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उज्जैन में महाकाल–हनुमान के दिव्य संबंध की परंपरा आज भी जीवंत
ASANIMESH SINGH
Dec 11, 2025 05:46:57
Ujjain, Madhya Pradesh
उज्जैन में हनुमान अष्टमी: जहाँ महाकाल और हनुमान का दिव्य संगम जीवित है
उज्जैन के महाकाल मंदिर में एक ऐसी परंपरा आज भी जीवित है,जो हनुमान जी के साक्षात दर्शन और महाकाल बाबा..दोनों को एक सूत्र में बांधती है।
और ठीक कल उज्जैन में विशेष हनुमान अष्टमी मनाई जाएगी।
यह कहानी है कोटि तीर्थ की, और महाकाल–हनुमान के दिव्य संबंध की।
पूरे भारतवर्ष में जहाँ हनुमान जयंती मनाई जाती है, उज्जैन में हनुमान अष्टमी का उत्सव बनाया जाता है।
महाकाल मंदिर के पुजारी राम शर्मा बताते हैं कि अवंतिका नगरी में यह परंपरा इसलिए प्रचलित है क्योंकि यहीं पर हनुमान जी ने साक्षात दर्शन दिए थे। जब ये ख्याति पूरे शहर में फैली, तो हर मंदिर में उत्सव मनना शुरू हुआ और वही परंपरा आज तक चली आ रही है।
महाकाल मंदिर परिसर में स्थित कोटि तीर्थ इस परंपरा का केंद्र है। पुजारी बताते हैं कि यह वही पवित्र कुंड है जिसे स्वयं हनुमान जी ने यहाँ स्थापित किया था। माना जाता है कि इसमें देश के सभी तीर्थों का जल समाहित है।
यही जल प्रतिदिन भगवान महाकाल के प्रातःकालीन जलाभिषेक के लिए लिया जाता है। इसके साथ ही यह जल दैनिक पूजन, पंचोपचार, अगरबत्ती–दीप–नैवेद्य की विधियों और गर्भगृह में किए जाने वाले कई विशेष क्रियाकर्मों में भी प्रयोग किया जाता है। इसी कारण कोटि तीर्थ का महत्व केवल अभिषेक तक सीमित नहीं, बल्कि महाकाल की पूरी पूजा-पद्धति का आधार है।
परंपरा और लोगों की आस्था को जोड़ने के लिए पुजारी परिवार ने कोटि तीर्थ स्थल पर हनुमान जी की एक विशेष मूर्ति स्थापित की है। कहा जाता है कि यह वही स्थान है जहाँ हनुमान जी के दिव्य साक्षात्कार की कथा जुड़ी हुई है और इसी वजह से महाकाल और हनुमान की महिमा एक ही स्थल पर सजीव दिखाई देती है।
पुजारी राम शर्मा बताते हैं कि हनुमान जी की सिद्धि और महिमा को याद करते हुए उज्जैन में अष्टमी के दिन विशेष उत्सव मनाया जाता है। कल यहाँ विशेष पूजन और अनुष्ठान होंगे। श्रद्धालु यह संदेश लेकर जाते हैं कि महाकाल की नगरी में हनुमान जी का आशीर्वाद आज भी उतनी ही शक्ति से प्रकट होता है जितना उनके साक्षात दर्शन के समय हुआ था।
महाकाल के दरबार में स्थित कोटि तीर्थ सिर्फ एक कुंड नहीं बल्कि महाकाल और हनुमान के दिव्य संबंध का जीवंत प्रतीक है। इसी वजह से उज्जैन में हनुमान अष्टमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सदियों पुरानी उस ऊर्जा का प्रमाण है जो आज भी इस स्थान को पवित्र बनाए हुए है।
उज्जैन की यही अनूठी परंपरा महाकाल की नगरी को भारत के धार्मिक नक्शे पर खास पहचान देती है जहाँ महाकाल और हनुमान की शक्ति एक साथ अनुभव की जाती है। उज्जैन से अनिमेष सिंह की रिपोर्ट..
बाइट - राम शर्मा पुजारी महाकाल मंदिर
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