हाथरस के दो श्रद्धालुओं की मौत, एक का शव गांव पहुंचा, महाराष्ट्र में हुआ था हादसा, पुलिस फोर्स की मौजूदगी में अंतिम संस्कार
हाथरस के सासनी क्षेत्र के गांव समामई में उस समय गमगीन माहौल हो गया, जब गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के लिए पदयात्रा पर निकले एक श्रद्धालु का शव गांव पहुंचा। महाराष्ट्र के वडनेरकर में 2 जनवरी को हुए एक हादसे में समामई निवासी श्रद्धालु जगदीश की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस हादसे में घायल हुए एक अन्य श्रद्धालु छोटू उर्फ पीयूष (16) पुत्र योगेश दीक्षित निवासी बबूल गांव, हाथरस जंक्शन की भी कल देर रात उपचार के दौरान वहीं मौत हो गई है। उसका शव कल उसके गांव पहुंचेगा। घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।यह पदयात्रा भोला पंडित के नेतृत्व में 51 लीटर गंगाजल के साथ हरिद्वार से रामेश्वरम तक के लिए शुरू की गई थी, जिसमें छह श्रद्धालु शामिल थे। यात्रा के 59वें दिन 2 जनवरी को जब जत्था नागपुर के वडनेरकर क्षेत्र से गुजर रहा था, तभी एक अनियंत्रित ट्रक ने श्रद्धालुओं के ट्रैक्टर को जोरदार टक्कर मार दी। घटना के बाद भोला पंडित ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर इस हादसे को एक साजिश करार दिया। उन्होंने अपने ही गांव के कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए। इन आरोपों के बाद पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया। गांव में शव पहुंचने की सूचना पर बजरंग दल, हिंदू वाहिनी और गौ रक्षक दल सहित विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में जमा हो गए। सीओ सिटी योगेन्द्र कृष्ण नारायण और एसडीएम नीरज शर्मा के साथ चार से पांच थानों की पुलिस फोर्स गांव में मुस्तैद रही। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में मृतक जगदीश का अंतिम संस्कार किया गया। मृतक जगदीश का 12 वर्षीय पुत्र भी इस यात्रा में उनके साथ था और उसने अपनी आंखों के सामने पिता को खो दिया। जगदीश की पत्नी का पहले ही बीमारी के कारण निधन हो चुका है, जिसके चलते अब यह बच्चा अनाथ हो गया है। महाराष्ट्र की वडनेरकर थाना पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज किया है। अधिकारियों ने मृतक के परिजनों को यथासंभव आर्थिक मदद दिलाने का भरोसा दिलाया।इस दौरान वहां पर मुरसान के ब्लॉक प्रमुख रामेश्वर उपाध्याय और सीओ सिटी योगेंद्र कृष्ण नारायण के बीच नोक झोंक भी हो गई। ब्लॉक प्रमुख व कुछ अन्य लोगों ने मृतक आश्रित को आर्थिक सहायता देने की मांग की तो सीओ सिटी ने यह कहा कि पहले शव का अंतिम संस्कार हो जाने दो, आर्थिक सहायता की बात बाद में कर लेंगे।
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