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उज्जैन में 24 मीटर चौड़ाई से घर खतरे, 15 मीटर पर समझौते की मांग
ASANIMESH SINGH
Feb 08, 2026 16:01:30
Ujjain, Madhya Pradesh
24 मीटर चौड़ीकरण ने बढ़ाई रहवासियों की धड़कनें, 15 मीटर चौड़ीकरण की मांग。
आशियाने बचाने के लिए सड़क पर उतरे रहवासी, प्रशासन के 24 मीटर वाले फॉर्मूले के खिलाफ 'पोस्टर वॉर' शुरू。
आंखों में आंसू और हाथों में विरोध की तख्तियां, क्या बेघर होकर मनेगा सिंहस्थ का महापर्व
200 घरों पर मंडराया संकट का बादल, प्रभावित परिवारों ने सरकार से मांगी मानवीय राहत。
उज्जैन। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन इन दिनों विकास और जन-आक्रोश के दोराहे पर खड़ी है। प्रशासन द्वारा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए चलाए जा रहे चौड़ीकरण अभियान ने अब एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। मामला MR-5 मार्ग का है, जहाँ राणकेश्वर धाम से गाड़ी अड्डा और शिप्रा नदी के बड़े पुल तक होने वाले निर्माण ने दारू गोदाम, अमर नगर और प्रीति नगर के रहवासियों की रातों की नींद उड़ा दी है。
प्रशासन जहाँ इस मार्ग को 24 मीटर चौड़ा करने की योजना पर अडिग है, वहीं स्थानीय रहवासियों ने इस प्रस्ताव के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि वे सिंहस्थ के महत्व को समझते हैं और विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर घरों को पूरी तरह जमींदोज करना न्यायसंगत नहीं है। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने स्पष्ट किया कि वे 15 मीटर चौड़ीकरण के लिए सहर्ष तैयार हैं, जिससे मार्ग भी सुगम होगा और लोगों के आशियाने भी बच सकेंगे。
विरोध का आलम यह है कि क्षेत्र की गलियों में अब सन्नाटे के बजाय नारों और पोस्टरों की गूँज है। दुकानों और घरों के बाहर चस्पा किए गए पोस्टरों पर लिखा है— "हम विकास के नहीं, विनाश के खिलाफ हैं।" रहवासियों का तर्क है कि यदि 24 मीटर का पैमाना लागू हुआ, तो लगभग 150 से 200 परिवार पूरी तरह बेघर हो जाएंगे। अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी से घर बनाने वाली महिलाओं और बुजुर्गों की आंखों में आंसू हैं। एक स्थानीय महिला ने रोते हुए अपनी पीड़ा व्यक्त की कि "हमने अपनी गाढ़ी कमाई इन मकानों में लगा दी है, अगर ये टूट गए तो हम सड़क पर आ जाएंगे। हम विकास चाहते हैं, लेकिन अपनों की बर्बादी की कीमत पर नहीं।"
वर्तमान में इस प्रस्तावित मार्ग के अलग-अलग हिस्सों में 15, 18 और 24 मीटर चौड़ाई तय की गई है, जिसे लेकर भ्रम और भय की स्थिति बनी हुई है। प्रभावित परिवारों ने अब जनप्रतिनिधियों और शासन से मानवीय आधार पर हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए 15 मीटर के समझौते को स्वीकार करता है या फिर विकास का पहिया इन आशियानों के ऊपर से होकर गुजरता है。
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