कोतवाली पत्थरकांड मामले में 46 नामजद व लगभग 150 पर मामला दर्ज
Chhatarpur, Madhya Pradesh:छतरपुर कोतवाली थाने में पथराव की घटना के बाद 46 नामजद और लगभग 150 लोगों पर हत्या के प्रयास और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। चार मुख्य आरोपियों में से एक, हाजी शहजाद के घर पर प्रशासन ने बुलडोजर चला दिया। पिछले दिन एक विशेष समुदाय के लोगों ने कोतवाली थाने में ज्ञापन देने के दौरान पथराव किया था जिसमें थाने के टीआई और तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इसके अलावा पुलिस और अन्य वाहनों को भी नुकसान हुआ था।
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90 साल के बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट से 2.15 करोड़ ठगी; केरल दो गिरफ्तार
Jaipur, Rajasthan:90 साल के बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट से 2.15 करोड़ ठगी; केरल दो गिरफ्तार जयपुर vishnu जयपुर में 90 साल के बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 2 करोड़ 15 लाख रुपए ठगने का खुलासा किया ठगों ने खुद को CBI अधिकारी और RBI मैनेजर बताकर बुजुर्ग को ऐसा डराया कि वो कई दिनों तक उनकी बातों में उलझे रहे और परिवार तक को इसकी भनक नहीं लगने दी। अब जयपुर शहर पुलिस ने मामले में केरल से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी की रकम कहां-कहां पहुंची और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं। शहर के ज्योति नगर थाने में 90 वर्षीय गणपत सिंह भंडारी को डिजिटल अरेस्ट कर 2 करोड़ 15 लख रुपए की ठगी की एफआईआर दर्ज कराई गई। FIR मे बताया गया कि 28 जुलाई 2026 को गणपत सिंह भंडारी के पास व्हाट्सऐप पर वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने पुलिस की वर्दी पहन रखी تھی और खुद को मुंबई का CBI अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि मुंबई में 50 करोड़ रुपये का हवाला ट्रांजैक्शन पकड़ा गया है और उसमें से कुछ रकम बुजुर्ग के बैंक खाते में जमा हुई है। इसके बाद गिरफ्तारी की धमकी दी गई और परिवार के किसी सदस्य को जानकारी नहीं देने के लिए कहा गया। साइबर ठगों ने यहीं पर खेल खत्म नहीं किया। कुछ समय बाद एक अन्य व्यक्ति ने व्हाट्सऐप कॉल कर खुद को RBI का मैनेजर बताया। बुजुर्ग से म्यूचुअल फंड की पूरी जानकारी मांगी गई। इसके बाद अलग-अलग समय पर रुपयों की डिमांड की जाने लगी। पुलिस के अनुसार गणपत लाल ने ठगों के बताए बैंक खातों में कई बार में लाखों रुपये ट्रांसफर किए गए। इस तरह कुल 2 करोड़ 15 लाख रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जयपुर शहर दक्षिण पुलिस ने बैंक खातों और ट्रांजैक्शन की जांच शुरू की। पीड़ित के खाते से निकली रकम कई स्तरों पर सैकड़ों बैंक खातों में ट्रांसफर हुई। पुलिस ने संदिग्ध खातों को चिन्हित कर संबंधित खातों को डेबिट फ्रीज कराया और बैंक स्टेटमेंट सहित अन्य विवरण जुटाए। जांच के दौरान करीब 70 लाख रुपए के ट्रांजैक्शन से जुड़े एक ICICI बैंक खाते का सुराग मिला। इसके बाद केरल के तीन बैंक खातों की पड़ताल की गई। पुलिस के अनुसार, इनमें से दो खातों में पांच-पांच लाख रुपये ट्रांसफर हुए थे। खाताधारकों ने इन रुपयों को चेक के जरिए निकाल लिया। बैंक खातों की जांच और ट्रांजैक्शन के सुरागों के आधार पर जयपुर दक्षिण पुलिस की टीम केरल के एर्नाकुलम पहुंची। यहां से दो आरोपियों आनंद बाबू और इबिन बेसिल को गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत ट्रांजिट रिमांड पर जयपुर लाया गया। संबंधित न्यायालय में पेश करने के बाद उन्हें पुलिस अभिरक्षा में लिया गया है। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर रही है और ठगी के पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। मामले में आगे का अनुसंधान जारी है। इस मामले में सबसे चिंताजनक पहलू पीड़ित की उम्र है। पुलिस के मुताबिक 90 वर्षीय बुजुर्ग को कई दिनों तक वीडियो कॉल के जरिए भरोसे और भ्रम में रखा गया। उन्हें इस तरह डराया गया कि वे अपने परिचितों और परिजनों से भी बात साझा नहीं कर पाए। साइबर ठग अक्सर पुलिस, CBI, ED या RBI जैसे संस्थानों का नाम लेकर गिरफ्तारी और जांच का डर दिखाते हैं। वे लोगों को लगातार कॉल पर बनाए रखते हैं और गोपनीयता के नाम पर किसी से संपर्क नहीं करने देते हैं। जयपुर दक्षिण पुलिस की इस कार्रवाई में दो आरोपी गिरफ्तार हुए हैं, लेकिन जांच का दायरा अभी बड़ा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि 2 करोड़ 15 लाख रुपये की ठगी में और कौन-कौन शामिल है और रकम किन खातों के जरिए आगे पहुंचाई गई।राजस्थान में रोड कनेक्टिविटी से विकास को नई रफ्तार
Jaipur, Rajasthan:प्रदेश में बेहतर रोड कनेक्टिविटी से विकास को मिली नई रफ्तार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सड़क निर्माण में अहम उपलब्धि 37,527 करोड़ रुपये से हुआ 51,790 किमी सड़कों का विकास 9,704 करोड़ रुपये से बिछाई गई 18,917 किमी लंबाई की नई सड़कें 1,760 गांव डामर सड़कों से जुड़े, 12,311 करोड़ रुपये से अधिक व्यय अटल प्रगति पथों से ग्रामीण आबादी को मिल रहा सुगम आवागमन सरकार ने राजस्थान में सड़कों के निर्माण में नया रिकॉर्ड कायम कर दिया है। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने सिर्फ पौने तीन साल में ही 37 हजार 527 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि खर्च कर 51 हजार 790 किलोमीटर लम्बी सड़कों का निर्माण कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विकसित राजस्थान के संकल्प को हासिल करने की दिशा में इसे माइलस्टोन माना जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में धूल, कीचड़ और जलभराव की समस्याओं से राहत दिलाने के लिए अटल प्रगति पथ योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके तहत 5 हजार से अधिक आबादी वाले गांवों में 765 अटल प्रगति पथों के निर्माण के लिए 1 हजार 686 करोड़ रुपये की स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं। इनमें से 335 अटल प्रगति पथों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि, शेष कार्यों को 31 जनवरी, 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राज्य सरकार द्वारा नॉन-पेचेबल सड़कों के नवीनीकरण तथा नए मिसिंगリンク सड़क निर्माण के लिए वर्ष 2026-27 में 3 हजार 453 कार्यों हेतु 2 हजार 226 करोड़ रुपये की स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं। इनमें से 2 हजार 836 कार्यों के कार्यादेश जारी कर 6 हजार 815 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण एवं नया निर्माण किया जा रहा है। वहीं, वर्षा के कारण क्षतिग्रस्त पुलियाओं की मरम्मत के लिए भी व्यापक कदम उठाए गए हैं। इसके तहत 21 जिलों के 73 विधानसभा क्षेत्रों में 58 करोड़ रुपये की लागत के 424 निर्माण कार्य जल्द शुरू किए जाएंगे। प्रदेश में सड़क नेटवर्क को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए पुलों एवं रेलवे क्रॉसिंग पर आधारभूत संरचनाओं का विकास भी किया जा रहा है। राज्य में 13 रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) और 17 रेलवे अंडरब्रिज (आरयूबी) का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है, जबकि 39 आरओबी और 12 आरयूबी के कार्य प्रगतिरत हैं। इसके अलावा 13 उच्च स्तरीय पुलों का निर्माण पूरा किया जा चुका है और 13 का निर्माण कार्य जारी है। इसी प्रकार भरतपुर शहर में हीरादास चौराहे से कुम्हेर गेट चौराहे तथा काली बगीची चौराहे से बिजलीघर चौराहे होते हुए आरबीएम अस्पताल तक और जयपुर के सांगानेर क्षेत्र में मुहाना मोड़ पर एलिवेटेड रोड का निर्माण कार्य भी जारी है। राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ाईकरण एवं सुदृढ़ीकरण की दिशा में 1 हजार 900 करोड़ रुपये व्यय कर 610 किलोमीटर लंबाई के 26 कार्य पूरे किए जा चुके हैं। जबकि 3 हजार 220 करोड़ रुपये की लागत से 303 किलोमीटर लंबाई के 26 कार्य प्रगतिरत हैं। वार्षिक योजना 2026-27 के अनुसार 12 हजार 461 करोड़ रुपये की लागत से राष्ट्रीय राजमार्गों के 623 किलोमीटर के कार्य का अनुमोदन किया गया है। इसमें से 3 हजार 920 करोड़ रुपये की लागत से190 किलोमीटर लम्बाई के 4 कार्यों की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। राज्य सरकार पुख्ता मॉनिटरिंग के जरिए सड़क निर्माण की क्वालिटी पर भी पूर्ण ध्यान दे रही है। इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से सीसीटीवी कैमरों, सेंसर और अन्य उपकरणों की मदद से यातायात की वास्तविक समय में निगरानी एवं प्रबंधन किया जा रहा है। इसी प्रकार ऑनलाइन निगरानी प्रणाली ‘सुगम पथ’ और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग इन्फॉर्मेशन सिस्टम (पीएमआईएस) के माध्यम से परियोजनाओं की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा रही है। वहीं, प्रदेश के 165 टोल प्लाजा पर फास्टैग सुविधा भी स्थापित की गई है, जिससे टोल भुगतान की प्रक्रिया अधिक सुगम हुई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सड़क विकास के नवाचारों से राजस्थान में बेहतर कनेक्टिविटी, सुरक्षित यातायात और आधुनिक आधारभूत संरचना के निर्माण को गति मिल रही है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के गांवों, कस्बों और शहरों को मजबूत सड़क नेटवर्क से जोड़ते हुए विकास को अंतिम छोर तक पहुंचाया जाए।डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस
New Delhi, Delhi:अरविंद सिंह/नई दिल्ली: डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट, 2023 और DPDP नियम, 2025 के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स एसोसिएशन ने यह याचिका दायर की है
याचिकाकर्ताओं ने अंतरिम राहत के तौर पर प्रावधानों पर रोक लगाने की मांग की जिस पर कोर्ट ने कहा कि दूसरे पक्ष को सुने बिना एकतरफा आदेश पास नहीं कर सकते।
डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) ने सुप्रीम कोर्ट में इस क़ानून को चुनौती दी है। एसोसिएशन का कहना है कि अगर पत्रकारों को किसी व्यक्ति के बारे में खबर प्रकाशित करने से पहले उससे अनुमति लेनी पड़ी, तो खोजी पत्रकारिता और समाचारों की रिपोर्टिंग करना मुश्किल हो जाएगा।
DNPA ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम की धारा 7, 17(2), 18, 19, 27, 29, 36, 37 और 44(3) को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है।
इसके अलावा, याचिका में डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 (DPDP Rules, 2025) के नियम 16, 17 और 23 को भी चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील माधवी दीवान ने कहा कि इस कानून के प्रावधानों से न्यूज़रूम बंद हो जाएंगे।अगर हमें इस बात के लिए किसी व्यक्ति की मर्जी पर निर्भर रहना पड़े कि वह अपनी व्यक्तिगत जानकारी के इस्तेमाल की अनुमति देगा या नहीं, तो ख़बर पब्लिश करने का मकसद ही खत्म हो जाएगा।
खबरें समय पर लोगों तक पहुँचनी चाहिए। अगर हमें किसी व्यक्ति के बारे में खबर प्रकाशित करने से पहले उसकी अनुमति लेनी पड़ेगी, तो न्यूज़रूम बंद हो जाएंगे। फिर पत्रकारिता करने का क्या मतलब रह जाएगा!
इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि याचिकाकर्ता इस क्षेत्र के एक्सपर्ट हैं और वे केंद्र सरकार को ऐसे उपाय सुझा सकते हैं, जिनसे कानून का गलत इस्तेमाल रोका जा सके।
इसके जवाब में वकील ने कहा कि याचिका दायर करने के बाद DNPA ने केंद्र सरकार को इस मामले में एक ज्ञापन सौंपा था।DNPA ने 10 अगस्त 2026 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को एक विस्तृत ज्ञापन दिया था। इसमें DPDP Act और उसके नियमों को लागू करने से जुड़ी चिंताओं को उठाया गया था।इसके बाद 25 अगस्त 2026 को DNPA के प्रतिनिधियों और मंत्रालय के अधिकारियों के बीच एक मीटिंग भी हुई।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि नागरिकों के अधिकारों और मीडिया की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
