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Patiala147105

छात्रों को चेतावनी: 18 वर्ष से कम के लिए दोपहिया वाहन चलाने पर 25000 जुर्माना

Jul 27, 2024 16:05:13
Patran, Punjab

पातडां पुलिस ने 1 अगस्त से 18 वर्ष से कम के छात्रों के लिए दोपहिया वाहन चलाने के संबंधी नए कानून को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए स्पार्कलिंग किड्स स्कूल में सेमिनार किया। थाना प्रमुख यशपाल शर्मा ने इस अवसर पर छात्रों से अपील की कि 18 वर्ष से कम वाले दोपहिया वाहन न चलाएं। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार ने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। नए कानून के तहत, यदि 18 साल से कम उम्र का बच्चा पकड़ा जाता है तो वाहन मालिक व अभिभावकों पर 25000 का जुर्माना व 3 साल की सजा होगी।

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SKSunny Kumar
Mar 13, 2026 10:10:03
Patna, Bihar:पटना में घरेलू एलपीजी गैस की आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। जिलाधिकारी पटना के निर्देश पर गैस सिलेंडर से जुड़ी शिकायतों के निवारण और जमाखोरी रोकने के लिए 28 धावा दलों का गठन किया गया है। इनमें प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, आपूर्ति निरीक्षक और सहायक जिला आपूर्ति पदाधिकारी को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है, जो उपभोक्ताओं और नियंत्रण कक्ष से प्राप्त शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई कर रहे हैं। इसके साथ ही गैस एजेंसी क्षेत्रों को सेक्टर, जोनल और सुपर जोनल में बाँटते हुए दंडाधिकारियों की तैनाती की गई है, ताकि आपूर्ति व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा सके। घरेलू एलपीजी गैस से संबंधित शिकायतों के लिए जिला स्तर पर हेल्पलाइन नंबर 0612-2219810 भी जारी किया गया है, जहां आम लोग सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक अपनी शिकायत या सूचना दे सकते हैं। जिलाधिकारी ने जिला नियंत्रण कक्ष का निरीक्षण भी किया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि उपभोक्ताओं की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि ब्लैकमार्केटिंग, जमाखोरी या अधिक कीमत पर गैस बेचने की शिकायत मिलने पर संबंधित एजेंसियों और दोषियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की जाएगी। जिला प्रशासन का कहना है कि उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए पूरा प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह सजग और तत्पर है।
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VMVimlesh Mishra
Mar 13, 2026 10:09:25
Mandla, Madhya Pradesh:मण्डला - जिले में तेज रफ्तार का कहर एक बार फिर देखने को मिला है। यहाँ एक तेज रफ्तार हाईवा की टक्कर से तीन साल की मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने सड़क पर जाम लगा दिया और हंगामा कर रहे हैं। मामला मण्डला जिले की ग्राम पंचायत सागर के पोषक ग्राम बमोरी का है, जहाँ शुक्रवार को एक तेज रफ्तार हाईवा ने सड़क किनारे खड़ी तीन वर्षीय मासूम आकृति यादव को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मासूम की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि घटना स्थल के पास ही आंगनबाड़ी केंद्र है, जहाँ बच्चों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। इसके बावजूद इस सड़क पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार से ग्रामीण लंबे समय से परेशान थे। हादसे के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क पर जाम लगा दिया और प्रशासन से यहाँ स्पीड ब्रेकर बनाने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते सुरक्षा के इंतजाम किए जाते तो शायद मासूम की जान बच सकती थी। वहीं घटना के बाद भाग रहे हाईवा को ग्रामीणों ने तिदनी टोल प्लाजा के पास पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है।
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RRRakesh Ranjan
Mar 13, 2026 10:09:08
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ADArvind Dubey
Mar 13, 2026 10:08:33
Obra, Uttar Pradesh:Anchor: सोनभद्र के ओबरा तहसील परिसर में अधिवक्ताओं का आक्रोश देखने को मिला। अधिवक्ताओं संघर्ष समिति के बैनर तले जुटे अधिवक्ताओं ने तहसील प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए विरोध जताया। अधिवक्ताओं का आरोप है कि तहसील के प्रशासनिक अधिकारी सरकारी कार्यों में लापरवाही बरत रहे हैं और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी को लेकर अधिवक्ताओं ने अपनी दस सूत्रीय मांगों को लेकर प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद की और ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। VO: दरअसल सोनभद्र के ओबरा तहसील परिसर में अधिवक्ता संघर्ष समिति के बैनर तले अधिवक्ता एकजुट होकर तहसील प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे। इस दौरान अधिवक्ताओं ने प्रशासनिक अधिकारियों पर सरकारी कार्यों में लापरवाही बरतने और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि लंबे समय से विभिन्न समस्याओं को लेकर अधिवक्ता परेशान हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। इसी के विरोध में अधिवक्ता संघर्ष समिति ने अपनी दस सूत्रीय मांगों को लेकर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए समस्याओं के समाधान की मांग की है。
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RSRAKESH SINGH
Mar 13, 2026 10:06:56
Chapra, Bihar:सारण जिला प्रशासन को मशरक और पानापुर क्षेत्र में हुई कुछ संदिग्ध मौतों की जानकारी मिलने के बाद पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन के अनुसार मशरक तख्त टोला निवासी संतोष महतो की 11 मार्च को तबीयत खराब होने के बाद मृत्यु हो गई। परिजनों ने बताया कि वह कई दिनों से बीमार थे और भोजन भी नहीं कर रहे थे। इलाज के लिए उन्हें पहले सीएचसी मशरक ले जाया गया, जहां से सदर अस्पताल छपरा रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। इसी क्रम में पानापुर प्रखंड के दुबौली निवासी धर्मेंद्र राय की भी पटना में इलाज के दौरान 12 मार्च को मौत होने की सूचना मिली। परिजनों की सूचना पर शव का पोस्टमार्टम सदर अस्पताल छपरा में कराया गया है और विसरा को फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है, जिससे मौत के सही कारण का पता चल सके। वहीं मशरक थाना क्षेत्र में 26 लीटर देसी शराब बरामदगी के मामले में पकड़े गए दो भाइयों में से एक रघुवर महतो की 13 मार्च की सुबह इलाज के दौरान सदर अस्पताल छपरा में मृत्यु हो गई। इसी दिन मशरक पूरब टोला निवासी पंकज सिंह की मौत की भी सूचना मिली है, जिनके परिजनों से संपर्क कर पोस्टमार्टम कराने की प्रक्रिया की जा रही है। प्रशासन ने बताया कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव और वरीय पुलिस अधीक्षक विनीत कुमार ने स्वयं पानापुर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। सारण पुलिस और मद्य निषेध विभाग की टीम लगातार अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। 11 और 12 मार्च को पानापुर और मशरक के विभिन्न गांवों में 160 स्थानों पर छापेमारी की गई, जिसमें 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया और बड़ी मात्रा में देसी शराब नष्ट की गई। साथ ही जिले के सभी अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया गया है, ताकि किसी भी संदिग्ध मरीज की सूचना तुरंत प्रशासन को दी जा सके। वही इस घटना के बाद मशरक थाना में पुलिस और उत्पाद विभाग के अधिकारियों की मैराथन बैठक जारी है, सारण में अब तक कुल 5 लोगो की संदिग्ध मौत हो चुकी है प्रशासन ने अब तक मात्र तीन मौत की पुष्टि प्रेस नोट के माध्यम से जारी कर दी है।
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AYAMARJEET YADAV
Mar 13, 2026 10:06:40
Sasaram, Bihar: खबर सासाराम से है। सासाराम में आज भी गैस एजेंसी खुलने से पहले ही उपभोक्ता सुबह से ही कतार में है। कोई 5:00 बजे सुबह से खड़ा है, तो कोई उसके बाद लाइन में लगा है। सैकड़ो लोग LPG सिलेंडर लेकर अलग-अलग गैस एजेंसी के दरवाजे पर खड़े हैं। लोगों का कहना है कि रमजान का महीना चल रहा है। ऐसे में गैस सिलेंडर नहीं रहने से काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। बता दे कि इन दिनों ईरान-इजरायल युद्ध को देखते हुए एलपीजी गैस के किल्लत की अफवाह फैल गई है। चुकी प्रतिदिन एजेंसी में ट्रैकों पर भरकर गैस सिलेंडर आ रहे हैं। इसके बावजूद भीड़ देखी जा रही है। सभी लोग चाह रहे हैं कि जो भी खाली सिलेंडर उसके घर में है, उसे भर कर रख ले। इसी वजह से अपवाह के कारण यह भीड़ देखने को मिल रही है। महिलाएं भी सिलेंडर लेकर कतर में खड़ी है।
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RSRUPENDRA SHRIWASTVA
Mar 13, 2026 10:06:27
Patna, Bihar:राज्यसभा में RJD सांसद संजय यादव ने कहा कि भारत में स्वास्थ्य बीमा कंपनिया का वार्षिक प्रीमियम संग्रह लगभग 3 लाख 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक का है लेकिन वास्तविकता यह है कि जब अस्पताल का बिल आता है और बीमा क्लेम किया जाता है, तो बीमा कंपनियाँ विभिन्न तकनीकी नियमों और प्रावधानों का हवाला देकर कुल बिल का एक बड़ा हिस्सा काट देती हैं। इससे मरीज और उसके परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।स्वास्थ्य बीमा का उद्देश्य नागरिकों को बीमारी के समय आर्थिक सुरक्षा देना है, न कि नियमों की जटिलता में उन्हें उलझाना। यदि पॉलिसी में कमरे की सीमा निर्धारित होती है और मरीज उससे अधिक किराए वाले कमरे में भर्ती होता है, तो केवल कमरे का अंतर ही नहीं बल्कि पूरे अस्पताल बिल पर अनुपातिक कटौती (Proportionate Deduction) कर दी जाती है। अस्पताल बिल में शामिल कई आवश्यक चिकित्सा वस्तुओं जैसे ग्लव्स, डिस्पोजेबल आइटम, सैनिटाइज़र इंजेक्शन आदि को “नॉन-पेयेबल” बताकर क्लेम से हटा दिया जाता है। TPA या पैकेज रेट के आधार पर कटौती कई मामलों में बीमा कंपनियाँ या थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर अस्पताल से पैकेज रेट तय कर देते हैं, जिसके कारण वास्तविक बिल का पूरा भुगतान नहीं किया जाता। संजय यादव ने सुझाव के साथ सरकार से मांग करते हुए कहा कि:- 1. स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों में अनुपातिक कटौती (Proportionate Deduction) को समाप्त किया जाए। 2. अस्पताल बिल में शामिल आवश्यक चिकित्सा वस्तुओं को नॉन-पेयेबल सूची से हटाया जाए। 3. सभी पॉलिसियों के नियम सरल हिंदी और अंग्रेजी में अनिवार्य रूप से प्रकाशित किए जाएँ। पॉलिसी दस्तावेज़ के 30–50 पेज में लिखी पॉलिसी की शर्तें आम लोगों के लिए समझना कठिन होती हैं। 4. अस्पताल से डिस्चार्ज के समय डिजिटल और पारदर्शी क्लेम ब्रेकअप अनिवार्य किया जाए। 5. बीमा कंपनियों को निर्देश दिया जाए कि उपभोक्ता हित में सुधार बिना प्रीमियम वृद्धि के लागू किए जाएँ। 6. अस्पताल बिलिंग का कोई राष्ट्रीय मानक नहीं है इसलिए एक ही बीमारी के इलाज का खर्च एक ही शहर या अलग शहरों में अलग अस्पतालों में कई गुना अलग-अलग हो सकता है। 7. कैशलेस क्लेम के बावजूद, अस्पताल में “कैशलेस” सुविधा होने के बावजूद डिस्चार्ज के समय मरीज को 10%–40% तक बिल खुद देना पड़ता है। 8. अस्पताल और बीमा कंपनी के बीच पैकेज विवाद होता है जिसमें मरीज पिसता है क्योंकि कई बार अस्पताल का बिल अलग होता है और बीमा कंपनी की मंजूर दर अलग होती है और इस अंतर का भुगतान मरीज को करना पड़ता है। 9. क्लेम सेटलमेंट का मतलब पूरा भुगतान नहीं होता है। कई बीमा कंपनियाँ क्लेम सेटल्ड दिखाती हैं, लेकिन पूरा बिल नहीं देतीं, केवल आंशिक भुगतान करती हैं इससे क्लेम सेटलमेंट रेशियो वास्तविक राहत को नहीं दर्शाता। 10. भारत में चिकित्सा संबंधित महंगाई लगभग 12–14% प्रतिवर्ष है, जबकि सामान्य महंगाई लगभग 5–6% रहती है। क्लेम रिजेक्शन के कारण उपभोक्ताओं को सारा खर्च वहन करना पड़ता है। स्वास्थ्य बीमा का मूल उद्देश्य नागरिकों को बीमारी के समय आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। यदि क्लेम के समय तकनीकी आधारों पर बड़े पैमाने पर कटौती होती है, तो इस उद्देश्य की पूर्ति नहीं हो पाती।
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