना मिलते ही मुसाफिरखाना कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। इस वारदात ने पुलिस की गश्त और सुरक्षा उपायों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुकानदारों ने बताया कि रोजाना की तरह वह रात में अपनी दुकानें बंद कर घर चले गए थे। सुबह जब वे दुकान पहुंचे तो शटर और दरवाजे टूटे मिले।

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डोडा- किश्तवार में भारी बारिश से बाढ़, सड़कें ध्वस्त, राहत कार्य जारी

Doda, Heavy rains triggered multiple cloudbursts and flash floods on Tuesday in the districts of Doda and Kishtwar, disrupting normal life, blocking roads and inundating residential areas. While several vehicles were trapped under debris and floodwaters entered houses in some locations, authorities have confirmed that no loss of life has been reported so far. Emergency teams have been deployed and restoration work is underway. Meanwhile Batote-Doda-Kishtwar highway has been partially restored. Heavy rainfall lashed several parts of Doda and Kishtwar districts on Tuesday, triggering three cloudbursts and multiple flash floods across the region. Two cloudbursts were reported in Kishtwar district, one in the Gahan area of Sarthal and another in Machhipal, while a third cloudburst struck the Thathri area of Doda district. The sudden flash floods swept through parts of Thathri, carrying mud, stones and debris onto roads and into residential areas. Several parked vehicles were trapped under debris while floodwaters entered a number of houses, forcing authorities to shift affected residents to safer locations. Visuals from the area showed roads buried under mud and debris, with traffic movement badly affected. The Doda-Kishtwar highway also witnessed disruptions due to landslides and accumulation of debris. District administration officials immediately swung into action, deploying teams from Revenue, Police, Disaster Management and other departments to assess the situation and assist affected residents. Authorities activated emergency control rooms and directed all concerned departments to remain on high alert. Restoration work was launched on a war footing, with men and machinery pressed into service to clear blocked roads and restore connectivity. With hectic efforts, the highway and other several roads were restored partially, while full restoration is going on. Officials said that despite the intensity of the weather event, no casualties, injuries or major damage to property have been reported so far. The administration has also issued an advisory asking people living near rivers, nallahs and landslide-prone areas to remain vigilant and avoid unnecessary movement until weather conditions improve. The cloudbursts and flash floods once again highlight the vulnerability of the hilly districts of the Chenab Valley to extreme weather events. While prompt response by the administration helped avert any loss of life, authorities continue to monitor the situation closely as weather forecasts predict further rainfall in the region.
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पुंछ में विश्व साइकिल दिवस पर साइकिल रैली से जीवनशैली और नशा-मुक्ति का संदेश

Chikri Ban, एंकर: विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर पुंछ में युवा सेवाएं एवं खेल विभाग की और से और साइकिल रैली और जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं और आम जनता में स्वस्थ जीवनशैली, पर्यावरण संरक्षण, साइकिलिंग को बढ़ावा देने तथा नशा मुक्त समाज के प्रति जागरूकता फैलाना था। वीओ: विश्व साइकिल दिवस के मौके पर स्पोर्ट्स स्टेडियम पुंछ से साइकिल रैली का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों, खिलाड़ियों और विभागीय अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में DySP DR शशिकांत मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे, जिन्होंने रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर जिला युवा सेवाएं एवं खेल अधिकारी पुंछ मोहम्मद कासिम सहित विभाग के सभी अधिकारी भी उपस्थित रहे। रैली के दौरान प्रतिभागियों ने स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने का संदेश दिया। वक्ताओं ने कहा कि साइकिलिंग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, बल्कि प्रदूषण को कम करने और पर्यावरण की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने युवाओं से खेल गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहने की अपील की। उन्होंने "स्पोर्ट्स की तरफ आएं, नशे से दूर रहें" और "फिट रहोगे तो हिट रहोगे" जैसे नारों के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया。
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बस्तर पुलिस ने 133.3 ग्राम अफीम के साथ आरोपी गिरफ्तार; NDPS एक्ट तहत मामला दर्ज

Jagdalpur, Chhattisgarh:बस्तर पुलिस ने नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 133.3 ग्राम अवैध अफीम के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। कोतवाली पुलिस को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति जगदलपुर के गोयलबाड़ी तिराहा के पास अफीम बेचने के लिए ग्राहक का इंतजार कर रहा है। सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी जगदीश चौधरी को पकड़ लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने बरामद पदार्थ को शिलाजीत बताकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने FSL किट से जांच कराई, जिसमें पदार्थ अफीम पाया गया। आरोपी मूल रूप से राजस्थान के जोधपुर का रहने वाला है और जगदलपुर में किराए के मकान में रहकर नशे का कारोबार कर रहा था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से करीब 66 हजार 500 रुपये कीमत की 133.3 ग्राम अफीम जब्त की है। आरोपी के खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 18(B) के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। बस्तर पुलिस ने साफ किया है कि जिले में नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।
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31 जुलाई तक चुनाव: डेटा मिलते ही पंचायत-निकाय प्रक्रिया शुरू

Noida, Uttar Pradesh:जयपुर।पंचायती राज और स्वायत्त शासन चुनाव को लेकर हलचल।हाईकोर्ट ने चुनाव कराने की 31 जुलाई की समय सीमा बरकरार रखी।राज्य निर्वाचन आयोग ने आरक्षण संबंधी डेटा फिर मांगा।पंचायती राज और स्वायत्त शासन विभाग को आयोग का पत्र।चुनाव की तैयारियों के लिए जरूरी आंकड़े जल्द उपलब्ध कराने को कहा।आयोग ने कहा-डेटा मिलते ही आगे बढ़ेगी चुनावी प्रक्रिया।पिछली बार डेटा नहीं मिलने से अटका था चुनाव कार्यक्रम।15 अप्रैल को चुनाव नहीं कराने पर आयोग को कोर्ट में माफी मांगनी पड़ी थी।अप्रैल में चुनाव कराने के लिए आयोग ने सरकार को 8 बार पत्र लिखे थे।लेकिन विभागों से नहीं मिला आयोग को संतोषजनक जवाब।ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट का दिया गया था हवाला।आरक्षण संबंधी आंकड़ों के अभाव में नहीं हो सकी थी चुनाव प्रक्रिया।डेढ़ वर्ष से लंबित हैं पंचायती राज और निकाय चुनाव।'वन स्टेट, वन इलेक्शन' की मंशा भी बनी चर्चा का विषय।अब सभी की नजर सरकार द्वारा डेटा उपलब्ध कराने पर।
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बलरामपुर के गांवों में आजादी के 78 साल बाद भी सुविधाओं का भारी अभाव

Balrampur, Uttar Pradesh:बलरामपुर जनपद के नेपाल बॉर्डर से सटे कुछ गांव आज आजादी के 78 वर्षों बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे है। जहां देश डिजिटल इंडिया, स्मार्ट गांव और ग्रामीण विकास की बढ़ रहा हैं। गांवों तक इंटरनेट, सड़क और स्वास्थ्य सहित तमाम सुविधाएं पहुंच रही है। लेकिन नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर जिले के विकासखंड पचपेड़वा के कुछ गांव ऐसे भी हैं, जहां आजादी के 78 साल बाद भी लोगों की जिंदगी नालों, जंगलों और कच्ची पगडंडियों के भरोसे चल रही है। आजादी के पहले के समय में जीवन व्यतीत करते नजर आ रहे है। बलरामपुर के इन गांव की हकीकत दिखाने के लिए Zee मीडिया ग्राउंड जीरो पर जाने की ठानी, जहां पर पहुंचने के लिए zee न्यूज़ के रिपोर्टर को अपने गाड़ी को छोड़कर करीब ढाई किलोमीटर पैदल यात्रा करनी पड़ी जो झाड़ी झुमखारियों से घिरी हुई थी। फिर एक नाले में उतारकर पानी पार करना पड़ा है तब जाकर गांव तक हम पहुंच पाए हैं। यहां तक पहुंचने में रिपोर्टर के पैर में चोट भी लगा क्योंकि रास्ते सही न होने की वजह से पैर फिसल गया। लेकिन तब भी जी न्यूज़ हकीकत दिखाने के लिए ग्राउंड पर पहुंचा। जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित थारू जनजाति बहुल गांव रजडेरवा, चैन बनकटवा, सकरा-सकरी, मुतेहरा, सोनगढ़ा और अकलघरवा विकास की मुख्यधारा से अब भी कटे हुआ है। यहां पहुंचने के लिए लोगों को नालों—भांभर, घंघरावुल, डरवा, पथरहवा और मूसी नाला—को पार करना पड़ता है। गांव वाले बताते है कि हर गांव के पास दो नाला जरूर है। गांव बरसात में घिर स जाता है। हर गांव के बीच करीब 6 से 7 किलोमीटर का सफर है, लेकिन यह दूरी किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं। लोग आधुनिक वाहनों का प्रयोग नहीं कर सकते है क्योंकि रास्ते है ही नहीं। जब गर्मी के दिनों में सभी रस्ते सूख जाते है। पानी कीचड़ नहीं होता है लेकिन इन रास्तों पर पहाड़ी नालों का पानी बहता नजर आ जाता है। गर्मी के दिनों में लोग किसी तरह नालों से होकर तो निकल जाते हैं, लेकिन बारिश शुरू होते ही हालात बदल जाते हैं। नालों में उफान आने के बाद गांवों का संपर्क बाहरी दुनिया से लगभग चार महीने के लिए टूट जाता है। ग्रामीण इसे हर साल का "वनवास" बताते हैं। रजडेरवा थारू की रहने वाली एक महिला बताती हैं, "अगर बाजार जाना हो तो पहले तीन किलोमीटर पैदल चलो, फिर कहीं जाकर कोई साधन मिलता है। बरसात में तो घर से निकलना भी मुश्किल हो जाता है। बच्चों की पढ़ाई छूट जाती है और बीमार पड़ने पर भगवान ही सहारा होते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर है। गांव में कोई सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस कभी नहीं पहुंच पाती। यदि कोई गंभीर रूप से बीमार हो जाए या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो, तो परिजन मरीज को चारपाई पर लादकर करीब 3 किलोमीटर पैदल चलते हैं। इसके बाद किसी वाहन तक पहुंचकर अस्पताल का रास्ता तय होता है। ग्रामीण बताते हैं कि बरसात आने से पहले ही उन्हें दवाइयों, राशन और अन्य जरूरी सामान का इंतजाम कर लेना पड़ता है। क्योंकि बारिश के दौरान नालों का तेज बहाव गांवों को दुनिया से अलग कर देता है। गांवों तक जाने वाला रास्ता भी आसान नहीं है। पगडंडी के दोनों ओर ऊंची घास और झाड़ियां फैली हैं। राणा, कटरा गोंद और ढढ़ढ़ी जैसी घासों के बीच सांप, बिच्छू और अन्य जंगली जीव-जंतु अक्सर दिखाई देते हैं। ऐसे में हर सफर खतरे से भरा होता है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि उनकी समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है। उनका कहना है कि चुनाव के समय नेता और जनप्रतिनिधि गांव पहुंचते हैं, विकास के वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सब कुछ भूल जाते हैं। विडंबना यह है कि इनमें से अकलघरवा गांव को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गोद लिए गए गांवों में भी शामिल बताया जाता है। इसके बावजूद यहां के लोग आज भी सड़क, पुल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में हैं। यहां के लोगों ने एक बार फिर Zee मीडिया के माध्यम से प्रशासन से सुविधाओं को पाने की गुहार लगाई है। एक बार फिर आस लगाए बैठे हुए है कि शायद सुविधा मिल जाए। बलरामपुर का यह गांव अब भी एक ऐसी सड़क का सपना देख रहा है, जो उन्हें बारिश के चार महीने के अंधेरे से निकालकर विकास की रोशनी तक पहुंचा सके। यहां के लोगों की आंखों में आज भी वही सवाल है—क्या आजादी के 78 साल बाद भी उनके हिस्से का विकास अभी बाकी है?
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धौलपुर रेलवे स्टेशन अब सौर ऊर्जा से पूरी बिजली बनाएगा, 150 किलोवाट क्षमता

Dholpur, Rajasthan:बिल की टेंशन खत्म! धौलपुर स्टेशन अब खुद बनाएगा अपनी बिजली धूप बनेगी धौलपुर स्टेशन की ताकत अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजकर रेलवे कमाएगा राजस्व, 86 लाख के बकाया बिल से मिलेगी राहत धौलपुर रेलवे स्टेशन अब बिजली के मामले में खुद पर निर्भर होगा। रेलवे ने स्टेशन पर लगे 87 किलोवाट के सोलर प्लांट को बढ़ाकर 150 किलोवाट करने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है। नई क्षमता शुरू होते ही स्टेशन अपनी जरूरत की लगभग पूरी बिजली सौर ऊर्जा से बना लेगा। इससे रेलवे का बिजली बिल घटेगा, 86 लाख का बकाया कम होगा और जरूरत से ज्यादा बनी बिजली बेचकर अतिरिक्त कमाई भी होगी। पर्यावरण को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा। 87 से 150 किलोवाट होगी उत्पादन क्षमता धौलपुर रेलवे स्टेशन जल्द ही बिजली के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। स्टेशन पर सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना को अंतिम रूप दिया जा चुका है। इसके तहत वर्तमान में स्थापित 87 किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट को बढ़ाकर 150 किलोवाट किया जाएगा। क्षमता बढ़ने के बाद स्टेशन अपनी जरूरत की लगभग पूरी बिजली खुद तैयार कर सकेगा और बिजली बिल में बड़ी बचत होगी। हरित ऊर्जा और खर्च में कटौती का उद्देश्य रेलवे द्वारा हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने और बिजली खर्च कम करने के उद्देश्य से यह महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। फिलहाल धौलपुर रेलवे स्टेशन परिसर में लगे सौर पैनलों से बिजली उत्पादन किया जा रहा है, लेकिन बढ़ती जरूरतों को देखते हुए इसकी क्षमता बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार नई क्षमता शुरू होने के बाद स्टेशन की दैनिक बिजली आवश्यकताओं की पूर्ति बड़े स्तर पर सौर ऊर्जा से हो सकेगी। इससे बाहरी स्रोतों से बिजली खरीदने की जरूरत काफी कम हो जाएगी और रेलवे के बिजली खर्च में उल्लेखनीय कमी आएगी। अतिरिक्त बिजली से होगी कमाई यह योजना का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि जरूरत से अधिक उत्पादित बिजली को विद्युत निगम के ग्रिड में भेजा जाएगा। इससे रेलवे को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। वर्तमान में रेलवे पर विद्युत विभाग का करीब 86 लाख रुपये का बकाया बिल है। अधिकारियों का मानना है कि सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ने से भविष्य में बिजली खरीद पर होने वाला खर्च घटेगा और आर्थिक बोझ कम करने में मदद मिलेगी। अतिरिक्त बिजली की बिक्री रेलवे के लिए राजस्व का नया स्रोत भी बनेगी। खाली जमीन पर लगेंगे नए पैनल योजना के तहत रेलवे ट्रैक के आसपास और स्टेशन क्षेत्र में खाली पड़ी भूमि का उपयोग भी किया जाएगा। इन स्थानों की साफ-सफाई कर वहां नए सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इससे बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ-साथ अनुपयोगी भूमि का भी बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। रेलवे का उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना है। पर्यावरण को भी मिलेगा फायदा सौर ऊर्जा से तैयार बिजली का उपयोग स्टेशन की रोशनी, कार्यालयों, यात्री सुविधाओं और रेल संचालन से जुड़े विभिन्न उपकरणों को चलाने में किया जाएगा। इससे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। कार्बन उत्सर्जन में कमी आने से यह परियोजना हरित ऊर्जा अभियान को और मजबूत करेगी। परियोजना पूरी होने के बाद धौलपुर रेलवे स्टेशन उन चुनिंदा स्टेशनों में शामिल हो जाएगा, जो अपनी बिजली जरूरतों को काफी हद तक स्वयं पूरा करने में सक्षम होंगे। आगरा मंडल का 2000 किलोवाट का लक्ष्य गौरतलब है कि आगरा रेल मंडल वर्तमान में 1789 किलोवाट सौर ऊर्जा का उत्पादन कर रहा है। मंडल का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 2000 किलोवाट तक पहुंचाने का है। वर्ष 2024-25 के दौरान मंडल ने 15.15 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन किया था और अतिरिक्त बिजली बेचकर 63.51 लाख रुपये की आय अर्जित की थी। अब धौलपुर रेलवे स्टेशन भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बनने की तैयारी कर रहा है।
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राजा साहब की याद: खैरागढ़ में देवव्रत सिंह की राजनीतिक यात्रा आज भी जीवंत

Khairgarh, Uttar Pradesh:सत्ता बदली दौर बदले लेकिन राजा साहब की याद नहीं बदली खैरागढ़ की राजनीति में कई नेता आए और गए लेकिन एक नाम ऐसा है जिसे आज भी लोग सम्मान और अपनत्व के साथ याद करते हैं स्वर्गीय राजा देवव्रत सिंह। उनकी जन्म जयंती पर एक बार फिर क्षेत्र में उनकी राजनीतिक यात्रा और जनसेवा की चर्चा हो रही है। राजघराने में जन्म लेने के बावजूद देवव्रत सिंह ने अपनी पहचान महलों से नहीं बल्कि गांव की चौपालों और आम जनता के बीच बनाई। यही वजह रही कि वे केवल एक राजनेता नहीं बल्कि लोगों के सुख दुख के सहभागी बन गए। जनता उन्हें नेता से ज्यादा राजा साहब कहकर पुकारना पसंद करती थी। देवव्रत सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन में चार बार विधायक और एक बार सांसद के रूप में जनता का प्रतिनिधित्व किया। कांग्रेस के प्रभावशाली नेताओं में उनकी अलग पहचान रही। बाद में राजनीतिक परिस्थितियों के बीच उन्होंने नई राह चुनी लेकिन जनता का भरोसा उनके साथ बना रहा और वर्ष 2018 में वे फिर विधायक निर्वाचित हुए। उनकी राजनीति की सबसे बड़ी विशेषता जनता से सीधा संवाद था। किसी ग्रामीण की समस्या हो किसान की चिंता हो या सामाजिक आयोजन राजा साहब की मौजूदगी अक्सर लोगों के बीच दिखाई देती थी। यही कारण है कि उनका जनाधार दल और पद से कहीं बड़ा माना जाता था। 4 नवंबर 2021 को उनके निधन की खबर ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया था। आज भी खैरागढ़ के गांवों और चौपालों में जब राजनीति की चर्चा होती है तो राजा देवव्रत सिंह का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। उनकी जयंती केवल एक नेता को याद करने का अवसर नहीं बल्कि उस दौर को याद करने का मौका है जब राजनीति और जनता के बीच रिश्तों में आत्मीयता दिखाई देती थी। शायद यही वजह है कि वर्षों बाद भी खैरागढ़ की जनता कहती है कि राजा साहब आज भी हमारे दिलों में जिंदा हैं।
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झारखंड राज्यसभा चुनाव: सियासी कज़स् फिर उलझे, किस चेहरे पर लगेगा मोहर?

Ranchi, Jharkhand:झारखंड में राज्यसभा चुनाव के लिए सियासी sस्पेंस बरकरार है। बीजेपी और कांग्रेस राज्यसभा को लेकर अपने केंद्रीय नेतृत्व के संपर्क में लगातार बना है। वहीं सूबे में राजनीतिक बयानबाजी भी जारी है। राज्यसभा को लेकर सत्ताधारी दल के पास आंकड़े हैं तो उम्मीदवार को लेकर पेंच उलझा हुआ है। अब तक गठबंधन में झामुमो और कांग्रेस ने उम्मीदवारों पर तस्वीर साफ नहीं किया तो बीजेपी ने भी उम्मीदवार देने का ऐलान किया है पर चेहरा कौन अब तक क्लियर नहीं है. राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस कोटे के मंत्री इरफान अंसारी ने कहा मैं डंके की चोट पर कहता हूँ सीएम साहेब जिसको चाहेगें वो राज्यसभा का सदस्य बन जाएगा। बॉस के विवेक पर है किनको चुनते हैं। एक कांग्रेस को मिलना चाहिए और कांग्रेस का जो भी उम्मीदवार होगा बिना बॉस के आशीर्वाद से नहीं जीतेगा। हमलोग ने अपने बॉस पर छोड़ दिया है। मेरा मानना है कांग्रेस के लोकसभा में मुस्लिम का टिकट काट दिया गया। राज्यसभा में किसी al्पसंख्यक को देने की बात कही गई थी, अगर किसी माइनरिटी को मिलता है तो ये सीट निकल जाएगा. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा, राज्यसभा के लिए पार्टी के शीर्षस्थ नेता देख रहे हैं सीएम से भी बात कर रहे हैं। पांच से 6 जून तक क्लियर हो जाएगा। कांग्रेस ने अपनी दावेदारी किया है, पूरा उम्मीद है कांग्रेस को एक सीट मिलेगा। जो हमने दावा किया है वो एक सीट मिल जाए फिर प्रत्याशी की बात होगी. झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा, अमूमन हर चुनाव में इस तरह की परिस्थिति पैदा होती है, एक अहम चुनाव दो सीटें जीतने का संकल्प और इसके साथ ही इंडिया गठबन्धन की मुकम्मल तैयारी चल रही है। एक दो दिन और संशय के बदल रह सकते हैं। पांच या छः जून तक स्थिति स्पष्ट होगी। हम चुनाव लड़ेंगे और सीएम हेमंत सोरेन की रणनीतिक कौशल पर हमें पूरा भरोसा है। अपने सहयोगियों को विश्वास में लेकर विचार विमर्श के उपरांत दोनों उम्मीदवार की घोषणा होगी और जीतेगें। कांग्रेस के आला नेता सीएम हेमंत सोरेन के संपर्क में हैं, संवाद चल रहा है. बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा, बीजेपी ने स्पष्ट घोषणा किया है हम उम्मीदवार देंगें और चुनाव लड़ेगे, पूरे दम खम से लड़ेंगे। इस बार बीजेपी किसी भी धन पशु को टिकट नहीं देने जा रही है। जो भी चुनाव लड़ेगा बीजेपी का कार्यकर्ता होगा। हम चुनाव लड़ेगे और सही समय पर नाम की घोषणा हो जाएगी। बाकी दूसरे दलों को देखना चाहिए। कांग्रेस और जेएमएम आपस में फरिया ले
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