icon-pinewzicon-zee
PINEWZ
become creator
न्यूज़ क्रिएटर बनें

आपकी स्थानीय कहानियाँ, आपकी आवाज़

Follow us on
Download App fromplay-storeapp-store
Advertisement
Back

हमें फेसबुक पर लाइक करें, ट्विटर पर फॉलो और यूट्यूब पर सब्सक्राइब्ड करें ताकि आप ताजा खबरें और लाइव अपडेट्स प्राप्त कर सकें| और यदि आप विस्तार से पढ़ना चाहते हैं तो https://pinewz.com/hindi से जुड़े और पाए अपने इलाके की हर छोटी सी छोटी खबर|

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

दिवाली फीकी: मौसम से नरसिंहपुर के किसानों-व्यापारियों की खरीदारी मंद

Narsinghpur, Madhya Pradesh:एंकर -रोशनी और खुशियों का त्योहार दिवाली इस बार नरसिंहपुर जिले के किसानों और व्यापारियों के लिए फीका साबित हो रहा है। जिले में लगातार बिगड़े मौसम की वजह से खरीफ की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा, वहीं मंडियों में उपज का वाजिब दाम न मिलने से किसानों की जेब खाली है। इसका सीधा असर अब त्योहार के बाजार पर साफ देखा जा रहा है। आमतौर पर दिवाली से पहले आतिशबाजी और रोशनी के सामान से गुलजार रहने वाले पटाखा बाजारों से रौनक पूरी तरह नदारद है। लोग खरीदारी तो कर रहे हैं, लेकिन केवल शगुन और औपचारिकता पूरी करने के लिए。
0
0
Report

चित्रकूट में मुख्यमंत्री मोहन यादव का धार्मिक दौरा आस्था और भक्तिमय वातावरण बना

Satna, Madhya Pradesh:एंकर :- धर्म, आस्था और अध्यात्म की नगरी चित्रकूट में आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का धार्मिक अंदाज देखने को मिला। मुख्यमंत्री अपने चित्रकूट प्रवास के दौरान आरोग्यधाम पहुंचे, जहां उन्होंने संतों का पूजन-अर्चन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद पवित्र मंदाकिनी नदी में दीपदान कर आस्था की ज्योति प्रज्वलित की। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री ने बच्चों से आत्मीय मुलाकात कर उन्हें उपहार भी भेंट किए। मुख्यमंत्री के दौरे से चित्रकूट में धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण नजर आया। वीओ :- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज धर्मनगरी चित्रकूट के दौरे पर पहुंचे। यहां आरोग्यधाम में उन्होंने संतों का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया और संतों का आशीर्वाद लिया। इसके दौरान मुख्यमंत्री की संतों के प्रति श्रद्धा और आस्था देखने को मिली। इसके बाद मुख्यमंत्री पवित्र मंदाकिनी नदी पहुंचे, जहां उन्होंने दीपदान किया। मंदाकिनी के तट पर दीपों की रोशनी और धार्मिक वातावरण ने चित्रकूट की आध्यात्मिक छटा को और खास बना दिया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान बच्चों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया और उन्हें उपहार वितरित किए। बच्चों के चेहरों पर भी उपहार पाकर खुशी देखने को मिली, मुख्यमंत्री के चित्रकूट आगमन को लेकर प्रशासन द्वारा सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। उनका यह दौरा धर्मनगरी की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को एक बार फिर केंद्र में ले आया। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री का चित्रकूट दौरा भक्ति, आस्था और आत्मीयता के नाम रहा। मंदाकिनी में दीपदान से लेकर संतों के आशीर्वाद और बच्चों के साथ खुशियां बांटने तक, मुख्यमंत्री का हर पड़ाव धर्मनगरी की आध्यात्मिक पहचान से जुड़ा नजर आया。 बाईट :- डॉ मोहन यादव, मुख्यमंत्री
0
0
Report

पराली जलाने पर जुर्माना, MSP बिक्री पर रोक; कुरुक्षेत्र में मशीनें उपलब्ध

Kurukshetra, Haryana:कुरुक्षेत्र से zee media ने दिखाई दी प्रमुखता से प्रदूषण के ऊपर खबर,खबर का हुआ असर कृषि विभाग की तरफ से आया सामने बयान किसान पराली न जलाएं, पराली प्रबंधन के लिए मशीनें उपलब्ध पराली जलाने पर एफआईआर रेड एंट्री व 5 हजार से 30 हजार तक जुर्माना, अगले सीजन एमएसपी पर धान बिक्री पर भी रोक कुरुक्षेत्र, 7 नवंबर। उप कृषि निदेशक कुरुक्षेत्र डॉ. गिरीश नागपाल ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि वे धान की कटाई के बाद पराली में आग न लगाएं। पराली जलाने से पर्यावरण को भारी नुकसान होता है और बुजुर्गों व बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। उप कृषि निदेशक डॉ. गिरीश नागपाल ने कहा कि पराली प्रबंधन के लिए जिले में पर्याप्त संख्या में कृषि यंत्र उपलब्ध हैं। किसानों को हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, जीरो टिल ड्रिल, बेलर, रेक, श्रेडर, रोटरी स्लेशर सहित सभी प्रकार की मशीनें सब्सिडी पर व किराये पर उपलब्ध करवाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी किसान भाई को पराली प्रबंधन के लिए कोई भी मशीन चाहिए तो वह कृषि विभाग के नंबरों पर किसी भी समय संपर्क कर सकता है। उनके आस-पास जो भी मशीन उपलब्ध होगी, वह तुरंत उपलब्ध करा दी जाएगी। संपर्क नंबर में जिला कृषि अभियंता कुरुक्षेत्र 70159-03473 और कृषि अभियांत्रिकी जेई 94662-41535 शामिल हैं। उप कृषि निदेशक डॉ. गिरीश नागपाल ने कहा कि पराली जलाना एक गैर-कानूनी गतिविधि है। पराली जलाने को किसी भी सूरत में सरकार द्वारा सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि पराली में आग लगाने पर संबंधित किसान के खिलाफ केस दर्ज की जाएगी, राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की जाएगी और 5 हजार रुपये से लेकर 30 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही नियमों के अनुसार पराली जलाने वाले किसान अगले सीजन में अपनी धान की फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नहीं बेच पाएंगे। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे गैर-कानूनी गतिविधि से बचें और पराली प्रबंधन में सहयोग कर पर्यावरण को बचाने में अपना योगदान दें। पराली को आग लगाना न केवल जमीन की उर्वरा शक्ति को खत्म करता है, बल्कि इसके मित्र कीट भी मर जाते हैं, जिससे अगली फसल की पैदावार पर भी असर पड़ता है। उन्होंने किसानों से अपील है कि वे पराली को जलाने के बजाय उसका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करें।
0
0
Report
Advertisement
Advertisement
Back to top