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बीकानेर गणगौर प्रतिमा की सुरक्षा: करोड़ों के आभूषणों के बीच श्रद्धालुओं की भीड़
RVRaunak Vyas
Mar 23, 2026 10:09:45
Bikaner, Rajasthan
राजस्थान के बीकानेर में नवरात्रि में गणगौर के दौरान माँ पार्वती की एक ऐसी प्रतिमा है जिसे रखा जाता है विशेष सुरक्षा पहरे के बीच क्योंकि माँ के श्रृंगार में ऐसे अनमोल गहने है जिनकी कीमत करोड़ो में है जहा महज नवरात्र में महज दो दिन के लिए इस प्रतिमा को खुले चौक में पंडाल में लोगो के विशेष दर्शन के लिए रखा जाता है जिसके दर्शन के लिए उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़ देवी माँ क्यों है सुरक्षा के पहरे है ,क्यों इतने पुलिस कर्मी यहाँ हाथो में बन्दुक लेकर देवी माँ की प्रतिमा की सुरक्षा में पहरा दे रहे है जी हाँ आप सोच रहे होंगे ऐसा क्या है जो यहाँ ऐसे देवी माँ को सुरक्षा प्रदान की जाती है तो हम आपको बताते है की राजस्थान के बीकानेर में नवरात्र के दिनों में होने वाले गणगौर के दौरान यहाँ की सैकड़ो साल पुराणी माँ गणगौर जिन्हें माँ पार्वती का रूप कहा जाता है उनकी अनमोल प्रतिमा जिस पर क्या हीरे जेवरात, कुंदन और सोने के आभूषण जिनकी कीमत करोडो में है इस प्रतिमा की सुरक्षा के लिहाज से विशेष सुरक्षा दी जाती है । इस प्रतिमा की विशेषता ये है की ये 150 साल पुराणी है जिसे ऊपर से नीचे तक आभूषणों से श्रृंगारित किया हुआ है नवरात्र के दिनों में तीज और चौथ के दिन महिलाये पुत्र प्राप्ति के लिए माँ गणगौर के आगे नृत्य करती है और माँ गणगौर जो की पार्वती का रूप है इनके दर्शन भी साल में एक ही बार होते है. 150 साल पहले की बात है की देशनोक की रहने वाली उदयमल के कोई पुत्र नहीं था उन दिनों माँ गौरी की पूजा सिर्फ राजा ही किया करते थे उन्होंने राजा के घर जा कर माँ गणगौर (पार्वती) की पूजा की और ठीक एक साल बाद उन्हें पूर्त रत्न की राती हुई, पुत्र का नाम चांदमल रखा गया और बाद में जिस गणगौर की पूजा की गयी उसका नाम चांदमल की गणगौर रखा गया. उसके बाद यह परम्परा शुरू हुई जो लगभग पिछले 150 साल से चली आ रही है. इस अवसर पर मेला लगता है महिलाये पुत्र प्राप्ति के लिए नृत्य करती है और मन्नत मांगती है. माँ गणगौर..का यह दरबार साल में सिर्फ दो दिन ही लगता है इस पुण्य पर्व पर हर कोई मंगलकामना के लिए माँ के दर्शन को आता है,देश विदेश से लोग इस दिन कलिए इकठ्ठा होते है. इस गणगौर की विशेषता ये है की इस गणगौर के पाँव है ये अपने आप में माँ गणगौर की एक मात्र अनोखी प्रतिमा है जिसमे पाँव बने है. माँ पूजा अर्चना में जिन लोगो की मन्नत पूरी होती है वो महिलाये माँ को चुनरी ओढाती है. और माँ के चरणों में नारोयलऔर पताशे का प्रशाद चढाते है जिनकी मन्नत माँ पूरी करती है वे अपने बच्चो को धोकदिलवाने लाते है और अपने पुत्र और पुत्री की दीर्घायु की कामना करते है. महिलाये माँ के आगे देर राततक घुमर नृत्य करती है माँ की प्रतिमा के पास माँ के पुत्र की भी पूजा की जाती है उसे भी गहनों से सजायाजाता है महिलाये उस पुत्र की पूजा करती है. ताकि उन्हें भी माँ गणगौर जैसा ही पुत्र मिल। बीकानेर की यह गणगौर प्रतिमा केवल पूजा का केंद्र नहीं है, बल्कि संस्कृति और श्रद्धा का प्रतीक है। विशेष सुरक्षा और भव्य श्रृंगार इसे और भी अनमोल बनाते हैं। यह पर्व हमें हमारी परंपरा, विश्वास और समर्पण का अहसास कराता है।
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