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झांसी में संरक्षा सेमीनार का हुआ आयोजन
Jhansi Rly. Settl, Jhansi, Uttar Pradesh:मंडल रेल प्रबंधक दीपक कुमार सिन्हा के मार्गदर्शन में झांसी में एक महत्वपूर्ण संरक्षा सेमिनार का आयोजन किया गया था। सूचना के अनुसार इस संवाद में 19 रनिंग कर्मचारियों ने भाग लिया। वहीं सेमिनार में आटोमेटिक सिग्नल प्रणाली, हाल की घटनाओं की समीक्षा, और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर विशेष ध्यान दिया गया। साथ ही कर्मचारियों को विभिन्न सिग्नलों, अधिकार पत्रों और गति सीमाओं के बारे में जानकारी दी गई।
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वाराणसी: बालिका महोत्सव में गूंजा बेटी बचाओ का नारा, हरसोस में बाल विवाह-दहेज के खिलाफ निकली रैली
Varanasi, Uttar Pradesh:मयंक कश्यप/वाराणसी। जंसा क्षेत्र के हरसोस गांव में सोमवार को आशा ट्रस्ट द्वारा बालिका महोत्सव का आयोजन किया गया। हरसोस, नागेपुर, बीरभानपुर, हरपुर, खेवली, भतसार, कपड़फोड़वा सहित कई गांवों से सैकड़ों किशोरियों ने कन्या भ्रूण हत्या, बाल विवाह, दहेज और यौन उत्पीड़न के खिलाफ रैली निकालकर जागरूकता का संदेश दिया। रैली में "बाल विवाह बंद करो, तिलक दहेज छोड़ो, कन्या भ्रूण हत्या बंद करो, भीख नहीं अधिकार चाहिए" जैसे नारों से गांव गूंज उठा। आशा सिलाई कढ़ाई केंद्र पर आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ लोक समिति संयोजक नंदलाल मास्टर ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। किशोरियों ने नुक्कड़ नाटक, भाषण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से बाल विवाह और दहेज के दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि कम उम्र में शादी से लड़कियों की पढ़ाई छूटती है और सेहत पर बुरा असर पड़ता है। सामाजिक कार्यकर्ता आशा राय ने कहा कि आज घर में भी लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं, इसलिए यौन हिंसा के प्रति जागरूकता और शिक्षा बेहद जरूरी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता अनीता पटेल ने की, संचालन मनीषा ने और स्वागत चंद्रकला-प्रेमा ने किया।0
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भदोही जनगणना-2027 के द्वितीय चरण के अंतर्गत प्रगणकों एवं प्रशिक्षणों के साथ डीएम ने की वार्ता
Sadawpur, Pali, Uttar Pradesh:जिलाधिकारी एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी शैलेष कुमार ने आज सेंट थॉमस स्कूल, ज्ञानपुर में जनगणना-2027 के द्वितीय चरण के अंतर्गत प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने प्रशिक्षण व्यवस्था का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए तथा जनगणना कार्य को पूरी गंभीरता, सटीकता एवं निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप संपन्न कराने पर जोर दिया। जनगणना प्रशिक्षण के दौरान जिलाधिकारी के साथ सीडीओ बाल गोविंद शुक्ल,ा बीएसए शिवम पांडेय,एसडीएम अरुण दीक्षित वह तहसीलदार समेत कई अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे0
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बिरलोका जीएसएस से अब अजमेर डिस्कॉम के सभी जिलों में दिन में बिजली बंटेगी
Jaipur, Rajasthan:मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की किसानों को दीपावाली से पहले बड़ी सौगात अजमेर डिस्कॉम के सभी जिलों में किसानों को अब दिन में मिलेगी बिजली नागौर के बिरलोका में 220 केवी जीएसएस सफलताप्रव starting के साथ शुरू हुआ इससे अजमेर विद्युत वितरण निगम के सभी 14 जिलों में किसानों को दिन के समय दो ब्लॉक में बिजली आपूर्ति मिल सकेगी इस व्यवस्था से क्षेत्र के किसानों को रात में सिंचाई कार्य से राहत मिलेगी तथा कृषि कार्य अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक हो सकेगा दिन में किसानों को बिजली मिलने का सपना साकार हो गया है; शुरूआत अजमेर डिस्कॉम से हो रही है सीएम भजनलाल शर्मा के लगातार प्रयासों से अब किसानों को ठंड के मौसम में खेतों में सिंचाई करने की मजबूरी से आजादी मिल गई है नागौर के बिरलोका में जीएसएस के शुरू होने से शेष जिलों में भी इस व्यवस्था का विस्तार होगा इस परियोजना से बिरलोका, नारवा, हिसाबा, पांचला सिद्धा, खींवसर, पांचौड़ी सहित आसपास के क्षेत्रों को लाभ मिलेगा संपूर्ण खींवसर तहसील में किसानों को दिन के समय दो ब्लॉक में बिजली उपलब्ध होगी बिरलोका जीएसएस में लगभग 170 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 160 MVA क्षमता का 220/132 केवी पावर ट्रांसफॉर्मर स्थापित किया गया है आधुनिक SCADA प्रणाली के उपयोग से पश्चिमी राजस्थान में उत्पादित सौर ऊर्जा का नागौर जिले में बेहतर उपयोग संभव होगा वोल्टेज स्तर, बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में सुधार होगा सीएम भजनलाल शर्मा का दावा है कि बिजली कंपनियां अब घाटे से बाहर निकल रही हैं, और वो जल्द मुनाफे में आएंगी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कृषक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 2027 तक प्रदेश के किसानों को दिन में बिजली आपूर्ति की बजट घोषणा की थी; इस दिशा में प्रदेश के 26 जिलों में किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने का सरकार کا वादा पूरा हो गया है, बाकी के पंद्रह जिलों में भी अगले साल तक दिन में बिजली मिलने लगेगी आखिरकार जो काम दशकों में नहीं हो पाया, सीएम भजनलाल शर्मा के प्रयासों से उसे पौने तीन साल में ही पूरा करके दिखा दिया गया किसानों के लिए सीएम भजनलाल शर्मा की इससे बड़ी और कोई सौगात हो ही नहीं सकती0
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बेगूं में खेत की तारबंदी फंसने से मादा पैंथर की मौत
Begun, Rajasthan:बेगूं, चित्तौड़गढ़ - चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं क्षेत्र में नाथूराम जी का खेड़ा गांव में खेत की तारबंदी में फंसने से करीब 2 से 3 वर्ष की मादा पैंथर की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, ग्रामीण गोविंद बंजारा ने वन विभाग को सूचना दी कि देवी सिंह राजपूत के खेत में पैंथर तारबंदी में फंसा हुआ है। सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू के लिए उच्चाधिकारियों को सूचित किया गया, लेकिन रेस्क्यू दल के पहुंचने से पहले ही पैंथर की मौत हो गई। इसके बाद मेडिकल बोर्ड ने अधिकारियों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम किया। जांच में पैंथर के सभी अंग सुरक्षित मिले। पोस्टमार्टम के बाद नियमानुसार अंतिम संस्कार किया गया।0
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पाइपलाइन में 8 फीट की जड़ से पानी सप्लाई फिर से शुरू, क्षेत्रीय राहत
Jaipur, Rajasthan:पानी की समस्या जड़ से खत्म, पाइपलाइन में फंसी 8 फीट लंबी जड़ एक महीने बाद आई पानी जयपुर- मुरलीपुरा में पानी की समस्या जड़ से खत्म हो गई. दरअसल इलाके में पाइप लाइन में पेड़ की जड़ें जमी थीं जिससे गंगा-जमुना कॉलोनी में एक महीने से पानी की समस्या से सैकड़ों लोग जूझ रहे थे. जांच के दौरान पाइपलाइन में करीब 8 फीट लंबी जड़ फंसी मिली, जिससे पानी की सप्लाई बाधित हो रही थी. स्थानीय लोगों की शिकायत पर जलदाय विभाग के कर्मचारियों ने चार-पाँच दिन तक अलग-अलग स्थानों पर खुदाई कर पाइपलाइन की जांच की, लेकिन समस्या का पता नहीं चला. इसके बाद सहायक अभियंता राज सिंह रेस्पवाल मौके पर पहुंचे और दोबारा जांच करवाई. इस दौरान पाइपलाइन में चोकिंग मिली और अंदर फंसी लंबी जड़ सामने आई. कर्मचारियों ने मशक्कत के बाद जड़ को बाहर निकाला और पाइपलाइन को दोबारा जोड़कर सप्लाई शुरू की. जांच में पानी का प्रेशर सही मिला. इससे गंगा-जमुना कॉलोनी के साथ देवनगर और ऋषि कॉलोनी सहित आसपास की कॉलोनियों के लोगों को राहत मिली. मौके पर फिटर बनवारी लाल सैनी, राजपाल शर्मा, मनीष सहित जलदाय विभाग के कर्मचारी मौजूद रहे।0
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झारखंड में मोदी बयान पर कांग्रेस विरोध, बीजेपी ने कांग्रेस कार्यालय घेरा
Ranchi, Jharkhand:पीएम मोदी को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा दिए गए बयान के विरोध में झारखंड बीजेपी के द्वारा कांग्रेस प्रदेश कार्यालय का घेराव किया गया। इस घेराव की अगुआई महानगर बीजेपी अध्यक्ष ने किया और इसमें प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रबिंद्र राय और दीपक प्रकाश सहित बीजेपी के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। एक तरफ बीजेपी के नेता नारेबाजी करते रहे तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता भी हाथों में कांग्रेस पार्टी का झंडा लेकर बीजेपी और पीएम मोदी के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। दोनों तरफ से खूब आरोप प्रत्यारोप सुनाई देता रहा बाइट ... बाबूलाल मरांडी, नेता प्रतिपक्ष बाइट ...रबिंद्र राय ,पूर्व प्रदेश अध्यक्ष,बीजेपी बाइट ...आदित्य साहू, प्रदेश अध्यक्ष, बीजेपी बाइट ...दीपक प्रकाश, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, बीजेपी बाइट ...राकेश सिंहा, प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस बाइट ... किशोर शाहदेव, प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस बाइट...सुनील सिंह, प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस0
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जालौन में 'सीनियरगिरी' पर स्ट्राइक, तनाव बढ़ने की आशंका
Varanasi, Uttar Pradesh:जालौन में 'सीनियरगिरी' पर 'स्ट्राइक'0
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वाल्मीकि जयंती पर राजनीति का आरोप: अजय राय ने बीजेपी पर हमला
Varanasi, Uttar Pradesh:कांग्रेस नेता अजय राय ने वाल्मीकि जयंती पर राजनीति का लगाया आरोप. अजय राय का बीजेपी पर हमला, कहा वाल्मीकि जयंती पर छुट्टी की घोषणा केवल राजनीतिक लाभ उठाने की नीयत से की गई है। कांग्रेस अध्यक्ष के बयान का समर्थन, अजय राय ने मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा दिए गए बयान पर सहमति जताई है। अजय राय ने कहा पार्टी अपनी नीतियों और बयानों पर कायम है, कांग्रेस ने कभी ऐसे मामलों पर माफी नहीं मांगी है। सीएम योगी आदित्यनाथ के "हर इंसान में भगवान होता है" वाले बयान से अजय राय ने सहमति जताई। अजय राय ने कहा जब हर इंसान में भगवान हैं, तो बीजेपी को जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव बंद करना चाहिए। गठबंधन पर फैसला आलाकमान का, यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में सीटों का बंटवारा केंद्रीय नेतृत्व ही तय करेगा। लखनऊ कार्यालय हंगामे पर सफाई, प्रदेश कांग्रेस दफ्तर में हुई झड़प और विवाद पर अजय राय ने बड़ा बयान दिया। अजय राय ने कहा यदि विवाद के दौरान समर्थकों से कोई गलती या दुर्व्यवहार हुआ है, तो उसके लिए उन्होंने खुद माफी मांगी। अजय राय ने दिल्ली में हाईकमान को पूरे घटनाक्रम की जानकारी देकर अपना पक्ष स्पष्ट किया। अजय राय ने कहा कि शीर्ष नेतृत्व से संवाद के बाद पार्टी के अंदर सभी तरह के मनमुटाव पूरी तरह खत्म हो चुके हैं。0
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स्मृति ईरानी की बैठक से भाजपा में सत्ता- संगठन के तालमेल पर जोर
Begun, Rajasthan:रायपुर भाजपा प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी की सांसदों के साथ बैठक संपन्न.. राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा ने बैठक को लेकर दी जानकारी.. विचारधारा को धरातल पर उतारने को लेकर हुआ मंथन.. सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल पर हुई चर्चा.. बैठक में सुझाव मांगे गए, जनप्रतिनिधियों ने भी दिए सुझाव.. स्मृति ईरानी छत्तीसगढ़ की स्थिति से परिचित, संगठन का दायित्व बखूबी निभाएंगी0
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महबूबा मुफ्ती का विलय पर हमला: जम्मू-कश्मीर की शर्तें और जनमत संग्रह पर चेतावनी
Chaka, एक्सेसन डे (विलय दिवस) पर महबूबा का हमला: जम्मू और कश्मीर शर्तों और विश्वास पर भारत से जुड़ा था, संदेह पर नहीं — शेख अब्दुल्ला पर अविश्वास पैदा करने का आरोप लगाया। जिस दिन जम्मू और कश्मीर भारत में अपने विलय का स्मरण करता है, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को एक लंबा और भावनात्मक संबोधन दिया। उन्होंने 1947 के फैसले को उसके ऐतिहासिक संदर्भ में रखा, विलय पत्र (Instrument of Accession) की सशर्त प्रकृति को याद दिलाया, और चेतावनी दी कि इस क्षेत्र का निरंतर सैन्यीकरण और राजनीतिक अलगाव देश के बाकी हिस्सों के लिए एक चेतावनी के रूप में कार्य करता है। 26 अक्टूबर के महत्व पर बोलते हुए मुफ्ती ने कहा कि लोकप्रिय नेता शेख अब्दुल्ला द्वारा विलय की पुष्टि ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को यह आश्वासन दिया था कि भारत कोई कब्जा करने वाली ताकत नहीं है। हालांकि यह जम्मू-कश्मीर की अनूठी संस्कृति की रक्षा के लिए किया गया एक सशर्त विलय था, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि इसका मकसद कभी भी भारतीय संघ के खिलाफ जाना नहीं था। यह व्यवस्था, जिसे बाद में अनुच्छेद 370 और 35A के रूप में शामिल किया गया, वह आधार थी जिस पर इस राज्य ने भारत से हाथ मिलाया था, और जवाहरलाल नेहरू जैसे नेताओं ने इस संबंध में गंभीर आश्वासन दिए थे। मुफ्ती ने कहा, "हमें नहीं पता कि क्या गलत हुआ कि शेख अब्दुल्ला 1953 तक इसके खिलाफ हो गए और उनका मुकाबला करने के लिए आरएसएस ने 'एक राष्ट्र, एक संविधान' अभियान शुरू कर दिया। आज कश्मीर दुनिया का सबसे अधिक सैन्यीकृत क्षेत्र है और यह उस अविश्वास का परिणाम है जो शेख अब्दुल्ला के जनमत संग्रह (Plebiscite) अभियान के बाद पैदा हुआ था। बीजेपी पूरे देश में उस संविधान को कुचल रही है जिसने हमें 370 दिया था। मुझे अदालतों और सरकार पर भरोसा नहीं है, लेकिन भारत के लोगों पर भरोसा है।" "हमें सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं है, और बीजेपी इस 'जबरन शांति' को जीत के रूप में पेश कर रही है। यह पूरे देश के लिए एक चेतावनी है और आज हम भारत के लोगों को जम्मू-कश्मीर के लोगों से किए गए वादों की याद दिलाना चाहते हैं। आज हम उस दिन का जश्न मनाते हैं जब हम एक महान राष्ट्र में शामिल हुए थे, लेकिन भारत के लोगों को भी अपने वादे पूरे करने चाहिए।" इसके बाद मुफ्ती ने ऐतिहासिक क्रम को विस्तार से सामने रखा। "विभाजन के समय जो राज्य मुस्लिम बहुल थे, उनका फैसला धर्म के आधार पर हुआ था। कुछ मुस्लिम बहुल राज्य पाकिस्तान चले गए, और कुछ हिंदू बहुल राज्यों ने भारत के साथ जाने का फैसला किया। लेकिन चूंकि हम एक मुस्लिम बहुल राज्य थे, इसलिए पाकिस्तान को लगा कि यदि जम्मू-कश्मीर मुस्लिम बहुल राज्य है, तो उसे पाकिस्तान के साथ आना चाहिए। जैसा कि हैदराबाद के मामले में हुआ था, जहां निजाम ने फैसला किया था कि हम पाकिस्तान के साथ जाएंगे, लेकिन उस समय भारत के नेतृत्व ने आपत्ति जताई और कहा कि नहीं, निजाम की मर्जी नहीं चलेगी; बहुसंख्यक लोगों की मर्जी चलेगी।" "इसी तरह, पाकिस्तान ने सोचा कि अगर हैदराबाद, निजाम के फैसले के बावजूद, हिंदू बहुसंख्या के आधार पर भारत का हिस्सा बन गया, तो यह स्वाभाविक है कि जम्मू-कश्मीर को मुस्लिम बहुल राज्य होने के नाते पाकिस्तान के साथ जाना चाहिए। और उस समय उन्होंने जो सबसे बड़ी गलती की, जो ऐतिहासिक भूल की, वह यह थी कि उन्होंने यहां कबायली हमलावरों को भेज दिया।" मुफ्ती ने आगे कहा, "उस समय जम्मू-कश्मीर के लोगों पर बहुत बड़ा हमला हुआ था, क्योंकि जम्मू-कश्मीर के लोग सोच-समझकर अपना फैसला लेना चाहते थे। नतीजतन, महाराजा ने भारत सरकार से अनुरोध किया कि हम इस आक्रमण का मुकाबला करें।" "यह फैसला लिया गया कि जम्मू-कश्मीर, एक मुस्लिम बहुल राज्य होने के नाते, पाकिस्तान जाने के बजाय भारत के साथ जाना चाहता है। और उस समय जो नेतृत्व वहां मौजूद था — गांधी जी, जवाहरलाल नेहरू, अंबेडकर साहब, मौलाना अबुल कलाम आजाद साहब, सरदार वल्लभभाई पटेल — जो मानते थे कि भारत हिंदू राष्ट्र नहीं बल्कि एक धर्मनिरपेक्ष देश बनेगा जहां सभी धर्मों के लोग एक साथ रहेंगे और आगे बढ़ेंगे।" "लेकिन महाराजा की इच्छा के बावजूद, भारत के नेतृत्व ने कहा कि यह समझौता तब तक अधूरा है जब तक कि जम्मू-कश्मीर का सबसे लोकप्रिय नेतृत्व इसका समर्थन नहीं करता। और उस स्थिति में, शेख साहब ने इसका समर्थन किया, और जम्मू-कश्मीर के लोगों को लगा कि भारत हमें निगलना नहीं चाहता, हमारे विचारों और हमारी भावनाओं को दबाना नहीं चाहता। इसलिए, उन्होंने यहां के नेतृत्व से कहा कि आप भी हमें इस फैसले में शामिल करें।" उन्होंने कहा। "हमारा जम्मू-कश्मीर क्षेत्र, जो एक विशेष बहुसंख्यक राज्य था, उसकी अपनी एक अनूठी पहचान थी, जो अन्य राज्यों से अलग थी। यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई कई धर्मों के लोग एक साथ रहते थे और हमारी एक मिश्रित संस्कृति थी। उस संस्कृति को जीवित रखने के लिए यह फैसला लिया गया कि हम भारत के साथ जाएंगे। भारत के नेतृत्व पर भरोसा जताया गया, लेकिन हमारी कुछ शर्तें थीं।" "वे शर्तें यह थीं कि हम देश में शामिल होना चाहते थे, लेकिन वे शर्तें इस बारे में थीं कि हमारी विशिष्टता, हमारी पहचान, एक विशेष बहुसंख्या के रूप में हमारी पहचान — बौद्ध, डोगरा, पहाड़ी, कश्मीरी, कश्मीरी पंडितों के रूप में — कैसे सुरक्षित रहेगी।" मुफ्ती ने कहा, "एक 'इन्स्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन' (विलय पत्र) पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसे आप देख रहे हैं, ताकि बाहरी लोग आकर कौड़ियों के दाम हमारी जमीन न खरीद सकें, क्योंकि हमारी जमीन बहुत सीमित है, हमारे पास जमीन की होल्डिंग बहुत छोटी है। जो रोजगार हमारे पास यहां है, जो नौकरियां हमारे पास यहां हैं, बाहरी लोग आकर उन्हें न छीन लें, क्योंकि उस समय हमारी शिक्षा प्रणाली और अन्य चीजें इतनी अच्छी नहीं थीं कि हम बाहर के लोगों से प्रतिस्पर्धा कर सकें।" "इसलिए, हमारी नौकरियां हमारे पास ही रहनी चाहिए। ऐसी कुछ शर्तें रखी गईं, जिन्हें 370 और 35A कहा गया, और सब कुछ उसी रूप में आया। और जम्मू-कश्मीर के लोगों ने बहुत भरोसा करते हुए खुले दिल से देश के साथ हाथ मिलाया, और इसमें देश के नेतृत्व ने हमारे साथ जो व्यवहार किया वह बहुत सुंदर था। जवाहरलाल नेहरू ने कहा था, 'मैं जम्मू-कश्मीर को एक शो-विंडो बनाना चाहता हूं, दुनिया के लिए एक खिड़की, ताकि पूरी दुनिया इसे देखती रहे।'" इसके बाद मुक्ती ने संबंधों में आई गिरावट का जिक्र किया। "मुझे नहीं पता कि बाद में 1970 के दशक में हमारे नेतृत्व, शेख साहब और केंद्र के बीच क्या हुआ। हमें नहीं पता कि बातें इतनी खराब कैसे हो गईं कि शेख साहब, जिन्होंने विलय का समर्थन किया था, पूरी तरह से नाराज हो गए और कहने लगे कि अब हमें भारत नहीं चाहिए। अब हमें पाकिस्तान चाहिए, हमें जनमत संग्रह चाहिए।" "यह इसलिए था कि भारत में हिंदुत्व ताकतों को, जो पहले से ही कहती थीं कि भारत केवल हिंदुओं के लिए है, मुसलमानों को यहां नहीं आना चाहिए, उनके लिए जम्मू-कश्मीर — जो एक मुस्लिम बहुल राज्य था और शर्तों के साथ भारत में शामिल हुआ — एक बड़ा मुद्दा बन गया। उन्हें एक बहाना मिल गया और फिर 'एक राष्ट्र, एक ध्वज, एक संविधान' के लिए उनका अभियान तेज हो गया। और यहां से शेख साहब, जो एक मुस्लिम बहुल राज्य के भारत में विलय के ध्वजवाहक थे, पूरी तरह से नाराज हो गए और जनमत संग्रह की बात करने लगे। "अब जनमत संग्रह की वह मांग सिर्फ उनकी बात नहीं थी; इसकी वजह से जम्मू-कश्मीर के लोग जिंदगी भर के लिए भारत की नजरों में संदिग्ध बन गए।" उन्होंने आरोप लगाया, "यदि आप आज देखें, तो जम्मू-कश्मीर पूरे विश्व में सबसे अधिक सैन्यीकृत क्षेत्र है। यहां सात या आठ लाख सैनिक, सुरक्षा बल, सीआरपीएफ, बीएसएफ आदि तैनात हैं। भले ही शेख साहब बाद में 1975 में समझौते (Accord) के जरिए मुख्यधारा में वापस आ गए, उन्होंने जनमत संग्रह का नारा छोड़ दिया, पाकिस्तान की मांग छोड़ दी, लेकिन जम्मू-कश्मीर के लोगों पर जो संदेह जताया गया था, वह आज भी उनका पीछा नहीं छोड़ता।" "आपने देखा कि अभी कुछ ही दिन पहले हरियाणा में हमारे लोगों को बुरी तरह पीटा गया। आपने देखा जब हम सुबह अखबार पढ़ते हैं, तो पहली खबर यही होती है कि कहां कितनी छापेमारी हुई, कहां उग्रवाद, भ्रष्टाचार या नशीली दवाओं के नाम पर कितनी गिरफ्तारियां हुईं। जो उग्रवादी आत्मसमर्पण करके जेल से बाहर आ चुके हैं और अब न केवल पिता बल्कि दादा और नाना बन चुके हैं, उन्हें भी आज भी पुलिस स्टेशन बुलाया जाता है। हमारे हजारों पूरी तरह से निर्दोष युवाओं के पासपोर्ट ब्लॉक कर दिए गए हैं — वे युवा जो रोजगार, शिक्षा या नौकरियों के लिए बाहर जाना चाहते हैं। आपने देखा है कि जिस रास्ते को हम एक घंटे में तय कर सकते हैं, उसमें तीन-तीन घंटे लग जाते हैं क्योंकि रास्ते में सेना और सुरक्षा बलों के जवान तैनात होते हैं।" "यानी इतने सालों बाद भी जम्मू-कश्मीर मुश्किल में है, और जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी बात यह है कि जम्मू-कश्मीर की चर्चा हर जगह होती है। आपने सुना होगा कि अभी जो संयुक्त राष्ट्र संघ का सत्र हुआ था, वहां 'बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना' की तरह तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने भी जम्मू-कश्मीर का जिक्र किया, और परंपरागत रूप से पाकिस्तान ने भी इसका जिक्र किया — नवाज शरीफ, मुशर्रफ, शहबाज शरीफ साहब। और हमारे लोग, भारत सरकार, हमेशा की तरह कहते हैं कि यह हमारा मामला है, हम इस पर बात नहीं कर सकते।" "और आप देखेंगे, जब चुनाव होंगे — यूपी में, हमारे यहां, या पंजाब में — तो जम्मू-कश्मीर की बात होगी, लेकिन जहां जम्मू-कश्मीर की बात होनी चाहिए, जिनसे जम्मू-कश्मीर की बात होनी चाहिए, वहां बात नहीं होती। वहां अगर बात होती है, तो एनआईए (NIA) के जरिए होती है, सीआईए (CIA) के जरिए होती है, सीबीआई (CBI) के जरिए होती है, अन्य एजेंसीयों के जरिए होती है, यूएपीए (UAPA) के जरिए होती है, पीएसए (PSA) के जरिए होती है, कर्फ्यू के जरिए होती है। जरा बाहर देखिए कितनी पुलिस तैनात है, क्योंकि यहां पचास-सौ लोग इकट्ठा हुए हैं, कौन जानता है कि हम क्या करेंगे।" "मेरे कहने का मतलब यह है कि आज इतने साल हमारे इस देश के साथ बीत चुके हैं। यह एक महान देश है, यहाँ के लोग महान हैं, यहाँ की सभ्यता महान है, हमने इससे हाथ मिलाया था। लेकिन जम्मू-कश्मीर के लोग आज भी वहीं हैं जहां उन्हें 1947 में विलय के समय रखा गया था। वास्तव में, हमें आसमान से जमीन पर पटक दिया गया है।" "2019 में हमारे साथ जो किया गया, जो हिंदुत्व का एजेंडा था, वह पूरा हो चुका है, और उसके बाद और भी सख्ती होगी, और भी कठिनाइयां आएंगी। इसलिए, मैं जो कह रही हूं उसका मकसद यह है कि आज जहां 26 अक्टूबर को छुट्टी के रूप में मनाया जाता है, मैं बीजेपी से कुछ नहीं कहना चाहती क्योंकि हमें उनसे कोई उम्मीद नहीं है। उन्होंने पूरे देश के संविधान को तार-तार कर दिया है — वही संविधान जिसने हमें ये अधिकार दिए थे, जिसने हमें 370 दिया था, उसे उन्होंने 2019 में टुकड़े-टुकड़े कर दिया। आज पूरे देश के कानूनों, संविधान और वोट को तार-तार किया जा रहा है। मुझे उनसे कोई उम्मीद नहीं है। लेकिन इस देश के, हिंदुस्तान के लोगों से मुझे उम्मीद है।" "आप लोगों ने थोड़ा समय के लिए देखा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ क्या होता है: जब 22 जुलाई को हमारे बच्चों, हमारी लड़कियों के कपड़े फाड़े गए, युवाओं को लहूलुहान किया गया, और उसके बाद 10 अक्टूबर को सात हजार लोगों को जेल में डाल दिया गया, उनसे मुचलके लिए गए। वे 2019 से यह काम कर रहे हैं; यह हमारे लिए दिनचर्या बन गया है। हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर भी नहीं आ सकते। हमें बाहर निकलने से मना किया जाता है, बोलने से मना किया जाता है। और बीजेपी इस चुप्पी को शांति मानती है; इसे सामान्य स्थिति (normalcy) मानती है। यह सामान्य स्थिति नहीं है; यह खौफ है, जिसका स्वाद अब पूरा देश चख रहा है। इस समय पूरे देश में लोग देख रहे हैं कि क्या होता है, किस तरह से लोहे के हाथों से निपटा जाता है — वही जो हम, जम्मू-कश्मीर के लोग, सालों से देखते आ रहे हैं।" "इसीलिए आज हमने सोचा कि आज हम देश के लोगों को याद दिलाएं कि जम्मू-कश्मीर, एक मुस्लिम बहुल राज्य होने के बावजूद, अलग-अलग रंगों, अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों के लोग होने के बावजूद, फिर भी एक साथ आया और इस देश से हाथ मिलाया।" मुफ्ती ने आगे कहा, "हम आपको (केंद्र सरकार को) आपके वादों की याद दिलाना चाहते हैं। क्योंकि आपने कहा था कि हम आपको एक खूबसूरत खिड़की की तरह सजाएंगे। लेकिन आज उन्होंने हमारा सब कुछ तबाह कर दिया है। हमारे पास कुछ नहीं बचा है। हमारे युवा जेलों में सढ़ रहे हैं। उनकी हालत पूछने वाला कोई नहीं है। जो नेतृत्व बचा है, उसमें से अधिकांश लोग पहले ही इतनी बीमारियों के शिकार हो चुके हैं, और अगर उन्हें हाईकोर्ट से जमानत मिलती है, तो आप उसे रोक देते हैं। अगर उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलती है, तो आप उसे रोक देते हैं। यह कैसा रिश्ता है? कब तक आप उन्हें बंदूक के दम पर, कानूनों के दम पर रखेंगे और जम्मू-कश्मीर की सरजमीं पर इस तरह राज करेंगे?" अंत में मुफ्ती ने कहा, "जमीन आपके पास है, लेकिन कृपया उस तरह से प्रयास करें जैसा अटल बिहारी वाजपेयी ने सोचा था कि यह एक मानवीय समस्या है। यहां इंसानियत के साथ काम करना होगा। लोकतंत्र के साथ काम करना होगा; कश्मीरियत के साथ काम करना होगा। अगर आप चाहते हैं कि यह इतने सालों तक ऐसे ही चलता रहे — आज आठ लाख सैनिक हैं, आप सोलह लाख ले आएंगे। मुझे लगता है कि इस देश के लोगों के लिए — मुझे नहीं पता कि यह बीजेपी के लिए शर्म की बात है या नहीं — लेकिन देश के लोगों के लिए मुझे लगता है कि यह एक चेतावनी होनी चाहिए कि जम्मू-कश्मीर में क्या हो रहा है।" "इसलिए देश के सभी लोगों से मेरा अनुरोध है कि हमने ऐसे हिंदुस्तान से हाथ मिलाया था जो गांधी का हिंदुस्तान था, जो नेहरू का हिंदुस्तान था, अंबेडकर का हिंदुस्तान था, जिन्होंने हम सभी को अधिकार दिए। वे अधिकार जो छीने जा रहे हैं, मेरा उनसे अनुरोध है कि कृपया इसे याद रखें। यह कागज का टुकड़ा नहीं है। उस समय यहां जो भी लोकप्रिय नेता थे, या महाराजा थे, या आपका नेतृत्व जिसने आपको आजादी दिलाई, जिसने हिंदुस्तान को आजाद कराया, उन्होंने इसे प्रमाणित किया था।" "इसीलिए मुझे लगा कि आज जब हम मिल रहे हैं, तो हमें खुद भी इसे याद रखना चाहिए, और केंद्र सरकार के अलावा, कल के लोगों को भी याद दिलाना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर में जो हो रहा है वह गलत है, यह सही नहीं है। इसलिए हर जगह जम्मू-कश्मीर का सौदा करने के बजाय, जम्मू-कश्मीर के लोगों पर जो अत्याचार आपने ढाया है उसे रोकें, और जम्मू-कश्मीर को अपने साथ अपनाएं। इसे घसीटिए मत, इसकी बांह पकड़कर घसीटने के बजाय इसका हाथ थामिए और इसे अपने साथ चलना सिखाइए।" अपने संबोधन में, मुफ्ती बार-बार इस विषय पर लौटीं कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने स्वतंत्रता आंदोलन के धर्मनिरपेक्ष नेतृत्व में अपना विश्वास जताते हुए सद्भावना के साथ भारत को चुना था, और उस विलय से जुड़ी शर्तें एक विशिष्ट क्षेत्रीय पहचान की रक्षा के लिए थीं न कि संघ को कमजोर करने के लिए। उन्होंने तर्क दिया कि विश्वास में बाद में आई गिरावट, लंबे समय से सुरक्षा बलों की भारी मौजूदगी, शांतिपूर्ण विरोध पर प्रतिबंध, और जिस तरह से इस क्षेत्र पर केवल सुरक्षा और कानूनी तंत्र के माध्यम से चर्चा की जाती है, उसने यहां की आबादी को स्थायी संदेह की स्थिति में छोड़ दिया है। वर्तमान केंद्र सरकार से कोई उम्मीद न जताते हुए, उन्होंने सीधे भारत के लोगों से मूल वादों को याद करने और यह आग्रह करने की अपील की कि जम्मू-कश्मीर के साथ संबंधों को ताकत के बजाय इंसानियत, लोकतंत्र और आपसी सम्मान के आधार पर फिर से बनाया जाए।0
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चित्तौड़गढ़ सैनिक स्कूल ने स्वर्ण जयंती के अवसर पर चार घोड़ों का दान कर किया उदाहरण स्थापित
Begun, Rajasthan:चित्तौड़गढ़ स्थित सैनिक स्कूल में सोमवार को 1969-76 बैच के पूर्व छात्रों ने स्वर्ण जयंती समारोह उत्साह के साथ मनाया. शंकर मेनन सभागार में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व शिक्षक डीएल सुरेडिया और विशिष्ट अतिथि स्कूल के प्राचार्य कर्नल अनिल देव सिंह जसरोटिया रहे. समारोह में पूर्व छात्रों ने पुरानी यादें साझा कीं और सेवानिवृत्त शिक्षकों व स्कूल स्टाफ का अभिनंदन किया. पूर्व छात्रों ने कैडेट्स के प्रशिक्षण के लिए विद्यालय को चार घोड़े भेंट किए. अतिथियों ने स्मृतिका पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी. कार्यक्रम में सैन्य अधिकारी, पूर्व छात्र और विद्यालय स्टाफ मौजूद रहे।0
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Mehbooba Mufti ने Accession Day पर निशाना साधा; Sheikh Abdullah पर अविश्वास का आरोप
Chaka, Mehbooba Hits Out on Accession Day: Jammu and Kashmir Joined India on Conditions and Trust, Not Suspicion — Accuses Sheikh Abdullah of Sowing Distrust. On the day Jammu and Kashmir marks its accession to India, Peoples Democratic Party president Mehbooba Mufti delivered a lengthy and emotionally charged address to her party workers, placing the 1947 decision in its historical context, recalling the conditional nature of the Instrument of Accession, and warning that the continued militarization and political alienation of the region serves as a cautionary tale for the rest of the country. Speaking on the significance of 26 October, Mufti said the ratification of the accession by the popular leader Sheikh Abdullah had given the people of Jammu and Kashmir the assurance that India was not an occupying force. Though it was a conditional accession meant to safeguard the unique culture of J0
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पंचायत चुनाव प्रचार में कांग्रेस तेज, टीकाराम जूली अलवर में साइकिल प्रचार कर रहे
Jaipur, Rajasthan:Jaipur पंचायत चुनाव में कांग्रेस का प्रचार तेज नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली क़र रहे अलवर के ताबड़तोड़ दौरे आज "साईकिल पर प्रचार" करते नजर आए जूली जूली की साईकिल प्रचार की जबरदस्त चर्चा अलवर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में साईकिल पर किया टीकाराम जूली ने प्रचार0
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बरेका में सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 का शुभारंभ, महाप्रबंधक आशुतोष पंत ने दिलाई सत्यनिष्ठा की शपथ
Varanasi, Uttar Pradesh:मयंक कश्यप/वाराणसी। बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में 26 अक्टूबर से 01 नवंबर तक सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 मनाया जा रहा है। रेलवे बोर्ड के निर्देश पर 'सत्यनिष्ठा से समृद्धि' थीम के तहत प्रशासन भवन के स्वागती हॉल में सोमवार को शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। महाप्रबंधक आशुतोष पंत ने अधिकारियों-कर्मचारियों को सत्यनिष्ठा की शपथ दिलाई। सभी ने ईमानदारी, निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ कार्य करने व भ्रष्टाचार के विरुद्ध सजग रहने का संकल्प लिया। मुख्य सतर्कता अधिकारी अंकुर चंद्रा ने कहा कि यह सप्ताह सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती वाले सप्ताह में मनाया जाता है। इस वर्ष का विषय समाज व कार्यस्थल पर नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ कर भ्रष्टाचार मुक्त कार्यसंस्कृति का संदेश देता है। इस मौके पर PCEE मनीष कुमार, PCME विवेक शील, PCMM आलोक अग्रवाल, PFA मुक्तेश मित्तल, PCE राम जन्म, PCPO लालजी चौधरी, PCMD डॉ. सुनील कुमार, IG-cum-PCSC देवराज कुमार मौर्य, DGM सागर, Dy. CVO नीरज सिंह सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।0
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