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SSSaurabh SharmaFollow20 Oct 2024, 12:43 pm
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भीलवाड़ा जूनवास कचहरी के जीर्णोद्धार और न्याय केंद्र पुनः स्थापित करने की मांग

Jaipur, Rajasthan:भीलवाड़ा की जन्म स्थली के रूप में पहचान रखने वाला जूनावास सिर्फ एक मोहल्ला नहीं, बल्कि भीलवाड़ा के जन्म, विकास और ऐतिहासिक पहचान की कहानी का एक महत्वपूर्ण अध्याय है , इस अध्याय के साथ एक नाम और जुड़ा हुआ हैं जो कि अन्याय के खिलाफ न्याय की एक धार्मिक पाठशाला के रूप में कचहरी मानी जाती हैं इस कचहरी परिसर में चारभुजा नाथ , विघ्नहारी गणेश मंदिर के साथ ही शिवलिंग स्थापित है जिन्हें साक्षी मानकर तत्काल न्याय किया जाता था , लेकिन आजादी के बाद से ही नए न्यायालय भवन के निर्माण के साथ ही ये ऐतिहासिक न्यायालय भवन अपना अस्तित्व खंडहर नुमा भवन के रूप में पहचान रख रहा हैं ये आज भी जीर्णोद्धार की बाढ़ जो रहा हैं , जहां कभी चहल पहल थी लोगो का जमावड़ा लगा रहता था आज उस परिसर में सन्नाटा छाया हुआ हैं, कभी जिन मंदिरों की मूर्तियों को साक्षी मानकर तत्काल न्याय होता था आज वो मंदिर तालों में बंद है और कचहरी के मुख्य द्वार भी आज के हिंदুस्तान के धार्मिक बंटवारे की कहानी बया कर रहे हैं उस पर लगे आस्था से जुड़े झंडे ओर पतीकाएं इसी परिदृश्य को दर्शा रही हैं । जहां जिला प्रशासन द्वारा सरकारी भवनों और चौराहे पर आकर्षक लाइट डेकोरेशन करवाकर इस बार दीपावली पर्व बड़े भव्यता के साथ मनाने का प्रयास कर रहा हैं वही भीलवाड़ा की पहचान ओर ऐतिहासिक रूप से शहर की जन्मस्थली में स्थित सरकारी कचहरी भवन एक दीपक जलने को तरस रहा हैं । भीलवाड़ा के एक जागरूक एडवोकेट ने जूनवास कचहरी के संरक्षण की मांग उठाते उन्होंने इस पुरानी बिल्डिंग के उपयोग के लिए भी जिला प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखे हैं उन्होंने बताया कि भीलवाड़ा शहर में आजादी के पूर्व यानी 1950 से पहले, सौ वर्षों तक भीलवाड़ा जूनावास जो कचहरी है, वहाँ भीलवाड़ा का न्यायिक केंद्र था। जहाँ तहसीलदार, एस.डी.ओ. साहब और न्यायिक मजिस्ट्रेट साहब आजादी के पूर्व अंग्रेजों के जमाने में वहाँ भीलवाड़ा वासियों को सौ वर्षों तक न्याय देते थे। आज वह बिल्डिंग पूरी जर्जर हो चुकी है। तो मैंने जिला प्रशासन को भी एक आवेदन पत्र करके दिया था, सांसद महोदय और विधायक साहब से भी निवेदन किया कि पुरानी जो कचहरी है, उसका जीर्णोद्धार करके उप-पंजीयक कार्यालय को यहाँ स्थापित किया जा सकता है या कोई भी सरकारी कार्यालय स्थापित किया जा सकता है, जो शहर के मध्य में है और भीलवाड़ा वासियों के लिए उपयोगी है। वर्तमान में जो जिला न्यायालय परिसर है, जब तक कलेक्ट्री और कोर्ट साथ में रहेगी, तभी भीलवाड़ा के लिए न्याय का केंद्र बन सकती है। और जो केंद्रीय कारागृह है, वो पालड़ी में स्थापित हो रहा है, तो केंद्रीय कारागृह, भीलवाड़ा क्लब, गांधी वाटिका और सेशन कोर्ट और कलेक्ट्री - आने वाले दो सौ वर्षों तक भीलवाड़ा के लिए मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बनने पर, रोडवेज, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के मध्य में, भीलवाड़ा की आम जनता के लिए सबसे उपयुक्त जगह है। इसी के लिए मैंने निवेदन किया, इसी जगह कोर्ट बननी चाहिए। भारतीय सनातन धर्म और संस्कृति के अंदर ईश्वर को साक्षी मान के ऐसा न्याय किया जा सकता था, जहाँ न्यायालयों में पाँच साल, दस साल, बीस साल लगते हैं, वहाँ केवल आधे घंटे में चारभुजा नाथ और गणेश जी के सामने दोनों पक्षकारों को खड़ा करके न्याय देने की एक प्रक्रिया थी। जहाँ ना तो कोई पैसा लगता था और सामान्यतः कोई भी व्यक्ति, कोई भी विवाद होने पर चारभुजा नाथ के वहाँ गेट खोलने पर, चारभुजा नाथ या गणेश जी की सौगंध खा के, जल चढ़ाने पे वहाँ न्याय दिया जाता था। तो आज 80 साल से वो जो मंदिर बंद है, वहाँ भगवान की पूजा-पाठ नहीं हो रही है, गणेश जी की पूजा-पाठ नहीं हो रही है, तो भीलवाड़ा वासियों से निवेदन है कि इस जगह का जीर्णोद्धार करें और चारभुजा नाथ की और गणेश जी की पूजा-अर्चना हिंदू समाज कर सके।
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झुंझुनूं सूरजगढ़: विधायक पुत्र के फर्जी आदेश के कारण बढ़ी मुश्किलें

Jhunjhunu, Rajasthan:झुंझुनूं के सूरजगढ़ से इस वक्त की बड़ी खबर बढ़ सकती है सूरजगढ़ से कांग्रेस विधायक की मुश्किलें! बेटे के नामांकन से जुड़ा हाईकोर्ट के कथित फर्जी आदेश का मामला बेटे जयप्रकाश के साथ आरोपी उमेश भूकर आया सामने कहा— विधायक के कहने पर किया था एसडीएम को आदेश फॉरवर्ड उमेश भूकर का दावा, उसे भी विधायक के पुत्र जयप्रकाश ने भेजा था आदेश पुलिस जांच में सहयोग करने के लिए खुद पहुंचे सूरजगढ़ थाने उमेश भूकर पंजाब नेशनल बैंक में मैनेजर है उमेश भूकर उमेश भूकर के मोबाइल से ही एसडीएम के मोबाइल पर पहुंचा था आदेश इधर, हाईकोर्ट में अब मामले की सुनवाई होगी 19 नवंबर को कल हाईकोर्ट में इसी मामले को लेकर पेश होना था झुंझुनूं एसपी को लेकिन अतिरिक्त महाधिवक्ता ने बताया— झुंझुनूं में हिंसा भड़कने से नहीं आ सके एसपी जिस पर हाईकोर्ट ने तथ्यात्मक रिपोर्ट के साथ 19 नवंबर को पेश होने के दिए आदेश झुंझुनूं के सूरजगढ़ से बड़ी खबर मिल रही है। झुंझुनूं के सूरजगढ़ से कांग्रेस विधायक श्रवण कुमार के पुत्र जयप्रकाश द्वारा सूरजगढ़ रिटर्निंग अधिकारी को दिए गए हाईकोर्ट के कथित फर्जी आदेश के मामले में अब विधायक श्रवण कुमार की मुश्किलें भी बढ सकती है। दरअसल इस मामले को लेकर उनके पुत्र जयप्रकाश के दोस्त और आरोपी उमेश भूकर अब सामने आ गए है। उन्होंने प्रेस वार्ता कर बताया है कि वे इस मामले में बिल्कुल अनजान है। उन्होंने बताया कि उनके मोबाइल पर जयप्रकाश ने ही यह आदेश भेजा था। इसके बाद विधायक श्रवण कुमार के कहने पर उन्होंने रिटर्निंग अधिकारी सूरजगढ़ को यह आदेश व्हाट्स एप पर फॉरवर्ड किया था। ​जिसके बाद विधायक श्रवण कुमार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे है। इधर, इस मामले में कल हाईकोर्ट में सुनवाई हुइ। कल झुंझुनूं एसपी को हाईकोर्ट में पेश होना था। लेकिन अतिरिक्त महाधिवक्ता ने न्यायालय को अवगत कराया कि झुंंझुनूं जिले में अचानक हिंसा भड़कने के कारण एसपी उपस्थित नहीं हो सके। जिस पर न्यायालय ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई की तारीख 19 नवंबर पर पुलिस अधीक्षक तथ्यात्मक रिपोर्ट के साथ न्यायालय में उपस्थित रहें। वहीं, प्रेस वार्ता में पंजाब नेशनल बैंक के सीनियर मैनेजर उमेश भूकर ने बताया कि वे खुद पुलिस जांच में सहयोग करने के लिए सूरजगढ़ थाने पहुंचे है। मीडिया से बातचीत में उमेश भूकर ने बताया कि वह पंजाब नेशनल बैंक में सीनियर मैनेजर हैं और चिड़ावा व झुंझुनूं में भी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि कथित आदेश उन्हें सूरजगढ़ से कांग्रेस विधायक श्रवण कुमार के पुत्र जयप्रकाश ने व्हाट्सएप पर भेजा था। उस समय विधायक श्रवण कुमार भी उनके साथ मौजूद थे और एसडीएम से फोन पर संपर्क कर रहे थे। उमेश भूकर के अनुसार विधायक श्रवण कुमार ने उन्हें एसडीएम संदीप चौधरी का मोबाइल नंबर दिया और जयप्रकाश से प्राप्त मैसेज को एसडीएम के नंबर पर फॉरवर्ड करने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि जयप्रकाश से 3:14 बजे मैसेज प्राप्त हुआ था। जिसे उन्होंने 3:15 बजे फॉरवर्ड किया और 3:16 बजे 'प्लीज चेक' लिखकर भेजा। रमेश भूकर ने कहा कि उन्होंने कथित आदेश को बिना पढ़े ही आगे भेज दिया था। उनके अनुसार विधायक श्रवण कुमार अपने पुत्र जयप्रकाश के चुनाव से संबंधित मामले को लेकर चिंतित थे। उन्होंने दावा किया कि विधायक और एसडीएम के बीच फोन पर बातचीत भी हो रही थी। इसकी पुष्टि कॉल रिकॉर्ड से की जा सकती है। उन्होंने कहा कि एसडीएम से उनकी पहले कोई पहचान नहीं थी और उनका मोबाइल नंबर भी विधायक की ओर से ही उपलब्ध करवाया गया था। एसडीएम को उनके नंबर से मैसेज आने की जानकारी किसने दी, इस संबंध में उन्होंने विधायक या जयप्रकाश की भूमिका होने की संभावना जताई।मामला सूरजगढ़ से कांग्रेस विधायक श्रवण कुमार के पुत्र जयप्रकाश से जुड़ा है। जयप्रकाश ने ग्राम पंचायत जीणी, पंचायत समिति सूरजगढ़ के वार्ड संख्या 5 की मतदाता सूची से अपना नाम हटाए जाने को चुनौती दी थी। इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश के नाम पर एक कथित दस्तावेज रिटर्निंग अधिकारी को व्हाट्सएप के माध्यम से भेजा गया था। मामले की जांच के दौरान सामने आया कि 16 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने केवल मामले को 27 अक्टूबर को सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए थे। उस दिन नाम बहाली अथवा चुनाव लड़ने की अनुमति संबंधी कोई अंतरिम राहत नहीं दी गई थी। इसके विपरीत कथित आदेश में नाम तत्काल मतदाता सूची में बहाल करने और पंचायती राज चुनाव में नामांकन दाखिल करने व चुनाव लड़ने की अनुमति देने का उल्लेख था। उमेश भूकर ने कहा कि वह पुलिस का सहयोग करने के लिए व्यक्तिगत रूप से थाने पहुंचे हैं। उन्होंने मामले की जांच में पुलिस को पूरा सहयोग देने की बात कही।मामले में कथित आदेश की, उसे तैयार करने और प्रसारित करने में शामिल लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
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झुंझुनूं नगर परिषद में ठेकेदार के खिलाफ कर्मचारियों का भारी हंगामा

Jhunjhunu, Rajasthan:झुंझुनूं झुंझुनूं नगर परिषद में ठेकेदार के खिलाफ कर्मचारियों का हंगामा सिविल ठेकेदार सुभाष जनेवा पर गाली-गलौज और अभद्रता के आरोप लेखा शाखा में कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप आक्रोशित अधिकारी-कर्मचारियों ने किया कार्य बहिष्कार आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर एफआईआर दर्ज करने की मांग ठेकेदार की फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की भी रखी मांग मांगें पूरी नहीं होने तक कार्य बहिष्कार जारी रखने की चेतावनी नगर परिषद झुंझुनूं में ठेकेदार और कर्मचारियों के बीच विवाद हो गया। सिविल ठेकेदार सुभाष जनेवा पर नगर परिषद की लेखा शाखा में पहुंचकर कर्मचारियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करने, गाली-गलौज करने और राजकीय कार्य में बाधा डालने के आरोप लगे हैं। घटना से आक्रोशित नगर परिषद के अधिकारी और कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर दिया और आयुक्त को लिखित शिकायत सौंपकर ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने तथा उसकी फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की। कर्मचारियों के अनुसार सुबह नियमित राजकीय कार्य के दौरान सुभाष जनेवा नगर परिषद के कमरा नंबर 6 स्थित लेखा शाखा में पहुंचे। यहां उन्होंने कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज शुरू कर दी। कर्मचारियों का आरोप है कि समझाइश के बावजूद ठेकेदार ने अपना व्यवहार नहीं बदला और राजकीय कार्य में बाधा पहुंचाई।कर्मचारियों ने बताया कि ठेकेदार की ओर से पूर्व में भी महिला अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सामने अभद्र भाषा और गाली-गलौज करने की घटनाएं हो चुकी हैं। इस संबंध में पहले भी आयुक्त को अवगत करवाया गया था। करीब 4-5 दिन पहले भी समझाइश करवाई गई थी, लेकिन इसके बावजूद दोबारा ऐसी घटना होने से कर्मचारी आहत और परेशान हैं।मामले को लेकर कर्मचारियों ने आयुक्त को सौंपे ज्ञापन में सुभाष जनेवा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने और उनकी संबंधित फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार होने वाली अभद्रता के कारण वे दबाव में काम करने को मजबूर हैं और निष्पक्षता एवं स्थिरता के साथ राजकीय कार्य नहीं कर पा रहे हैं।कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होती और उसकी फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक कार्य बहिष्कार जारी रहेगा。
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