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बठिंडा में राकेश बेदी ने नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि दी, ऑडिटोरियम की प्रशंसा

Bathinda, Punjab:बठिंडा। बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता राकेश बेदी बठिंडा पहुंचे, जहां उन्होंने अपने साथी अभिनेता नाना पाटेकर को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। इस दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंس में उन्होंने बठिंडा के ऑडिटोरियम की सराहना करते हुए कहा कि यहां का ऑडिटोरियम काफी शानदार है और इसे इसी तरह बेहतर बनाए रखना चाहिए। राकेश बेदी ने कहा कि आज के आधुनिक दौर में थिएटर की बहुत जरूरत है। डिजिटल युग में जहां ज्यादातर काम तकनीक के माध्यम से हो रहे हैं, वहीं थिएटर लोगों को सीधे तौर पर कलाकारों और कला से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने थिएटर के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ऐसे मंचों का संरक्षण और विकास बेहद जरूरी है। बठिंडा जैसे शहर में शानदार ऑडिटोरियम का होना सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने थिएटर और कला के क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।
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किन्नौर में फुलियाच फूलों का चार दिनीय उत्सव: परंपरा और संस्कृति का संगम

Dhar Chhiling Khola, Himachal Pradesh:किन्नौर में बरसात के बाद अलग-अलग गांवों में फुलियाच यानी फूलों का त्योहार पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। चौरा स्थित हिरमा माता मंदिर में भी इस उत्सव का विशेष महत्व है। परंपरा के अनुसार, मेले से पहले दो या तीन लोग जिन्हे हिरमा माता चुन कर ऊंची पहाड़ियों, जिन्हें स्थानीय भाषा में कंडे कहा जाता है, से ब्रह्म कमल और अन्य सुगंधित फूल लाने का निर्देश देती हैं। इन फूलों को मंदिर में लाकर ग्रामीणों के बीच वितरित किया जाता है। इसके बाद शुरू होता है चार दिवसीय उत्सव, जिसमें महिलाएं और पुरुष पारंपरिक किन्नौरी वेशभूषा में शामिल होते हैं। देव वाद्य यंत्रों की गूंज और पारंपरिक नाटियों के बीच यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और पूर्वजों की परंपराओं से जोड़ने का संदेश भी देता है। बाइट — अंजलि, नें बताया “फुलियाच उत्सव अक्टूबर महीने में मनाया जाता है और यह मेला चार दिनों तक चलता है। इसमें ग्रामीण अपनी पारंपरिक वेशभूषा पहनकर शामिल होते हैं और उत्सव का आनंद लेते हैं。” बाइट — किरण नेगी, ग्रामीण: “हम हिरमा माता मंदिर में फुलियाच मेले का आनंद लेने आए हैं। यहां सभी लोग पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे हैं और नाच-गाने के साथ इस फूलों के उत्सव को मना रहे हैं।” बाइट — भगत सिंह, मंदिर मुखिया: “फुलियाच मेले से पहले कुछ लोग ऊंचे पहाड़ों यानी कंडों से ब्रह्म कमल और अन्य फूल लेकर आते हैं। इन फूलों को घर-घर वितरित किया जाता है। इसके बाद देव वाद्य यंत्रों की धुनों के साथ उत्सव मनाया जाता है।” फुलियाच केवल फूलों का त्योहार नहीं, बल्कि किन्नौर की आस्था, सामूहिक सहभागिता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। ऐसी देव परंपराएं ही पीढ़ी-दर-पीढ़ी हिमाचल की जनजातीय संस्कृति को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
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मंदसौर में लोड-शेडिंग विरोध के चलते ग्रामीणों ने विद्युत ग्रिड पर किया प्रदर्शन

Mandsaur, Madhya Pradesh:मंदसौर: मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में लोड शेडिंग और मेंटेनेंस के नाम पर की जा रही लगातार विद्युत कटौती का विरोध अब जगह-जगह देखा जा रहा है। खासकर ग्रामीण अंचल में रात के समय की की विद्युत कटौती का असर जनजीवन पर पड़ रहा है, और लोग अब सड़कों पर उतर आए हैं। बीती रात बालागुढ़ा, बु-ढ़ा, गरोठ और धलपट में ग्रामीणजनों ने स्थानीय बिजली ग्रिड पर जाकर प्रदर्शन किया। बु-ढ़ा और बालागुढ़ा में तो लोग ढोल लेकर बिजली ग्रिड पर पहुंच गए थे। ग्रामीण अंचल में रहने वाले किसानों और आम लोगों का आरोप है कि बिजली काटकर उन्हें जबरन परेशान किया जा रहा है, जिससे उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस कटौती को तुरंत बंद किए जाने की मांग की है।
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श्राद्ध समाप्ति के साथ शहर में शारदीय नवरात्र की तैयारियाँ तेज

Dholpur, Rajasthan:बाड़ी आश्विन मास में शुक्ल पक्ष पूर्णिमा से कृष्ण पक्ष अमावस्या तक 16 दिन तक श्राद्ध पक्ष चलता है। जिसमें सनातन धर्म मे अपने पूर्वजों को याद करने के साथ जल तर्पण करने की परंपरा हैं। आज शनिवार को श्राद्ध पक्ष का अंतिम दिन है,ऐसे में सुबह से शहर के बसेड़ी रोड़ स्थित पार्वती नदी किनारे और सरमथुरा रोड़ पर बामनी नदी पुल पर अंतिम जल तर्पण के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही,वही अमावस्या पर भूले बिसरे पुरखों का श्राद्ध भी किया गया। पिछले 15 दिन से भूतेश्वर पार्वती नदी पर जल तर्पण कर रहे पंडित महेश पाराशर ने बताया कि शनिवार को पितृ जल तर्पण का अंतिम दिन है,अमावस्या तिथि पर 16 वें जल तर्पण के साथ कुसा विसर्जन किया गया साथ में सभी श्रद्धालुओं द्वारा पितरों के मोक्ष प्राप्ति को लेकर विशेष पूजा भी की गई। इसके बाद श्रद्धालु ज्यादातर घरों में अमावस्या का श्राद्ध हुआ। जिसमें भूले बिसरे तीन पीढ़ियों के पुरखों का श्राद्धकर्म किया गया। इसके साथ ही श्राद्ध पक्ष का समापन हो गया। यह पितृ मोक्ष अमावस्या हर्षण और सर्वार्थ सिद्धि योग में थी ऐसे में पितरों की विदाई के साथ आगामी समय के अच्छा रहने का संकेत है। कल से होगा शारदीय नवरात्र का आगाज,सामूहिक रूप से भी होगी स्थापना :- रविवार से शारदीय नवरात्र का शुभारंभ होगा। जिसमे शहर के राज राजेश्वरी कैला माता मंदिर पर जहां शहर का मुख्य आयोजन होगा वही सामूहिक रूप से भी शहर के अलग-अलग स्थानों पर पंडालों में प्रतिमाओं की स्थापना की जाएगी। ऐसे में शहर में सामूहिक आयोजनों की तैयारी शुरू हो गई है। शहर के तुलसीवन रोड स्थित बम-बम बाबा आश्रम पर भी मां श्मशान की काली की स्थापना की जाएगी। जिसको लेकर आश्रम से जुड़े पदाधिकारी और संत बम-बम बाबा तैयारी में जुटे है।
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चार बजे भोर में रेडियो दादू की महालया यादें लौट आईं

Arambag, West Bengal:আরামবাগঃ১০ অক্টোবর গোঘাটের রেডিও দাদু। এদিন ভोरেও তাঁর সর্বক্ষণের সঙ্গী রেডিওতেই শুনলেন বীরেন ভদ্রের কণ্ঠে মহালয়া। বছরভর টেকনোলজির প্রাচুর্যে রেডিও সেটের কথা মনেই থাকে না বেশিরভাগ আমবাঙালির। সেই রেডিওই সময়সারণী বেয়ে মহালয়ায় ফিরে এল হারানো স্মৃতি। সেই স্মৃতিতেই লুকিয়ে উৎসবপ্রিয় বাঙালিরআপ সত্ত্বা৷ এদিন ঘুম চোখে ভোর ৪টেয় বালিশের পাশে রাখা রেডিওর সুইচ ঘোরাতেই বীরেন ভদ্রের কণ্ঠে বেজে উঠল 'আশ্বিনের শারদপ্রাতে'। এটাই বোধহয় নস্টালজিয়া। গোঘাট বাসস্ট্যান্ডের ৭০ বছর বয়সি পিরু সিং । মাটির ঘর । যেমন সাধের রেডিওটি রেখেছেন সযন্তে। মরচে পড়েনি রেডিও সেটে। তেমনই অভ্যাস বদলায়নি সত্তরের রেডিও দাদুও। যদিও ছোট বেলায় বাড়িতে রেডিও ছিল না। পাশের বাড়িতে ভোর হলেই ছুটে যেতেন। অনেকেই এক সঙ্গে বসে শুনতেন মহালয়া। তবে বড়ো হয়ে নিজেই রেডিও কিনেছেন তিনি। তাঁর বাড়িতেও এক সময় অনেকে আসতেন মহালয়া শুনতে। কিন্তু বর্তমানে ডিজিটাল যুগে এখন টিভি ও মোবাইল হয়েছে। কিন্তু বদলায়নি তাঁর অভ্যাস। এদিনও ভোরে মাটির দাওয়ায় বসে রেডিওতে শুনলেন মহালয়া। ঘড়ির কাঁটায় ভোর ৪টে বাজতেই গোঘাট বাসস্ট্যান্ড চত্বরের ছোট্ট মাটির বাড়িতে বেজে উঠল বীরেন ভদ্রের কণ্ঠে ভোরের সেই আগমনি।
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हुगली त्रिवेणी घाट पर महालया तर्पण के दौरान लकेट चट्‌टोपूर्व्याह ने विपक्ष पर निशाना साधा

Chinsurah, West Bengal:হুগলির ত্রিবেণী সপ্তর্ষি ঘাটে মহালয়ার তর্পণ করতে এসে বিজেপি নেত্রী লকেট চট্টোপাধ্যায় বলেন,,,, #সিজেপি র আন্দোল,,,, আন্দোলনের নামে ছাত্র যুবদের ভুল পথে পরিচালিত করা হচ্ছে,এসআইআর দেশের সুরক্ষা প্রশ্নে করা হয়েছিল। দেশের নাগরিক আর যে নাগরিক নয় তাদের সমানাধিকার হতে পারে না। নিট নিয়ে আন্দোলন সঠিক ছিলো।সেটা মিটে গেছে। ককরোচের প্ল্যাটফর্মকে ব্যবহার করে যুবদের বিপথে চালিত করার চেষ্টা করছে বিরোধীরা। পরিষ্কার বোঝা যাচ্ছে বিভিন্নভাবে ফান্ড দিয়ে তাদের আন্দোলন কে উৎসাহিত করা হচ্ছে।আগামী দিনের ভবিষ্যতের কখনোই বিপক্ষে থাকি না আমরা তাদের সমর্থন করি। বিরোধী পক্ষ যাদের কোনো অস্তিত্ব নেই তারা সিজেপির মধ্যে ঢুকে অস্তিত্ব বজায় রাখার চেষ্টা করছে।দেশ বিরোধী কাজ করছে।আমরা চাইনা, আগামী দিনের ভবিষ্যৎকে কেউ বিপথে পরিচালিত করুক। বিরোধী পক্ষের এই মনোভাবকে আটকানোর জন্যই আজকে সরকার এই পদক্ষেপ নিয়েছে।যুব সমাজ কেমন হওয়া উচিত,সেই পাইলটচরের মত।যারা মানুষের জীবন বাঁচাবে মানুষের পাশে থাকবে দেশের হয়ে কাজ করবে। কিন্তু এখানে আমরা কি দেখছি? পশ্চিমবঙ্গে যদি এস আই আর না হত তাহলে আমরা কি দেখতাম, যারা বৈধ নাগরিক আর অবৈধ নাগরিক সব এক ছিল।দেশের সুরক্ষার জন্য এস আই আর করা হয়েছে। রাষ্ট্রপতি তো বলেছেন প্রমাণ দিতে।প্রমাণ দিন হাওয়ায় কথা বলে তো লাভ হবে না। আসলে নরেন্দ্র মোদিকে সরানোর চেষ্টা।তাতে লাভ কিছু হবে না।গতকাল উপ নির্বাচনের ফল বুঝিয়ে দিয়েছে।মানুষের প্রধানমন্ত্রীর প্রতি আস্থা অটুট রয়েছে।উনি আছেন উনিই থাকবেন। #আজ মহালয়া।অসুর নিধন আমাদের হয়েছে।মানুষ করেছে।চৌঠা মে অশুভ শক্তি নিধন করে শুভ শক্তির উদয় হয়েছে।আজ মা আসছেন তার আনন্দ আমরা সবাই ভাগ করে নেব। প্রাক্তন মুখ্যমন্ত্রীকে দেখেছি পিতৃপক্ষকে দেবিপক্ষের সূচনা করে দিতেন।কোন সংস্কার কোন হিন্দু সনাতনী বিশ্বাসকে মর্যাদা দিতেন না। আমরা ভারতবর্ষের সংস্কৃতি ঐতিহ্য মেনে সব করছি।কলকাতার ইডেনে আজকে বড় অনুষ্ঠান হচ্ছে।পুজো যে একটা অন্যরকম হবে তা আজকেই টের পাওয়া যাচ্ছে।কাল থেকেই পূজোর উদ্বোধন শুরু হবে। এবারে অনেক নতুন পুজো হচ্ছে। আমরা চেয়েছিলাম সনাতনী রীতি মেনে ঘরে ঘরে দূর্গা পুজো হোক। অন্নপূর্ণা যোজনা টাকায় এবার এই প্রথম বহু জায়গা দুর্গাপুজো হচ্ছে।এটাই আমরা চেয়েছিলাম।মা দুর্গাকে অন্নপূর্ণা যোজনা টাকা দিয়ে তারা স্বাগত জানাচ্ছে।যে সরকারের থেকে টাকা পাচ্ছে সেই টাকা দিয়ে তারা পুজো করছে। বড় বাজেটের পুজো এবারে অনেক বন্ধ হয়েছে,বা নম নম করে হচ্ছে।এর কারণ তোলাবাজি বন্ধ হয়ে গেছে।কাটমানি বন্ধ হয়ে গেছে।ব্যক্তি কেন্দ্রে পূজো হয়ে গিয়েছিল।পাড়ায় পুজো হলেও পুজো বলে জিনিসটা চলে গিয়েছিল।নেতাদের পূজা হয়ে গিয়েছিল।এবারে সেটা আর হবে না。
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