बुलंदशहर में धारा 307 के आरोपी ने पुलिस अभिरक्षा में दी पुलिस भर्ती परीक्षा
Bulandshahr, Uttar Pradesh:बुलंदशहर में धारा 307 के आरोपी आकाश ने पुलिस अभिरक्षा में यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा दी। अलीगढ़ निवासी आकाश को कोर्ट के आदेश पर परीक्षा के लिए बुलंदशहर लाया गया, और परीक्षा के बाद उसे वापस अलीगढ़ भेजा गया।
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मेरठ का सनसनीखेज 'नीला ड्रम हत्याकांड': मुस्कान और प्रेमी साहिल को फांसी की सजा
Meerut, Uttar Pradesh:उत्तर प्रदेश के मेरठ में बहुचर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले 'नीला ड्रम हत्याकांड' में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाई है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि यह एक बेहद ही बर्बर और नृशंस हत्याकांड है, जिसमें किसी भी प्रकार की दया या माफी की गुंजाइश नहीं है। खौफनाक घटना: 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या यह वारदात 3 मार्च 2025 की है, जब मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर अपने पति सौरभ राजपूत की क्रूरता से हत्या कर दी थी। हत्या के बाद साक्ष्य छिपाने के इरादे से सौरभ के शव को 5 टुकड़ों में काटकर एक नीले रंग के ड्रम में भर दिया गया था। फैसले के वक्त रो पड़े आरोपी; मुस्कान बोली- 'मेरी बच्चियों का ध्यान रखना' सजा के ऐलान से पहले जेल में बंद दोनों आरोपियों मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट से जोड़ा गया: * अदालत से जुड़ते ही मुस्कान और साहिल फूट-फूटकर रोने लगे। * जब जज ने मुस्कान से उसके अपराध पर सजा को लेकर सवाल किया, तो उसने रोते हुए कहा— "मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।" इसके बाद वह खामोश हो गई। * प्रेमी साहिल से सवाल पूछे जाने पर उसने पूरी तरह चुप्पी साधे रखी। पीड़ित परिवार का छलका दर्द: माता रेनू राजपूत और भाई राहुल राजपूत का वर्जन अदालत का फैसला आने के बाद सौरभ राजपूत की मां रेनू राजपूत और भाई राहुल राजपूत ने मीडिया से बातचीत में अपना पक्ष रखा: मां रेनू राजपूत का बयान: * फैसले से संतुष्टि व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, "हम कोर्ट के इस फैसले से पूरी तरह संतुष्ट हैं। हमारे पूरे स्टाफ और कानून ने हमें न्याय दिलाने में मदद की है, जिसके लिए हम उनके आभारी हैं।" * उन्होंने आगे कहा, "हम माता रानी से यही प्रार्थना कर रहे थे कि हमारे परिवार को इस गहरे संकट से उबारे, क्योंकि हम लोग बहुत ज्यादा डिप्रेशन (तनाव) में जी रहे थे। आरोपियों को फांसी की सजा मिलना ही सही न्याय है।" * यदि आरोपी पक्ष ऊपरी अदालत का रुख करता है, तो उस पर उन्होंने स्पष्ट किया, "अगर वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे, तो हम भी वहां जाएंगे और आखिरी सांस तक अपने बेटे के इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ेंगे।" भाई राहुल राजपूत का बयान: * राहुल राजपूत ने कहा, "हमें अदालत पर पूरा विश्वास था और हम काफी समय से इसी दिन का इंतजार कर रहे थे। आखिरकार दोनों आरोपियों को फांसी की सजा हुई है, जिससे हमें बहुत खुशी है।" * मुस्कान द्वारा बच्चियों का हवाला देने पर राहुल ने कहा, "उसने बचने के लिए कई पैंतरे आजमाए और किताबों का सहारा लिया, लेकिन कानून के आगे कुछ काम नहीं आया। जो जैसा कर्म करेगा, उसको अपने कर्मों का फल भुगतना ही पड़ेगा।" * राहुल ने यह भी कहा कि अगर वे हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाएंगे, तो हम भी आगे तक कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। बच्चियों को अपने पास रखने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि नाना-नानी उन्हें देंगे, तो वे बच्चियों की जिम्मेदारी उठाने को तैयार हैं।
जनता दर्शन में मिली श्रुति की पढ़ाई का जिलाधिकारी ने लिया फीडबैक, बोले—कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न हो
Orai, Uttar Pradesh:जालौन: जिलाधिकारी जालौन ने दिव्यांग बालिका का विद्यालय पहुंचकर जाना हाल, सामान्य बच्चों के साथ शिक्षा प्राप्त कर आगे बढ़ने के लिए किया प्रोत्साहित, अभिभावकों से बच्चों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने की अपील जनता दर्शन में अपने पिता के साथ पहुंची दिव्यांग बालिका श्रुति की शिक्षा की राह आसान बनाने के लिए जिला प्रशासन की पहल अब आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में जिलाधिकारी समीर बुधवार को उच्च प्राथमिक विद्यालय, काशीराम कॉलोनी पहुंचे और विद्यालय में दाखिला लेने वाली श्रुति से मुलाकात कर उसकी पढ़ाई, विद्यालय में उपस्थिति और सीखने के अनुभवों की जानकारी ली। जिलाधिकारी ने कहा कि किसी भी बच्चे को परिस्थितियों के कारण शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए और प्रत्येक बच्चे को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। कुछ दिन पूर्व जनता दर्शन में श्रुति अपने पिता के साथ पहुंची थी। बातचीत के दौरान जिलाधिकारी को जानकारी हुई कि पारिवारिक परिस्थितियों और बालिका की शारीरिक स्थिति के कारण वह औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर पा रही थी। इस पर जिलाधिकारी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए जिला प्रशासन और बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पहल कर बालिका का विद्यालय में दाखिला सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। अब श्रुति की पढ़ाई की स्थिति जानने के लिए जिलाधिकारी स्वयं विद्यालय पहुंचे और उससे बातचीत कर उसका उत्साह बढ़ाया।जिलाधिकारी समीर ने कहा कि सामान्य बच्चों के साथ नियमित रूप से विद्यालय आने और पढ़ाई करने से श्रुति में सीखने की रुचि विकसित होगी तथा उसे जीवन में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन का प्रयास केवल दाखिला कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि बालिका की शिक्षा निरंतर जारी रहे। उन्होंने कहा कि वह आगे भी श्रुति की पढ़ाई की जानकारी लेते रहेंगे, ताकि उसे शिक्षा प्राप्त करने में किसी प्रकार की परेशानी न हो। जिलाधिकारी ने विद्यालय का सामान्य निरीक्षण भी किया तथा प्रधानाचार्य को परिसर में साफ-सफाई, सुरक्षित वातावरण और बच्चों के लिए बेहतर शैक्षिक माहौल बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालय का वातावरण ऐसा होना चाहिए, जहां बच्चे उत्साह के साथ पढ़ाई करें और उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हो सके। जिलाधिकारी ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि पारिवारिक या आर्थिक परिस्थितियां चाहे जैसी हों, लेकिन बच्चों को शिक्षा के अवसरों से वंचित नहीं रखना चाहिए। यदि माता-पिता को स्वयं जीवन में पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाए, तो उन्हें यह प्रयास करना चाहिए कि उनके बच्चों का भविष्य शिक्षा के अभाव में प्रभावित न हो। सरकार की विभिन्न योजनाओं के साथ अभिभावकों की जागरूकता और सहयोग भी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास रहेगा कि शासन की नीतियों के अनुरूप हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और प्रत्येक बच्चे को अपनी प्रतिभा निखारने तथा जीवन में आगे बढ़ने का समान अवसर मिल सके।
