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विदेशी मध्यस्थता अवार्ड पर न्यायिक अनुशासन का संतुलित इस्तेमाल जरूरी: जस्टिस गवई

Jaipur, Rajasthan:कार्यक्रम के शॉट बॉडी- कार्यक्रम के बाद में राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश से जुड़े हालिया विवाद पर न्यायाधीश गवई ने कहा कि न्यायपालिका एक अनुशासित संस्था है और ऐसे मामलों को लेकर न्यायिक अनुशासन बनाए रखना बेहद जरूरी है। न्यायाधीश गवई ने कहा कि न्यायाधीश संदीप मेहता उनके छोटे भाई जैसे है और उनके द्वारा इस तरह का कदम उठाना उनके लिए “शॉकिंग” था। जब उन्होंने जस्टिस मेहता से पूछा कि उन्होंने ऐसा क्यों किया, तो जवाब मिला कि उनका धैर्य जवाब दे चुका था। जस्टिस मेहता ने उनसे कहा कि वे राजस्थान हाईकोर्ट को अपनी मां मानते हैं तो कोई उनकी मां के साथ कथित दुर्व्यवहार करे तो वे चुप कैसे रह सकते हैं। हालांकि जस्टिस गवई ने यह भी कहा कि इस तरह के पत्रों और आरोपों को सार्वजनिक डोमेन में ले जाना उन्हें उचित नहीं लगा। उनका कहना है कि न्यायपालिका जैसे संस्थान में ऐसे गंभीर मुद्दों को पहले संस्थागत स्तर पर सुलझाने का प्रयास होना चाहिए, लेकिन गंभीर शिकायत हो तो तथ्यों के आधार पर कार्रवाई जरूरी है। तुरंत बैठक बुलाकर फैसला उन्होंने अपने कार्यकाल का उदाहरण देते हुए बताया कि तत्कालीन मुख्य न्यायधीश संजीव खन्ना के समय एक हाईकोर्ट जज के खिलाफ कॉलेजियम के एक सदस्य ने गंभीर शिकायत की थी। सीजेआइ खन्ना ने उसी दिन कॉलेजियम की बैठक बुलाकर आरोपों की जांच कराई और तथ्यों के आधार पर संबंधित जज के तबादले का निर्णय लिया, लेकिन ऐसे मामलों में कोई एक जैसी पॉलिसी या नियम नहीं हो सकते हैं। हर मामले में सामने आए तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए। भावुक हुए पूर्व सीजेआइ यह कार्यक्रम न्यायाधीश बी.आर. गवई के लॉ क्लर्क रहे यशराज सामंत की पहली पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित किया गया। इस दौरान यशराज सामंत के पोर्ट्रेट का अनावरण भी किया गया। न्यायाधीश गवई ने एडवोकेट यशराज को याद करते हुए कहा कि उनके साथ उनका बेहद आत्मीय और व्यक्तिगत संबंध था। उन्होंने बताया कि उन्हें यशराज की पुस्तक “ स्पेसलाइजड आर्बिटेशन, इमर्जिंग इंटरनेशनल ट्रेंड्स एंड प्रेस्टिसेस” के लिए फॉरवर्ड लिखने का अवसर मिला था। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव के मार्गदर्शन में यशराज एक बेहद प्रतिभाशाली और होनहार युवा काउंसल के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहे थे। महेश पारीक, ज़ी मीडिया जयपुर
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नालंदा पैक्स ने बकाया भुगतान के लिए सात दिन का अल्टीमेटम जारी किया

Pariaunna, Bihar:नालंदा में धान और गेहूं अधिप्राप्ति की राशि का भुगतान नहीं होने से पैक्स अध्यक्षों में नाराजगी है। पैक्स अध्यक्षों ने राज्य खाद्य निगम पर भुगतान में देरी का आरोप लगाते हुए बिहार शरीफ में बैठक कर सात दिनों का अल्टीमेटम दिया है। मांग पूरी नहीं होने पर डीएम कार्यालय का घेराव, तालाबंदी और चक्का जाम करने की चेतावनी दी है। नालंदा में 229 समितियों ने 21 हजार 692 किसानों से करीब 13.30 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की, जिसके बाद करीब 90 हजार 212 मीट्रिक टन चावल राज्य खाद्य निगम को आपूर्ति किया गया। पैक्स के मुताबिक, इसकी करीब 130 करोड़ 60 लाख रुपये की राशि लंबे समय से लंबित है। वहीं, 72 समितियों ने 307 किसानों से 1,222 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा, जिसमें करीब 2.03 करोड़ रुपये का भुगतान अभी बाकी है। पैक्स अध्यक्षों का कहना है कि भुगतान में देरी के कारण सहकारी बैंक से लिए गए कैश क्रेडिट ऋण पर ब्याज बढ़ रहा है और समितियां डिफॉल्टर होने की कगार पर हैं। पैक्स अध्यक्षों ने सात दिनों के भीतर बकाया भुगतान की मांग की है। भुगतान नहीं होने पर आंदोलन, सहकारिता विभाग में तालाबंदी और चक्का जाम की चेतावनी दी गई है।
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शिक्षक दिवस पर नाबालिग छात्रा के साथ श्लीलताहनिर आरोप: गिरफ्तार गृहनशिक्षक

Howrah, West Bengal:শিক্ষক দিবসেই নাবালিকা ছাত্রীকে শ্লীলতাহানির অভিযোগ।গ্রেফতার গৃহশিক্ষিক। শিক্ষক দিবসেই গৃহশিক্ষকের বিরুদ্ধে নাবালিকা ছাত্রীকে শ্লীলতাহানির অভিযোগ। শনিবার ঘটনাকে কেন্দ্র করে উত্তেজনা ছড়ায় জগৎবল্লভপুরের মুন্সিরহাটে। গৃহশিক্ষক তপন কুমার কোলেকে ধরে মারধর করে স্থানীয় বাসিন্দারা। পরে পুলিশ গিয়ে তাঁকে উদ্ধার করে গ্রেপ্তার করে।পুলিশ সূত্রে জানা গিয়েছে, তপনবাবু নিজের নার্সারির ভিতর গত কয়েক বছর ধরে এলাকার স্কুলপড়ুয়াদের টিউশন পড়ান। শনিবার সেখানে পড়তে গিয়েছিল পঞ্চম শ্রেণির এগারো বছরের ওই ছাত্রী। অভিযোগ, অন্য পড়ুয়াদের ছুটি দিয়ে তাকে কিছুক্ষণ অপেক্ষা করতে বলা হয়। এরপর ফাঁকা জায়গায় ওই ছাত্রীর সঙ্গে অশালীন আচরণ করা হয় বলে অভিযোগ।ঘটনার পর কোনওরকমে বাড়ি ফিরে পরিবারের সদস্যদের সব জানায় ছাত্রীটি। খবর ছড়িয়ে পড়তেই ক্ষোভে ফেটে পড়েন স্থানীয় বাসিন্দারা। খবর পেয়ে জগৎবল্লভপুর থানার পুলিশ ঘটনাস্থলে গিয়ে তাঁকে উদ্ধার করে থানায় নিয়ে যায়। অভিযুক্তের বিরুদ্ধে শ্লীলতাহানির ধারায় মামলা রুজু হয়েছে। ঘটনার তদন্ত শুরু করেছে পুলিশ।তাকে গ্রেফতার করা হয়েছে।আগামীকাল পেশ করা হবে আদালতে。
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कांग्रेस रांची में विशाल महा-धरना का ऐलान, चंदा चोरी और खनिज संशोधन बिल के खिलाफ

Dhanbad, Jharkhand:MMDR एक्ट संशोधन विधेयक और 'चंदा चोरी' जैसे मुद्दे को लेकर कांग्रेस पार्टी 7 सितंबर को रांची राज भवन के समक्ष एक विशाल महा-धरना और प्रदर्शन का आयोजन करने जा रहा है. इस धरना प्रदर्शन में धनबाद से भी हजारों की संख्या में कोंग्रेसी शामिल होने जायेंगे. प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला अध्यक्ष संतोष सिंह ने बताया कि आंदोलन की सफलता को लेकर तैयारी पूरी है. यह आंदोलन चंदा चोरी और खान व खानिज संशोधन बिल के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और यहां की खनिज संपदा पर सबसे पहला अधिकार जनता के हितों में होना चाहिए. खनिज संशोधन बिल के प्रावधान को लेकर कांग्रेस अपनी आपत्तियां लोकतांत्रिक व शांतिपूर्ण तरीके से सरकार के समक्ष रखेंगी. चंदा चोरी के आरोप की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए.
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शिक्षक दिवस पर साहिबगंज में शहीद चंद्राय सोरेन के स्मृति लाइब्रेरी का उद्घाटन

Sahibganj, Jharkhand:शिक्षक दिवस के अवसर पर साहिबगंज पुलिस ने साहिबगंज के वीर शहीद ASI चंद्राय सोरेन की स्मृति में एक आधुनिक लाइब्रेरी का उद्घाटन एसपी कार्यालय परिसर में एसपी अमित कुमार सिंह ने किया। 2020 में बरहेट में उग्रवादी से लोहा लेते हुए चंद्राय सोरेन शहीद हो गए थे। वीर शहीद चंद्राय सोरेन के नाम पर इस पुस्तकालय का नामकरण किया गया है, ताकि युवाओं में देशभक्ति की भावना जागृत रहे। एसपी अमित कुमार सिंह ने उद्घाटन के बाद बताया कि इस आधुनिक लाइब्रेरी का मुख्य उद्देश्य पुलिस परिवार के बच्चों, व अन्य छात्र-छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UPSC, JPSC, SSC) की तैयारी कर रहे स्थानीय युवाओं और खुद पुलिसकर्मियों को पढ़ाई के लिए एक शांत और उत्कृष्ट माहौल देना है। इस पुस्तकालय में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी किताबों के अलावा साहित्य, इतिहास और ज्ञानवर्धक पुस्तकों के साथ-साथ कानून की किताबें धर्म ग्रंथ की किताबो का भी एक बड़ा संग्रह है। यह कदम शिक्षा की ज्योति फैलाने के साथ-साथ देश के वीर शहीदों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक बेहतरीन उदाहरण है। वही इस अवसर पर CM एक्सीलेंस पोखरिया विद्यालय की छात्राओं जिनके द्वारा 15 अगस्त के मौके पर राष्ट्रगान और वंदे मातरम का बहुत अच्छा प्रस्तुति किया गया था, एसपी अमित कुमार सिंह ने बच्चियों को प्रशस्ति पत्र देते हुए सम्मानित किया। इसी अवसर पर साहिबगंज जिला के पुलिसकर्मियों के द्वारा विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में जीते गए पुरस्कार का भी एक संग्रह कर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में स्थापित किया गया है।
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बिहार में जन्माष्टमी पर सियासी घमासान: सनातन बनाम तुष्टिकरण की राजनीति

Patna, Bihar:जेडीयू ने कहा ये सारी बातें पूरी तरह बेबुनियाद हैं और इस तरह के आरोप लगाकर राष्ट्रीय जनता दल खुद अपनी जड़ों को खोदने का काम कर रहा है। सायन कुणाल कोई छोटे-मोटे व्यक्ति नहीं हैं। वे स्वर्गीय आचार्य किशोर कुणाल जी के बेटे हैं, जिनका आध्यात्मिक क्षेत्र में, बिहार की गंगा-जमुनी तहज़ीब और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में पूरे देश में सम्मान रहा है। सायन कुणाल भी उसी परंपरा और उसी राह पर आगे बढ़ रहे हैं। जहाँ तक अशोक चौधरी जी का सवाल है, सायन कुणाल उनके दामाद हैं। उनका अपने ससुर के कार्यक्रम में जाना स्वाभाविक है और उन्होंने एक अच्छा आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किया। मेरा मानना है कि ऐसे कार्यक्रम समाज को जोड़ने का काम करते हैं। बिहार की खूबसूरती ही उसकी गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी भाईचारे में है। धर्म कोई भी हो, हर धर्म इंसान को प्रेम, शांति और मिल-जुलकर रहने की शिक्षा देता है। इसलिए राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं को इस तरह के आरोप लगाकर समाज को कमजोर करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन समाज की एकता और भाईचारा उससे कहीं ऊपर है। बाइट — खालिद अनवर, MLC जेडीयू भाजपा ने कहा आरजेडी के नेताओं के बयानों से साफ है कि उन्हें सनातन और हमारी संस्कृति से कोई लेना-देना नहीं है। ये लोग लगातार ऐसे बयान देते हैं, जिससे एक वर्ग विशेष को खुश करके वोट बैंक की राजनीति की जा सके। लेकिन बिहार की जनता अब इस राजनीति को अच्छी तरह समझ चुकी है। जहां तक जन्माष्टमी के आयोजन का सवाल है, कोई भी सनातनी व्यक्ति भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाता है। सायन कुणाल जी ने जिस भव्यता के साथ जन्माष्टमी का आयोजन किया, उसके लिए उन्हें हृदय से धन्यवाद देना चाहिए। बिहार के गांव-गांव और कोने-कोने में जन्माष्टमी मनाई जाती है। इसमें किसी को आपत्ति या जलन क्यों होनी चाहिए? और सुनील सिंह जी अगर लूट-खसोट की बात करते हैं, तो उन्हें अपने राजनीतिक अतीत और अपनी पार्टी के इतिहास पर भी नजर डालनी चाहिए। आरजेडी के शासनकाल को बिहार की जनता ने कानून-व्यवस्था और जंगलराज से जोड़कर देखा है। इसलिए दूसरों पर आरोप लगाने से पहले उन्हें अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। आरजेडी की यही वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति बिहार की जनता पहले भी नकार चुकी है। आने वाले समय में भी जनता अपने वोट से जवाब देगी। सनातन का अपमान करने और समाज को बांटने की राजनीति करने वालों को बिहार की जनता निश्चित रूप से सबक सिखाएगी। बाइट — पवन जयसवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष भाजपा राजद ने कही जन्माष्टमी आस्था और भक्ति का पर्व है, लेकिन सवाल ये है कि सरकार और सत्ता से जुड़े लोग इस पर्व को किस तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। एक तरफ बिहार बाढ़ की मार झेल रहा है, लोग परेशान हैं, और दूसरी तरफ करोड़ों रुपये खर्च करके बड़े-बड़े आयोजन किए जा रहे हैं। पटना के कृष्णोत्सव में पंजाबी सिंगर बी प्राक को बुलाया गया, कार्यक्रम में अशोक चौधरी जी और उनकी बेटी शांभवी चौधरी की मौजूदगी रही। अब सवाल ये है कि क्या बिहार में कलाकारों की कमी है? क्या बिहार के भोजपुरी और स्थानीय कलाकार इतने कमजोर हैं कि जन्माष्टमी के मंच पर उन्हें मौका नहीं दिया जा सकता? बिहार की जनता ये सवाल पूछ रही है कि भगवान कृष्ण के नाम पर होने वाला आयोजन कहीं राजनीतिक लॉन्चिंग का मंच तो नहीं बन रहा? अगर बिहार और बिहारी की इतनी ही चिंता है, तो बिहार के कलाकारों, युवाओं और बाढ़ पीड़ितों पर भी उतना ही ध्यान क्यों नहीं? आप बिहार की संस्कृति की बात करते हैं, बिहार के गौरव की बात करते हैं, लेकिन जब मौका आता है तो स्थानीय कलाकारों को छोड़कर बाहर से कलाकार बुलाए जाते हैं। इसलिए सवाल बिल्कुल सीधा है—जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के भक्ति उत्सव के लिए थी या राजनीतिक परिवार के प्रचार और लॉन्चिंग के लिए। बाइट — मधुमंजूरी, प्रवक्ता राजद कांग्रेस ने कहा देखिए, अशोक चौधरी जी लगातार अपने दामाद को राजनीति में सेट करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अपना कोटा भी तय कर दिया है और अब तमाम कोटा होने के बावजूद लगातार ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनके जरिए किसी न किसी तरीके से अपने दामाद को एडजस्ट कराया जा सके। बेटी को तो उन्होंने सेट कर लिया, लेकिन राजनीति में किसी को कोई नेता नहीं, बल्कि जनता सेट करती है। और जनता से चुके हुए लोग अगर इस तरह के कार्यक्रमों और कोटा के सहारे अपने परिवार को राजनीति में स्थापित करने की कोशिश करेंगे, तो बिहार की जनता इसे अच्छी तरह समझती है। सच्चाई यह है कि जनता परिवारवाद और इस तरह की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी। जनता के बीच जिसकी स्वीकार्यता होगी, वही राजनीति में आगे बढ़ेगा—किसी नेता की कृपा या किसी कोटे से नहीं। बाइट — डॉ. स्नेहाशीष वर्धन, प्रवक्ता, बिहार कांग्रेस
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संजय गांधी अस्पताल में मृत घोषित कराने के मामले पर NSUI का प्रदर्शन

Rewa, Madhya Pradesh:रीवा के संजय गांधी अस्पताल में जिंदा मरीज को मृत घोषित किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। अस्पताल प्रबंधन की कथित लापरवाही के विरोध में NSUI कार्यकर्ता शनिवार को संजय गांधी अस्पताल पहुंचे और जमकर नारेबाजी करते हुए अस्पताल के सामने धरने पर बैठ गए। NSUI कार्यकर्ताओं ने मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जिस अस्पताल में मरीजों की जान से जुड़ी इतनी गंभीर लापरवाही सामने आ रही है, वहाँ व्यवस्थाएं लगातार सवालों के घेरे में हैं। NSUI कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाते हुए कहा कि फर्स्ट ईयर की एक महिला स्टूडेंट को मृत घोषित कर दिया जाना संजय गांधी अस्पताल की बदहाल व्यवस्था का दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण है। कार्यकर्ताओं ने अस्पताल में डॉक्टरों की उपलब्धता और ड्यूटी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। वहीं प्रदर्शनकारियों ने नवनियुक्त अस्पताल अधीक्षक डॉ. प्रियंक शर्मा को लेकर भी आरोप लगाए कि वे ड्यूटी समय में अपने निजी नर्सिंग होम में ऑपरेशन कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रदर्शन के दौरान अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर सामने नहीं आया। फिलहाल जिंदा मरीज को मृत घोषित किए जाने का मामला गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। प्रदर्शनकारी पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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जोधपुर: 180 ग्राम MD केस में 19 वर्षीय युवक की जमानत अदालत ने खारिज की

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने 180 ग्राम मेफेड्रोन (एमडी) की बरामदगी के मामले में जेल में बंद 19 वर्षीय आरोपी नंदकिशोर की जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायाधीश बलजिंदर सिंह संधू की बेंच ने आदेश में कहा कि बरामद एमडी की मात्रा व्यावसायिक मात्रा से अधिक है, ऐसे में एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के तहत जमानत की कठोर शर्तें लागू होती हैं। मामला प्रतापनगर थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 280/2024 से जुड़ा है। police के अनुसार 14 दिसंबर 2024 की रात गुप्त सूचना के आधार पर किराए के मकान पर दबिश दी गई थी। तलाशी के दौरान नंदकिशोर के कब्जे से 180 ग्राम और एक अन्य आरोपी बजरंग के पास से 157.25 ग्राम एमडी बरामद हुई थी। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि तलाशी सूर्यास्त के बाद ली गई और पुलिस ने वारंट नहीं लिया। साथ ही धारा 42 के तहत वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना भेजने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि सूचना रात 8:30 बजे लिखित रूप में दर्ज की गई थी और बिना वारंट कार्रवाई के कारण भी दर्ज किए गए थे। सूचना तत्काल वरिष्ठ अधिकारी को भेजी गई थी। कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया धारा 42 की प्रक्रिया का पालन हुआ है। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर यह संतुष्टि दर्ज नहीं की जा सकती कि आरोपी कथित अपराध का दोषी नहीं है। इसलिए धारा 37 की शर्तें पूरी नहीं होने से जमानत याचिका खारिज की जाती है。
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छपरा में मटकी फोड़ प्रतियोगिता ने कृष्ण भक्तों के उत्साह को चढ़ाया ऊंचा

Chapra, Bihar:छपरा में मटकी फोड़ प्रतियोगिता में दिखा कृष्ण भक्ति का रंग, वृंदावन के कलाकारों ने बांधा समां कृष्ण जन्माष्टमी के दूसरे दिन छपरा शहर के हृदयस्थली कहे जाने वाले नगर पालिका चौक पर मटकी फोड़ प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। आयोजन को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। शहर के साथ-साथ जिले के अलग-अलग प्रखंडों से कन्हैया की टोलियां कार्यक्रम में पहुंचीं और मटकी फोड़ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। इस दौरान एम्स के कैंसर विभागाध्यक्ष डॉक्टर जगजीत पांडे ने कार्यक्रम में पहुंचे अतिथियों का स्वागत किया। इसके बाद वृंदावन से आए कलाकारों ने राधा-कृष्ण की मनमोहक नृत्य प्रस्तुति दी। कलाकारों की प्रस्तुति ने वहां मौजूद श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरा माहौल कृष्णमय हो गया। मटकी फोड़ प्रतियोगिता में जिले के कई प्रखंडों से पहुंची कन्हैया की टोलियां ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। युवाओं ने उत्साह के साथ मानव पिरामिड बनाकर ऊंचाई पर लटकाई गई मटकी तक पहुंचने का प्रयास किया। काफी मशक्कत और उत्साह के बाद महिला कान्हा की टोली ने मटकी फोड़ दी। मटकी फूटते ही वहां मौजूद लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई और जय श्रीकृष्ण तथा राधे-राधे के जयकारे गूंजने लगे। इसके बाद टोली के सदस्यों ने मटकी में रखे माखन का प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम के दौरान लगातार बज रहे कृष्ण के भक्तिगीतों से नगर पालिका चौक का माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। बड़ी संख्या में लोग मटकी फोड़ प्रतियोगिता और राधा-कृष्न की झांकी व नृत्य प्रस्तुति देखने के लिए जुटे रहे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में आयोजन को लेकर खासा उत्साह नजर आया। कृष्ण जन्माष्टमी के दूसरे दिन आयोजित इस कार्यक्रम ने छपरा शहर में उत्सव और भक्ति का रंग और गहरा कर दिया। नगर पालिका चौक पर आयोजित मटकी फोड़ प्रतियोगिता के दौरान ऐसा माहौल बना, मानो पूरा शहर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में डूब गया हो।
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कश्मीर में पहला इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल: बॉलीवुड के साथ फिर जुड़ाव

Chaka, कश्मीर अपनी फ़िल्मी शान वापस पा रहा है: बॉलीवुड के जादू के दशकों बाद घाटी में पहली बार इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल हो रहा है। 1960 से 1980 के दशक तक, कश्मीर घाटी न सिर्फ़ एक खूबसूरत बैकड्रॉप थी, बल्कि लगभग हर सफल बॉलीवुड फ़िल्म में एक किरदार की तरह थी। बर्फ़ से ढकी चोटियाँ, चमकती डल झील, गुलमर्ग और पहलगाम के घास के मैदान और शिकारों का रोमांटिक आकर्षण—इन सबने सदाबहार क्लासिक फ़िल्मों के लिए एक बेहतरीन कैनवस का काम किया। 'जंगली', 'कश्मीर की कली', 'जब-जब फूल खिले', 'बॉबी', 'कभी-कभी', 'नूरी', 'सिलसिला' और 'बेताब' जैसी फ़िल्मों ने इस इलाके को सिनेमा की पसंदीदा जगह बना दिया था। रोमांस, जवानी और खूबसूरती की इन कहानियों के ज़रिए पूरे भारत के दर्शकों को कश्मीर से प्यार हो गया और फ़िल्म इंडस्ट्री की मौजूदगी के साथ-साथ टूरिज़्म भी खूब फला-फूला। आतंकवाद के आने के साथ ही वह सुनहरा दौर खत्म हो गया; सिनेमा हॉल बंद हो गए, फ़िल्म यूनिट्स का आना बंद हो गया और सिल्वर स्क्रीन के साथ घाटी का गहरा रिश्ता दशकों तक टूट गया। अब, वापसी और फिर से जुड़ने की एक बड़ी मिसाल के तौर पर, जम्मू-कश्मीर अपना पहला 'इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल ऑफ़ जम्मू-कश्मीर' (IFFJK 2026) आयोजित करने जा रहा है, जिसकी थीम है "रंग-ए-सिनेमा" (सिनेमा के रंग)। 7 से 10 सितंबर, 2026 तक होने वाला यह फ़ेस्टिवल, मई 2023 में श्रीनगर में हुई G20 टूरिज़्म वर्किंग ग्रुप की मीटिंग के बाद इस इलाके में होने वाला दूसरा बड़ा इंटरनेशनल इवेंट है। जम्मू-कश्मीर सरकार के सूचना और जनसंपर्क विभाग (DIPR) और नेशनल फ़िल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC) के सहयोग से आयोजित यह फ़ेस्टिवल, प्रशासन की एक सोची-समझी कोशिश है ताकि कश्मीर को सिनेमा, क्रिएटिविटी, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और फ़िल्म टूरिज़्म के एक जीवंत केंद्र के तौर पर फिर से स्थापित किया जा सके। सरकार की कोशिश है कि कश्मीर और जम्मू के इलाकों में फ़िल्म टूरिज़्म को बढ़ावा दिया जाए और बॉलीवुड के लोगों को यह भरोसा दिलाया जाए कि यहाँ काम किया जा सकता है। इसका एक फ़ायदा यह भी हो सकता है कि हमारी लोकल फ़िल्म इंडस्ट्री, जो कभी बहुत अच्छी थी लेकिन कुछ हालात की वजह से उसमें थोड़ी गिरावट आई थी, उसे फिर से ऊंचाइयों पर ले जाया जा सके और मज़बूती दी जा सके। मुझे यकीन है कि अगर कश्मीर को एक पॉज़िटिव नज़रिए से दिखाया जाए, तो बॉलीवुड के लोग यहाँ आएंगे, इन्वेस्ट करेंगे, लोकल रोज़गार पैदा होगा और कश्मीर की सुंदरता के गीत एक बार फिर दुनिया के हर कोने में गाए जाएंगे, जैसा पहले हुआ करता था। इसलिए हमारी कोशिश है कि यह इवेंट हर साल हो और कान फ़िल्म फ़ेस्टिवल की तरह ही हमारे देश में, यानी जम्मू-कश्मीर में भी हर साल एक इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल होता रहे। देखिए, हमने 92 देशों से लगभग 1,000 से 1,100 फ़िल्में हासिल कीं, जिनके लिए हमने एप्लीकेशन मंगवाई थीं। इसके लिए एक प्रीव्यू कमिटी बनी थी, जिसने लगभग 135 फ़िल्मों को शॉर्टलिस्ट किया। ये तीन कैटेगरी में हैं: एक इंटरनेशनल कैटेगरी है, जिसमें इंटरनेशनल फ़िल्में हैं; एक 'भारत पैनोरमा' है, जिसके लिए हमने पूरे देश से एंट्रीज़ मंगवाई थीं; और एक 'जम्मू-कश्मीर सिलेक्ट' कैटेगरी है, जिसमें हमने लोकल लोगों के लिए एक तरह का रिज़र्वेशन भी रखा है ताकि उनकी फ़िल्में अलग से कॉम्पिटिशन में हिस्सा ले सकें। तो यह जूरी का फ़ैसला है; इसमें हमारे डिपार्टमेंट की कोई भूमिका नहीं है। वे सिनेमा की दुनिया के बहुत जाने-माने और इंडिपेंडेंट लोग हैं और उन्होंने 135 फ़िल्में चुनी हैं। अब उनकी स्क्रीनिंग हमारे INOX में होगी। एक और जूरी, यानी असली जूरी कमिटी—वह प्रीव्यू कमिटी थी, अब जूरी कमिटी है—उन फ़िल्मों को देखेगी, और इन तीनों कैटेगरी में हमने कुछ अवॉर्ड भी रखे हैं, जिनके लिए कैश प्राइज़ का भी ऐलान किया गया है। तो यह एक पहली कोशिश है। मुझे लगता है कि अगर हम इस बार एक अच्छा फ़िल्म फ़ेस्टिवल कर पाएँ, तो आने वाले सालों में हमारी कोशिश होगी कि इसे हर साल किया जाए ताकि इसे मज़बूती मिल सके। और हर साल, भगवान ने चाहा तो, दुनिया भर से और भी ज़्यादा लोग यहाँ आएँगे और इस फ़िल्म फ़ेस्टिवल में हिस्सा लेंगे, जिससे यहाँ के लोकल व्यापार और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। अगर हालात सही बनाए जाएँ, तो कश्मीर में इतनी क्षमता है कि भले ही हम यूरोप से आगे न निकल पाए, लेकिन हम यहाँ फ़िल्म इंडस्ट्री के लिए ऐसा माहौल बना सकते हैं जो यूरोप के मुक़ाबले का हो। जहाँ हम दुनिया के बाकी हिस्सों और अपने देश के दूसरे राज्यों से लोगों को—खासकर दक्षिण और बॉम्बे की फ़िल्म इंडस्ट्री के लोगों को—यहाँ ला सकें और उन्हें भरोसा दिला सकें। कुछ चीज़ें तभी सुलझती हैं जब उन्हें खुद अनुभव किया जाए। इसलिए बॉलीवुड में भी कश्मीर न आने को लेकर कुछ झिझक है। तो असल में कोशिश यही है: उन्हें फ़िल्म फ़ेस्टिवल में लाया जाए ताकि वे खुद कश्मीर को देख सकें और समझ सकें कि फ़िल्मों का विषय होने के साथ-साथ, कश्मीर सिनेमा के लिए एक बेहतरीन फ़्रेम भी है। पहले ही एडिशन के हिसाब से इसका पैमाना बहुत शानदार है। ऑर्गनाइज़र्स को 50-80 से ज़्यादा देशों से 1,100 से ज़्यादा एंट्रीज़ मिलीं। इनमें से 41 देशों की 135 फ़िल्मों को स्क्रीनिंग के लिए चुना गया है। भारत 64 फ़िल्मों के साथ सबसे आगे है, उसके बाद फ़्रांस (13) और ईरान (8) हैं। अर्जेंटीना, स्पेन (हर एक से 4), ब्राज़ील, जर्मनी, रूस और अमेरिका (हर एक से 3) की भी अच्छी-खासी भागीदारी है। हिस्सा लेने वाले दूसरे देशों में तुर्की, स्वीडन, दक्षिण कोरिया, कोलंबिया, ताइवान, कतर वगैरह शामिल हैं, जिससे फ़ेस्टिवल को सच में ग्लोबल पहचान मिलती है। स्क्रीनिंग और इवेंट्स कई मशहूर जगहों पर होंगे: श्रीनगर में शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ़्रेंस सेंटर (SKICC) और INOX मल्टीप्लेक्स, जम्मू में मूवी टाइम सिनेमाज़ और गुलमर्ग कन्वेंशन सेंटर। एक बहुत ही आकर्षक चीज़ है SKICC के पास डल झील पर प्रस्तावित फ़्लोटिंग सिनेमा, जहाँ दर्शक शिकारा पर बैठकर कश्मीर के सबसे मशहूर नज़ारों के बैकडॉप में फ़िल्में देख सकेंगे—यह घाटी की कुदरती सुंदरता और सिनेमा का एक अनोखा मेल होगा। फ़Fest में उभरते फ़िल्ममेकर्स के लिए एक कॉन्टेस्ट भी है, जिसका मकसद लोकल टैलेंट को सामने लाना और उसे बढ़ावा देना है। एंट्रीज़ को परखने के लिए पाँच सदस्यों की एक खास इंटरनेशनल जूरी होगी, जिसके हेड मशहूर सिनेमैटोग्राफर-डायरेक्टर संतोष सिवन होंगे। जूरी में ऑस्कर और बाफ़्टा जीतने वाले साउंड डिज़ाइनर रेसुल पुकुट्टी, जर्मन फ़िल्म क्यूरेटर डोरोथी वेनर, मीडिया एंटरप्रेन्योर कीको बैंग और नेशनल अवॉर्ड जीतने वाले फ़िल्ममेकर हिमांशु शेखर खटुआ भी शामिल होंगे। इस फ़ेस्टिवल की अहमियत और आकर्षण को और बढ़ाने के लिए, इसमें नौ कैटेगरी में कुल ₹96 लाख का बड़ा इनाम रखा गया है। 'बेस्ट फ़िल्म' के लिए ₹25 लाख, 'बेस्ट डायरेक्टर' और 'डायरेक्टर की बेस्ट डेब्यू फ़िल्म' के लिए ₹15-15 लाख, 'बेस्ट फ़िल्म – J
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जवाई क्षेत्र में तेंदुआ आवास संरक्षित: हाईकोर्ट ने 1 किलोमीटर के भीतर निर्माण रोक

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने जवाई क्षेत्र में तेंदुओं के महत्वपूर्ण आवास, गुफाओं, प्रजनन स्थलों और वन्यजीव कॉरिडोर के संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने तेंदुआ आवास की प्रमुख विशेषताओं के आसपास एक किलोमीटर क्षेत्र को लेपर्ड हैबिटेट कंस्ट्रक्शन-कंट्रोल जोन घोषित करते हुए इस क्षेत्र में नए वाणिज्यिक, आवासीय और सिविक निर्माण पर रोक लगाई है। डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस रेखा बोराणा की खंडपीठ ने कहा कि यह व्यवस्था जवाई के पूरे लैंडस्केप में लागू होगी। इसमें तेंदुओं की गुफाएं, डेन, प्रजनन एवं विश्राम स्थल, गुफाओं वाली पहाड़ियां, उनसे जुड़े फुटहिल क्षेत्र, वन्यजीव कॉरिडोर, वेटलैंड, बैकवाटर और जलस्रोत शामिल हैं। इन क्षेत्रों में पहाड़ काटने, ब्लास्टिंग, खुदाई, सड़क या ट्रैक निर्माण तथा वन्यजीवों की आवाजाही बाधित करने वाली गतिविधियों पर भी रोक रहेगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिसूचित जवाई लेपर्ड कंजर्वेशन रिजर्व की सीमा से एक किलोमीटर के भीतर नए होटल, रिसॉर्ट, गेस्ट हाउस, होमस्टे, टूरिज्म कैंप जैसी व्यावसायिक गतिविधियां और नए औद्योगिक कार्य नहीं किए जा सकेंगे। इस क्षेत्र में भूमि रूपांतरण पर भी रोक रहेगी। हालांकि मौजूदा गांवों की आबादी में बोना फाइंड आवासीय निर्माण, आवश्यक मरम्मत, स्कूल, आंगनबाड़ी, डिस्पेंसरी, पेयजल और जरूरी सार्वजनिक सुविधाओं को अपवाद दिया गया है। परंतु ऐसे कार्य भी वन्यजीवों की आवाजाही में बाधा नहीं डाल सकेंगे। कोर्ट ने पाली के वन विभाग को आठ सप्ताह में तेंदुआ आवास की जियो-रेफरेंस्ड मैपिंग करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नाइट सफारी, स्पॉटलाइट, ड्रोन, बाइटिंग और गुफाओं के आसपास भीड़ जैसी गतिविधियों पर रोक जारी रहेगी。
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