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अलवर के तिलक मार्केट में आग से रेडीमेड दुकान और पटाखा गोदाम जलकर राख

Alwar, Rajasthan:अलवर के तिलक मार्केट में भीषण आग से मचा हड़कंप, पटाखों के धमाकों से दहला बाजार; रेडीमेड दुकान और गोदाम जलकर राख पटाखों के भंडारण को लेकर उठे सवाल, साड़ी की दुकान कराई खाली; दमकल की कई गाड़ियों ने संभाला मोर्चा, व्यस्त बाजार में गोदाम संचालित होने से प्रशासन की निगरानी पर सवाल अलवर। शहर के व्यस्त तिलक मार्केट में शुक्रवार सुबह एक दुकान की ऊपरी मंजिल पर भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। आग ने देखते ही देखते दूसरी मंजिल पर संचालित युवराज रेडीमेड की दुकान और तीसरी मंजिल पर बने पटाखों के गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया। गोदाम में रखे पटाखों में लगातार धमाके होने लगे, जिससे पूरे बाजार में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने के प्रयास शुरू किए गए। एहतियात के तौर पर आसपास की दुकानों को खाली कराया गया। गनीमत रही कि आग सुबह के समय लगी, जब बाजार में अपेक्षाकृत कम भीड़ थी। इससे दमकलकर्मियों को मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने में सहूलियत मिली। जानकारी के अनुसार, तिलक मार्केट के कॉर्नर पर स्थित एक दुकान की निचली मंजिल पर साड़ियों का कारोबार संचालित होता है, जबकि दूसरी मंजिल पर युवराज रेडीमेड और तीसरी मंजिल पर पटाखों का गोदाम बताया जा रहा है। इस दुकान से जुड़े कारोबार के डोगर दास बिहारी दास फर्म के नाम से संचालित होने की जानकारी सामने आई है, जिसके मालिक हरीश बताए गए हैं। आग की चपेट में आने से रेडीमेड दुकान और पटाखों के गोदाम में रखा सामान जलकर राख हो गया। वहीं, नीचे स्थित साड़ी की दुकान को समय रहते खाली करा लिया गया। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, नुकसान करीब 5 से 10 लाख रुपये तक हो सकता है। हालांकि, वास्तविक नुकसान का आकलन जांच के बाद ही हो सकेगा। शहर के बीचोंबीच पटाखों का गोदाम, प्रशासन की निगरानी पर सवाल इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि शहर के प्रमुख व्यावसायिक बाजार में पटाखों का गोदाम कैसे संचालित हो रहा था। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि यहां लंबे समय से पटाखों का कारोबार किया जा रहा है और दीपावली के मद्देनजर ऊपरी मंजिल पर पटाखों का स्टॉक रखा गया था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या संबंधित विभागों को इस भंडारण की जानकारी थी और यदि थी, तो सुरक्षा मानकों की जांच क्यों नहीं की गई। हालांकि, गोदाम की वैधता, पटाखों के भंडारण की अनुमति और आग लगने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी। तिलक मार्केट अलवर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में शामिल है। यहां कपड़े, जूते और अन्य सामान की बड़ी संख्या में दुकानें हैं। दीपावली के दौरान बाजार में ग्राहकों की भारी भीड़ रहती है। ऐसे में यदि यह हादसा दोपहर या अधिक भीड़भाड़ के समय होता, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी। पटाखों में लगातार हो रहे धमाकों ने आग की भयावहता को और बढ़ा दिया तथा आसपास के दुकानदारों में दहशत पैदा कर दी। मौके पर पहुंचीं मेयर, अधिकारियों को अलर्ट रहने के दिए थे निर्देश घटना की सूचना मिलने पर नगर निगम की मेयर सुमनलता अग्रवाल भी मौके पर पहुंचीं और हालात का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि दीपावली के सीजन को देखते हुए एक दिन पहले ही अग्निशमन विभाग के अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए थे। इसी सतर्कता के चलते घटना की सूचना मिलते ही दमकल की दो गाड़ियां तत्काल मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का काम शुरू किया गया। बाइट: सुमनलता अग्रवाल, मेयर, नगर निगम अलवर वहीं, स्थानीय दुकानदारों ने बाजार के बीच पटाखों के गोदाम के संचालन को गंभीर खतरा बताते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि घनी आबादी और दुकानों से घिरे इस बाजार में पटाखों का भंडारण किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है। उन्होंने ऐसे स्थानों पर पटाखों के भंडारण की जांच कराने और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करने की मांग की。 बाइट: स्थानीय दुकानदार पटाखों के भंडारण पर नियमों के बावजूद कारोबार को लेकर सवाल गौरतलब है कि अलवर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल है। वायु प्रदूषण को देखते हुए पटाखों की बिक्री और उपयोग को लेकर न्यायालयों तथा संबंधित प्रशासन की ओर से समय-समय पर प्रतिबंध और दिशा-निर्देश लागू किए जाते रहे हैं। ऐसे में शहर में पटाखों के भंडारण और कारोबार की वैधता को लेकर जांच की मांग उठ रही है। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि अलवर शहर और आसपास के क्षेत्रों में कई स्थानों पर पटाखों का भंडारण कर घरों और दुकानों से आपूर्ति की जाती है। तिलक मार्केट की संबंधित दुकान भी पटाखों के कारोबार के लिए जानी जाती बताई जा रही है। फिलहाल आग लगने के वास्तविक कारणों, गोदाम में रखे पटाखों की मात्रा और भंडारण संबंधी अनुमति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस घटना ने दीपावली से पहले बाजारों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और पटाखों के भंडारण की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग मामले की जांच कर क्या कार्रवाई करते हैं।
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PHED मुख्यालय का पेयजल बिल 3.82 लाख बकाया, जनता सवाल उठा रही

Jaipur, Rajasthan:जनता को नसीहत, खुद मियां फजीहत! राजस्थान में जनता को पानी पिलाने वाला जलदाय विभाग पानी के बिलों पर जनता पर शिकंजा कसता है. नियम गिनाता है,लेकिन पहले विभाग खुद के मुख्यालय की हकीकत जान ले। पानी के बकाया बिलों पर जनता के लिए रिकवरी अभियान चलाने वाले विभाग के मुख्यालय का खुद के पेयजल कनेक्शन के बिल लाखों रुपए बकाया है। आखिरकार बकाया बिलों पर कैसे जल विभाग खुद कटघरे में खड़ा हो गया..देखिए इस खास रिपोर्ट में! सवालों में पीएचईडी विभाग- आम जनता से पानी के बिलों की वसूली के लिए अभियान चलाने वाला जन Health Engineering विभाग खुद अपने बकाया बिलों को लेकर सवालों के घेरे में है। जयपुर स्थित जल भवन में चार पेयजल कनेक्शन के बिल महीनों से बकाया हैं। मुख्यालय पर कुल 3 लाख 82 हजार रुपए का पानी का बिल बकाया है। बिल जमा करवाने की अंतिम तारीख भी निकल चुकी है। लेकिन जल भवन का बिल अभी तक जमा नहीं हुआ है। जयपुर में पेयजल उपभोक्ताओं के 300 करोड से ज्यादा के बिल बकाया है। शहर में 6 लाख पेयजल कनेक्शन है। जिसमें जलदाय मुख्यालय का भी बिल है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि जलदाय विभाग खुद ही पानी का बिल जमा नहीं करवा पा रहा। चीफ इंजीनियर प्रशासन मुकेश बंसल का कहना है कि इस संबंध में मुझे जानकारी नहीं है। मैं पता करता हूं। पता करवाकर पूरे मामले में एक्शन लेता हूं。 जल भवन के चार कनेक्शन, बिल जमा नहीं- जलदाय विभाग के मुख्यालय जल भवन में चार पेयजल कनेक्शन हैं। इन सभी कनेक्शनों के बिल लंबे समय से बकाया बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विभाग खुद समय पर पानी का बिल जमा नहीं करवा पा रहा, तो आम उपभोक्ताओं से बकाया वसूली की सख्ती किस आधार पर की जा रही है。 ये 4 बिल बकाया- बकाया बिल......कितना बकाया.......... पेनल्टी पहला बिल.........15699 रू...........170 रू दूसरा बिल.........46111 रू...........288 रू तीसरा बिल....... 233831 रू.........2507 रू चौथा बिल........ 87201 रू.......... 684 रू कुल बिल बकाया...382842............ 3649 रू समय सीमा खत्म,अब पेनल्टी का सवाल- पानी के बिल जमा करवाने की अंतिम तारीख निकलने के बाद अब विभाग पर पेनल्टी लगने का भी सवाल खड़ा हो गया है। आम उपभोक्ताओं से समय पर बिल जमा करवाने की अपेक्षा करने वाले विभाग को पहले अपने बकाया बिलों का भुगतान सुनिश्चित करना होगा।जल भवन मंत्री से लेकर प्रमुख सचिव तक इसी दफ्तर में बैठते है। चीफ इंजीनियर्स समेत जलदाय विभाग का पूरा प्रशासनिक अमला भी यहीं बैठता है। इसके बावजूद मुख्यालय के ही चार पेयजल कनेक्शनों के बिल बकाया होना विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है. जनता से वसूली, खुद के बिल पर चुप्पी क्यों? पानी के बिलों की वसूली को लेकर विभाग की सख्ती के बीच अब सवाल उठ रहा है कि जल भवन के बकाया बिलों की वसूली के लिए कौन जिम्मेदारी तय करेगा। क्या विभाग अपने ही मुख्यालय के बकाया बिल जमा करवाने के लिए भी अभियान चलाएगा या वसूली की सख्ती सिर्फ आम उपभोक्ताओं तक सीमित रहेगी? पीटीसी-आशीष चौहान नोट-इस खबर की फीड ओएफसी से JPR_WATER_BILL_R स्लग से भेजी गई है。
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SAD Governor से मुलाकात के बाद CM बर्खास्तगी और ड्रग माफिया के शासन की मांग

RKRavi KantJust now
Noida, Uttar Pradesh:Chandigarh: After meeting Punjab Governor Gulab Chand Kataria, SAD chief Sukhbir Singh Badal says, "A Shiromani Akali Dal delegation met the Governor today to discuss the current situation in Punjab. A useless Chief Minister has destroyed Punjab. Law and order is in shambles. There is no Govt. It is the drug mafia which is actually running the Govt...We demanded that the Governor dismiss the Chief Minister immediately..."\n\nSpeaking on anti-drug activist Parvinder Singh Jhota says, "...His wife should be given a Govt job, as a Class 1 gazetted officer. The family should also be given Rs 2 Crores..."\n"शिरोमणि अकाली दल के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज राज्यपाल से मुलाकात की और पंजाब के मौजूदा हालात पर चर्चा की। एक निकम्मे मुख्यमंत्री ने पंजाब को बर्बाद कर दिया है। कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। यहाँ कोई सरकार नहीं है। असल में सरकार तो ड्रग माफिया चला रहा है... हमने मांग की है कि राज्यपाल तुरंत मुख्यमंत्री को बर्खास्त करें..."\n\nनशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "...उनकी पत्नी को क्लास 1 गजटेड ऑफिसर के तौर पर सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए। साथ ही, उनके परिवार को 2 करोड़ रुपये भी दिए जाने चाहिए..."
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PHED Head Office owes Rs 3.82 lakh in water bills, yet traffic-tighten on citizens—news headline

Jaipur, Rajasthan:जयपुर-जनता को नसीहत,खुद मियां फजीहत! राजस्थान में जनता को पानी पिलाने वाला जलदाय विभाग पानी के बिलों पर जनता पर शिकंजा कसता है. नियम गिनाता है,लेकिन पहले विभाग खुद के मुख्यालय की हकीकत जान ले। पानी के बकाया बिलों पर जनता के लिए रिकवरी अभियान चलाने वाले विभाग के मुख्यालय का खुद के पेयजल कनेक्शन के बिल लाखों रुपए बकाया है। सवालों में पीएचईडी विभाग- आम जनता से पानी के बिलों की वसूली के लिए अभियान चलाने वाला जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग खुद अपने बकाया बिलों को लेकर सवालों के घेरे में है। जयपुर स्थित जल भवन में चार पेयजल कनेक्शनों के बिल महीनों से बकाया हैं। मुख्यालय पर कुल 3 लाख 82 हजार रुपए का पानी का बिल बकाया है। बिल जमा करवाने की अंतिम तारीख भी निकल चुकी है। लेकिन जल भवन का बिल अभी तक जमा नहीं हुआ है। जयपुर में पेयजल उपभोक्ताओं के 300 करोड से ज्यादा के बिल बकाया है। शहर में 6 लाख पेयजल कनेक्शन है। जिसमें जलदाय मुख्यालय का भी बिल है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि जलदाय विभाग खुद ही पानी का बिल जमा नहीं करवा पा रहा। चीफ इंजीनियर प्रशासन मुकेश बंसल का कहना है कि इस संबंध में मुझे जानकारी नहीं है। मैं पता करता हूं। पता करवाकर पूरे मामले में एक्शन लेता हूं। जल भवन के चार कनेक्शन, बिल जमा नहीं- जलदाय विभाग के मुख्यालय जल भवन में चार पेयजल कनेक्शन हैं। इन सभी कनेक्शनों के बिल लंबे समय से बकाया बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विभाग खुद समय पर पानी का बिल जमा नहीं करवा पा रहा, तो आम उपभोक्ताओं से बकाया वसूली की सख्ती किस आधार पर की जा रही है। ये 4 बिल बकाया- पहला बिल.........15699 रू...........170 रू दूसरा बिल.........46111 रू...........288 रू तीसरा बिल....... 233831 रू.........2507 रू चौथा बिल........ 87201 रू.......... 684 रू कुल बिल बकाया...382842............ 3649 रू समय सीमा खत्म,अब पेनल्टी का सवाल- पानी के बिल जमा करवाने की अंतिम तारीख निकलने के बाद अब विभाग पर पेनल्टी लगने का भी सवाल खड़ा हो गया है। आम उपभोक्ताओं से समय पर बिल जमा करवाने की अपेक्षा करने वाले विभाग को पहले अपने बकाया बिलों का भुगतान सुनिश्चित करना होगा। जल भवन मंत्री से लेकर प्रमुख सचिव तक इसी दफ्तर में बैठते है। चीफ इंजीनियर्स समेत जलदाय विभाग का पूरा प्रशासनिक अमला भी यहीं बैठता है। इसके बावजूद मुख्यालय के ही चार पेयजल कनेक्शन के बिल बकाया होना विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। जनता से वसूली, खुद के बिल पर चुप्पी क्यों? पानी के बिलों की वसूली को लेकर विभाग की सख्ती के बीच अब सवाल उठ रहा है कि जल भवन के बकाया बिलों की वसूली के लिए कौन जिम्मेदारी तय करेगा। क्या विभाग अपने ही मुख्यालय के बकाया बिल जमा करवाने के लिए भी अभियान चलाएगा या वसूली की सख्ती सिर्फ आम उपभोक्ताओं तक सीमित रहेगी?
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दरभंगा स्नातक-शिक्षक सीटों पर NDA के जीत का दावा, सरावगी ने कहा

Darbhanga, Bihar:दरभंगा में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर मतदान जारी है। इसी बीच बिहार BJP के प्रदेश अध्यक्ष और दरभंगा नगर विधायक संजय सरावगी ने राजेंद्र भवन स्थित मतदान केंद्र पर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। अपनी पत्नी शोभा सरावगी के साथ किया मतदान के बाद बातचीत में उन्होंने कहा कि सुबह मतदान की रफ्तार काफी धीमी है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे घरों से निकलकर अपने मताधिकार का प्रयोग जरूर करें। संजय सरावगी ने बिहार की सभी 8 स्नातक सीटों पर NDA की जीत का दावा किया। वहीं, सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली पटना स्नातक सीट को लेकर उन्होंने कहा कि यह सीट पहले जिसके पास थी, उसी के पास रहेगी। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जेडीयू नेता नीरज कुमार से मुलाकात की तस्वीर पर हो रही चर्चा को लेकर संजय सरावगी ने कहा कि नीतीश कुमार उनसे मिलने गए थे और उन्होंने कहा कि आप आराम कीजिए, हम लोग आपके बदले चुनाव लड़ लेंगे। उन्होंने कहा कि NDA पूरी तरह एकजुट है। दरभंगा स्नातक सीट से NDA प्रत्याशी सर्वेश कुमार और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से NDA प्रत्याशी डॉ. घनश्याम राय की जीत का भी संजय सरावगी ने दावा किया।
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बूंदी पंचायत चुनाव 2026: आशा मीणा ने भाजपा से जिला प्रमुख बनने का दावा किया

Jaipur, Rajasthan:बून्दी। पंचायत चुनाव 2026 के तहत भाजपा की ओर से जिला परिषद सदस्य पद के लिए नामांकन दाखिल किए गए। पूर्व जिला उप प्रमुख आशा मीणा ने वार्ड संख्या 24 से रिटर्निंग अधिकारी रमेश देव के समक्ष नामांकन पत्र दाखिल किया। आशा मीणा भाजपा जिला अध्यक्ष रामेश्वर मीणा की पत्नी हैं। उन्होंने डबल इंजन सरकार की विकास योजनाओं के दम पर बूंदी में भाजपा का जिला प्रमुख बनाने का दावा किया। वहीं जिला परिषद वार्ड संख्या 5 से चांद कंवर ने भी नामांकन दाखिल किया । इस दौरान चुनाव प्रभारी महेश विजय और पूर्व जिला अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल सहित भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे。
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उनियारा में पंचायत समिति नामांकन का आज अंतिम दिन, प्रत्याशी पंजीकरण कर रहे

Tonk, Rajasthan:उनियारा(टोंक) उनियारा में पंचायत समिति चुनाव को लेकर प्रत्याशियों में उत्साह, पंचायत समिति चुनाव के नामांकन का आज है अंतिम दिन, दोपहर 3 बजे तक प्रत्याशी दाखिल कर सकेंगे नामांकन पत्र, SDM कार्यालय में नामांकन को लेकर जबरदस्त भीड़ मिल रही है देखने को, भाजपा-क कांग्रेस की प्रत्याशियों की सूची का अब भी है इंतजार, टिकटों को लेकर दोनों प्रमुख दलों में सियासी हलचल बनी हुई है तेज, संभवित उम्मीदवार कर रहे है अपना नामांकन दाखिल, प्रत्याशियों की घोषणा और टिकटों को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर बना हुआ है जारी।
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दौसा पंचायत चुनाव: परिवारवाद बनाम वंशवाद, तीनों महिलाएं तगड़ी दावेदारी

Dausa, Rajasthan:जिला दौसा पंचायत चुनाव में दिखा परिवारवाद कांग्रेस ओर भाजपा दोनों ही दलों में वंशवाद की राजनीति भाजपा से सिकराय विधायक की मां कौशlya देवी चुनावी रण में वहीं कांग्रेस के दौसा विधायक डीडी बैरवा की पत्नी बीना बैरवा ने भी ठोकी ताल कांग्रेस की पूर्व मंत्री ममता भूपेश की बेटी देवांगना भी आजमा रही भाग्य दौसा जिला प्रमुख की सीट एससी महिला के लिए आरक्षित ऐसे में तीनों ही प्रत्याशी जिला प्रमुख की प्रबल दावेदार दौसा जिले में पंचायत राज चुनाव में कांग्रेस ओर भाजपा दोनों ही दलों में परिवारवाद और वंशवाद की राजनीति भी दिखाई दे रही है दौसा से कांग्रेस विधायक डीडी बैरवा की पत्नी बिना बैरवा जिला परिषद सदस्य के लिए चुनावी मैदान में है तो वही गहलोत सरकार में मंत्री रही ममता भूपेश की बेटी देवांगना भी राजनीति में अपना भाग्य आजमा रही है साथ ही सिकराय से भाजपा विधायक विक्रम बंशीवाल की मां कौशल्या देवी ने भी चुनावी मैदान में ताल ठोक दी है दौसा जिला प्रमुख की सीट एससी महिला के लिए आरक्षित है ऐसे में तीनों ही प्रत्याशी जिला प्रमुख की प्रबल दावेदार भी हैं तीनों ही प्रत्याशियों का जिले में बड़ा राजनीतिक बैकग्राउंड भी रहा है पूर्व मंत्री ममता भूपेश सिकराय से दो बार विधायक रह चुकी है तो दोनों ही बाहर गहलोत सरकार में मंत्री भी रही है ऐसे में इलाके में भूपेश की गहरी पैठ भी है वही भूपेश के पति डॉक्टर घनश्याम बैरवा सेवानिवृत आईएएस अधिकारी हैं ऐसे में बेटी देवांगना भी राजनीति में आने को लेकर काफी उत्साहित भी दिखाई दे रही है परिवारवाद और वंशवाद को लेकर ममता भूपेश ने कहा अगर बच्चों की राजनीति में रुचि है तो उनको मौका मिले तो कोई बुरी बात नहीं वही देवांगना ने कहा राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की सोच से प्रेरित होकर राजनीति में कदम रखा है और मेरा मकसद है मां की तरह मैं भी जनता की सेवा करूं वहीं वर्तमान में सिकराय से भाजपा के विधायक विक्रम बंशीवाल की मां कौशल्या देवी इस चुनावी रण में अपनी किस्मत आजमा रही है कौशल्या देवी के पति जियालाल बंशीवाल दौसा से दो बार विधायक रह चुके हैं तो वहीं एक बार दौसा के जिला प्रमुख भी रहे हैं ऐसे में कौशल्या देवी का भी राजनीतिक बैकग्राउंड बड़ा है कौशल्या देवी का कहना है उनको पार्टी ने आदेश दिया है इसलिए वह चुनाव लड़ रही है कौशल्या देवी के परिवार के अन्य कई सदस्य भी दौसा से विधायक रह चुके हैं ऐसे में उनका पिछले 5 दशक से राजनीति से गहरा नाता रहा है वहीं कांग्रेस से दौसा के विधायक डीडी बैरवा की पत्नी बीना बैरवा भी पंचायत चुनावी रण में ताल ठोक रही है बीना बैरवा पूर्व में जीरोता ग्राम पंचायत से सरपंच रह चुकी है साथ ही लवण की प्रधान भी रही है बीना के ससुर स्वर्गीय किशन लाल बैरवा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं और दौसा पंचायत समिति के प्रधान भी रहे हैं खुद डीडी बैरवा भी दौसा पंचायत समिति के प्रधान रह चुके हैं ऐसे में बीना बैरवा का भी कांग्रेस में एक अच्छा खासा राजनीतिक अनुभव है अब इस चुनावी रण में जिला प्रमुख की तीनों महिला दावेदार प्रत्याशियों में से किसको जीत मिलेगी किसको हार यह तो मतदाता तय करेंगे लेकिन फिलहाल तीनों ही प्रत्याशी अपनी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं वही तीनों ही प्रत्याशियों का बड़ा राजनीतिक बैकग्राउंड होने के चलते तीनों की प्रतिष्ठा भी दाव पर है बाइट ममता भूपेश पूर्व मंत्री बाइट देवांगना भूपेश की बेटी बाइट विक्रम बंशीवाल विधायक सिकराय बाइट कौशल्या देवी विक्रम की मां
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जैसलमेर में अकाल जैसे हालात: चारा डिपो खोलने के प्रस्ताव तेज

Jaisalmer, Rajasthan:जिला -जैसलमेर विधानसभा - जैसलमेर खबर की लोकेशन - जैसलमेर मोहनगढ़ जैसलमेर जैसलमेर मोहनगढ़ जिले में कम वर्षा के चलते उत्पन्न हुए अकाल जैसे हालात के बीच पशुपालकों को राहत देने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिले की विभिन्न तहसीलों में चारा डिपो खोलने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जिला प्रशासन को अब तक करीब 60 से 61 प्रस्ताव प्राप्त हो चुके है। इस संबंध में जिला प्रशासन की ओर से जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने जानकारी देते हुए बताया गया कि कम वर्षा के कारण पैदा हुई परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री और आपदा राहत विभाग की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों की पालना में जिले के सभी सब-डिवीजन और तहसील स्तर से चारा डिपो खोलने के लिए प्रस्ताव मांगे गए थे। जिला प्रशासन ने चारे की खरीद और अन्य जिलों में उसके परिवहन को लेकर फैल रही भ्रांतियों के बीच स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि जिले से बाहर के लोगों द्वारा चारे की खरीद कर उसे अन्य जिलों में ले जाने जैसी गतिविधियों को हतोत्साहित करने के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है। प्रशासन का उद्देश्य जिले में उपलब्ध चारे का उपयोग स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के लिए सुनिश्चित करना है, ताकि कम वर्षा से प्रभावित पशुपालकों को राहत मिल सके। जिला प्रशासन की ओर से चारा डिपो खोलने की प्रक्रिया में तेजी लाने और निर्धारित दरों पर चारा उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। अब सभी की नजरें आगामी कुछ दिनों में होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। चारा डिपो शुरू होने से जिले के प्रभावित क्षेत्रों के पशुपालकों को राहत मिलने की उम्मीद है। बाईट-अनुपमा जोरवाल जिला कलेक्टर जैसलमेर
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