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UMESH KUMAR SHARMAUMESH KUMAR SHARMAFollow11 Mar 2025, 04:26 pm

Amethi - सुरक्षा व कानून व्यवस्था बनाये रखने हेतु SP द्वारा कस्बा जायस में किया गया फ्लैग मार्च

Kamrauli, Uttar Pradesh:

अमेठी, आगामी त्यौहारों होली, रमजान एवं ईद के दृष्टिगत पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक द्वारा शांति, सुरक्षा व कानून व्यवस्था बनाये रखने तथा “मिशन शक्ति” नारी सुरक्षा, नारी सम्मान, नारी स्वावलंबन हेतु महिलाओं, बालिकाओं एवं आमजनमानस में सुरक्षा व विश्वास का वातावरण बनाने के उद्देश्य से पुलिस बल के साथ कस्बा जायस में भीड़भाड़ एवं संवेदनशील स्थानों पर फ्लैग मार्च, पैदल गश्त किया गया, तथा वहाँ पर मौजूद स्थानीय लोगों एवं दुकानदारों से वार्ता की गई.  इस दौरान क्षेत्राधिकारी तिलोई अजय कुमार सिंह एवं अन्य अधिकारी कर्मचारीगण मौजूद रहे ।

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गाडरवारा तहसील में प्रशासन का अतिक्रमण हटाओ अभियान, 12 एकड़ सरकारी भूमि मुक्त

Narsinghpur, Madhya Pradesh:एंकर-नरसिंहपुर जिले की गाडरवारा तहसील के ग्राम ठेका में प्रशासन का पीला पंजा जमकर गरजा, जहां राजस्व विभाग ने पुलिस बल और अमले के साथ बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। नायब तहसीलदार, पटवारियों और पुलिस जवानों की मौजूदगी में करीब 4 से 5 ट्रैक्टर और एक जेसीबी मशीन की मदद से वर्षों से कब्जे में बताई जा रही लगभग 12 एकड़ शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी हलचल का माहौल रहा। जानकारी के मुताबिक, एक ग्रामीण ने लंबे समय से जमीन पर कब्जा कर रखा था और वहां एक कच्चा मकान भी बना लिया था, जिसे प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। राजस्व अमले का कहना है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
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कानपुर–कासगंज के प्रेमी ने रेलवे डिब्बे जैसे घर बना लिया

ASARUN SINGHJust now
Farrukhabad, Uttar Pradesh:ताजमहल जैसा घर तो आपने देखा होगा, महलों जैसी कोठियां भी देखी होंगी... लेकिन क्या आपने कभी ऐसा घर देखा है जो बिल्कुल रेलवे के डिब्बे जैसा दिखाई देता हो? एक ऐसा घर, जिसे देखकर हर कोई कुछ पल के लिए ठिठक जाता है और सोचने पर मजबूर हो जाता है कि आखिर यह मकान है या फिर कोई ट्रेन का कोच! कानपुर और कासगंज के बीच रेलवे के प्रति एक शख्स का ऐसा जुनून देखने को मिला है, जिसने अपने सपनों के घर को ही रेलगाड़ी में तब्दील कर दिया। देखिए ये नजारा... दूर से देखने पर ऐसा लगता है मानो कोई ट्रेन खड़ी हो। घर के बाहर बाकायदा लिखा है—"कानपुर से कासगंज" और "कासगंज से कानपुर"। इतना ही नहीं, इस अनोखे घर की खिड़कियां भी बिल्कुल रेलवे कोच की तरह स्लाइडिंग बनाई गई हैं। घर के मालिक अश्वनी कुमार का कहना है कि बचपन से ही उन्हें रेलवे से बेहद लगाव रहा है। ट्रेन की सीटी, पटरियों की आवाज और rail यात्राओं की यादें उनके दिल में इस कदर बसी हैं कि उन्होंने अपने आशियाने को ही रेलगाड़ी का रूप दे दिया। इस जुनून की एक और दिलचस्प कहानी है। जब छोटी लाइन की ट्रेनें चलती थीं, तब डिब्बों का रंग लाल हुआ करता था। उस समय उन्होंने अपने पूरे घर को लाल रंग से रंगवा दिया। लेकिन जब ब्रॉड गेज के दौर में ट्रेन के डिब्बों का रंग नीला हुआ तो उन्होंने अपने घर के दरवाजों को भी नीला कर लिया। अजीबोगरीब मकानों के बारे में आपने बहुत कुछ सुना होगा। कोई अपने घर को महल का रूप देता है, कोई विदेशी डिजाइनों से सजाता है। लेकिन रेलवे के प्रति ऐसा दीवानापन शायद ही कहीं देखने को मिले, जहां एक व्यक्ति ने न सिर्फ ट्रेन से प्यार किया, बल्कि अपने घर को ही एक चलती-फिरती यादगार रेलगाड़ी में बदल दिया। रेलवे के प्रति इस अनोखे प्रेम की कहानी अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। जो भी इस घर को देखता है, उसकी नजरें कुछ देर के लिए यहीं ठहर जाती हैं。 . बाइट -- अश्वनी कुमार घर के मालिक
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महासमुंद पुलिस ने NAFIS से अपराध का पर्दाफाश शुरू किया

Mahasamund, Chhattisgarh:लोकेशन-महासमुंद ब्रेकिंग हाईटेक तकनीक NAFIS से लैस हुई महासमुंद पुलिस, फिंगरप्रिंट से अपराध का होगा पर्दाफाश, अपराध सिद्ध करने में मिलेगी पुलिस को मदद। अपराध स्थल पर उंगलियों के निशान सबसे पुख्ता सबूत, विशेषज्ञों ने 'चांस प्रिंट' (अदृश्य या आंशिक फिंगरप्रिंट) को सुरक्षित करने की तकनीकों की दी जानकारी। क्राईम इन्वेस्टिगेशन में तकनीकी एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम। क्राइम इन्वेस्टिगेशन एवं क्रिमिनल को पकड़ने में फिंगरप्रिंट का महत्व एवं उपयोगिता की फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ द्वारा दी गई जानकारी। जिले के सभी थाना चौकी में पदस्थ 45 पुलिस कर्मियों को फिंगरप्रिंट किट का उपयोग करना, प्रशिक्षण स्थल में ही डेमो के माध्यम से सिखाया गया।
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दिल्ली हाई कोर्ट ने Race Course की झुग्गियों को 1 जुलाई तक रोक दिया

Noida, Uttar Pradesh:दिल्ली के रेस कोर्स इलाके की झुग्गियों में रहने वाले लोगों को दिल्ली हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत दी है।हाई कोर्ट ने कहा है कि झुग्गियों में रहने वाले उन लोगों के घर 1 जुलाई तक नहीं तोड़े जा सकते, जिन्होंने अभी तक सरकार की ओर से दी गई वैकल्पिक रहने की जगह (पुनर्वास )को स्वीकार नहीं किया है और वहां शिफ्ट नहीं हुए हैं। भई राम कैंप, डीआईडी कैंप और मस्जिद कैंप के कुछ निवासियों को ने हाई कोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश को डिवीजन बेंच के सामने चुनौती दी थी। सिंगल बेंच ने सरकार के बेदखली के आदेश लर स्थानीय झुग्गी वालों को कोई राहत देने से इंकार कर दिया था।
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आयोध्या के कोरखाना मोहल्ले में छह वर्षों से सड़क-नाली की बदहाली: प्रशासन से जवाबी कार्रवाई की मांग

Ayodhya, Uttar Pradesh:राम नगरी अयोध्या वह शहर जिसे देश की आस्था की राजधानी कहा जाता है। जहां विकास के नाम पर हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के दावे किए जाते हैं। लेकिन इन्हीं दावों के बीच नगर क्षेत्र का एक मोहल्ला ऐसा भी है,जहां पिछले छह वर्षों से सड़क और नाली जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं पहुंच सकीं। बरसात में सड़कें कीचड़ में तब्दील हो जाती हैं, लोग घरों से निकलने के लिए जूझते हैं और बीमार पड़ने पर मरीजों को कंधों पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक के बाद एक जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को शिकायतें भेजी गईं, तब आखिर जिम्मेदार कहां थे? क्या विकास सिर्फ कागजों और घोषणाओं तक सीमित है, या फिर आम जनता की बुनियादी जरूरतें भी सरकार और जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता हैं? जी मीडिया की टीम जब इस हकीकत को कैमरे में कैद करने ग्राउंड जीरो उसी कोरखाना मोहल्ला में पहुंची, तो विकास के दावों और जमीनी सच्चाई के बीच का बड़ा फर्क साफ दिखाई दिया। कोरखाना मोहल्ले की बदहाल सड़कें और नालियां विकास की तस्वीर पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही हैं। यह वह इलाका है, जहां रहने वाले लोग पिछले छह वर्षों से सड़क और जलनिकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासी विवेक चंद्र सोनी का दावा है कि वर्ष 2020 से लेकर 2026 तक उन्होंने पार्षद, महापौर, विधायक, सांसद, नगर आयुक्त और जिलाधिकारी सहित सभी जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। नतीजा यह है कि आज भी मोहल्ले की सड़कें कीचड़ से पटी हैं और नालियों का अभाव लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। जी मीडिया की टीम जब ग्राउंड जीरो पर पहुंची तो हकीकत भी कुछ ऐसी ही दिखाई दी। कैमरे के साथ टीम को भी उसी कीचड़ और जलभराव से होकर गुजरना पड़ा, जिससे स्थानीय लोग रोजाना गुजरते हैं। लोगों का कहना है कि बरसात के दिनों में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। अगर कोई बीमार पड़ जाए तो एंबुलेंस तक मोहल्ले में नहीं पहुंच पाती और मरीज को पैदल उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब लगातार छह वर्षों तक शिकायतें होती रहीं, तब इलाके के जनप्रतिनिधि आखिर कहां थे?
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बलरामपुर दरगाह भूमि विवाद: दानपत्र से 36 बीघा का हस्तांतरण जाँच की मांग

Balrampur, Uttar Pradesh:बलरामपुर जिले के शिवनगर स्थित दरगाह पीर हनीफ की करीब 36 बीघा भूमि को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। दरगाह से जुड़े कई लोगों ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि धार्मिक ट्रस्ट की भूमि को नियमों के विपरीत दानपत्र के माध्यम से निजी स्वामित्व में स्थानांतरित करने का प्रयास किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। सोमाहर को प्रशासन को दिए गए ज्ञापन में गाजुद्दीन खां, मोहम्मद कुतुबुद्दीन, मुजीब अशरफ, मोहम्मद सऊद और मोहम्मद खुर्शीद अहमद ने दावा किया कि ग्राम पंचायत शिवनगर में स्थित गाटा संख्या 812, 827 और 828 की भूमि वर्षों से दरगाह पीर हनीफ की संपत्ति के रूप में दर्ज रही है। आरोप है कि दरगाह के सर्वराकार (देखरेखकर्ता) रहे मोहम्मद शाहनेवाज शाह ने कथित रूप से राजस्व अभिलेखों में अपना नाम दर्ज कराकर भूमि में हिस्सेदारी हासिल कर ली। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि किसी धार्मिक स्थल के सर्वराकार का अधिकार केवल संपत्ति की देखरेख तक सीमित होता है और वह भूमि का मालिक नहीं माना जाता और न ही उसे संपत्ति के हस्तांतरण का अधिकार होता है। इसके बावजूद कथित रूप से अभिलेखों में बदलाव कर जमीन पर व्यक्तिगत अधिकार स्थापित करने की कोशिश की गई। ज्ञापन के अनुसार 1 अप्रैल 2026 को मोहम्मद शाहनेवाज शाह द्वारा अपने नाबालिग पुत्र मोहम्मद फैज के नाम दानपत्र निष्पादित किया गया, जिसे 2 अप्रैल को उपनिबंधक कार्यालय में पंजीकृत भी करा लिया गया। इसके बाद 20 मई को भूमि के नामांतरण का आदेश पारित होने की बात सामने आई। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि यह पूरी प्रक्रिया संदिग्ध परिस्थितियों में हुई और इसमें दस्तावेजों में हेरफेर किए जाने की आशंका है। मामले को लेकर शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि दानपत्र, नामांतरण आदेश और संबंधित राजस्व अभिलेखों की गहन जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो धार्मिक ट्रस्ट की संपत्ति निजी हाथों में चली जाएगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजस्व कर्मियों और अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी प्रक्रिया पूरी होना संभव नहीं है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की कि जांच पूरी होने तक संबंधित भूमि पर किसी भी प्रकार के हस्तांतरण या स्वामित्व परिवर्तन की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। साथ ही दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए। उधर, प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। उपजिलाधिकारी हेमंत गुप्ता ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है और पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। दरगाह की जमीन से जुड़ा यह मामला अब प्रशासनिक जांच के दायरे में पहुंच गया है। शिकायतकर्ताओं को उम्मीद है कि जांच के बाद वास्तविक स्थिति सामने आएगी.
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जौनपुर के खेत विवाद में बुजुर्ग की मौत, चार गिरफ्तार

Jaunpur, Uttar Pradesh:जौनपुर में खेत की मिट्टी को लेकर खूनी विवाद, बुजुर्ग की मौत के बाद चार गिरफ्तार केराकत थाना क्षेत्र के धरौरा गांव में खेत में मिट्टी डालने को लेकर शुरू हुआ विवाद एक दर्दनाक घटना में बदल गया। गांव के दो पड़ोसी एवं आपस में पट्टीदार परिवारों के बीच कहासुनी के बाद मारपीट हो गई, जिसमें एक बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतक की पहचान रामदुलार सरोज (65 वर्ष) के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार विवाद के दौरान हुई मारपीट में उन्हें गंभीर चोटें आईं। घायल अवस्था में उन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। मृतक के परिजनों की तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले में नामजद चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है तथा कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है, हालांकि स्थिति पूरी तरह पुलिस नियंत्रण में बताई जा रही है।
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झांसी के टहरौली-उल्दन में आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई, 92.20 लीटर अवैध शराब बरामद

Jhansi, Uttar Pradesh:एंकर- झांसी के टहरौली और उल्दन क्षेत्र में अवैध शराब बनाने वालों के खिलाफ आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। भारी पुलिस बल के साथ टीम ने कांशीराम कॉलोनी, ग्राम बामोर और ग्राम बिजना कबूतरा डेरा में एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान शराब बनाने वाले मौके से भाग निकले। आबकारी विभाग की टीम ने छापेमारी के दौरान ड्रमों में भरी लगभग 1200 किलोग्राम लहन को मौके पर ही नष्ट कर दिया। साथ ही मौके से 80 लीटर अवैध कच्ची शराब और 12.20 लीटर अवैध देशी शराब समेत कुल 92.20 लीटर अवैध शराब बरामद की। शराब बनाने वाले उपकरणों और भट्टियों को भी तोड़ दिया गया। आबकारी अधिनियम के तहत अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों पर कुल 3 केस दर्ज किए गए हैं। एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसे जेल भेज दिया गया है।
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महासमुंद: ऑडिशा से गिरफ्तार गांजा तस्कर के खुलासे, मामलों में एंड टू एंड कार्रवाई

Mahasamund, Chhattisgarh:लोकेशन-महासमुंद ब्रेकिंग 10 माह से फरार गांजा तस्करी का मुख्य अंतरराज्यीय आरोपी कंभुपानी बिशोई ओडिशा से गिरफ्तार।महासमुंद पुलिस को एंड टू एंड विवेचना में फरार आरोपी वाहन मालिक को पकड़ने में मिली सफलता।घटना दिनांक 22.07.2026 को आरोपी वाहन चालक/ गांजा परिवहनकर्ता अमूल्य बिश्नोई द्वारा तस्करी करते समय वाहन से बाईक सवार को मारी थी टक्कर और फिर वाहन छोड़कर हो गया था फरार।वाहन में 190 किलोग्राम (01 क्विंटल 90 किलो ग्राम) गांजे की जा रही थी तस्करी, पुलिस द्वारा किया गया था जब्त।02 माह पूर्व दिनांक 07.04.2026 को गांजा परिवहनकर्ता अमूल्य बिशोई को गंगापुर जिला गंजाम उड़ीसा से किया गया था गिरफ्तार।थाना खल्लारी में आरोपी के विरुद्ध NDPS एक्ट की धारा 20(ख) और BNS की धाराओं 281, 125(A), 125(B) एवं 106(1) के तहत मामला किया गया था दर्ज।उड़ीसा से लाया जा रहा था गांजा, अन्य राज्यों में थी खपाने की योजना।तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस टीम ने चिल्का गंजाम (ओडिशा) में दबिश देकर मुख्य आरोपी को धर दबोचा।गांजा तस्करी के कुल 36 प्रकरणों में अब-तक एंड-टू-एंड कार्यवाही करते हुए सोर्स से लेकर डेस्टिनेशन पाॅईट तक पूरे चैनल को तोड़ने में महासमुंद पुलिस को मिल चुकी है सफलता।
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ATS की मधुबनी गिरफ्तारी: पाकिस्तानी हैंडलर से जुड़े मौलाना गिरफ्तार

Madhubani, Bihar:ATS की मधुबनी में धमक, पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में रहने वाला मौलाना को किया गिरफ्तार। बिहार ए.टी.एस. और मध्यप्रदेश ए.टी.एस दो राज्यों की संयुक्त कार्रवाई में एक संदिग्ध हुआ गिरफ्तार। आतंकवाद निरोधी दस्ता द्वारा मध्य प्रदेश और बिहार ए.टी.एस. के साथ राष्ट्र विरोधी और कट्टरपंथी गतिविधियों में संलिप्त एक संदिग्ध को मधुबनी नगर थाना क्षेत्र के भौरा मुहल्ला से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार सख्श की पहचान पंडौल थाना क्षेत्र के सरिसव पाही नव टोल गांव निवासी 56 वर्षीय इजहारुल हक पिता स्वर्गीय हाजी अब्दुल गफूर के तौर पर हुई है। वर्तमान में वह मधुबनी नगर थाना के राघोनगर स्थित मदरसा नूरे मोहम्मदिया में निवास कर रहा था। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश एस.टी.एफ. थाना कांड संख्या 06/2026, दिनांक 12.06.2026, धारा 152 भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा धारा 13(1)(b) एवं 18 गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम, 1967 (UAPA) के तहत दर्ज मामले के अनुसंधान के क्रम में की गई है। प्रारंभिक जांच एवं उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों में अभियुक्त कथित रूप से एक पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में होने की बात सामने आई है। संयुक्त छापामारी के दौरान अभियुक्त के कब्जे से दो एंड्रॉयड मोबाइल फोन (Redmi Note 5 एवं OPPO) बरामद किए गए हैं। बरामद मोबाइल फोन एवं अन्य डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है तथा मामले की विस्तृत जांच जारी है। भोपाल एटीएस ने आरोपी को मधुबनी कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड में लेकर भोपाल के लिए रवाना हो गई। पुलिस सूत्रों की माने तो इज़हारुल हक दारुल उलेमा देवबंद उत्तरप्रदेश से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूर्ण किया था। जिसके बाद वो एक ईमाम मेहंदी नामक व्यक्ति के संपर्क में चला गया, सूत्रों के अनुसार इज़हारुल हक गूगल मीट के जरिए अपने आका के साथ मीटिंग करता था, इसके साथ ही वो कई बार कर्नाटक और मुंबई मिलने भी गया। इज़हारुल हक हर 3 महीने पर बिहार से बाहर जाता था, सूत्रों की माने तो इसने पटना से पासपोर्ट भी बनवाया था, ये मदरसे में पढ़ने वाले बच्चे को कट्टर बनाने का भी काम करता था, मदरसे के बारे में बताया जाता है इसकी फंडिंग विदेश से की जाती थी। बहरहाल ATS इसके मोबाइल को खंगाल रही है ताकि इसके राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का खुलासा हो सके। नेपाल बॉर्डर से सटे होने के कारण मधुबनी जिला से पूर्व में भी कई आतंकी गिरफ्तार हो चुका है। नेपाल की खुली सीमा का आतंकी और विदेशी संदिग्ध गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करते रहे हैं।
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वाराणसी के परिषदीय विद्यालय गर्मी की छुट्टियों के बाद पहली बार खुले, तिलक-आरती से स्वागत

JPJai Pal13m ago
Varanasi, Uttar Pradesh:वाराणसी में आज से खुले परिषदीय विद्यालय गर्मी की छुट्टियों के बाद पहली बार खुला स्कूल तिलक व आरती से हुआ बच्चों का स्वागत. वाराणसी में गर्मी की छुट्टियों के बाद आज 16 जून से प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में पठन-पाठन हुआ शुरू. महमूरगंज के कम्पोजिट विद्यालय में अनोखे अंदाज में हुआ नौनिहालों का स्वागत, स्कूलों में उत्सव जैसा माहौल. पहले दिन स्कूल पहुंचने पर बच्चों को लगाया गया तिलक, उतारी गयी आरती. छात्रों का उत्साह बढ़ाने के लिए फूलों की हुई वर्षा. भीषण गर्मी के मद्देनजर जून महीने में सुबह 7:30 से 10:30 बजे तक ही संचालित होंगे स्कूल. शिक्षकों को दोपहर 1:30 बजे तक रुककर निपुण तालिका और अन्य प्रशासनिक कार्य निपटाने के निर्देश. स्कूल चलो अभियान के तहत शत-प्रतिशत नामांकन और उपस्थिति पर रहेगा शिक्षा विभाग का पूरा जोर.
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नेशनल हाईवे पर देर रात भीषण हादसा: वैगनआर ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकराकर मौत

Baibahamunnusingh, Uttar Pradesh:नेशनल हाईवे पर देर रात हुए एक भीषण सड़क हादसे में वैगनआर कार पीछे से ट्रैक्टर-ट्रॉली में जा घुसी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार ट्रॉली में फंस गई और चालक को हादसे की जानकारी न होने पर ट्रैक्टर-ट्रॉली वैगनआर को करीब दो किलोमीटर तक घसीटते हुए मैगलगंज थाना क्षेत्र की ओर ले गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चपरतला में मौजूद लोगों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली को रुकवाया, तब हादसे की भयावहता सामने आई। बताया जा रहा है कि घटना हरदोई जनपद के जहानीखेड़ा क्षेत्र में हुई । सूचना मिलते ही मैगलगंज पुलिस मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू कराया। हादसे में पति और पत्नी और उनकी बेटी तीन मौत जबकि तीन गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को पहले पसगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया, जहां से हालत नाजुक होने पर उन्हें शाहजहांपुर रेफर कर दिया गया। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। मृतकों और घायलों की पहचान की प्रक्रिया जारी है.
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पटना के कोचिंग विवाद: तेजस्वी ने सीबीआई से जांच की मांग

Patna, Bihar:पटना में चर्चित कोचिंग संस्थानों के बीच  विवाद अब पूरी तरह से राजनैतिक रंग ले लिया है नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को एक पत्र लिखकर पटना के प्रसिद्ध फैज़ल खान और  ज्ञान बिंदु कोचिंग संस्थान से जुड़े इस गंभीर मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो  को सौंपने की मांग की है तेजस्वी यादव ने अपने पत्र में जनभावनाओं का हवाला देते हुए कहा है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराया जाना बेहद आवश्यक है ताकि सच सबके सामने आ सके तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा सर्वविदित है कि विगत दिनों पहले बिहार की राजधानी स्थित दो कोचिंग संस्थानों के आपसी विवाद उपरांत कथित रूप से मारपीट तोडफोड एवं गोलीबारी की घटना घटित हुई जिसमें दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे पर आरोप लगाए गए तथा कोचिंग संचालक रोशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की संदेहास्पद स्थिति में नेपाल में मृत्यु होने की खबर फैलने के बाद यह मामला और गंभीर हो चुका है। इस मामले में सरकार और राज्य पुलिस की कार्यशैली और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न चिन्ह लग रहे है। मुख्यमंत्री से पत्र लिख अनुरोध किया है कि जनभावना को देखते हुए इस मामले को C.B.I के सुपुर्द कर दिया जाए जिससे कि इसकी निष्पक्ष, प्रभावी एवं गहराई से जांच हो सके तथा जांचोपरांत दोषी आरोपियों पर समुचित विधिसंगत कार्रवाई सुनिश्चित हो।
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अलवर अतिक्रमण हटाओ अभियान: क्या कार्रवाई निष्पक्ष?

Alwar, Rajasthan:अलवर शहर में सोमवार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई उस वक्त विवादों में घिर गई, जब यूआईटी और नगर निगम का संयुक्त दस्ता बस स्टैंड के पास पहुंचा और कार्रवाई के दौरान एक महिला का हाई-वोल्टेज विरोध पूरे घटनाक्रम का केंद्र बन गया। महिला का चलती जेसीबी पर चढ़ गई , ड्राइवर को नीचे खींचने का प्रयास किया , इस माहौल ने न सिर्फ भीड़ को उग्र किया, बल्कि प्रशासन की कार्यशैली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए। घटना के दौरान यूआईटी तहसीलदार मानवेंद्र जायसवाल, नगर निगम अतिक्रमण अधिकारी निशा लखानी और एक्सईएन धर्मेन्द्र मीणा सहित अधिकारी मौके पर मौजूद थे, लेकिन हालात इतने बिगड़ गए कि कुछ देर के लिए नियंत्रण कमजोर पड़ता नजर आया। भीड़ की हूटिंग और पत्थरबाजी ने साफ कर दिया कि यह सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि अंदर ही अंदर पनप रहा पक्षपात पूर्ण कार्यवाही पर असंतोष था । सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई निष्पक्ष है? महिला ने सीधे आरोप लगाया कि प्रशासन केवल उसके ढाबे को निशाना बना रहा है, जबकि आसपास कई अन्य दुकानों के आगे भी अवैध निर्माण मौजूद हैं। यह आरोप कोई नया नहीं है, बल्कि शहर में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि कार्रवाई अक्सर “चयनात्मक” होती है। एक शॉप संचालक हनी ने आरोप लगाया कि सिर्फ उसकी दुकान का पटाव तोड़ा जबकि आसपास की दुकानों को छोड़ दिया गया । हकीकत यह भी है कि अलवर के मुख्य बाजारों में खासकर बजाजा बाजार में नालों के ऊपर पक्की दुकानें आज भी धड़ल्ले से खड़ी हैं। इन बड़े और स्थायी अतिक्रमणों को हटाने की हिम्मत नगर निगम और यूआईटी अब तक नहीं जुटा पाए हैं। ऐसे में छोटे दुकानदारों या ढाबा संचालकों पर कार्रवाई कहीं न कहीं “आसान टारगेट” की तरह नजर आती है। शहर को जाम और अवैध कब्जों से मुक्त करने का दावा जरूर किया जा रहा है, लेकिन बिना ठोस प्लानिंग के चलाया गया यह अभियान सवालों के घेरे में है। अगर अलवर को इंदौर की तर्ज पर साफ-सुथरा और व्यवस्थित शहर बनाना है, तो सिर्फ जेसीबी चलाना काफी नहीं होगा—जरूरत है एक पारदर्शी, समान और दीर्घकालिक रणनीति की। जब तक कार्रवाई में समानता नहीं दिखेगी और बड़े अतिक्रमणों पर भी सख्ती नहीं होगी, तब तक “पीला पंजा” सिर्फ दिखावा ही माना जाएगा—और ऐसे विरोध आगे भी सामने आते रहेंगे.
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