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MLMadan lalFollow20 Jan 2025, 04:23 pm
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अमेरिका में ट्रक-ट्राला हादसे से करनाल के गौरव की मौत, परिवार पर दुखों का पहाड़

Karnal, Haryana:करनाल के गांव बाल पबाना में अमेरिका में हुए सड़क हादसे का शिकार हुए 24 वर्षीय गौरव का शव आज गांव में पहुँचा, बेटे के शव को देखकर परिवार और गांव में चीख पुकार उठी, इकलौते बेटे का शव देखकर परिजनों का रो-रोकर हुआ बुरा हाल, परिवार का खुद का नहीं था मकान, घर की आर्थिक स्थिति ठीक करने के लिए पिता ने प्लॉट बेचकर कर्ज उठाकर अपने बेटे को भेजा था अमेरिका, पिता रामफल ने फफक-फफकर रोते हुए कहा सब कुछ खत्म हो गया, बड़े आराम और उम्मीदे थी सब कुछ खत्म हो गई, बेटे की बड़ी तमन्ना बाहर जाने की थी, गौरव के शव गांव में पहुंचने पर बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम संस्कार में शामिल हुए, बेटे की कमाई से परिवार ने गांव में मकान बनाने की शुरुआत की थी बीच में ही रह गया मकान, उमड़ पड़ा पूरा गांव करनाल के गांव बाल पबाना के युवक की अमेरिका में सड़क हादसे में मौत हो गई। आज मृतक गौरव का शव गांव में पहुँचा, बेटे के शव को देखकर परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया, बेटे का शव देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया, गौरव 24 वर्षीय युवक जो 2 वर्ष पहले 12वीं की परीक्षा देकर अमेरिका गया था, गौरव , लाखों रुपए का कर्ज उठाकर और जमीन बेचकर मृतक गौरव को परिवार ने अमेरिका भेजा था, अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया में रहता था गौरव बताया जा रहा है, गौरव अमेरिका में ट्राला चलाता था, ट्राला सड़क किनारे खड़ा हुआ था पीछे से ट्रक ने ट्राले को टक्कर मारी जिसके बाद ट्राला खाई में गिर गया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। गौरव के पिता रामफल ने बताया कि वह मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार को पाल रहा था। एक इकलोता बेटा जो उसके बुढ़ापे का साहरा था वह काल ने छीन लिया। अब उनके पास कुछ नहीं रहा, सब कुछ छीन गया, पिता ने कहा। से ट्राला चला रहा था और कल यह हादसा हो गया, उन्होंने कहा बड़ा अरमान और उम्मीदे थी सब कुछ खत्म हो गया,परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया, उन्होंने कहा एक ही बेटा था अब क्या करे, उन्होंने कहा कर्ज उठाकर भेजा था हमारे पास कुछ नही था, पिता ने कहा बेटे की बड़ी तमन्ना थी बाहर जाने की मैंने उसे रोका भी
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राजस्थान रोडवेज के बसों का बीमा कराने से क्लेम लागत कम, समय पर मुआवजा संभव

Jaipur, Rajasthan:अब रोडवेज बसें होंगी ज्यादा सुरक्षित, बसों का होगा बीमा! - सड़क दुर्घटना के मामलों से परेशान रोडवेज प्रशासन ने की बीमा कराने की तैयारी - हालांकि स्टेट ट्रांसपोर्ट को रहती है बीमा से छूट, रोडवेज के पास करीब 3700 केस लंबित जयपुर। राजस्थान रोडवेज की बसें जल्द ही बीमा के दायरे में आ सकती हैं। राजस्थान रोडवेज प्रशासन अब अपनी बसों का बीमा कराने को लेकर निर्णय लेने जा रहा है। इससे फायदा यह होगा कि रोडवेज बसों के दुर्घटनाओं के मामलों में पीड़ितों को समयबद्ध मुआवजा मिल सकेगा। वहीं रोडवेज प्रशासन को भी अनाधिकृत केसेज से राहत मिल सकेगी। दरअसल राजस्थान रोडवेज प्रशासन को इन दिनों अनाधिकृत सड़क दुर्घटनाओं के मामलों से रूबरू होना पड़ रहा है। रोडवेज के चालक-परिचालक किसी भी तरह की दुर्घटना से इनकार करते हैं, लेकिन अन्य व्यक्ति रोडवेज बस से दुर्घटना होना बताते हैं। ऐसे में बसों से दुर्घटना नहीं होने के बावजूद भी रोडवेज के खाते में दुर्घटना के केस जुड़ रहे हैं। इसे देखते हुए रोडवेज प्रशासन पर दुर्घटनाओं में दिए जाने वाले क्लेम का भार बढ़ रहा है। दरअसल अभी तक रोडवेज प्रशासन अपनी बसों का बीमा नहीं करवाता है। केन्द्रीय मोटर वाहन अधिनियम 1988 और केन्द्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में स्टेट ट्रांसपोर्ट्स को बीमा कराने में छूट मिली हुई है। नियम 146 के बिन्दु संख्या 3 और 4 में स्टेट ट्रांसपोर्ट के वाहनों को बीमा करवाने से छूट मिली हुई है। ऐसे में केवल राजस्थान रोडवेज ही नहीं, देश के लगभग सभी राज्यों की रोडवेज को बीमा मुक्त किया हुआ है। ऐसे में जब भी कोई दुर्घटना पीड़ित एमएसीटी कोर्ट में रोडवेज के विरुद्ध मुकदमा दायर करते हैं। फैसले में क्लेम की राशि राजस्थान रोडवेज प्रशासन को ही चुकानी पड़ती है। इससे राजस्थान रोडवेज की विधि शाखा, डिपो प्रबंधन का केसेज को लेकर श्रम व्यय होता है, साथ ही आर्थिक रूप से बोझ भी बढ़ रहा है। दुर्घटना केसेज को लेकर क्या स्थिति ? - राजस्थान रोडवेज के विरुद्ध करीब 10500 न्यायिक केस लंबित - इनमें से करीब 3700 केस विभिन्न दुर्घटनाओं के क्लेम से जुड़े हुए - सूत्रों के मुताबिक, लगातार बढ़ रही है रोडवेज दुर्घटना केसेज की संख्या - इन दिनों मिलीभगत से भी दर्ज कराए जा रहे हैं इस तरह के केसेज - रोडवेज प्रशासन को करना पड़ता है इन मामलों में भुगतान - प्रति केस औसतन 15 लाख रुपए का भुगतान करना पड़ता - हर माह औसतन ढाई करोड़ रुपए का क्लेम देना पड़ रहा - इस तरह सालाना करीब 30 करोड़ तक हो सकता है आर्थिक भार - जबकि बसों का बीमा कराने पर आर्थिक भार हो सकता है कम दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मिल सकेगा क्लेम रोडवेज प्रशासन के विरुद्ध बढ़ते केसेज के चलते रोडवेज प्रशासन को आर्थिक नुकसान तो हो ही रहा है। रोडवेज प्रशासन को डिपो स्तर पर वकील हायर करने पड़ते हैं। हैड ऑफिस से डिपो तक जवाबदेही होती है। वहीं लीगल सेक्शन का खर्च भी बढ़ जाता है। रोडवेज सूत्रों की मानें तो बहुत सारे फर्जी केस बनाकर रोडवेज के नाम से डाल दिए जाते हैं। जिनमें मिलीभगत से क्लेम पास करवाने के मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में अब रोडवेज प्रशासन अपनी बसों का बीमा करवाने को लेकर तैयारी कर रहा है। इसके तहत रोडवेज की प्रत्येक बस का बीमा होने पर क्लेम से जुड़ी सभी जिम्मेदारी बीमा कम्पनी की होंगी। रोडवेज प्रशासन को उम्मीद है कि इससे न केवल उनके क्लेम खर्च में कमी आएगी, साथ ही दुर्घटना पीड़ितों को भी समयबद्ध तरीके से क्लेम राशि मिल सकेगी।
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डायल 112 की तत्परता से अभ्यर्थी समय पर पहुंचा परीक्षा केंद्र, छूटने से बची परीक्षा

Dipu RawatDipu RawatFollow8m ago
Parasa Buzurg, Uttar Pradesh:परतावल, महराजगंज। पुलिस भर्ती परीक्षा में शामिल होने आए एक अभ्यर्थी की परीक्षा डायल 112 पुलिस की त्वरित कार्रवाई से छूटने से बच गई। पुलिस कर्मियों की तत्परता की क्षेत्र में सराहना हो रही है। जानकारी के अनुसार, बलरामपुर जनपद के कोतवाली नगर थाना क्षेत्र स्थित श्याम विहार कॉलोनी पहलवारा निवासी अमन गुप्ता पुत्र कोदई प्रसाद गुप्ता पंचायत इंटर कॉलेज, परतावल स्थित परीक्षा केंद्र पर परीक्षा देने पहुंचे थे। परतावल चौराहे पर पहुंचने के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि परीक्षा केंद्र तक समय पर पहुंचना मुश्किल हो सकता है। इसके बाद उन्होंने दोपहर 2:25 बजे डायल 112 पर सूचना दी कि उनकी परीक्षा छूट सकती है। सूचना मिलते ही पीआरबी 5813 पर तैनात हेड कांस्टेबल बैरिस्टर प्रसाद ने तत्काल कार्रवाई की। पुलिस टीम अभ्यर्थी को परतावल चौराहे से लेकर हूटर बजाते हुए परीक्षा केंद्र पहुंची और ठीक 2:30 बजे गेट बंद होने से पहले उसे केंद्र तक पहुंचा दिया। इससे अभ्यर्थी समय पर परीक्षा में शामिल हो सका। मौके पर मौजूद अभिभावकों, स्थानीय लोगों तथा अभ्यर्थी ने डायल 112 सेवा की त्वरित सहायता और संवेदनशील कार्यशैली की सराहना करते हुए पुलिस टीम को धन्यवाद दिया। क्षेत्रीय लोगों ने कहा कि पुलिस की तत्परता से एक अभ्यर्थी का भविष्य प्रभावित होने से बच गया
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राजस्थान के मरुस्थलों में खजूर की खेती से आय बढ़ने की नई दिशा

Jodhpur, Rajasthan:राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों में खेती की नई उम्मीद के रूप में खजूर उभर रहा है। केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) में इस वर्ष खजूर की एडीपी-1 किस्म की बंपर पैदावार हुई है, जिससे किसानों के लिए आय बढ़ाने के नए रास्ते खुलते दिखाई दे रहे हैं। गल्फ देशों में लोकप्रिय यह किस्म जोधपुर की शुष्क और गर्म जलवायु में भी सफल साबित हुई है। काजरी ने वर्ष 2014 में गुजरात के आनंद कृषि विश्वविद्यालय से टिश्यू कल्चर तकनीक से तैयार 150 पौधे लाकर इस पर शोध शुरू किया था। करीब एक दशक के शोध के बाद इसके उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। एडीपी-1 किस्म के फल लाल-सुर्ख रंग के होते हैं और इनमें भरपूर मिठास होती है। एक पेड़ पर 7 से 10 गुच्छे लग रहे हैं तथा प्रति पेड़ 60 से 180 किलोग्राम तक उत्पादन मिल रहा है। खजूर की खेती को बढ़ावा देने के लिए काजरी में “खजूर दिवस” का आयोजन भी किया गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि खजूर शुष्क एवं अर्धशुष्क जलवायु में अच्छी तरह विकसित होता है और एक पौधा लगभग 60 वर्षों तक उपज दे सकता है। कम वर्षा और बढ़ते जल संकट के बीच मरुस्थल में खजूर की सफल खेती किसानों के लिए एक बेहतर और लाभकारी विकल्प बनकर उभर रही है। काजरी का यह शोध आने वाले समय में राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है.
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राजस्थान रोडवेज Buson ke beema se claim bhar ghatega, peediton ko jald muawza

Jaipur, Rajasthan:काशीराम चौधरी लोकेशन- जयपुर फीड- 2सी हैडर- - अब रोडवेज बसों का होगा बीमा! - सड़क दुर्घटना के मामलों से परेशान रोडवेज - रोडवेज प्रशासन ने की बीमा कराने की तैयारी - हालांकि स्टेट ट्रांसपोर्ट को रहती है बीमा से छूट - लेकिन इन दिनों फर्जी केसेज की बढ़ी संख्या - बढ़ते क्लेम के बोझ के चलते होगा निर्णय एंकर राजस्थान रोडवेज की बसें जल्द ही बीमा के दायरे में आ सकती हैं। राजस्थान रोडवेज प्रशासन अब अपनी बसों का बीमा कराने को लेकर निर्णय लेने जा रहा है। इससे फायदा यह होगा कि रोडवेज बसों के दुर्घटनाओं के मामलों में पीड़ितों को समयबद्ध मुआवजा मिल सकेगा। वहीं रोडवेज प्रशासन को भी अनाधिकृत केसेज से राहत मिल सकेगी। यह रिपोर्ट देखिए- वीओ- 1 राजस्थान रोडवेज प्रशासन को इन दिनों अनाधिकृत सड़क दुर्घटनाओं के मामलों से रूबरू होना पड़ रहा है। रोडवेज के चालक-परिचालक किसी भी तरह की दुर्घटना से इनकार करते हैं, लेकिन अन्य व्यक्ति रोडवेज बस से दुर्घटना होना बताते हैं। ऐसे में बसों से दुर्घटना नहीं होने के बावजूद भी रोडवेज के खाते में दुर्घटना के केस जुड़ रहे हैं। इसे देखते हुए रोडवेज प्रशासन पर दुर्घटनाओं में दिए जाने वाले क्लेम का भार बढ़ रहा है। दरअसल अभी तक रोडवेज प्रशासन अपनी बसों का बीमा नहीं करवाता है। केन्द्रीय मोटर वाहन अधिनियम 1988 और केन्द्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में स्टेट ट्रांसपोर्ट्स को बीमा कराने में छूट मिली हुई है। नियम 146 के बिन्दु संख्या 3 और 4 में स्टेट ट्रांसपोर्ट के वाहनों को बीमा करवाने से छूट मिली हुई है। ऐसे में केवल राजस्थान रोडवेज ही नहीं, देश के लगभग सभी राज्यों की रोडवेज को बीमा मुक्त किया हुआ है। ऐसे में जब भी कोई दुर्घटना पीड़ित एमएसीट कोर्ट में रोडवेज के विरुद्ध मुकदमा दायर करते हैं। फैसले में क्लेम की राशि राजस्थान रोडवेज प्रशासन को ही चुकानी पड़ती है। इससे राजस्थान रोडवेज की विधि शाखा, डिपो प्रबंधन का केसेज को लेकर श्रम व्यय होता है, साथ ही आर्थिक रूप से बोझ भी बढ़ रहा है। Gfx In दुर्घटना केसेज को लेकर क्या स्थिति ? - राजस्थान रोडवेज के विरुद्ध करीब 10500 न्यायिक केस लंबित - इनमें से करीब 3700 केस विभिन्न दुर्घटनाओं के क्लेम से जुड़े हुए - सूत्रों के मुताबिक, लगातार बढ़ रही है रोडवेज दुर्घटना केसेज की संख्या - इन दिनों मिलीभगत से भी दर्ज कराए जा रहे हैं इस तरह के केसेज - रोडवेज प्रशासन को करना पड़ता है इन मामलों में भुगतान - प्रति केस औसतन 15 लाख रुपए का भुगतान करना पड़ रहा - हर माह औसतन ढाई करोड़ रुपए का क्लेम देना पड़ रहा - इस तरह सालाना करीब 30 करोड़ तक हो सकता है आर्थिक भार - जबकि बसों का बीमा कराने पर आर्थिक भार हो सकता है कम Gfx Out वीओ- 2 रोडवेज प्रशासन के विरुद्ध बढ़ते केसेज के चलते रोडवेज प्रशासन को आर्थिक नुकसान तो हो ही रहा है। रोडवेज प्रशासन को डिपो स्तर पर वकील हायर करने पड़ते हैं। हैड ऑफिस से डिपो तक जवाबदेही होती है। वहीं लीगल सेक्शन का खर्च भी बढ़ जाता है। रोडवेज सूत्रों की मानें तो बहुत सारे फर्जी केस बनाकर रोडवेज के नाम से डाल दिए जाते हैं। जिनमें मिलीभगत से क्लेम पास करवाने के मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में अब रोडवेज प्रशासन अपनी बसों का बीमा करवाने को लेकर तैयारी कर रहा है। इसके तहत रोडवेज की प्रत्येक बस का बीमा होने पर क्लेम से जुड़ी सभी जिम्मेदारी बीमा कम्पनी की होंगी। रोडवेज प्रशासन को उम्मीद है कि इससे न केवल उनके क्लेम खर्च में कमी आएगी, साथ ही दुर्घटना पीड़ितों को भी समयबद्ध तरीके से क्लेम राशि मिल सकेगी।
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पानीपत में NIA रेड: फंडिंग एंगल पर पूछताछ

Panipat, Haryana:पानीपत में NIA की रेड चंडीगढ़ से पहुंची NIA टीम ने खंगाले दस्तावेज और मोबाइल फंडिंग एंगल की चर्चा संदिग्ध लेनदेन की जांच में जुटी एजेंसी साढ़े तीन घंटे चली पूछताछ पानीपत। शहर की किशनपुरा चौकी क्षेत्र में सोमवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब चंडीगढ़ से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की टीम स्थानीय पुलिस के साथ मंजीत सैनी के घर पहुंची। टीम ने सुबह करीब 5 बजे कार्रवाई शुरू की और लगभग साढ़े तीन घंटे तक घर में पूछताछ एवं जांच की। जानकारी के अनुसार NIA अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों से विभिन्न पहलुओं पर सवाल-जवाब किए और मोबाइल फोन व कुछ जरूरी दस्तावेजों की जांच की। जांच के बाद टीम कुछ दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड अपने साथ ले गई। डीएसपी मुख्यालय सतीश वत्स ने बताया कि NIA की टीम जांच के सिलसिले में आई थी, लेकिन मामले के संबंध में एजेंसी की ओर से कोई विशेष जानकारी साझा नहीं की गई। सूत्रों के अनुसार जांच किसी संदिग्ध फंडिंग या वित्तीय लेनदेन से जुड़ी हो सकती है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पूछताछ के दौरान एक हजार रुपये की मोबाइल ट्रांजैक्शन को लेकर भी जानकारी ली गई। परिवार के सदस्य ने बताया कि यह लेनदेन उनके भाई के मेडिकल स्टोर पर हुआ था और इसी संबंध में अधिकारियों ने पूछताछ की। परिवार के अनुसार जांच के दौरान करीब चार-पांच अधिकारी मौजूद थे और उनके साथ स्थानीय पुलिस भी थी। पूछताछ करीब दो से ढाई घंटे चली। परिवार का कहना है कि जांच में कोई संदिग्ध सामग्री नहीं मिली और न ही किसी व्यक्ति को अपने साथ ले जाया गया। फिलहाल NIA की कार्रवाई को लेकर इलाके में चर्चाओं का दौर जारी है, जबकि एजेंसी की ओर से मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। बताया जा रहा है आरोपी दवा कारोबार से जुड़ा है
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