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Rajan KushwahaRajan KushwahaFollow13 Dec 2024, 03:59 pm

गोंडाः जरौली में सन्त नारद जी का ग्रामीणों ने फूल-माला से किया जोरदार स्वागत

Paraspur, Uttar Pradesh:परसपुर के जरौली में संत नारद जी पदार्पण पर ग्रामीणों ने फूल मालाओं से जोरदार स्वागत किया। मनोज सिंह ने कहा कि मिर्जापुर शक्तेशगढ़ के स्वामी अड़गड़ानंद जी के शिष्य संत नारद जी का पदार्पण हुआ। शिव दर्शन सिंह, संतोष गुप्ता, संजय गुप्ता, नीरज शुक्ला, अखिलेश शुक्ला, लाखन सिंह, मंटू सिंह, जगदीश सिंह समेत ग्रामीणों ने फूल मालाओं से सत्कार व सन्त दर्शन किया। सन्त नारद जी ने कहा कि गुरु सानिध्य में रहकर ईश्वर का स्मरण भजन चिंतन करना चाहिए। सद्गुरु ही परमधाम परमात्मा की प्राप्ति का उत्तम मार्गदर्शक है।
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सिद्धार्थनगर में बाढ़ की आशंका को देखते हुए डीएम ने डुमरियागंज के गांवों का निरीक्षण किया

VIKRANT SRIVASTAVVIKRANT SRIVASTAVFollow1m ago
Domariyaganj, Uttar Pradesh:सिद्धार्थनगर जिले में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने डुमरियागंज तहसील के तेनुहार, कठौतीया और बड़हरा गांवों का निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को बाढ़ से बचाव के लिए आवश्यक निर्देश दिए। मीडिया से बातचीत करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि पिछले दिनों हुई बारिश के कारण राप्ती नदी में पानी का बहाव तेज हो गया है। फिलहाल नदी अपने सामान्य स्तर पर बह रही है। एक-दो मजरों के मेरुदंड होने की संभावना है।इसलिए लोगों को अलर्ट कर दिया गया है। जरूरत पड़ने पर राहत की व्यवस्था कराई जाएगी। नावों की व्यवस्था भी पहले से कर ली गई है।
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डैम में मिले तीन दोस्तों के शव, नहाने के दौरान हादसे की आशंका

Praveen BhargavPraveen BhargavFollow1m ago
Pali Pahari, Jhansi, Uttar Pradesh:झांसी। बबीना थाना क्षेत्र के सुकमा-डुकमा डैम में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब डैम के पानी में तीन शव दिखाई देने की सूचना पुलिस को मिली। सूचना मिलते ही थाना बबीना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से शवों को पानी से बाहर निकलवाया। इसके बाद पुलिस ने मृतकों की पहचान कराने का प्रयास शुरू किया। पुलिस के अनुसार, मृतकों की पहचान सीपरी बाजार क्षेत्र निवासी राज, प्रेमनगर थाना क्षेत्र निवासी राहुल उर्फ रितेश परिहार और नीरज निवासी प्रेमनगर के रूप में हुई है। तीनों की पहचान उनके परिजनों द्वारा की गई है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि तीनों युवक आपस में दोस्त थे। पुलिस के मुताबिक, राज के परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट थाना सीपरी बाजार में दर्ज कराई थी। वहीं राहुल उर्फ रितेश परिहार के लापता होने की सूचना उसके परिजनों ने थाना प्रेमनगर में दी थी। इसके बाद डैम में तीन युवकों के शव मिलने की सूचना ने मामले को गंभीर बना दिया। मौके का निरीक्षण करने के दौरान पुलिस को राज की मोटरसाइकिल खड़ी हुई मिली। इसके अलावा मोटरसाइकिल के पास कपड़े और दो मोबाइल फोन भी रखे हुए मिले। घटनास्थल पर मिले सामान और प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस को प्रथमदृष्टया आशंका है कि तीनों दोस्त सुकमा-डुकमा डैम में नहाने के लिए पहुंचे होंगे। नहाने के दौरान किसी वजह से तीनों गहरे पानी में चले गए और हादसे का शिकार हो गए। हालांकि पुलिस ने अभी इस घटना को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की है। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस मृतकों के परिजनों से भी जानकारी जुटा रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि तीनों युवक डैम पर कब पहुंचे थे और उनके साथ घटनास्थल पर क्या परिस्थितियां बनीं। घटना के बाद मृतकों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है। एक साथ तीन दोस्तों की मौत की खबर से उनके परिचितों और क्षेत्र में भी शोक का माहौल है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल प्रथमदृष्टया मामला नहाने के दौरान हुए हादसे का प्रतीत हो रहा है, लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी अन्य संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले सामान और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि डैम, नदी और जलाशयों में नहाते समय विशेष सावधानी बरतें और गहरे पानी में जाने से बचें।
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झुंझुनूं के IPS डॉ. अनिल कुमार ने आजमगढ़ पीड़ित बच्चियों के भविष्य मदद दी

Jhunjhunu, Rajasthan:झुंझुनूं झुंझुनूं के लाल IPS डॉ. अनिल कुमार ने फिर बढ़ाया जिले का मान यूपी आजमगढ़ हत्याकांड में अनाथ हुई दो मासूम बच्चियों का थामा हाथ एनकाउंटर स्पेशलिस्ट ने अब बच्चियों के भविष्य की जिम्मेदारी उठाई डॉ. अनिल कुमार अपनी एक माह की सैलरी एफडी कराएंगे उनकी पहल से आजमगढ़ पुलिस के जवान भी मदद को आए पुलिस जवान बच्चियों के लिए एक दिन का वेतन देंगे अपराधियों के लिए सख्त, पीड़ितों के लिए संवेदनशील IPS का चेहरा झुंझुनूं का नाम डॉ. अनिल कुमार ने किया देश में रोशन वर्दी पहनकर अपराध के खिलाफ मोर्चा संभालने वाले पुलिस अधिकारी की पहचान अक्सर उसके एक्शन और सख्त फैसलों से होती है। लेकिन कभी-कभी उसी वर्दी के पीछे छिपा इंसान सामने आता है और फिर कहानी सिर्फ पुलिस अधिकारी की नहीं रहती… बल्कि इंसानियत की बन जाती है। झुंझुनूं जिले के अलसीसर की रामू की ढाणी से निकले यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी डॉ. अनिल कुमार की ऐसी ही एक पहल इन दिनों चर्चा में है। यूपी के आजमगढ़ के एक बेहद दर्दनाक हत्याकांड में माता-पिता का साया खो चुकीं दो मासूम बच्चियों के सामने जब पूरी जिंदगी का सवाल खड़ा हुआ। तो एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने केवल पुलिस अधिकारी की भूमिका तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने इन बच्चियों के भविष्य का सहारा बनने का फैसला किया। उन्होंने अपनी एक माह की तनख्वाह बच्चियों के नाम एफडी कराने की घोषणा की है। उनकी इस संवेदनशील पहल से प्रभावित होकर आजमगढ़ पुलिस के जवान भी आगे आए और बच्चियों की मदद के लिए एक दिन का वेतन देने का निर्णय लिया। डॉ. अनिल कुमार की पहचान उत्तर प्रदेश पुलिस में अपराध के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने वाले अधिकारी के रूप में बनी है। पिछले साल 2025 में सामने आए आंकड़ों के अनुसार उनके करीब आठ साल के सेवाकाल में 104 एनकाउंटर का आंकड़ा सामने आया था। लेकिन आजमगढ़ की इस घटना ने उनकी पहचान का एक दूसरा पहलू भी सामने ला दिया। जहां एक ओर वे अपराध के खिलाफ ''''एक्शन ऑन द स्पॉट'''' के लिए जाने जाते हैं। वहीं दूसरी ओर किसी पीड़ित के दर्द को समझकर उसके साथ खड़े होने का उनका यह फैसला उनके संवेदनशील व्यक्तित्व को सामने लाता है। दो बच्चियों ने एक ही घटना में अपना परिवार खो दिया। ऐसे समय में उनके भविष्य की चिंता करना और अपनी कमाई का हिस्सा उनके नाम करना केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि उन बच्चियों को यह भरोसा दिलाने जैसा है कि उनके जीवन में सब कुछ खत्म नहीं हुआ है। आठ घंटे तक कमरे में कैद थीं दो मासूम आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में हुई इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था। अरविंद सिंह पर अपनी पत्नी समेत दो पंडितों और एक बच्चे की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है। घटना के बाद उसकी दो बेटियां कमरे में कैद थीं। पुलिस ने करीब आठ घंटे तक बातचीत के जरिए उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने दरवाजा तोड़कर दोनों बच्चियों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस दौरान आरोपी की ओर से पुलिस पर फायरिंग की गई और जवाबी कार्रवाई में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद दोनों बच्चियों के सिर से माता-पिता का साया उठ चुका था। परिवार में अब बुजुर्ग दादी और दोनों मासूम बच्चियां ही रह गई थीं। यहीं से डॉ. अनिल कुमार की संवेदनशील सोच सामने आई। सिर्फ आज की मदद नहीं… पूरी जिंदगी की चिंता डॉ. अनिल कुमार ने महसूस किया कि इन बच्चियों को केवल तत्काल सुरक्षा की जरूरत नहीं है। असली चुनौती तो अब शुरू होगी—पढ़ाई, पालन-पोषण और भविष्य की। इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी एक महीने की तनख्वाह बच्चियों के नाम एफडी कराने का फैसला लिया। प्रशासन की ओर से दोनों बच्चियों को यूपी में संचालित मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत आर्थिक सहायता दिलाने की प्रक्रिया भी की जा रही है। घटना की प्रत्यक्षदर्शी बच्ची की बाल मनोचिकित्सक से काउंसलिंग भी कराई जा रही है, ताकि इस भयावह घटना का उसके मन पर स्थायी असर कम किया जा सके। डॉक्टर से IPS तक… अलसीसर की मिट्टी से निकला एक नाम डॉ. अनिल कुमार की कहानी खुद झुंझुनूं के लिए गौरव की कहानी है। अलसीसर क्षेत्र की रामू की ढाणी से निकलकर उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। डॉक्टर बने, चिकित्सा सेवा में काम किया और इसके बाद देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक यूपीएससी का रास्ता चुना। लगातार प्रयासों के बाद उन्होंने पुलिस सेवा में जाने का सपना पूरा किया और 2016 बैच के आईपीएस अधिकारी बने। एक चिकित्सक के रूप में लोगों की जिंदगी बचाने की पढ़ाई करने वाले डॉ. अनिल कुमार ने बाद में पुलिस की वर्दी पहनकर समाज को अपराध से सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी संभाली। आज वही डॉक्टर और पुलिस अधिकारी दो मासूम बच्चियों के भविष्य के लिए आगे आया है। उनकी बहन डॉ. मंजू भी राजस्थान कैडर में आईएएस है। जो भी सामाजिक सुधार के लिए अपनी अलग पहचान रखती है। झुंझुनूं के लिए इसलिए खास है यह कहानी झुंझुनूं की पहचान देशभर में अपनी मेहनत, संघर्ष और फौज-पुलिस में योगदान के लिए रही है। इस जिले की मिट्टी से निकले लोग अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाते रहे हैं। इसी कड़ी में अलसीसर के डॉ. अनिल कुमार का नाम भी अब एक अलग वजह से चर्चा में है। उन्होंने पुलिस अधिकारी के तौर पर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की पहचान बनाई, लेकिन आज उनकी चर्चा दो मासूम बच्चियों के लिए उठाए गए मानवीय कदम के कारण हो रही है। एक तरफ कानून की सख्ती… दूसरी तरफ इंसानियत की नरमी…। यही विरोधाभास डॉ. अनिल कुमार की इस कहानी को खास बनाता है। झुंझुनूं का नाम राजस्थान से निकलकर यूपी और देश तक अलसीसर की जिस मिट्टी ने डॉ. अनिल कुमार को जन्म दिया, उसी मिट्टी का नाम अब उनकी उपलब्धियों के साथ उत्तर प्रदेश में भी लिया जा रहा है। यह कहानी केवल एक आईपीएस अधिकारी की नहीं है। यह झुंझुनूं की उस मिट्टी की कहानी है, जो अपने बेटों को संघर्ष करना सिखाती है… जिम्मेदारी निभाना सिखाती है… और जरूरत पड़ने पर किसी अनजान के दर्द को भी अपना समझना सिखाती है। डॉ. अनिल कुमार का यह कदम उन दो बच्चियों के लिए शायद जिंदगी भर की याद बन जाए। क्योंकि कुछ मदद रुपये से बड़ी होती है… वह किसी टूटे हुए इंसान को यह एहसास दिलाती है कि—“तुम अकेले नहीं हो।” और शायद यही वजह है कि आज अलसीसर से लेकर झुंएलुन तक लोग इस पुलिस अधिकारी की चर्चा सिर्फ उसके एक्शन के लिए नहीं, बल्कि उसके दिल के लिए भी कर रहे हैं。
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नौतन के शिवराज पुर पासवान टोला में बाढ़ से घर डूबे, राहत नही पहुंची

Bettiah, Bihar:Anchor ______ बेतिया से खबर है जहां नौतन प्रखंड के शिवराज पुर पासवान टोला डूब गया है चंपारण तटबंध के नीचे सैंकड़ों घर डूब गए है हजारों लोग तटबंध पर शरण लिए है तीन दिन से गांव जलमग्न है हर साल निचले इलाके के लोग बाढ़ से डूबते है बर्बादी होती है बीस साल से बिहार में NDA की सरकार है लेकिन आज तक बाढ़ से बचाव का स्थाई निदान नहीं कर सकी है ये बाढ़ पीड़ितों की बर्बादी और बेबसी लाचारी का आखिर कौन जिम्मेदार है तीन दिन से इन बाढ़ पीड़ितों के बीच राहत सामग्री नहीं पहुंची है सूखा राशन हो या सामुदायिक किचन यहां अभी शुरू नहीं हुआ है बाढ़ पीड़ितों का कहना है बाढ़ में उनका सबकुछ बर्बाद हो गया है खाने के लिए अनाज भी नहीं बचा है तीन दिन से जैसे तैसे खाकर जीवन बसर कर रहे है ना अभी तक कोई हमलोग को देखने आया है और ना ही कोई सामग्री पहुंची है बाढ़ पीड़ितों के आँखो में आंसू है जो किसी सैलाब से कम नहीं है बाढ़ ने उनका सबकुछ छीन लिया है उनके पास अब सिर्फ उनकी बेबसी और लाचारी ही बची है
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CBI to investigate BSP iron scrap theft; Deputy CM Vijay Sharma forwards the case

Raipur, Chhattisgarh:CBI करेगी BSP लोहा स्क्रैप चोरी की जांच. मामले के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा- काफी दिनों से चीजें चल रही थी, BSP के संदर्भ से विषय सामने आया है, इसका स्पष्टता से और व्यापक जांच होनी चाहिए, पुलिस अच्छा काम कर रही थी जांच की लोगो को arrest किया, बड़ी जांच करानी की बात थी इसलिए CBI को forwarded किया गया है. भाजपा के झीरम को लेकर ट्वीट पर डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने साधा निशाना, कहा- झीरम घाटी के सबूत नहीं देने पर कसा तंज, जो ट्वीट आया है वो बिल्कुल उचित है, मुश्किल है राजनीति में भूपेश बघेल से बड़ा झूठ बोलने वाला व्यक्ति खोजना, बघेल घोटाले बाज है, झीरम के विषय पर कहूंगा. भूपेश बघेल ने कहा मेरे जेब में सबूत है पांच साल सरकार चली मुख्यमंत्री बनकर उनकी, कभी सबूत लेकर कही गए नहीं किसी को दिखाया नहीं. NIA को अभी भी बता सकते पर कर नहीं रहे है, बाईट- विजय शर्मा, डिप्टी सीएम, छत्तीसगढ़.....
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जलभराव: ट्रॉली ग्रेवल से समाधान नहीं, लोगों ने आंदोलन की चेतावनी दी

Karauli, Rajasthan:जलभराव से निजात के नाम पर एक ट्रॉली ग्रेवल, लोगों में रोष एमडीआर-111 पर नालियों के अभाव से जमा हो रहा बारिश का पानी, स्थायी समाधान की मांग, जिला करौली सपोटरा नगरपालिका क्षेत्र के वार्ड नंबर 5 में उपखंड कार्यालय से दुर्गाशाह वन पौधशाला तक एमडीआर-111 पर जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग ने एक ट्रॉली ग्रेवल डलवाया, लेकिन क्षेत्रवासियों का कहना है कि इससे समस्या का समाधान नहीं हुआ। नालियों के अभाव में सड़क पर बारिश का पानी जमा होने से राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। लोगों ने स्थायी जल निकासी व्यवस्था की मांग करते हुए तीन दिन में समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। एमडीआर-111 सड़क मार्ग सवाई माधोपुर जिले के नारायणपुर-टटवाड़ा क्षेत्र को सवाई माधोपुर स्थित त्रिनेत्र गणेश मंदिर से जोड़ता है। इस कारण मार्ग पर स्थानीय लोगों के अलावा श्रद्धालुओं और अन्य वाहन चालकों की भी आवाजाही रहती है। क्षेत्रवासियों के अनुसार बारिश के दौरान सड़क पर पानी जमा होने से आवागमन प्रभावित होता है। जलभराव से राहत के लिए विभाग की ओर से एक ट्रॉली ग्रेवल डलवाया गया, जिसे लोगों ने अपर्याप्त बताया। उनका कहना है कि केवल ग्रेवल डालने से पानी की निकासी नहीं होगी और समस्या दोबारा बनी रहेगी। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में कागजों में नालियों का निर्माण दर्शाया गया है, जबकि मौके पर नालियां नजर नहीं आतीं। इससे कथित निर्माण कार्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग से पूरे मामले की जांच कराने, नालियों का निर्माण कराने और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि तीन दिन में समस्या का समाधान नहीं होने पर आंदोलन किया जाएगा।
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1 अक्टूबर से जन्म-मृत्यू पंजीकरण: 2 साल से पुराने मामलों में न्यायिक मंजूरी जरूरी

Jaipur, Rajasthan:एंकर- जन्म हुआ...लेकिन समय पर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं कराया, तो अब देरी सिर्फ कागजों की नहीं...आपकी परेशानी भी बढ़ाएगी। एक अक्टूबर से जन्म और मृत्यु के पंजीकरण का नियम बदलने जा रहा है। सबसे बड़ा बदलाव दो साल से ज्यादा पुराने मामलों में होगा। अब ऐसे केस में सिर्फ SDM या प्रशासनिक अधिकारी की मंजूरी से काम नहीं चलेगा...प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश भी लेना होगा। यानी जितना पुराना मामला...उतनी लंबी जांच और उतनी ऊंची मंजूरी। ऐसे में अगर आपके परिवार में किसी का जन्म या मृत्यु अब तक सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है...तो ये खबर आपके बेहद काम की है। ऐसे समझें नई व्यवस्था : 2 साल की सीमा सबसे अहम 1-यदि जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक साल बाद, लेकिन दो साल पूरे होने से पहले दी जाती है तो पंजीकरण के लिए संबंधित क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम या जिला मजिस्ट्रेट की ओर से अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट का आदेश लेना होगा। संबंधित अधिकारी घटना की सत्यता की जांच करने के बाद आदेश देगा और निर्धारित शुल्क भी देना होगा। 2-लेकिन जैसे ही देरी दो साल से अधिक होती है, मामला प्रशासनिक मजिस्ट्रेट के स्तर से निकलकर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के पास जाएगा। न्यायिक मजिस्ट्रेट घटना की सत्यता का सत्यापन करने के बाद ही पंजीकरण का आदेश दे सकेगा। इसके बाद रजिस्ट्रार जन्म या मृत्यु को रिकॉर्ड में दर्ज कर सकेगा। बहरहाल, जन्म और मृत्यु का पंजीकरण जितना जल्दी कराया जाएगा, आगे की प्रक्रिया उतनी ही आसान रहेगी। खासकर दो साल की अवधि पार होने के बाद अब प्रशासनिक मंजूरी के साथ मामला खत्म नहीं होगा। न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की अतिरिक्त प्रक्रिया जुड़ जाएगी। इसलिए परिवार में जन्म या मृत्यु होने पर पंजीकरण को वर्षों तक टालना अब ज्यादा प्रक्रियागत परेशानी बढ़ा सकता है。
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कांग्रेस का पैदल मार्च, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग तेज

Bikaner, Rajasthan:मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का पैदल मार्च कोटगेट से जिला कलेक्टर कार्यालय तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निकाला पैदल march शहर और देहात कांग्रेस कमेटी ने संयुक्त रूप से किया विरोध प्रदर्शन राजस्थान कांग्रेस के निर्देश पर जिला मुख्यालय पर आयोजित हुआ प्रदर्शन कांग्रेस नेताओं ने कलेक्टर कार्यालय के आगे पुतला दहन कर इस्तीफे की मांग की प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर पार्टी लगातार आवाज उठा रही है प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई और अपनी आपत्तियां सार्वजनिक रूप से रखीं
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वाराणसी में धनराज हाथी तालाब में उतरा, रामलीला प्रभावित

JPJai Pal6m ago
Varanasi, Uttar Pradesh:Varanasi Breaking * वाराणसी में खाना देर से मिलने पर काशी राजपरिवार के हाथी धनराज का बिगड़ा मूड. * बेड़ियां तोड़कर पंपासर पोखरे में जा उतरा गजराज धनराज. * हाथी के तालाब में उतरते ही लोगों में मची भगदड़. * रामनगर की रामलीला के लिए आजमगढ़ के जीयनपुर से आया है धनराज. * पंचवटी मैदान के खुले बगीचे में महावत के साथ रहते हैं चार हाथी. * सुबह करीब 11:30 बजे बेड़ियां तोड़कर तालाब में उतरा धनराज. * महावत के मान-मनौव्वल के बाद भी नहीं माना हाथी. * पेड़ की डालियां दिखाकर हाथी को तालाब से बाहर निकालने का किया प्रयास. * करीब चार घंटे बाद तालाब से बाहर निकला धनराज. * बाहर आने के बाद हाथी को खिलाया गया खाना, महावतों ने संभाली स्थिति. * धनराज के तालाब में उतरे की सूचना से रामलीला आयोजन से जुड़े लोग परेशान. * पिछले छह वर्षों से काशी राजपरिवार के अनंत नारायण सिंह इसी हाथी की पीठ पर बैठकर देखते हैं रामलीला. * हाथी के शांत होने के बाद महावत उसे वापस रामलीला स्थल पर लेकर पहुंचे
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वाराणसी पुलिसकर्मी की ड्यूटी छोड़ डांसरों की रिकॉर्डिंग: वीडियो वायरल, जांच के आदेश

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Varanasi, Uttar Pradesh:• वाराणसी के लाट भैरव मेले में सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी बार बालाओं का वीडियो बनाते कैमरे में कैद, वीडियो वायरल。 • संवेदनशील क्षेत्र में ड्यूटी छोड़कर मोबाइल से डांसरों की रिकॉर्डिंग करते दिखे पुलिसकर्मी。 • सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद वाराणसी पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल。 • मामले का वीडियो सामने आने के बाद वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट ने घटना की जांच के दिए आदेश。 • ड्यूटी में लापरवाही बरतने और विभाग की छवि धूमिल करने वाले पुलिसकर्मियों पर गिर सकती है गाज。
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