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SSSumant SinghFollow47m ago

सहकारी समितियों का अधिकारियों ने किया निरीक्षण

Bhadaura, Uttar Pradesh:सहकारी समितियों का अधिकारियों ने किया निरीक्षण, खाद वितरण व्यवस्था मिली सुचारु सेवराई (गाजीपुर)। किसानों को खाद की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से मंगलवार को प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने स्थानीय तहसील क्षेत्र के भदौरा विकास खंड की विभिन्न ग्रामीण सहकारी समितियों का निरीक्षण एवं सत्यापन किया। इस दौरान अधिकारियों ने बारा, गहमर और मनिया स्थित ग्रामीण सहकारी समितियों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान खाद वितरण की व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित होती मिली। निरीक्षण टीम में उपजिलाधिकारी सेवराई गजराज यादव, अपर जिला सहकारी अधिकारी विकास राय तथा गहमर थाना प्रभारी निरीक्षक नंद कुमार तिवारी शामिल रहे। अधिकारियों ने समितियों पर पहुंचकर खाद वितरण से संबंधित व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया और उपलब्ध व्यवस्थाओं का सत्यापन किया। इस दौरान अधिकारियों ने वितरण व्यवस्था की स्थिति का जायजा लेते हुए यह सुनिश्चित किया कि किसानों को खाद प्राप्त करने में किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो। निरीक्षण के पश्चात उपजिलाधिकारी ने बताया कि समितियों पर खाद वितरण का कार्य सामान्य एवं सुचारु रूप से चलता पाया गया। किसानों को खाद, बीज आदि किसी भी प्रकार से बिना किसी समस्या को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। अधिकारियों के इस निरीक्षण का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को निर्धारित व्यवस्था के तहत खाद उपलब्ध कराना तथा वितरण प्रक्रिया पर निगरानी बनाए रखना रहा। प्रशासनिक अधिकारियों ने समितियों की व्यवस्थाओं का सत्यापन कर वितरण की स्थिति का जायजा लिया।
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SSSumant SinghFollow10 Sept 2026, 11:55 am

12 लाख के मुआवजे से 30 लाख की जमीन का सौदा!विंध्यएक्सप्रेसवे भूमि अधिग्रहण पर किसानों का फूटा गुस्सा

Seorai, Uttar Pradesh:सेवराई (गाजीपुर)। विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे की जद में आ रही किसानों की खेती की जमीन के मुआवजे को लेकर सेवराई तहसील क्षेत्र में असंतोष गहराता जा रहा है। 600 बीघे से अधिक कृषि भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया के बीच गुरुवार को सेवराई , गहमर, मनियां, बारा, गोड़सरा , बकसड़ा, मिश्रवलिया , आदि विभिन्न प्रभावित गांवों के किसान एकजुट होकर तहसील मुख्यालय पहुंचे और उपजिलाधिकारी गजराज सिंह यादव को ज्ञापन सौंपकर बाजार भाव के अनुरूप मुआवजा तय करने की मांग की। किसानों ने आरोप लगाया कि यदि मौजूदा दरों पर जमीन का अधिग्रहण हुआ तो उन्हें अपनी जमीन का वास्तविक मूल्य नहीं मिल पाएगा और कई किसान जमीन जाने के बाद आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएंगे। किसानों का सबसे बड़ा सवाल सर्किल रेट और वास्तविक बाजार भाव के बीच भारी अंतर को लेकर है। किसानों के मुताबिक क्षेत्र में खेती की जमीन का बाजार मूल्य करीब 30 लाख रुपये प्रति बीघा तक है, जबकि अलग-अलग गांवों में प्रस्तावित मुआवजा करीब 12 से 17 लाख रुपये प्रति बीघा बताया जा रहा है। किसानों का कहना है कि जिस जमीन को बाजार में करीब 30 लाख रुपये प्रति बीघा का मूल्य मिल रहा है, उसके लिए इससे काफी कम मुआवजा तय करना उनके साथ न्याय नहीं होगा। एक जैसी जमीन, अलग-अलग मुआवजा क्यों? किसानों ने मुआवजा दरों में कथित असमानता पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि उचितपुर और अकबरपुर में करीब 17 लाख रुपये प्रति बीघा, जबकि दूसरे इलाकों में 12 से 13 लाख रुपये प्रति बीघा की दर बताई जा रही है। वहीं गहमर खास में करीब 17 लाख रुपये प्रति बीघा की दर निर्धारित किए जाने की बात कही गई है। किसानों ने सवाल उठाया कि यदि जमीन की प्रकृति और उपयोग समान है तो मुआवजे की दरों में इतना अंतर क्यों रखा जा रहा है। किसानों का कहना है कि खेती की जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उनके परिवारों की आजीविका का आधार है। जमीन चली जाने के बाद मिलने वाले मुआवजे से उसी क्षेत्र में दूसरी कृषि भूमि खरीदना भी मुश्किल होगा। ऐसे में कम मुआवजा मिलने पर भविष्य में परिवारों के सामने आर्थिक संकट पैदा हो सकता है। चार मांगों पर अड़े किसान ज्ञापन में किसानों ने प्रभावित जमीन का मौके पर जाकर पारदर्शी सर्वे कराने, समान प्रकृति की जमीन के लिए एक समान और वास्तविक दर निर्धारित करने, सरकार की चार गुना मुआवजा नीति के अनुरूप किसानों को उनका हक देने तथा किसान प्रतिनिधिमंडल को जिलाधिकारी से मुलाकात का समय देने की मांग की है। किसानों ने स्पष्ट कहा कि वे विकास परियोजना के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत किसानों के हितों की अनदेखी करके नहीं चुकाई जानी चाहिए। उनका कहना है कि जमीन का अधिग्रहण होने से पहले बाजार मूल्य और किसानों के हितों का निष्पक्ष आकलन जरूरी है। प्रशासन ने मांगी बाजार भाव की सूची मामले में एसडीएम गजराज सिंह यादव ने बताया कि किसानों से बाजार रेट से संबंधित सूची मांगी गई है। सूची का निरीक्षण करने के बाद वास्तविक स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। इसके बाद नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किसानों के तेवर और ज्ञापन के बाद अब निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
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SSSumant SinghFollow7 Sept 2026, 08:31 am

ट्रांसफार्मर जलने से 300 घरों की बिजली गुल, ग्रामीण परेशान

Bhadaura, Uttar Pradesh:सेवराई (गाजीपुर)। स्थानीय तहसील क्षेत्र के ग्राम गोड़सरा के पश्चिमी तरफ लगा 250 केवीए का विद्युत ट्रांसफार्मर शुक्रवार को अचानक जल गया। ट्रांसफार्मर जलने से गांव के करीब 300 घरों की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। लंबे समय से बिजली गुल रहने से ग्रामीणों को उमस भरी गर्मी और बरसात के मौसम में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार ट्रांसफार्मर जलने की सूचना तत्काल विद्युत विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों को दी गई, लेकिन समाचार लिखे जाने तक आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी थी। बिजली नहीं होने से घरों में लगे पंखे, कूलर, फ्रिज समेत अन्य विद्युत उपकरण बंद पड़े हैं। रात में अंधेरे के कारण ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के बाद उमस बढ़ने से बिना बिजली के घरों में रहना मुश्किल हो गया है। खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि ट्रांसफार्मर पर अधिक लोड होने के कारण क्षेत्र में आए दिन विद्युत संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती रहती हैं। ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के उच्चाधिकारियों से जले हुए 250 केवीए ट्रांसफार्मर को जल्द बदलकर विद्युत आपूर्ति बहाल कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि शीघ्र समाधान नहीं होने पर विभागीय अधिकारियों के कार्यालय का घेराव किया जाएगा।
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SSSumant SinghFollow6 Sept 2026, 11:17 am

कर्मनाशा का रौद्र रूप, तटवर्ती गांवों में बढ़ा बाढ़ का खतरा पावर हाउस में घुसा पानी, आपूर्ति ठप

Seorai, Uttar Pradesh:सेवराई (गाजीपुर)। गंगा नदी के बाद अब कर्मनाशा नदी भी उफान पर है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर के चलते कर्मनाशा नदी के तटवर्ती गांवों में बाढ़ का असर तेजी से दिखाई देने लगा है। नदी का पानी गांवों और खेतों की ओर बढ़ने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। खेतों के जलमग्न होने से किसानों की धान सहित विभिन्न सब्जियों की फसलें डूब गई हैं। वहीं, देवल स्थित विद्युत उपकेंद्र चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिर गया है। उपकेंद्र में पानी प्रवेश करने के बाद विद्युत आपूर्ति बंद कर दी गई, जिससे देवल, अमौरा, सुरहा सहित करीब आधा दर्जन गांवों में अंधेरा छा गया है। कर्मनाशा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से सुरहा, अमौरा, कैथी, देवल, लहना, बरेजी, सायर, राजमलबाध, पकवालिया, धनाढ़ी और खजूरी समेत आसपास के गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। नदी का पानी तेजी से खेतों की ओर फैल रहा है। कई स्थानों पर खेत पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। खेतों में खड़ी धान की फसल के साथ लतरा, बैंगन, मिर्च, लौकी, नेनुआ समेत अन्य सब्जियों की फसलें पानी में डूब गई हैं। किसानों का कहना है कि यदि जलस्तर में जल्द कमी नहीं आई और खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहा तो फसलों के पूरी तरह बर्बाद होने की आशंका है। विद्युत उपकेंद्र में घुसा बाढ़ का पानी बाढ़ का पानी देवल स्थित विद्युत उपकेंद्र के चारों ओर पहुंचने के बाद उपकेंद्र में भी पानी प्रवेश कर गया। सुरक्षा के मद्देनजर विद्युत आपूर्ति बंद कर दी गई है। बिजली आपूर्ति ठप होने से देवल, अमौरा, सुरहा सहित आसपास के गांवों में अंधेरा छा गया है। लगातार बारिश और बाढ़ के बीच बिजली कटौती से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है। पशुओं के चारे का संकट गहराया बाढ़ के पानी से खेतों में खड़ी फसलों के साथ पशुओं के चारे पर भी संकट खड़ा हो गया है। खेतों और आसपास के क्षेत्रों में उगा तथा रखा गया हरा चारा पानी में डूब गया है। इससे पशुपालकों को पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करने में परेशानी होने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो पशुओं के लिए चारे और ग्रामीणों के लिए जरूरी खाद्य सामग्री की समस्या भी गंभीर हो सकती है। धार्मिक व सार्वजनिक स्थल भी बाढ़ की चपेट में कर्मनाशा के बढ़ते पानी का असर सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों पर भी दिखाई देने लगा है। देवल पावर उपकेंद्र, अंत्येष्टि स्थल, बाबा कीनाराम घाट तथा घटवारी माई मंदिर बाढ़ के पानी की चपेट में आ गए हैं। इन स्थानों पर पानी भरने से ग्रामीणों को आवागमन और जरूरी कार्यों के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। अंत्येष्टि स्थल और धार्मिक स्थलों तक पानी पहुंचने से ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। जलस्तर बढ़ा तो गांवों में बढ़ सकती है मुश्किल ग्रामीणों का कहना है कि कर्मनाशा नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी चिंता का विषय बनी हुई है। अभी पानी खेतों और निचले इलाकों में फैल रहा है, लेकिन यदि जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो गांवों की आबादी तक पानी पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने, प्रभावित इलाकों में आवश्यक इंतजाम करने तथा बिजली आपूर्ति बहाल कराने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
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