राजनगर विधायक की जल अभिषेक यात्रा हुई शुरू
Chhatarpur, Madhya Pradesh:छतरपुर जिले के राजनगर विधायक अरविंद पटेरिया की विशाल जल अभिषेक यात्रा का आगाज लवकुश नगर से हुआ। यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। यात्रा का समापन कल खजुराहो के मतंगेश्वर मंदिर में होगा।
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ग्रेटर नोएडा सूरजपुर के मिग्सन विलासा सोसाइटी बेसमेंट में कचरे की आग, नुकसान नहीं
Greater Noida, Uttar Pradesh:ग्रेटर नोएडा सूरजपुर थाना क्षेत्र के ETA 2 सेक्टर स्थित मिग्सन विलासा सोसाइटी के बेसमेंट में देर रात कचरे में आग लग गई। इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। बेसमेंट में कचरा खुले में पड़ा था। आग लगने की वजह का पता नहीं चला है। आशंका है कि कोई पटाखा कचरे में गिरा होगा। आग तेजी से फैलने लगी तो सोसाइटी के निवासी, मेंटेनेंस टीम और सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंचे। उन्होंने मिलकर आग बुझाई। दमकल विभाग को भी सूचना दी गई थी, लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही आग पर काबू पा लिया गया। जिला दमकल अधिकारी प्रदीप कुमार ने बताया कि एक समिति के बेसमेंट में आग लगने की सूचना मिली थी तत्काल प्रभाव से हमारी एक गाड़ी मौके पर रवाना हुई लेकिन उससे पहले ही सोसाइटी की मेंटेनेंस टीम ने आग पर काबू पा लिया इस हादसे में कोई जनानी नहीं हुई है कचरे में आग लगी थी आग लगने के कर्म की अभी तक पता नहीं चल पाई है।वाराणसी: काशी के स्वयंभू श्री चिन्तामणि विनायक के भक्तों को भ्रमित करने वालों को खुली चेतावनी
Varanasi, Uttar Pradesh:मयंक कश्यप/ वाराणसी। काशी में देवस्थानों की दिशा स्वयं महादेव ने निर्धारित की है। इस परम्परा से छेड़छाड़ कर स्वार्थवश किसी व्यक्ति-प्रतिष्ठा को पौराणिक सिद्ध करने का प्रयास किया जा रहा है, इसको लेकर काशीढुंढे परिवार की ओर से भक्तों को सावधान किया गया है। कहा गया है कि _काशीखण्डोक्त स्वयंभू श्री चिन्तामणि विनायक-गणेश_ के भक्तों को भ्रमित करने वालों, सावधान - सावधान! काशी में देवस्थानों की दिशा स्वयं महादेव ने निर्धारित की है। स्वार्थवश व्यक्ति-प्रतिष्ठा को पौराणिक सिद्ध करने हेतु पुराणों से छेड़छाड़ मत करो। क्या कहते हैं शास्त्र? स्कन्दपुराण के काशीखण्ड एवं अन्य धर्मशास्त्रों के अनुसार, काशी के युवराज श्री ढूँढीराज गणपति के छप्पन विनायक स्वरूपों में श्री चिन्तामणि विनायक का विशिष्ट महात्म्य वर्णित है। भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं कि श्री चिन्तामणि विनायक सिन्दूरवर्ण, त्रिनेत्रधारी तथा पाश, अंकुश, मोदक एवं दन्त धारण करने वाले महागणपति हैं। वे प्रणव (ॐ) स्वरूप, वेदमय तथा पचास मातृका वर्णों के अधिष्ठाता परब्रह्म हैं। हे देवि! ब्रह्मा, विष्णु एवं रुद्र सहित समस्त देवता उनकी आराधना करते हैं। वे काशी के क्षेत्रपाल तथा भक्तों के समस्त विघ्नों और संकटों का निवारण करने वाले देवता हैं। श्लोक में महात्म्य महापातककोट्योऽपि दन्तिकायविशोधिताः। नश्यन्ति तत्क्षणाद्देवि चिन्तामणिविलोकनात्॥५१ यः स्मरेत् सततं देवं स्नाने दाने जपे तथा। स लभेत्परमां सिद्धिं शिवलोके महीयते॥५२ अर्थात् हे देवि! करोड़ों महापापों से युक्त मनुष्य भी जब श्री चिन्तामणि गणेश का दर्शन करता है, तब उनके अनुग्रह से वे समस्त पाप उसी क्षण नष्ट हो जाते हैं। जो मनुष्य स्नान, दान, जप आदि प्रत्येक शुभ कर्म में निरन्तर श्री चिन्तामणि गणेश का स्मरण करता है, वह परम सिद्धि प्राप्त करता है तथा शिवलोक में सम्मानित होता है। चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति भगवान शिव आगे कहते हैं कि श्री चिन्तामणि गणेश का नित्य पूजन एवं ध्यान करने से महाविद्या, दुर्गा, लक्ष्मी और भुवनेश्वरी सहित समस्त देवियाँ प्रसन्न होती हैं। उनकी कृपा से धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष - चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। उनके माहात्म्य के श्रवण एवं पाठ से समस्त चिन्ताओं का निवारण होता है और भक्त को इच्छित फल की प्राप्ति होती है। अन्ततः काशी में देहावसान होने पर शिव-सायुज्य मोक्ष प्राप्त होता है। काशीक्षेत्रे हि यश्चिन्तां करोति नियतात्मवान्। तस्य चिन्तां हरेद्देवो चिन्तामणिगणेश्वरः॥६३ सिन्दूररञ्जिताङ्गस्य विघ्नराजस्य धीमतः। अनुग्रहात् भवेन्मुक्तिः काश्यामन्ते न संशयः॥६४ अर्थात् जो संयमी मनुष्य काशी में अपनी चिन्ताओं सहित श्री चिन्तामणि गणेश की शरण लेता है, उसकी समस्त चिन्ताओं का निवारण स्वयं भगवान चिन्तामणि गणेश करते हैं। सिन्दूर से विभूषित विघ्नराज श्री गणेश की कृपा से काशी में जीवन का अन्त होने पर मनुष्य को निश्चित रूप से मोक्ष प्राप्त होता है - इसमें तनिक भी संदेह नहीं। चतुर्थी पूजन का विशेष फल महादेव कहते हैं, हे पार्वती! जो मनुष्य चतुर्थी के दिन दूर्वा, शमीपत्र, सिन्दूर एवं मोदक अर्पित कर विधिपूर्वक श्री चिन्तामणि विनायक का पूजन एवं दर्शन करता है, उसे विशेष पुण्यफल की प्राप्ति होती है। श्री चिन्तामणि गणेश की कृपा से तीर्थस्नान के समान पुण्य, स्थिर लक्ष्मी, वंशवृद्धि, ऋणमुक्ति तथा समस्त मनोकामनाओं की सिद्ध हो
