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बैतूल की भरेवा आर्ट को GI टैग मिला, टिगरिया गांव की कला वैश्विक मंच पर पहुंची
RKRupesh Kumar
Dec 05, 2025 05:48:23
Betul, Madhya Pradesh
बैतूल की दुर्लभ शिल्पकला भरेवा आर्ट को GI टैग मिला है. इसी साल भोपाल आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को CM डॉ मोहन यादव ने भरेवा शिल्पकला से निर्मित पुष्पक विमान उपहार में दिया था, जो बैतूल के ही टिगरिया गाँव में बनाया गया था. भरेवा आर्ट बैतूल जिले की पहली शिल्पकलाओं में से एक है जिसे GI टैग मिला है. बैतूल जिले के टिगरिया गाँव के भरेवा कलाकारों की मेहनत के चलते इस गाँव को क्राफ्ट विलेज के नाम से भी जाना जाता है. भारत सरकार के बौद्धिक संपदा अधिकार चेन्नई की ओर से भरेवा आर्ट को GI टैग दिया गया है. भरेवा कला बैतूल की प्राचीनतम शिल्पकलाओं में से एक है जिसमें मिट्टी के सांचे बनाकर उनमें पिघली हुई पंचधातु को भरा जाता है और एक से बढ़कर एक शिल्पकलाएँ बनाई जाती हैं. हर कलाकृति खुद में बेजोড় दिखती है और इन्हें बनते हुए देखना भी खास होता है. बैतूल के भरेवा कलाकारों द्वारा बनाई गई मोर चिमनी काफी प्रसिद्ध है. अब GI टैग मिलने से भारत के प्रधानमंत्री और राजदूत इन शिल्पकलाओं को दूसरे देशों के राजदूतों को उपहार स्वरूप दे सकते हैं, वहीं भरेवा कला अब पूरी दुनिया के आर्ट गैलरी तक पहुंच पाएगी. GI टैग मिलने से भरेवा शिल्पकारों को ना सिर्फ दुनियाभर के बाजारों तक पहुंचने का मौका मिलेगा बल्कि इस लुप्त होती कला को नया जीवन मिल गया है. अब से लगभग दो दशक पहले भरेवा शिल्पकरी लगभग लुप्त हो चुकी थी लेकिन भरेवा कलाकारों ने अपनी जनजातीय संस्कृति और रोजमर्रा के जीवन से जुड़े सामानों और अनुभवों को भरेवा शिल्पकारी से व्यक्त किया तो इस कला को पुनर्जीवन मिल गया है.
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