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MjChoudharyMjChoudharyFollow6 Jan 2025, 06:47 am
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केएमसी मेडिकल कॉलेज में होगी एमडी एवं एमएस की पढ़ाई, 76 पीजी सीटों को मिली स्वीकृति

Mahuwa, Uttar Pradesh:महराजगंज। पूर्वांचल के चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में केएमसी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, महराजगंज को पोस्ट ग्रेजुएट (PG) पाठ्यक्रमों की स्वीकृति मिली है। अब कॉलेज में एमबीबीएस के साथ-साथ एमडी (MD) एवं एमएस (MS) की पढ़ाई का रास्ता भी खुल गया है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग की ओर से जारी तत्कालीन स्वीकृति सूची के अनुसार, कॉलेज को विभिन्न विभागों में कुल 76 पीजी सीटों की मंजूरी मिलने की जानकारी सामने आई है। इस उपलब्धि से चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में केएमसी मेडिकल कॉलेज ने एक नया मुकाम हासिल किया है। *19 विभागों में शुरू होंगे विशेषज्ञता के पाठ्यक्रम* राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग की 6 नवंबर 2026 को प्रकाशित शैक्षणिक सत्र 2026-27 की अपडेटेड पीजी ब्रॉड स्पेशियलिटी सीट मैट्रिक्स में केएमसी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, महराजगंज का नाम शामिल है। आयोग की सूची में कॉलेज के कुल 19 पीजी पाठ्यक्रम दर्ज हैं। इनमें एमडी के 14 और एमएस के 5 पाठ्यक्रम शामिल हैं। प्रत्येक पाठ्यक्रम के लिए 4 सीटें निर्धारित हैं। स्वीकृत पाठ्यक्रमों का विवरण इस प्रकार है: एमडी (MD) - जनरल मेडिसिन, एनेस्थीसियोलॉजी, पीडियाट्रिक्स,डर्मेटोलॉजी,साइकियाट्री ,माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलॉजी,रेडियो डायग्नोसिस, एनाटॉमी ,फिजियोलॉजी,बायोकेमिस्ट्री,फार्माकोलॉजी ,फॉरेंसिक मेडिसिन,कम्युनिटी मेडिसिन तथा एमएस (MS)- जनरल सर्जरी ,ऑर्थोपेडिक्स,ईएनटी,ऑप्थैल्मोलॉजी,ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी | इस प्रकार 14 एमडी पाठ्यक्रमों में 56 सीटें और 5 एमएस पाठ्यक्रमों में 20 सीटें मिलाकर कुल 76 सीटें उपलब्ध होंगी। इससे पूर्वांचल के विद्यार्थियों को बड़ा लाभ मिलेगा । अब तक एमडी एवं एमएस की पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों को महराजगंज और आसपास के क्षेत्रों से बाहर के मेडिकल कॉलेजों का रुख करना पड़ता था। लेकिन पीजी पाठ्यक्रमों की स्वीकृति से स्थानीय और आसपास के जिलों के मेधावी मेडिकल विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में ही विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे न केवल विद्यार्थियों को लाभ होगा, बल्कि क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा और शोध के नए अवसर भी विकसित होंगे। एमडी और एमएस की पढ़ाई शुरू होने से विभिन्न चिकित्सा विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के प्रशिक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। केएमसी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की इस उपलब्धि को संस्थान के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एमबीबीएस की पढ़ाई से शुरुआत करने वाले संस्थान के लिए अब पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ना बड़ी उपलब्धि है। संस्थान के चेयरमैन श्री विनय कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में कॉलेज के शैक्षणिक विस्तार को लेकर यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है। इससे केएमसी परिवार, चिकित्सकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों में खुशी का माहौल है। उन्होनें कहा कि महराजगंज में एमडी एवं एमएस पाठ्यक्रमों की शुरुआत से केएमसी मेडिकल कॉलेज को चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में यह संस्थान पूर्वांचल में उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा, विशेषज्ञ चिकित्सकों के प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके लिए सभी चिकित्सक,अधिकारी और कर्मचारी बधाई के पात्र है । दीपावली के अवसर पर मिली यह उपलब्धि केएमसी परिवार के लिए किसी बड़े उपहार से कम नही
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सोहागपुर में पारिवारिक कलह से जिंदगियाँ खत्म, बेटे ने माता-पिता को मौत के घाट उतारा

Narmadapuram, Madhya Pradesh:जिले के सोहागपुर से रिश्तों को झकझोर देने वाली वारदात सामने आई है। जिस बेटे को बुजुर्ग माता-पिता का सहारा बनना था, वही उनका कातिल निकला। ग्राम रैनी पानी में घर के भीतर बुजुर्ग दंपत्ति के खून से सने शव मिलने से सनसनी फैल गई। पुलिस ने महज 12 घंटे के भीतर इस दोहरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझाते हुए मृतकों के बेटे को गिरफ्तार कर लिया। शुरुआती जांच में हत्या की वजह पारिवारिक कलह बताई जा रही है। मामूली घरेलू विवाद ने ऐसा खूनी मोड़ लिया कि एक ही घर में दो जिंदगियां खत्म हो गईं। घटना 5 नवंबर की रात करीब 11 बजे की है। सोहागपुर थाना क्षेत्र के ग्राम रैनी पानी में राधे उईके और उनकी पत्नी तितो बाई उर्फ कृष्णा उईके अपने ही घर में मृत पाए गए। दोनों के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे। दोहरे हत्याकांड की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मौके पर पुलिस के साथ एफएसएल टीम, डॉग स्क्वॉड और फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों ने पहुंचकर साक्ष्य जुटाए। जांच आगे बढ़ी तो शक की सुई मृतक दंपत्ति के बेटे कमलेश उईके पर जाकर टिक गई। पुलिस पूछताछ में पारिवारिक विवाद की परतें खुलीं। बताया गया कि कमलेश की पत्नी की डिलीवरी कहां कराई जाए, इसी बात को लेकर कई दिनों से घर में तनाव चल रहा था। घटना की रात शराब के नशे में विवाद ने उग्र रूप ले लिया। आरोप है कि गुस्से में आकर कमलेश ने चूल्हे में जल रही मोटी लकड़ी से माता-पिता पर ताबड़तोड़ वार कर उनकी जान ले ली।
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नीतीश कुमार के बिहार विकास के दावे पर कुशवाहा गुट का नया बयान

Patna, Bihar:लोकेशन — पटना *राजद के पूर्व विधायक ने कहा भगवान सिंह कुशवाहा को ये सूचना कहां से प्राप्त हो गया कि नीतीश कुमार जी की अब यात्रा अंतिम है?* ये किसने बताया भगवान सिंह कुशवाहा जी को? ये लोग मना रहे हैं कि जल्दी से जाएं नीतीश कुमार? नीतीश जी का काम कैसे याद नहीं करेगा? नीतीश जी का काम कैसे लोग भूल सकता है? ना सृजन घोटाला भूल सकता है। ना शेल्टर होम भूल सकता है। 90 हजार का जो एसीडीसी (AC/DC) का मामला फंसा हुआ है महालेखाकार का, ये कैसे भूल जाएगा? बड़े पैमाने पर हेराफेरी हुआ, ये भी भूल जाएगा क्या? अब तो उम्र के जिस पड़ाव पर हैं, जिस हालात में हैं, हम तो अदब करते हैं, उनका सम्मान करते हैं। लेकिन भूल कोई जाए... भारतीय जनता पार्टी को बेच दिया बिहार में, कैसे कोई भूल जाएगा? आरएसएस (RSS) को फलने-फूलने दिया, कैसे उसको भूल जाएगा लोग भाई उनको? समाजवादी विचारधारा को उन्होंने गिरवी रखी, कैसे लोग भूलेगा नीतीश जी को? *भगवान सिंह कुशवाहा को भी लोग नहीं भूल सकता है कुशवाहा भी नक्सल विचार से आए है।* कथन — शक्ति सिंह यादव, पूर्व विधायक भाजपा के विधायक ने कहा नीतीश कुमार जी का बिहार के विकास में अमूल्य योगदान है, इसको कोई नकार नहीं सकता है। नए बिहार की गाथा में नीतीश कुमार जी का योगदान हमेशा याद किया जाएगा। बाकी भगवान सिंह कुशवाहा जी का जो स्टेटमेंट है वो उनका अपना व्यक्तिगत उनका स्नेह, प्रेम और उनकी आस्था का मामला है। लेकिन नीतीश कुमार जी के बिहार के विकास में जो उनका योगदान है वो निश्चित तौर पर अविस्मरणीय है और लंबे समय तक बिहार के बदलाव की गाथा जब भी लिखी जाएगी तो नीतीश कुमार जी का नाम सुनहरे अक्षरों पर लिखा जाएगा। कथन — रत्नेश कुशवाहा, विधायक, भाजपा कांग्रेस ने कहा "नीतीश कुमार जी के आशीर्वाद से विधायक और मंत्री बने श्री भगवान सिंह कुशवाहा जी का जो विचार है, वह कहीं ना कहीं स्पष्ट करता है कि नीतीश कुमार जी अपने अगल-बगल सत्ता लोलुप और वाचाल लोगों से घिरे हुए हैं, जो उनके जीवन को भी कीमती नहीं समझते हैं और उनके मरने तक की आकांक्षा कर लेते हैं। तो यह कहीं ना कहीं स्पष्ट करता है कि अब भी ये मंत्री वाचाल बनकर ही राजनीति में अपने आपको प्रासंगिक बनाए हुए हैं, और स्पष्ट तौर पे कभी भी अपने काम के लिए नहीं जाने जाते हैं। ऐसी ही ओछी बयानबाजियों के लिए ये लोग जाने जाते हैं।" कथन — डॉ. स्नेहाशीष वर्धन, प्रवक्ता , कांग्रेस
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