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Poshit KumarPoshit KumarFollow19 Jul 2024, 12:39 pm
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बारां में खाद संकट: रासायनिक खाद बढ़ने से मिट्टी की सेहत पर खतरा

Baran, Rajasthan:बारां में राष्ट्रीय औसत से 5 गुना ज्यादा खाद की खपत, मिट्टी की सेहत पर संकट, बारां. अन्नपूर्णा नगरी कहे जाने वाले बारां जिले में खेतों की खाद की भूख लगातार बढ़ रही है। जिले में अब राष्ट्रीय औसत से करीब पांच गुना ज्यादा रासायनिक खाद का इस्तेमाल हो रहा है। बारां जिले में करीब 3.50 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है, जिसमें हर साल करीब ढाई लाख मीट्रिक टन खाद डाली जा रही है। यानी प्रति हेक्टेयर औसतन 714 किलो खाद की खपत हो रही है, जबकि राष्ट्रीय औसत करीब 145 किलो प्रति हेक्टेयर ही है। खाद की मांग कितनी तेजी से बढ़ी है, इसका अंदाजा इसी से लगता है कि साल 1960-61 में पूरे देश में जितनी खाद खपत होती थी, आज उतनी खाद अकेले बारां जिले में एक साल में खप रही है। बारां सोयाबीन, गेहूं, धान और सरसों का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है। कम समय में अधिक उत्पादन के दबाव में किसान जरूरत से ज्यादा यूरिया और रासायनिक खाद डाल रहे हैं। इसका असर अब मिट्टी की सेहत पर दिखने लगा है। कृषि अनुसन्धान केन्द्र अन्ता के वैज्ञानिक डॉ. बीएल शाह के अनुसार अत्यधिक रासायनिक खाद से गेहूं का दाना बड़ा तो दिखता है, लेकिन उसमें प्रोटीन और आयरन घट रहा है। मिट्टी में जैविक कार्बन, केंचुए और लाभदायक जीवाणु कम हो रहे हैं। उन्होंने फसल अवशेष जलाने के बजाय खाद बनाने और रासायनिक खाद के साथ गोबर व जैविक खाद के संतुलित उपयोग की सलाह दी है।
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गंगा घाटों की सफाई युद्ध-स्तर पर: वाराणसी में त्योहारों से पहले जलस्तर घटने के बाद गाद हटाने की तैयारी तेज

Noida, Uttar Pradesh:वाराणसी (उत्तर प्रदेश): गंगा का जलस्तर चेतावनी के निशान से नीचे आया, त्योहारों से पहले गाद हटाने का काम तेज़ किया गया। पानी कम हो रहा है और घाटों की सफाई के बारे में तो जो हमारे 7.5 किलोमीटर के फेज में यह सभी घाट हमारे हैं करीब 84 85 घाट हैं। इन घाटों पर पानी कम होने के साथ ही नगर निगम के द्वारा युद्ध स्तर पर सिल्ट सफाई का काम कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। यदि आप वहां जाएंगे तो आप देखेंगे कि वहां पर किस स्तर पर कार्य किया जा रहा है। नगर निगम वाराणसी के सामने यह प्रतिवर्ष का चैलेंज होता है और इस वर्ष भी चैलेंज यह होता है कि तुरंत बाद जो है एक डाला छठ का बड़ा पर्व होता है जिसमें लाखों की संख्या में वहां श्रद्धालु आते हैं। उसके बाद देव दीपावली जैसा कार्तिक पूर्णिमा का स्नान होता है। देव दीपावली जैसा पर्व मनाया जाता है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर का होता है इसको ध्यान में रखते हुए नगर निगम वाराणसी पूरी तरह सजग है और पूरी टीम लगा दिया गया है एयर शो भी होने वाला है यह भी काफी प्राथमिकता के दृष्टिगत नगर निगम इसको ले रहा है तो यह पूरी तरह से आश्वस्त करता हूं कि इन सभी पर्वों के पहले घाटों की सफाई 100% पूर्ण कर ली जाएगी
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जन्मभूमि से कर्मभूमि यात्रा: रोहतास में स्वागत, 1500 बाइक वाराणसी को रवाना

Sasaram, Bihar:खबर सासाराम से है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म भूमि बडनगर से निकलकर वाराणसी की ओर जा रही बाइक सवारों का जत्था रोहतास जिला में प्रवेश किया। जहां डेहरी ऑन सोन में उनका स्वागत पूर्व विधायक ललन पासवान ने किया। चेनारी के पूर्व विधायक ललन पासवान ने गुलाब के फूल से बाइक sवारों का स्वागत किया। उसके साथ ही बाइक सवार आगे बढ़े और जमुहार के नारायण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के परिसर में सभी बाइक सवारों का रात्रि विश्राम है। मंगलवार को सीएन सम्राट चौधरी इन सभी के साथ युवा संवाद कार्यक्रम करेंगे। जैसे ही बाइक यात्रियों का जत्था औरंगाबाद से होते हुए रोहतास जिला में प्रवेश किया। राष्ट्रीय राजमार्ग- 19 पर उनका भव्य स्वागत किया गया बता दे की 17 सितंबर 2026 को गृह मंत्री अमित साह ने 1500 बाइक सवार युवाओं के जत्था को "जन्मभूमि से कर्मभूमि" के लिए रवाना किया है। यह तमाम बाइक सवार अलग-अलग राज्यों से गुजरते हुए देश के अलग-अलग विभिन्न पवित्र नदियों का जल लेते हुए 10 राज्यों के 193 जिला के 1153 गांवो से गुजरते हुए यूपी के वाराणसी पहुंचेगी और वहां काशी विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक करेगी। सेवा संकल्प अभियान के तहत भाजपा कार्यकर्ताओं ने इन सभी का स्वागत किया।
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इटावा के सैफई यूनिवर्सिटी में पहली बार रोबोटिक घुटना-हिप प्रत्यारोपण सफल

Etawah, Uttar Pradesh:इटावा के सैफई यूनिवर्सिटी आज एक नई उपलब्धि हासिल की है सैफई यूनिवर्सिटी में पहली बार रोबोटिक घुटना एवं कूल्हा प्रत्यारोपण सर्जरी सफलतापूर्वक की गई है। सैफई यूनिवर्सिटी में आर्थोपेडिक्स विभाग में रोबोटिक ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी की नई शुरुआत चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। अब मरीजों को लखनऊ और दिल्ली के चलकर नहीं लगाने पड़ेंगे सैफई में सुविधा मिलेगी। इटावा के सैफई में स्थित उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में आर्थोपेडिक्स विभाग ने संस्थान के इतिहास में एक महत्वपूरक उपलब्धि दर्ज कराई है। सैफई में विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉक्टर सुनील कुमार के नेतृत्व में पहली बार रोबोटिक टोटल नी रिप्लेसमेंट एवं रोबोटिक टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलता पूर्व सम्पन्न कराई गई है। यह उपलब्धि सैफई आयुर्विज्ञान में सटीक एवं उन्नत आर्थोपेडिक्स सर्जरी की दिशा में एक नया अध्याय की शुरुआत की गई है। वैसे यह सरकारी चिकित्सा संस्थान में रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट जैसी अत्याधुनिक सुविधा मरीजों के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। वहीं संस्थान के द्वारा पहली शुरुआत को लेकर टीम में भी उत्साह देखने को मिला था वहीं विभाग के लोग भी इस तरह की उपलब्धि मरीजों के हित में एक सैफई के कुलपति का सराहनीय कदम मान रहे है। सैफई के कुलपति की माने तो हम लोगों ने दो रोबोट खरीदने की प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है आज रोबोट से पहली सर्जरी आर्थोपेडिक्स में की गई है यह बहुत उच्च स्तरीय के प्रणाली को अपनाया है जो प्राइवेट अस्पताल में खर्चा आता है हम लोग उससे बहुत कम खर्चे में कर रहे है रोबोटिक सर्जरी से मरीजों को ज्यादा राहत मिलेगी सर्जरी के बाद मरीज बहुत जल्द सही हो जाएगा। और अपने काम पर लौट पाएगा। अभी तक इस तरह की सर्जरी कराने के लिए मरीजों को लखनऊ या दिल्ली जाना पड़ता था लेकिन अब मरीजों को यहां पर राहत मिलेगी।
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जोधपुर बासनी अग्निकांड में फायर फाइटर प्रीतेश परमार की मौत का मामला, शहीद के दर्जे की मांग को लेकर बिछीवाड़ा में निकाला कैंडल मार्च

Dungarpur, Rajasthan:जोधपुर बासनी अग्निकांड में फायर फाइटर प्रीतेश परमार की मौत का मामला, शहीद के दर्जे की मांग को लेकर बिछीवाड़ा में निकाला कैंडल मार्च. जोधपुर के बासनी औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक केमिकल फैक्ट्री में आग बुझाने के दौरान भीषण हादसे का शिकार हुए डूंगरपुर जिले के 19 वर्षीय वीर फायर फाइटर प्रीतेश परमार के निधन के मामले में क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त है। दिवंगत जवान को भावपूर्ण श्रद्धांजलि देने व उसे शहीद का दर्जा दिए जाने की माँग को लेकर बिछीवाड़ा ब्लॉक मुख्यालय पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों द्वारा एक विशाल कैंडल मार्च निकाला गया। डूंगरपुर जिले के लांबाभाटड़ा (चुंडावाड़ा) गांव निवासी प्रीतेश परमार जोधपुर में अग्निशामक के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे। ट्रेनिंग के दौरान बासनी स्थित फैक्ट्री में लगी भीषण आग को बुझाने के लिए वे फायर ब्रिगेड की टीम के साथ मोर्चे पर डटे हुए थे। आग पर काबू पाने के दौरान केमिकल ड्रम में हुए जोरदार धमाके और हादसे में वे करीब 90 प्रतिशत तक झुलस गए थे। वेंटिलेटर पर इलाज के दौरान उन्होंने जिंदगी की जंग हारते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया। बिछीवाड़ा में आयोजित कैंडल मार्च के दौरान लोगों ने प्रीतेश परमार की तस्वीर और मोमबत्तियाँ लेकर उनकी शहादत को नमन किया। वही राज्य सरकार और जिला प्रशासन के सामने 3 मुख्य मांगें रखीं: कर्तव्य पालन के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले अग्निशामक कर्मी प्रीतेश परमार को आधिकारिक रूप से 'शहीद' का दर्जा प्रदान करने, पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से 1 करोड़ रुपये का विशेष आर्थिक मुआवजा स्वीकृत करने और दिवंगत जवान के परिवार के एक सदस्य को योग्यतानुसार त्वरित सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र देने की मांग शामिल है.
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