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देवभूमि द्वारका में सूखे के कारण पशुपालन के लिए घास वितरण शुरू

Dwarka, Gujarat:દેવભૂમિ દ્વારકા જિલ્લામાં વરસાદની અછત અને અનિયમિતતાને કારણે ઉભી થયેલી કપરી પરિસ્થિતિને ધ્યાનમાં રાખીને તંત્ર દ્વારા પશુપાલકોની વ્હારે આવવા માટે મહત્ત્વનું પગલું ભરવામાં આવ્યું છે. જિલ્લામાંના અનેક તાલુકાોમાં પશુધન માટે ઘાસચારાનું વિતરણ સત્તાવાર રીતે શરૂ કરી દેવામાં આવ્યું છે, જેથી પશુપાલકોને રાહત મળી सके. ખાસ કિસ્સા હેઠળ ઓખામંડળ તાલુકાના પશુપાલકોને અગ્રિમતા આપીને ઘાસનું વિતરણ કરવામાં આવી રહ્યું છે. પશુઓની મૂળભૂત જરૂરિયાતો જળવાઈ રહે તે માટે નિયમ મુજબ દરેક પશુ દીઠ દરરોજનું 4 કિલોગ્રામ ઘાસચારો ફાળવવામાં આવ્યો છે. પશુપાલકોને વારંવાર ધક્કા ન ખાવા પડે તે માટે હાલ 15 દિવસનો જથ્થો એકસાથે વિતરણ કરવાનો નિર્ણય લેવાયો છે. બીજી બાજુ, સમયસર વરસાદ ન થવાને કારણે ખેતી અને પશુપાલન વ્યવસાય સામે મોટું સંકટ તોલાઈ રહ્યું છે. આ ગંભીર પરિસ્થિતિને ધ્યાનમાં રાખીને દેવભૂમિ ద్వારકા જિલ્લામાં સત્તાવાર રીતે દુષ્કાળગ્રસ્ત જાહેર કરવાની માંગ ખેતીkedો અને પશુપાલકો દ્વારા જોરશોરથી ઉઠાવવામાં આવી રહી છે.
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वैदवाला के किसानों का धरना खत्म, 10 दिनों में टावर मुआवे पर पुनर्मूल्यांकन तय

Sirsa, Haryana:एंकर रीड सिरसा के गांव वैदवाला में पिछले 6 दिनों से चल रहे धरने को आज जिला प्रशासन ने खत्म करवा दिया है। गांव की पानी की टंकी पर चढ़े दो किसानों को उचित मुआवजा देने का आश्वासन जिला प्रशासन द्वारा दिया गया है जिसपर सहमति जताते हुए अब दोनों किसान पानी की टंकी से नीचे उतर गए है। किसान नेता किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी भी मोके पर मौजूद थे। डीसी सिरसा ने दोनों किसानों को पानी पिलाकर धरना खत्म करवा दिया है। वोल 1 सिरसा जिले के वैदवाला गांव में बिजली टावर के लिए अधिकृत की गई जमीन के मुआवजा मामला आज सुलझ गया और टंकी पर 6 दिन से चढ़े खेत मालिक भूपेंद्र सिंह और किसान वेद प्रकाश को नीचे उतार लिया गया। डीसी शांतनू शर्मा, एसपी दीपक सहारण, एडीसी अर्पित संगल धरने पर कमेटी और किसानों से मिलने पहुंचे। प्रशासन द्वारा दोबारा कमेटी बनाकर रिवैल्यूएशन करवाने पर सहमति बनी है। एसपी ने भी किसानों पर किसी तरह के केस दर्ज करने की बात से इन्कार कर दिया। इसी पर किसान सहमत हो गए और चढ़ूनी ने टंकी से किसानों को नीचे उतारने के बाद उनको सिरोपा पहनाकर सम्मानित किया। इस कमेटी में तीन किसान और बिजली निगम के अधिकारी होंगे और 10 दिन में मांगों का समाधान करने को कहा गया है। जल्द ही कमेटी की सीएम नायब सिंह सैनी से मुलाकात करवाई जाएगी। डीसी व एसपी से दोपहर को काफी देर तक मीटिंग चली। इसके बाद वे किसानों से बात करने को धरने पर गए और मामला शांतिपूर्वक सुलझ गया। गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा, किसानों का ये धरना मजबूती और संघर्ष से चला है। अब ADC की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाएगी, जिसमें 3 किसान प्रतिनिधि शामिल किए जाएंगे। कमेटी 10 दिनों के भीतर टावरों की कीमत का पुनर्मूल्यांकन कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री नायब सैनी से मुलाकात कर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रशासन से बातचीत के बाद धरना समाप्त कर दिया है। दरअसल, टावर मामले में ग्रामीण और धरनारत किसानों ने दोपहर 2:00 बजे खेतों में लगे टावरों की और कूच करने और लाइन उखाड़ने का ऐलान किया था। इसी पर किसान जुटना शुरू हो गए। प्रशासन की ओर से भी उनको रोकने के लिए टावर की ओर पुलिस और अधिकारी पहुंचे हुए हैं। प्रशासन भी किसानों से लगातार संपर्क में हैं। किसानों को रोकने को प्रशासन व भारी संख्या में पुलिसबल गांव में पहुंचा और चारों ओर पड़ाव डाला दिया। टावर के पास पुलिस व अधिकारी मौजूद रहे。 किसानों व धरना कमेटी की कल मंगलवार को दिनभर प्रशासन से बात चलती रही, लेकिन वो सिरे नहीं चढ़ पाई। कमेटी की सीएम से मीटिंग कराने की मांग थी। प्रशासन की ओर से देर शाम तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। ऐसे में किसानों ने लाइनें उखाड़ने का अल्टीमेटम बरकारार रखा है। आज बुधवार सुबह 10 बजे से सभी किसान-ग्रामीण जुटना शुरू हो गए。 इसके चलते पुलिस प्रशासन भी अलर्ट हो गया है और सुरक्षा के चलते व्यवस्था करने में जुटा है। गांव में एंट्री को लेकर पुलिस सख्ती कर सकती है। पिछले दो दिनों के बाद रात से ही धरने पर भी लोगों की भीड़ बढ़ना शुरू हो गई है, रात को भी पुलिस भी पहुंची। डीएसपी भी किसानों से बात करने पहुंचे और उनको समझाने की कोशिश की, पर वे नहीं माने। वैदवाला में जलघर की टंकी पर चढ़े खेत मालिक भूपेंद्र सिंह और किसान वेदप्रकाश को छह दिन बीत गए। अभी तक दोनों नीचे नहीं उतरे थे । किसानों को जबरदस्ती उतारने एवं पुलिस आने के बाद सभी किसान संगठन एकजुट होना शुरू हो गए और सभी संगठनों ने समर्थन दिया है। सोमवार शाम को प्रशासन की टीम पुलिसबल के साथ वैदवाला में धरने पर पहुंची थी। इस दौरान टीम ने पहले टंकी के चोरों ओर जाल लगाने की कोशिश की, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। किसानों का आरोप है कि टीम ने टंकी से दोनों किसानों को नीचे उतारने की जबरदस्ती की। इसका धरनारत ग्रामीणों ने विरोध किया तो टीम वापस लौट गई, इसका किसानों में रोष है। इसके कुछ देर बाद चढ़ूनी ग्रुप से जुड़े किसान नेता का काफिला गाड़ियां लेकर धरने पर पहुंचा और मीटिंग की। इसमें बाकी किसान संगठन नेताओं को भी बुलाया गया। वहीं, टीम का कहना था कि वे सिर्फ जाल लगाने आए थे, किसी के साथ जबरदस्ती नहीं की。 स्पीच शांतनु शर्मा , डीसी , सिरसा। स्पीच गुरनाम सिंह चढूनी , किसान नेता।
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दलजीत पंघाल के आरोप: नेताओं ने समाज को गुमराह किया

Hansi, Haryana:किसान नेता दलजीत पंघाल के गंभीर आरोप, बोले नेताओं ने समाज को गुमराह किया किसान नेताओं में आपस में दो फाड़, दलजीत पंघाल ने सुरेश कोथ और शमशेर नंबरदार पर लगाए गंभीर आरोप किसान नेता दलजीत पंघाल ने 15 अगस्त को हांसी में हुए घटनाक्रम को लेकर किसान नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि वह खुद भेष बदकर हांसी पहुंचे थे और राष्ट्रीय ध्वज फहराने की रस्सी खुद खींचने की तैयारी में थे। दलजीत पंघाल ने दावा किया कि वह पांच-सात लोगों के साथ हांसी पहुंचे थे। ध्वज के मुख्य गेट पर पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि उन्होंने भेष बदल रखा था, इसलिए पुलिस उन्हें पहचान नहीं पाई। उनका कहना है कि वह अंदर तक पहुंच गए थे, लेकिन वहां मौजूद एसपी और डीएसपी उन्हें पहले से जानते थे। पहचान होने के बाद उन्हें वहां से बाहर कर दिया गया। दलजीत पंघाल के मुताबिक अगर वह पकड़े नहीं जाते तो वह झंडे की रस्सी खींचने वाले थे। उन्होंने सुरेश कोथ और शमशेर नंबरदार समेत कुछ लोगों पर समाज को गुमराह करने और समाज की बेइज्जती करवाने का आरोप लगाया। दलजीत पंघाल का दावा है कि सुरेश कोथ के पास पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के संदेश पहुंचे थे, लेकिन इसकी जानकारी समाज के लोगों को नहीं दी गई। दलजीत पंघाल ने कहा कि है। प्रशासन की ओर से बातचीत और मुलाकात के प्रयास किए जा रहे थे। उनके अनुसार, सीआईडी, आईजी, एडीजी और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से लगातार संपर्क किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि 13 और 14 अगस्त को भी अधिकारियों की ओर से बातचीत कराने के प्रयास हुए, लेकिन सुरेश कोथ ने फोन बंद कर लिया और बाकी लोगों को भी इसकी जानकारी नहीं दी। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते समाज के लोगों को प्रशासन की बातचीत की जानकारी दे दी जाती तो टकराव की स्थिति पैदा नहीं होती और इतना बड़ा मामला भी नहीं बनता।जीवन हत्याकांड के आंदोलन का जिक्र करते हुए पंघाल ने कहा कि वह आंदोलन की शुरुआत से जुड़े रहे हैं और जिंदल चौक पर भी प्रदर्शन किया था। उन्होंने कहा कि वह शुरू में कमेटी का हिस्सा थे, लेकिन बाद में उन्हें किनारे किया जाने लगा। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और समाज को सही दिशा में ले जाना नेताओं की जिम्मेदारी है। पंघाल ने 15 अगस्त की घटना में पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर पुलिसकर्मियों की ओर से लाठीचार्ज या बल प्रयोग हुआ है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए, लेकिन उनका मानना है कि गलती दोनों पक्षों से हुई है。 उन्होंने प्रशासन का बचाव करते हुए कहा कि इस पूरे मामले में प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने बातचीत और समझौते के प्रयास किए थे। उन्होंने कहा कि यदि समाज के लोगों को समय पर पूरी जानकारी दी जाती तो स्थिति बिगड़ने से बच सकती थी。 दलजीत पंघाल ने नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि समाज को ऐसे रास्ते पर नहीं ले जाना चाहिए, जहां उसकी बेइज्जती हो। उन्होंने कहा कि सामाजिक मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय समाज के हित में सही और जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से काम होना चाहिए। उन्होंने हांसी के एसपी से अपील की कि जिन लोगों को धमकियां मिली हैं, उनकी सुरक्षा का ध्यान रखा जाए। पंघाल ने कहा कि प्रशासन को इस मामले में पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
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राजस्थान के नगर निकायों में महिला और युवा वोटर निर्णायक फैक्टर बनेंगे

Jaipur, Rajasthan:नगरीय निकाय चुनाव کا बिगुल बजते ही अब سियاسی तस्वीर साफ हो गई है। 309 निकायों के 10 हजार 245 वार्डों में دو चरणों में होने वाला चुनाव सिर्फ पार्षद चुनने की कवायद नहीं, बल्कि शहरों کی سیاست کا नया समीकरण तय करने वाला है। 9 और 11 सितंबर को ईवीएम کا बटन दबाकर 1 करोड़ 44 लाख से ज्यादा मतदाता शहरوں کی सरकार चुनेंगे। इनमें करीब 70 लाख महिला वोटر ہیں, जबकि 18 سے 35 साल के करीब 58 लाख मतदाता चुनावी नतीؤں کی दिशा बदलने کی ताकत رکھتے हैं। यानी इस बार शहरों کی سیاست میں महिला और युवा वोट बैंक सबसे बड़ा फैक्टर بنकर सामने आएगा۔ राजस्थान के शहरों में अब سियاسی रण सज चुका है। राज्य निर्वाचन आयोग نے ने 309 नगरीय निकायों के 10 हजार 245 वार्डों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। 9 सितंबर को पहले चरण में 5,550 और 11 सितंबर को दूसरे चरण में 4,695 वार्डों में मतदान होगा। सुबह 7 से शाम 6 बजे तक होने वाली वोटिंग के बाद 14 सितंबर को मतगणना होगी। इस चुनाव میں सबसे बड़ा राजनीतिक आंकड़ा है 1 करोड़ 44 लाख 3 हजार 853 मतदाता। इनमें 73 लाख 98 हजार 415 पुरुष और 70 लाख 4 हजार 927 महिला मतदाता हैं। यानी महिला वोटरों की संख्या करीब 70 लाख है और कुल मतदाताओं में उनकी हिस्सेदारी लगभग आधी है। ऐसे में महिला वोटर इस बार निकाय चुनाव में किसी भी राजनीतिक दल और उम्मीदवार के लिए निर्णायक फैक्टर साबित हो सकती हैं। निकाय चुनाव کا دوسرا बड़ा سियासी फैक्टर है युवा वोटर। 18 سے 25 साल के 21 लाख 30 हजार से ज्यादा मतदाता हैं। वहीं 26 से 35 साल کی उम्र کے 36 लाख 60 हजार से ज्यादा वोटर ہیں। यानी 18 سے 35 साल کے करीब 58 लाख मतदाता इस चुनाव میں اپنے वोट سے شہروں کی سیاسی दिशा तय कर سکتے ہیں। युवाओं کے اس بڑے वोट بنك کے سامنے राजनीतिक दलوں کے लिए रोजगार, शिक्षा, शहरी सुविधाएं, ट्रैफिक, सार्वजनिक परिवहन, स्वच्छता, खेल सुविधाएं اور डिजिटल सेवाएं जैसे मुद्दे अहम हो सकते हैं। यानी इस बार निकाय चुनाव میں स्थानीय मुद्दों के साथ युवा वोटरों کی पसंद भी उम्मीदवारों کی जीत-हार ka गणित बदल सकती है۔ वोटर्स کے आंकड़ों کا संदेश साफ है निकाय चुनाव میں करीब 58 लाख युवा और करीब 70 लाख महिला मतदाता राजनीतिक दलوں کے لیے सबसे बड़ा वोट बैंक ہیں۔ खासकर वार्ड स्तर کے चुनाव میں کچھ हजार वोटوں کا अंतर जीत-हार तय करता ہے۔ ऐसे میں उम्मीदवारوں کی रणनीति सिर्फ पार्टी کے پرंपरागत वोट बैंक پر नहीं, बल्कि महिला और युवा मतदाताओं तक पहुंच بنانے پر भी ٹिकी رہےगी۔ और इस चुनाव کی ایک واسی खास بات है पार्षद بننے کے بعد असली سियاسی परीक्षा शुरू होगी۔ 14 सितंबर کو पार्षदوں کے चुनाव परिणाम آئیں گے، لیکن 21 सितंबर کو इन्हीं منتخب پار्षدوں کے ووٹ سے میयर، सभापति اور अध्यक्ष چنے جائیں گے۔ یعنی निकाय चुनाव کا سیاسی गणित دو चरणوں میں چلےगा.....پہلے जनता पार्षद چنےگی اور پھر पार्षद شہر کی सरकार کا मुखिया चुनیں گے۔ یہی وجہ ہے کہ 14 सितम्बर کے बाद निकायوں میں सियاسی सक्रियता اور बढ़ने کی संभावना है। पार्षदوں کی संख्या बल کے ساتھ-साथ राजनीतिक दलوں کی रणनीति, निर्दलीय पार्षदوں کی भूमिका اور स्थानीय समीकरण میयर, सभापति और अध्यक्ष کی कुर्सी کا फैसला करेंगे۔ बहरहाल, अब शहर کی सरकार के लिए शंखनाद हो चुका है...नेताओं کی परीक्षा, दावेदारوں کی अग्निपरीक्षा और जनता کے फैसले کی घड़ी قریب ہے। 9 اور 11 सितम्बर کو ईवीเอ็ม में بند ہو گا सियاسی भविष्य...14 सितम्बर کو کھلےगा जनता کا फैसला और 21 सितम्बर کو طے ہوگا شہر کی सत्ता کا सरताज۔ पार्षद तय کریں گے کہ شہر کی सत्ता کی کمान کسکے ہاتھ ہوگی۔
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अरुणाचल में बादल फटने से अग्निवीर लापता; अलवर के समुद्र गुर्जर का सुराग नहीं

Alwar, Rajasthan:अरुणाचल में बादल फटने के बाद सेना का अग्निवीर लापता, अलवर के समुद्र गुर्जर का कई दिन से सुराग नहीं अलवर के केसरपुर गांव निवासी अग्निवीर जवान समुद्र गुर्जर (24) अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली जिले में बादल फटने, भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ के बाद से लापता है। हादसे में सेना के सात जवान लापता हुए थे, जिनमें से दो जवानों को रेस्क्यू कर लिया गया है, जबकि समुद्र समेत अन्य जवानों की तलाश जारी है। घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद समुद्र का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। समुद्र गुर्जर दो बहनों का इकलौता भाई है। उसकी अभी शादी नहीं हुई है। उसके पिता बदली गुर्जर खेती-किसानी करते हैं। परिवार के अनुसार समुद्र रक्षाबंधन से पहले छुट्टी लेकर घर आने वाला था, लेकिन इससे पहले ही अरुणाचल प्रदेश में हुई प्राकृतिक आपदा ने परिवार की चिंता बढ़ा दी। समुद्र के पिता बदली गुर्जर ने बताया कि उनकी बेटे से आखिरी बार 10 मई को फोन पर बात हुई थी। समुद्र मई में छुट्टी लेकर घर आया था और करीब 10 दिन बाद ही ड्यूटी पर लौट गया था। उस दौरान उसने पिता से कहा था कि वह जल्द ही छुट्टी लेकर घर आएगा और उनके पैरों के दर्द का ऑपरेशन करवाएगा। इसके बाद परिवार को सेना की ओर से फोन पर सूचना दी गई कि अरुणाचल प्रदेश के जिस क्षेत्र में समुद्र तैनात था, वहां बादल फटने के बाद भूस्खपहं और बाढ़ की स्थिति बनी है और समुद्र लापता है। सूचना मिलने के बाद परिजन अलवर के इटाराणा स्थित सेना कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों से समुद्र के बारे में जानकारी ली, लेकिन अभी तक उसका पता नहीं चल पाया है। पड़ोसी भरत ने बताया कि समुद्र के लापता होने की खबर के बाद से पूरे केसरपुर गांव में चिंता का माहौल है। परिवार के लोग लगातार उसके सुरक्षित लौटने की उम्मीद लगाए हुए हैं। पिता अपने इकलौते बेटे को याद कर भावुक हो जाते हैं। बताया जा रहा है कि अरुणाचल प्रदेश के अनिनी क्षेत्र के पशुपानी इलाके में 14 अगस्त 2026 की शाम करीब 4:45 बजे बादल फटने की घटना हुई थी। इसके बाद क्षेत्र में भारी भूस्खलन और अचानक बाढ़ आ गई। प्राकृतिक आपदा में चार लोगों की मौत की भी सूचना है। सेना के जवान भी इसकी चपेट में आए। फिलहाल सेना की ओर से लापता जवानों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
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309 निकायों में दो चरणों में चुनाव: 9 और 11 सितम्बर को मतदान

Jaipur, Rajasthan:राज्य निर्वाचन आयोग की प्रेस कांफ्रेंस के बाद निकाय चुनाव की तस्वीर अब साफ हो गई है...शहर की सरकार चुनने के लिए तारीख तय, मैदान तैयार और सियासी रण सज गया है। प्रदेश के 309 नगरीय निकायों के 10 हजार 245 वार्डों में दो चरणों में वोटिंग होगी। 9 और 11 सितंबर को जनता ईवीएम का बटन दबाकर अपने पार्षद चुननेगी, और खास बात ये कि नामांकन के लिए उम्मीदवारों को सिर्फ तीन दिन का मौका मिलेगा। 14 सितंबर को मतगणना के साथ तस्वीर साफ होगी, और इसके बाद 21 सितंबर को पार्षद ही तय करेंगे कि किसके सिर सजेगा मेयर, सभापति और अध्यक्ष का ताज। 309 निकायों में कुल मतदाताओं की संख्या 1 करोड़ 44 लाख 03 हजार 853 है। पुरुष मतदाताओं की संख्या 73 लाख 98 हजार 415 वोटर, महिला मतदाओं की संख्या 70 लाख 04 हजार 927 वोटर, थर्ड जेंडर 511 मतदाता। आयु वर्ग अनुसार: 18-25 वर्ष 21,30,043 (14.7%), 26-35 वर्ष 36,60,211 (25.40%), 36-50 वर्ष 41,70,693 (29%), 51-59 वर्ष 20,02,199 (13.9%), 60 वर्ष और अधिक 24,40,707 (17%). कुल मतदाताओं की संख्या 1,44,03,853।
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प्रभारी मंत्री ने किया बाढ़ क्षेत्र का दौरा,किया खाद्य सामग्री का वितरण

KAILASH NATH VERMAKAILASH NATH VERMAFollow9m ago
Gonda, Uttar Pradesh:प्रभारी मंत्री ने किया बाढ़ क्षेत्र का दौरा,किया खाद्य सामग्री का वितरण प्रभारी मंत्री ने बाढ़ प्रभावित ऐली परसौली का किया निरीक्षण, 500 राहत किट बांटीं,विकास कार्यों की भी समीक्षा गोंडा।जनपद के प्रभारी मंत्री एवं प्रदेश सरकार के प्राविधिक शिक्षा एवं उपभोक्ता मामले के मंत्री आशीष पटेल ने बुधवार को ऐली परसौली गांव पहुंच कर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया एवं बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर राहत सामग्री वितरित की। इसके बाद जिला पंचायत सभागार में उनकी अध्यक्षता में जनपद स्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई, जिसमें विकास कार्यों, कानून व्यवस्था और शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं की समीक्षा की गई। प्रभारी मंत्री ने बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों में जिला प्रशासन द्वारा की गई तैयारियों और प्रभावी निगरानी की सराहना करते हुए अधिकारियों को राहत कार्यों को पूरी तत्परता से जारी रखने के निर्देश दिए। ऐली परसौली में आयोजित राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री ने 500 बाढ़ राहत सामग्री किट वितरित कीं। इसके अलावा नदी कटान से प्रभावित छह कृषकों को पांच-पांच हजार रुपये के चेक भी प्रदान किए गए। बाढ़ राहत कार्य में लगे दो लेखपालों को आवश्यक बाढ़ राहत सामग्री भी उपलब्ध कराई गई। जिलाधिकारी की अभिनव पहल के तहत बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री किट के साथ छाता, टॉर्च और मच्छरदानी भी वितरित की गई। प्रभारी मंत्री ने इस पहल की विशेष रूप से सराहना करते हुए कहा कि जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित परिवारों की जरूरतों को समझते हुए राहत सामग्री के साथ दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं की भी व्यवस्था की है। इससे प्रभावित परिवारों को कठिन परिस्थितियों में काफी मदद मिलेगी।
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बिना फूड लाइसेंस मिठाई फैक्टरी बंद, 300 किलो सोन पपड़ी नष्ट

Jaipur, Rajasthan:बिना फूड लाइसेंस चल रहे मिठाई के कारखाने को करवाया बंद। लगभग 300 किलो सोन पपड़ी नष्ट करवाई गंदगी के बीच तैयार की जा रही थी मिठाइयां। शुद्ध आहार मिलावट पर वार अभियान के अंतर्गत आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण राजस्थान डॉक्टर टी शुभमंगला के निर्देश पर विभाग द्वारा त्योहारी सीजन के मध्य नजर मिठाइयों एवं अन्य खाद्य सामग्री में मिलावट रोकने हेतु जारी विशेष अभियान के तहत आज सी एम एच ओ जयपुर द्वितीय की टीम द्वारा आगरा रोड बगराना स्थित बिना फूड लाइसेंस के संचालित मिठाई के कारखाने मैसर्स जे जे फूड्स पर कार्यवाही करते हुए लगभग 300 किलो सोन पपड़ी नष्ट करवाई। सी एम एच ओ डॉक्टर मनीष मित्तल ने बताया कि दिल्ली निवासी जितेंद्र कुमार पिछले 4 माह से यह कारखाना संचालित कर रहा था। फूड सेफ्टी टीम अभियान के तहत औचक निरीक्षण के दौरान मौके पर पहुंची जहां रक्षा बंधन त्यौहार के लिए इसने मिठाइयां तैयार कर छोटी छोटी दुकानों पर सप्लाई करने के लिए भारी मात्रा में मैदा, चीनी, रिफाइंड सोयाबीन तेल, पॉमोलिन तेल आदि स्टॉक कर रखी थी। बहुत गंदगी में मिठाई बनाई जा रही थी। मूंगफली की कटिंग पर हरा रंग चढ़ा कर पिस्ते के रूप में एवं कीड़े लगे हुए बदाम की कटिंग ड्राई फ्रूट्स की तरह मिठाइयों में काम में ले रहे थे। सोन पपड़ी, मिल्क केक एवं अन्य मिठाइयों के 5-5 किलो के होलसेल पैकेटों पर किसी प्रकार का मैन्युफैक्चरिंग लेबल नहीं लगा रहे थे। मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए अनिवार्य पानी की जांच रिपोर्ट,स्टाफ के मेडिकल फिटनेस,पेस्ट कंट्रोल आदि दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। सोन पपड़ी के नमूने लेकर मौके पर तैयार लगभग 300 किलो सोन पपड़ी को नष्ट करवाया गया। मिठाई के कारखाने को बिना फूड लाइसेंस संचालित किए जाने के कारण उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार अग्रिम आदेशों तक मशीनों को सील कर बंद करवाया गया। टीम में खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुशील चोटवानी, राजेश नागर, ओमा शंकर एवं रिमिका माथुर शामिल रहे。
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भरतपुर निकाय चुनाव के लिए आचार संहिता लागू, अधिकारी प्रचार सामग्री हटाने में जुटे

Noida, Uttar Pradesh:भरतपुरनिकाय चुनावों के लिए आदर्श आचार सहिंता लागू होते ही, एक्शन में जिला निवार्चन अधिकारी कमर चौधरी, सभी विभागों को दिये आदर्श आचार सहिंता की पालना के निर्देश, शहर में चुनाव से जुड़ी प्रचार सामग्री को हटाने का काम हुआ शुरू, जिला निवार्चन अधिकारी के निर्देश के बाद नगर निगम कमिश्नर श्रवण बिशनोई ने की टीम गठित, शहर में विभिन्न स्थानों पर लगे होर्डिंग बैनर को हटाने का काम शुरू, निकायों के साथ पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को भी किया निर्देशित, आदर्श चुनावी आचार सहिंता का पालन करें सभी लोग-कमर चौधरी जिला निर्वाचन अधिकारी भरतपुर。
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राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव: महिलाएं और युवा तय करेंगे शहरों की सत्ता

Jaipur, Rajasthan:नगरिगय निकाय चुनाव का बिगुल बजते ही अब सियासी तस्वीर साफ हो गई है। 309 निकायों के 10 हजार 245 वार्डों में दो चरणों में होने वाला चुनाव सिर्फ पार्षद चुनने की कवायद नहीं, बल्कि शहरों की सियासत का नया समीकरण तय करने वाला है। 9 और 11 सितंबर को ईवीएम का बटन दबाकर 1 करोड़ 44 लाख से ज्यादा मतदाता शहरों की सरकार चुनेंगे। इनमें करीब 70 लाख महिला वोटर हैं, जबकि 18 से 35 साल के करीब 58 लाख मतदाता चुनावी नतीजों की दिशा बदलने की ताकत रखते हैं। यानी इस बार शहरों की सियासत में महिला और युवा वोट बैंक सबसे बड़ा फैक्टर बनकर सामने आएगा।\n\nराजस्थान के शहरों में अब सियासी रण सज चुका है। राज्य निर्वाचन आयोग ने ने 309 नगरीय निकायों के 10 हजार 245 वार्डों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। 9 सितंबर को पहले चरण में 5,550 और 11 सितंबर को दूसरे चरण में 4,695 वार्डों में मतदान होगा। सुबह 7 से शाम 6 बजे तक होने वाली वोटिंग के बाद 14 सितंबर को मतगणना होगी। इस चुनाव में सबसे बड़ा राजनीतिक आंकड़ा है 1 करोड़ 44 लाख 3 हजार 853 मतदाता। इनमें 73 लाख 98 हजार 415 पुरुष और 70 लाख 4 हजार 927 महिला मतदाता हैं। यानी महिला वोटरों की संख्या करीब 70 लाख है और कुल मतदाताओं में उनकी हिस्सेदारी लगभग आधी है। ऐसे में महिला वोटर इस बार निकाय चुनाव में किसी भी राजनीतिक दल और उम्मीदवार के लिए निर्णायक फैक्टर साबित हो सकती हैं। निकाय चुनाव का दूसरा बड़ा सियासी फैक्टर है युवा वोटर। 18 से 25 साल के 21 लाख 30 हजार से ज्यादा मतदाता हैं। वहीं 26 से 35 साल की उम्र के 36 लाख 60 हजार से ज्यादा वोटर हैं। यानी 18 से 35 साल के करीब 58 लाख मतदाता इस चुनाव में अपने वोट से शहरों की सियासी दिशा तय कर सकते हैं। युवाओं के इस बड़े वोट बैंक के सामने राजनीतिक दलों के लिए रोजगार, शिक्षा, शहरी सुविधाएं, ट्रैफिक, सार्वजनिक परिवहन, स्वच्छता, खेल सुविधाएं और डिजिटल सेवाएं जैसे मुद्दे अहम हो सकते हैं। यानी इस बार निकाय चुनाव में स्थानीय मुद्दों के साथ युवा वोटरों की पसंद भी उम्मीदवारों की जीत-हार का गणित बदल सकती है।\n\nवोटर्स के आंकड़ों का संदेश साफ है निकाय चुनाव में करीब 58 लाख युवा और करीब 70 लाख महिला मतदाता राजनीतिक दलों के लिए सबसे बड़ा वोट बैंक हैं। खासकर वार्ड स्तर के चुनाव में कुछ हजार वोटों का अंतर जीत-हार तय करता है। ऐसे में उम्मीदवारों की रणनीति सिर्फ पार्टी के परंपरागत वोट बैंक पर नहीं, बल्कि महिला और युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने पर भी टिकी रहेगी। और इस चुनाव की एक और खास बात है पार्षद बनने के बाद असली सियासी परीक्षा शुरू होगी। 14 सितंबर को पार्षदों के चुनाव परिणाम आएंगे, लेकिन 21 सितंबर को इन्हीं निर्वाचित पार्षदों के वोट से मेयर, सभापति और अध्यक्ष चुने जाएंगे। यानी निकाय चुनाव का सियासी गणित दो चरणों में चलेगा.....पहले जनता पार्षद चुनेगी और फिर पार्षद शहर की सरकार का मुखिया चुनेंगे। यही वजह है कि 14 सितंबर के बाद निकायों में सियासी सक्रियता और बढ़ने की संभावना है। पार्षदों की संख्या बल के साथ-साथ राजनीतिक दलों की रणनीति, निर्दलीय पार्षदों की भूमिका और स्थानीय समीकरण मेयर, सभापति और अध्यक्ष की कुर्सी का फैसला करेंगे।\n\nबहरहाल, अब शहर की सरकार के लिए शंखनाद हो चुका है...नेताओं की परीक्षा, दावेदारों की अग्निपरीक्षा और जनता के फैसले की घड़ी करीब है। 9 और 11 सितंबर को ईवीएम में बंद होगा सियासी भविष्य...14 सितंबर को खुलेगा जनता का फैसला और 21 सितंबर को तय होगा शहर की सत्ता का सरताज। पार्षद तय करेंगे कि शहर की सत्ता की कमान किसके हाथ होगी।
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भीम आर्मी ने डांगावास हत्या मामले में हाई कोर्ट में अपील की मांग

Hanumangarh, Rajasthan:हनुमानगढ़ में नागौर जिले के बहुचर्चित डांगावास हत्याकांड में मेड़ता सिटी की विशेष अदालत द्वारा सभी 40 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ दलित समाज में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में आज भीम आर्मी भारत एकता मिशन के राजस्थान प्रदेशाध्यक्ष मदन मेघवाल के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर हलमानगढ़ को ज्ञापन सौंपा। भीम आर्मी ने राज्य सरकार से इस फैसले के विरुद्ध राजस्थान उच्च न्यायालय में तुरंत और समयबद्ध अपील दायर करने की पुरजोर मांग की है। ज्ञापन में बताया गया कि करीब 11 वर्ष पहले डांगावास में अनुसूचित जाति के परिवारों की कृषि भूमि पर कब्जे को लेकर यह विवाद हुआ था। न्यायालय के आदेश के बाद जब पीड़ित पक्ष अपनी जमीन पर कब्जा लेने गया, तो दबंगों ने हथियारों से लैस होकर उन पर जानलेवा हमला कर दिया। इस हिंसक वारदात में पांच दलितों की निर्मम हत्या कर दी गई थी और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई थी, लेकिन लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद हाल ही में विशेष अदालत ने जांच की कमियों और गवाहों के बयानों में विरोधाभास का हवाला देते हुए सभी 40 आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया। ज्ञापन के मुताबिक भीम आर्मी भारत एकता मिशन के प्रदेशाध्यक्ष मदन मेघवाल ने मांग की कि सरकार इस मामले में सीबीआई और भारत सरकार के सक्षम प्राधिकारियों से तुरंत तालमेल बैठाए। तय समय-सीमा के भीतर राजस्थान उच्च न्यायालय में अपील दायर की जाए और पैरवी के लिए किसी वरिष्ठ व अनुभवी विशेष लोक अभियोजक को नियुक्त किया जाए। अदालत के फैसले में सामने आई जांच और मेडिकल रिपोर्ट की कमियों को आधार बनाकर, कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले लोक सेवकों और कमजोर पैरवी करने वाले लोक अभियोजक के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट की धारा 4 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए।
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बस्सी कस्बा स्कूलों में ट्रैफिक सेफ्टी जागरूकता कार्यक्रम: हेलमेट-सीट बेल्ट का संदेश

Jaipur, Rajasthan:जयपुर बस्सीट्रैफिक पुलिस की तरफ से विद्यार्थियों को दी ट्रैफिक नियमों की जानकारी। सड़क हादसों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को रोकने और लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से बस्सी कस्बा स्थित संस्कार पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल और तेजस पब्लिक स्कूल में रोड सेफ्टी अवेयरनेस प्रोग्राम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सभी को हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने, और यातायात नियमों का पालन करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के दौरान सभी विद्यार्थियों को यातायात नियमों की जानकारी दी गई। साथ ही वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करने के प्रति जागरूक किया गया। बस्सी सहायक पुलिस आयुक्त हरजी लाल यादव ने दोपहिया वाहन चालकों से हेलमेट का इस्तेमाल करने और कार चालकों से सीट बेल्ट लगाने की अपील की गई। और कहा कि सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। वही ट्रैफिक से आए पुलिस अधिकारी रामकृपाल मीणा और हेड कांस्टेबल प्रेम सिंह ने कहा कि यातायात नियमों का पालन करके हम न सिर्फ अपनी जिंदगी सुरक्षित रख सकते हैं बल्कि सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों की जान भी बचा सकते हैं। अंत में सभी ने शपथ लेते हुए कहा कि आगे से सड़क नियमों का पालन करेंगे बाइक पर हेलमेट लगाकर सफ़र करेंगे। इस अवसर पर संस्कार स्कूल प्रिंसिपल पूजा अग्रवाल ने भी सभी को रूल्स फॉलो करने का संदेश दिया। वही तेजस पब्लिक स्कूल निदेशक राहुल भट्ट ने आए हुए सभी अतिथियों का आभार प्रकट किया।
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SC फैसला: बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए ट्रिब्यूनल दे सकता है बेदखली

Noida, Uttar Pradesh:*बुजुर्ग माता-पिता को सताना पड़ेगा भारी! जरूरत पड़ी तो बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकता है ट्रिब्यूनल- सुप्रीम कोर्ट* उम्र के आखिरी पड़ाव में माता-पिता को अगर अपने ही घर में परेशानी, असुरक्षा या अपमान का सामना करना पड़े, तो कानून उनकी मदद के लिए आगे आ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ किया है कि ऐसी सूरत में सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल बच्चों या दूसरे व्यक्तियों को वरिष्ठ नागरिकों की संपत्ति से बाहर करने का आदेश भी दे सकता है। हालांकि,कोर्ट ने यह साफ किया है कि यह अधिकार हर पारिवारिक विवाद के लिए नहीं है। बच्चों की बेदखली तभी हो सकती है, जब वह वरिष्ठ नागरिक के भरण-पोषण, सुरक्षा या संरक्षण के लिए जरूरी हो। *'हमारी संस्कृति में माता पिता को भगवान का दर्जा'* सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी सभ्य समाज की पहचान इस बात से भी होती है कि वह अपने बुजुर्गों को कितना सम्मान और सुरक्षा देता है। बुजुर्ग अपने साथ ज्ञान, जीवन का अनुभव और सामूहिक स्मृतियां लेकर चलते हैं। उनका अनुभव परिवार और समाज के लिए बेहद अहम होता है। वे अगली पीढ़ी का मार्गदर्शन कर सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि हमारे देश की संस्कृति में माता-पिता को बहुत सम्मान दिया गया है। उन्हें ईश्वर के समान माना जाता है। *कोर्ट के सामने मामला क्या था* सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश रविकांत गुप्ता नाम के व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। लखनऊ के विकास नगर में रवि कांत गुप्ता खुद का घर था। यह उनकी ख़ुद अर्जित सम्पति थी। रविकांत गुप्ता की मां की उम्र 81 वर्ष थी। रविकांत गुप्ता ने आरोप लगया कि उनके बेटे ने अपनी दादी को घर में रहने की इजाज़त नहीं दी। उन्हें इतना परेशान किया और हालात ऐसे बने कि बुजुर्ग महिला को घर छोड़कर वृद्धाश्रम में रहना पड़ा। *बेटे की बेदखली के पिता की क़ानूनी लड़ाई* इसके बाद रविकांत गुप्ता ने जून 2022 को डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के सामने आवेदन देकर अपने बेटे को संपत्ति से बाहर निकालने की मांग की। एसडीएम ने बेटे को घर से निकालने का आदेश दिया। एडीएम ने माना कि मकान रविकांत गुप्ता की अपनी संपत्ति है। उन्होंने आदेश में यह भी दर्ज किया कि बेटे ने अपनी दादी को घर में रहने नहीं दिया था। इसके बाद मामला डीएम के सामने गया। डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने भी 9 अगस्त 2023 को एसडीएम के आदेश को बरकरार रखा और बेटे तथा उसकी पत्नी को मकान खाली करके गुप्ता को उसका कब्जा सौंपने का निर्देश दिया। *इलाहाबाद HC का आदेश* रविकांत गुप्ता के बेटे और उसकी पत्नी ने इन आदेशों को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी।हाई कोर्ट ने कहा कि सीनियर सिटीजन्स एक्ट 2007 के तहत अधिकारियों को किसी व्यक्ति को संपत्ति से बाहर करने का आदेश देने की शक्ति नहीं है। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने एसडीएम और डीएम के बेदखली के आदेश रद्द कर दिया। *SC का फैसला* रविकांत गुप्ता ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संसद ने सीनियर सिटीजन एक्ट 2007 इस मकसद से बनाया है कि उम्र बढ़ने का मतलब बुजुर्गों के लिए उपेक्षा, असुरक्षा या अपमान न बन जाए।कानून का मकसद वरिष्ठ नागरिकों को जल्दी और प्रभावी राहत उपलब्ध कराना है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब कानून किसी ट्रिब्यूनल को किसी मकसद को पूरा करने का अधिकार देता है, तो उस मकसद को प्रभावी रूप से पूरा करने के लिए जरूरी कदम उठाने की शक्ति भी ट्रिब्यूनल के पास होनी चाहिए। इसी आधार पर कोर्ट ने कहा कि यदि किसी वरिष्ठ नागरिक की सुरक्षा और देखभाल के लिए किसी व्यक्ति को संपत्ति से निकालना जरूरी है, तो ट्रिब्यूनल बेदखली का आदेश दे सकता है।
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कश्मीर में ओलावृष्टि-बारिश से सेब नुकसान 400 करोड़, किसान मुआवजे की मांग करते हुए

Pulwama, मौसम की मार ने कश्मीर की सेब की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है: लगभग ₹400 करोड़ के नुकसान के कारण किसान मुआवजे, फसल बीमा और कर्ज माफ़ी की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार के सामने मौसम की अनिश्चितता की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। अचानक होने वाली ओलावृष्टि, भारी बारिश, अचानक आई बाढ़, बादल फटने की घटनाओं, भूस्खलन और नेशनल हाईवे 44 के बार-बार बंद होने से फलों की फसल को भारी नुकसान पहुँचा है। मोटे अनुमान के मुताबिक, फलों की पैदावार में लगभग ₹400 करोड़ का नुकसान हुआ है, जो मुख्य रूप से दक्षिण कश्मीर के चार ज़िलों तक सीमित है। खबरों के अनुसार, कुलगाम में लगभग 90% नुकसान हुआ है, शोपियां—जो सेब उत्पादन में सबसे आगे रहने वाला ज़िला है—वहाँ 80–85%, पुलवामा में लगभग 55% और अनंतनाग में लगभग 35% नुकसान हुआ है। कुल मिलाकर, बाज़ार में उपलब्ध सेब की मात्रा में लगभग 36% की कमी आने का अनुमान है। फल उत्पादक इम्तियाज़ अहमद ने कहा, "इस सीज़न में ओलावृष्टि, भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ जैसी मौसम की घटनाओं के कारण भारी नुकसान हुआ है। कश्मीर के अलग-अलग ज़िलों में लगभग 80% से 90% फसलें बर्बाद हो गई हैं, और दक्षिण कश्मीर पर इसका सबसे बुरा असर पड़ा है। कुलगाम में 90% और शोपियां में 85% नुकसान हुआ है, जबकि कुछ इलाके तो 100% प्रभावित हुए हैं; पुलवामा में 55% नुकसान हुआ है। बारिश से होने वाली बीमारियों और स्थानीय विशेषज्ञों की सलाह की कमी ने संकट को और बढ़ा दिया है। उत्पादकों को उम्मीद थी कि कम पैदावार से बॉक्स की कीमतें बढ़ेंगी लेकिन यह उम्मीद काफी हद तक टूट गई है। कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं की कमी के कारण बड़ी मात्रा में फल खराब होने के खतरे में हैं। भूस्खलन के कारण NH-44 पर बार-बार लगने वाले जाम से समस्या और बढ़ जाती है। अधिकारी हाईवे को जल्द से जल्द खोलने की कोशिश करते हैं, लेकिन रास्ता बंद रहने से फलों से लदे ट्रक जमा हो जाते हैं। जब सड़क खुलती है, तो बाहर की मंडियों में माल पहुँचता है और कीमतें गिर जाती हैं। इस प्रक्रिया में अनुमानित 10–15% उपज खराब हो जाती है। फल उत्पादक इम्तियाज़ अहमद के अनुसार, "NH 44 बंद होने के कारण तोड़े गए सेब सही कीमत न मिलने मंडियों में ही फंसे रहते हैं। पूरे क Kashmir में कुल आर्थिक नुकसान हज़ारों करोड़ रुपये का अनुमान है, जिससे उत्पादक सरकार से आर्थिक मदद और बेहतर ट्रैफिक/ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की अपील कर रहे हैं." फल उत्पादक गुलाम नबी हज़ाम ने कहा, "इस बार बहुत ज़्यादा नुकसान हुआ है। ठीक कटाई के समय ही ऐसा हुआ। किसानों को सरकार से थोड़ी मदद की ज़रूरत है। सड़कें बुरी तरह जाम नहीं होनी चाहिए, इससे उपज खराब हो जाती है। लगभग 70 प्रतिशत फसल बर्बाद हो गई है। शोपیاں बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पहले ट्रेनें बाहर से सीमेंट लाती थीं, जिससे तापमान के कारण फल खराब हो जाते थे और मंडियों तक पहुँचते-पहुँचते वे 'C ग्रेड' के हो जाते थे।" कश्मीर की अर्थव्यवस्था में बागवानी, और खासकर सेब की खेती, रीढ़ की हड्डी की तरह है। यह क्षेत्र राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में लगभग 8-9% का योगदान देता है। जम्मू-कश्मीर में आर्थिक गतिविधियों को चलाने में यह पर्यटन से भी आगे है। इस सेक्टर से सालाना ₹10,000-13,000 करोड़ का व्यापार होता है और लगभग 35 लाख लोगों की आजीविका इसी पर निर्भर है (चाहे सीधे तौर पर या परोक्ष रूप से)। भारत में सबसे ज़्यादा सेब कश्मीर में ही पैदा होते हैं। यहाँ सालाना उत्पादन आमतौर पर 20-23 लाख मीट्रिक टन के बीच होता है, जो देश में सबसे ज़्यादा है। इस "लाल सोना" ने लंबे समय से गर्व और समृद्धि दी है। लेकिन मौजूदा सीज़न में यह उम्मीद बढ़ती हुई परेशानी में बदल गई है, जिसकी वजह जलवायु परिवर्तन से जुड़े मौसम के बदलते और अनिश्चित पैटर्न हैं। लगातार मिल रही इन चुनौतियों के कारण, किसान फसल के नुकसान के लिए तुरंत मुआवज़े और एक मज़बूत फसल बीमा योजना की मांग कर रहे हैं, जो भविष्य में मौसम की मार से सुरक्षा दे सके। जिन किसानों ने किसान लोन लिए थे, वे भी अपना आर्थिक बोझ कम करने के लिए सरकार से लोन माफ़ी की अपील कर रहे हैं। यह संकट एक बड़ी चुनौती की ओर इशारा करता है। जलवायु परिवर्तन ने कश्मीर में पानी की कमी, बाढ़ और बादल फटने जैसी घटनाओं के ज़रिए पहले ही खतरे की घंटी बजा दी है। अब यह सीधे तौर पर इलाके की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि को बाधित कर रहा है। मौसम का अनिश्चित होना अब कोई दूर का खतरा नहीं रह गया है; यह घाटी के व्यापार की मात्रा, किसानों की आय और व्यापक अर्थव्यवस्था को तेज़ी से नुकसान पहुँचा रहा है।
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इ_indore के वन 8 कम्यून में करणी सेना, तीन युवक पुलिस के हवाले

Indore, Madhya Pradesh:इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र स्थित एपोलो हाई स्ट्रीट के वन 8 कम्यून पर तब हंगामा हो गया जब श्री राजपूत करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने तीन युवकों पर अपनी पहचान छिपाकर साथ क्लब में पहुंचने का आरोप लगाया। कार्यकर्ताओं ने तीनों युवकों को पकड़कर पुलिस के सुपुर्द कर दिया। वहीं पकड़ाए गए एक युवक फैज़ल पर बेटमा की एक पीड़िता ने आरोप लगाए जिसके बाद फैजल पर बेटमा थाने पर भी कार्रवाई की गई। दरअसल, वन 8 कम्यून में श्री राजपूत करणी सेना से जुड़े कार्यकर्ताओं को कुछ युवकों की पहचान को लेकर संदेह हुआ। कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और तीन युवकों से पूछताछ की। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि युवकों ने शुरुआत में हिंदू नाम बताए थे और उनके साथ मौजूद युवतियों को कॉलेज की दोस्त बताया था। बाद में पहचान संबंधी दस्तावेजों की जांच की गई। कार्यकर्ताओं के दावे के मुताबिक, तीनों युवकों की पहचान बेटमा निवासी मोईन खान, साहिल खान और जुनैद खान के रूप में हुई। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने तीनों को पुलिस के सुपुर्द कर दिया। कार्यकर्ताओं ने युवकों के मोबाइल में युवतियों से जुड़े आपत्तिजनक फोटो और वीडियो मिलने का दावा भी किया है। हालांकि इन फोटो-वीडियो की सत्यता और परिस्थिति में बनाया या साझा किया गया, इसकी पुष्टि अभी पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। इसकी पुष्टि हम नहीं करते। जब इस पूरे मामले की जानकारी जुटाने जी मीडिया की टीम वन 8 कम्यून पहुंची तो वहां मौजूद स्टाफ ने जानकारी देने से मना कर दिया। वही एक पीड़िता की शिकायत पर बेटमा पुलिस थाने पर आरोपी फैजल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। जब फैजल को मेडिकल के लिए पुलिस थाने से ले जाया गया तो सड़क पर लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली।
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