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गोविंददेवजी मंदिर में फागोत्सव ने भक्तों को किया रंगों से भिगोया
DGDeepak Goyal
Feb 28, 2026 13:20:58
Jaipur, Rajasthan
भजनों की स्वरलहरियों से गूंजता माहौल। नृत्य, गीत और संगीत की प्रस्तुतियों के दौरान गोविन्द संग होली खेलते कलाकारों की टोलियां और भजनों की मिठास से मंत्रमुग्ध होते श्रद्धालु। कुछ ऐसा ही नजारा आराध्य देव गोविन्ददेवजी मंदिर में फागोत्सव के दौरान देखने को मिला। शहर के आराध्य गोविंददेवजी मंदिर में चल रहे परम्परगत फागोत्सव में राजस्थानी होली साकार हुई। शेखावाटी ढप-चंग के बीच कलाकारों ने मयूर नृत्य से गोविंददेवजी को रिझाया। श्रद्धालुओं ने फूलों की होली खेली, वहीं श्रीकृष्ण को लड्डू खिलाते हुए श्री यशोदा मैया के दर्शन हुए।
फाल्गुन का महीना…और रंगों की बात न हो, ऐसा कैसे हो सकता है। जैसे-जैसे होली नज़दीक आ रही है, वैसे-वैसे शहर में चंग की थाप पर फाग के गीत गूंज रहे हैं। इसी रंगोत्सव की कड़ी में आराध्य के दरबार में फागोत्सव मनाया गया, जहां ठाकुरजी संग फूलों की Holi खेली गई। कलाकारों की सुरमयी प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को फाग की मस्ती में डुबो दिया। “ऐसो होली खेले कान्हा…”, “मैं तो सांवरे के संग होली खेलन आई…” जैसे फाग भजनों से मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा। चंग-ढप की खनकती थाप, संगीत की मधुर धुन और उड़ते गुलाल ने ऐसा रंग जमाया कि हर कोई झूमने को मजबूर हो गया। गुलाल और पुष्प वर्षा के बीच श्रद्धालुओं ने ठाकुरजी को फूलों की होली खिलाई। सफेद-लाल पोशाक में सजे कलाकार जब कृष्ण-राधा के वेश में मंच पर उतरे तो लगा मानो ब्रजधाम ही जयपुर आ गया हो।
फूलों की होली में महिलाएं और बच्चे भी पीछे नहीं रहे। हवाओं में उड़ते फूल और रंगों की बौछार के बीच हर चेहरा भक्ति और उल्लास से सराबोर नजर आया। गोपियों के रूप में सजी महिलाएं श्याम नाम में मग्न दिखीं तो बच्चों ने भी नटखट नंदलाल की झलक पेश की। कलाकारों ने आपसी तालमेल और एक जैसी पारंपरिक वेशभूषा में ऐसी प्रस्तुतियां दीं, जिसमें राजस्थानी संस्कृति की खूबसूरत छटा भी दिखाई दी। भावपूर्ण भजनों और नृत्य ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। शहर के अन्य मंदिरों में भी सुबह से शाम तक फाग महोत्सव की धूम रही। गुलाल की सौंधी खुशबू और चटख रंगों के बीच भक्त अपने आराध्य को फाग गीत सुना रहे हैं। हर आंगन, हर चौक और हर मंदिर में फाग का रंग चढ़ता नजर आ रहा है।
रंग, राग और रस से सराबोर यह फागोत्सव सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि आस्था और प्रेम का संगम है। जैसे-जैसे होली नजदीक आ रही है, छोटी काशी पूरी तरह कृष्णमय और रंगमय होती जा रही है।
दीपक गोयल, जयपुर。
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