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हाईकोर्ट ने टनल निर्माण रोकने की मांग; अगली सुनवाई 17 नवंबर

Shimla, Himachal Pradesh:राजधानी शिमला के संजौली में टनल निर्माण और स्थानीय लोगों के आशियानों पर मंडरा रहे खतरे को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई है। वनीत शर्मा और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिका में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई के निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि टनल निर्माण के चलते संजौली, भट्टाकुफर और चलोंठी क्षेत्र में सैकड़ों रिहायशी मकानों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने एनएचएआई से यह भी जवाब मांगा है कि जब सरफेस हाईवे के लिए जमीन अधिग्रहित की जा चुकी थी और विस्थापितों को करीब 600 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जा चुका था, तो फिर उस योजना को छोड़कर घनी आबादी के नीचे ट्विन ट्यूब टनल बनाने का फैसला क्यों लिया गया? अदालत ने अगली सुनवाई तक निर्माण कार्य बंद रखने के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया है। मामले में अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को होगी। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान एनएचएआई की ओर से पेश वकील के उस बयान को रिकॉर्ड पर लिया, जिसमें बताया गया कि स्थानीय लोगों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए 18 सितंबर 2026 से टनल का निर्माण कार्य निलंबित है। एनएचएआई की ओर से यह भी कहा गया कि आईआईटी रुड़की की तकनीकी रिपोर्ट आने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित होने तक निर्माण कार्य दोबारा शुरू नहीं किया जाएगा। NHAI के आश्वासन को देखते हुए अदालत ने इस मामले पर फिलहाल अलग से कोई प्रोहिबिशन ऑर्डर जारी नहीं किया। हालांकि, अदालत ने उम्मीद जताई कि अगली सुनवाई तक मौके पर कोई निर्माण गतिविधि नहीं होगी। अदालत ने एनएचएआई से सड़क निर्माण की योजना में बदलाव को लेकर भी स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने जानना चाहा कि जब छकड़ैल, भट्टाकुफर और ढली के रास्ते सरफेस हाईवे बनाने के लिए पहले ही जमीन अधिग्रहित की जा चुकी थी और प्रभावित लोगों को लगभग 600 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया था, तो उस योजना को छोड़ने की परिस्थितियां क्या थीं? अदालत ने ये सवाल भी उठाया कि इस परियोजना पर अगर पहले ही बड़ी धनराशि खर्च की जा चुकी थी, तो सरकारी खजाने को हुए नुकसान की जिम्मेदारी किसकी होगी। याचिकाकर्ताओं वनीत शर्मा और अन्य की ओर से दायर याचिका के अनुसार, मूल शिमला बाईपास परियोजना यानी एनएच-05 में चलौंठी-संजौली से भट्टाकुफर के बीच ट्विन ट्यूब टनल बनाने का प्रस्ताव नहीं था। मूल योजना के तहत छकड़ैल, भट्टाकुफर और ढली के रास्ते सरफेस हाईवे बनाया जाना था। याचिका में दावा किया गया है कि इस योजना के लिए जमीन अधिग्रहण के बाद करीब 88 परिवारों के मकान तोड़े गए और परिवार विस्थापित हुए। इसके बाद एनएचएआई ने कथित तौर पर सरफेस हाईवे की योजना छोड़कर घनी आबादी वाले क्षेत्र के नीचे से टनल बनाने का विकल्प चुना। याचिकाकर्ताओं ने टनल निर्माण में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा है कि इससे पहाड़ी के ऊपर बने सैकड़ों मकानों को खतरा पैदा हो गया है। याचिका के मुताबिक, कई मकानों में दरारें आ चुकी हैं और कुछ घरों को असुरक्षित घोषित किया गया है। स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के साथ आईआईटी रुड़की की तकनीकी टीम ने भी 1 अक्टूबर 2026 को मौके का निरीक्षण किया था। याचिका में भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण संस्थान यानी जीएसआई की रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि इस क्षेत्र की भूगर्भीय परिस्थितियों को लेकर पहले ही चेतावनी दी गई थी। इसके अलावा, टनल के दोनों सिरों से पानी निकलने और सिमेट्री तथा विशाल मेगा मार्ट के आसपास टनल और जमीन की सतह के बीच कथित तौर पर केवल 14 मीटर की दूरी होने का मुद्दा भी उठाया गया है। फिलहाल, हाईकोर्ट ने एनएचएआई के निर्माण कार्य बंद रखने के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को निर्धारित की है।
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हिमाचल HC: इंजीनियर-इन-चीफ नरेंद्र पाल सिंह का सेवा विस्तार रद्द, स्क्रीनिंग 11 नवम्बर तक

Shimla, Himachal Pradesh:हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के इंजीनियर-इन-चीफ नरेंद्र पाल सिंह को मिले सेवा विस्तार को रद्द करने के आदेश दिए हैं। ENC को छह महीने के सेवा विस्तार दिया गया था जिसे अदालत ने अवैध, मनमाना और प्रारंभ से ही शून्य घोषित करते हुए रद्द कर दिया है। हिमाचल हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल आदेश में ‘जनहित’ लिख देने से जनहित साबित नहीं हो जाता। खंडपीठ ने कहा कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं है, जिससे पता चले कि ये सेवा विस्तार देने में कौन-सा जनहित था। अदालत ने राज्य सरकार को स्क्रीनिंग कमेटी की प्रक्रिया 11 नवंबर 2026 तक पूरी करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश सरकार के हैंडबुक ऑन पर्सनल मैटर्स, वॉल्यूम-II के अध्याय 22 के तहत सेवानिवृत्ति के बाद सेवा विस्तार केवल अत्यंत असाधारण परिस्थितियों में ही दिया जा सकता है। इसके लिए जनहित का स्पष्ट आधार होना जरूरी है और साथ ही दो में से कम से कम एक शर्त पूरी होनी चाहिए— या तो अन्य अधिकारी पद संभालने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार न हों, या सेवानिवृत्त होने वाला अधिकारी असाधारण योग्यता वाला हो। अदालत ने पाया कि इस मामले में विभाग, सचिव (कार्मिक) और मुख्य सचिव की ओर से ऐसा कोई आधार प्रस्तुत नहीं किया गया। रिकॉर्ड के अनुसार, नरेंद्र पाल सिंह की 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्ति के बाद पद भरने के लिए स्क्रीनिंग कमेटी गठित कर दी गई थी और पदोन्नति पर विचार करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी थी। लेकिन सेवा विस्तार की मंजूरी मिलने के बाद यह प्रक्रिया रोक दी गई और बाद में बंद कर दी गई। अदालत ने अपने फैसले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि “जनहित कोई जादुई शब्द नहीं है, जिसके इस्तेमाल मात्र से वह जनहित सामने आ जाए, जो संबंधित कार्रवाई के लिए आवश्यक था।” खंडपीठ ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई प्रमाण नहीं है, जिससे पता चले कि नरेंद्र पाल सिंह को सेवा विस्तार देने के लिए कौन-सा जनहित आवश्यक था या अध्याय 22 की निर्धारित शर्तों में से कोई शर्त पूरी हुई थी। अदालत ने यह भी पाया कि सेवा विस्तार के लिए निर्धारित प्रोफार्मा न तो विभाग ने भरा और न ही सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया। राज्य सरकार के जवाब में भी जनहित का ठोस आधार या निर्धारित शर्तों की पूर्ति का विवरण नहीं था। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार की ओर से जारी प्रशासनिक निर्देशों और निर्धारित प्रक्रिया का पालन کرنا जरूरी है। अदालत ने 7 अप्रैल 2026 के उस सरकारी निर्देश का भी उल्लेख किया, जिसमें सेवा विस्तार और पुनर्नियोजन के प्रस्तावों पर रोक लगाने तथा निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की बात कही गई थी। इसके बावजूद 28 अप्रैल 2026 को छह महीने का सेवा विस्तार मंजूर किया गया। याचिका में मुख्य अभियंता नारिंदर पॉल सिंह चौहान ने सेवा विस्तार के आदेश को चुनौती देते हुए पदोन्नति की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि वह इंजीनियर-इन-चीफ के पद पर विचार के लिए निर्धारित सेवा संबंधी मानदंड पूरे करते हैं। हाईकोर्ट ने 28 अप्रैल 2026 की अधिसूचना को अवैध, मनमाना और प्रारंभ से ही शून्य घोषित करते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने नरेंद्र पाल सिंह को तत्काल इंजीनियर-इन-चीफ का पद छोड़ने और कार्यभार तुरंत सौंपने का निर्देश दिया। साथ ही राज्य सरकार को अप्रैल 2026 में शुरू की गई स्क्रीनिंग कमेटी की प्रक्रिया दोबारा शुरू कर 11 नवंबर 2026 तक पूरी करने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि नारिंदर पॉल सिंह चौहान को कमेटी पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाती है और उनके नाम की सिफारिश करती है, तो उन्हें 1 मई 2026 से पदोन्नति दी जाएगी। उन्हें इस तारीख से वरिष्ठता, वेतन निर्धारण और वास्तविक मौद्रिक लाभ सहित सभी परिणामी लाभ भी मिलेंगे। इस स्थिति में अदालत ने स्पष्ट किया कि ‘नो वर्क, नो पे’ का सिद्धांत लागू नहीं होगा।
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मोहाली: सोहाणा में सरकारी ज़मीन के कब्जे के दावे पर प्रशासन ने निशानदेही की

Sahibzada Ajit Singh Nagar, Punjab:ਸੋਹਾਣਾ ਵਿੱਚ ਟੋਬੇ ਦੀ ਜ਼ਮੀਨ ’ਤੇ ਕਥਿਤ ਕਬਜ਼ੇ ਦੇ ਮਾਮਲੇ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਅੱਜ ਪ੍ਰਸ਼ਾਸਨ ਵੱਲੋਂ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਮਿਣਤੀ ਅਤੇ ਨਿਸ਼ਾਨਦੇਹੀ ਕਰਵਾਈ ਗਈ। ਸਥਾਨਕ ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ ਅਨੁਸਾਰ, ਨਿਸ਼ਾਨਦੇਹੀ ਦੌਰਾਨ ਤਕਰੀਬਨ 100 ਤੋਂ 150 ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਦੀ ਕੀਮਤ ਵਾਲੀ ਸਰਕਾਰੀ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਪਛਾਣ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ, ਜਿਸ ’ਤੇ ਕੁਝ ਲੋਕਾਂ ਵੱਲੋਂ ਕਬਜ਼ਾ ਕੀਤੇ ਜਾਣ ਦਾ ਦਾਅਵਾ ਕੀਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਇਸ ਕਾਰਵਾਈ ਦੌਰਾਨ ਪ੍ਰਸ਼ਾਸਨਿਕ ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ ਅਤੇ ਕਥਿਤ ਕਬਜ਼ਾਧਾਰੀਆਂ ਵਿਚਾਲੇ ਆਹਮੋ-ਸਾਹਮਣੇ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਵੀ ਬਣ ਗਈ, ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਮਾਹੌਲ ਤਣਾਅਪੂਰਨ ਹੋ ਗਿਆ। ਹਾਲਾਂਕਿ, ਮੌਕੇ ’ਤੇ ਮੌਜੂਦ ਪੁਲਿਸ ਨੇ ਸਥਿਤੀ ਨੂੰ ਕਾਬੂ ਹੇਠ ਕਰ ਲਿਆ। ਪ੍ਰਸ਼ਾਸਨ ਦੀ ਇਸਕਾਰਵਾਈ ਨੂੰ ਪਿੰਡ ਸੋਹਾਣਾ ਵਿੱਚ ਟੋਬੇ ਦੀ ਜ਼ਮੀਨ ਨਾਲ ਜੁੜੇ ਵਿਵਾਦ ਦੇ ਮੱਦੇਨਜ਼ਰ ਅਹਿਮ ਮੰਨਿਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਹੁਣ ਇਸ ਮਾਮਲੇ ਵਿੱਚ ਅਗਲੀ ਪ੍ਰਸ਼ਾਸਨਿਕ ਕਾਰਵਾਈ ’ਤੇ ਨਜ਼ਰ ਰਹੇਗੀ।
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करवाचौथ की रौनक: मनाली के बाजारों में महिलाओं का उत्साह चरम पर

Kullu, Himachal Pradesh:करवाचौथ पर मनाली के बाजारों में रौनक, महिलाओं में दिखा उत्साह पर्यटन नगरी मनाली के अलग-अलग इलाकों में भी करवाचौथ को लेकर बाजार सजे हुए हैं और महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है。 मनाली में भी मॉल रोड और आसपास के बाजारों में करवाचौथ की रौनक देखने को मिल रही है। कहीं महिलाएं हाथों पर मेहंदी लगवा रही हैं, तो कहीं त्योहार की खरीदारी में जुटी हैं। बाजारों में सजी दुकानों और महिलाओं की चहल-पहल ने माहौल को खास बना दिया है。 मनाली में करवाचौथ के इस खास मौके पर बाजारों का क्या है नजारा और किस तरह महिलाएं त्योहार की तैयारियों में जुटी हैं, आइए आपको दिखाते हैं ये खूबसूरत तस्वीरें。
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पंजाब inaadर्श आचार संहिता जल्दी लागू कराने की भाजपा की मांग

Chandigarh, Chandigarh:सुनील जाखड़ ने राज्यपाल को लिखा पत्र, पंजाब में जल्द आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू करने की सिफारिश करने की मांग BJP जल्द आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू करवाने की मांग को लेकर भारत निर्वाचन आयोग का भी दरवाजा खटखटाएगी। सिसोदिया और केजरीवाल की टकराव की राजनीति को पंजाब के लिए खतरनाक बताया; दोनों को राज्य से तड़ीपार करवाने के लिए कानूनी कार्रवाई करने की बात कही। कहा, सरकार ने खुद स्वीकार किया है कि पंजाब की कानून-व्यवस्था इतनी बिगड़ चुकी है कि नशे के खिलाफ जागरूकता के लिए मैराथन तक नहीं करवाई जा सकती। सवाल उठाया कि यदि सरकार के अनुसार मैराथन नहीं हो सकती, तो चुनाव कैसे करवाए जा सकते हैं। आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी चुनाव टालने का आधार तैयार करने के लिए जानबूझकर पंजाब को अशांति की ओर धकेल रही है। चंडीगढ़, 29 अक्टूबर ( ): भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने पंजाब के राज्यपाल को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वह निर्वाचन आयोग से राज्य में जल्द से जल्द आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू करने की सिफारिश करें। पंजाब की बिगड़ती कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए जाखड़ ने कहा कि भगवंत मान सरकार ने अब स्वयं भी इस स्थिति को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से करवाने तथा लोगों को भयमुक्त होकर अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अवसर देने के लिए यह कदम आवश्यक है। उन्होंने यहां एक प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी। पंजाब भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा कि पार्टी जल्द ही भारत निर्वाचन आयोग से मिलकर राज्य में आदर्श चुनाव आचार संहिता शीघ्र लागू करने की मांग करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि आम आदमी पार्टी की सरकार को और समय तक सत्ता में बने रहने दिया गया, तो वह हालात इस कदर बिगाड़ देगी कि भयमुक्त वातावरण में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव करवाना असंभव हो जाएगा। पत्रकारों से बातचीत करते हुए जाखड़ ने कहा कि पार्टी मनीष सिसोदिया और अरविंद केजरीवाल को पंजाब से तड़ीपार करवाने के लिए कानूनी विकल्प भी तलाश रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिसोदिया के भड़काऊ बयान राज्य का माहौल खराब कर रहे हैं और इसी आधार पर कार्रवाई की संभावनाएं देखी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इससे इन दोनों को पंजाब आकर और जहर फैलाने से रोका जा सकेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी एक सोची-समझी साजिश के तहत पंजाब को अशांति की आग में धकेल रही है। जाखड़ ने कहा कि अबोहर में पिछले कई वर्षों से हर साल नशे के खिलाफ मैराथन आयोजित की जाती रही है, जिसमें हजारों युवा नशा विरोधी अभियान में हिस्सा लेते हैं। लेकिन इस वर्ष सरकार ने लिखित रूप में यह कहते हुए मैराथन की अनुमति रद्द कर दी कि माहौल अनुकूल नहीं है और खराब कानून-व्यवस्था के कारण इसका आयोजन नहीं हो सकता। जाखड़ ने कहा कि पंजाब की कानून-व्यवस्था वास्तव में बेहद चिंताजनक स्तर तक बिगड़ चुकी है और राज्य में कोई भी सुरक्षित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर नशा युवाओं की जान ले रहा है, वहीं दूसरी ओर नशा माफिया का आतंक इस हद तक बढ़ गया है कि नशे के खिलाफ ईमानदारी से आवाज उठाने वालों को गोलियों से खामोश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पवित्र नगरी श्री अमृतसर साहिब से लेकर तरनतारन, खेमकरण, गुरदासपुर, श्री हरगोबिंदपुर, मानसा, अबोहर, संगरूर और लुधियाना तक, लगभग हर जिले और कस्बे में खुलेआम हत्याएं हो रही हैं। सरकार की भूमिका की आलोचना करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस नशे से जान गंवाने वाले बच्चों के शव तक जबरन उठा ले जा रही है। उन्होंने कहा कि जो भी नशे के खिलाफ विरोध करता है या सरकार के सामने अपना दुख व्यक्त करता है, उसे या तो पुलिस के दमन का सामना करना पड़ता है या आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ता है। जाखड़ ने इन घटनाक्रमों को आम आदमी पार्टी सरकार की सोची-समझी रणनीति का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने स्वयं यह कहकर इस सोच को उजागर किया है कि वे चुनाव जीतने के लिए हर तरीका अपनाएंगे—साम, दाम, दंड, भेद, लड़ाई-झगड़ा, झूठ या सच। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी रणनीति के तहत सरकार ने अपने इशारों पर चलने वाले अधिकारियों को नियुक्त किया है, जबकि अपराधियों और गैंगस्टरों को या तो पार्टी में शामिल किया जा रहा है या संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कार्यालय स्वयं भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है और पंजाब को इस नीति के परिणाम भुगतने पड़ रहे हैं। जाखड़ ने कहा कि व्यवस्था में जनता का भरो्सा लगातार कम हो रहा है, क्योंकि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियुक्त अधिकारी कथित तौर पर सरकार के लिए वसूली एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जेलों से नशे और हथियारों के नेटवर्क चलाए जा रहे हैं, जबकि तस्करों और हत्यारों को पैरोल पर रिहा करके विदेश भागने में मदद की जा रही है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामलों को दबाने की कोशिशों में करोड़ों रुपये के लेन-देन सामने आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि ऐसे ही एक मामले में मुख्यमंत्री के अपने परिवार का नाम भी सामने आया है और हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद सरकार मामले की जांच नहीं करवा रही है। पंजाब भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव करवाना असंभव हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार लगातार हालात खराब कर रही है और चुनाव का समय आने तक भगवंत मान सरकार भय का ऐसा माहौल बना देगी कि नागरिक स्वतंत्र रूप से मतदान नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि इस सरकार को और समय देना पंजाब के लोगों के मौलिक और मानवाधिकारों के उल्लंघन की अनुमति देने के समान होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर ऐसा कर रही है, क्योंकि उसमें वोट मांगने के लिए जनता के बीच जाने का साहस नहीं है और वह बिगड़ती कानून-व्यवस्था को चुनाव टालने का बहाना बनाना चाहती है।
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समराला मंडी: पंजाब में धान खरीद योजना से मुफ्त राशन कार्ड तेज होंगे

Samrala, Punjab:समराला, पंजाब में झोने की खरीदी सीज़न के दौरान भारत सरकार ने पंजाब के लिए 1 करोड़ 80 लाख मीट्रिक टन झोने की खरीद निर्धारित की है, जिनमें से 1 करोड़ मीट्रिक टन की खरीद पूरी हो चुकी है और शेष 80 लाख मीट्रिक टन की खरीद दीवाली तक पूरी होने की उम्मीद है। यह जानकारी पंजाब के प्रिंसिपल सचिव राहुल तिवार्डी ने समराला ANAJ मंडी का दौरा करने के मौके पर दी। राहुल तिवार्डी ने कहा कि पंजाब के 23 जिलों में झोने की खरीद के प्रबंधों की निगरानी हेतु मुख्य सचिव के रैंक के senior IAS अधिकारियों को जिला-वार इंचार्ज नियुक्त किया गया है; इनमें लुधियाना जिले की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गई है। जहां उन्होंने ANAJ मंडी दौरे के दौरान आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष और SDM से मुलाकात कर खरीदी प्रबंधों का जायज़ा लिया। उन्होंने कहा कि समराला मंडी में खरीदी के लिए जगह उपलब्ध है और किसानों की फसल की खरीद समय पर हो रही है। वर्तमान प्रबंधों को देखकर उनकी उम्मीद है कि समराला समेत लुधियाणा जिले और पूरे पंजाब में झोने की खरीदी during किसी बड़ी समस्या का सामना नहीं होगा; किसानों, आढ़तियों और शैलर मालिकों के सहयोग से खरीदी प्रक्रिया को सुचारू ढंग से आगे बढ़ाया जाएगा। शैलराओं में जगह की कमी एक बड़ी चुनौती है। राहुल तिवार्डी ने कहा कि पंजाब समेत अन्य राज्यों में खरीदा जाने वाला झोना केंद्रीय पूल के लिए खरीदा जाता है और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी AFSAI से जुड़ी है। पिछले तीन-चार सालों में देश में अनाज की 생산 बढ़ने से AFSAI के गोदामों में स्टॉक बढ़ गया है, जिससे स्टोरेज की जगह की कमी हो रही है। केंद्र सरकार पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों में अतिरिक्त गोदामों की मंजूरी दे चुकी है, पर इनकी निर्माण में डेढ़ से दो साल लग सकते हैं। पंजाब सरकार इस मुद्दे को केंद्र के समक्ष उठाती रही है। उन्होंने बताया कि वे हर 15 से 20 दिनों बाद दिल्ली जाते हैं और AFSAI के CMD तथा भारत सरकार के फूड सेक्टर से मुलाकात कर जगह की समस्या पर चर्चा करते हैं; उन्हें उम्मीद है कि अगले छह से आठ महीनों में इसका हल निकल आयेगा। मुफ्त राशन कार्डों के बारे में राहुल तिवार्डी ने बताया कि पंजाब में लगभग एक करोड़ 40 लाख लोग मुफ्त राशन सुविधा का लाभ उठा रहे हैं और लगभग 40 लाख राशन कार्ड बन चुके हैं। जिन योग्य व्यक्तियों ने पहले इसका लाभ नहीं लिया था, उनके लिए पंजाब सरकार ने फिर से आवेदन मांगे थे और इसके तहत लगभग 19 लाख 25 हजार अर्जियाँ प्राप्त हुई हैं; जिनके दावों की पुष्टि होते ही नए राशन कार्ड बनाकर वितरण की प्रक्रिया शुरू होगी।
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CPIM सिरमौर 1 नवंबर रामलीला मैदान में चुनाव आयोग की स्वायत्तता बहाल की मांग

Nahan, Himachal Pradesh:लोकेशन नाहन चुनाव आयोग की स्वायत्तता बहाल करने की मांग तेज.. 1 नवंबर को दिल्ली रामलीला मैदान में जुटेंगे लाखों प्रदर्शनकारी, जिला सिरमौर में से CPIM के भी सैकडों कार्यकर्ता होंगे प्रदर्शन में शामिल, मुहिम को लेकर CPIM सिरमौर में पर्चे बांटकर लोगों को कर रही जागरूक, 23 अक्टूबर से जिला सिरमौर के गांव गांव जाकर CPIM बांट रही पर्चे, सिरमौर जिला में बांटे गई चुके 10 हजार से अधिक पर्चे- राजेंद्र ठाकुर SIR के माध्यम से देश में लोकतंत्र को समाप्त करने की की जा रही कोशिश, SIR के माध्यम से देश के 13 करोड़ से अधिक लोगों को छीना गया मताधिकार, एंकर- चुनाव आयोग की स्वायत्तता बहाल करने और मताधिकार की रक्षा की मांग को लेकर 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने जा रहे हैं प्रदर्शन को लेकर CPIM सिरमौर में गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रही है और पर्चे बांटकर इस मुहिम से जुड़ने की अपील कर रही है। पार्टी कार्यकर्ताओं ने आज जिला मुख्यालय नाहन और जमटा में पर्चे बांटे। वीओ1- मीडिया से बात करते हुए CPIM जिला सिरमौर के सचिव राजेंद्र ठाकुर ने बताया कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता बहाल करने और लोकतंत्र की रक्षा के मुद्दे पर CPIM ने अपनी मुहिम तेज कर दी है। जिला सिरमौर में 23 अक्टूबर से पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इस दौरान लोगों को पर्चे बांटकर 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाले प्रदर्शन की जानकारी दी जा रही है। राजेंद्र ठाकुर बताया कि जिला सिरमौर में अब तक 10 हजार से अधिक पर्चे बांटे जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रदर्शन में सिरमौर जिला से भी सैकड़ों कार्यकर्ता भाग लेंगे। बाइट- राजेंद्र ठाकुर सचिव CPIM सिरमौर वीओ2-राजेंद्र ठाकुर ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के माध्यम से देश में लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उनका दावा है कि इस प्रक्रिया के चलते देश में 13 करोड़ से अधिक लोगों का मताधिकार प्रभावित हुआ है। CPIM ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता बहाल करने और प्रत्येक नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा करने की मांग उठाई है। उन्होंने बताया कि इस आंदोलन में दिल्ली है रामलीला मैदान में एक नवंबर को लाखों प्रदर्शनकारी इकट्ठा होंगे जहां इन सभी मांगों को रखा जाएगा। बाइट- राजेंद्र ठाकुर सचिव CPIM सिरमौर
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संगरूर में राहुल गांधी की रैली: हिसाब मांगेंगे कांग्रेस से

Ludhiana, Punjab:बाजवा ने कहा कि 4 नवंबर को संगरूर में राहुल गांधी आ रहे है उस रैली में हम कांग्रेस पार्टी आप से हिसाब मांगे ही उन्हों ने 5 साल में क्या किया प्रताप बाजवा ने कहा कि 5 सालों में लोको में देखा ही की 2014 में अन्ना हजारा ने जो शुरुआत की थी उस वक्त कई आप नेता कांग्रेस में शामिल हो गए कही बीजेपी में शामिल हो गये : प्रताप बाजवा ने कहा कि केजरीवाल ओर आप पार्टी Rss ओर बीजेपी की सोच पर चलते है उनके साथ मिले हुए है बाजवा ने कहा कि केजरीवाल ने 3 बार सरकार बनाई दिल्ली में ओर कभी भी उन्हों ने लोकपाल नहीं लगाया ओर ना ही पंजाब में बाजवा ने कहा कि केसरीवाल ने विजय कुंवर प्रताप को भी बेवकूफ बनाया हुआ 4 नवंबर को कांग्रेस पार्टी की तरफ से संगरूर मे इंसाफ रैली की जाएगी जिसमें राहुल गांधी भी मजूद रहे गे
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मोदी के कदम से कैंसर दवाओं की कीमतों में भारी कटौती, मरीजों को राहत

Shimla, Himachal Pradesh:भाजपा विधायक और प्रदेश मीडिया प्रभारी रणधीर शर्मा ने कैंसर की 397 दवाओं की कीमतों में कटौती को मरीजों के लिए बड़ी राहत बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के इस फैसले से कैंसर के इलाज पर होने वाला खर्च कम होगा। वहीं, रणधीर शर्मा ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर केंद्र से मिली स्वास्थ्य परियोजनाओं की राशि और आपदा राहत के तहत स्वीकृत धन के इस्तेमाल में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं。 रणधीर शर्मा ने 29 अक्टूबर को शिमला में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि 27 अक्टूबर को जारी संशोधित मूल्य सूची के अनुसार, कैंसर से जुड़ी 543 दवाओं में से 397 की अधिकतम खुदरा कीमतों में कमी की गई है। उन्होंने इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा का आभार जताया。 रणधीर शर्मा ने बताया कि पाल्बोसिक्लिब 125 एमजी की एक दवा की कीमत 40,421 रुपये से घटकर 2,730 रुपये रह गई है। यानी इसकी कीमत में करीब 93.25 प्रतिशत की कमी हुई है। इसी तरह पाल्बोसिक्लिब 100 एमजी की कीमत 24,505 रुपये से घटकर 2,069 रुपये और थायोटेपा 100 एमजी की कीमत 80,072 रुपये से घटकर 7,150 रुपये हो गई है। उन्होंने कहा कि कैंसर के महंगे इलाज के कारण कई परिवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में दवाओं की कीमतों में कटौती से मरीजों और उनके परिवारों को राहत मिलेगी। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस फैसले का स्वागत करने और भाजपा कार्यकर्ताओं से नई कीमतों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने की अपील की。 रणधीर शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में 320 अतिरिक्त पीजी मेडिकल सीटों को मंजूरी दी है। इसके लिए करीब 415 करोड़ रुपये की सहायता का प्रावधान भी किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार केंद्र सरकार की उपलब्धियों का श्रेय खुद लेने की कोशिश कर रही है। उन्होंने 1,422 करोड़ रुपये की स्वीकृत जायका स्वास्थ्य परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता को इसका लाभ पहुंचाने में सरकार अपेक्षित प्रगति नहीं कर पाई है। उन्होंने पीएम-अभीम योजना के तहत क्रिटिकल केयर ब्लॉक और ब्लॉक सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों के निर्माण की धीमी गति पर भी सवाल उठाए। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि 15वें वित्त आयोग के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए स्वीकृत 521 करोड़ रुपये का भी समुचित इस्तेमाल नहीं हुआ है। रणधीर शर्मा ने ऊना के बल्क ड्रग पार्क की परियोजना में देरी और मेडिकल डिवाइस पार्क परियोजना से पीछे हटने के फैसले को रोजगार और निवेश की संभावनाओं के लिए नुकसानदायक बताया。 रणधीर शर्मा ने आपदा पुनर्निर्माण के लिए पीडीएनए के तहत स्वीकृत करीब 2,006 करोड़ रुपये के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन पैसों से होने वाले कार्यों में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। उन्होंने पांच-पांच लाख रुपये के कार्यों के आवंटन और भुगतान की जांच कराने की मांग की। भाजपा विधायक ने 15वें वित्त आयोग के तहत पंचायतों को मिलने वाले अनुदान के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पेयजल से जुड़े टाइड ग्रांट का पैसा पंचायतों के बजाय जल शक्ति विभाग को सौंपा गया और कुछ राशि का इस्तेमाल तय उद्देश्यों से अलग किया गया। उन्होंने मांग की है कि 16वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली राशि पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के माध्यम से निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार खर्च की जाए। रणधीर शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि स्थानीय निकायों के वित्तीय अधिकारों की अनदेखी की गई तो भाजपा जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर आंदोलन करेगी。
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Punjab drug-gang crackdown continues, sharp allegations on BJP-Akali

Chandigarh, Chandigarh:ਪ੍ਰੈਸ ਕਾਨਫਰੰਸ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋਈ2007 ਤੋਂ 2017 ਤੱਕ ਅਕਾਲੀ ਦਲ ਤੇ ਬੀਜੇਪੀ ਨੇ ਪੰਜਾਬ ਅੰਦਰ ਨਸ਼ੇ ਅਤੇ ਗੈਂਗਸਟਰਾਂ ਦਾ ਹੜ ਲਿਆਂਦਾ ਇਹਨਾਂ ਨੇ ਇੰਨੇ ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਕੁਝ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਤੇ ਕਾਂਗਰਸ ਨੇ ਇਸੇ ਕੰਮ ਨੂੰ ਅੱਗੇ ਵਧਾਉਣ ਦਾ ਕੰਮ ਕੀਤਾ। ਕਾਂਗਰਸ ਜਿਸ ਚੀਜ਼ ਦੇ ਖਿਲਾਫ ਵਾਦਾ ਕਰਕੇ ਆਈ ਸੀ ਉਸਦੇ ਹੱਕ ਵਿੱਚ ਭੁਗਤ ਗਈ। 2022 ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਅਸੀਂ ਲਗਾਤਾਰ ਇਸ ਚੀਜ਼ ਲਈ ਕੰਮ ਕੀਤਾ ਨਸ਼ੇ ਖਤਮ ਕਰਨ ਤੇ ਗੈਂਗਸਟਰ ਖਤਮ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਕੰਮ ਕੀਤਾ। ਇਹਨਾਂ ਦੋਨਾਂ ਹੀ ਚੀਜ਼ਾਂ ਦੇ ਖਿਲਾਫ ਆਮ ਆਦਮੀ ਪਾਰਟੀ ਨੇ ਕੰਮ ਕੀਤਾ ਐਂਟੀ ਗੈਂਗਸਟਰ ਟਾਸਕ ਫੋਰਸ ਦਾ ਅਸੀਂ ਗਠਨ ਕੀਤਾ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਅੰਦਰ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀ ਜਗ੍ਹਾ ਦੇ ਉੱਪਰ ਇਹਨਾਂ ਵੱਲੋਂ ਰੇਡ ਕੀਤੀਆਂ ਗਈਆਂ ਜੋ ਅਪਰਾਧੀ ਭਗੌੜੇ ਘੋਸ਼ਿਤ ਕੀਤੇ ਹੋਏ ਸੀ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਫੜਨ ਦਾ ਕੰਮ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਜੋ ਲੋਕ ਬਾਹਰ ਦੀ ਕੰਟਰੀ ਵਿੱਚ ਚਲੇ ਗਏ ਸੀ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਵਾਪਸ ਲਿਆਉਣ ਦਾ ਕੰਮ ਕੀਤਾ 2105 ਭਗੌੜਿਆਂ ਨੂੰ ਫੜਨ ਦਾ ਕੰਮ ਕੀਤਾ 81499 ਬੰਦੇ ਨਸ਼ੇ ਦੇ ਮਾਮਲੇ ਵਿੱਚ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰ ਕੀਤੇ ਗਏ ਗੈਰ ਕਾਨੂੰਨੀ ਹਥਿਆਰ ਵਾਲੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਪੰਜਾਬ ਅੰਦਰ ਯੁੱਧ ਨਸ਼ੇ ਵਿਰੁੱਧ ਤਹਿ ਕੰਮ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਐਂਟੀ ਡਰੋਨ ਸਿਸਟਮ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਲਗਾਇਆ ਗਿਆ 31 march 2025 ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਲਗਾਤਾਕ ਅਸੀਂ ਕੰਮ ਰਹੇ ਹਾਂ 62000 ਕੇਸ ਹੋਏ 90 ਹਾਜ਼ਰ ਗ੍ਰਫਤਾਰ ਕੀਤੇ ਗਏ 23 ਕਰੋੜ ਤੋਂ ਵੱਧ ਡਰਗਮਨੀ ਬਰਾਮਦ ਕੀਤੀ ਗਈ 67 ਲੱਖ ਤੋਂ ਵੱਧ ਕੈਪਸੂਲ ਬਰਾਮਦ ਕੀਤੇ ਗਏ ਅਸੀਂ ਇਰਾਏਤੇ ਦੇ ਨਾਲ ਕੰਮ ਕਰ ਰਹੇ ਹਾਂ ਨਸ਼ੇ ਨੂੰ ਖਤਮ ਕਰਨ ਲਈ ਬੀਜੇਪੀ ਦੀ ਜੇਕਰ ਗੱਲ ਕਰੀਏ ਤਾਂ ਉਥੋਂ ਦੇ ਰਾਜਿਆਂ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਸਭ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਨਸ਼ਾ ਘਟਿਆ ਹੈ ਦਿੱਲੀ ਉੱਤਰ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਅਤੇ ਹਰਿਆਣਾ ਵਿੱਚ ਨਸ਼ਾ ਪਹਿਲਾਂ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਵੱਧ ਚੁੱਕਾ ਹੈ ਦਿੱਲੀ ਚ 28% ਅਤੇ ਹਰਿਆਣਾ ਵਿੱਚ 42% ਨਸ਼ਾ ਵਧਿਆ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ 5.5% ਨਸ਼ਾ ਕੱਟਿਆ ਹੈ ਮੱਧ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਨਸ਼ਾ ਵਧਿਆ ਹੈ ਅੱਜ ਜੇਕਰ ਨਸ਼ੇ ਨੂੰ ਖਤਮ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾਂ ਪੰਜਾਬ ਤੋਂ ਸੇਧ ਲੈਣ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਹੈ ਭਾਰਤ ਸਰਕਾਰ ਦੇ ਅੰਕੜਿਆਂ ਮੁਤਾਬਕ ਇਹ ਗੱਲ ਹੋ ਰਹੀ ਹੈ ਸਮਝਦਾ ਬੀਜੇਪੀ ਅੱਜ ਲਾਸ਼ਾਂ ਤੇ ਰਾਜਨੀਤੀ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ ਬੀਜੇਪੀ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਪੁਰਾਣਾ ਰਾਜ ਗੁਜਰਾਤ ਹੈ ਜਿੱਥੇ 30 ਸਾਲਾਂ ਤੋਂ ਵੱਧ ਸਮੇਂ ਤੋਂ ਬੀਜੇਪੀ ਹੈ ਉੱਥੇ ਵੀ ਨਸ਼ੇ ਇਸੇ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਵੱਧ ਰਹੇ ਹਨ। ਇੱਕ ਰਿਪੋਰਟ ਸਾਹਮਣੇ ਆਈ ਹੈ ਜਿਸ ਤੋਂ ਪਤਾ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਕਿ ਪੰਜਾਬ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਦਾਤੋਂ ਆ ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਚੁੱਕਾ ਹੈ ਤੁਸੀਂ ਸਾਡੇ ਨਾਲ ਚਲੋ ਅਸੀਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਅਲਗ ਅਲਗ ਪਿੰਡਾਂ ਦਾ ਹਾਲ ਦਿਖਾਉਂਦੇ ਹਾਂ ਜਿੱਥੇ ਪਰਾਲੀ ਜੁਲਾਈ ਨੂੰ ਜਾ ਰਹੀ ਉਸਦੇ ਇਸਤੇਮਾਲ ਕੀਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਪੰਜਾਬ ਇਸ ਚੀਜ਼ ਵਿੱਚ ਅਗਾਂਹ ਵਧੂ ਸੂਬੇ ਦੇ ਤੌਰ ਤੇ ਕੰਮ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹੈ ਸੰਭਾਲਣ ਦੇ ਮਾਮਲੇ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ ਕੋਈ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਣ ਨਹੀਂ ਕਰ ਰਹੇ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡੀ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਇਹੀ ਸਾਡੀ ਸਰਕਾਰ ਦੀ ਵੀ ਹੈ ਪਰਾਲੀ ਨੂੰ ਕਾਬੂ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਦਿੱਲੀ ਸਰਕਾਰ ਬੀਜੇਪੀ ਸਰਕਾਰ ਫੇਲ ਹੋਈ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਨਹੀਂ ਸੁਨੀਲ ਜਾਖੜ ਜਿੰਨਾ ਮਰਜ਼ੀ ਜ਼ੋਰ ਲਗਾ ਲੈਣ ਨਾ ਤਾਂ ਉਹ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਪਾਰਲੀਮੈਂਟ ਵਿੱਚ ਜਾਣਗੇ ਤੇ ਨਾ ਹੀ ਪੰਜਾਬ ਦੀ ਅਸੈਂਬਲੀ ਵਿੱਚ ਆਉਣਗੇ ਬੀਜੇਪੀ ਅਤੇ ਅਕਾਲੀ ਦਲ ਨੂੰ ਨਾ ਵਿਧਾਨ ਸਭਾ ਵਿੱਚ ਜਗ੍ਹਾ ਮਿਲੇਗੀ ਨਾਹੇ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਲੋਕ ਸਭਾ ਵਿੱਚ ਇਹਨਾਂ ਕੋਲ ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਅੱਗੇ ਵਧਾਉਣ ਦਾ ਪੰਜਾਬ ਨੂੰ ਅੱਗੇ ਵਧਾਉਣ ਦਾ ਕੋਈ ਏਜੰਡਾ ਨਹੀਂ ਅੱਜ ਕਾਂਗਰਸ ਪਾਰਟੀ ਦੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਲੀਡਰਾਂ ਦੇ ਡੋਪ ਟੈਸਟ ਕਰਵਾਉਣ ਦੀ ਜරੂਰਤ ਹੈ ਜੋ ਨਸ਼ੇ ਲਾਗੂ ਕਰਨ ਦੀ ਗੱਲ ਕਰਦੇ ਹਨ ਕੀ ਇਹ ਖੁਦ ਇਸ ਚੀਜ਼ ਦੇ ਅਡਿਕਟ توجه ਹਨ ਕਿਉਂਕਿ ਦੁਨੀਆਂ ਵਿੱਚ ਜਿੱਥੇ ਵੀ ਇਸ ਨਸ਼ਾ ਲਾਗੂ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਉਥੇ ਸਿੱਧੇ ਤੌਰ ਤੇ ਨੁਕਸਾਨ ਦੇਖਣ ਨੂੰ ਮਿਲਿਆ ਹੈ
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