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ED starts major action against Apoorva group in ₹195 crore fraud case
ACAshish Chauhan
Jan 24, 2026 11:15:16
Jaipur, Rajasthan
अपेक्षा ग्रुप पर 195 करोड़ की ठगी का आरोप, मामले में ED की जाँच,कार्रवाई जारी,
जयपुर-राजस्थान में निवेश के नाम पर हजारों लोगों की गाढ़ी कमाई डकारने वाले अपेक्षा समूह के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है。
15 करोड़ की संपत्ति कुर्क-
ईडी के जयपुर जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए अपेक्षा समूह की कुल 15.97 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। इस कार्रवाई से प्रदेश के हाड़ौती अंचल के उन हजारों निवेशकों को न्याय की उम्मीद जगी है, जिनके करोड़ों रुपए इस पोंजी स्कीम की भेंट चढ़ गए थे। ईडी के अनुसार, प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत कुल 37 अचल संपत्तियों और एक चल संपत्ति को अटैच किया गया है। ये संपत्तियां मुख्य रूप से आवासीय और कृषि भूमि के रूप में हैं, जो राजस्थान के कोटा, बूंदी और बारां जिलों में स्थित हैं।
खाते फ्रीज,जनता को ठगा-
ईडी के राडार पर मुरली मनोहर नामदेव, दुर्गा शंकर मेरोठा, अनिल कुमार, गिरिराज नायक और शोभा रानी जैसे मुख्य आरोपी और उनके सहयोगी हैं। इसके अतिरिक्त, समूह के बैंक खाते में जमा 1.50 करोड़ रुपए को भी फ्रीज कर दिया गया है। जांच में खुलासा हुआ है कि अपेक्षा ग्रुप ने आम जनता को झांसा देकर करीब 194.76 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि जुटाई थी। राजस्थान पुलिस द्वारा दर्ज विभिन्न एफआईआर के आधार पर ईडी ने इस मनी लॉन्ड्रिंग की परतें खोलना शुरू किया। मास्टरमाइंड मुरली मनोहर नामदेव और उसके साथियों ने बेहद शातिर तरीके से ऐसी फर्जी स्कीमें तैयार की थीं, जो निवेशकों को कम समय में अकल्पनीय 'हाई रिटर्न' का लालच देती थीं। हकीकत में, इन स्कीमों के पीछे कोई कानूनी आधार या ठोस वित्तीय बैकअप नहीं था।
2012- 2020 तक चला खेल-
यह पूरा गोरखधंधा 2012 से 2020 के बीच फल-फूल रहा था। आरोपी नए निवेशकों से पैसा लेकर पुराने निवेशकों को थोड़ा-बहुत रिटर्न देते थे, ताकि बाजार में भरोसा बना रहे और ज्यादा से ज्यादा लोगों को फंसाया जा सके। यह 'मायाजाल' तब टूटा जब कोविड-19 महामारी के दौरान आर्थिक संकट आया और निवेशकों ने अपना मूल धन वापस मांगना शुरू किया। पैसा वापस करने में असमर्थ रहने पर पूरा 'अपेक्षा ग्रुप' ताश के पत्तों की तरह ढह गया।
कई नई कंपनिया खोली-
ईडी की जांच में यह भी साफ हुआ है कि निवेशकों से जुटाए गए फंड का इस्तेमाल उनके लाभ के लिए नहीं, बल्कि आरोपियों की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए किया गया। करोड़ों रुपए की इस राशि को गैर-कानूनी तरीके से डायवर्ट कर नई कंपनियां खोली गईं और बेशकीमती संपत्तियां खरीदी गईं। फिलहाल ईडी इस मामले में आगे की जांच कर रही है, जिससे इस घोटाले से जुड़े अन्य चेहरों और बेनामी संपत्तियों के बेनकाब होने की संभावना है。
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