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हवाई अड्डा विस्तार: 15 दिन नोटिस से प्रभावितों में भारी नाराजगी

mathura, Dharamshala, Himachal Pradesh:एयरपोर्ट विस्तार : 15 दिन के नोटिस पर भड़के विस्थापित, डीसी बोले- जरूरतमंद परिवारों को मिलेगी मोहलत धर्मशाला : कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तारीकरण को लेकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। इसी बीच रछियालू, के ऊड़ियां और आसपास के प्रभावित गांवों के लोगों को घर खाली करने के लिए जारी किए गए 15 दिन के नोटिस से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। मंगलवार को ग्राम पंचायत रछियालू के प्रधान रोशन लाल के नेतृत्व में प्रभावित परिवारों ने उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा से मुलाकात कर घर और गौशालाएं बनाने के लिए कम से कम डेढ़ वर्ष का समय देने की मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने विकास परियोजना के लिए अपनी जमीनें तो सरकार को सौंप दीं, लेकिन पुनर्वास (आरएंडआर) की राशि मिलने में देरी होने के कारण वे अभी तक नए मकान तैयार नहीं कर सके। उनका आरोप है कि उन्हें मार्च-अप्रैल में भुगतान मिला, जबकि इस बीच जमीनों के दाम कई गुना बढ़ गए। जहां उन्हें 3 से 11 लाख रुपये प्रति कनाल के हिसाब से मुआवजा मिला, वहीं नई जगह जमीन खरीदने के लिए 40 से 50 लाख रुपये प्रति कनाल तक खर्च करना पड़ रहा है। रछियालू की निवासी निहारिका ने कहा कि जब एनओसी पर हस्ताक्षर करवाए गए थे, तब अधिकारियों ने भरोसा दिया था कि आरएंडआर राशि मिलने के बाद परिवारों को नई जगह बसने के लिए करीब डेढ़ साल का समय मिलेगा। लेकिन अब अचानक 15 दिन में घर खाली करने का नोटिस देकर लोगों को असमंजस में डाल दिया गया है। उनका कहना है कि नई जगहों पर सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं और अधिकांश परिवारों के मकान निर्माण का काम अभी शुरूआती चरण में है। ऐसे में इतने कम समय में घर खाली करना संभव नहीं है। डीसी बोले, कानून का पालन भी होगा, मानवीय पहलू भी देखेंगे उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने स्पष्ट किया कि हवाई अड्डा विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। जिन प्रभावित परिवारों को मुआवजा और आरएंडआर की राशि मिल चुकी है, उनकी संपत्ति का कब्जा नियमानुसार संबंधित विभाग को सौंपा जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों ने अतिरिक्त समय देने की मांग रखी है, जिसे प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। प्रत्येक मामले का अलग-अलग आकलन किया जाएगा और जिन परिवारों को वास्तव में समय की आवश्यकता होगी, उन्हें परिस्थितियों के अनुसार राहत दी जाएगी। उन्होंने लोगों से अनावश्यक चिंता न करने की अपील की। डेढ़ साल के नियम सभी मामलों में लागू नहीं डीसी बैरवा ने यह भी स्पष्ट किया कि डेढ़ वर्ष की मोहलत संबंधी धारणा पूरी तरह सही नहीं है। उन्होंने बताया कि ऐसा प्रावधान केवल उन मामलों में लागू होता है, जब सरकार प्रभावित परिवारों को पुनर्वास के लिए प्लॉट उपलब्ध कराती है और वहां सड़क, बिजली व पानी जैसी सुविधाएं विकसित करनी होती हैं। कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार परियोजना में सभी प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास के लिए प्लॉट की बजाय नकद मुआवजे का विकल्प चुना है, इसलिए वही नियम यहां लागू नहीं होता। उन्होंने बताया कि कानून के अनुसार मुआवजा मिलने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर कब्जा लेना जरूरी होता है, हालांकि प्रशासन पूरी प्रक्रिया में संवेदनशीलता बरतते हुए प्रभावित परिवारों की व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखकर निर्णय लेगा। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन उन्हें पर्याप्त समय देगा, ताकि वे नए मकान और गौशालाओं का निर्माण पूरा कर सम्मानपूर्वक नए स्थान पर बस सकें। वहीं प्रशासन का कहना है कि विकास परियोजना और प्रभावित परिवारों के हितों के बीच संतुलन बनाते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी. बाईट : हेमराज बैरवा जिलाधीश कांगड़ा बाईट : रोशन लाल प्रधान ग्राम पंचायत रछियालू बाईट : निहारिका ग्रामिण रछियालू
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पंजाब सरकार ने बाढ़ रोकथाम के लिए नदीयों में डि-सिल्टिंग की मंजूरी दी

Chandigarh, Chandigarh:ਸੂਚਨਾ ਤੇ ਲੋਕ ਸੰਪਰਕ ਵਿਭਾਗ, ਪੰਜਾਬ ਹੜ੍ਹਾਂ ਤੋਂ ਬਚਾਅ ਤੇ ਜੰਗਲੀਆਂ ਜੀਵ ਸੁਰੱਖਿਆ ਦੇ ਮੱਦੇਨਜ਼ਰ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਦਾ ਵੱਡਾ ਕਦਮ ਬਿਆਸ ਤੇ ਰਾਵੀ ਦਰਿਆ ਦੀਆਂ 7 ਥਾਵਾਂ 'ਤੇ ਡੀ-ਸਿਲਟਿੰਗ ਨੂੰ ਮਨਜ਼ੂਰੀ ਰਾਜ ਜੰਗਲੀ ਜੀਵ ਬੋਰਡ ਦੀ ਸਟੈਂਡਿੰਗ ਕਮੇਟੀ ਵੱਲੋਂ ਪ੍ਰਸਤਾਵਾਂ ਨੂੰ ਅੰਤਿਮ ਪ੍ਰਵਾਨਗੀ ਲਈ ਨੈਸ਼ਨਲ ਬੋਰਡ ਫਾਰ ਵਾਈਲਡ ਲਾਈਫ ਨੂੰ ਭੇਜਣ ਦੀ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ, ਜੁਲਾਈ 7: ਵਣ ਭਵਨ, ਐਸ.ਏ.ਐਸ. ਨਗਰ ਵਿਖੇ ਸ੍ਰੀ ਲਾਲ ਚੰਦ ਕਟਾਰੂਚੱਕ, ਵਣ ਅਤੇ ਜੰਗਲੀ ਜੀਵ ਸੁਰੱਖਿਆ ਮੰਤਰੀ, ਪੰਜਾਬ ਦੀ ਪ੍ਰਧਾਨਗੀ ਹੇਠ ਰਾਜ ਜੰਗਲੀ ਜੀਵ ਬੋਰਡ ਦੀ ਸਟੈਂਡਿੰਗ ਕਮੇਟੀ ਦੀ ਪੰਜਵੀਂ ਮੀਟਿੰਗ ਹੋਈ । ਮੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਬੰਧਕੀ ਸਕੱਤਰ (ਵਣ) ਕਮਲ ਕਿਸ਼ੋਰ ਯਾਦਵ (ਵੀ ਸੀ ਰਾਹੀਂ) , ਪ੍ਰਮੁੱਖ ਮੁੱਖ ਵਣ ਪਾਲ (ਜੰਗਲਾਤ ਬਲ ਦੇ ਮੁਖੀ) ਧਰਮਿੰਦਰ ਸ਼ਰਮਾ ਅਤੇ ਮੁੱਖ ਜੰਗਲੀ ਜੀਵ ਵਾਰਡਨ ਸਤਿੰਦਰ ਸਾਗਰ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਵਣ ਵਿਭਾਗ ਅਤੇ ਜਲ ਸਰੋਤ ਵਿਭਾਗ ਦੇ ਸੀਨੀਅਰ ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ ਦੇ ਨਾਲ ਡਬਲਿਊ ਡਬਲਿਊ ਐਫ - ਇੰਡੀਆ ਦੇ ਨੁਮਾਇੰਦੇ ਵੀ ਮੌਜੂਦ ਸਨ । ਇਸ ਮੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਪਿਛਲੇ ਸਾਲ ਦੌਰਾਨ ਰਾਜ ਵਿੱਚ ਆਏ ਹੜ੍ਹਾਂ ਕਾਰਨ ਦਰਿਆਵਾਂ ਵਿੱਚ ਸਿਲਟ/ਰੇਤਾ ਜਮਾਂ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਸਮੇਂ ਦੌਰਾਨ ਹੜ੍ਹਾਂ ਤੋਂ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਨੁਕਸਾਨ ਨੂੰ ਘਟਾਉਣ ਅਤੇ ਦਰਿਆਵਾਂ ਦੇ ਬੇਹਤਰ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਲਈ ਜਲ ਸਰੋਤ ਵਿਭਾਗ, ਪੰਜਾਬ ਵੱਲੋਂ ਬਿਆਸ ਦਰਿਆ ਅਤੇ ਰਾਵੀ ਦਰਿਆ ਵਿੱਚ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਥਾਵਾਂ ਤੇ ਡੀ-ਸਿਲਟਿੰਗ ਕਰਨ ਦੇ ਮੰਤਵ ਨਾਲ ਪੇਸ਼ ਕੀਤੀਆਂ ਗਈਆਂ 8 ਤਜਵੀਜ਼ਾਂ ਉੱਤੇ ਵਿਚਾਰ ਕੀਤਾ ਗਿਆ । ਵਿਚਾਰ ਵਟਾਂਦਰੇ ਉਪਰੰਤ ਰਾਜ ਵਿੱਚ ਦਰਿਆਵਾਂ ਦੀ ਬੇਹਤਰ ਸਾਂਭ ਸੰਭਾਲ, ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਹਿੱਤ ਵਿੱਚ ਅਤੇ ਜੰਗਲੀ ਜੀਵਾਂ ਦੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਅਤੇ ਬੇਹਤਰ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਨੂੰ ਮੁੱਖ ਰੱਖਦੇ ਹੋਏ ਬਿਆਸ ਦਰਿਆ ਵਿੱਚ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਹੁਸ਼ਿਆਰਪੁਰ ਦੀਆਂ ਦੋ, ਕਪੂਰਥਲਾ ਦੀਆਂ ਤਿੰਨ ਤੇ ਗੁਰਦਾਸਪੁਰ ਦੀ ਇਕ ਸਾਈਟ ਅਤੇ ਰਾਵੀ ਦਰਿਆ ਵਿੱਚ ਕੱਥਲੋਰ-ਕੁਸ਼ਲਿਆ ਜੰਗਲੀ ਜੀਵ ਸੈਂਚੁਰੀ ਦੇ ਨਾਲ ਲੱਗਦੀ ਇਕ ਸਾਈਟ ਉੱਤੇ ਕੀਤੀ ਜਾਣ ਵਾਲੀ ਡੀ-ਸਿਲਟਿੰਗ ਸਬੰਧੀ ਤਜਵੀਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਵਾਨਗੀ ਲਈ ਨੈਸ਼ਨਲ ਬੋਰਡ ਫਾਰ ਵਾਈਲਡ ਲਾਈਫ ਦੀ ਸਟੈਡਿੰਗ ਕਮੇਟੀ ਨੂੰ ਭੇਜਣ ਦੀ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ । ਇੱਥੇ ਇਹ ਦੱਸਣਯੋਗ ਹੋਵੇਗਾ ਕਿ ਜ਼ਲ ਸਰੋਤ ਵਿਭਾਗ ਪਾਸੋਂ ਬਿਆਸ ਦਰਿਆ ਵਿੱਚ ਲਗਭਗ 30 ਵੱਖ-ਵੱਖ ਸਾਈਟਾਂ ਦੇ ਡੀ-ਸਿਲਟਿੰਗ ਕਰਨ ਦਾ ਪ੍ਰਸਤਾਵ ਵਣ ਵਿਭਾਗ ਪਾਸ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਇਆ ਸੀ । ਕਿਉਂਕਿ ਬਿਆਸ ਦਰਿਆ ਕੰਜਰਵੇਸ਼ਨ ਰਿਜਰਵ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਇਕ ਰਾਮਸਰ ਸਾਈਟ ਵੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਵਿੱਚ ਡਾਲਫਿੰਨ, ਘੜਿਆਲ ਅਤੇ ਹੋਰ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਜੀਵ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਸ ਲਈ ਇਸ ਸਬੰਧੀ ਸਟੱਡੀ ਆਈ ਆਈ ਟੀ ਰੋਪੜ ਪਾਸੋਂ ਕਰਵਾਈ ਗਈ ਸੀ ਕਿ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਜੰਗਲੀ ਜੀਵਾਂ ਨੂੰ ਨੁਕਸਾਨ ਕੀਤੇ ਬਿਨਾਂ ਹੜ੍ਹ ਰੋਕੂ ਕਦਮ ਚੁੱਕੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ। ਆਈ ਆਈ ਟੀ ਰੋਪੜ ਦੀ ਰਿਪੋਰਟ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਣ ਉਪਰੰਤ ਇਨ੍ਹਾਂ 30 ਸਾਈਟਾਂ ਦਾ ਇਕ ਮਾਹਿਰ ਕਮੇਟੀ ਵੱਲੋਂ ਦੌਰਾ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਕਮੇਟੀ ਵੱਲੋਂ ਹਰੇਕ ਸਾਈਟਾ ਦੇ ਦੌਰੇ ਮਗਰੋਂ ਸਿਰਫ ਬਿਆਸ ਦਰਿਆ ਵਿੱਚ 6 ਸਾਈਟਾਂ ਤੇ ਡੀ-ਸਿਲਟਿੰਗ ਕਰਨ ਦੀ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ । ਕਿਉਂਕਿ ਇਨ੍ਹਾਂ 6 ਸਾਈਟਾਂ ਉੱਤੇ ਬਹੁਤ ਹੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸਿਲਟ ਜਮਾਂ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਨਾ ਕੇਵਲ ਦਰਿਆ ਦਾ ਵਹਾਅ ਬਦਲ ਗਿਆ ਅਤੇ ਨਾਲ ਹੀ ਵਾਈਲਡ ਲਾਈਫ ਦੇ ਹੈਬੀਟੈਟ ਉੱਤੇ ਅਸਰ ਪਿਆ ਹੈ । ਕਮੇਟੀ ਦੀ ਰਾਏ ਅਨੁਸਾਰ ਇਨ੍ਹਾਂ 6 ਸਾਈਟਾਂ te ਡੀ-ਸਿਲਟਿੰਗ ਕਰਨ ਨਾਲ ਅੱਗੇ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਹੜ੍ਹ ਰੋਕੂ ਪ੍ਰਬੰਧ ਵੀ ਕੀਤੇ ਜਾ ਸਕਣਗੇ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ ਵਧਣ ਨਾਲ ਜੰਗਲੀ ਜੀਵਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਫਾਇਦਾ ਹੋਵੇਗਾ ।
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लुधियाना कांग्रेस में गुटबाज़ी उजागर: कड़वल का 7 दिन का अल्टीमेटम

Ludhiana, Punjab:लुधियाना कांग्रेस में गुटबाजी उजागरः बैंस के आरोपों पर कड़वल का पलटवार, बोले- '7 दिन में सबूत दो, वरना मैं मर्यादा भूल जाऊंगा' लुधियाना में कांग्रेस के 2 बड़े नेताओं के बीच की सियासी जंग अब खुलकर सामने आ गई है। आत्म नगर हलके से पूर्व विधायक सिमरजीत सिंह बैंस द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद अब कांग्रेस नेता कमलजीत सिंह कड़वल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बैंस पर जोरदार पलटवार किया है। कड़वल ने बैंस को पैसों का लालची और गुंडा तक कह डाला और 7 दिन का अल्टीमेटम दिया है। कड़वल ने साफ़ कर दिया है कि आत्म नगर हलके से 2027 का चुनाव वही लड़ेंगे, जिससे बैंस बौखला गए हैं।कड़वल ने सिमरजीत बैंस पर तंज कसते हुए कहा कि बैंस पंजाब के पूर्व सीएम और सबसे लोकप्रिय नेता चरणजीत सिंह चन्नी से मुकाबला करने की कोशिश कर रहे हैं। कड़वल ने कहा, बैंस ने फ्रस्ट्रेशन में आकर पहले इंटरव्यू में चन्नी साहब के खिलाफ बोला और अगले ही दिन जब समीकरण बदले तो उनके सुर बदल गए। सुबह उठकर चन्नी को अपना फूफा बना लिया। कड़वल ने कहा कि बैंस की कांग्रेस के स्तंभ नेताओं के खिलाफ बोलने की औकात नहीं है। परिवार पर टिप्पणी से भड़के कड़वल, दी 7 दिन की मोहलत कड़वल सबसे ज्यादा इस बात से खफा दिखे कि बैंस ने उनके परिवार, मां, बहन और बेटियों को लेकर अभद्र टिप्पणी की है। कड़वल ने चेतावनी देते हुए कहा, मैं बैंस को 7 दिन का समय देता हूँ। जो आरोप तुमने लगाए हैं, उनके सबूत जनता के सामने लाओ। अगर तुमने ऐसा नहीं किया तो 8वें दिन मैं सारी मर्यादाएं भूल जाऊंगा। फिर मैं बताऊंगा कि किस घर में क्या हुआ और किसकी मां-बेटी के साथ क्या हुआ।सिमरजीत बैंस ने कड़वल पर 82 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया था। इसका जवाब देते हुए कड़वल ने 1997 की एक जमीन की फर्द (दस्तावेज) लहराई। उन्होंने कहा, 1997 से पहले इस बंदे (बैंस) के पास एक गज जमीन का मालिकाना हक नहीं था। मैंने अपनी जमीन इसके नाम ट्रांसफर की थी। आज ये मुझ पर 82 लाख लेने का आरोप लगा रहा है। मैंने पूरी जिंदगी, अपनी कमाई और अपने सुख इस इंसान पर लुटा दिए। कड़वल ने चुनौती दी कि अगर 82 लाख का आरोप साबित हो गया तो वह वो पैसे गरीबों में बांट देंगे। मैंने बैंस के लिए जेल काटी, लेकिन वह पैसे का लालची निकला अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कड़वल ने बताया कि वे कभी पक्के दोस्त हुआ करते थे। कड़वल ने कहा, जब बैंस पहली बार एमसी (MC) का चुनाव लड़ा था, तब वो एक गली का लोफर और गुंडा माना जाता था। मैंने उसे चुनाव लड़ाया लेकिन वो अपनी गुंडागर्दी के कारण हार गया।कड़वल ने आगे बताया कि वह बैंस की खातिर जेल भी गए, लेकिन जेल में जाकर उन्हें बैंस की नीयत का पता चला। कड़वल का आरोप है कि बैंस ने उनकी जमानत के लिए उनके घर से 45 लाख रुपये लिए, जबकि असल में 90 लाख की मांग कर रहे थे। उन्होंने कहा, ये इंसान सिर्फ पैसों से प्यार करता है, रिश्तों से नहीं। इसने अपने स्वार्थ के लिए कांग्रेस के कई नेताओं की बलि दी है। 2027 का चुनाव आत्म नगर से ही लडूंगाः कड़वल प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में कड़वल ने स्पष्ट कर दिया कि इस पूरी बौखलाहट का कारण आगामी चुनाव है। उन्होंने ऐलान किया, मैं 2027 का चुनाव 100% आत्म नगर हलके से ही लडूंगा। बैंस को दिख गया है कि उसके रास्ते बंद हो गए हैं और अब वो हार के डर से ऐसी ओछी बयानबाजी पर उतर आया है。 सियासी गलियारों में चर्चा तेज दोनों ही नेता कांग्रेस से जुड़े हैं और आत्म नगर हलके में अपना दबदबा मानते हैं। कड़वल के इस रुख के बाद अब लुधियाना की राजनीति पूरी तरह से गरमा गई है। अब देखना यह होगा कि कमलजीत कड़वल के इस 7 दिन के अल्टीमेटम और खुली चुनौती पर सिमरजीत सिंह बैंस क्या पलटवार करते हैं
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कनाडा की नदी में डूबकर दो भारतीय युवक मारे गए, परिवार सदमे में

Amritsar, Punjab:ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਦੋ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਦੀ ਕੈਨੇਡਾ ਦੇ ਸ਼ਹਿਰ ਮੋਂਟਰਿਅਲ ਵਿਖੇ ਨਦੀ ਦੇ ਵਿੱਚ ਡੁੱਬਣ ਕਾਰਨ ਹੋਈ ਮੌਤ। ਇੱਕ ਨੌਜਵਾਨ ਦੀ ਪਹਿਚਾਨ ਮ੍ਰਿਤਿਕ ਯੋਗਰਾਜ ਸਿੰਘ ਵਜੋਂ ਹੋਈ, ਜੋ ਕਿ ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ ਜ਼ਿਲ੍ਹੇ ਦੇ ਪਿੰਡ ਬੁਤਾਲਾ ਵਿੱਚ ਰਹਿੰਦਾ ਸੀ। ਮਾਂ ਪਿਓ ਦੇ ਰੋ ਰੋ ਕੇ ਹੋਇਆ ਬੁਰਾ ਹਾਲ, ਮ੍ਰਿਤਕ ਦੇ ਮਾਤਾ ਪਿਤਾ ਇਹ ਸਦਮਾ ਨਹੀਂ ਸਹਿ ਪਾਏ ਅਤੇ ਪਿਤਾ ਦੇ ਦਿਲ ਦੀ ਧੜਕਨ ਤੇਜ਼ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਹਸਪਤਾਲ ਵਿੱਚ ਦਾਖਲ ਕਰਵਾਉਣਾ ਪਿਆ। ਮ੍ਰਿਤਿਕ ਨੌਜਵਾਨ ਦੀ ਪਹਿਚਾਨ ਯੁਵਰਾਜ ਸਿੰਘ ਵਜੋਂ ਹੋਈ, ਜੋ ਕਿ ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ ਜ਼ਿਲ੍ਹੇ ਦੇ ਹਲਕਾ ਬਾਬਾ ਬਕਾਲਾ ਦੇ ਪਿੰਡ ਬੁਤਾਲਾ ਦਾ ਰਹਿਣ ਵਾਲਾ ਸੀ ਅਤੇ ਤਿੰਨ ਸਾਲ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਸਟੱਡੀ ਵੀਜ਼ਾ 'ਤੇ ਕੈਨੇਡਾ ਗਿਆ ਸੀ। ਮ੍ਰਿਤਕ ਯੁਵਰਾਜ ਸਿੰਘ ਦੀ ਭੂਆ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਸ਼ੁੱਕਰਵਾਰ ਉਹਨਾਂ ਦੀ ਮੁੰਡੇ ਦੇ ਨਾਲ ਆਖਰੀ ਵਾਰ ਗੱਲਬਾਤ ਹੋਈ ਸੀ। ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸਾਨੂੰ ਐਤਵਾਰ ਪਤਾ ਚੱਲਿਆ ਕਿ ਪੈਰ ਫਿਸਲਣ ਦੇ ਨਾਲ ਯੁਵਰਾਜ ਸਿੰਘ ਨਦੀ 'ਚ ਰੁੜ ਗਿਆ ਅਤੇ ਉਸਦੇ ਦੋਸਤ ਨੇ ਉਸਨੂੰ ਬਚਾਉਣ ਦੇ ਲਈ ਨਦੀ ਦੇ ਵਿੱਚ ਛਾਲ ਮਾਰ ਦਿੱਤੀ, ਪਰ ਉਸਦੀ ਵੀ ਨਦੀ 'ਚ ਰੁੜਨ ਦੇ ਨਾਲ ਮੌਤ ਹੋ ਗਈ। ਉਹ ਉੱਥੇ ਸੈਲਫੀਆਂ ਖਿੱਚਣ ਵਾਸਤੇ ਗਏ ਸੀ। ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਯੁਵਰਾਜ ਸਿੰਘ ਦੀ ਉਮਰ 22 ਸਾਲ ਦੀ ਸੀ ਅਤੇ ਉਹ ਦੋ ਹੀ ਭਰਾ ਹਨ। ਇੱਕ ਛੋਟਾ ਭਰਾ ਦੁਬਈ ਦੇ ਵਿੱਚ ਹੈ। ਯੁਵਰਾਜ ਸਿੰਘ ਦੀ ਭੂਆ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਮੇਰੇ ਭਰਾ ਅਤੇ ਭਰਜਾਈ ਦੋਵੇਂ ਹੀ ਇਸ ਵਕਤ ਹਸਪਤਾਲ ਦੇ ਵਿੱਚ ਦਾਖਲ ਹਨ। ਉਹ ਇਹ ਸਦਮਾ ਨਹੀਂ ਸਹਿ ਪਾਏ। ਪਰਿਵਾਰ ਨੇ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਅਤੇ ਭਾਰਤ ਸਰਕਾਰ ਅੱਗੇ ਗੁਹਾਰ ਲਗਾਈ ਕਿ ਸਾਡੇ ਬੱਚੇ ਦੀ ਲਾਸ਼ ਭਾਰਤ ਲਿਆਂਦੀ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਜੋ ਅਸੀਂ ਰਸਮੀ ਰਿਵਾਜਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ਉਸਦਾ ਅੰਤਿਮ ਸੰਸਕਾਰ ਕਰ ਸਕੀਏ。
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सर्टिफाइड डॉक्यूमेंट मिलने पर विजय सांपला देंगे जवाब, बेअदबी मामले पर नया मोड़

Chandigarh, Chandigarh:भारतीय जनता पार्टी के पूर्व कैबिनेट मंत्री विजय सांपला ने कहा कि उनको जिससे मेमोरंडम के बारे में पूछा जा रहा हैं उसकी सर्टिफाइड कॉपी उन्हें दी जाए ताकि वह कानूनी राय लेकर कोई जवाब दे सके। बेअদबी का मसला है इसलिये कोई भी बात जो SIT को बतानी है बह किसी ऐसे काग़ज़ से नहीं बोली जा सकते जिसकी कोई सर्टिफिकेशन न हो। उन्होंने कहा कि जो काग़ज़ मुझे दिखाया गया वह फ़ोटो स्ट्रीट था उस पर लिखा गया था कि बेअदबी मामले की जाँच गया सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से कराई जाए। उन्होंने कहा कि सर्टिफाइड डॉक्यूमेंट मिलता है तो वह वयान देने को तैयार हैं अगर भारतीय जनता पार्टी का बेअदबी मामले से कोई सरोकार नहीं है लोगों का ध्यान भटकाने के लिए अपनी कमज़ोरी छिपाने के लिए सरकार ऐसा कर रही हैं।
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मोगा में आवारा कुत्तों का खतरा बढ़ा: छह महीनों में 3,229 लोग काटे गए

Moga, Punjab:ਮੋਗਾ ’ਚ ਅਵਾਰਾ ਕੁੱਤਿਆਂ ਦਾ ਅਤੰਕ, ਛੇ ਮਹੀਨਿਆਂ ’ਚ 3,229 ਲੋਕ ਹੋਏ Dog Bite ਦਾ ਸ਼ਿਕਾਰ ! ਸ਼ਹਿਰ ਅਤੇ ਆਸ-ਪਾਸ ਦੇ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਅਵਾਰਾ ਕੁੱਤਿਆਂ ਦੀ ਵੱਧ ਰਹੀ ਗਿਣਤੀ ਲੋਕਾਂ ਲਈ ਗੰਭੀਰ ਚਿੰਤਾ ਦਾ ਵਿਸ਼ਾ ਬਣਦੀ ਜਾ ਰਹੀ ہے। ਸਰਕਾਰੀ ਅੰਕੜਿਆਂ ਅਨੁਸਾਰ 1 ਜਨਵਰੀ 2026 ਤੋਂ 30 ਜੂਨ 2026 ਤੱਕ ਅਵਾਰਾ ਕੁੱਤਿਆਂ ਦੇ ਕੱਟਣ ਦੇ ਕੁੱਲ 3,229 ਮਾਮਲੇ ਦਰਜ ਕੀਤੇ ਗਏ ਹਨ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਸਮੱਸਿਆ ਦੀ ਗੰਭੀਰਤਾ ਦਾ ਅੰਦਾਜ਼ਾ ਲਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਸਥਾਨਕ ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਕਹਿਣਾ ਹੈ ਕਿ ਅਵਾਰਾ ਕੁੱਤਿਆਂ ਦੀ ਵਧਦੀ ਗਿਣਤੀ ਕਾਰਨ ਬਜ਼ੁਰਗਾਂ, ਔਰਤਾਂ ਅਤੇ ਆਮ ਰਾਹਗੀਰਾਂ ਲਈ ਗਲੀਆਂ ਅਤੇ ਸੜਕਾਂ ’ਤੇ ਆਉਣਾ-ਜਾਣਾ ਮੁਸ਼ਕਲ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ। ਖ਼ਾਸ ਕਰਕੇ ਬੱਚਿਆਂ ਦੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਮਾਪਿਆਂ ਵਿੱਚ ਡਰ ਦਾ ਮਾਹੌਲ ਹੈ, ਕਿਉਂਕਿ ਕਈ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਕੁੱਤਿਆਂ ਦੇ ਝੁੰਡ ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਪਿੱਛਾ ਕਰਦੇ ਅਤੇ ਹਮਲੇ ਕਰਦੇ ਦੇਖੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ। ਹਾਲ ਹੀ ਵਿੱਚ ਮੋਗਾ ਦੇ ਪਿੰਡ ਕਪੂਰੇ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਅਵਾਰਾ ਕੁੱਤਿਆਂ ਵੱਲੋਂ ਨੋਚ-ਨੋਚ ਕੇ ਮਾਰ ਦੇਣ ਦੀ ਘਟਨਾ ਨੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ہਿਲਾ ਕੇ ਰੱਖ ਦਿੱਤਾ। ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ, ਪਿਛਲੇ ਦੋ-ਤਿੰਨ ਦਿਨਾਂ ਦੌਰਾਨ ਇਸੇ ਪਿੰਡ ਵਿੱਚ ਕੁੱਤਿਆਂ ਦੇ ਕੱਟਣ ਕਾਰਨ ਤਿੰਨ ਤੋਂ ਚਾਰ ਹੋਰ ਲੋਕ ਵੀ ਜ਼ਖ਼ਮੀ ਹੋ ਚੁੱਕੇ ਹਨ। ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ ਨਗਰ ਨਿਗਮ ਦੇ ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ ਦਾ ਕਹਿਣਾ ਹੈ ਕਿ ਮੋਗਾ ਨਗਰ ਨਿਗਮ ਦੀ ਹਦੂਦ ਅੰਦਰ ਕਰੀਬ 5,300 ਅਵਾਰਾ ਕੁੱਤਿਆਂ ਦੀ ਪਛਾਣ ਕੀਤੀ ਜਾ ਚੁੱਕੀ ਹੈ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਲਗਭਗ 5,200 ਕੁੱਤਿਆਂ ਦੀ ਨਸਬੰਦੀ ਕੀਤੀ ਜਾ ਚੁੱਕੀ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਨਗਰ ਨਿਗਮ ਵੱਲੋਂ ਅਵਾਰਾ ਕੁੱਤਿਆਂ ਦੀ ਦੇਖਭਾਲ ਅਤੇ ਰੱਖ-ਰਖਾਵ ਲਈ ਇੱਕ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸੈਂਟਰ ਵੀ ਸਥਾਪਤ ਕੀਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਨਗਰ ਨਿਗਮ ਦਾ ਦਾਅਵਾ ਹੈ ਕਿ ਜਿਵੇਂ ਹੀ ਇਹ ਸੈਂਟਰ ਚਾਲੂ ਹੋਵੇਗਾ, ਮੋਗਾ ਨਗਰ ਨਿਗਮ ਦੀ ਹੱਦ ਅੰਦਰ ਅਵਾਰਾ ਕੁੱਤਿਆਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ’ਤੇ ਪ੍ਰਭਾਵਸ਼ਾਲੀ ਕਾਬੂ ਪਾਇਆ ਜਾਵੇਗਾ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਵੱਡੀ ਕਮੀ ਆਵੇਗੀ。 ਹਾਲਾਂਕਿ, ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਮੰਨਣਾ ਹੈ ਕਿ ਜਦੋਂ ਤੱਕ ਜ਼ਮੀਨੀ ਪੱਧਰ ’ਤੇ ਪ੍ਰਭਾਵਸ਼ਾਲੀ ਕਾਰਵਾਈ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ, ਉਦੋਂ ਤੱਕ ਅਵਾਰਾ ਕੁੱਤਿਆਂ ਦਾ ਖ਼ਤਰਾ ਬਣਿਆ ਰਹੇਗਾ। ਸ਼ਹਿਰ ਵਾਸੀਆਂ ਨੇ ਪ੍ਰਸ਼ਾਸਨ ਤੋਂ ਜਲਦ ਅਤੇ ਠੋਸ ਕਦਮ ਚੁੱਕਣ ਦੀ ਮੰਗ ਕੀਤੀ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾਈ ਜਾ ਸਕੇ。
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने DA बकाये पर सरकार के तर्क खारिज, अगली सुनवाई 9 जुलाई

Chandigarh, Chandigarh:ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ਦੇ DA ਬਾਰੇ ਹਾਈਕੋਰਟ ਦੀ ਸਖ਼ਤੀ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਲੱਖਾਂ ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ਅਤੇ ਪੈਨਸ਼ਨਰਾਂ ਲਈ ਉਮੀਦ ਦੀ ਕਿਰਨ ਬਣੇ ਮਹਿੰਗਾਈ ڀੱਤੇ (DA) ਅਤੇ ਮਹਿੰਗਾਈ ਰਾਹਤ (DR) ਦੇ ਬਕਾਏ ਨਾਲ ਸਬੰਧਤ ਮਾਮਲੇ ‘ਤੇ ਅੱਜ ਪੰਜਾਬ ਅਤੇ ਹਰਿਆਣਾ ਹਾਈਕੋਰਟ ਵਿੱਚ ਅਹਿਮ ਸੁਣਵਾਈ ਹੋਈ। ਐਕਟਿੰਗ ਚੀਫ਼ ਜਸਟਿਸ ਅਤੇ ਜਸਟਿਸ ਰੋਹਿਟ ਕਪੂਰ ਦੇ ਬੈਂਚ ਵੱਲੋਂ ਕੀਤੀ ਗਈ ਇਸ ਸੁਣਵਾਈ ਦੌਰਾਨ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਨੂੰ ਕੋਈ ਰਾਹਤ ਨਹੀਂ ਮਿਲੀ ਅਤੇ ਅਦਾਲਤ ਨੇ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਦਿੱਤੇ ਵਿੱਤੀ ਬੋਝ ਦੇ ਤਰਕ ਨੂੰ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਖਾਰਜ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਹੈ。 ਸੁਣਵਾਈ ਦੌਰਾਨ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਪੇਸ਼ ਹੋਏ ਸੀਨੀਅਰ ਵਕੀਲ ਦੀਪਇੰਦਰ ਸਿੰਘ ਪਟਵਾਲੀਆ ਨੇ ਦਲੀਲ ਦਿੱਤੀ ਕਿ ਸੂਬਾ ਸਰਕਾਰ ਕੇਂਦਰ ਦੀਆਂ ਨੀਤੀਆਂ ਦੀ ਪਾਲਣਾ ਕਰਨ ਲਈ ਪਾਬੰਦ ਨਹੀਂ ਹੈ ਅਤੇ ਪੰਜਾਬ ਕੋਲ DA ਦੇ ਭੁਗਤਾਨ ਲਈ ਆਪਣੇ ਵੱਖਰੇ ਨਿਯਮ ਹਨ। ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਇਹ ਵੀ ਦਾਅਵਾ ਕੀਤਾ ਕਿ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ਦਾ ਮੂਲ ਵੇਤਨ ਕੇਂਦਰੀ ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਕਾਫ਼ੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਬਕਾਇਆ DA ਦਾ ਭੁਗਤਾਨ ਕਰਨਾ ਸਰਕਾਰੀ ਖਜ਼ਾਨੇ ‘ਤੇ ਵੱਡਾ ਵਿੱਤੀ ਬੋਝ ਪਾ ਰਿਹਾ ਹੈ。 ਹਾਲਾਂਕਿ, ਹਾਈਕੋਰਟ ਨੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਲੀਲਾਂ ਨੂੰ ਰੱਦ ਕਰਦਿਆਂ ਬਹੁਤ sਖ਼ਤ ਰਵੱਈਆ ਅਪਣਾਇਆ। ਅਦਾਲਤ ਨੇ ਨਿਰੀਖਣ ਕੀਤਾ ਕਿ ਜਦੋਂ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਖੁਦ ਇੱਕ ਪ੍ਰਸ਼ਾਸਨਿਕ ਹੁਕਮ ਰਾਹੀਂ ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ਨੂੰ ਬਕਾਇਆ DA ਦੇਣ ਦਾ ਭਰੋਸਾ ਦਿੱਤਾ ਸੀ, ਤਾਂ ਹੁਣ ਵਿੱਤ ਵਿਭਾਗ ਦੀਆਂ ਤਕਨੀਕੀ ਅੜਿੱਕਿਆਂ ਦਾ ਹਵਾਲਾ ਦੇ ਕੇ ਪਿੱਛੇ ਨਹੀਂ ਹਟਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ। ਅਦਾਲਤ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪ੍ਰਸ਼ਾਸਨਿਕ ਹੁਕਮ ਇੱਕ ਸੋਚਿਆ-ਸਮਝਿਆ ਕਾਰਜਕਾਰੀ ਫੈਸਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਨੂੰ ਨਜ਼ਰਅੰਦਾਜ਼ ਕਰਨਾ ਗੈਰ-ਵਾਜਬ ਹੈ。 ਬੈਂਚ ਨੇ ਸਭ ਤੋਂ ਅਹਿਮ ਟਿੱਪਣੀ ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ਅਤੇ ਉੱਚ ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ ਵਿਚਕਾਰ ਕੀਤੇ ਜਾ ਰਹੇ ਵਿਤਕਰੇ ‘ਤੇ ਕੀਤੀ। ਅਦਾਲਤ ਨੇ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕਿਹਾ ਕਿ ਜਦੋਂ ਸੂਬੇ ਦੇ ਉੱਚ ਅਧਿਕਾਰੀ ਅਤੇ ਜੱਜ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਨਿਰਧਾਰਿਤ ਦਰਾਂ ‘ਤੇ DA ਲੈ ਰਹੇ ਹਨ, ਤਾਂ ਫਿਰ ਆਮ ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ਅਤੇ ਪੈਨਸ਼ਨਰਾਂ ਨੂੰ ਇਸ ਤੋਂ ਵਾਂਝਾ ਕਿਉਂ ਰੱਖਿਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ? ਅਦਾਲਤ ਨੇ ਜ਼ੋਰ ਦੇ ਕੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਕਾਨੂੰਨ ਦੀ ਨਜ਼ਰ ਵਿੱਚ ਸਾਰੇ ਸਰਕਾਰੀ ਫੰਕਸ਼ਨਰੀ ਬਰਾਬਰ ਹਨ ਅਤੇ ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ਨਾਲ ਵਿਤਕਰਾ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ。 ਲੰਬੀ ਬਹਿਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ, ਹਾਈਕੋਰਟ ਨੇ ਇਸ ਮਾਮਲੇ ਦੀ ਅਗਲੀ ਸੁਣਵਾਈ 9 ਜੁਲਾਈ 2026 ਤੱਕ ਮੁਲਤਵੀ ਕਰ ਦਿੱਤੀ ਹੈ। ਸੂਬੇ ਦੇ ਮੁਲਾਜ਼ਮ ਵਰਗ ਦੀਆਂ ਨਜ਼ਰਾਂ ਹੁਣ ਅਦਾਲਤ ਦੇ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਫੈਸਲੇ ‘ਤੇ ਟਿਕੀਆਂ ਹੋਈਆਂ ਹਨ। ਮਾਹਿਰਾਂ ਦਾ ਮੰਨਣਾ ਹੈ ਕਿ ਜੇਕਰ ਅਦਾਲਤ ਆਪਣੀ sਖਤੀ ਕਾਇਮ ਰੱਖਦੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਨੂੰ ਬਕਾਇਆ DA ਜਾਰੀ ਕਰਨ ਲਈ ਕੋਈ ਸਕਾਰਾਤਮਕ ਕਦਮ ਚੁੱਕਣਾ ਪੈ ਸਕਦਾ ਹੈ।
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पहाड़ों के किसान आज भी हल बैल से बुआई करके सफलता का दावा

Paonta Sahib, Himachal Pradesh:आज भी हल बैल से खेत जोतते हैं पहاड़ों के किसान जिला सिरमौर के पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी खेतों में बुआई का काम पारम्परिक हल बैल से किया जाता है। मान्यता है कि हल बैल से जोते हुए खेतों में अच्छी फसल प्राप्त होती है और इन फसलों में बरकत होती है। यही कारण है कि ट्रेक्टर और टीलर के युग मे भी किसान बैलों की जोड़ी से खेतों में बुआई करते हैं। जिला सिरमौर के पहाड़ी और मध्यवर्ती क्षेत्रों में इन दिनों किसान मक्की की फसल की बुआई में जुटे हुए हैं। आधुनिक कृषि यंत्रों के बढ़ते उपयोग के बावजूद क्षेत्र के अधिकांश किसान आज भी बैलों से हल चलाकर खेती करने की वर्षों पुरानी परंपरा को निभा रहे हैं। किसानों का कहना है कि बैलों से की गई जुताई न केवल पारंपरिक खेती की पहचान है, बल्कि इससे फसल की पैदावार भी बेहतर होती है और इस फसल से बरकत होती है। खेतों को जोतने का यह सबसे अच्छा बैज्ञानिक तरीका है। किसान मोहनलाल चौहान, सतपाल भाटिया, सुंदर सिंह भाटिया और विजय कुमार ने बताया कि मक्की की फसल में हल चलाने से खेत में उगी खरपतवार (खड़) नष्ट हो जाती है तथा गोबर खाद अच्छी तरह मिट्टी में मिल जाती है, जिससे भूमि की उर्वरता बढ़ती है और फसल को लाभ मिलता है। हालांकि किसानों की चिंता भी कम नहीं है। उनका कहना है कि पिछले लगभग पांच वर्षों से मक्की की फसल पर एक कीट का लगातार प्रकोप बना हुआ है, जो पत्तियों को काटकर फसल को नुकसान पहुंचा रहा है। किसानों ने कई तरह की दवाइयों का छिड़काव किया, लेकिन इसके बावजूद कीट पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।
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