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RTRahul TiwariFollow14 Jan 2025, 12:52 pm

Gonda: फलाहारीधाम मंदिर पर पौष पूर्णिमा मेले का सकुशल समापन

Jamatha, Uttar Pradesh:

विकासखंड कटरा बाजार के ऐतिहासिक और प्राचीन फलाहारीधाम मंदिर पर पौष पूर्णिमा के अवसर पर एक दिवसीय मेला शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ। हजारों श्रद्धालुओं ने कुटिला नदी में स्नान कर पंचमुखी महादेव का जलाभिषेक किया और बाबा फलाहारी की प्रतिमा पर फल, फूल, और मालाएं अर्पित कीं। आगामी तिलवा पर्व को लेकर श्रद्धालुओं ने तिल, गुड़, और शकरकंद सहित मेले में लगी दुकानों से जमकर खरीदारी की। थाना कौड़िया प्रभारी अरविंद कुमार सिंह के नेतृत्व में दर्जनों सुरक्षाकर्मी मेले में शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में मुस्तैद रहे। मंदिर महंत सिद्धार्थ दास के सेवादारों ने श्रद्धालुओं की बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखा।

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उदयपुर में बीएमएस के बैनर तले मजदूरों ने रैली और धरना दिया

Udaipur, Rajasthan:उदयपुर में आज भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले मजदूरों ने रैली निकाल प्रदर्शन किया। इस दौरान मजदूरों ने कलेक्ट्रेट के बाहर धरना देते हुए जम कर नारेबाजी की। इससे पहले मजदूरों ने टाउनहॉल प्रांगण से रैली निकाली, जो शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। बीएमएस के पदाधिकारियों ने कहा कि मजदूरों की मांगों को लेकर आज देशभर में मजदूर सड़को पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार ने अगर समय रहते मजदूरों की मांगों पर ध्यान नही दिया तो आनेवाले समय मे बीएमएस के बैनर तले मजदूर उग्र प्रदर्शन करेंगे。
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चौका नदी में डूबने से नौ वर्षीय बच्चे की मौत रेउसा। थाना रेउसा क्षेत्र के नारायणपुर हरदो पट्टी गांव

RKRamendr KumarFollowJust now
Kharoha, Uttar Pradesh:चौका नदी में डूबने से नौ वर्षीय बच्चे की मौत रेउसा। थाना रेउसा क्षेत्र के नारायणपुर हरदो पट्टी गांव में सोमवार को चौका नदी में भैंस निकालने गए तीन बच्चों में एक की डूबने से मौत हो गई। मृतक की पहचान सुमेरी के नौ वर्षीय पुत्र श्यामलाल के रूप में हुई है। दो बच्चों को सुरक्षित बचा लिया गया। बताया गया कि श्यामलाल दो अन्य बच्चों के साथ नदी में भैंस निकालने गया था। इसी दौरान गहरे पानी में जाने से तीनों बच्चे डूबने लगे। आसपास मौजूद लोगों ने बचाव कर दो बच्चों को बाहर निकाल लिया। श्यामलाल को भी काफी प्रयास के बाद बाहर निकाला गया और परिजन उसे सीएचसी रेउसा ले गए, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। हादसे की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बताया गया कि परिजन बिना पोस्टमार्टम कराए शव घर ले गए। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है।
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जयपुर के 19 निकायों में 690 वार्डों का आरक्षण साफ, महिलाओं के लिए सुरक्षित

Jaipur, Rajasthan:एंकर- जयपुर में लॉटरी के जरिए आरक्षण तय होने के साथ ही निकाय चुनाव का काउंटडाउन अब तेज हो गया है...कहीं सियासी समीकरण बदले हैं, तो कहीं दावेदारों की उम्मीदों को झटका लगा है...लॉटरी ने 690 वार्डों के आरक्षण का पिटारा खोल दिया है...जयपुर के 19 निकायों में किस वार्ड पर किस वर्ग का कब्जा होगा, तस्वीर अब पूरी तरह साफ हो गई हैं...करीब साढ़े चार घंटे चली लॉटरी प्रक्रिया में एससी, एसटी, ओबीसी और महिला आरक्षण तय हुआ...दो स्कूली बच्चियों ने लॉटरी निकालकर कई नेताओं का सियासी गणित तय कर दिया है..अब आरक्षण की तस्वीर साफ होते ही टिकट के दावेदारों की दौड़ शुरू होगी... वीओ-1- निकाय चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। जयपुर जिले के 19 नगरीय निकायों के 690 वार्डों में आरक्षण की तस्वीर अब साफ हो गई है। जयपुर जिला कलेक्ट्रेट में करीब साढ़े चार घंटे तक चली लॉटरी प्रक्रिया में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए वार्डों का आरक्षण तय किया गया। कलेक्टर संदेश नायक की अध्यक्षता में हुई लॉटरी प्रक्रिया में दो स्कूली बच्चियों ने अलग-अलग वर्गों के लिए लॉटरी निकाली। प्रक्रिया के दौरान विधायक कालीचरण सराफ, जमवारामगढ़ विधायक महेंद्रपाल मीणा सहित राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। जयपुर जिले में एक नगर निगम, दो नगर परिषद और 16 नगरपालिकाओं के कुल 690 वार्ड हैं। इनमें जयपुर नगर निगम के 150, चौमूं और शाहपुरा नगर परिषद के 100 तथा 16 नगरपालिकाओं के 440 वार्ड शामिल हैं। जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में 50 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। उधर नगर परिषद चौमूं के 45 और शाहपुरा के 55 वार्डों का आरक्षण तय हुआ.....वहीं नगरपालिका सांभर, चाकसू फुलेरा, जोबनेर, बगरू, किशनगढ-रेनवाल, बस्सी, नरायना, मनोहरपुर, वाटिका, फागी, जमवारामगढ, दूदू, कानोता, कालाडेरा, खेजरोली के 440 वार्डों का भी लॉटरी का जरिए आरक्षण तय हुआ बाइट-संदेश नायक, जिला कलक्टर जयपुर वर्गवार आरक्षण इस प्रकार रहेगा जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों का आरक्षण एससी —20 वार्ड: 13 एससी सामान्य और 7 एससी महिला एसटी —6 वार्ड: 4 एसटी सामान्य और 2 एसटी महिला ओबीसी —30 वार्ड: 20 ओबीसी सामान्य और 10 ओबीसी महिला सामान्य —94 वार्ड: 63 सामान्य और 31 सामान्य महिला नगर निगम कुल वार्डों की संख्या-150 अनारक्षित वार्ड (सामान्य) -वार्ड संख्या- 1, 3, 5, 11, 13, 14,15 16, 17, 19, 21, 22, 24, 28, 29, 30, 31, 34, 35, 36, 40, 43, 44, 47, 49, 54, 57, 62, 67, 71,74, 76, 77, 78, 81, 89, 93, 95, 96, 97, 98, 99, 101, 103, 104, 105, 106, 109,111, 112, 114,118, 119, 120,121, 127,128, 130, 134, 135, 137, 140, 141 अनारक्षित सामान्य महिला- वार्ड संख्या-4, 6, 7, 8, 9, 20, 25, 32, 46, 56, 70, 73, 87, 88, 92 100, 107, 108, 110, 116, 117, 123, 125, 126, 133, 136, 138, 139, 145, 148, 149 SC ओपन- वार्ड संख्या- 37, 45, 50, 55, 63, 65, 66, 79, 84, 85, 115, 129, 132, SC महिला-वार्ड संख्या- 58, 59, 69, 72, 86, 124, 142 ST ओपन-वार्ड संख्या- 60, 61, 64, 131 ST महिला- वार्ड संख्या- 68, 150 OBC ओपन -वार्ड संख्या- 2, 12, 18, 23, 27, 38, 39, 41, 42, 48, 51, 52, 53, 82, 83, 91, 113, 122, 144, 147 OBC महिला- वार्ड संख्या- 10, 26, 33, 75, 80, 90, 94, 102, 143, 146, बहरहाल, आरक्षण की घोषणा के साथ ही कई वार्डों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों का गणित बदल गया है। लंबे समय से टिकट की तैयारी कर रहे नेताओं में किसी के लिए मैदान खुल गया है तो किसी को अब दूसरे वार्ड का रुख करना पड़ सकता है। महिला आरक्षण के चलते कई वार्डों में नए चेहरे सामने आने की संभावना है। अब आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद राजनीतिक दलों में वार्डवार संभावित प्रत्याशियों के नामों पर मंथन तेज होगा।
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असम CM के 5 किमी रेडिएशन के अंदर जमीन खरीद-फरोख्त पर रोक

Guwahati, Assam:असम विधानसभा में असम के मुख्यमंत्री ने एक नया कानून लाया है की ऐतिहासिक मंदिर या धार्मिक स्थान के आसपास के 5 किलोमीटर रेडिएशन में कोई भी जमीन खरीद या बेच नहीं सकेंगे. इसी बात पर गुवाहाटी हाई कोर्ट के सीनियर एडवोकेट इलियास अहमद से हमने खास बातचीत की. ADVOCATE इलियास अहमद ने खास बातचीत के दौरान कहा कि असम में भारतीय जनता पार्टी के सरकार सिर्फ हर रोज हिंदू मुस्लिम की राजनीति करते रहते हैं जिस वक्त असम में बाढ़ से तबाही मची हुई है उस वक्त इस तरह से एक नया कानून असम विधानसभा में पास करने की जरूरत कहां थी ऐसा करना सही नहीं है . क्योंकि बाढ़ से पूरी तरह से तबाह हो चुका है शिवसागर उस वक्त असम विधानसभा में मुख्यमंत्री ने इस तरह से एक नया कानून जिसमें एक हेरिटेज मंदिर यह धार्मिक स्थान के 5 किलोमीटर के रेडिएशन में कोई भी जमीन खरीद या बेचना नहीं सकेंगे यह कहीं भी ठीक नहीं लगता. हां एक बात सही है यह कानून पास हो जाएगा क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के विधायक ज्यादा है और यह संविधान का नियम ही है यह कोई इलीगल नहीं है लीगल करवाई है इसमें सिर्फ एक बात है कि अगर इस तरह से हिंदू मुस्लिम मस्जिद मंदिर में लगे रहेंगे तो डेवलपमेंट कहां होगा देश का सिर्फ देखा गया कि असम में कहीं बुलडोजर कहीं हिंदू मुस्लिम इस तरह से राजनीति खेली जा रही है ऐसा होने से कोई भी डेवलपमेंट नहीं होगा. देखा जाए तो यह जो जमीन है हेरिटेज धार्मिक स्थान के पास किलोमीटर रेडिएशन में यह 5 किलोमीटर बहुत ज्यादा होता है बहुत बड़ा इलाका होता है ऐसा होने से अगर कोई दूसरा आदमी जमीन नहीं खरीद पाएंगे तो उस जगह में डेवलपमेंट भी नहीं होगा कोई दूसरा आदमी आकर जमीन खरीदना है उसमें कोई कंपनी बनता है तो डेवलपमेंट होता है. हां 1 किलोमीटर रेडिएशन में अगर मंदिर के पास जमीन की खरीद या बेच नहीं होती है यह माना जा सकता है परंतु 5 किलोमीटर रेडिएशन में इस तरह से जमीन की खरीदारी नहीं होगी यह बहुत गलत है ऐसा करने से डेवलपमेंट में रोक लग जाएगी और सरकार ऐसा करना नहीं चाहिए.
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300 साल के अखाड़े में नागपंचमी दंगल से युवा पीढ़ी को जोड़ा गया

Chhatarpur, Madhya Pradesh:नागपंचमी के मौके पर छतरपुर के हनुमान टोरिया मंदिर में 300 साल पुराने अखाड़े में परंपरागत दंगल का आयोजन किया गया। इस दंगल का मकसद युवा पीढ़ी को फिर से अखाड़े से जोड़ना था। हनुमान टोरिया मंदिर परिसर में करीब 300 वर्ष पुराना प्राचीन अखाड़ा है। यहां पिछले 66 वर्षों से नागपंचमी पर दंगल की परंपरा चली आ रही है। इस बार भी स्थानीय और आसपास के जिलों से आए पहलवानों ने दांव-पेच का शानदार प्रदर्शन किया। दंगल की शुरुआत मुख्य पुजारी ने भगवान हनुमान के पूजन से की। इसके बाद पहलवानों ने अखाड़े की मिट्टी तैयार कर कुश्ती शुरू की। पुजारी ने सभी पहलवानों का तिलक लगाकर स्वागत किया। आयोजकों का कहना है कि इस प्राचीन अखाड़े में वर्षों से नागपंचमी के अवसर पर दंगल आयोजित होता आ रहा है। अखाड़ा केवल कुश्ती का मैदान नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, अनुशासन और संस्कारों की पाठशाला है। युवा पीढ़ी को हमारी प्राचीन खेल संस्कृति से जोड़ना जरूरी है।
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सुक्खू सरकार IAS-IPS-IFS कैडर में कटौती: सालाना 200 करोड़ बचत का दावा

Shimla, Himachal Pradesh:हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की बात कही है। सरकार ने IAS, IPS और IFS कैडर में स्वीकृत पदों की संख्या घटाने का फैसला किया है। शिमला में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आईएएस के 153 स्वीकृत पदों को घटाकर 130 किया जा रहा है। आईएफएस के 118 पद घटाकर 83 और आईपीएस के 96 पदों में भी कटौती की जा रही है। दिल्ली प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले अधिकारियों की फाइलों को जल्द क्लीयरेंस देने की बात भी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कही। इससे पहले इसी साल 11 फरवरी को मुख्यमंत्री ने बताया था कि आईएफएस के पद 110 से घटाकर 86 कर दिए गए हैं। उस समय उन्होंने कहा था कि सरकार के सुधारों और नीतिगत बदलावों के साथ भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने से पिछले तीन वर्षों में 3,800 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई है। हिमाचल प्रदेश सरकार का अनुमान है कि प्रशासनिक पदों और फिजूलखर्ची में कटौती से सालाना करीब 200 करोड़ रुपये की बचत होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल को बड़ी संख्या में केवल कागजी अफसरों की जरूरत नहीं है, बल्कि ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था चाहिए जो योजनाओं को जमीन पर उतार सके। हालांकि, कैडर में कटौती का असर प्रशासनिक कामकाज और अधिकारियों की उपलब्धता पर कितना पड़ेगा, यह आने वाले वक्त में ही स्पष्ट होगा। अफसरों की संख्या कम करने को लेकर 2024 में बनी थी कैबिनेट सब कमेटी साल 2024 में हिमाचल प्रदेश में अधिकारियों की संख्या कम करने और कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए कैबिनेट सब कमेटी का गठन किया गया था। उस समय कमेटी के सदस्य और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा था कि बजट का बड़ा हिस्सा लोन की किश्त और ब्याज चुकाने में जा रहा है। उन्होंने आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए सख्त फैसले लेने की जरूरत जताई थी और कहा था कि निशुल्क सेवाओं में भी कटौती हो सकती है। राजेश धर्माणी ने कहा था कि सरकार का स्ट्रक्चर पिरामिड की तरह होना चाहिए था, लेकिन यह इन्वर्टेड पिरामिड की तरह बन चुका है। राजेश धर्माणी ने सरकारी विभागों में अफसरों के युक्तिकरण को समय की जरूरत बताया था। उनका कहना था कि जिस विभाग में 10 अधिकारी हैं, वहां जरूरत के हिसाब से कम अधिकारियों को रखा जाएगा और सरकार इस दिशा में काम करेगी। मंत्री के मुताबिक, वर्ष 2006 से 2022 के बीच 16 साल में क्लास वन यानी गजेटेड ऑफिसर की संख्या में 62 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस वर्ग के अधिकारियों की संख्या कम करके जरूरत के हिसाब से फील्ड और लोअर स्टाफ बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। ————- हिमाचल प्रदेश में IAS, IPS और IFS का कैडर घटा रही सुक्खू सरकार मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के ताज़ा बयान से अफसरशाही में ‘खलबली’ हिमाचल प्रदेश में IAS के 153 में 130 पद करने जा रहे हैं IFS के 118 में से 83 पद करने की तैयारी IPS के पदों को भी 96 से कम किया जाएगा CM सुक्खू का दावा- हर साल होगी 200 करोड़ रुपए की बचत
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पटना के जेडी व Womens College में विद्यार्थी सहयोग शिविर शुरू, 1100 हेल्पलाइन से शिकायत दर्ज

Noida, Uttar Pradesh:आज पटना के जे०डी० वीमेंस कॉलेज से विद्यार्थी सहयोग शिविर पोर्टल का शुभारंभ किया। अब विद्यार्थी पोर्टल अथवा टोल-फ्री हेल्पलाइन 1100 के माध्यम से अपनी शिकायत एवं सुझाव दर्ज करा सकेंगे। प्रत्येक माह के चौथे मंगलवार को "विद्यार्थी सहयोग शिविर" आयोजित होगा तथा 25 अगस्त से सभी स्कूलों एवं छात्रावासों में "विद्यार्थी सहयोग अभियान" शुरू होगा। शिकायतों पर 10 दिनों में कार्रवाई शुरू नहीं होने पर स्वतः नोटिस और अधिकतम 30 दिनों में समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। 551 स्थानों पर मॉडल स्कूलों, घर से लाइव शिक्षक सपोर्ट, 211 नए डिग्री कॉलेज एवं 342 बी.एड. कॉलेजों में डिग्री पाठ्यक्रम की अनुमति के साथ बिहार के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा और अवसरों का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
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मालदा के महानंदटोला में गंगा नदी के उफान से 40-50 घर डूबे; राहत कार्यक्रम जारी

Malda, West Bengal:মালদার রতুয়ার মহানন্দাটোলার ভাঙণ পরিস্থিতি দেখতে যাচ্ছেন রজ্যের সেচ দপ্তরের প্রতিমন্থ্রী জুয়েল মুর্মু। এদিকে রবিবার সকালে গঙ্গা নদীর ভাঙণের পর পরিস্থিতি স্থিতিশীল রয়েছে। নতুন করে আর ভাঙণ হয় নি। চোখের সামনে ঘরবাড়ি সহ সর্বস্ব নদীগর্ভে বিলীন হয়ে যাওয়ায় চরম অসহায় পরিস্থিতিতে পড়েছেন এলাকাবাসীরা। সরকারি উদাসীনতায় একরাশ ক্ষোভ উগড়ে দিচ্ছেন ভাঙন দুর্গতরা। রবিবার সকাল থেকে মহানন্দটোলা গ্রাম পঞ্চায়েতের জিতুটোলা গ্রামে আচমকাই শুরু হয় ভাঙন। মুহূর্তের মধ্যে গঙ্গার গ্রাসে চলে যায় গ্রামের প্রায় ৪০ থেকে ৫০টি বাড়ি। ভাঙনের আতঙ্কে ঘরছাড়া হতে শুরু করেন এলাকlicher বহু পরিবার। স্থানীয় সূত্রে জানা গিয়েছে, সকাল থেকেই গঙ্গার পাড়ে ফাটল দেখা দিতে শুরু করে। এরপর আচমকা নদীগর্ভে চলে যেতে থাকে একের পর এক বসতবাড়ি। পরিস্থিতি এতটাই ভয়াবহ হয়ে ওঠে যে, আতঙ্কিত গ্রামবাসীরা ঘরবাড়ি থেকে প্রয়োজনীয় জিনিসপত্র, আসবাবপত্র ও অন্যান্য সামগ্রী বের করে নিরাপদ জায়গায় সরিয়ে নিতে শুরু করেন। চোখের সামনে বসতবাড়ি নদীগর্ভে তলিয়ে যাওয়ায় কান্নায় ভেঙে পড়েন 많은েই। বাসিন্দারা নিজেরাই ঝুঁকপূর্ণ এলাকা থেকে নিরাপদ আশ্রয়ে সরে যাচ্ছেন। স্থানীয় বাসিন্দাদের অভিযোগ, গঙ্গার জল বৃদ্ধির সঙ্গে সঙ্গেই আচমকা ভাঙন শুরু হয়েছে। আগে থেকেই নদীভাঙনের আশঙ্কা থাকলেও ব্যবস্থা নেওয়া হয় নি। কয়েক ঘণ্টার মধ্যেই বহু পরিবার সর্বস্ব হারিয়েছেন এলাকায় এখনও ভাঙন অব্যাহত থাকায় আতঙ্ক আরও বেড়েছে। নতুন করে আরও বাড়িঘর নদীগর্ভে চলে যাওয়ার আশঙ্কা করছেন বাসীন্দারা। প্রশাসনের পক্ষ থেকে পরিস্থিতির উপর নজর রাখা হচ্ছে। দুর্গতদের নিরাপদ আশ্রয়, প্রয়োজনীয় ত্রাণ এবং অন্যান্য সরকারি সহায়তার ব্যবস্থা করার উদ্যোগ নেওয়া হয়েছে। আচমকা নদীর গ্রাসে বসতবাড়ি হারিয়ে এখন অনিশ্চিত ভবিষ্যতের মুখে জিতুটলা গ্রামের বহু পরিবার。
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मंदिर के बाहर सीवरेज ओवरफ्लो से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को बढ़ी परेशानी

Zirakpur, Punjab:ਜ਼ੀਰਕਪੁਰ ਪਾਲਮ ਇਨਕਲੇਵ ਦੀ ਮੰਦਰ ਵਾਲੀ ਗਲੀ ਵਿੱਚ ਪਿਛਲੇ ਕਰੀਬ ਇੱਕ ਮਹੀਨੇ ਤੋਂ ਸੀਵਰੇਜ ਓਵਰਫਲੋ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਨੇ ਸਥਾਨਕ ਲੋਕਾਂ ਲਈ ਵੱਡੀ ਮੁਸ਼ਕਲ ਖੜ੍ਹੀ ਕਰ ਦਿੱਤੀ ਹੈ। ਮੰਦਰ ਦੇ ਬਿਲਕੁਲ ਬਾਹਰ ਸੀਵਰੇਜ ਦਾ ਗੰਦਾ ਪਾਣੀ ਸੜਕ ’ਤੇ ਜਮ੍ਹਾ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਜਿੱਥੇ ਇਲਾਕਾ ਵਾਸੀਆਂ ਨੂੰ ਆਉਣ-ਜਾਣ ਵਿੱਚ ਦਿੱਕਤ ਆ ਰਹੀ ਹੈ, ਉੱਥੇ ਮੰਦਰ ਵਿੱਚ ਮੱਥਾ ਟੇਕਣ ਆਉਣ ਵਾਲੀ ਸੰਗਤ ਨੂੰ ਵੀ ਗੰਦੇ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚੋਂ ਲੰਘਣ ਲਈ ਮਜਬੂਰ ਹੋਣਾ ਪੈ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਸਥਾਨਕ ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਕਹਿਣਾ ਹੈ ਕਿ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਤੋਂ ਸੜਕ ’ਤੇ ਖੜ੍ਹੇ ਸੀਵਰੇਜ ਦੇ ਪਾਣੀ ਕਾਰਨ ਇਲਾਕੇ ਵਿੱਚ ਹਰ ਸਮੇਂ ਬਦਬੂ ਦਾ ਮਾਹੌਲ ਬਣਿਆ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ। ਖਾਸ ਕਰਕੇ ਮੰਦਰ ਦੇ ਬਾਹਰ ਬਣੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਹਾਲਾਤਾਂ ਕਾਰਨ ਸ਼ਰਧਾਲੂਆਂ ਨੂੰ ਕਾਫੀ ਪ੍ਰੇਸ਼ਾਨੀ ਦਾ ਸਾਹਮਣਾ ਕਰਨਾ ਪੈ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਲੋਕਾਂ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਗੰਦਾ ਪਾਣੀ ਲਗਾਤਾਰ ਜਮ੍ਹਾ ਰਹਿਣ ਕਾਰਨ ਮੱਛਰਾਂ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਦਾ ਖਤਰਾ ਵੀ ਵੱਧ ਗਿਆ ਹੈ। ਇਲਾਕਾ ਵਾਸੀਆਂ ਨੂੰ ਡਰ ਹੈ ਕਿ ਜੇਕਰ ਸਮੇਂ ਸਿਰ ਇਸ ਸਮੱਸਿਆ ਦਾ ਹੱਲ ਨਾ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਤਾਂ ਗੰਦੇ ਪਾਣੀ ਅਤੇ ਮੱਛਰਾਂ ਕਾਰਨ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਫੈਲਣ ਦਾ ਖਤਰਾ ਹੋਰ ਵਧ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਮੰਦਰ ਕਮੇਟੀ ਅਤੇ ਸਥਾਨਕ ਨਿਵਾਸੀਆਂ ਮੁਤਾਬਕ ਮੰਦਰ ਦੇ ਬਾਹਰ ਅਜਿਹੇ ਹਾਲਾਤ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਪਹਿਲਾਂ ਕਦੇ ਨਹੀਂ ਵੇਖੇ। ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਦੋਸ਼ ਹੈ ਕਿ ਸਮੱਸਿਆ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਕਈ ਵਾਰ ਜ਼ੀਰਕਪੁਰ ਨਗਰ ਕਾਊੰਸਲ ਦੇ ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਸ਼ਿਕਾਇਤ ਕੀਤੀ ਜਾ ਚੁੱਕੀ ਹੈ, ਪਰ ਇਸ ਦੇ ਬਾਵਜੂਦ ਅਜੇ ਤੱਕ ਕੋਈ ਪੱਕਾ ਹੱਲ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਕਹਿਣਾ ਹੈ ਕਿ ਸੀਵਰੇਜ ਓਵਰਫਲੋ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ sਿਰਫ਼ ਪਾਣੀ ਕੱਢ ਦੇਣਾ ਇਸ ਸਮੱਸਿਆ ਦਾ ਸਥਾਈ ਹੱਲ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਸੀਵਰੇਜ ਲਾਈਨ ਵਿੱਚ ਕਿੱਥੇ ਖਰਾਬੀ ਜਾਂ ਰੁਕਾਵਟ ਹੈ, ਇਸ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕਰਕੇ ਸਮੱਸਿਆ ਦੀ ਜੜ੍ਹ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚਣਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ। ਲੋਕਾਂ ਨੇ ਮੰਗ ਕੀਤੀ ਕਿ ਸੀਵਰੇਜ ਪ੍ਰਬੰਧ ਨੂੰ ਪੱਕੇ ਤੌਰ ’ਤੇ ਠੀਕ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਜੋ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਬਰਸਾਤੀ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ ਹਾਲਾਤ ਹੋਰ ਗੰਭੀਰ ਨਾ ਹੋਣ। ਮੌਕੇ ’ਤੇ ਮੰਦਰ ਕਮੇਟੀ ਅਤੇ ਪਾਲਮ ਇਨਕਲੇਵ ਦੇ ਵਸਨੀਕਾਂ ਨੇ ਮੌਜੂਦਾ ਸਰਕਾਰ ਅਤੇ ਨਗਰ ਕੌਂਸਲ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਰੋਸ ਜ਼ਾਹਰ ਕਰਦਿਆਂ ਮੰਗ ਕੀਤੀ ਕਿ ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਨੂੰ ਗੰਭੀਰਤਾ ਨਾਲ ਲਿਆ ਜਾਵੇ ਅਤੇ ਤੁਰੰਤ ਸੀਵਰੇਜ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਦਾ ਹੱਲ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ。
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