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बर्फबारी के चलते कमरूनाग मंदिर के कपाट अप्रैल तक बंद, दर्शनों पर रोक
NSNitesh Saini
Jan 05, 2026 07:17:43
Sundar Nagar, Himachal Pradesh
लोकेशन मंडी :
स्लग :
भारी बर्फबारी के चलते कमरूनाग मंदिर के कपाट बंद, अब अप्रैल माह में होंगे दर्शन
मंडी -
एंकर : मंडी जिला के आस्था के प्रमुख केंद्र और हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शुमार बड़ा देव कमरूनाग मंदिर के कपाट भारी बर्फबारी के चलते बंद कर दिए गए हैं। मंदिर समिति द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब श्रद्धालु और पर्यटक अप्रैल माह में ही देव कमरूनाग के दर्शन कर सकेंगे। लगातार हो रही बर्फबारी के कारण क्षेत्र में ठंड का प्रकोप बढ़ गया है और मंदिर परिसर सहित आसपास के मार्ग पूरी तरह से बर्फ से ढक गए हैं। जानकारी के अनुसार बीते कुछ दिनों से कमरूनाग क्षेत्र में लगातार हिमपात हो रहा है, जिससे मंदिर तक पहुंचने वाले पैदल मार्ग और सीढ़ियां अत्यधिक फिसलन भरी हो गई हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति ने सर्वसम्मति से मंदिर के कपाट अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया।
समिति का कहना है कि खराब मौसम के चलते दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को जान-माल का खतरा हो सकता है।
मंदिर समिति की ओर से जारी फरमान में स्पष्ट किया गया है कि कपाट बंद रहने की अवधि के दौरान यदि कोई श्रद्धालु या पर्यटक कमरूनाग मंदिर तक पहुंचने का प्रयास करता है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी स्वयं की होगी। इस दौरान मंदिर समिति अथवा प्रशासन किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी वहन नहीं करेगा। समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मौसम को देखते हुए यात्रा से बचें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
गौरतलब है कि हर वर्ष सर्दियों के मौसम में अत्यधिक बर्फबारी के चलते देव कमरूनाग मंदिर के कपाट करीब चार माह के लिए बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना भी स्थगित रहती है। बर्फ पिघलने और मौसम सामान्य होने के बाद अप्रैल माह में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ मंदिर के कपाट पुनः खोल दिए जाते हैं।
देव कमरूनाग को मंडी जिला का सबसे बड़ा देवता माना जाता है और इन्हें वर्षा के देवता के रूप में विशेष श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। मान्यता है कि देव कमरूनाग की कृपा से क्षेत्र में अच्छी वर्षा होती है, जिससे किसानों और बागवानों की फसलों को लाभ मिलता है। दूर-दराज से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं और पवित्र झील में सिक्के अर्पित कर मनोकामनाएं मांगते हैं।
मंदिर समिति और प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे बर्फबारी के मौसम में जोखिम भरी यात्रा न करें और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें। अप्रैल माह में कपाट खुलने के बाद दर्शन को लेकर विधिवत सूचना सार्वजनिक की जाएगी।
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