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Mohd TasleemMohd TasleemFollow27 Jan 2025, 03:52 pm

Kanpur dehat- सड़क दुर्घटना में 4 घायल

Rajpur, Uttar Pradesh:

सिकंदरा थाना क्षेत्र के सूर्या ओवरब्रिज पर राजस्थान के अलवर निवासी किशोरी लाल ने बताया कि वह अपनी पत्नी व दो बेटियों के साथ कुंभ स्नान करने गया था। सोमवार को घर वापस जाते समय सूर्या ओवरब्रिज पर कार की रफ्तार तेज होने की वजह से कार का एक पहिया निकल गया जिससे कार अनियंत्रित होकर आगे जा रहे ट्रक से टकराने के बाद पलट गई। जिसमें अलवर निवासी उर्मिला 78 वर्ष किशोरी लाल 83 वर्ष व उसकी बेटी चंदा देवी 46 वर्ष, रेखा देवी 40 गंम्भीर रुप से घायल हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने सभी घायलों को सिकंदरा सीएचसी में भर्ती कराया। जहां मौजूद डाक्टर पवन कुमार ने सभी का इलाज करके घर भेज दिया।

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धनबाद के लटानी में करोड़ों टंकी के बावजूद पानी नहीं मिल रहा

Dhanbad, Jharkhand:धनबाद जिले प्रशासन भीषण गर्मी में पानी की किल्लत दूर करने, ग्रामीणों को सहूलियत देने का दावा जरूर कर रहा है। लेकिन ग्रामीणों को पानी के लिए हर दिन जूझना पड़ रहा है। बड़े-बड़े पानी टँकी केवल दिखावे विकास की झूठी स्थिति को बयां कर रहे हैं। सरकार जहां एक ओर हर घर नल का जल पहुंचाने के बड़े दावे कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच धनबाद जिले के पूर्वी टुंडी अंतर्गत लटानी पंचायत के ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। विकास के तमाम दावों के बीच आज भी स्थानीय महिलाएं एवं पुरुष सैकड़ों की संख्या में बाल्टी लेकर पानी की तलाश में भटकنے को मजबूर हैं। हैरानी की बात यह है कि लटानी मोड़ के पास करोड़ों की लागत से पानी की विशाल टंकी तो खड़ी कर दी गई है, लेकिन स्थानीय निवासियों को उसमें से पानी की एक बूंद तक नसीब नहीं हो रही है। जिस जगह पर यह टंकी मौजूद है, ठीक उसी के नीचे रहने वाले लोग आज प्यासे रहने को विवश हैं। सरकारी दावों के विपरीत यह टंकी सिर्फ एक शोपीस बनकर रह गई है, ग्रामीणों के मुताबिक इस टंकी से जलापूर्ति का जिम्मा श्रीराम ईपीसी कंपनी के पास है। जब ग्रामीणों ने पानी न मिलने की शिकायत की, तो कंपनी के कर्मियों ने साफ कह दिया हमारा पुराना बकाया भुगतान अभी तक नहीं मिला है। जब तक विभाग बकाया राशि का भुगतान नहीं करता, तब तक पानी की सप्लाई शुरू नहीं की जाएगी। कंपनी और विभाग के बीच पैसे के इस विवाद का खामियाजा गरीब ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। प्रशासन से जल्द से जल्द गुहार ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन और पेयजल स्वच्छता विभाग के खिलाफ गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि प्रशासन जनता की इस मूलभूत समस्या को लेकर पूरी तरह लापरवाही बना हुआ है। त्रस्त ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पानी जैसी बुनियादी सुविधा के नाम पर उनके साथ खिलवाड़ बंद किया जाए और जल्द से जल्द पेयजल आपूर्ति बहाल की जाए, अन्यथा ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे.
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बैटरी फटने से घर और दुकान में आग, लाखों का नुकसान

Khajuria Khurd, Bihar:बैटरी फटने से लगी आग, लाखों का सामान जलकर हुआ खाक दुकान और घर में मची अफरातफरी, फायर बिग्रेड ने पाया आग पर काबू मोहनिया थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 12 में एक दुखद अग्निकांड की घटना सामने आई है, जहाँ बैटरी फटने के कारण सुमित पासवान के घर में भीषण आग लग गई। स्थानीय निवासी सुमित ने बताया कि वे अपने घर में कपड़े प्रेस कर रहे थे, तभी अचानक गैस लीक होने जैसी अजीब आवाज सुनाई दी। जब उन्होंने जाकर देखा, तो बैटरी से धुआं निकल रहा था। उन्होंने इसकी रिकॉर्डिंग भी की है। सुमित के अनुसार, डर के मारे वे और उनके घरवाले छत पर चले गए। जब वे वापस आए, तो देखा कि घर में आग लग चुकी थी। उन्होंने तुरंत फायर बिग्रेड को सूचित किया, जिसके बाद लगभग 15 मिनट के भीतर दमकल की टीम मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों ने दमकल विभाग के आने से पहले ही आगे और पीछे से पानी डालकर आग पर काबू पाने की पूरी कोशिश की। इस अग्निकांड में सुमित का घर और उसमें बनी इलेक्ट्रॉनिक रिपेयरिंग की दुकान पूरी तरह जलकर राख हो गई। सुमित ने बताया कि दुकान में रखा सारा सामान, जिसमें टीवी, स्क्रीन, फ्रिज और अन्य कीमती इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल थे, जलकर नष्ट हो गए हैं। उनके अनुसार, इस घटना में लगभग 3 से 4 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं दूसरी ओर, मौके पर पहुंचे दमकल विभाग के कर्मचारी ने घटना की गंभीरता को देखते हुए इसे एक बड़ी क्षति बताया है। फिलहाल, क्षेत्र में इस हादसे की चर्चा जोरों पर है और लोग इसे एक बड़ी दुर्घटना मान रहे हैं। गनीमत रही कि समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, जिससे कोई बड़ा जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। स्थानीय पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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SC के फैसले से वोटर लिस्ट पर आयोग की कसौटी, क्या आपका नाम सही है?

Noida, Uttar Pradesh:सुप्रीम कोर्ट के लिखित फैसले में निष्कर्ष और दिशानिर्देश:- 1 SIR की प्रकिया जनप्रतिनिधत्व कानून के खिलाफ नहीं है।यह संविधान के अनुच्छेद 324 और RP एक्ट के सेक्शन 21 के तहत के तहत चुनाव आयोग की अधिकार क्षेत्र ने आती है। SIR का मकसद निष्पक्ष और सही चुनाव सुनिश्चित करना है。 2 SIR प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग जो कदम उठाए , वे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के मुताबिक पूरी तरह और संतुलित हैं।इसका मुख्य मकसद मतदाता सूची को सही और अपडेट करना है।जिन लोगों के नाम गलत तरीके से हटे है, उनके लिए भी इसमें राहत और अपील का मौका दिया है。 3 अगर किसी का नाम पहले से मतदाता सूची में है तो यह माना जा सकता है कि वो वैध मतदाता है। लेकिन वोटर लिस्ट में नाम होना अंतिम प्रमाण नहीं है।उसे जांचकर बदला जा सकता है।चुनाव आयोग को पूरी मतदाता सूची की जांच करने का अधिकार है。 4 मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 21A के खिलाफ नहीं है। जिन लोगों के नाम हटाए गए, उनकी प्रक्रिया कानून के अनुसार ही की गई है。 उन्हें नोटिस दिया गया और उन्हें अपनी बात रखने का मौक़ा भी दिया गया। 5 चुनाव आयोग ने यह तय किया कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने/ जांचने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज मान्य होंगे। वह उसका सोच-समझकर लिया गया प्रशासनिक फैसला है। आधार कार्ड को शामिल करने का आदेश भी इस कोर्ट ने 8 सितंबर 2025 को दिया गया था।इसलिए उसे भी दस्तावेजों शामिल किया गया है।दस्तावेजों को चयन मनमाने तरीके से नहीं किया गया है। इसके पीछे वाजिब आधार है। 6 चुनाव आयोग अपने संवैधानिक अधिकार के तहत यह सीमित जांच कर सकता है कि कोई व्यक्ति नागरिक है या नहीं लेकिन सिर्फ यह तय करने के लिए कि उसे वोटर लिस्ट में शामिल किया जाए या नहीं। चुनाव आयोग की जांच केवल मतदाता सूची के लिए होती है।इसका मतलब यह नहीं है कि चुनाव आयोग किसी व्यक्ति की नागरिकता का अंतिम और कानूनी फैसला कर रहा हो। अगर किसी व्यक्ति को नागरिक न मानकर वोटर लिस्ट से हटाया जाता है, तो इसका असर सिर्फ इतना है कि वह वोट नहीं दे पाएगा।लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसकी नागरिकता खत्म हो गई है।नागरिकता का असली और अंतिम फैसला केंद्र सरकार के सक्षम ऑथरिटी करती है 7 चुनाव आयोग केवल यह देखता है कि व्यक्ति वोटर लिस्ट में रहने योग्य है या नहीं। लेकिन वह नागरिकता पर अंतिम फैसला नहीं दे सकता। अगर चुनाव आयोग को यह लगता है कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में शामिल होने की कानूनी शर्तें पूरी नहीं करता, तो आयोग को उस व्यक्ति का मामला केंद्र सरकार के सक्षम ऑथरिटी के पास भेजना होगा। वही नागरिकता तय कर सकता है 8 1SIR की प्रकिया जनप्रतिनिधत्व कानून के खिलाफ नहीं है।यह संविधान के अनुच्छेद 324 और RP एक्ट के सेक्शन 21 के तहत के तहत चुनाव आयोग की अधिकार क्षेत्र ने आती है। SIR का मकसद निष्पक्ष और सही चुनाव सुनिश्चित करना है。 2 SIR प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग जो कदम उठाए , वे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के मुताबिक पूरी तरह और संतुलित हैं।इसका मुख्य मकसद मतदाता सूची को सही और अपडेट करना है।जिन लोगों के नाम गलत तरीके से हटे है, उनके लिए भी इसमें राहत और अपील का मौका दिया गया है。 3 अगर किसी का नाम पहले से मतदाता सूची में है तो यह माना जा सकता है कि वो वैध मतदाता है। लेकिन वोटर लिस्ट में नाम होना अंतिम प्रमाण नहीं है।उसे जांचकर बदला जा सकता है।चुनाव आयोग को पूरी मतदाता सूची की जांच करने का अधिकार है。 4 मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 21A के खिलाफ नहीं है। जिन लोगों के नाम हटाए गए, उनकी प्रक्रिया कानून के अनुसार ही की गई है। उन्हें नोटिस दिया गया और उनहे अपनी बात रखने का मौक़ा भी दिया गया。 5 आयोग ने यह तय किया कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने/ जांचने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज मान्य होंगे। वह उसका सोच-समझकर लिया गया प्रशासनिक फैसला है। आधार कार्ड को शामिल करने का आदेश भी इस कोर्ट ने 8 सितंबर 2025 को दिया गया था।इसलिए उसे भी दस्तावेजों शामिल किया गया है।दस्तावेजों को चयन मनमाने तरीके से नहीं किया गया है। इसके पीछे वाजिब आधार है。 6चुनाव आयोग अपने संवैधानिक अधिकार के तहत यह सीमित जांच कर सकता है कि कोई व्यक्ति नागरिक है या नहीं लेकिन सिर्फ यह तय करने के लिए कि उसे वोटर लिस्ट में शामिल किया जाए या नहीं। चुनाव आयोग की जांच केवल मतदाता सूची के लिए होती है।इसका मतलब यह नहीं है कि चुनाव आयोग किसी व्यक्ति की नागरिकता का अंतिम और कानूनी फैसला कर रहा हो。 अगर किसी व्यक्ति को नागरिक न मानकर वोटर लिस्ट से हटाया जाता है, तो इसका असर सिर्फ इतना है कि वह वोट नहीं दे पाएगा।लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसकी नागरिकता खत्म हो गई है。 नागरिकता का असली और अंतिम फैसला केंद्र सरकार के सक्षम ऑथरिटी करती गया 7 चुनाव आयोग केवल यह देखता है कि व्यक्ति वोटर लिस्ट में रहने योग्य है या नहीं。 लेकिन वह नागरिकता पर अंतिम फैसला नहीं दे सकता। अगर चुनाव आयोग को यह लगता है कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में शामिल होने की कानूनी शर्तें पूरी नहीं करता, तो आयोग को उस व्यक्ति का मामला केंद्र सरकार के सक्षम ऑथरिटी के पास भेजना होगा। वही नागरिकता तय कर सकता है 8 चुनाव आयोग ने जिन लोगों के नाम 2003 की वोटर लिस्ट में होने के बावजूद उन्हें भारतीय नागरिक नहीं मानते हुए हटाए है, उनके मामलों को आयोग को 4 हफ्तों में नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत बनी सक्षम ऑथिर Authority को भेजेगा। ऑथरिटी कानून के अनुसार यह तय करेगी कि व्यक्ति वास्तव में भारतीय नागरिक है या नहीं।। यह फैसला अगली चुनाव प्रक्रिया (लोकसभा, विधानसभा या स्थानीय निकाय चुनाव) से पहले करने की कोशिश की जाएगी।जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें भी ऑथरिटी की ओर से नोटिस दिया जाएगा उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। अगर कोई अथॉरिटी केस नतीजे पर पहुँचती है कि वह व्यक्ति भारतीय नागरिक है, तो उसका नाम फिर से वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा। 9 अगर बिहार में रहने वाले किसी व्यक्ति का नाम गलती से काटा गया है ।तो वह व्यक्ति चुनाव आयोग के फैसले को अदालत में चुनौती दे सकता है। चुनाव आयोग ने जिन लोगों के नाम 2003 की वोटर लिस्ट में होने के बावजूद उन्हें भारतीय नागरिक नहीं मानते हुए हटाए है, उनके मामलों को आयोग को 4 हफ्तों में नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत बनी सक्षम ऑथिर Authority को भेजेगा। ऑथरिता कानून के अनुसार यह तय करेगी कि व्यक्ति वास्तव में भारतीय नागरिक है या नहीं।। यह फैसला अगली चुनाव प्रक्रिया (लोकसभा, विधानसभा या स्थानीय निकाय चुनाव) से पहले करने की कोशिश की जाएगीजिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें भी ऑथर Authority की ओर से नोटिस दिया जाएगा उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। अगर कोई अथॉरिटी केस नतीजे पर पहुँचती है कि वह व्यक्ति भारतीय नागरिक है, तो उसका नाम फिर से वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा。 *अगर बिहार में रहने वाले किसी व्यक्ति का नाम गलती से काटा गया है ।तो वह व्यक्ति चुनाव आयोग के फैसले को अदालत में चुनौती दे सकता है।
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इंदौर मिलावट माफिया पर कलेक्टर का शिकंजा: 15 मामलों में 41 लाख जुर्माना

Indore, Madhya Pradesh:मिलावट माफिया पर कलेक्टर का शिकंजा जिसके चलते 15 मामलों में 41 लाख की पेनल्टी इंदौर खाद्य विभाग और कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर मिलावट माफिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई । अपर कलेक्टर न्यायालय ने अमानक खाद्य सामग्री बेचने वाले 15 मामलों में कुल 41 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। मिथ्या पब ओर अन्य स्थलों पर अमानक खाद्य सामग्री पर जिला प्रशासन का कड़ा प्रहार देखने को मिला कलेक्टर बोले- दबिश, सैंपलिंग और सीलिंग की कार्रवाई जारी रहेगी मीडिया से चर्चा में कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देशन में जिला प्रशासन इंदौर मिलावटखोरों पर लगातार कार्रवाई कर रहा है। हम ऐसे संस्थानों पर दबिश देते हैं, सैंपल लेते हैं। कमी पाए जाने पर सीलिंग और वैधानिक कार्रवाई करते हैं कोर्ट केस में भी sख्ती कलेक्टर ने बताया जो केस कोर्ट में दर्ज होते हैं, उन पर भी फॉलोअप कर दंड लगवाते हैं। आज ही 15 केसों में अपर कलेक्टर न्यायालय ने करीब 41 लाख का दंड लगाया है। यह पूरी राशि वसूल की जाएगी। अभियान आगे भी जारी मिलावट से मुक्ति के लिए हमारा अभियान निरंतर चलता रहेगा। मिलावटखोरों पर इसी तरह कार्रवाई जारी रहेगी कलेक्टर ने कहा खाद्य विभाग की टीम लगातार मावा, पनीर, घी, मसाले और अन्य खाद्य पदार्थों के सैंपल ले रही है। अमानक पाए जाने पर तत्काल लाइसेंस निरस्त कर FIR भी दर्ज की जा रही है।
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पटना के जॉब फेئر में युवा जुटे, 20 हजार नौकरियों का दावा

Patna, Bihar:नौकरी पाना आसान नही होता , नौकरी के लिए शिक्षा के साथ साथ खून भी जलाना पड़ता है । इसका उदाहरण दिखा आज पटना में जहाँ सरकार के जॉब फेयर में हजारों छात्र छात्राएं तपती धूप में घंटो कतार में खड़े होकर जॉब कंपनियों के सामने पहुंचने की जद्दोजहद में लगे थे। आप इन तस्वीरों को देखिये कि तपती दुपहरिया में ये छात्र कैसे ज्ञान भवन में घुसने के लिए अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे है। पटना के ज्ञान भवन में तीन दिवसीय जॉब फेयर का आज अंतिम दिन है। युवाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। बिहार सरकार की ओर से आयोजित इस रोजगार मेले में अब 5 हजार से अधिक युवा पहुंचे। हेल्थ सेक्टर पर आधारित इस जॉब फेयर में 100 कंपनियां शामिल हुई हैं। सरकार का दावा है कि मेले के जरिए करीब 20 हजार नौकरियां दी जाएंगी। बड़ी संख्या में पहुंचे युवाओं को संभालने के लिए सुरक्षाकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। ज्ञान भवन का पूरा परिसर सुबह से ही युवाओं की भीड़ से भर गया था। कोई हाथ में फाइल लिए कतार में खड़ा था तो कोई कंपनी के स्टॉल तक पहुंचने की कोशिश कर रहा था। युवाओं के चेहरे पर नौकरी की उम्मीद साफ दिख रही थी। कई अभ्यर्थियों ने कहा कि सरकारी नौकरी की तैयारी में लंबे समय बीत गए, लेकिन सफलता नहीं मिली। ऐसे में अब निजी क्षेत्र ही विकल्प बनता जा रहा है। इस बार के रोजगार मेले का मुख्य फोकस हेल्थ सेक्टर रखा गया है। इसमें अस्पताल, हेल्थ केयर, नर्सिंग और मेडिकल सपोर्ट से जुड़ी कंपनियों ने भाग लिया। राज्य सरकार के मुताबिक इस जॉब फेयर के लिए 62 हजार से अधिक युवाओं ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है। यही वजह रही कि पहले दिन ही ज्ञान भवन के बाहर लंबी लाइनें लग गईं। रोजगार मेले में सिर्फ नए युवा ही नहीं पहुंचे। ऐसी महिलाएं भी दिखीं जिन्होंने कई साल पहले एएनएम की ट्रेनिंग पूरी की थी, लेकिन सरकारी नौकरी नहीं मिलने के कारण अब निजी कंपनियों में अवसर तलाश रही हैं। कुछ महिलाएं अपने बच्चों के साथ इंटरव्यू देने पहुंचीं। उनका कहना था कि लंबे इंतजार के बाद अब निजी क्षेत्र से ही उम्मीद बची है। भीषण गर्मी के बावजूद युवाओं का उत्साह कम नहीं दिखा। कई अभ्यर्थी सुबह से शाम तक इंटरव्यू के इंतजार में परिसर में डटे रहे। बिहार की नई सम्राट सरकार ने युवाओं से वादा किया है कि एक साल में सात बार जॉब फेयर आयोजित किए जाएंगे। सरकार इसे रोजगार बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। हालांकि मेले में पहुंचे युवाओं की प्रतिक्रिया यह भी संकेत दे रही है कि सिर्फ आयोजन नहीं, बल्कि योग्यता के अनुरूप अवसर और अनुभव की बाधा को कम करना भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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पाकिस्तानी ISI से जुड़ाव के आरोप: तेलंगाना पुलिस ने गाजियाबाद के युवक को गिरफ्तार किया

New Delhi, Delhi:पाकिस्तानी आतंकियों और खुफिया एजेंसी ISI के लिए काम करने के आरोप में तेलंगाना पुलिस ने गाजियाबाद के युवक को गिरफ्तार किया स्लग ID- नीरज लोनी WT उत्तर प्रदेश के लोनी का रहने वाला जैद (22) जो की 2 महीने पहले गाजियाबाद से तेलंगाना होटल में वेटर की नौकरी के लिए गया था...जैद के पिता दिलीप खान ने बताया की उनको तेलंगाना पुलिस का फोन आया था...की आपके बेटे को गिरफ्तार कर लिया है.. पिता का रो रोकर बुरा हाल है..पिता के पेट का इलाज चल रहा है..घर में 2 बच्चे और हैं... पिता ने बताया की यूपी पुलिस भी इनसे पूछताछ की है.. ((आरोप है कि युवक ने यूपी समेत देश के कई मंत्रियों के मोबाइल नंबर जुटाकर ISI एजेंटों और पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजे थे))
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गाजीपुर मेडिकल कॉलेज में जटिल थायरॉयड कैंसर का सफल ऑपरेशन कर नई जिंदगी दी

Ghazipur, Uttar Pradesh:गाजीपुर गाजीपुर मेडिकल कॉलेज में बड़ी कामयाबी, जटिल थायरॉयड कैंसर का सफल ऑपरेशन, मरीज को मिली नई जिंदगी गाजीपुर मेडिकल कॉलेज में जटिल थायरॉयड कैंसर का सफल ऑपरेशन विश्व थायरॉयड दिवस पर ईएनटी विभाग की बड़ी उपलब्धि लंबे समय से दर्द और सूजन से परेशान था मरीज बीएचयू और टाटा कैंसर इंस्टीट्यूट में भी लिया गया था परामर्श लंबी वेटिंग के बाद मरीज पहुंचा गाजीपुर मेडिकल कॉलेज डॉ. आनंद प्रकाश यादव के नेतृत्व में हुई सफल सर्जरी डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक किया टोटल थायरॉयडेक्टॉमी ऑपरेशन डॉ. सबा जमाल और डॉ. फैज की रही अहम भूमिका ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत स्थिर, निगरानी में इलाज जारी प्राचार्य डॉ. आनंद मिश्रा बोले- पूर्वांचल को मिल रही विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवा गाजीपुर के महर्षि विश्वामित्र ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज में विश्व थायरॉयड दिवस के मौके पर मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग ने जटिल थायरॉयड कैंसर से पीड़ित मरीज का सफल ऑपरेशन कर बड़ी चिकित्सकीय उपलब्धि हासिल की है। बताया जा रहा है कि मरीज लंबे समय से गंभीर परेशानी से जूझ रहा था और बड़े संस्थानों में भी इलाज के लिए लंबा इंतजार बताया गया था। लेकिन गाजीपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने चुनौती को स्वीकार करते हुए सफल सर्जरी कर मरीज को नई उम्मीद दी है। मरीज गर्दन में सूजन, दर्द और दबाव की समस्या से लंबे समय से परेशान था। परिजनों के मुताबिक बीएचयू और टाटा कैंसर इंस्टीट्यूट में भी परामर्श लिया गया, लेकिन ऑपरेशन के लिए लंबा इंतजार बताया गया था। लगातार बढ़ती दिक्कतों के बाद मरीज ने महर्षि विश्वामित्र मेडिकल कॉलेज गाजीपुर के ईएनटी विभाग में संपर्क किया। ईएनटी विभाग में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने विस्तृत जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद मरीज को भर्ती किया और जटिल सर्जरी की योजना बनाई। विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद प्रकाश यादव के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक टोटल थायरॉयडेक्टॉमी ऑपरेशन किया। इस जटिल सर्जरी में डॉ. सबा जमाल और डॉ. फैज की भी अहम भूमिका रही। सफल ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत स्थिर बताई जा रही है और चिकित्सकीय निगरानी में उसका इलाज जारी है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आनंद मिश्रा ने पूरी टीम को बधाई देते हुए इसे मेडिकल कॉलेज की उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं और डॉक्टरों की समर्पित कार्यशैली का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। वहीं उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि गाजीपूर और पूर्वांचल के मरीजों को बड़े शहरों जैसी विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा यहीं उपलब्ध हो। बाइट- डॉ. आनंद मिश्रा, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज, गाजीपुर
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मथुरा रेलवे ट्रैक के पास किशोर हत्या: पुलिस 4 टीमें जांच में

Mathura, Uttar Pradesh:मथुरा. थाना हाईवे क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रेलवे ट्रैक के पास बने रेलवे ग्राउंड में बुधवार सुबह एक 13-14 वर्षीय किशोर का शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया. घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे. प्रथम दृष्टया मामला बेरहमी से हत्या का प्रतीत हो रहा है, क्योंकि मृतक के चेहरे और गले पर गंभीर चोट के निशान पाए गए हैं. पुलिस ने विधिक कार्यवाही करते हुए शव को तुरंत पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने खुद मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कमान संभाल ली है. एसएसपी ने बताया कि घटना के त्वरित खुलासे और आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस की 04 विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो विभिन्न पहलुओं पर काम कर रही हैं. घटनास्थल के आसपास लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को बारीकी से खंगाला जा रहा है ताकि घटना के समय और आरोपियों की मूवमेंट का पता लगाया जा सके. इसके साथ ही, पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर मृतक बच्चे की शिनाख्त (पहचान) करने के प्रयासों में जुटी है. एसएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आसपास के ही 04 से 05 संदिग्ध स्थानीय लड़कों को हिरासत में लिया है. पुलिस कस्टडी में इन संदिग्धों से लगातार पूछताछ की जा रही है. शुरुआती पूछताछ के क्रम में पुलिस के हाथ कुछ बेहद महत्वपूर्ण और पुख्ता जानकारियां लगी हैं, जिनके आधार पर टीमें आगे की अग्रिम कार्यवाही को अंजाम दे रही हैं. पुलिस का दावा है कि जल्द ही बच्चे की पहचान सुनिश्चित कर ली जाएगी और मुख्य अभियुक्त को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा.
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हरदा: गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीदी की मांग के चलते किसान धरने पर

Harda, Khedi Mahmudabad, Madhya Pradesh:हरदा में किसानों का धरना प्रदर्शन जारी, 28 घंटे से जिला पंचायत परिसर में डटे किसान हरदा जिला मुख्यालय पर किसानों का धरना प्रदर्शन लगातार जारी है। समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की मांग को लेकर किसान पिछले 28 घंटे से जिला पंचायत परिषद परिसर में धरने पर बैठे हुए हैं। किसानों का कहना है कि उनकी गेहूं की फसल का समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं होने से उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धरना प्रदर्शन को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। प्रशासन के निर्देश पर जिला पंचायत परिसर और आसपास पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बने। जानकारी के अनुसार किसानों और जिला प्रशासन के अधिकारियों के बीच अब तक तीन बार बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा。
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खरगोन की ठिबगांव शाखा से 41.58 लाख के गबन का खुलासा, कैशियर फरार

Khargone, Madhya Pradesh:खरगोन जिला सहकारी बैंक की ठिबगांव शाखा में उस समय हड़कम मच गया जब केशियर रितु गोयल दोपहर बाद केश काउंटर को लॉक कर फरार हो गई. शाखा में लेने देन को लेकर ग्राहक परेशान होने लगे. शाखा प्रबंधक ने केशियर को ढूंढने के साथ उसके दोनों मोबाइल पर संपर्क की कोशिश की तो स्विच ऑफ मिला. कभी समय तक अब केशियर के नहीं आने पर मुख्य शाखा को सूचना की गई. मुख्य शाखा से दल ने आकर केश काउंटर शुरू करने से पहले नगद राशि का मिलान किया तो उसने 41.58 लाख रुपये कम नगद राशि पाई गई. जो सीधे सीधे बैंक की अमानत में से गबन किया जाना सामने आया. जिला सहकारी बैंक की मुख्य शाखा MD संध्या रोकड़े ने कैशियर रितु गोयल और सहायक गणक त्रयम्बक वाणी और शाखा प्रबंधक राजेश राठौर को तत्काल निलंबित करते हुए पुलिस को लिखित में गबन की शिकायत करते हुए FIR और राशि वापसी के प्रयास के लिए पुलिस से दरखास्त की. पूरे मामले में MD ने कैशियर रितु गोयल बिना सूचना शाखा से गायब एवं मोबाइल भी बंद किए जाने से उसी के द्वारा गबन की आशंका जताई है. MD संध्या रोकडे ने विभागीय जांच टीम का गठन कर जांच भी शुरू करवा दी है वही भोपाल आपेक्स बैंक से भी विशेष दल जांच के लिए खरगोन पहुंच चुका है. केशियर रितु गोयल के बैंक से इस तरह फरार होने ओर 48 घंटे से अधिक समय से अपने घर से भी गायब होकर दोनों मोबाईल स्विच ऑफ होने से गबन की पूरी आशंका वही के द्वारा किया जाने की पुष्टि करता नजर आता है फिर भी बैंक एवं पुलिस दोनों की जांच से पूरे मामले का खुलासा होगा. इधर MD संध्या रोकडे का बयान गबन के दोषीयो पर होगी कार्यवाही, गबन राशि शतप्रतिशत वसूली की जाएगी. तीनो निलंबितों के खाते सीज कर दिए गए है. पुलिस भी मामले की जांच में जुटी.
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गांव में सड़क न होने से गर्भवती महिला को खाट पर अस्पताल पहुंचाया गया

Giridih, Jharkhand:जिले के पीरटांड़ प्रखंड अंतर्गत मधुबन पंचायत के दलुआडीह गांव में सड़क सुविधा नहीं रहने के कारण एक गर्भवती आदिवासी महिला को खाट पर लादकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ा। इसके बाद एंबुलेंस की मदद से महिला को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका सुरक्षित प्रसव कराया गया। घटना ने ग्रामीण इलाकों में सड़क और स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली को उजागर कर दिया है। जानकारी के अनुसार दलुआडीह निवासी गर्भवती महिला सुनीता सोरेन को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग से संपर्क कर एंबुलेंस बुलाने की कोशिश की, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस पहुंचने में असमर्थ रही। मजबूरी में परिजनों और ग्रामीणों ने महिला को खाट पर लिटाया और कठिन रास्तों से होते हुए मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां पहले से खड़ी एंबुलेंस से महिला को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका प्रसव हुआ। फिलहाल महिला अस्पताल में भर्ती बताई जा रही है। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी गई। ग्रामीणों ने बताया कि गांव तक सड़क नहीं होने के कारण अक्सर ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। यदि गांव तक सड़क बनी होती तो एंबुलेंस सीधे घर तक पहुंच सकती थी और मरीजों को समय पर इलाज मिल पाता। ग्रामीणों के अनुसार सड़क नहीं रहने से कुरुवारांड, दलुआडीह, डाहिया, ईटाबेड़ा, गाड़ापरोम, सहेरबेड़ा, जिरबेड़ा, सतकटिया और बोरवाबेड़ा समेत कई गांव प्रभावित हैं। ग्रामीण बुधन सोरेन, सुशील मुर्मू, सानो मरांडी, गोपाल मुर्मू, सोमरा मुर्मू, पतिराम मरांडी और बाबूलाल हांसदा समेत कई लोगों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन आज तक गांवों में सड़क जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं कराई गई। इधर, पीरटांड़ के बीडीओ मनोज कुमार मरांडी ने कहा कि पारसनाथ की तराई क्षेत्र के कुछ गांवों में अब भी पक्की सड़क नहीं बन पाई है, जिससे लोगों को परेशानी होती है। उन्होंने स्वीकार किया कि दलुआडीह की महिला को प्रसव पीड़ा होने पर खाट पर लादकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ा, जिसके बाद एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया। बीडीओ ने बताया कि संबंधित इलाका वाइल्ड लाइफ क्षेत्र में आता है, जिस कारण वहां पक्की सड़क निर्माण में तकनीकी और प्रशासनिक बाधाएं हैं। हालांकि समस्या के समाधान को लेकर आगे प्रयास किए जा रहे हैं।
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