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Rajendra MalviyaRajendra MalviyaFollow30 Apr 2025, 08:12 am

नर्मदापुरम में परशुराम जी की भव्य शोभा यात्रा निकाली गई

Narmadapuram, Madhya Pradesh:

नर्मदापुरम शहर में सर्व ब्राह्मण समाज द्वारा अक्षय तृतीया के अवसर पर शहर के सेठानी घाट से मंगलवार को शाम परशुराम जी की भव्य शोभा यात्रा निकाली गई. इसके उपरांत आज बुधवार सुबह 8:00 बजे से झंडा चौक स्थित भोपाल मंदिर में सर्व ब्राह्मण समाज द्वारा परशुराम जी का विशेष पूजन हवन किया गया. वहीं अब भंडारे का आयोजन किया जाएगा समिति के सदस्य गोविंद दुबे द्वारा आज बुधवार को 11:00 बजे जानकारी देते बताया कि आज सुबह 8:00 बजे से परशुराम जी का विशेष हवन पूजन प्रारंभ हुआ. जिसके उपरांत अब भंडारे का आयोजन किया जाएगा और शाम को भगवान परशुराम जी की महा आरती कर कार्यक्रम का समापन किया जाएगा।

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दिल्ली हाई कोर्ट ने इशरत जहां की जमानत रद्द करने से इंकार किया

Noida, Uttar Pradesh:2020 दिल्ली दंगों के आरोपी कांग्रेस पार्षद इशरत जहां की जमानत रद्द करने से दिल्ली हाई कोर्ट ने इंकार किया। दिल्ली पुलिस ने निचली अदालत से मिली ज़मानत को रद्द करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि इशरत जहां को जमानत मिले हुए 4 साल से ज्यादा समय हो गया है इस दौरान ऐसा कोई सबूत नहीं है कि उन्होंने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया हो।इसलिए अब ज़मानत रद्द करने का कोई औचित्य नहीं बनता। इशरत जहां को मार्च 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन पर IPC, पब्लिक प्रॉपर्टी डैमेज एक्ट, आर्म्स एक्ट और UAPA के तहत केस दर्ज किया गया था स्पेशल कोर्ट ने मार्च 2022 में इशरत जहां को जमानत दी थी। कोर्ट ने कहा था 'चक्का जाम” का आइडिया इशरत जहां का नहीं था ।वह किसी ऐसे संगठन या व्हाट्सएप ग्रुप की सदस्य भी नहीं थीं, जो इस साजिश में शामिल थे। दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में दाखिल अर्जी में कहा था कि निचली अदालत ने इशरत के खिलाफ कई अहम सबूतों को नज़रंदाज किया
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खाद्य विभाग की छापेमारी: एक्सपायर्ड पदार्थ दोबारा पैक कर सप्लाई का धंधा खुला

Amroha, Uttar Pradesh:ए amरोहा जनपद के डिडौली क्षेत्र के गांव ढकिया चमन में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने बड़ी छापेमारी कर मिलावटी और एक्सपायरी खाद्य पदार्थों के अवैध कारोबार का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में चिप्स, नमकीन, काजू कतली, मैगी, पैकिंग के रसगुल्ले और बर्फी समेत कई खाद्य सामग्री बरामद की गई। जांच में सामने आया कि एक्सपायरी हो चुके उत्पादों को खोलकर नए पैकेट में दोबारा पैक कर बाजार में बेचा जा रहा था, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ किया जा रहा था। छापेमारी सहायक आयुक्त खाद्य विनय अग्रवाल के नेतृत्व में गई, जिसमें खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनोज कुमार, कुलदीप कुमार दीक्षित, राकेश कुमार और विपिन कुमार शामिल रहे। टीम ने मौके से खाद्य पदार्थों के छह नमूने लेकर प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे हैं। प्रारम्भिक जांच में यह भी सामने आया कि यह अवैध कारोबार मुरादाबाद, संभल, अमरोहा, बिजनौर और रामपुर के ग्रामीण इलाकों के दुकानदारों तक फैला हुआ था, जहां इस तरह के एक्सपायरी उत्पाद सप्लाई किए जा रहे थे। अधिकारियों के अनुसार यह अवैध गतिविधि ढकिया चमन निवासी कलीम द्वारा इशरत अली के मकान में संचालित की जा रही थी। छापेमारी की खबर फैलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि मिलावटखोरी और फर्जी पैकेजिंग के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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करावल नगर के सोनिया विहार में सीवर, पानी और सड़कों की भीषण किल्लत

Delhi, Delhi:करावल नगर विधानसभा लोकेशन -- सोनिया विहार सभापुर वार्ड से ग्राउंड रिपोर्ट। करावल नगर विधानसभा इलाके के लगने वाले सोनिया विहार पांचवा पुस्ता सभापुर वार्ड इलाके की यह तस्वीर देखकर आप चौंक जाएंगे आप यह सोचने को मजबूर हो जाएंगे क्या यह दिल्ली है ? जहाँ सीवर नही, जल निकासी नही, पीने की पानी कोई सुविधा नही, नालियां नही, कच्ची गालियां, ऊंची नीची जगह, जनता पूछे क्या यही है विकास ? यमुनापार उत्तर पूर्वी दिल्ली के करावल नगर विधानसभा क्षेत्र के सोनिया विहार, पांचवा पुस्ता सभापुर वार्ड में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी लोगों के लिए बड़ी समस्या बन चुकी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले कई सालों से आसपास इलाके की कई गलियों का निर्माण कार्य नहीं किया गया है। टूटी-फूटी सड़कों और अधूरे विकास कार्यों के कारण लोगों का रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है। इलाके में सबसे गंभीर समस्या सीवर की है। यहां अब तक सीवर लाइन नहीं डाली गई है, जिससे गंदा पानी सड़कों और गलियों में जमा रहता है। इससे न सिर्फ बदबू फैलती है, बल्कि लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है। बरसात के समय इनकी परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है जगह-जगह जल भराव की स्थिति बन जाती है जिससे स्थानीय निवासियों को अपने घर में कैद होना पड़ जाता है। इसके अलावा पीने के पानी की भी भारी किल्लत है। इलाके में पानी की पाइपलाइन नहीं बिछाई गई है, जिसके चलते लोगों को मजबूरी में पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। गर्मी के इस मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो गई है। नालियों का निर्माण न होने के कारण जलभराव की स्थिति बनी रहती है, जिससे मच्छरों की भरमार हो गई है और बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। लोगों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद उन वादों को पूरा नहीं किया जाता। अब सवाल यह है कि आखिर कब तक करावल नगर के इन इलाकों के लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसते रहेंगे? क्या जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान देंगे, या फिर हालात ऐसे ही बने रहेंगे?
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जहानाबाद में लापता युवक का शव मिलने से हत्या आशंका, परिजनों ने आरोप लगाए

Jehanabad, Bihar:जहानाबाद में दोर परिजनों ने गाँव के भीतर शव मिलने पर हत्या की आशंका जताई है। मृतक की पहचान रिटायर्ड शिक्षक शिव प्रसाद सिंह के 40 वर्षीय पुत्र अंजय उर्फ अरुण कुमार के रूप में की गई है। घटना समेत परिवारजन का कहना है कि खेत में पराली जलाने को लेकर विवाद शुरू हुआ था, जिसके बाद 22 अप्रैल से लापता था। शुक्रवार की सुबह बधार में उसका शव मिला, जिससे परिजनों के शक यकीन में बदला। गांव के अधिकांश लोग शादी समारोह में पटना गए थे, शायद इसी का फायदा उठाकर शव बधार में फेंका गया। पुलिस ने मामले की वैज्ञानिक जांच शुरू कर दी है; डॉग स्क्वायड और फॉरेंसिक टीम मौके पर भेजी गईं। पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट से ही मौत के कारण स्पष्ट होंगे। एसपी ने कहा कि शव की पहचान हो चुकी है और पराली विवाद के आरोपियों के खिलाफ आगे कार्रवाई होगी। फिलहाल पुलिस हर पहलू की गहनता से जाँच कर रही है।
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जयपुर फर्स्ट बनाम सैकंड: ऑटोमेटेड ट्रैक के बावजूद लाइसेंस बनाने में बड़ा फर्क

Jaipur, Rajasthan:जयपुर के RTO सैकंड में फर्स्ट से 8 गुना अधिक बन गए लाइसेंस, जबकि क्षेत्र महज 22 प्रतिशत! - राजधानी के 2 RTOs में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का बड़ा झोल - जयपुर फर्स्ट में लाइसेंस बनवाने नहीं पहुंच रहे आवेदक, कारण, कम्प्यूटराइज ट्रैक पर पास नहीं होते - फिर दलालों की मदद से जयपुर सैकंड में बनते हैं लाइसेंड्स जयपुर। परिवहन विभाग ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया को सख्त बनाने जा रहा है। इसके लिए प्रदेश के एक दर्जन आरटीओ और डीटीओ कार्यालयों में कम्प्यूटराइज्ड ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रायल ट्रैक लागू किए गए हैं। ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रायल ट्रैक पर ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का परीक्षण कम्प्यूटराइज पद्धति से किया जाता है। यानी लाइसेंस आवेदक ने यदि गाड़ी चलाने में ट्रायल ट्रैक पर थोड़ी भी गलती की तो उसके नम्बर कटेंगे। 4 अलग-अलग तरह के टेस्ट में प्रत्येक टेस्ट के अलग-अलग नम्बर होते हैं। इसके बाद सामूहिक परिणाम में ट्रायल में पास या फेल का फैसला होता है। मौजूदा स्थिति यह है कि जयपुर फर्स्ट आरटीओ कार्यालय के जगतपुरा में ऑटोमेटेड ट्रैक पर 10 आवेदकों में से बमुश्किल 2 से 3 आवेदकों के लाइसेंस बन रहे हैं। परिवहन विभाग मानता है कि ऑटोमेडेड ट्रैक की सख्त प्रक्रिया से ही सही मायने में लाइसेंस बन रहे हैं। इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने में भी मदद मिलेगी। रोचक बात यह है कि जो आवेदक जयपुर फर्स्ट कार्यालय में लाइसेंस ट्रायल में फेल हो रहे हैं, वे दलालों की मदद से आरटीओ सैकंड में ड्राइविंग लाइसेंस बनवा रहे हैं। आरटीओ सैकंड के विद्याधर नगर, चौमू, शाहपुरा, कोटपूतली और जयपुर फर्स्ट के दूदू जिला परिवहन कार्यालयों में ऑटोमेटेड ट्रैक नहीं हैं। ऐसे में इन जगहों पर बड़ी संख्या में लाइसेंस बन रहे हैं। ड्राइविंग लाइसेंस में कितना अंतर? - 1 फरवरी 2026 से 31 मार्च 2026 के बीच ड्राइविंग लाइसेंस - जयपुर फर्स्ट के जगतपुरा ARTO में 1640 ड्राइविंग लाइसेंस बने - इसी अवधि में जयपुर सैकंड में विद्याधर नगर में 12961 लाइसेंस बने - यानी जयपुर फर्स्ट की तुलना में 8 गुना अधिक लाइसेंस सैकंड में बने - रोचक यह कि जयपुर फर्स्ट का एरिया सैकंड से है कई गुना ज्यादा - पुलिस थानों के हिसाब से जयपुर फर्स्ट के पास जयपुर शहर का 78 प्रतिशत क्षेत्र - और जयपुर सैकंड आरटीओ के पास करीब 22 प्रतिशत क्षेत्र - इसके बावजूद जयपुर सैकंड में कैसे बने 8 गुना अधिक लाइसेंस? - जयपुर फर्स्ट क्षेत्र के महज 10 प्रतिशत बराबर चौमू में 4200 लाइसेंस बने - शाहपुरा में 2499 और कोटपूतली में 3631 ड्राइविंग लाइसेंस बने - जयपुर फर्स्ट के दूदू में 3078, चाकसू में 1278 लाइसेंस बने प्रदेशभर में एक जैसे नियम लागू करना जरूरी? - परिवहन मुख्यालय के एक अपर परिवहन आयुक्त ने बताया कि जयपुर और सीकर जोन के विभिन्न आरटीओ और डीटीओ कार्यालयों में जिन जगहों पर मैन्युअल प्रक्रिया या ढील की संभावना अधिक है, वहां लाइसेंस की संख्या ज्यादा रही है। वहीं ऑटोमेटेड ट्रैक वाले कार्यालयों में लाइसेंस बनवाने वालों की संख्या बेहद कम रही है। यानी सिस्टम में पारदर्शिता लाने के लिए ऑटोमेटेड ट्रैक जरूरी हैं, लेकिन जब तक सभी जगह एक समान नियम लागू नहीं होंगे, तब तक ऐसे अंतर बने रहेंगे। यदि सख्ती नहीं बढ़ाई गई तो रोड सेफ्टी पर सीधा असर पड़ सकता है। क्या हो सकता है नया नियम? - ऑटोमेटेड ट्रैक वाले जिलों में ‘पिन कोड लॉक’ सिस्टम लागू करने की तैयारी - अब आवेदक केवल अपने क्षेत्राधिकार वाले RTO कार्यालय में लाइसेंस बनवा सकेंगे - यानी जयपुर फर्स्ट के क्षेत्र वाले आवेदक जयपुर सैकंड में लाइसेंस नहीं बनवा सकेंगे - परिवहन मुख्यालय सारथी सॉफ्टवेयर में कर रहा है इसे लेकर बदलाव - इससे दलालों और इंस्पेक्टरों की मिलीभगत पर रोक लग सकेगी - सभी आवेदकों को अपने क्षेत्र के ऑटोमेटेड ट्रैक पर ही ड्राइविंग टेस्ट देना होगा - विभाग मानता है इससे लाइसेंस केवल योग्य और प्रशिक्षित चालकों को ही मिलेगा सीकर-झुंझुनूं में भी मिली ऐसी ही गड़बड़ी - जयपुर के 2 परिवहन कार्यालयों जैसी गड़बड़ी सीकर-झुंझुनूं में भी देखने को मिली है। सीकर आरटीओ कार्यालय में ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रायल ट्रैक बना हुआ है। ऐसे में फरवरी और मार्च की 2 माह की अवधि में यहां पर मात्र 3215 आवेदकों के लाइसेंस बने हैं। जबकि झुंझुनूं में परिवहन कार्यालय में ड्राइविंग ट्रैक नहीं है। तो इसी अवधि में झुंझुनूं जिला परिवहन कार्यालय में 11510 लाइसेंस बना दिए गए। यानी साफ है कि जिन सीकर के लोगों के लाइसेंस वहां नहीं बन सके, उन्होंने झुंझुनूं या अन्य नजदीकी कार्यालयों से लाइसेंस बनवाए।
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अम्बेडकर नगर में प्रेमी ने दुल्हन को रोककर दूल्हे की कार से उतरवाने का प्रयास

Ambad, Maharashtra:अम्बेडकरनगर शादी के बाद दूल्हे के साथ जा रही दुल्हन को प्रेमी ने रोका दूल्हा और दुल्हन की कार को प्रेमी ने साथियों के साथ रोका प्रेमी ने दूल्हे दिनेश से दुल्हन को बताया अपनी प्रेमिका दुल्हन को जबरन कार से उतारने का प्रेमी ने किया प्रयास दहशत में आकर दूल्हे ने पुलिस को दी घटना की सूचना मौके पर पहुंची पुलिस ने दूल्हा, दुल्हन और प्रेमी को थाने ले गयी thाने पर सुलह समझौता के बाद बिना दुल्हन लिए दूल्हा घर लौट गया आरोपी प्रेमी पर पुलिस ने शांति भंग की कार्यवाही की गोसाईगंज से अलीगंज थानाक्षेत्र के एक गांव में आई थी बारात
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राजस्थान में चुनाव करवाने की मांग तेज, उदयपुर में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

Udaipur, Rajasthan:प्रदेश में निकाय और पंचायती राज चुनाव करवाने की मांग फिर से तेज होने लगी है। इसी को लेकर उदयपुर में राजीव गांधी पंचायती राज संगठन और शहर जिला कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने चुनाव कराओ लोकतंत्र बचाओ के नारे लगाकर प्रदर्शन किया। पार्टी पदाधिकारियों ने राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंप प्रदेश में जल्द चुनाव करवाने की मांग की। कांग्रेस शहर अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़ ने बताया कि राजस्थान में पंचायती राज चुनाव लंबित है और सरकार चुनाव को आगे बढ़ा रही है। ऐसे में राजस्थान की जनता परेशान हो रही है। अधिकारी गर्मी के दिनों में एसी कमरों में बैठे है और लोग अपने काम के लिए भटक रहे है। पंचायती राज चुनाव और निकाय चुनाव को लेकर प्रदर्शन किया है और सरकार से मांग की जा रही है कि राजस्थान में जल्द चुनाव करवाए।
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टीकमगढ़ की सड़क पर देर रात भिड़ंत के बाद तेज़ मारपीट, वीडियो वायरल

Tikamgarh, Madhya Pradesh:टीकमगढ़ शहर में बीच सड़क पर देर रात तेज रफ्तार दो बाइक सवारों के बीच आपस मे टक्कर के बाद जमकर हुई मारपीट, दरअसल यह पूरा मामला टीकमगढ़ शहर के व्यस्ततम चकरा तिगैला का है, जहां विपरीत दिशा से आ रहे दो बाइक सवारों की आपस में भिड़ंत हो गई जिसके बाद गालीगलौज से शुरू हुआ विवाद मारपीट तक पहुंच गया, मोटरसाइकिल सवारों ने बीच सड़क पर एक-दूसरे पर जमकर बरसाए लात-घूंसे घंटों तक सड़क पर होता रहा तमाशा, इस दौरान पुलिस कही नजर नही आई, हालांकि बाद में बाइक सवार लोगों के बीच बचाव के बाद अपने अपने रास्ते चले गए दोनों पक्षों में से किसी ने थाने में अभी तक कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है, घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
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चित्तौड़गढ़ की जिलाधिकारक डॉ. मंजू का ग्राउंड जीरो पर एक्शन, आम जनता को राहत

Begun, Rajasthan:चित्तौड़गढ़ की जिलाधिकारक डॉ. मंजू का ग्राउंड जीरो पर एक्शन, भीषण गर्मी के बीच वे खुद फील्ड में उतरकर व्यवस्थाओं का जायजा ले रही हैं और आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान को प्राथमिकता दे रही हैं। जिला कलक्टर ने सिंहपुर नर्सरी, गौरानाथ गौशाला और कपासन उप जिला चिकित्सालय का निरीक्षण किया। नर्सरी में आय बढ़ाने के लिए अधिक पौधारोपण के निर्देश दिए, तो गौशाला में छायादार वृक्ष लगाने और आय के स्रोत विकसित करने पर जोर दिया। अस्पताल में इमरजेंसी और अन्य व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण करते हुए दीवार में आए क्रैक को गंभीरता से लिया और मानसून से पहले मरम्मत के निर्देश दिए। साथ ही साफ-सफाई, पेयजल और गर्मी से राहत के इंतजाम दुरुस्त रखने को कहा। कपासन में ब्लॉक स्तरीय बैठक लेकर योजनाओं की समीक्षा की और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि आमजन को योजनाओं का पूरा लाभ मिले। रात्रि चौपाल में विधायक अर्जुन लाल जीनगर के साथ ग्रामीणों की समस्याएं सुनते हुए मौके पर ही समाधान के निर्देश दिए। वहीं समृद्धि उद्यान के निरीक्षण में भी साफ-सफाई और हरियाली बढ़ाने को लेकर अधिकारियों को फटकार लगाई। जिला कलक्टर की यह सक्रियता प्रशासन की संवेदनशीलता और जवाबदेही को दर्शाती है। कुल मिलाकर, चित्तौड़गढ़ में जिला कलक्टर डॉ. मंजू का ग्राउंड जीरो पर एक्टिव रहना प्रशासनिक कार्यशैली में बड़ा बदलाव ला रहा है। निरीक्षण से लेकर चौपाल तक, हर स्तर पर उनकी मौजूदगी न सिर्फ अधिकारियों की जवाबदेही तय कर रही है, बल्कि आमजन में भरोसा भी मजबूत कर रही है कि उनकी समस्याएं अब सिर्फ फाइलों में नहीं, बल्कि मौके पर ही हल हो रही हैं。
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जयपुर में ऑटोमेटेड ट्रैक से लाइसेंस बनवाने में 8 गुना फर्क, नया नियम प्रस्तावित

Jaipur, Rajasthan:लोकेशन- जयपुर फीड- 2सी हैडर- - RTO सैकंड में फर्स्ट से 8 गुना अधिक लाइसेंस! - राजधानी के RTOs में ड्राइविंग लाइसेंस का झोल - जयपुर फर्स्ट में लाइसेंस बनवाने नहीं पहुंच रहे आवेदक - कारण, कम्प्यूटराइज ट्रैक पर पास नहीं होते - फिर दलालों की मदद से जयपुर सैकंड में बनते हैं लाइसेंस - फर्स्ट से ढाई गुना अधिक तो चौमू में बन गए एंकर राजधानी जयपुर के ही दो परिवहन कार्यालयों में ड्राइविंग लाइसेंस बनने के मामले में बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। जयपुर फर्स्ट में ड्राइविंग लाइसेंस बनना अब लगभग बंद हो चुके हैं। वहीं जयपुर सैकंड आरटीओ में धड़ल्ले से लाइसेंस बन रहे हैं। क्यों हो रहा है ऐसा, कितना है लाइसेंस बनने में अंतर, देखिए, जी मीडिया की यह खास रिपोर्ट- वीओ-1 परिवहन विभाग ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया को सख्त बनाने जा रहा है। इसके लिए प्रदेश के एक दर्जन आरटीओ और डीटीओ कार्यालयों में कम्प्यूटराइज्ड ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रायल ट्रैक लागू किए गए हैं। ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रायल ट्रैक पर ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का परीक्षण कम्प्यूटराइज पद्धति से किया जाता है। यानी लाइसेंस आवेदक ने यदि गाड़ी चलाने में ट्रायल ट्रैक पर थोड़ी भी गलती की तो उसके नम्बर कटेंगे। 4 अलग-अलग तरह के टेस्ट में प्रत्येक टेस्ट के अलग-अलग नम्बर होते हैं। इसके बाद सामूहिक परिणाम में ट्रायल में पास या फेल का फैसला होता है। मौजूदा स्थिति यह है कि जयपुर फर्स्ट आरटीओ कार्यालय के जगतपुरा में ऑटोमेटेड ट्रैक पर 10 आवेदकों में से बमुश्किल 2 से 3 आवेदकों के लाइसेंस बन रहे हैं। परिवहन विभाग मानता है कि ऑटोमेटेड ट्रैक की सख्त प्रक्रिया से ही सही मायने में लाइसेंस बन रहे हैं। इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने में भी मदद मिलेगी। रोचक बात यह है कि जो आवेदक जयपुर फर्स्ट कार्यालय में लाइसेंस ट्रायल में फेल हो रहे हैं, वे दलालों की मदद से आरटीओ सैकंड में ड्राइविंग लाइसेंस बनवा रहे हैं। आरटीओ सैकंड के विद्याधर नगर, चौमू, शाहपुरा, कोटपूतली और जयपुर फर्स्ट के दूदू जिला परिवहन कार्यालयों में ऑटोमेटेड ट्रैक नहीं हैं। ऐसे में इन जगहों पर बड़ी संख्या में लाइसेंस बन रहे हैं। Gfx In ड्राइविंग लाइसेंस में कितना अंतर - 1 फरवरी 2026 से 31 मार्च 2026 के बीच ड्राइविंग लाइसेंस - जयपुर फर्स्ट के जगतपुरा ARTO में 1640 ड्राइविंग लाइसेंस बने - इसी अवधि में जयपुर सैकंड में विद्याधर नगर में 12961 लाइसेंस बने - यानी जयपुर फर्स्ट की तुलना में 8 गुना अधिक लाइसेंस सैकंड में बने - रोचक यह कि जयपुर फर्स्ट का एरिया सैकंड से है कई गुना ज्यादा - पुलिस थानों के हिसाब से जयपुर फर्स्ट के पास जयपुर शहर का 78 प्रतिशत क्षेत्र और जयपुर सैकंड आरटीओ के पास करीब 22 प्रतिशत क्षेत्र इसके बावजूद जयपुर सैकंड में कैसे बने 8 गुना अधिक लाइसेंस ? जयपुर फर्स्ट क्षेत्र के महज 10 प्रतिशत बराबर चौमू में 4200 लाइसेंस बने - शाहपुरा में 2499 और कोटपूतली में 3631 ड्राइविंग लाइसेंस बने - जयपुर फर्स्ट के दूदू में 3078, चाकसू में 1278 लाइसेंस बने Gfx Out वीओ- 2 परिवहन मुख्यालय के एक अपर परिवहन आयुक्त ने बताया कि जयपुर और सीकर जोन के विभिन्न आरटीओ और डीटीओ कार्यालयों में जिन जगहों पर मैन्युअल प्रक्रिया या ढील की संभावना अधिक है, वहां लाइसेंस की संख्या ज्यादा रही है। वहीं ऑटोमेटेड ट्रैक वाले कार्यालयों में लाइसेंस बनवाने वालों की संख्या बेहद कम रही है। यानी सिस्टम में पारदर्शिता लाने के लिए ऑटोमेटेड ट्रैक जरूरी हैं, लेकिन जब तक सभी जगह एक समान नियम लागू नहीं होंगे, तब तक ऐसे अंतर बने रहेंगे। यदि सख्ती नहीं बढ़ाई गई तो रोड सेफ्टी पर सीधा असर पड़ सकता है। Gfx In क्या हो सकता है नया नियम ? - ऑटोमेटेड ट्रैक वाले जिलों में ‘पिन कोड लॉक’ सिस्टम लागू करने की तैयारी - अब आवेदक केवल अपने क्षेत्राधिकार वाले RTO कार्यालय में लाइसेंस बनवा सकेंगे - यानी जयपुर फर्स्ट के क्षेत्र वाले आवेदक जयपुर सैकंड में लाइसेंस नहीं बनवा सकेंगे - परिवहन मुख्यालय सारथी सॉफ्टवेयर में कर रहा है इसे लेकर बदलाव - इससे दलालों और इंस्पेक्टरों की मिलीभगत पर रोक लग सकेगी - सभी आवेदकों को अपने क्षेत्र के ऑटोमेटेड ट्रैक पर ही ड्राइविंग टेस्ट देना होगा - विभाग मानता है इससे लाइसेंस केवल योग्य और प्रशिक्षित चालकों को ही मिलेगा - जयपुर के 2 कार्यालयों जैसी गड़बड़ी सीकर-झुंझुनूं में देखने को मिली - सीकर में ऑटोमेटेड ट्रैक होने से मात्र 3215 आवेदकों के लाइसेंस बने जबकि झुंझुनूं में ट्रैक नहीं, तो वहां 11510 लाइसेंस बनाए गए Gfx Out
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वन विभाग ने अवैध खनन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त

Dholpur, Rajasthan:अवैध खनन पर वन विभाग की कार्रवाई, पत्थर ब्लॉकों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त सरमथुरा (धौलपुर) अवैध खनन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत वन विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई की। टीम ने भिंडीपुरा गांव के पास गश्त के दौरान अवैध पत्थर ब्लॉकों से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त किया। यह कार्रवाई एसीएफ चेतराम मीणा के निर्देशन में की गई। वन विभाग को सूचना मिली थी कि क्षेत्र में अवैध खनन कर पत्थरों का परिवहन किया जा रहा है। वन विभाग की टीम ने घेराबंदी कर ट्रैक्टर-ट्रॉली को पकड़ा। जब्त वाहन को बीझौली नर्सरी पर लाकर खड़ा कराया गया है।एसीएफ चेतराम मीणा ने बताया कि अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। कार्रवाई के दौरान वनपाल नीलेंद्र सहित वन विभाग का जाब्ता मौजूद रहा।
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बस्तर के एर्राबोर आश्रम दुष्कर्म मामले में आरोपी को 20 वर्ष सख़्त कैद

Bilaspur, Chhattisgarh:बिलासपुर। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डीबी ने बस्तर के चर्चित एर्राबोर पोटाकेबिन आश्रम में 6 वर्ष 10 माह की बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपी को सुनाई गई मौत तक कैद की सजा में आंशिक संशोधन करते हुए आरोपी को 20 वर्ष की कैद में बदला है। कोर्ट ने शेष सजा को यथावत रखा है। उल्लेखनीय है कि 24.07.2023 को पीड़िता की माँ ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी लगभग 6 साल 10 महीने की नाबालिग बेटी एर्राबोर के पोटाकेबिन आश्रम में रहती थी, 22.07.2023 की रात को अपने कमरे से गायब हो गई और मिलने पर, उसने दर्द की शिकायत की और बताया कि एक व्यक्ति उसे दूसरे कमरे में ले गया और उसके साथ सेक्सुअल असॉल्ट किया। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद, पुलिस ने आईपीसी की सही धाराओं और पास्को एक्ट की धारा 6 के तहत मामला दर्ज किया। पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए सुकमा के डिस्टि्रक्ट हॉस्पिटल भेजा गया। अपील करने वाले आरोपी माडवी हिडमा उर्फ सोनू उर्फ राजू पुत्र श्री मुक्का उम्र लगभग 35 वर्ष पता- स्टाफ क्वार्टर पोटाकेबिन एर्राबोर को 27.07.2023 को गिरफ्तार किया गया और उसे भी मेडिकल जांच के लिए भेजा गया, जिसमें वह यौन संबंध बनाने में सक्षम पाया गया। गवाहों का बयान धारा 161 के तहत और पीड़ित का बयान धारा 164 के तहत दर्ज किया गया है और जांच के दौरान पहचान की कार्रवाई भी की गई। सामान्य जांच पूरी होने के बाद, अपीलकर्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 450, 363, 366, 324, 376 और पास्को एक्ट की धारा 6 के तहत अपराध के लिए ट्रायल कोर्ट में चार्जशीट दायर की गई। ट्रायल कोर्ट ने सुनवाई के उपरांत अपराध सिद्ब होने पर आरोपी को आईपीसी की धारा 450 के तहत 10 साल की सज़ा और 1,000 रुपये का जुर्माना, जुर्माना न देने पर 1 साल के लिए और सज़ा। आईपीसी की धारा 363 के तहत 3 साल की सज़ा और 1,000 रुपये का जुर्माना, जुर्मانہ न देने पर 1 साल के लिए और सज़ा। आईपीसी की धारा 366 के तहत 3 साल की सज़ा और 1,000 रुपये का जुर्माना, जुर्माना न देने पर 1 साल के लिए और सज़ा। आईपीसी की धारा 324 के तहत 3 साल की सज़ा और 1,000 रुपये का जुर्माना, जुर्माना न देने पर 1 साल के लिए और सज़ा। प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट, 2012 (शॉर्ट में ‘पास्को एक्ट’) की धारा 6 के तहत, मौत होने तक उम्रकैद, 5,000/- रुपये का जुर्माना, जुर्मना न देने पर 1 साल का अतिरिक्त कैद की सजा सुनाई। अदालत ने सभी सजाओं को साथ चलाने का निर्देश दिया।सजा के खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील पेश की। अपील पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डीबी में सुनवाई हुई। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा हमने पार्टियों के वकील को सुना है और ऊपर दी गई उनकी अलग-अलग दलीलों पर विचार किया है और ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड को भी बहुत ध्यान से देखा है। सबसे पहला और सबसे ज़रूरी सवाल यह है कि क्या यह तय किया जाना चाहिए कि ट्रायल कोर्ट ने अपील करने वाले को आईपीसी की धारा 450, 363, 366 और 324 और प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफ़ेन्स एक्ट, 2012 की धारा 6 के तहत अपराधों के लिए सज़ा सुनाई है। पास्को एक्ट की धारा 6 के तहत अपराध के लिए, अपील करने वाले को जुर्माने के साथ बाकी बची ज़िंदगी तक उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई है। पास्को एक्ट के सेक्शन 6 के तहत दी गई सज़ा को बाकी ज़िंदगी की कैद से घटाकर बीस साल की सख़्त कैद कर दिया जाए, तो यह इंसाफ़ के लायक होगा। पास्को एक्ट के सेक्शन 6 के तहत दी गई जुर्माने की सज़ा और डिफ़ॉल्ट की शर्त को बनाए रखा जाता है। आईपीसी के सेक्शन 450, 363, 366 और 324 के तहत दी गई सज़ा और दोषसिद्धि को भी बनाए रखा जाता है। सभी सज़ाओं को एक साथ चलाने का निर्देश दिया जाता है। अपील को ऊपर बताई गई सीमा तक कुछ हद तक मंज़ूरी दी जाती है। अपील करने वाले के जेल में है। वह इस कोर्ट द्बारा बदली गई पूरी सज़ा काटेगा। वह इन्वेस्टिगेशन, ट्रायल और इस अपील के पेंडिग रहने के दौरान पहले ही बिता चुके समय के सेट-ऑफ का फ़ायदा पाने का हकदार होगा。
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