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Maharajganj
Amit TripathiAmit TripathiFollow25 Jan 2025, 09:04 am

Maharajganj: गणतंत्र दिवस के मद्देनजर भारत नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

Sonauli, Uttar Pradesh:

गणतंत्र दिवस के मौके पर देश में आतंकी खतरों को देखते हुए भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। महराजगंज से सटे सोनौली सीमा पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सीमा पर एसएसबी द्वारा जगह-जगह जांच पड़ताल की जा रही है। आंतरिक सुरक्षा को सख्त करते हुए सीमा पर अलर्ट जारी किया गया है। सोनौली सीमा पर डॉग स्क्वायड और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से नेपाल से आने-जाने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की कड़ी तलाशी ली जा रही है। इसके अलावा, भारत-नेपाल की खुली सीमा के कारण एसएसबी और पुलिस के जवान भी बॉर्डर पर पैट्रोलिंग कर रहे हैं।

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जैसलमेर के मेजर हमजा आरिफ का इंडोर में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

Jaisalmer, Rajasthan:सड़क हादसे में शहीद हुए मेजर हमजा आरिफ को नम आंखों से अंतिम विदाई, सैन्य सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक जैसलमेर जैसलमेर में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले भारतीय सेना के 26 वर्षीय मेजर हमजा आरिफ को शनिवार को उनके पैतृक निवास इंदौर में पूरे सैन्य सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जायेगा। इससे पहले जैसलमेर सैन्य स्टेशन में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों और जवानों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की तथा गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी। मेजर हमजा की शादी महज एक महीने पहले हुई थी और वे छुट्टी पूरी कर हाल ही में ड्यूटी पर लौटे थे। जैसलमेर कैंट में दी गई श्रद्धांजलि जैसलमेर आर्मी स्टेशन में सेना के अधिकारियों और जवानों ने मेजर हमजा आरिफ के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को विशेष_vehicle से इंदौर स्थित पैतृक निवास के लिए रवाना किया गया, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की जायेगी। ऊंट से टकराने के बाद पलटी थी सेना की SUV गुरुवार देर रात सदर थाना क्षेत्र के थईयात के पास मेजर हमजा अपने दो साथी अधिकारियों के साथ ड्यूटी पूरी कर आर्मी स्टेशन लौट रहे थे। इसी दौरान सड़क पर अचानक आए ऊंट से उनकी SUV टकरा गई। टक्कर के बाद वाहन कई बार पलटते हुए करीब 100 मीटर तक घिसट गया। हादसे में ऊंट की भी मौके पर ही मौत हो गई। दो अधिकारी घायल, इलाज जारी हादसे के बाद पुलिस और सेना की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और तीनों अधिकारियों को सेना के अस्पताल पहुंचाया। जहां चिकित्सकों ने मेजर हमजा आरिफ को मृत घोषित कर दिया। वहीं घायल लेफ्टिनेंट आयुष्मान और लेफ्टिनेंट अभिनव राठौड़ का मिलिट्री अस्पताल में उपचार जारी है। एक महीने पहले गूंजी थीं शहनाइयां, अब पसरा मातम मेजर हमजा आरिफ की असामयिक मौत से परिवार और सेना दोनों शोक में हैं। महज एक महीने पहले ही उनके घर में शादी की खुशियां मनाई गई थीं। नई-नवेली दुल्हन और परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जिस घर में कुछ दिन पहले तक शहनाइयों की गूंज थी, वहां अब मातम का माहौल है।
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आरामबाग में जमीन-सम्पत्ति विवाद से बड़े भाई ने अपने भतीजे समेत हत्या कर दी

Arambag, West Bengal:আরামবাগঃ০১ অগস্ট জমি ও সম্পত্তি নিয়ে ভাইয়ে ভাইয়ে গণ্ডগোলের জেরে দাদার হাতে প্রাণ গেল ভাইয়ের। মেজো ভাইকে টাঙি দিয়ে কুপিয়ে খুনের অভিযোগ উঠল বড় দাদা ও তার ছেলের বিরুদ্ধে। টাঙির কোপে জখম হয়েছে ছোট ভাই সহ আরাও ২ জন। আরামবাগ মেডিকেল কলেজ হাসপাতালে তাঁদের চিকিৎসা চলছে। ঘটনায় চাঞ্চল্য ছড়িয়েছে আরামবাগের বোলুণ্ডি এলাকায়। জানা গেছে, মৃতের নাম শেখ হারুন বাদশা(৪৫)। বাবার বেকারি ও জমি নিয়ে বড় দাদার সঙ্গে মেজো ও ছোট ভাইয়ের বিবাদ চলছিল। এনিয়ে আদালতে মামলাও চলছিল। অভিযোগ, শনিবার রাতে চাষের জমি থেকে বাড়ি ফিরছিলেন হারুন সহ পরিবারের অন্যান্যরা। সেইসময় রাস্তায় অতর্কিতে হামলা চালায় হারুনের বড় দাদা শেখ মুজিবর রহমান ও তার ছেলে। টাঙির কোপে রাস্তায় লুটিয়ে পড়েন জখমরা। এরপর স্থানীয় কয়েকজন তাঁদের পড়ে থাকতে দেখে উদ্ধার করে আরামবাগ মেডিক্যাল কলেজ হাসপাতালে পাঠান। সেখানে চিকিৎসক হারুনকে মৃত বলে ঘোষণা করেন। ঘটনার পর অভিযুক্তরা পলাতক।ঘটনায় দোষীদের শস্তির দাবিতে সরব হয়েছেন তারা।
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आदिवासी छात्र संघ ने झारखंड के जेपीएससी-जेएसएससी विवाद पर सरकार से सवाल उठाए

Ranchi, Jharkhand:आदिवासी छात्र संघ की केंद्रीय समिति ने आज रांची में प्रेस वार्ता कर जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़े विवादों पर अपना पक्ष रखा। संघ के केंद्रीय संयोजक डॉ. सुशील कुमार ने कहा कि झारखंड में परीक्षाओं को लेकर जिस तरह का माहौल बनाया जा रहा है, वह एक सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा, एबीवीपी और कुछ कोचिंग संस्थानों के संचालक इस मुद्दे को राजनीतिक रूप देने का प्रयास कर रहे हैं। डॉ. सुशील कुमार ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं देश के कई राज्यों में हुई हैं, लेकिन झारखंड में जिस तरह से विरोध हो रहा है, वैसा कहीं और देखने को नहीं मिला। उनका आरोप था कि चूंकि राज्य में आदिवासी नेतृत्व वाली सरकार है, इसलिए उसे अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है。 उन्होंने कहा कि राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी झारखंड में स्पष्ट डोमिसाइल नीति लागू नहीं हो सकी है। 1932 के खतियान आधारित स्थानीय नीति का प्रस्ताव राज्य सरकार केंद्र को भेज चुकी है, लेकिन अब तक उस पर निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि स्पष्ट स्थानीय नीति नहीं होने से बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरियों में लाभ मिल रहा है。 आदिवासी छात्र संघ ने जनजातीय भाषाओं को भी प्रमुख मुद्दा बताया। संघ का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में जनजातीय भाषाओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है, जिससे इन भाषाओं के विद्यार्थियों को नुकसान हो रहा है। वहीं, दो वर्षों से छात्रवृत्ति नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए इसके लिए भी केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया गया। संघ ने रांची विश्वविद्यालय में लागू क्लस्टर सिस्टम और जनजातीय भाषा के विद्यार्थियों के नामांकन पोर्टल बंद किए जाने पर भी आपत्ति जताई। संगठन का कहना है कि इससे जनजातीय भाषा, संस्कृति और पहचान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। प्रेस वार्ता के दौरान आदिवासी छात्र संघ ने 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रांची कॉलेज फुटबॉल मैदान में एक भव्य समारोह आयोजित करने की घोषणा की। संगठन के अनुसार, कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मुख्य अतिथि तथा कल्याण मंत्री चमरा लिंडा विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा。
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जयपुर में पेयजल संकट: गंदे पानी से बच्चे बीमार, नगर निगम-PHED पर सवाल

Jaipur, Rajasthan:नगर निगम और PHED की उलझन से रूकी पेयजल सप्लाई, गंदे पानी से बच्चे बीमार जयपुर-राजधानी जयपुर के दो इलाकों में नगर निगम और पीएचईडी की उलझन के कारण आम लोगों को गंदा पानी पीना पड़ रहा है. बच्चे बीमार पड़ रहे हैं. आरोप लगाया जा रहा है कि नलों से कीड़े युक्त पानी आ रहा है, शिकायत के बावजूद नगर निगम और PHED एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। देखिए ये रिपोर्ट… ये तस्वीरें जयपुर के जवाहर नगर कच्ची बस्ती के टीला नंबर-1 की हैं, जहां लोगों का आरोप है कि पिछले 15 दिनों से नलों में गंदा और बदबूदार पानी आ रहा है। लोगों का कहना है कि पानी में छोटे-छोटे कीड़े भी निकल रहे हैं, जिससे इसका इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया है। जवाहर नगर कच्ची बस्ती विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष युगल खोड़ा का कहना है कि कई बार जलदाय विभाग के कर्मचारियों को शिकायत दी गई, लेकिन समाधान नहीं हुआ। उनका आरोप है कि PHED और नगर निगम एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं और समस्या जस की तस बनी हुई है। इस दौरान सीवर का गंदा पानी पेयजल लाइन में मिलता रहा और 20 दिन में 18 बच्चे उल्टी-दस्त से बीमार हो गए. हालात बेकाबू होते देख जलदाय विभाग ने पूरे ब्लॉक की पेयजल सप्लाई बंद कर दी. अब लोगों को टैंकरों से पानी दिया जा रहा है. यानी निगम की लापरवाही की कीमत स्थानीय लोग बीमारी और जल संकट दोनों रूप में चुका रहे हैं। बाइट – युगल खोड़ा, अध्यक्ष, कच्ची बस्ती विकास समिति स्थानीय निवासी पुष्पा देवी का कहना है कि गंदे पानी के कारण छोटे-छोटे बच्चों में उल्टी और दस्त की शिकायतें बढ़ रही हैं. पानी से तेज बदबू आती है और उसमें कीड़े दिखाई देते हैं, जिससे परिवारों में बीमारी का डर बना हुआ है. कई महिलाओं ने प्रशासन से तत्काल शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा. अधीक्षक अभियंता केशव श्रीवास्तव का कहना है इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं कि जल्द ही लाइन को ठीक किया जाए. इसके साथ ही पानी के सैंपल भी लिए जाएँगे ताकि शुद्ध पेयजल सप्लाई हो सके. इस तरह गलता गेट के नजदीक गोवर्धनपुरी के सी और एफ ब्लॉक में नगर निगम की लापरवाही ने दूषित पानी की समस्या को गंभीर संकट में बदल दिया. जलदाय विभाग 25 दिन तक निगम को ओवरफ्लो और लीकेज वाली सीवर लाइन ठीक करने के लिए कहता रहा, लेकिन अफसरों ने सुनवाई नहीं की। लोग कई दिनों से गंदे पानी की सप्लाई हो रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक समाधान नहीं कर पाए हैं. सवाल यह है कि जब लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, तो आखिर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा. प्रशासन इस समस्या का समाधान कब तक करता है और लोगों को राहत कब मिलती है। नोट—इस खबर की फीड 2 सी में अटैच है।
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जयपुर के जवाहर नगर में 15 दिन से दूषित पानी, PHED-नगर परिषद पर आरोप

Jaipur, Rajasthan:जवाहर नगर कच्ची बस्ती स्थित टीला नंबर-1 में पिछले 15 दिनों से दूषित पेयजल की आपूर्ति होने का आरोप सामने आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नलों से गंदा, बदबूदार पानी आ रहा है, जिसमें छोटे-छोटे कीड़े भी दिखाई दे रहे हैं। इससे क्षेत्र में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है और लोग साफ पानी के लिए परेशान हैं। जवाहर नगर कच्ची बस्ती विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष युगल खोड़ा ने बताया कि पिछले 15 दिनों से क्षेत्र में लगातार गंदे पानी की सप्लाई हो रही है। इसकी शिकायत कई बार जलदाय विभाग (PHED) के कर्मचारियों को दी गई, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनका आरोप है कि शिकायत करने पर PHED और नगर निगम एक-दूसरे के जिम्मे काम बताकर मामले को टाल रहे हैं। स्थानीय निवासी पुष्पा देवी ने बताया कि दूषित पानी के कारण छोटे-छोटे बच्चों में उल्टी और दस्त की शिकायतें बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि पानी से तेज बदबू आती है और उसमें छोटे-छोटे कीड़े निकल रहे हैं, जिससे लोग मजबूरी में भी उस पानी का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। क्षेत्र की बदाम देवी, जानकी देवी, पारा देवी, संतोष देवी और रचनी देवी सहित अन्य महिलाओं ने भी प्रशासन के प्रति नाराजगी जताई। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो पानी की गुणवत्ता की जांच हुई और न ही पाइपलाइन की मरम्मत की गई। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पेयजल की गुणवत्ता की तत्काल जांच कराई जाए, दूषित पानी की आपूर्ति बंद कर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए तथा PHED और नगर निगम के बीच समन्वय स्थापित कर समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। लोगों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे。
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निम्बाहेड़ा में ANM Nurses पर कार्रवाई के विरोध में यूनियन ने ज्ञापन दिया

Begun, Rajasthan:निम्बाहेड़ा, चित्तौड़गढ़ - चित्तौड़गढ़ जिले के निम्बाहेड़ा में एलएचवी-एएनएम संघ ऑफ राजस्थान ने प्रसूता मृत्यु और उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं के मामलों में एएनएम नर्सिंग कर्मचारियों पर की जा रही कार्रवाई और मानसिक दबाव के विरोध में प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के नाम बीसीएमओ को ज्ञापन सौंपा। संघ का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद एएनएम स्वास्थ्य सेवाओं की अहम जिम्मेदारियां निभा रही हैं, ऐसे में प्रसूता मृत्यु के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। ज्ञापन में गैर-नर्सिंग कार्यों का बोझ कम करने, आरसीएच पोर्टल व धारा-17 से जुड़े मामलों में राहत देने की मांग की गई। मांगें नहीं माने जाने पर राज्यव्यापी गांधीवादी आंदोलन और हड़ताल की चेतावनी दी गई。
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चित्तौड़गढ़: चौपाल में प्रशासन ने ग्रामीणों को समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए

Begun, Rajasthan:#चित्तौड़गढ़ - एंकर - चित्तौड़गढ़ जिले के शंभूपुरा ग्राम पंचायत मुख्यालय पर आयोजित संध्या चौपाल में अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) दिनेश धाकड़ ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनकर संबंधित अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए। चौपाल के दौरान विभिन्न विभागों की योजनाओं की जानकारी दी गई तथा पात्र लाभार्थियों को मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना सहित अन्य योजनाओं के प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर क्षेत्र के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित भी किया गया। अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच जनहित के मुद्दों पर संवाद हुआ तथा हर पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया गया।
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हरिद्वार गंगा: SDRF-जल पुलिस ने युवक महेंद्र की जान बचाई

Haridwar, Uttarakhand:ब्रेकिंग न्यूज़/हरिद्वार हरिद्वार के कांगड़ा घाट पर गंगा के तेज बहाव में फंसा युवक, जल पुलिस और SDRF ने मिलकर बचाई जान。 रामपुर निवासी 22 वर्षीय महेंद्र स्नान के दौरान बहाव की चपेट में आकर गंगा में फंस गया था, मौके पर मौजूद रेस्क्यू टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला。 जल पुलिस और SDRF के जवानों ने संयुक्त अभियान चलाकर युवक तक पहुंच बनाई और सुरक्षित बाहर निकाल लिया。 समय रहते हुए रेस्क्यू से बड़ा हादसा टला, युवक को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद आवश्यक सहायता दी गई。 कांवड़ मेले के बीच हरिद्वार पुलिस और SDRF की गंगा घाटों पर लगातार निगरानी, श्रद्धालुओं से तेज बहाव वाले स्थानों पर स्नान न करने की अपील。
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एलओसी के पास पाक सेना की बड़ी तैनाती, घुसपैठ की आशंका तेज

Jammu, पीओके में बवाल के बीच एलओसी के करीब पाकिस्तानी सेना का बढ़ा जमावड़ा, आतंकियों की घुसपैठ की आशंका तेज पाकिस्तान के नियंत्रण रेखा के नज़दीक अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक एलओसी से सटे कई इलाकों में सैनिकों की संख्या बढ़ाई गई है। सुरक्षा एजेंसी इसे घुसपैठ की कोशिशों और सीमा पार आतंकी गतिविधियों से जोड़कर देख रही हैं। पीओके में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बढ़ते जनआक्रोश और विरोध प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान की सेना ने एलओसी के करीब बड़े पैमाने पर सैन्य जमावड़ा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने स्वयं अग्रिम इलाकों का दौरा किया। एलओसी से सटे कई सेक्टरों में सैनिकों की संख्या बढ़ाई गई है। खास तौर पर केल, जुरा, नीलम घाटी और लीपा वैली जैसे इलाकों में सैन्य गतिविधियां तेज होने की बात कही गई है। बताया गया है कि गुलपुर के करीब लगभग 80 किलोमीटर के दायरे में भी सैन्य हलचल बढ़ी है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अग्रिम चौकियों पर अतिरिक्त सैनिकों और पुलिस बल की तैनाती की गई है। इस बीच, पीओके में पाकिस्तान विरोधी आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। स्थानीय महिलाओं और नागरिकों ने पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। खबरों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने सेना पर बल प्रयोग और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं। कई इलाकों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर पाकिस्तान विरोधी नारे लगा रहे हैं। उधर, भारतीय सुरक्षा एजेंसीजें भी सीमा पार की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पीओके में बढ़ते जनाक्रोश से दुनिया का ध्यान हटाने के लिए पाकिस्तान एक बार फिर सीमा पार आतंकवाद और घुसपैठ की रणनीति अपना सकता है। इसी कड़ी में कल यानी 31 जुलाई की रात में जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकवादियों ने दो गैर-स्थानीय मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी। दोनों मजदूर छत्तीसगढ़ के निवासी बताए गए हैं। आतंकियों ने देर शाम उन पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें दोनों की मौत हो गई। इस हमले के बाद पूरे इलाके की घेराबंदी कर सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने संयुक्त तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा एजेंसियां इसे सीमा पार से संचालित आतंकवादी नेटवर्क की कायराना हरकत मान रही हैं। भारत की सुरक्षा एजेंसीज एलओसी पर हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखे हुए हैं और किसी भी घुसपैठ या आतंकी साजिश को नाकाम करने के लिए हाई अलर्ट पर हैं।
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कुलगाम आतंकी हमले में प्रवासी मजदूरों की मौत दो, बाहरी लोगों पर हमले बढ़े

Kulgam, कुलगाम आतंकी हमला: दूसरे प्रवासी मज़दूर की मौत के बाद मरने वालों की संख्या दो हुई; कश्मीर में बाहरी लोगों और सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाकर हत्याओं का सिलसिला लौटा दक्षिण कश्मीर के कुलगाम ज़िले में प्रवासी मज़दूरों पर शुक्रवार को हुए आतंकी हमले में मरने वालों की संख्या शनिवार को दो हो गई, क्योंकि श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ (SKIMS) में घायल दूसरे मज़दूर ने दम तोड़ दिया। शुक्रवार शाम कुलगाम के केलम (या केल्लम) इलाके में एक ईंट भट्ठे पर काम कर रहे दो बाहरी मज़दूरों पर आतंकवादियों ने गोलीबारी की। दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तुरंत अनंतनाग के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) ले जाया गया, जहाँ उनमें से एक की मौत हो गई। दूसरे को बाद में बेहतर इलाज के लिए SKIMS रेफर किया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद शनिवार को उसकी भी मौत हो गई। मृतकों की पहचान दीपक रैट्रे (24), पिता उमा शंकर, और बोपिंदर (28), पिता दसराड़ के तौर पर हुई है। दोनों छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे और प्रवासी मज़दूर के तौर पर कश्मीर आए थे। सूत्रों का कहना है कि हमलावरों ने बाहरी मज़दूरों के कार्ड देखने के बाद उन्हें खास तौर पर निशाना बनाया, लेकिन पुलिस ने ऐसी किसी घटना से इनकार किया है। सुरक्षा बल तुरंत घटनास्थल पर पहुँचे, इलाके की घेराबंदी की और हमलावरों का पता लगाने के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जाँच चल रही है। पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का ही एक हिस्सा और प्रॉक्सी माने जाने वाले संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है। सोशल मीडिया पर फैल रहे संदेशों के मुताबिक, इस समूह ने बाहरी लोगों और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों पर और हमले करने की चेतावनी दी है। खबरों के अनुसार, यही वह समूह है जिसने 22 जुलाई को अनंतनाग में पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया था। घाटी में लगभग दस दिनों के भीतर यह दूसरा बड़ा आतंकी हमला है। 22 जुलाई को आतंकवादियों ने अनंतनाग के लाल चौक इलाके में जम्मू-कश्मीर पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी (या आशिक हुसैन) की बहुत करीब से गोली मारकर हत्या कर दी थी। यह हमला अमरनाथ यात्रा के रास्ते पर एक भीड़-भाड़ वाले बाज़ार इलाके में हुआ। इस घटना से पता चलता है कि टारगेटेड किलिंग (खास लोगों को निशाना बनाकर हत्या) का दौर फिर से शुरू हो गया है। लगातार हुए इन हमलों ने कश्मीर में सुरक्षाकर्मियों और बाहरी नागरिकों की चुनिंदा हत्याओं के फिर से शुरू होने की चिंता बढ़ा दी है। यह एक ऐसा पैटर्न है जो हाल के वर्षों में सुरक्षा अभियानों के तेज़ होने और अनुच्छेद 370 हटने के बाद कुल आतंकी घटनाओं में भारी कमी आने के कारण काफी कम हो गया था। कई वर्षों तक, घाटी में बाहरी मज़दूरों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ इस तरह की चुनिंदा हिंसा का स्तर, उग्रवाद के शुरुआती दौर की तुलना में काफी कम रहा। सुरक्षा जानकारों का कहना है कि TRF जैसे संगठन बार-बार खुद को "स्थानीय प्रतिरोध" (लोकल रेजिस्टेंस) के तौर पर पेश करने की कोशिश करते हैं, जबकि वे पाकिस्तान स्थित संगठनों के पुराने तरीकों को ही अपनाते हैं: आसान लक्ष्यों (सॉफ्ट टारगेट), भाषा से पहचाने जाने वाले बाहरी मज़दूरों और सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाकर डर फैलाना, आर्थिक गतिविधियों में बाधा डालना और सुर्खियां बटोरना। छत्तीसगढ़, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से आए प्रवासी मज़दूर कश्मीर की मौसमी मज़दूर आबादी का एक अहम हिस्सा हैं, खासकर निर्माण कार्य, ईंट-भट्टों और बागवानी के क्षेत्र में। उन पर हमले बाहरी लोगों में दहशत फैलाने के मकसद से किए जाते हैं। ताज़ा हत्याएं इस बात को रेखांकित करती हैं कि भले ही जम्मू-कश्मीर में हिंसा का कुल स्तर पिछले दशकों की तुलना में कम रहा है, लेकिन सीमा पार से समर्थित बचा-खुचा आतंकी इकोसिस्टम सुरक्षा बलों और बाहरी निवासियों को निशाना बनाकर चुनिंदा और हाई-प्रोफाइल हमले करने की कोशिशें जारी रखे हुए है। अनंतनाग और कुलगाम, दोनों घटनाओं की जांच चल रही है और सुरक्षा एजेंसियां ​​इसके लिए ज़िम्मेदार मॉड्यूल को खत्म करने की कोशिश कर रही हैं।
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कुलगाम के ईंट भट्टों पर आतंकी हमले के बाद प्रवासी मजदूरों में घबराहट

Kulgam, प्रवासी मज़दूरों की आतंकी हमले के बाद ईंट के भट्टे पर काम करने वाले मज़दूर घबराए हुए। सुरक्षा बलों ने भट्ठों से बाहर ना घूमे फिरने की दी सलाह और आसपास बड़ाई सुरक्षा। कुलगाम के केलम में प्रवासी मजदूरों पर बीती रात आतंकवादी हमला हुआ और दो मजदूरों की हत्या कर दी गई। वे प्रवासी मजदूर ईंट के भट्ठे में काम करते थे। इसके बाद से इलाके में ईंट के भट्ठों पर काम करने वाले मजदूरों में घबराहट पैदा हो गई है। यह लोग चार महीने के सीज़न के लिए इन भट्ठों में काम करते हैं और पहले ही एडवांस ले चुके होते हैं। लेकिन इस घटना के बाद अब वे सोच रहे हैं कि रुकें या चले जाएं। ईंट के भट्टों पर काम करने वाले मजदूरों से बातचीत चलती है। कश्मीर घाटी में लगभग 3000 से 3500 ईंट-भट्टे चल रहे हैं, और इनमें काम करने के मुख्य मौसम के दौरान बाहर से आए लगभग 35,000 से 45,000 प्रवासी मजदूर काम करते हैं। ज़्यादातर मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और पंजाब जैसे राज्यों से कश्मीर आते हैं। यह मजदूर अक्सर अपने परिवारों के साथ आते हैं और काम चलने के महीनों के दौरान भट्टों पर ही रहते हैं। ईंट के भट्टे ज़्यादातर मध्य कश्मीर के बडगाम जिले और दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम और शोपियां में स्थित हैं। ईंट बनाने का काम आम तौर मई के आस-पास शुरू होता है और अगस्त आख़िर तक चलता रहता है।
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