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NNAVODEET Follow7 Jun 2024, 06:40 pm

कुरुक्षेत्र में राज्यमंत्री सुभाष सुधा ने वितरित किए हैप्पी कार्ड, बस को दिखाई हरी झंडी

Kurukshetra, Haryana:

कुरुक्षेत्र में राज्यमंत्री सुभाष सुधा ने 25 लाभार्थियों को हैप्पी कार्ड वितरित किए। इसके साथ ही उन्होंने कुरुक्षेत्र से कोटद्वार जाने वाली बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लाभार्थियों से संवाद किया। राज्यमंत्री सुभाष सुधा की उपस्थिति में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें हैप्पी कार्ड वितरण और बस को रवाना करने के महत्वपूर्ण कार्य संपन्न हुए। मुख्यमंत्री नायब सिंह ने वीसी के जरिए लाभार्थियों से संवाद किया।

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परतावल में बंदरों का आतंक, छत से सीढ़ियों तक आवाजाही मुश्किल; बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता

Dipu RawatDipu RawatFollowJust now
Partawal, Uttar Pradesh:परतावल/महराजगंज। नगर पंचायत परतावल में बंदरों के बढ़ते आतंक से नगरवासी परेशान हैं। बंदरों का झुंड घरों की छतों से लेकर नीचे गलियों और सीढ़ियों तक पहुंच रहा है। स्थिति यह है कि लोगों को घरों की छत पर आने-जाने और सीढ़ियों का इस्तेमाल करने में भी डर लग रहा है। वहीं छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, बंदरों के कारण आए दिन परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। घरों के आसपास बंदरों की मौजूदगी से लोग सतर्क रहने को मजबूर हैं। खासकर छोटे बच्चों के लिए बंदरों का आतंक खतरा बना हुआ है। इस संबंध में दशरथ, अजय, राहुल और अशोक मौर्या ने बताया कि बंदरों का आतंक अब गंभीर समस्या बनता जा रहा है। नगरवासियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन और नगर पंचायत प्रशासन से मांग की है कि बंदरों को पकड़वाने के लिए उचित व्यवस्था की जाए, ताकि लोगों को इस समस्या से राहत मिल सके और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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गरियाबंद में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से राजस्व व्यवस्था बाधित

Majarkata, Chhattisgarh:स्थान...गरियाबन्द गरियाबंद जिले में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से राजस्व व्यवस्था पर असर पड़ने लगा है। छत्तीसगढ़ राजस्व पटवारी संघ के बैनर तले जिले के पटवारी 13 अक्टूबर से अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। पटवारियों के हड़ताल पर चले जाने से किसानों के राजस्व संबंधी काम अटक गए हैं, वहीं आम जनता के साथ स्कूली बच्चों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पटवारी संघ ने दो टूक कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक हड़ताल जारी रहेगी。 दरअसल, छत्तीसगढ़ राजस्व पटवारी संघ लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शासन से गुहार लगा रहा है। मांगों पर सुनवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए पटवारी 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। पटवारी संघ की चार सूत्रीय मांगों में पहली मांग पीवी ऐप में कार्य का बहिष्कार, दूसरी दमनकारी निलंबन एवं स्थानांतरण की कार्रवाई को बिना शर्त वापस लेने, तीसरी वेतन विसंगति दूर करने और चौथी राजस्व निरीक्षक के पद पर विभागीय पदोन्नति देने की है। पटवारियों की हड़ताल के चलते राजस्व विभाग से जुड़े कई जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं। किसानों को जमीन संबंधी कार्यों के लिए भटकना पड़ रहा है, वहीं स्कूली बच्चों के आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाने में भी परेशानी हो रही है।ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक पटवारियों की हड़ताल जारी रहेगी और आम जनता को इस परेशानी से कब राहत मिलेगी? बाइट 1...गुलशन यदु पटवारी संघ जिला अध्यक्ष ,पीछे फ्लेक्स लगा हुआ है बाइट 2..मनोज खरे पटवारी चश्मा लगाए हुए हैं
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मकराना व इटावा बामणिया पंचायत समितियों में शांतिपूर्ण मतदान जारी

Didwana, Rajasthan:मकराना में मकराना पंचायत समिति के सभी 109 मतदान केंद्रों पर 17 पंचायत समिति सदस्य व इटावा बामनिया पंचायत समिति के 100 मतदान केंद्रों पर 15 पंचायत समिति सदस्य तथा तीन-तीन जिला परिषद सदस्यों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से दोपहर तक मतदान प्रक्रिया जारी है। पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारी पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रहे हैं और सभी मतदान केंद्रों का निरीक्षण भी कर रहे हैं। सुबह-सुबह तो काफी मतदाताओं में उत्साह नजर आया, लेकिन दोपहर होते-होते अधिकांश मतदान केंद्रों पर इक्के दुक्के ही मतदाता दिखाई दे रहे हैं। आपकों बता दें कि मकराना पंचायत समिति क्षेत्र में दोपहर 1 बजे तक 37.92 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। वहीं, नवसृजित इटावा बामणिया पंचायत समिति क्षेत्र में 32.22 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। दोनों पंचायत समिति क्षेत्रों में मतदान शांतिपूर्ण तरीके से जारी है।
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भाजपा के महासचिव सतीश पुनिया बोले राहुल गांधी विपक्ष की भूमिका के लिए प्रशिक्षण लें

Dungarpur, Rajasthan:भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री व पंजाब प्रदेश प्रभारी सतीश पुनिया का डूंगरपुर जिले का एक दिवसीय दौरा रहा । उन्होंने भाजपा कार्यालय में जिला भाजपा कार्यकारिणी की बैठक में भाग लिया और मीडिया से रूबरू होते हुए राहुल गांधी और कांग्रेस पर हमला बोला कि विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए प्रशिक्षण की जरूरत है। संसद के भीतर हो या सड़क पर, केवल अराजकता फैलाने को कांग्रेस का चरित्र बताकर उन्होंने कहा कि SIR सत्यापन प्रक्रिया में 13 करोड़ लोगों में से 2.8 करोड़ मृत, 3 करोड़ अनुपस्थित, 6 करोड़ स्थानांतरित और 3 करोड़ अज्ञात हैं; पूर्वोत्तर और पश्चिम बंगाल में घुसपैठिये फर्जी वोटिंग कर सरकारें बनाने का आरोप किया गया। पंजाब में बदलाव की लय अभी है और आम आदमी पार्टी के खिलाफ भारी एंटी-इनकंबेंसी है। केजरीवाल ने 90 दिनों में नशा खत्म करने का दावा किया था, लेकिन पांच साल बीतने के बाद भी पंजाब में नशे की समस्या जस की तस है। पंजाब के सामने बड़े मसले—चिट्टा, क्राइम और भ्रष्टाचार। मुख्यमंत्री के बेडरूम तक जांच की आंच पहुंचने के आरोप भी सामने आए।
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परबतसर में शांतिपूर्ण तीसरे चरण के मतदान, सुरक्षा सख्त प्रबंध

Didwana, Rajasthan:डीडवाना-कुचामन जिले में पंचायती राज चुनाव के तीसरे चरण के तहत मतदान प्रक्रिया जारी है। मंगलवार को परबतसर, नावां शहर, पीलवा, मकराना और इटावा बामणिया (गच्छीपुरा) पंचायत समिति क्षेत्रों में मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। मतदान को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और भयमुक्त संपन्न करवाने के लिए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। इसी कड़ी में जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक डॉ. प्यारे लाल शिवरान ने परबतसर पंचायत समिति क्षेत्र के विभिन्न मतदान केंद्रों का दौरा कर सुरक्षा एवं मतदान व्यवस्थाओं का जायजा लिया। अधिकारियों ने मंगलाना, गांगवा, खोखर, पीपलाद, भडसिया, पीलवा, भकरी, कुराडा और हरनावा सहित कुल 9 मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान एसपी डॉ. प्यारे लाल शिवरान ने मौके पर तैनात पुलिस अधिकारियों और जवानों से सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। वहीं जिला कलेक्टर ने भी मतदान केंद्रों पर व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों से मतदान प्रक्रिया और कानून-व्यवस्था की स्थिति की जानकारी ली। प्रशासन की ओर से अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि मतदान प्रक्रिया के दौरान पूरी सतर्कता बरती जाए और मतदाताओं को बिना किसी भय या दबाव के मतदान करने का सुरक्षित माहौल उपलब्ध करवाया जाए।
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झालावाड़ दीपावली पर शुद्ध देशी घी से मिठाइयों का विशेष काउंटर शुरू

Jhalawar, Rajasthan:झालावाड़ एंकर इंट्रो_ दीपावली पर्व के अवसर पर झालावाड़ जिलेवासियों को शुद्धता, गुणवत्ता और पारंपरिक स्वाद का उपहार देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन झालावाड़ द्वारा सहकारी उपभोक्ता होलसेल भण्डар लिमिटेड के माध्यम से विशेष पहल की गई है। इसके तहत मिनी सचिवालय के मुख्य द्वार पर शुद्ध सरस देशी घी से निर्मित पारंपरिक मिठाइयों का विक्रय काउंटर शुरू किया गया है। मंगलवार को जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ ने विधिवत फीता काटकर इस काउंटर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जिला कलक्टर ने कहा कि जिलेवासियों को शुद्ध देशी घी से बनी पारंपरिक मिठाइयां उचित एवं किफायती दरों पर उपलब्ध कराने का संकल्प पिछले तीन वर्षों से निरंतर जारी है। इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी मिठाई काउंटर स्थापित किया गया है, ताकि दीपावली के अवसर पर आमजन को गुणवत्तापूर्ण मिठाइयां सहजता से उपलब्ध हो सकें। उन्होंने बताया कि मिठाइयों के निर्माण में झालावाड़ की सरस डेयरी के शुद्ध देशी घी को उपयोग में लिया गया है। मिठाइयों में प्रयुक्त अन्य सामग्री भी स्थानीय स्तर से ही क्रय की गई है। इस प्रकार यह पहल स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को भी साकार कर रही है। उन्होंने बताया कि इस बार आमजन की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पैकिंग के साथ खुली मिठाइयां खरीदने की सुविधा भी उपलब्ध करवाई गई है। मिठाइयों की गुणवत्ता और शुद्धता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मिठाई काउंटर पर बेसन चक्की, मोतीचूर के लड्डू, मक्खन वड़ा एवं मठरी जैसी पारंपरिक मिठाइयां विभिन्न वजन की पैकिंग में उपलब्ध करवाई जा रही हैं। आमजन अपनी आवश्यकता एवं सुविधानुसार 250 ग्राम, 500 ग्राम एवं 1 किलोग्राम की मात्रा में मिठाइयां खरीद सकेंगे। इसके अतिरिक्त 400 रुपये की दर से गिफ्ट पैक भी उपलब्ध करवाया गया है। जिससे दीपावली पर अपने प्रियजनों को पारंपरिक मिठाइयों का उपहार दिया जा सकेगा। मिठाई की दरें.. 1. बेसन चक्की - 1 किलोग्राम - 400 रुपये 2. मोतीचूर के लड्डू - 1 किलोग्राम - 400 रुपये 3. मक्खन वड़ा - 1 किलोग्राम - 440 रुपये 4. मठरी - 1 किलोग्राम - 280 रुपये
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डिजिटल दौर में भी दीपावली पर खाता-बही की छोटी बही की परंपरा कायम

Pratapgarh, Rajasthan:प्रतापगढ़ जिलाधिकारी संवादाता हितेष उपाध्याय (वार्ता)—जब पहले व्यापार की पूरी हिसाब-किताब कागजों में दर्ज होता था, तब खाता-बही इसका अहम हिस्सा होती थी. टेक्नोलॉजी के आगमन के साथ अब मोबाइल और कंप्यूटर आधुनिक हिसाब-किताब की जगह ले चुके हैं, लेकिन दीपावली के मौके पर बाज़ार में छोटी खाता-बही की मांग अब भी लौट आती है. व्यापारी आज डिजिटल माध्यमों पर अपना डे-टॉड्‌लिस्ट रखते हैं, फिर भी लक्ष्मी पूजन के लिए नई खाता-बही या कॉपी खरीदना नहीं भूलते. एक कारीगर के अनुसार generations से चली आ रही इस परंपरा में अब पहले जैसी मांग नहीं रही; लगभग 10% मांग शेष है. डिज़िटल दौर के बावजूद छोटी बही, लक्ष्मी की कॉपी या पूजा के लिए इस्तेमाल होने वाली छोटी लेखा-पुस्तिका खरीदना प्रतिवर्ष दीपावली पर जारी रहता है. तीन पीढ़ियों से चली आ रही इस विरासत में अब वे ही लोग इसे संभाल रहे हैं जिन्होंने दादा जी के समय से इसे आगे बढ़ाया, और अब वे तीसरी पीढ़ी के रूप में इसे बनाए हुए हैं. पहले व्यापारी बड़े आकार की खाता-बही खरीदते थे ताकि सालभर का हिसाब वहीं लिखा जा सके; अब डिजिटल जमाने में इसकी जगह छोटे-छोटे कार्यों के लिए छोटी बही की मांग अधिक है. कारोबारी बताते हैं कि पहले जितनी खाता-बही बनती थी, अब शायद 10 प्रतिशत के आस-पास ही मांग रह जाती है. पर दीपावली पर नई खाता-बही लाने और लक्ष्मी पूजन के दौरान उसकी पूजा करने की परंपरा आज भी ज़रा-सी मात्रा में बनी रहती है. खाता-बही बनाने वाले कारीगरों के सामने भी डिजिटल युग के अनुरूप बदलाव की चुनौती है, पर उनका जज्बा बनी हुई है; यह केवल रोजी-रोटी नहीं, बल्कि तीन पीढ़ियों की विरासत भी है. डिजिटल युग ने लेखा-जोखा ऑनलाइन सेवाओं और एप्स पर ला दिया है, फिर भी दीपावली के लिए छोटी बही की न्यूनतम मौजूदगी पुराने समय की याद दिलाती है.
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खैरथल तिजारा पंचायत चुनाव: तीसरे चरण के लिए मतदान शुरू, सुरक्षा इंतजाम

Bagheri Kalan, Rajasthan:खैरथल तिजारा जिले में पंचायत चुनाव के तीसरे चरण को लेकर आज लोकतंत्र का महापर्व मनाया जा रहा है। तिजारा और किशनगढ़बास पंचायत समिति की 40 सीटों के साथ जिला परिषद की 9 सीटों पर मतदान चल रहा है। इस चुनाव में करीब 1 लाख 85 हजार मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। तिजारा क्षेत्र में 93 हजार 350 और किशनगढ़बास में 91 हजार 681 मतदाता चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला तय करेंगे। चुनाव को लेकर प्रशासन की ओर से दोनों पंचायत समितियों में कुल 237 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इनमें तिजारा में 110 और किशनगढ़बास में 127 मतदान केंद्र शामिल हैं। तिजारा के मेवात बेल्ट में पोलिंग बूथ होने पर पुलिस ने कई बूथों पर अतिरिक्त पुलिस जप्ता लगाया हुआ है।
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योगी बोले: राम मंदिर के अद्भुत साकार, सनातन पर विपक्ष के दुष्प्रचार का जवाब

Pilibhit, Uttar Pradesh:एंकर-पीलीभीत के नूरानपुर स्थित श्री शंकर मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव के समापन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ पहुचे। सीएम योगी के गुरु भाई महाराज ब्रह्मलीन महंत योगी शांतिनाथ जी महाराज की पुण्य स्मृति में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में शिरकत करने पहुंचे मुख्यमंत्री ने न केवल संतों को नमन किया, बल्कि मंच से अयोध्या राम मंदिर, सनातन संस्कृति और विपक्ष के दोहरे चरित्र को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "जो कहते थे परिंदा भी पर नहीं मार सकता, आज वहां भव्य मंदिर में रामलला विराजमान हैं" कथा व्यासपीठ को प्रणाम करने के बाद मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर उन ताकतों को निशाने पर लिया जिन्होंने दशकों तक प्रभु श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाए और मंदिर निर्माण में रोड़े अटकाए। योगी आदित्यनाथ ने तीखे लहजे में कहा, "एक दौर वह भी था जब रामभक्तों पर गोलियां चलवाई जाती थीं, अयोध्या में कर्फ्यू लगाया जाता था और सत्ता के घमंड में चूर लोग दंभ भरते थे कि वहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता। आज वही अयोध्या 500 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा और लाखों बलिदानों के बाद दिव्य और भव्य रूप में दुनिया के सामने जगमगा रही है। आज भक्तों पर पुष्प वर्षा होती है। प्रभु श्रीराम अपने भव्य महल में विराजमान हो चुके हैं, लेकिन सनातन विरोधियों और तुष्टिकरण के सौदागरों की छाती पर आज भी सांप लोट रहा है।"
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आशा कर्मियों की मांगों को लेकर ऐक्टू का धरना, मजदूर नेताओं पर दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग

Mohmmad SiddiqueMohmmad SiddiqueFollow11m ago
Siswa Babu, Uttar Pradesh:महराजगंज। उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू) ने आशा कर्मियों की लंबित मांगों को पूरा करने और मजदूर नेताओं पर दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग को लेकर जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान यूनियन पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल के माध्यम से उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में 24 अक्टूबर 2026 को लखनऊ के आलमबाग थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 0156 को निरस्त करने और आशा कर्मियों का उत्पीड़न बंद करने की मांग की गई है। यूनियन के मुताबिक, 7 फरवरी 2026 को स्वास्थ्य मंत्री की मध्यस्थता में आशा कर्मियों की 13 सूत्रीय मांगों पर सहमति बनी थी। इसके बाद हड़ताल समाप्त कर दी गई थी। इन सहमतियों को लागू कराने की मांग को लेकर 23 अक्टूबर को लखनऊ के इको गार्डन में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। संगठन का कहना है कि कार्यक्रम के दौरान प्रतिनिधिमंडल की मिशन निदेशक और अन्य अधिकारियों से वार्ता हुई, जिसके बाद कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कर दिया गया। इसके बावजूद यूनियन का आरोप है कि 24 अक्टूबर की रात 2:17 बजे ऐक्टू प्रदेश अध्यक्ष विजय विद्रोही, देवानंद, राजेश सिंह, कमला गौतम और आइसा प्रदेश अध्यक्ष अनीष बुजार समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया गया। संगठन ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इको गार्डन के अंदर और बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के आधार पर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। ज्ञापन में आशा कर्मियों के बकाया प्रोत्साहन भुगतान, लंबित पीएलआई और अन्य मदों की धनराशि दीपावली से पहले जारी करने की मांग भी उठाई गई। इसके साथ ही राज्य वित्त से मिलने वाले अंशदान में 4,500 रुपये की बढ़ोतरी, प्रोत्साहन राशि में 50 प्रतिशत वृद्धि, मातृत्व अवकाश, साप्ताहिक और त्योहारी छुट्टियां देने की मांग की गई। यूनियन ने सभी ब्लॉकों में आशा संगिनी और एएनएम के लिए अलग कक्ष या पंचायत भवन में वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की भी मांग रखी। इस मौके पर अध्यक्ष संगीता, कुसमाती, पूनम सिंह, मीरा देवी, मनोरमा देवी, कुमारी उषा देवी, शकुंतला, लक्ष्मी मद्धेशिया, माधुरी देवी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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पुलिस वाहन को लेकर भागा पगला,,सुरक्षा अब किसके भरोसे,,

Avinash Babu PatelAvinash Babu PatelFollow12m ago
Dabhara, Chhattisgarh:सक्ती पुलिस की लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। सक्ती के पुलिस जनसंवाद केंद्र के सामने साइबर थाने की खड़ी सरकारी गाड़ी को एक मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति स्टार्ट कर लेकर भाग गया। इससे पुलिस महकमे में हड़कंप है। सूत्रों के मुताबिक, साइबर थाना की सरकारी गाड़ी के चालक की लापरवाही ऐसी की गाड़ी के अंदर चाबी छोड़ दिया था, बस इसी का फायदा उठाकर विक्षिप्त व्यक्ति गाड़ी लेकर फर्राटा भरने लगा। गाड़ी की रफ्तार इतनी तेज थी कि कुछ ही घण्टों में कोरबा जिला पहुंच गई। सवाल यह है कि आखिर इतनी लापरवाही क्यों कि गई, इसे लोगों की जान जा सकती थी। क्या साइबर थाने के जवान इतने लापरवाह हो गए हैं कि सरकारी हथियार और गाड़ी तक सुरक्षित नहीं? अगर गाड़ी में कोई गोपनीय फाइल या हथियार होता तो कौन जिम्मेदार होता,,, पुलिस अधिकारी ने कहा कि अखराभाठा का एक विक्षिप्त व्यक्ति पहले गाड़ी चलाने का काम करता था, कुछ समय बाद उसकी दिमाकी संतुलन बिगड़ है और अब आस पास घूमता रहता है। आज उसी ने सरकारी गाड़ी को स्टार्ट कर लिया और लेकर भाग निकला था, हालांकि गाड़ी को पुलिस ने पकड़ लिया है और बड़ी घटना रोक लिया गया है। नियम क्या कहता है? शासकीय वाहन अधिनियम और पुलिस मैन्युअल के तहत – 1. सरकारी गाड़ी को कभी भी चाबी लगाकर लावारिस नहीं छोड़ा जा सकता। 2. वाहन में हमेशा ड्राइवर या संतरी का होना अनिवार्य है। 3. लापरवाही बरतने वाले कर्मचारी पर पुलिस रेगुलेशन 771 के तहत विभागीय कार्रवाई का प्रावधान है।
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बिहार में राजपूत नेताओं की उपेक्षा पर NDA के भीतर उभरे प्रश्न

Chapra, Bihar:बिहार की राजनीति में राजपूत समाज की हिस्सेदारी और राजनीतिक हैसियत को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। एनडीए के भीतर राजपूत नेताओं की भूमिका और उनके प्रभाव को लेकर दिए गए सांसद राजीव प्रताप रूढ़ी के एक बयान ने राजनीतिक बहस को नया मुद्दा दे दिया है। बयान में साफ तौर पर राजपूत समाज की कथित राजनीतिक उपेक्षा और नेताओं की घटती स्वीकार्यता का सवाल उठाया गया है。 रूढ़ी ने कहा कि हम सभी एनडीए का हिस्सा हैं और गठबंधन के प्रत्याशी को जिताने के लिए पूरी मेहनत की गई थी। दुख है कि जदयू के प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सके। उन्होंने प्रत्याशी को एक सुलझा हुआ व्यक्ति बताते हुए कहा कि उनकी हार दुखद है。 राजपूत समाज के किसी प्रत्याशी को संरक्षण देने और चुनाव में मदद करने के आरोपों पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को बार-बार ठाकुर या राजपूत समाज का बताकर आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि यदि राजीव प्रताप रूडी चाहते तो प्रत्याशी को बैठा सकते थे, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां ऐसी नहीं हैं。 उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "आज बिहार में किसी भी राजपूत को किसी नेता पर कोई भरोसा नहीं है। आपको क्या लगता है कि भाजपा किसी राजपूत को इतना महत्व दे रही है कि उसके कहने पर कोई दूसरा अपनी उम्मीदवारी छोड़ देगा?" उन्होंने आगे कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी को तय करना होगा कि किसी प्रत्याशी को बैठाने के मामले में किस नेता की बात को कितनी अहमियत दी जाती है। बिहार में किसी राजपूत नेता के कहने मात्र से दूसरा राजपूत प्रत्याशी अपना चुनावी दावा छोड़ देगा, ऐसी स्थिति फिलहाल नहीं है। इस बयान के जरिए राजपूत समाज की राजनीतिक उपेक्षा, नेतृत्व के प्रभाव और गठबंधन के भीतर समाज की वास्तविक भागीदारी को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। खास बात यह है कि यह सवाल विपक्ष की ओर से नहीं, बल्कि एनडीए के भीतर से उठाया गया है。
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डुमरिया में सड़क- पुल निर्माण के लिए ग्रामीणों का बड़ा प्रदर्शन

Ghatshila, Jharkhand:झारखंड में विकास के दावों के बीच पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड से एक तस्वीर सामने आई है जो ग्रामीण विकास की हकीकत बयां कर रही है। आजादी के दशकों बाद भी यहां के कई गांव सड़क और पुल-पुलिया जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। बरसात में नदियां और नाले ग्रामीणों के रास्ते रोक देते हैं। इसी बदहाल व्यवस्था के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा आज सड़कों पर दिखाई दिया। पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की बेटी और समाजसेवी दुखनी सोरेन के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने रैली निकालकर डुमरिया प्रखंड मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार को चेतावनी देते हुए आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। तस्वीरें पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड मुख्यालय की हैं जहां सड़क और पुल-पुलिया निर्माण की मांग को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट हुए। पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की बेटी और समाजसेवी दुखनी सोरेन के नेतृत्व में ग्रामीणों ने रैली निकाली और प्रखंड कार्यालय पहुंचकर प्रशासन तथा राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप है कि डुमरिया की कई पंचायतों में आज भी बुनियादी सड़क और पुल-पुलिया की सुविधा उपलब्ध नहीं है। विकास के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी परेशानी नदी और नालों पर पुल नहीं होना है। हरेबेड़ा से नरसिंहबहाल को जोड़ने वाली नदी पर पुलिया नहीं होने के कारण लोगों को आवागमन में भारी परेशानी होती है। वहीं जय नदी और शंख नदी पर भी समुचित पुल की व्यवस्था नहीं होने से आसपास के गांवों का संपर्क प्रभावित होता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। नदी-नाले उफान पर होते हैं और कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़क से कट जाता है। इसका खामियाजा स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों और मजदूरों को भुगतना पड़ता है। कई बार आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों ने केवल पुल-पुलिया ही नहीं बल्कि जर्जर ग्रामीण सड़कों के निर्माण और पूर्व में सड़क निर्माण के दौरान अधिग्रहित की गई रैयती जमीन का उचित मुआवजा देने की मांग भी उठाई। प्रदर्शन के दौरान उस समय ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया जब वे अपनी समस्याएं रखने प्रखंड कार्यालय पहुंचे तो वहां बीडीओ और सीओ मौजूद नहीं थे। ग्रामीणों ने अधिकारियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में प्रखंड कार्यालय में तालाबंदी की जाएगी। आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं दुखनी सोरेन ने राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार ग्रामीण विकास के नाम पर जनता को ठग रही है। अधिकारियों को ग्रामीणों की समस्याओं और उनके दुख-दर्द से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी बहुल डुमरिया प्रखंड में भ्रष्टाचार, दलाली और कमीशनखोरी चरम पर है। अधिकारी समय पर कार्यालय नहीं पहुंचते और न ही गांवों में जाकर लोगों की समस्याओं को समझने की कोशिश करते हैं। उन्होंने प्रशासन से व्यवस्था में सुधार और ग्रामीणों की मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। वहीं प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों का कहना है कि सड़क, पुल और मुआवजे जैसी बुनियादी समस्याओं को लेकर वे कई बार स्थानीय प्रशासन, सांसद और विधायक तक अपनी फरियाद पहुंचा चुके हैं लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने साफ कहा कि अब आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर काम चाहिए। जब तक उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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