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टोडारायसिंह में बजरी मामले में छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज

Tonk, Rajasthan:टोडारायसिंह (टोंक) बजरी प्रकरण में तत्कालीन थानाधिकारी समेत 6 पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज, अवैध वसूली और झूठे मुकदमे का आरोप टोंक जिले के टोडारायसिंह थाना क्षेत्र में बजरी खनन से जुड़े एक पुराने मामले में तत्कालीन थानाधिकारी सहित छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई न्यायालय में दायर इस्तगासे के बाद की गई है। मामला अक्टूबर 2025 के एक प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें पुलिस ने बजरी से भरे एक डंपर को जब्त किया था। टोरड़ी (मालपुरा) निवासी मोहित कुमार जैन की ओर से न्यायालय में परिवाद पेश किए जाने के बाद गुरुवार को तत्कालीन थाना प्रभारी हरिराम चौधरी, तत्कालीन हेड कांस्टेबल रंगलाल गुर्जर, कांस्टेबल कालूराम चौधरी, होमगार्ड रामनारायण, तत्कालीन एएसआई महावीर बराला तथा 112 वाहन चालक नंदकिशोर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। परिवादी का आरोप है कि 15 अगस्त 2025 की रात उसका डंपर खाली था, जिसे मोर थाना क्षेत्र से पुलिसकर्मी अपने कब्जे में लेकर टोडारायसिंह थाने ले गए। आरोप है कि थाने में उससे 50 हजार रुपये की मांग की गई और राशि नहीं देने पर डंपर को अवैध बजरी से भरा बताकर झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया गया। परिवादी ने दावा किया है कि उसके पास सीसीटीवी फुटेज, जीपीएस लोकेशन और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं, जो उसके आरोपों का समर्थन करते हैं। पुलिस के अनुसार, न्यायालय के आदेश पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। प्रकरण की जांच मालपुरा वृत्ताधिकारी कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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सीकर के स्कूल बसों में सुरक्षा मानकों की कड़ी चेकिंग, एक बस जब्त

Sikar, Rajasthan:सीकर स्कूल बसों पर सख्ती: एक बस जब्त, कई में फायर एक्सटिंग्विशर और मेडिकल किट नहीं मिली सीकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व परिवहन विभाग ने संयुक्त रूप से स्कूल बसों के खिलाफ चलाया विशेष जांच अभियान स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सीकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) और परिवहन विभाग ने संयुक्त रूप से स्कूल बसों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष के निर्देश पर गठित टीम ने सीकर बाईपास क्षेत्र में करीब 20 से 22 स्कूल बसों की जांच की, जिसमें एक बस को गंभीर खामियों के चलते जब्त कर लिया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव शालिनी गोयल ने बताया कि अभियान के दौरान बसों के इंश्योरेंस, ड्राइविंग लाइसेंस, फिटनेस, ओवरलोडिंग और सुरक्षा मानकों की जांच की गई। जांच में अधिकांश बसों में फायर एक्सटिंग्विशर और मेडिकल किट नहीं मिली, जबकि एक बस की बॉडी पूरी तरह जर्जर होने के कारण उसे जब्त कराया गया। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और यह अभियान पिछले एक वर्ष से लगातार चलाया जा रहा है। समय-समय पर स्कूल संचालकों को आवश्यक निर्देश देने के साथ अचानक निरीक्षण भी किए जाते हैं। डीटीओ ताराचंद बंजारा ने बताया कि जिला प्रशासन, पुलिस और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में समय-समय पर विशेष अभियान चलाए जाते हैं। इस दौरान बसों के दस्तावेजों के साथ बच्चों के लिए उपलब्ध सुरक्षा सुविधाओं की भी जांच की गई। उन्होंने बताया कि अब तक ओवरस्पीडिंग या चालक से जुड़ी कोई गंभीर अनियमितता सामने नहीं आई है, लेकिन कई बसों में फायर एक्सटिंग्विशर, इमरजेंसी विंडो की कार्यशीलता और पीछे सुरक्षा जाली जैसी आवश्यक व्यवस्थाओं में कमी पाई गई। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस तरह की सर्प्राइज चेकिंग लगातार जारी रहेगी, ताकि स्कूली बच्चों का सफर पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सके。
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गोंडा: शत्रु संपत्ति मामले में आठ के खिलाफ FIR, 10 दिन में जांच रिपोर्ट मांगी

Gonda, Uttar Pradesh:जहां गोंडा जिले में तरबगंज क्षेत्र के गौहानी गांव की कथित शत्रु संपत्ति को फर्जीवाड़े के जरिए निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कराने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमित सिंह-II ने बीते 4 अगस्त को पूर्व एसडीएम विश्वामित्र सिंह जो वर्तमान में सिद्धार्थनगर जिले में तैनात है समेत आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विवेचना कराने का आदेश दिया है। जिसकी कॉपी आज शुक्रवार देर शाम 6 बजे सामने आई है। न्यायालय ने थाना तरबगंज पुलिस को मुकदमा दर्ज कर 10 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। गौहानी गांव निवासी अजय कुमार पांडेय और राजू सिंह की ओर से न्यायालय में दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया था कि 0.138 हेक्टेयर भूमि मूल रूप से ऐसे परिवार के नाम दर्ज थी, जो वर्ष 1945 से पहले पाकिस्तान चला गया था। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह भूमि शत्रु संपत्ति के रूप में दर्ज होनी चाहिए थी,लेकिन चकबंदी के बाद कथित कूटरचना,धोखाधड़ी और राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी कर इसे कुछ लोगों के नाम दर्ज करा दिया गया। बाद में भूमि की बिक्री कर उस पर निर्माण कार्य भी शुरू करा दिया गया। प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया कि मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों से की गई, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद न्यायालय की शरण ली गई। सुनवाई के बाद सीजेएम ने तत्कालीन एसडीएम तरबगंज विश्वमित्र सिंह, तहसील के तत्कालीन आरआरके,गोहनी के तत्कालीन हल्का लेखपाल तथा स्वामीनाथ,ओमप्रकाश, रामदयाल, राजेश कुमार और गीता देवी के खिलाफ संबंधित धाराओं में आदेश हुआ होगा तो यहां थाने में आने में समय लगता एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना कराने का आदेश दिया। न्यायालय ने अपने आदेश में थाना तरबगंज पुलिस को निर्देश दिया है कि एफआईआर दर्ज होने के 10 दिन के भीतर न्यायालय में आख्या प्रस्तुत की जाए।
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अतीक के बेटों उमर-आली की पैरोल मंजूर, प्रयागराज जनाज़े के लिए लाए जाएंगे

Prayagraj, Uttar Pradesh:जेल में बंद अतीक के बेटों को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी पैरोल, छोटे भाई आबान के जनाजे में शामिल होने के लिए हाईकोर्ट ने मंजूर की पैरोल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों की सुरक्षा के लिए डीजीपी को दिए हैं सख़्त निर्देश। अतीक अहमद के बेटे आबान की मिट्टी में शामिल होने के लिए जेल में बंद उमर और अली की पैरोल अर्जी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंजूर कर लिया है। जिसके बाद कल सुबह लखनऊ जेल से उमर और झांसी जेल से अली को प्रयागराज लाया जाएगा। जहां दोनों अपने मृतक भाई आबान के जनाज़े में शामिल होंगे। इस दौरान हाईकोर्ट ने उमर और अली को परिवार के सदस्यों से मुलाकात के लिए एक घंटे का समय भी दिया है। जोकि मिट्टी के बाद परिवार के सदस्यों से मिल सकेंगे। इस दौरान उमर और अली परिवार के सदस्यों को छोड़कर किसी भी अन्य व्यक्ति से न तो कोई बातचीत करेंगे और न ही मीडिया से मुखातिब होंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अतीक के बेटों की पैरोल अर्जी मंजूर करते हुए डीजीपी को सुरक्षा के लिहाज से बेहद सख़्त निर्देश दिए हैं।हाईकोर्ट ने लखनऊ जेल में बंद उमर और झांसी जेल में बंद अली के जेल से निकलने और वापस सुरक्षित जेल पहुंचने तक की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए डीजीपी को एक सीनियर पुलिस ऑफिसर को जिम्मेदारी सौंपने के निर्देश दिए हैं。 बता दें कि अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे आबान और उसके दोस्त सोनू की 6 अगस्त को झांसी में सड़क हादसे में मौत हो गई। जिसके बाद कल रात में ही झांसी में आबान के शव का पोस्टमार्टम किया गया। शुक्रवार की सुबह में आबान और सोनू के शव को प्रयागराज लाया गया। शुक्रवार की नमाज़ के बाद सोनू के शव को प्रयागराज के हटवा गांव में दफ़्न कर दिया गया। लेकिन आबान की बुआ परवीन कुरैशी ने अधिवक्ता सैय्यद सफ़दर अली काज़मी की तरफ़ से जेल में बंद भतीजों की पैरोल अर्जी इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल की। शुक्रवार को दोपहर करीब 3 बजे हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने पैरोल अर्जी पर सुनवाई के बाद मंजूर कर लिया।
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कवि कुमार विश्वास ने यूपी की कानून व्यवस्था की खुलकर तारीफ, प्रशिक्षण शिविर का समापन

Agra, Uttar Pradesh:आगरा में सात दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर केवी शाला 2.0 का भव्य समापन। डॉ. कुमार विश्वास ने युवा रचनाकारों को दिया मंचीय कविता का प्रशिक्षण। देशभर से चयनित 21 युवा कवियों ने लिया आवासीय प्रशिक्षण। समापन पर कवि सम्मेलन में युवा कवियों ने बांधा समा। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कार्यक्रम में की शिरकत। कुमार विश्वास ने यूपी की कानून व्यवस्था की खुलकर सराहना की। बोले- अपराधियों में कानून का डर, व्यवस्था पहले से बेहतर। कहा- कवि किसी सरकार का प्रवक्ता नहीं होता। सरकार अच्छा करेगी तो तारीफ, गलत करेगी तो खुलकर विरोध करेंगे। समाज के हित में सच कहना ही कवि का सबसे बड़ा धर्म- कुमार विश्वास。
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गोंडा सिपाही पर दहेज-धोखाधड़ी समेत कई आरोप, केस दर्ज

Gonda, Uttar Pradesh:जहाँ गोंडा के करनैलगंज कोतवाली में तैनात सिपाही रवि प्रकाश पर उसकी ही पत्नी ने शादी का झांसा देकर शोषण इसके बाद कोर्ट मैरिज,धोखाधड़ी,दहेज उत्पीड़न,मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाते हुए सिपाही पति समेत 6 लोगों पर गोंडा के महिला थाने में कल 6 अगस्त को मुकदमा दर्ज करवाया है। पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है इस पूरे प्रकरण की जांच उप-निरीक्षक तशरीफ अहमद को सौंपी गई है। सिपाही पति रवि प्रकाश पर मुकदमा दर्ज होने के बाद गोंडा पुलिस प्रशासन में भी हड़कंप मचा हुआ है। सीतापुर जिले के हरगांव थाना क्षेत्र की रहने वाली पीड़िता के अनुसार वर्ष 2020 में उसकी मुलाकात लखीमपुर खीरी के मोहम्मदबाद निवासी रविप्रकाश से हुई थी। आरोप है कि रविप्रकाश ने शादी का झांसा देकर पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए। बाद में जब पीड़िता ने शादी का दबाव बनाया,तो कानूनी कार्रवाई के डर से 30 मई 2025 को दोनों ने लखीमपुर खीरी में कोर्ट मैरिज कर ली। कोर्ट मैरिज के बाद आरोपी की यूपी पुलिस में कांस्टेबल पद पर नौकरी लग गई और उसकी तैनाती गोंडा के थाना कोतवाली कर्नलगंज में हुई। नौकरी मिलते ही पति और ससुराल वालों के तेवर बदल गए पीड़िता का आरोप है कि 10 जून 2026 को जब वह ससुराल पहुंची। तो सास लीला देवी पति रविप्रकाश व अन्य परिजनों ने उसके साथ गाली-गलौज की और उसे रस्सी से बांधकर पीटा। आरोपियों ने सिपाही बनने के बाद 5 लाख रुपये नकद और एक कार की मांग की पीड़िता ने डायल-112 पर कॉल करके किसी तरह अपनी जान बचाई। पीड़िता के अनुसार उसके ​आरोपी पति का कहना है कि अब उसकी सरकारी नौकरी लग चुकी है और पीड़िता उसके लायक नहीं है। वह लगातार दूसरी शादी करने की धमकी दे रहा है 19 जुलाई 2026 को महिला थाना गोंडा में सुनवाई के दौरान पीड़िता की तबीयत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। ​अस्पताल से डिस्चार्ज होकर जब वह कर्नलगंज थाने अपने पति के पास पहुंची तो आरोपी सिपाही ने उसे डांट कर भगा दिया। इसके बाद रात करीब 10 बजे बस अड्डे के पास एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा पीछा किए जाने पर पीड़िता ने एक अनजान मकान में छिपकर अपनी जान बचाई। फिलहाल पुलिस मामले की पड़ताल में जुट गई है।
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विश्व आदिवासी दिवस: दौसा के मीणा हाईकोर्ट नांगल प्यारीवास में भव्य कार्यक्रम

Karauli, Rajasthan:विश्व आदिवासी दिवस को लेकर जनसंपर्क अभियान तेज, गांव-गांव बांटे जा रहे पीले चावल, जिला करौली आशीष चतुर्वेदी विश्व आदिवासी दिवस के आयोजन को लेकर सपोटरा क्षेत्र में तैयारियां जोरों पर हैं। भाजपा नेता प्रताप पाकड़ के नेतृत्व में युवा कार्यकर्ता गांव-गांव पहुंचकर लोगों को कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दे रहे हैं। आगामी 9 अगस्त को दौसा जिले के मीणा हाईकोर्ट नांगल प्यारीवास में आयोजित होने वाले समारोह को लेकर व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है। सपोटरा क्षेत्र के विभिन्न गांवों में विश्व आदिवासी दिवस को लेकर उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। भाजपा नेता प्रताप पाकड़ के नेतृत्व में युवाओं की टोली गांव-गांव जाकर लोगों को पीले चावल बांट रही है और उन्हें कार्यक्रम में शामिल होने का आमंत्रण दे रही है। इसके साथ ही क्षेत्रभर में बैनर और पोस्टर लगाकर लोगों को विश्व आदिवासी दिवस के महत्व से अवगत कराया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार आगामी 9 अगस्त को दौसा जिले के मीणा हाईकोर्ट नांगल प्यारीवास में विश्व आदिवासी दिवस समारोह का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान सरकार के कैबिनेट कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा करेंगे। समारोह में आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। कार्यक्रम में पारंपरिक आदिवासी नृत्य, रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, कन्हैया दंगल सहित विभिन्न लोक कलाओं का आयोजन किया जाएगा, जो समारोह का मुख्य आकर्षण रहेंगी। जनसंपर्क अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को कार्यक्रम से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है。
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भरत तिवारी एनकाउंटर: कोर्ट वकील ने साजिश का दावा किया

Patna, Bihar:भरत तिवारी एनकाउंटर केस: '15 जून को रची गई थी साजिश, बैलिस्टिक रिपोर्ट हत्या की गवाही देती है'— सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील संजीव कुमार सिंह का दावा आरा। भोजपुर जिले के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने गुरुवार को कई गंभीर दावे किए। भरत तिवारी के परिजनों से मिलने शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव पहुंचे अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि 17 जून 2026 को हुई घटना कोई आकस्मिक पुलिस कार्रवाई नहीं थी, बल्कि इसकी साजिश दो दिन पहले यानी 15 जून से ही रची जा चुकी थी। उन्होंने दावा किया कि 16 जून को शाहपुर के तत्कालीन एसडीPO की ओर से पुलिस मुख्यालय को झूठी रिपोर्ट भेजी गई, जिसके आधार पर एसटीएफ की टीम को भोजपुर बुलाया गया और पूरी कार्रवाई पूर्व नियोजित थी। संजीव कुमार सिंह ने कहा कि पुलिस मुख्यालय को भेजी गई रिपोर्ट में यह बताया गया कि क्षेत्र में बड़ी हिंसक घटना, फसाद या गंभीर वारदात होने की आशंका है, जबकि ऐसी कोई वास्तविक स्थिति नहीं थी। उनका आरोप है कि इसी कथित झूठी रिपोर्ट के आधार पर एसटीएफ को बुलाकर भरत तिवारी के खिलाफ कार्रवाई की योजना बनाई गई थी। 16 जून को ही गांव पहुंच गई थी एसटीएफ अधिवक्ता ने दावा किया कि एसटीएफ की टीम 16 जून को ही बिलौटी गांव पहुंच चुकी थी। उनके अनुसार 17 जून को भरत तिवारी ने फेसबुक लाइव के माध्यम से आत्मसमर्पण की इच्छा जाहिर की थी, लेकिन इसके बावजूद उसे घेरकर गोली मार दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआत में भरत तिवारी को तीन गोलियां मारी गईं, लेकिन तब भी उसकी मौत नहीं हुई। इसके बाद उसे वाहन में बैठाया गया और करीब 15 मिनट बाद दो और गोलियां मारी गईं, जिससे उसकी मृत्यु हुई। संजीव कुमार सिंह ने कहा कि यदि भरत तिवारी जीवित बच जाता तो वह पूरी घटना का खुलासा कर सकता था। इसी वजह से साक्ष्य मिटाने और हत्या सुनिश्चित करने की नीयत से वाहन के अंदर दो और गोलियां चलाई गईं। बैलिस्टिक रिपोर्ट में पांच अलग-अलग हथियारों से फायरिंग का दावा वरिष्ठ अधिवक्ता ने दावा किया कि बैलिस्टिक जांच में यह सामने आया है कि भरत तिवारी को पांच अलग-अलग पिस्टलों से गोली मारी गई। उनका कहना है कि इससे यह संकेत मिलता है कि एनकाउंटर में शामिल कई पुलिसकर्मियों ने फायरिंग की। उन्होंने यह भी दावा किया कि फॉरेंसिक जांच के अनुसार पहली तीन गोलियां कुछ दूरी से चलाई गई थीं, जबकि बाद की दो गोलियां बेहद नजदीक से मारी गईं। उनका कहना है कि वाहन के अंदर चली गोली से शरीर के अंदरूनी हिस्से की महत्वपूर्ण नस फट गई, जिसके कारण भरत तिवारी की मौत हुई। पोस्टमार्टम, फॉरेंसिक और सीडीआर को बताया अहम सबूत संजीव कुमार सिंह ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बैलिस्टिक रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच, फेसबुक लाइव वीडियो और पुलिस अधिकारियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) इस पूरे मामले के महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। उनके अनुसार एनकाउंटर से पहले और बाद में पुलिस अधिकारियों तथा पुलिस मुख्यालय के बीच हुई बातचीत की सीडीआर भी जांच एजेंसियों के पास उपलब्ध है। उन्होंने दावा किया कि इन सभी दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अदालत में यह साबित किया जा सकता है कि भरत तिवारी की हत्या हुई है और इसमें कई पुलिसकर्मियों की मिलीभगत थी। राष्ट्रपति सचिवालय में दी थी याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सचिवालय को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजी थी, जिसमें एसडीपीओ, एसएचओ और एसटीएफ के जवानों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की गई थी। उनके अनुसार राष्ट्रपति सचिवालय ने मामले का संज्ञान लेते हुए बिहार के मुख्य सचिव को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उन्होंने दावा किया कि मुख्य सचिव के निर्देश के बाद पुलिस मुख्यालय और प्रमंडलीय स्तर पर आंतरिक जांच कराई गई, जिसमें कई महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आए। उनका कहना है कि इसी जांच के बाद एनकाउंटर में शामिल एसटीएफ जवान अक्षय कुमार की गिरफ्तारी हुई और अन्य आरोपितों के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। 1400 करोड़ के कथित घोटाले से जोड़ा मामला संजीव कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि भरत तिवारी जवइनिया गांव के विस्थापितों से जुड़े लगभग 1400 करोड़ रुपये के कथित घोटाले को उजागर कर रहे थे। उनका दावा है कि इसी कारण कुछ प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों ने साजिश रचकर उनकी हत्या कराई। उन्होंने कहा कि इस कथित घोटाले से जुड़े दस्तावेजी साक्ष्य मुख्य सचिव कार्यालय और प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय के पास उपलब्ध हैं। हालांकि, इस संबंध में उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया। गैर जमानती वारंट के लिए आरा कोर्ट में शुरू की प्रक्रिया संजीव कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने एनकाउंटर में नामजद पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कराने के लिए आरा न्यायालय में कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। उनका दावा है कि एक सप्ताह के भीतर आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ वारंट जारी हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन अधिकारियों और अन्य लोगों का नाम एफआईआर में नहीं है, लेकिन जिन्हें वह इस मामले का साजिशकर्ता मानते हैं, उनके खिलाफ भी गिरफ्तारी और सरकारी सेवा से बर्खास्तगी की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है। 'हत्यारों को फांसी दिलाना हमारा उद्देश्य' अधिवक्ता ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य भरत तिवारी के परिवार को न्याय दिलाना और दोषियों को कड़ी सजा दिलाना है। उन्होंने दावा किया कि यह मामला "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" श्रेणी का है, क्योंकि इसमें कानून की रक्षा करने वाले पुलिसकर्मियों पर ही हत्या का आरोप है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए वह अदालत में दोषियों के खिलाफ कठोर दंड की मांग करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि भरत तिवारी की मां, पिता, भाई और पूरा परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है तथा वे इस कानूनी लड़ाई को अंतिम मुकाम तक पहुंचाएंगे।
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