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सरकारी दीवारों पर अंग क्षेत्र की मंजूषा कला बन रही युवाओं की धरोहर
AKAshwani Kumar
Jan 09, 2026 06:16:11
Bhagalpur, Bihar
INTRO - अंग क्षेत्र की गौरवशाली लोककला मंजूषा एक बार फिर अपनी जड़ों से निकलकर शहर की दीवारों पर जीवंत हो उठी है। परंपरा, आस्था और संस्कृति का यह अनूठा संगम अब सरकारी भवनों की दीवारों पर रंगों के जरिए अपनी कहानी खुद बयां कर रहा है। उद्देश्य साफ है मंजूषा कला को नया मंच देना और आज की युवा पीढ़ी को अपनी लोक विरासत से जोड़ना।
VO 1 - जिला प्रशासन की पहल पर मंजूषा गुरु मनोज पंडित के नेतृत्व में महिला कलाकारों की टोली तीन रंगों की कूची से दीवारों पर मंजूषा की आकर्षक और भव्य आकृतियाँ उकेर रही है। हर स्ट्रोक में इतिहास है, हर रंग में अंग क्षेत्र की पहचान। इन कलाकृतियों में विक्रमशिला विश्वविद्यालय के भग्नावशेष, अजगैबीनाथ धाम, तिलकामांझी, लोक आस्था का महापर्व छठ और मनसा विषहरी पूजा को बेहद सजीव रूप में दर्शाया गया है, जो राहगीरों को ठहरकर देखने पर मजबूर कर देता है। मंजूषा गुरु मनोज पंडित ने बताया कि प्रशासन की पहल पर मंजूषा कला को बढ़ावा दिया जा रहा है इससे विरासत को पहचान मिलने के साथ साथ महिलाओ को रोजगार भी मिले है। मंजूषा कला मनसा विषहरी गाथा से जुड़ी हुई है काफी पौराणिक है। तीन रंगों गुलाबी, हरा और पिला से कलाकृति बनाई जाती है। गुलाबी प्रेम हरा समृद्धि और पिला विकास का प्रतीक माना जाता है।
Byte- मनोज पंडित, मंजूषा गुरु
Vo 2 - 30 महिलाएं कई महीनों से सरकारी भवनों की दीवारों पर कलाकृतियां बना रहे हैं।वहीं दीवारों पर मंजूषा कला को उकेड़ रही पूनम कुमारी ने बताया कि 7 साल पहले उन्होंने मनोज पंडित से यह सीखा उसके बाद अलग अलग तरीके मंजूषा कलाकृति बनाते है फ़िलहाल 30 महिलाओं की अलग अलग टोलियां सरकारी भवन के दीवारों पर सांस्कृतिक धरोहरों को उकेड़ रहे हैं। मंजूषा कला की खासियत है इसमें तीन रंग का उपयोग होता है साथ ही जो तस्वीरें बनती है उसमें महिला हो या पुरुष उनके कान और भौंहे नहीं होती है। जो मंजूषा कला को और खास बनाती है।
Byte- पूनम कुमारी, मंजूषा कलाकार
Vo 3 - बिहुला- विषहरी की अमर लोकगाथा से जुड़ी मंजूषा कला आज सिर्फ दीवारों तक सीमित नहीं है। यह कला अब सम्मान और पहचान का प्रतीक बनती जा रही है। अतिथियों और गणमान्य लोगों के स्वागत में मंजूषा चित्र भेंट किए जा रहे हैं, वहीं कपड़ों पर उकेरी गई मंजूषा कला देश-विदेश तक अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक खुशबू फैला रही है।
Byte- डॉ नवल किशोर चौधरी, जिलाधिकारी
Final vo - कुल मिलाकर, यह पहल सिर्फ दीवारों को सजाने का प्रयास नहीं, बल्कि लोककला को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक मजबूत कदम है जहाँ रंग बोलते हैं, दीवारें इतिहास सुनाती हैं और मंजूषा कला एक बार फिर अंग क्षेत्र की शान बनकर उभरती नजर आ रही है।
Wt- अश्वनी कुमार, ज़ी मीडिया, भागलपुर
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