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गोरुमारा वन्य क्षेत्र में दुर्गापूजा पर सांसद डॉ. जयंत राय माता के साथ पहुंचे

ABArup BasakJust now
Mal Bazar, West Bengal:গরুমারা বন্যপ্রাণ বিভাগের অধীন গরুমারা দক্ষিণ রেঞ্জের বিছাভাঙ্গা বনবস্তিতে দুর্গাপুজোয় উপস্থিত হলেন সাংসদ ডা. জয়ন্ত রায়। এদিন তিনি তাঁর মাকে সঙ্গে নিয়ে পুজো মণ্ডপে আসেন এবং বনবস্তি এলাকার পুজো পরিদর্শন করেন। বন দপ্তরের উদ্যোগে আয়োজিত এই দুর্গাপুজো দেখতে প্রতি বছরই ভিড় জমান পর্যটকদের। পুজোকে আরও আকর্ষণীয় করে তুলতে এদিন আয়োজন করা হয় আদিবাসী নাচ ও গানের। বনাঞ্চলের বাসিন্দাদের অংশগ্রহণে পুজো প্রাঙ্গণ হয়ে ওঠে উৎসবমুখর। এই পুজোকে ঘিরে বনবস্তির মানুষের মধ্যে রয়েছে বিশেষ উৎসাহ। প্রতিদিনই নিয়ম মেনে অনুষ্ঠিত হয় মায়ের আরতি। পাশাপাশি থাকে আদিবাসী নাচ-গানের আয়োজন এবং ভক্তদের জন্য ভোগের ব্যবস্থা। বনাঞ্চলের পরিবেশে ঐতিহ্য ও সংস্কৃতির মেলবন্ধনে বিছাভাঙ্গার এই দুর্গাপুজো স্থানীয় বাসিন্দাদের পাশাপাশি পর্যটকদের কাছেও আকর্ষণের কেন্দ্র হয়ে উঠেছে।
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सहारनपुर पुलिस ने दशहरा पर 35 स्थानों पर रावण दहन के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की

Saharanpur, Uttar Pradesh:सहारनपुर। दशहरा पर्व को शांतिपूर्ण और सकुशल संपन्न कराने के लिए सहारनपुर पुलिस अलर्ट मोड पर है। शहर में करीब 35 स्थानों पर रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जहां रावण के साथ कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का भी दहन होगा। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और पीएसी तैनात की गई है। पुलिस फ्लैग मार्च कर रही है, जबकि रूफटॉप ड्यूटी और ड्रोन के माध्यम से भी निगरानी रखी जा रही है। शोभायात्राओं, मेलों और रावण दहन स्थलों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। एसपी सिटी व्योम बिंदल ने बताया कि सिटी सर्किल क्षेत्र में करीब 35 स्थान ऐसे हैं, जहां बड़े स्तर पर रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन स्थानों पर लगभग 42 पुतलों का दहन होगा, जिनमें रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले शामिल हैं। कई स्थानों पर तीनों पुतलों का संयुक्त रूप से दहन किया जाएगा। सभी स्थानों पर कार्यक्रमों का समय अलग-अलग है। कई जगहों पर शोभायात्रा संपन्न होने के बाद ही रावण दहन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि दशहरा पर्व को देखते हुए पुलिस की ओर से सभी स्थानों पर कार्यक्रमों के अनुरूप पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके अतिरिक्त पीएसी की भी तैनाती की गई है। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत بنانے के लिए रूफटॉप ड्यूटी लगाई गई है और ड्रोन के माध्यम से भी निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था या कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्या उत्पन्न न हो। एसपी सिटी ने बताया कि दशहरे के अवसर पर कुछ स्थानों पर पारंपरिक मेले भी आयोजित किए जाते हैं। जिन स्थानों पर नियमानुसार अनुमति लेकर मेले लगाए जा रहे हैं, वहां भी पुलिस की ओर से पर्याप्त बल तैनात किया गया है। इसके साथ ही शहर में विभिन्न स्थानों से शोभायात्राएं भी निकाली जाती हैं। इन शोभायात्राओं के दौरान पुलिसकर्मी लगातार साथ रहकर सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे। शोभायात्रा के समापन के बाद कई स्थानों पर रावण दहन किया जाएगा, इसलिए शोभायात्राओं के पूरे मार्ग पर पुलिस की ड्यूटी लगाई गई है। यातायात व्यवस्था को लेकर एसपी सिटी व्योम बिंदल ने बताया कि फिलहाल किसी विशेष ट्रैफिक डायवर्जन की योजना लागू नहीं की गई है। शहर में विभिन्न स्थानों पर शोभायात्राएं निकाली जाएंगी, लेकिन अभी तक लोगों की भागीदारी और यातायात की स्थिति को देखते हुए अलग से डायवर्जन की आवश्यकता महसूस नहीं हुई है। हालांकि, यदि किसी स्थान पर यातायात का दबाव बढ़ता है या डायवर्जन की जरूरत पड़ती है, तो उसके संबंध में लोगों को समय रहते सूचना दी जाएगी। पुलिस प्रशासन का उद्देश्य दशहरा पर्व को शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराना है। इसके लिए सभी प्रमुख स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है और पुलिसकर्मियों को सतर्क रहकर ड्यूटी करने के निर्देश दिए गए हैं।
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बिशप कॉन्वेंट स्कूल में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया डांडिया महोत्सव

Saurabh YadavSaurabh YadavFollow8m ago
Prayagraj, Uttar Pradesh:नैनी, प्रयागराज। नैनी स्थित बिशप कॉन्वेंट स्कूल में गत दिवस डांडिया महोत्सव का आयोजन बड़े हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम में बच्चों ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और परंपराओं की सुंदर झलक प्रस्तुत की। पूरे विद्यालय परिसर में उत्सव का माहौल रहा और सभी ने मिलकर पर्व को उल्लासपूर्वक मनाया। कार्यक्रम का शुभारंभ नवरात्रि एवं मां दुर्गा की महिमा से जुड़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। बच्चों ने पारंपरिक परिधानों में सजकर उत्सव की शोभा बढ़ाई। इसके पश्चात बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक स्वरूप रावण दहन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके बाद डांडिया नृत्य का आयोजन हुआ, जिसमें बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। इस अवसर पर समाजसेवी सरदार पतविंदर सिंह एवं सौरव कुमार उपस्थित रहे। उन्होंने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया और भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़े रहने का संदेश दिया। विद्यालय के निदेशक श्री संजय पाठक ने बच्चों को नवरात्रि, मां दुर्गा की महिमा और डांडिया पर्व के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना और शक्ति की उपासना का प्रतीक है। यह पर्व हमें नारी शक्ति के सम्मान, बुराई पर अच्छाई की विजय तथा सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने बताया कि डांडिया नृत्य विशेष रूप से गुजरात की समृद्ध लोक-संस्कृति से जुड़ा हुआ है और नवरात्रि के दौरान बड़े उत्साह से किया जाता है। डांडिया में प्रयोग की जाने वाली रंग-बिरंगी लकड़ियां मां दुर्गा की आराधना से जुड़ी पारंपरिक नृत्य शैली का अभिन्न अंग हैं। इन लकड़ियों को लयबद्ध तरीके से आपस में टकराकर नृत्य किया जाता है, जो सामूहिकता, अनुशासन, समन्वय और आनंद की भावना को दर्शाता है। उन्होंने बच्चों को समझाया कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं, धार्मिक मान्यताओं और भारतीय विरासत से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्यालय की प्रबंधक श्रीमती अलका पाठक एवं प्राचार्या श्रीमती रुचि मिश्रा के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर सभी अभिभावकों, अध्यापिकाओं, अध्यापकों एवं विद्यालय के अन्य सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। सभी ने बच्चों का उत्साह बढ़ाया और कार्यक्रम को यादगार बनाया। अंत में विद्यालय परिवार ने भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण तथा बच्चों में नैतिक मूल्यों, सांस्कृतिक चेतना और आपसी सद्भाव को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया। पूरे कार्यक्रम का समापन हर्षोल्लास और उत्सवपूर्ण वातावरण में हुआ।
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भगवानगड के नए महंत कृष्णा महाराज शास्त्री की नियुक्ति अमृत महोत्सवी वर्ष में

Ahilyanagar, Maharashtra:अहिल्यानगर च्या श्री क्षेत्र भगवानगडाच्या अमृत महोत्सवी वर्षात दसऱ्याच्या शुभमुहूर्तावर ह.भ.प. न्यायाचार्य डॉ. श्री. नामदेव महाराज शास्त्री बाबांच्या हस्ते कृष्णा महाराज शास्त्री यांची भगवानगडाच्या चतुर्थ महंतपदी विधिवत नियुक्ती करण्यात आली. गडाच्या स्थापनेला ७५ वर्षे पूर्ण होत असतानाच नवीन महंतांची नियुक्ती झाल्याने या सोहळ्याला विशेष महत्त्व प्राप्त झाले. संत भगवानबाबांनी १९५१ मध्ये दसऱ्याच्या दिवशी श्री क्षेत्र भगवानगडाची स्थापना केली होती. यंदा गडाचे अमृत महोत्सवी वर्ष साजरे होत आहे. या ऐतिहासिक वर्षात कृष्णा महाराज शास्त्री यांना गादीवर विराजमान करण्याचा निर्णय विद्यमान मठाधिपती डॉ. नामदेव महाराज शास्त्री आणि श्री क्षेत्र भगवानगड ट्रस्टने घेतला होता. मात्र, दुष्काळी परिस्थिती लक्षात घेऊन नियोजित भव्य सोहळ्याऐवजी कार्यक्रम साधेपणाने पार पडला. तरीही या ऐतिहासिक क्षणाचे साक्षीदार होण्यासाठी हजारो भाविक गडावर उपस्थित होते. कृष्णा महाराज शास्त्री हे मूळचे तेलंगणातील असून, १७ वर्षांपूर्वी ते भगवानगडावर आले. त्यांनी गडावरील ज्ञानेश्वरी विद्यापीठात सलग १२ वर्षे राहून डॉ. नामदेव महाराज शास्त्रीच्या मार्गदर्शनाखाली ज्ञानेश्वरी आणि अन्य धार्मिक ग्रंथांचे अध्ययन केले. एम.ए.पर्यंत शिक्षण घेतलेल्या कृष्णा महाराजांनी विद्या पारंगत झाल्यानंतर एकनाथवाडी येथील निरंजन संस्थानचे महंत म्हणून सुमारे तीन वर्षे कार्य केले. डॉ. नामदेव महाराज शास्त्रीनी सुमारे दोन वर्षांपूर्वी कृष्णा महाराजांना आपला उत्तराधिकारी घोषित केले होते. त्यावेळी एकनाथवाडी येथील ग्रामस्थांनी त्यांना रथातून, ढोल-ताशांच्या गजरात, टाळ-मृदंगाच्या निनादात आणि हरिनामाच्या जयघোষात भगवानगडावर आणले होते. त्यांना निरोप देताना ग्रामस्थ भावूक झाले होते. त्यानंतर दसऱ्याच्या शुभमुहूर्तावर त्यांच्या नियुक्तीचा सोहळा संपन्न झाला. कृष्णा महाराज शास्त्री यांना गादीवर विराजमान केल्यानंतर डॉ. नामदेव महाराज शास्त्री बाबांनी सामाजिक जीवनातून पूर्णपणे निवृत्ती घेतली आहे. यापुढील आयुष्य ज्ञानेश्वरीचा भावानुवाद लिहिण्यासाठी समर्पित करण्याचा त्यांचा संकल्प आहे. संत भगवानबाबांनी आयुष्यभर ज्ञानेश्वरीचे वाचन केले, तर नामदेव महाराज शास्त्री तिचा भावानुवाद लिहिण्याचे कार्य करीत आहेत. महाराष्ट्राच्या आध्यात्मिक आणि साहित्यिक क्षेत्रासाठी ही अभिमानाची बाब मानली जात आहे. यापुढेही त्यांचे ग्रंथलेखन आणि साहित्यनिर्मिती सुरू राहणार आहे.दरम्यान, श्री क्षेत्र भगवानगडाच्या भक्तांनी यापुढे मठाधिपती म्हणून कृष्णा महाराज शास्त्री यांच्याशी संपर्क साधावा, असे आवाहन करण्यात आले आहे. अमृत महोत्सवी वर्षात झालेली ही नियुक्ती भगवानगडाच्या धार्मिक परंपरेतील महत्त्वाचा टप्पा ठरली आहे.
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खैरथल तिजारा के किशनगढ़बास में खाद्य सुरक्षा टीम ने 220 किग्रा खाद्य पदार्थ नष्ट, देसी घी जब्त

Bagheri Kalan, Rajasthan:खैरथल तिजारा जिले के किशनगढ़बास में खाद्य सुरक्षा विभाग और जिला स्पेशल टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। जहां बेड़ा का बास क्षेत्र में की गई इस कार्रवाई के दौरान करीब 120 किलो बदबूदार कलाकंद और 100 किलो मिश्रित दूध को मौके पर नष्ट करवाया गया, जबकि 120 किलो देसी घी को भी जब्त किया गया है। विभाग ने अलग अलग खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं। जिसकी रिपोर्ट आने के बाद संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अरविंद गेट के अनुसार की माने तो त्योहारी सीजन को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग और जिला स्पेशल टीम पुलिस ने बेड़ा का बास किशनगढ़बास में मैसर्स कमरुद्दीन और मैसर्स सुमरदिन के यहां संयुक्त कार्रवाई की, कार्रवाई के दौरान मैसर्स कमरुद्दीन के यहां से दूध, कलाकंद और मिल्क पाउडर के सैंपल लिए गए, जिसे मौके पर करीब 120 किलो बदबूदार कलाकंद और 100 किलो बदबूदार मिश्रित दूध को नष्ट करवाया गया। वहीं मैसर्स सुमरदिन के यहां से दूध, कलाकंद और पोद्दार ब्रांड के देसी घी के सैंपल लिए गए, इसके साथ ही करीब 120 किलो देसी घी जब्त किया गया।
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झुंझुनूं के sुलताना में विजयादशमी पर 251 साल पुरानी तोपों की अद्भुत पूजा

Jhunjhunu, Rajasthan:सुलताना, झुंझुनूं सुलताना में विजयादशमी पर ऐतिहासिक तोपों का पूजन सुलताना में विजयादशमी पर 251 साल पुरानी परंपरा का निर्वहन मांडण युद्ध में जीत के बाद लाई गईं दोनों ऐतिहासिक तोपों की पूजा वर्ष 1775 में रेवाड़ी के मांडण में हुआ था ऐतिहासिक युद्ध सुलताना बसाने वाले हाथी सिंह अपने पुत्रों के साथ युद्ध में हुए थे शामिल पंडित मधुसूदन शर्मा के सानिध्य में विधि-विधान से हुआ शस्त्र पूजन विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए झुंझुनूं जिले के सुलताना कस्बे में मंगलवार को ऐतिहासिक तोपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। ग्रामीणों के अनुसार, ये दोनों तोपें वर्ष 1775 में हरियाणा के रेवाड़ी जिले के मांडण में हुए ऐतिहासिक युद्ध में विजय के बाद सुलताना लाई गई थीं। पंडित मधुसूदन शर्मा के सानिध्य में आयोजित पूजा में ग्रामीणों ने भाग लेकर अपनी ऐतिहासिक विरासत और परंपरा को याद किया।ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 1775 में हरियाणा के रेवाड़ी जिले के मांडण में ऐतिहासिक युद्ध हुआ था। इस युद्ध में झुंझुनूं क्षेत्र के विभिन्न शेखावत वंशों के पूर्वजों ने जयपुर और भरतपुर की सेनाओं के साथ मिलकर दिल्ली की शाही सेना का मुकाबला किया था। बताया जाता है कि इस युद्ध में सुलताना को बसाने वाले हाथी सिंह भी अपने पुत्रों के साथ शामिल हुए थे। युद्ध में विजय के बाद हाथी सिंह दोनों तोपों को अपने साथ सुलताना ले आए थे।तभी से इन तोपों को कस्बे की ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संजोया जाता रहा है। ग्रामीण हर वर्ष विजयादशमी के अवसर पर इनकी पूजा-अर्चना करते हैं। यह परंपरा क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास, वीरता और पूर्वजों के शौर्य की याद दिलाती है।पूजा स्थल पर शेखावाटी के संस्थापक महाराव शेखाजी की 589वीं जयंती भी मनाई गई। इस अवसर पर उनके चित्र के सम्मुख पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। ग्रामीणों ने महाराव शेखाजी के जीवन, शौर्य और नारी स्वाभिमान के प्रति उनके योगदान को याद किया।ग्रामीण गजेंद्र सिंह टिकाई ने बताया कि महाराव शेखाजी का जीवन स्वाभिमान, साहस और त्याग का प्रतीक रहा है। उनके वंशजों और क्षेत्र के लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को अपने इतिहास, संस्कृति और पूर्वजों के योगदान से जोड़ने का माध्यम हैं।सुलताना में विजयादशमी पर होने वाला यह आयोजन केवल शस्त्र पूजन तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने का प्रतीक भी है। हर वर्ष होने वाली पूजा के माध्यम से ग्रामीण अपनी विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। बाइट : गजेंद्र सिंह टिकाई
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विजयदशमी पर सीताराम मंदिर में शस्त्र पूजन, वीरता और धर्म की मिसाल

Dholpur, Rajasthan:विजयदशमी पर सीताराम मंदिर में विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की ओर से विधि-विधान के साथ शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान धार्मिक परंपराओं के अनुसार शस्त्र पूजन कर संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने शस्त्र पूजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह वीरता, साहस, धर्म और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। विजयदशमी का पर्व सत्य की जीत और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देता है। शस्त्र पूजन की परंपरा समाज में साहस, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। कार्यक्रम में विहिप के प्रखंड अध्यक्ष देवेंद्र गर्ग, प्रखंड मंत्री शिवम खेमरिया सहित विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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तिरुपति बालाजी मंदिर में प्राकट्योत्सव के साथ डांडिया-फूलों की होली महोत्सव; विजेताओं को पुरस्कार

Churu, Rajasthan:चूरू。 सुजानगढ़。 श्री वेंकटेश्वर मंदिर (तिरुपति बालाजी) में मना भगवान का प्राकट्योत्सव, फूलों की होली संग सजी डांडिया रास की महफिल विजेताओं को किया गया पुरस्कृत सुजानगढ़。 श्री वेंकटेश्वर मंदिर (तिरुपति बालाजी) परिसर में नवरात्र के उपलक्ष्य में सोमवार रात डांडिया नृत्य एवं गरबा महोत्सव का आयोजन धूमधाम से किया गया। इस दिन विशेष बात यह रही कि भगवान का जन्म दिवस (प्राकट्योत्सव) भी हर्षोल्लास के साथ मनाया गया , जिसके तहत श्रद्धालु भगवान के साथ फूलों की होली खेली। श्री वेंकटेश्वर फाउंडेशन की चेयरपर्सन एवं मुख्य ट्रस्टी मंजू देवी जाजोदिया ने जानकारी देते हुए बताया कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को संजोए रखने तथा उत्सव की उमंग के साथ मंदिर प्रांगण में डांडिया रास एवं फूलों की होली का भव्य आयोजन किया गया है। जिसमे भाग लेने वाली सभी बहनों को मंदिर प्रबंधन की ओर से डांडिया उपलब्ध कराया गया। गरबा महोत्सव में पारंपरिक डांडिया पोशाक में भाग लेकर श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली प्रतिभागियों में से प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान हासिल करने वाली बहनों को श्री वेंकटेश्वर भगवान के आशीर्वाद व कृपा प्रसाद के रूप में विशेष उपहार एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया । इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालु भगवान के संग फूलों की होली खेलकर भक्ति के रंग में सराबोर हुए । महोत्सव के समापन पर भगवन वेंकटेश की महाआरती की गई, इसके बाद भोग सवामणि प्रसाद एवं पुरस्कार वितरण किया गया । बाइट मंजू देवी जाजोदिया, मुख्य ट्रस्टी, श्री वेंकटेश्वर फाउंडेशन
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