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Mohd Sartaj SiddiquiMohd Sartaj SiddiquiFollow3 Jan 2025, 03:25 pm
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बुराड़ी की खोदी सड़क बनी मुसीबत, जलभराव से लोग परेशान

New Delhi, Delhi:दिल्ली में विकास के नाम पर खोदी गई सड़कें अब लोगों के लिए मुसीबत बनती जा रही हैं। बुराड़ी के इब्राहिमपुर से कुशک, कादीपुर होते हुए नंगली जाने वाली मुख्य सड़क पर दिल्ली जल बोर्ड द्वारा सीवरेज पाइपलाइन डालने के बाद सड़क की मरम्मत नहीं की गई। नतीजा—टूटी सड़क, जलभराव, उड़ती धूल और स्कूल के बाहर खुला नाला… यानी हर दिन हादसे का खतरा। तस्वीरें राजधानी दिल्ली के बुराड़ी विधानसभा क्षेत्र की हैं जहाँ विकास के दावों की सच्चाई सड़क पर बिखरी नजर आ रही है। इब्राहिमपुर से कुशक, कादीपुर होते हुए नंगली जाने वाली मुख्य सड़क महीनों से बदहाल पड़ी है। दिल्ली जल बोर्ड ने यहां सीवरेज पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़क खोदी, लेकिन काम पूरा होने के बाद सड़क को दोबारा दुरुस्त करना जरूरी नहीं समझा गया। नतीजा यह है कि राहगीर, दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक हर दिन जान जोखिम में डालकर इस रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं। मानसून में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। सड़क पर जलभराव इतना बढ़ जाता है कि गड्ढे दिखाई नहीं देते। वहीं गर्मियों में उड़ती धूल लोगों की परेशानी बढ़ा देती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की बदहाली से आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। सबसे चौंकाने वाली तस्वीर कादीपुर एमसीडी स्कूल के बाहर की है। स्कूल के ठीक सामने सड़क टूटी हुई है और उसके किनारे नाले के कई होलपास खुले पड़े हैं। छोटे-छोटे मासूम बच्चे इन्हीं खुले होलपास के ऊपर से संतुलन बनाकर स्कूल आने-जाने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बारिश के दौरान जलभराव होने पर खुले होलपास दिखाई नहीं देते, जिससे कई बार बच्चे नाले में गिर चुके हैं। इसके बावजूद संबंधित विभाग और प्रशासन ने अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया। लोग कई बार शिकायतें और पत्राचार किए, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, कार्रवाई नहीं। सवाल यह है कि जब विकास के नाम पर सड़कें खोदी जाती हैं, तो उनकी मरम्मत समय पर क्यों नहीं होती? स्कूल जैसे संवेदनशील स्थान के बाहर खुले नाले और टूटी सड़क की जिम्मेदारी आखिर किसकी है؟ विकास के दावे अपनी जगह हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि बुराड़ी की यह सड़क अब लोगों के लिए परेशानी और बच्चों के लिए खतरे का रास्ता बन चुकी है। अब देखना होगा कि प्रशासन कब जागता है और इस सड़क के साथ-साथ खुले होलपास की समस्या का स्थायी समाधान कब तक करता है। रिपोर्ट / नसीम अहमद
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जैसलमेर मोहनगढ़ में नहर से घड़ियाल का सफल रेस्क्यू, वन विभाग ने बचाया

Jaisalmer, Rajasthan:जैसलमेर के मोहनगढ़ से बड़ी खबर,मोहनगढ़ के LKM नहर के 19 RD पर घड़ियाल का सफल रेस्क्यू, करीब एक घंटे की मशक्त के बाद वन विभाग ने पकड़ा घड़ियाल, नहर किनारे धूप सेंकते दिखाई दिया था 7 से 8 फीट लंबा घड़ियाल, सूचना मिली की कम पानी वाली नहर में है घड़ियाल तो वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, रेस्क्यू के बाद घड़ियाल को मोहनगढ़ रेस्क्यू सेंटर लाया गया, WWF द्वारा व्यास नदी में छोड़े गए घड़ियालों में से एक होने की कही बात, हरिके बैराज और नहर प्रणाली के जरिए जैसलमेर पहुंचा घड़ियाल, फिरोजपुर की विशेषज्ञ टीम को किया गया सूचित, जल्द होगा हैंडओवर, रेस्क्यू अभियान का नेतृत्व मोहनगढ़ रेंजर हनुमानराम ने किया,
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महाकाल मंदिर में मंगलवार-शुक्रवार दक्षिण भारतीय प्रसाद से भारत की विविधता का अनुभव

Ujjain, Madhya Pradesh:हर मंगलवार और शुक्रवार प्रसाद स्वरूप वितरित होंगे दक्षिण भारतीय पारंपरिक व्यंजन\n\n'एक भारत, अनेक परंपराएँ' की भावना के साथ महाकाल की नगरी में मिलेगा देश की विविध संस्कृति का अनुभव\n\nउज्जैन। बाबा महाकाल के दर्शन के लिए देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को अब प्रसाद में एक नई सौगात मिलने जा रही है। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने "रस संगमम् – एक भारत, अनेक परंपराएँ" नाम से नई पहल शुरू की है। इसके तहत मंदिर के निःशुल्क अन्नक्षेत्र में अब सप्ताह में दो दिन दक्षिण भारत के पारंपरिक व्यंजन प्रसाद स्वरूप वितरित किए जाएंगे।\n\nअब तक श्री महाकालेश्वर मंदिर के निःशुल्क अन्नक्षेत्र में श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप दाल, चावल, रोटी, सब्जी और मीठा दिया जाता था। अब इस व्यवस्था में एक नया आयाम जोड़ा गया है, ताकि देश के अलग-अलग राज्यों से आने वाले श्रद्धालु भारत की विविध भोजन परंपराओं का भी अनुभव कर सकें।\n\nनई व्यवस्था के अनुसार हर मंगलवार श्रद्धालुओं को इडली या वड़ा, सांभर, स्टीम चावल, पोंगल और मौसमी सब्जी प्रसाद स्वरूप वितरित किए जाएंगे। वहीं हर शुक्रवार पुलिहोरा, पायसम, रसम, स्टीम चावल और मौसमी सब्जी का प्रसाद दिया जाएगा।\n\nमंदिर प्रबंध समिति का कहना है कि यह पहल केवल प्रसाद वितरण तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य देश की अलग-अलग संस्कृतियों, परंपराओं और स्वादों को एक सूत्र में जोड़ना है। महाकाल की नगरी में आने वाले श्रद्धालुओं को भगवान महाकाल का आशीर्वाद मिलने के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक विविधता का भी आत्मीय अनुभव हो सके, इसी सोच के साथ यह पहल शुरू की गई है।\n\nश्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि "रस संगमम् – एक भारत, अनेक परंपराएँ" पहल के माध्यम से "एक भारत, श्रेष्ठ भारत" की भावना को और मजबूत किया जाएगा। उनका कहना है कि महाकाल की नगरी में देश के हर कोने से श्रद्धालु आते हैं और यह पहल उन्हें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक एवं पाक परंपराओं से जोड़ने का एक छोटा लेकिन सार्थक प्रयास है।
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बेगूसराय में युवक की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई, इलाके में सनसनी

Begusarai, Bihar:जितेन्द्र कुमार बेगूसराय एंकर बेगूसराय से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां अपराधियों ने एक युवक की धारदार हथियार से सिर काटकर निर्मम तरीके से हत्या कर दी है। इस हत्या के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। परिजनों ने धारदार हथियार से हत्या कर शव को बांध किनारे फेंके जाने का आरोप लगाया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि फिलहाल मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है। और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के कारणों की पुष्टि हो सकेगी। आपको बताते चले कि बेगूसराय के बलिया थाना क्षेत्र के बलहपुर-गुप्ता लखमीनिया बांध के समीप एक युवक का शव मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। मृतक की पहचान सदानंदपुर वार्ड संख्या-11 निवासी शिवकुमार पासवान के पुत्र बादल कुमार के रूप में हुई है। शव मिलने की सूचना के बाद मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन भी मौके पर पहुंचे। शव को देखते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई और पूरे गांव में मातम का माहौल छा गया। मृतक के परिजनों का आरोप है कि बादल कुमार को गांव का ही एक युवक घर से बुलाकर अपने साथ ले गया था। बताया जा रहा है कि दोनों साइकिल से बाजार जाने की बात कहकर निकले थे, लेकिन बादल देर रात तक घर नहीं लौटा। काफी तलाश के बाद जानकारी मिली कि उसका शव बलहपुर-गुप्ता लखमीनिया बांध के पास पड़ा हुआ है। परिजनों का आरोप है कि अपराधियों ने धारदार हथियार से हमला कर उसकी हत्या की और शव को सुनसान स्थान पर फेंक दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिस युवक ने बादल को घर से बुलाया था, वह घटना के बाद से लापता है। घटना की सूचना मिलते ही बलिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बेगूसराय सदर अस्पताल भेज दिया। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों, तकनीकी साक्ष्यों और संदिग्ध लोगों से पूछताछ के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल युवक की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि होगी। सभी पहलुओं पर गंभीरता से जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल इस मामले में परिजन हत्या की आशंका जता रहे हैं, जबकि पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों का इंतजार कर रही है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सच सामने आता है और इस मामले का खुलासा कब तक हो पाता है।
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हरिद्वार में तेज बारिश से जलभराव, कांवड़ यात्रा जारी, मौसम हुआ सुहावना

Haridwar, Uttarakhand:#ब्रेकिंग न्यूज़/हरिद्वार हरिद्वार में रातभर से जारी तेज बारिश, मौसम हुआ सुहावना, तापमान में आई गिरावट। लगातार बरसात से शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति, लोगों की दिनचर्या पर भी पड़ा असर। गंगाजल लेने पहुंचे शिवभक्त कांवड़ियों को उमस और गर्मी से राहत मिली, बारिश के बीच यात्रा जारी रही। कांवड़ियों का कहना है कि ठंडे मौसम में पैदल यात्रा करना आसान हो जाता है और अधिक दूरी तय करने में सुविधा मिलती है। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंच रहे हैं, पुलिस और प्रशासन लगातार व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुए हैं। मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है, प्रशासन ने सतर्कता बरतने की अपील की है।
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उत्तराखंड में भारी बारिश: शासन ने SDRF-NDRF मदद से राहत जारी रखी

Noida, Uttar Pradesh:Dehradun (Uttarakhand): Vinod Kumar Suman (Secretary, Disaster Management and Rehabilitation, Uttarakhand) on Heavy Rainfall Situation/ Disaster Response Measures/ State Preparedness पूरे राज्य में कल रात से लगातार बारिश हो रही है और कुछ ज़िलों में भारी बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन पहले से मिली जानकारी के आधार पर तैयार था और सभी ज़रूरी जगहों पर ज़रूरी कदम उठा रहा है। हालांकि कुछ मामूली नुकसान की खबरें हैं, जैसे बद्रीनाथ के पास भूस्खलन, जोशीमठ के पास पेड़ गिरना, और गुप्तकाशी व सोनप्रयाग समेत कई इलाकों में मलबे के कारण सड़कें बंद होना, लेकिन कुल मिलाकर स्थिति नियंत्रण में है। देहरादून में जलभराव और मामूली भूस्खलन की खबरें हैं। कुछ सड़कें बंद हैं, पेड़ गिरे हैं, और निंदा चौकी के पास कुछ दुकानों और एक पुल को थोड़ा नुकसान पहुंचा है। सभी ज़िल्ले अलर्ट पर हैं और लगातार स्थिति पर नज़र रख रहे हैं, जो आम तौर पर सामान्य बनी हुई है। आज दोपहर तक और अगले तीन दिनों तक पूरे राज्य में बारिश जारी रहने की उम्मीद है। देहरादून में, हालांकि काफी नुकसान की खबर है, लेकिन प्रशासन, SDRF और NDRF से मदद और बातचीत जारी है। सहस्रधारा के पास एक पुल को मामूली नुकसान पहुंचा लेकिन वह गिरा नहीं; टीमें मौके पर समस्या को ठीक कर रही हैं। इसके अलावा, दो दुकानों के सामने के शेड और एक छोटा तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया, और कुछ जगहों पर जलभराव की खबर मिली, हालांकि अब पानी उतर गया है। अधिकारी फील्ड का दौरा कर रहे हैं।
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जैसलमेर में गोडावण की सॉफ्ट री-रिलीज़: प्राकृतिक आवास लौटने की उम्मीद

Jaisalmer, Rajasthan:राजस्थान के विलुप्तप्राय राज्य पक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) के संरक्षण की दिशा में जैसलमेर से ऐतिहासिक और उम्मीद जगाने वाली खबर सामने आई है। वर्षों की वैज्ञानिक मेहनत के बाद अब गोडावणों को दोबारा प्राकृतिक आवास में बसाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रोजेक्ट जीआईबी के तहत रामदेवरा स्थित गोडावण संरक्षण केंद्र के नव-निर्मित 'सॉफ्ट री-रिलीज़' बाड़े में तीन गोडावण चूजों को सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया गया है। अगले चार महीने तक इनकी चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी, जिसके बाद इन्हें डेजर्ट नेशनल पार्क के खुले वन क्षेत्र में छोड़ दिया जाएगा। गोडावण संरक्षण के लिए पिछले तीन से चार दशकों से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सम और रामदेवरा में स्थापित ब्रीडिंग सेंटरों की बदौलत अब तक बड़ी सफलता मिली है। वर्तमान में दोनों केंद्रों में कुल 98 गोडावण मौजूद हैं, जो कैप्टिव ब्रीडिंग कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। पर्याप्त संख्या होने के बाद अब वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों ने इन्हें चरणबद्ध तरीके से प्राकृतिक आवास में छोड़ने की योजना पर अमल शुरू कर दिया है। उप वन संरक्षक (वन्यजीव) अशोक सिंह ने बताया कि रामदेवरा में लगभग ₹9.25 करोड़ की लागत से वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप 160 मीटर लंबा, 67 मीटर चौड़ा और 14 मीटर ऊंचा अत्याधुनिक 'सॉफ्ट री-रिलीज़ स्ट्रक्चर' तैयार किया गया है। इसी बाड़े में 24 जुलाई को R-9, R-10 और R-11 नाम के तीन गोडावणों को शिफ्ट किया गया है, जहां उन्हें प्राकृतिक मौसम और जंगल जैसी परिस्थितियों के अनुरूप ढालने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) की विशेषज्ञ टीम सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से तीनों पक्षियों की 24 घंटे निगरानी कर रही है। 'ज़ीरो ह्यूमन टच' नीति के तहत भोजन विशेष विंडो से दिया जा रहा है तथा आधुनिक जल व्यवस्था की गई है, ताकि पक्षियों में इंसानों पर निर्भरता विकसित न हो और उनका प्राकृतिक व्यवहार बना रहे। चार महीने के प्रशिक्षण के बाद जब ये गोडावण पूरी तरह प्राकृतिक वातावरण के अनुकूल हो जाएंगे, तब इन्हें डेजर्ट नेशनल पार्क के खुले जंगल में मुक्त कर दिया जाएगा। माना जा रहा है कि यह प्रयोग थार के रेगिस्तान में गोडावणों की प्राकृतिक आबादी को पुनर्स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा और आने वाले समय में डेजर्ट नेशनल पार्क के आसमान में एक बार फिर गोडावणों के झुंड उड़ान भरते दिखाई देंगे。
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बांसवाड़ा में घर के भीतर 7 वर्षीय बालिका की सांप डसने से मौत

Banswara, Rajasthan:बांसवाड़ा जिले के सज्जनगढ़ थाना क्षेत्र के जीवा खूँटा गांव में घर के अंदर बैठी 7 वर्षीय बालिका गुड्डी पुत्र खोमचन को जहरीले सांप ने डस लिया, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उसे गंभीर हालत में अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक बालिका की पहचान गुड्डी पिता खोमचन के रूप में हुई है। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और गांव में शोक की लहर दौड़ गई। सूचना मिलने पर सज्जनगढ़ थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और बालिका के शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवाया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। प्रारम्भिक जानकारी के अनुसार बालिका को घर के अंदर बैठे दौरान सांप ने काटा था, जिसके बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ गई और इलाज के दौरान उसकी जान नहीं बच सकी।
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अलवर में जगन्नाथ-जानकी की रथयात्रा से भक्तों में उमंग, दिव्य महोत्सव का समापन

Alwar, Rajasthan:अलवर में जगन्नाथ-जानकी की शाही विदाई, भक्ति और उल्लास से सराबोर रहा पूरा शहर अलवर में आयोजित भगवान जगन्नाथ मेले के तहत 171वें दिव्य विवाह महोत्सव का भव्य समापन सोमवार को भगवान जगन्नाथ और माता जानकी की शाही विदाई के साथ हुआ। रूपबास स्थित रूपहरि मंदिर में पारंपरिक रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जानकी मैया की विदाई की रस्में अदा की गईं। इसके बाद भगवान जगन्नाथ और माता जानकी सुसज्जित शाही रथ में विराजमान होकर अपने निजधाम पुराना कटला स्थित प्राचीन जगन्नाथ मंदिर के लिए रवाना हुए। रथयात्रा के दौरान पूरा शहर “जय जगन्नाथ” के गगनभेदी जयघोष, शंखनाद, ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन से भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु पूरे मार्ग में भजन गाते और जयकारे लगाते हुए रथ के साथ चलते नजर आए। रास्ते भर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ी रही और हर कोई भगवान के दर्शन को आतुर दिखा। मंगलवार तड़के करीब 4 बजे यह ऐतिहासिक रथयात्रा पुराना कटला स्थित मंदिर पहुंची, जहां हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में भगवान जगन्नाथ और माता जानकी का भव्य स्वागत किया गया। विधि-विधान से आरती उतारकर दोनों का मंदिर में पुनः प्रवेश कराया गया। अलवर में हर वर्ष आयोजित होने वाला यह दिव्य महोत्सव धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। लगभग एक सप्ताह तक चलने वाले इस आयोजन में पूरा शहर भक्ति के रंग में रंगा नजर आता है। परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ दूल्हे के रूप में रथ में सवार होकर रूपबास पहुंचते हैं, जहां माता जानकी के साथ उनका विवाह संपन्न होता है, और फिर विदाई के साथ वे अपने धाम लौटते हैं। रथयात्रा मार्ग पर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संगठनों द्वारा भव्य स्वागत द्वार बनाए गए थे। जगह-जगह पुष्पवर्षा, आरती, भजन-कीर्तन, भंडारे, प्याऊ और प्रसाद वितरण की व्यवस्थाएं की गईं। मेले में बच्चों के झूले, खिलौनों और खानपान की दुकानों ने भी रौनक बढ़ा दी। पूरी रात अलवर की सड़कों पर आस्था, उत्साह और उल्लास का अनोखा संगम देखने को मिला। यह दिव्य रथयात्रा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि अलवर की सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक पहचान को भी जीवंत करती है।
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