सिद्धार्थनगरः अपनी मांगों को लेकर लेखपालों ने किया धरना प्रदर्शन
Madhopur Urf Chandanjot, Uttar Pradesh:सिद्धार्थनगर में लेखपालों ने अपनी कई मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू किया है। इसी कड़ी में आज इटवा तहसील प्रांगण में लेखपालों ने धरना प्रदर्शन किया। लेखपालों की मांग है कि हमारे मृतक लेखपालों के वारिसों को उनका बकाया धन मिलने। कई लेखपालों का निलंबन वापस हो।आपको मालूम हो कि विगत दिनों जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद उत्तर प्रदेश लोकपाल संघ अध्यक्ष अजय कुमार गुप्त को सरकारी कार्यों में अपने दायित्वों के निर्वहन न करने के आरोप में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
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एमपी में मौसम दो हिस्सों में: धूप बनाम बारिश के आसार
Bhopal, Madhya Pradesh:भोपाल एमपी में दो तरीके का मौसम कहीं धूप तो कहीं बारिश के आसारएक मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए- सुप्रीम कोर्ट
New Delhi, Delhi:नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर प्रोटेस्ट को लेकर शुक्रवार को सुनवाई दोबारा शुरू हुई। वकील ने मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी। CJI ने कहा कि हम मेट्रो स्टेशन बन्द होने की बात से चिंतित है। हमारी चिंता दिल्ली एनसीआर से आने वाले उन लोगों के लिए है जो हर रोज़ रोजगार के लिए दिल्ली आते हैं। एक बार को वकील की बात समझ आती है कि वो कार से आ सकते है लेकिन जो लोग मेट्रो से आते है, उनकी दिक्कत को भी देखना होगा। हमारी चिंता उन लोगों को लेकर है, जो रोजाना मेट्रो से इस शहर में आते हैं। वकीलों ने बताया कि मेट्रो ही नहीं, दिल्ली आने वाली ट्रेन को भी रद्द कर दिया गया है।
CJI ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों को नियम बनाने पूरा अधिकार है। इसमें कोई संदेह नहीं है। अगर आप उपद्रवी भीड़ की आवाजाही को नियंत्रित करना चाहते हैं, तो ऐसा कर सकते हैं लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आप सब कुछ ठप कर दें और लोगों को आने-जाने के लिए कोई साधन ही न छोड़ें।
CJI ने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए एक मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल किया जाए। जितनी ज़रूरत हो, ऑथोरिटी उतनी ही सख्ती बरते, ज़्यादा नहीं।
आज की सुनवाई की बड़ी बातें-
-SC ने सरकार से कहा कि मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक नहीं लगानी चाहिए।
-सरकार सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मेट्रो/ ट्रेन के संचालन पर वाजिब नियंत्रण लगा सकती है, लेकिन आम जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
-कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा के लिए उतने ही प्रतिबंध लगाए जाएं, जितने ज़रूरी हों।
-SC ने कहा कि सरकार जो भी एहतियाती कदम उठा रही है, उसके लिए व्यापक प्रचार करना होगा। इसके लिए अखबारों में सरकारी वेबसाइटों पर जानकारी दी जानी चाहिए ताकि लोगो को दिक्कत न हो।
SG तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि इस बारे में अधिकारियों से बात करेंगे कि ट्रेनों और मेट्रो को पूरी तरह बंद करने के फैसले पर फिर से विचार किया जाए।
(नई दिल्ली से जी न्यूज रिपोर्टर अरविंद सिंह की रिपोर्ट)
जंतर-मंतर पर बिना जरूरी मंजूरी के प्रदर्शन करना गैरकानूनी -सुप्रीम कोर्ट
New Delhi, Delhi:नई दिल्ली: दिल्ली में 10 अक्टूबर को होने वाले प्रदर्शन से पहले दिल्ली आने वाली ट्रेन और मेट्रो पर रोक लगाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को रखा।
सिब्बल ने कहा 10 अक्टूबर को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो के लगभग 57 स्टेशन बंद किए जा रहे है। दिल्ली आने वाली ट्रेनें को रद्द किया जा रहा हैं। ऐसे में लोग कहीं आ-जा नहीं सकते। मेरे देश में यह क्या हो रहा है? यह तो शांतिपूर्ण प्रदर्शन है।
वहीं अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सुरक्षा के लिए CAPF की 221 कंपनियां तैनात की जा रही हैं। 10 detention सेन्टर तैयार किए जा रहे हैं। OYO होटलों से कहा गया है कि वे नई बुकिंग न लें। YouTubers के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। मीडिया से कहा गया है कि वे अपना आई कार्ड साथ रखें। दिल्ली पुलिस लोगों को प्रदर्शन में शामिल न होने की सलाह दे रही है।
इस पर सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए ऐसा किया जा रहा है।
इस बात पर याचिका लगाने वाले वकीलों ने जवाब दिया कि सरकार को समझना होगा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन गैरकानूनी नहीं होता। वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि सरकार प्रदर्शनकारियों को संभाल नहीं पा रही हैं, वे पूरे शहर को बंद नहीं कर सकते। वकील ने बताया कि इंडियन यूथ कांग्रेस ने इजाजत मांगी थी, उन्हें नहीं मिली। इसलिये वो हाई कोर्ट गए।
इस मामले को सुनते हुए जस्टिस बागची ने कहा कि लोगों को संगठन बनाने और उससे जुड़ने का मौलिक अधिकार है, लेकिन कानून के अनुसार इस अधिकार को नियंत्रित भी किया जा सकता है। अगर अधिकारी प्रदर्शन की अनुमति देने में देरी करते हैं या नहीं करते हैं, तो आप कोर्ट आ सकते हैं। लेकिन बिना ज़रूरी मंजूरी के प्रदर्शन करना गैरकानूनी होगा। अगर हमें पता चल जाए कि प्रदर्शन का आयोजन कौन कर रहा है और उसमें कितने लोगों के आने की उम्मीद है, तो हम उसी हिसाब से व्यवस्था का आदेश दे सकते है। अगर हमें यह जानकारी मिल जाए तो हम सरकार से भी कह सकते हैं कि वह उसी के अनुसार कदम उठाए, न कि पूरे शहर पर बड़े पैमाने पर बैन लगा दें।
इस पर सिब्बल ने कहा कि हम याचिकाकर्ताओं से पूरी जानकारी लेकर कोर्ट आएंगे। दो बजे कोर्ट को पूरी जानकारी देंगे।
(दिल्ली से जी न्यूज रिपोर्टर अरविंद सिंह की रिपोर्ट)
