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जमीन फर्जीवाड़ा मामले में झुंझुनूं कोतवाली ने सुरेश कुमार को गिरफ्तार किया

Jhunjhunu, Rajasthan:झुंझुनूं कोतवाली पुलिस ने जमीन फर्जीवाड़े में आरोपी गिरफ्तार किया सुरेश कुमार पर कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का आरोप जमीन हड़पने की नीयत से फर्जी दस्तावेज बनाने का मामला आरोपी सुरेश कुमार को रीको क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया कोर्ट ने एक दिन पुलिस रिमांड के बाद जेल भेजा मामला में वासिद पहले ही पुलिस द्वारा गिरफ्तार हो चुका है आरोपी मजीद अभी फरार, पुलिस तलाश में जुटी हुई है झुंझुनूं कोतवाली थाना पुलिस ने जमीन हड़पने की नीयत से कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के मामले में कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने सोनासर निवासी हाल रीको क्षेत्र निवासी सुरेश कुमार पुत्र प्यारेलाल जाट को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। कोर्ट ने आरोपी को एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा था। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद सुरेश कुमार को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। जानकारी के अनुसार रीको निवासी मोहम्मद इस्माइल ने कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि उसकी जमीन को हड़पने की नीयत से उसके सगे मौसे ईदगाह रोड निवासी मजीद, मौसेरे भाई वासिद तथा सोनासर हाल रीको निवासी सुरेश कुमार द्वारा जमीन से संबंधित कूटरचित एवं फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया गया। मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पहले मोहम्मद इस्माइल के मौसेरे भाई वासिद को गिरफ्तार किया था। वहीं, मामले में नामजद मजीद पुत्र अब्दुल रहीम दानका और सुरेश कुमार फरार चल रहे थे। पुलिस ने अब कार्रवाई करते हुए सुरेश कुमार को रीको क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद पुलिस रिमांड लिया गया और रिमांड पूरा होने पर उसे जेल भेज दिया गया। वहीं, मामले का एक अन्य आरोपी मजीद अभी फरार है, जिसकी पुलिस तलाश कर रही है।
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बैतूल लिंक रोड पर अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर अभियान शुरू

Betul, Madhya Pradesh:एंकर - बैतूल शहर की सबसे व्यस्त सड़कों में शामिल लिंक रोड पर प्रशासन का बुलडोजर एक्शन शुरू हो गया है. करीब एक साल से अधूरे सड़क निर्माण और अतिक्रमण के चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. आज सुबह से ही PWD, राजस्व और नगर पालिका की संयुक्त टीम करीब तीन बुलडोजर लेकर लिंक रोड पहुंची, जहां सड़क किनारे किए गए कच्चे और पक्के अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की जा रही है. प्रशासन की ओर से अतिक्रमणकारियों को पहले ही नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन निर्धारित समय के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाए गए. इसके बाद आज प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण हटाना शुरू कर दिया. अतिक्रमण हटने के बाद अब लिंक रोड का रुका हुआ निर्माण कार्य जल्द पूरा होने की उम्मीद है. यह सड़क बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां दिनभर भारी ट्रैफिक रहता है और बड़ी संख्या में स्कूलों के बच्चे तथा मरीजों की आवाजाही होती है. लिंक रोड पर बड़े निजी अस्पताल भी संचालित हैं. अब देखना होगा कि अतिक्रमण हटने के बाद सड़क निर्माण कितनी तेजी से पूरा होता है और लोगों को करीब एक साल से चली आ रही परेशानी से कब राहत मिलती है.
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हरिद्वार मंगलौर के लंढौरा में गोकशी के आरोप में गिरफ्तार, 260 किलो गौमांस बरामद

Haridwar, Uttarakhand:ब्रेकिंग न्यूज़ / हरिद्वार,मंगलौर हरिद्वार मंगलौर के लंढौरा में गोकशी की सूचना पर पुलिस की दबिश, मौके से एक आरोपी गिरफ्तार。 ऑपरेशन प्रहार के तहत कार्रवाई, पुलिस ने आरोपी के कब्जे से बड़ी मात्रा में गौमांस और गोकशी के उपकरण बरामद किए。 सूचना मिलते ही उपनिरीक्षक नवीन चौहान पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे, दबिश के दौरान आरोपी को हिरासत में लिया。 पुलिस के मुताबिक मौके से करीब 260 किलो गौमांस बरामद हुआ, साथ ही गोकशी में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी मिले。 मामले में सईद पुत्र अकबर निवासी मातावाला हसन बाल, लंढौरा के खिलाफ मंगलौर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया。 पुलिस ने बरामदगी के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है。 कार्रवाई करने वाली टीम में उपनिरीक्षक नवीन चौहान के साथ कांस्टेबल दिनेश, रघुवीर और नितेश शामिल रहे।
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कैसरगण्‍ज सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने जनता दर्शन में समस्याओं के समाधान के निर्देश दिए

Gonda, Uttar Pradesh:जहां कैसरगंज से बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने आज शनिवार को सुबह 10:30 बजे अपने पैतृक आवास विश्नोहरपुर में जनता दर्शन के दौरान लोगों की समस्याएं सुनी है और अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने को लेकर के निर्देश भी दिया है। वही पहलवान सुजीत कलकल को एशियन गेम्स में मेडल मिलने को लेकर के कहा कि देखिए आज पूरा देश गर्व कर रहा है और लेकिन इसी के साथ तीन साल पहले एक अन्याय भी हुआ था। इसने फेडरेशन का दरवाजा खटखटाय हम लोगों ने इसकी पैरवी की फेडरेशन उस समय भंग थी और एडहॉक कमेटी काम कर रही थी। एडहॉक कमेटी ने बिना ट्रायल के बजरंग पूनिया को भेज दिया और बजरंग पूनिया जिस लड़के से 10-0 से हारे हैं। हारे थे जापान वाले से उसको इसने बुरी तरीके से हराया। यह उस समय भी मेडल का दावेदार था गोल्ड मेडल का दावेदार था, सिल्वर का दावेदार था और तीन साल इसका कैसे गुजरा होगा। क्योंकि इसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, सरकार का दरवाजा खटखटाया पंचायतें हुईं, बड़ी-बड़ी पंचायतें भी हुईं। वहां के अंदर हुईं लेकिन करोड़ों रुपए इनाम भी लोगों ने रखा हरियाणा के कुछ लोगों ने करोड़ों रुपए इनाम रखा कि ठीक है बजरंग चले जाएं मेडल के लिए लेकिन इसको हरा दें तो मैं ₹1 करोड़ दे रहा हूँ। इनाम رکھا लेकिन उसके बावजूद भी उस समय का खेल मंत्रालय और एडहॉक कमेटी दोनों ने बिल्कुल अन्याय किया और जिसके कारण हमारी कुश्ती काफी दिन तक सफर करती रही और आज इस गेम में कई ऐसे बच्चे हैं। जो 3 साल का यह कुश्ती का दौर गुजरा है उसमें उनकी कुश्ती डाउन हुई है। नहीं तो हमारे और मेडल होते, गोल्ड मेडल भी हो सकता था नाम लेकर के बताया जा सकता है कि किस-किस लड़के और किस-किस लड़की क्योंकि 3 साल बहुत होता है। तो दुर्भाग्य था वह समाप्त हुआ अब आगे वह गोल्ड मेडल लेकर के आया है, उसको बधाई है और पूरे देश के तरफ से बधाई है। वही 3 साल पहले खेल मंत्री अनुराग ठाकुर और मंत्रालय द्वारा सुजीत कलकल की बात न सुनने को लेकर कहा कि उस समय खेल मंत्रालय के ऊपर यह धरनाजीवी जो हैं, उनका आतंक था। उनका आतंक था। अब विषय नहीं है लेकिन जैसे विनेश फोगाट से मैंने स्वयं पूछा था कि आप इतनी बड़ी खिलाड़ी हैं एक बार मीडिया के सामने आकर के बता दें। क्या कुश्ती में कोई ऐसा नियम है कि 1 दिन के अंदर आप दो वेट कैटेगरी में ट्रायल दे सकें नहीं है। लेकिन उसके बावजूद भी एडहॉक कमेटी और उस समय का मंत्रालय, उसको दो वेट कैटेगरी में ट्रायल कराया। उसका ठीक से वजन नहीं लिया गया पक्षपात किया गया और जा करके ओलंपिक में जो नतीजा निकला। सारी दुनिया ने देखा। हमारे कई बच्चे ऐसे हैं जो सफर किए हैं 3 साल का जो दौर गुजरा है। मैं उस समय अगर आपको याद होगा तो मैंने जब पहली बाइट दी थी, तो एक कविता पढ़ी थी कि "डगर-डगर बदनाम हो गए मेरे आँसू, इशलिए तो नगर-नगर या डगर-डगर बदनाम हो गए मेरे आँसू, मैं उनका हो गया कि जिनका कोई पहरेदार नहीं था। मैं जूनियर खिलाड़ियों के साथ खड़ा था मैं आने वाले जो देश के भविष्य हैं उनके साथ खड़ा था इसलिए मेरा विरोध किया गया था।
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करनाल हाईवे 152-डी पर गोवंश से भरे कैंटर को पकड़ा; 2 आरोपी गिरफ्तार

Karnal, Haryana:करनाल - हाइवे 152-डी पर 15 गोवंश से भरा कैंटर पकड़ा, 2 आरोपी गिरफ्तार । अंबाला से नारनौल जा रहा था गौवंश से भरा कैंटर, टायर फटने के बावजूद तस्करों ने दौड़ाया कैंटर । पकड़े गए वाहन से 14 गाय जीवित मिलीं, एक मरी हुई मिली । जिले के असंध क्षेत्र में 152-डी हाईवे पर शर्फली खेड़ी टोल के पास गौरक्षकों ने गोवंश से भरा कैंटर पकड़कर पुलिस के हवाले किया। कैंटर में कुल 15 गोवंश मिले, जिनमें 14 गाय जीवित और एक मृत थी। पुलिस ने कैंटर चालक व उसके साथ को गिरफ्तार किया। दोनों के खिलाफ 2 अक्टूबर को केस दर्ज किया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। गौरक्षक दल को सूचना मिली थी कि पंजाब की तरफ से लाल रंग का टाटा अल्ट्रा कैंटर यूपी नंबर में गायों को भरकर उत्तर प्रदेश या मेवात ले जाया जा रहा है। डायल-112 पर संपर्क नहीं होने पर गौरव ने थाना असंध के प्रबंधक अधिकारी को मोबाइल नंबर पर सूचना दी। इसके बाद गौरव और उसके साथी 152-डी हाईवे पर शर्फली खेड़ी टोल से करीब 200 मीटर आगे वाहन का इंतजार करने लगे। कुछ देर बाद अंबाला की तरफ से उक्त कैंटर आया। उसे हाथ से रुकने का इशारा किया गया, लेकिन चालक ने वाहन की रफ्तार बढ़ा दी। शर्फली खेड़ी टोल से करीब 500-600 मीटर आगे कैंटर के अगले टायर में पंक्चर हो गया और वाहन सड़क किनारे धंसकर रुक गया। वाहन रुकते ही दो युवक बाहर निकलकर भागने लगे। गौरव और उसके साथियों ने पीछा कर दोनों को पकड़ लिया। पूछताछ में चालक ने अपना नाम महेंद्र सिंह और दूसरे युवक ने कृष्ण चंद्र बताया। कैंटर की जांच करने पर उसमें गायों को बांधकर ठूंस-ठूंसकर भरा हुआ पाया गया।पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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4 हजार छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति,सीएम के राज्यस्तरीय कार्यक्रम में 4.60 लाख छात्रों को लाभ

RavindraRavindraFollow3m ago
Kalauli Teer Danda, Uttar Pradesh:हमीरपुर - 4 हजार छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति सीएम के राज्यस्तरीय कार्यक्रम में 4.60 लाख छात्रों को 148 करोड़ की छात्रवृत्ति का अंतरण हमीरपुर के 55 विद्यालयों में कार्यक्रम का हुआ सजीव प्रसारण जनपद के 68 विद्यालयों के 4,031 छात्रों के खाते में भेजी गई 5.85 लाख की धनराशि आधार सीडेड बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर हुई छात्रवृत्ति की राशि जिलाधिकारी अशोक कुमार ने तीन विद्यालयों में प्रसारण व्यवस्था का किया निरीक्षण जीआईसी हमीरपुर, विद्या मंदिर इंटर कॉलेज और गायत्री विद्या मंदिर का लिया जायजा राजकीय इंटर कॉलेज में गंदगी मिलने पर डीएम ने जताई नाराजगी जिला विद्यालय निरीक्षक को साफ-सफाई और व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश डीएम ने कहा - छात्रों के कार्यक्रमों में व्यवस्था सुव्यवस्थित रहे पात्र विद्यार्थियों को समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से मिले छात्रवृत्ति का लाभ...
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जालौन में रेलवे स्टेशन उरई का सदर विधायक ने किया निरीक्षण,

AdityaAdityaFollow9m ago
Orai, Uttar Pradesh:ब्रेकिंग जालौन जालौन में रेलवे स्टेशन उरई का सदर विधायक ने किया निरीक्षण, सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा ने रेलवे स्टेशन पर चल कार्यो का भी किया निरीक्षण, रेलवे स्टेशन पर लिफ्ट और तमाम बेहतर सुविधाओं समेत रेल यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था के किए गए इंतजाम, विधायक ने स्टेशन अधीक्षक से बातचीत कर कमियों को दुरुस्त कराने के दिए निर्देश, भाजपा विधायक ने कमियों और बेहतर रेलवे सुविधाओं को लेकर रेल मंत्री को पत्र लिखने की कही बात, विधायक ने स्टेशन अधीक्षक को ट्रेनों की मांग को लेकर ज्ञापन भी सौंपा, निरीक्षण के दौरान रेलवे स्टेशन के अधिकारी कर्मचारी और जीआरपी पुलिस रही मौजूद, जालौन के उरई रेलवे स्टेशन का मामला। बाइट:- गौरीशंकर वर्मा--सदर विधायक, उरई
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भरतपुर-डीग की सियासत: विश्वेंद्र सिंह का कांग्रेस से बगावत का संकेत

Jaipur, Rajasthan:विश्वेंद्र सिंह,कांग्रेस से बगावत तक की पूरी सियासी कहानी, अब भरतपुर की सियासत में नए समीकरणों की चर्चा राजस्थान की राजनीति में भरतपुर राजघराने से आने वाले विश्वेंद्र सिंह का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब चार दशक लंबे राजनीतिक सफर में विश्वेंद्र सिंह कांग्रेस, जनता दल और भाजपा—तीनों प्रमुख राजनीतिक धाराओं में रहे हैं। अब कांग्रेस नेतृत्व से टकराव और पार्टी छोड़ने की घोषणा ने उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं। हालांकि उनके अगले कदम को लेकर अभी कोई औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है। विश्वेंद्र सिंह ने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस से की और 1988 में भरतपुर के जिला प्रमुख बने। इसके बाद 1989 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर जनता दल का दामन थामा और भरतपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। 1993 में वे कांग्रेस में लौटे और नदबई से विधायक बने। इसके बाद उनका राजनीतिक सफर भाजपा की ओर मुड़ा। 1999 और 2004 में वे भाजपा के टिकट पर भरतपुर से लोकसभा सांसद चुने गए। 2008 में उन्होंने भाजपा छोड़कर कांग्रेस में वापसी की। कांग्रेस में वापसी के बाद डीग-कुम्हेर उनकी प्रमुख राजनीतिक जमीन बनी। 2013 और 2018 में वे कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए। 2018 में अशोक गहलोत सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया। लेकिन 2020 में गहलोत और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच हुए राजनीतिक टकराव में विश्वेंद्र सिंह पायलट खेमे के साथ खड़े हुए। उन्हें मंत्रीमंडल से हटाया गया और बाद में पायलट खेमे की वापसी के बाद नवंबर 2021 में फिर गहलोत मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। यही राजनीतिक पृष्ठभूमि वर्तमान विवाद को समझने में अहम है। हालिया निकाय चुनावों के बाद विश्वेंद्र सिंह ने भरतपुर और डीग में कांग्रेस संगठन तथा टिकट वितरण को लेकर सवाल उठाए। उनका आरोप रहा कि वास्तविक पार्टी कार्यकर्ताओं की अनदेखी हुई और स्थानीय संगठन की कार्यप्रणाली पर भी उन्होंने सवाल उठाए। दूसरी ओर कांग्रेस ने उनके आरोपों को संगठन के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी के रूप में देखा। विवाद तब और बढ़ा जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विश्वेंद्र सिंह आमने-सामने आ गए। डोटासरा ने पहले कहा कि सोशल मीडिया पर सामने आई बातों के आधार पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता और विश्वेंद्र सिंह पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। इसके बाद कांग्रेस अनुशासन समिति ने विश्वेंद्र सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया। नोटिस में पार्टी कार्यक्रमों से दूरी, निकाय चुनाव में सक्रिय सहयोग नहीं करने, स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाने और डोटेसरा के खिलाफ कथित बयानबाजी समेत कई आरोप लगाए गए। कांग्रेस ने भरतपुर नगर निगम के महापौर चुनाव में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार के नाम वापस लेने के मामले में भी विश्वेंद्र सिंह की भूमिका पर सवाल उठाया। यह कांग्रेस का आरोप है, जबकि विश्वेंद्र सिंह ने स्थानीय संगठन की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठाते हुए अपना पक्ष रखा है। इसके बाद 2 अक्टूबर को विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस से अलग होने की घोषणा कर दी और स्वाभिमान को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने स्तर पर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है और वे अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर स्वतंत्र हैं। भरतपुर में क्या है बड़ा सियासी सवाल? विश्वेंद्र सिंह के मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उनका भरतपुर-डीग क्षेत्र में लंबे समय से बना राजनीतिक आधार है। वे यहां से तीन बार लोकसभा सांसद और कई बार विधायक रह चुके हैं। इसलिए उनका कांग्रेस से अलग होना केवल संगठनात्मक विवाद के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि स्थानीय राजनीति में इसके संभावित प्रभाव पर भी चर्चा है। हालांकि इसका वास्तविक राजनीतिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि विश्वेंद्र सिंह के साथ स्थानीय स्तर पर कितने नेता और कार्यकर्ता खड़े होते हैं और उनका अगला राजनीतिक कदम क्या होता है। उनका भाजपा से पुराना रिश्ता भी इस पूरे घटनाक्रम को अलग राजनीतिक संदर्भ देता है। वे भाजपा के टिकट पर दो बार भरतपुर से लोकसभा सांसद रहे हैं। यही वजह है कि कांग्रेस से अलग होने के बाद उनके अगले राजनीतिक विकल्पों को लेकर अटकलें स्वाभाविक रूप से तेज हुई हैं। लेकिन किसी संभावित पार्टी में वापसी को अभी तथ्य के रूप में पेश करना जल्दबाजी होगी। कुल मिलाकर, विश्वेंद्र सिंह का मौजूदा विवाद केवल डोटासरा बनाम विश्वेंद्र का व्यक्तिगत टकराव नहीं है। इसके केंद्र में भरतपुर-डीग का स्थानीय संगठन, टिकट वितरण, पार्टी में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और विश्वेंद्र सिंह की भविष्य की राजनीतिक दिशा जैसे कई सवाल हैं। आने वाले दिनों में उनका अगला कदम और स्थानीय संगठन की प्रतिक्रिया ही इस विवाद की राजनीतिक दिशा तय करेगी.
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