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Umesh GuptaUmesh GuptaFollow28 Apr 2025, 12:40 pm

Maharajganj - नगर पंचायत आनंद नगर द्वारा नव निर्मित व पुराने दुकानों की हुई निलामी

Anand Nagar, Uttar Pradesh:

महराजगंज, नगर पंचायत आनंद नगर द्वारा 15 नवनिर्मित व पांच पुराने दुकानों की नीलामी उपजिलाधिकारी मुकेश कुमार सिंह की देख रेख में नगर पंचापत विवाह घर के हाल में संपन्न हुआ नीलामी में अधिकतम बोली 20 लाख व न्यूनतम बोली 14 लाख बोली गई नीलामी की प्रक्रिया सोमवार को 11:00 बजे प्रारंभ हुई जिसमें दुकान नंबर एक की बोली 10 लाख से शुरू होकर 20 लाख पर नरेंद्र वर्मा के हक में दिया गया तथा न्यूनतम बोली आदित्य जायसवाल को 14 लाख में आवंटित की गई अधिशासी अधिकारी अनुज कुमार भारती ने बताया कि दुकानों की रजिस्ट्रेशन नीलामी से नगर पंचायत को 3 करोड़ 26 लाख 25 हजार का आय हुआ है।

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छिंदवाड़ा में फायर ब्रिगेड की हालत गंभीर: 3 वाहन, 3-4 लाख आबादी के बीच

Chhindwara, Madhya Pradesh:फायर स्टेशनों की स्थिति गंभीर ,जर्जर भवनों के 2 कमरों में चल रहा फायर स्टेशन ,3 से 4 लाख की आबादी में सिर्फ 3 फायर ब्रिगेड छिंदवाड़ा नगर निगम की आबादी लगभग 3 से 4 लाख है लेकिन इतनी बड़ी आबादी पर सिर्फ 3 अग्नि शामन वाहन मौजूद है जब जी मीडिया की टीम ने ग्राउंड जीरो पर पड़ताल की तो स्थिति कुछ और ही नजर आई फायर ब्रिगेड की हालत जर्जर नजर आई . वही अगर भवन की बात करे तो इतनी बड़ी आबादी पर एक जर्जर भवन में फायर स्टेशन का कार्यालय संचालित होता नजर आया. कर्मचारी भी बिना यूनिफॉर्म के नजर आए .भवन के अंदर भी शहर का कोई नक्शा नजर नहीं आया . वही फायर ब्रिगेड ( अग्नि शामन वाहन) की बात करे तो मौके पर 3 वाहन दिखाई दिए उसमें भी 2 की हालत काफी खराब नजर आई . सहायक अग्निशमन अधिकारी अभिषेक दुबे ने जानकारी दी कि कार्यालय में कुल 34 कर्मचारी है जो 3 शिफ्ट में काम करते है और 1 शिफ्ट में 9 कर्मचारी होते है और कार्यालय में सिर्फ 3 अग्नि शामन वाहन है. बाइट - सहायक अग्निशमन अधिकारी अभिषेक दुबे
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CM arrives in Samastipur for Vishnu Yagya at 24 Dham Chakoti Math, sixth day observed

Samastipur, Bihar:समस्तीपुर पहुंचे बिहार के मुख्यमंत्री, खानपुर प्रखंड स्थित 24 धाम चकोटी मठ में विष्णु यज्ञ के छठे दिन धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मठ परिसर में भगवान विष्णु के 24 अवतारों की प्रतिमाओं के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में सहभागिता की और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना कराई। मुख्यमंत्री करीब 15 मिनट तक मठ परिसर में रहे। उनके साथ बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, समस्तीपुर की सांसद शांभवी चौधरी, स्थानीय विधायक मंजरिक मृणाल समेत जदयू और भाजपा के कई नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद थे। विष्णु यज्ञ 18 जून से शुरू होकर 29 जून तक चलेगा। श्रद्धालुओं के अनुसार, चकोटी मठ में भगवान विष्णु के 24 अवतारों की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। दावा किया जा रहा है कि यह देश का दूसरा ऐसा मंदिर है; इससे पहले मध्य प्रदेश के इंदौर में भगवान विष्णु के 24 अवतारों को समर्पित मंदिर मौजूद है। बिहार में यह अपनी तरह का पहला मंदिर माना जा रहा है। मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से खानपुर पहुंचे, जहां स्थानीय सांसद और जिलाधिकारी ने उनका स्वागत किया, फिर मठ तक सड़क मार्ग से गए और धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए। महज 10 मिनट के भीतर ही कार्यक्रम स्थल से पटना के लिए रवाना हो गए।
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यशपाल आर्य बेटे संजीव आर्य 2027 चुनाव नहीं लड़ेंगे, कांग्रेस में टिकट बंटवारे पर असर

Haldwani, Uttarakhand:कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष Yशपाल आर्य के बेटे संजीव आर्य ने 2027 विधानसभा चुनाव लड़ने से साफ इनकार कर दिया है। संजीव आर्य नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के बेटे हैँ, के इस फैसले को कांग्रेस के भीतर एक बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इसका असर उन राजनीतिक परिवारों पर भी पड़ सकता है जो अपने परिवार के एक से अधिक सदस्यों के लिए टिकट की उम्मीद लगाए बैठे हैं। नैनीताल विधानसभा सीट को लेकर चल रही तमाम राजनीतिक अटकलों के बीच संजीव आर्य ने बड़ा फैसला लिया है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने स्पष्ट किया है कि संजीव आर्य केवल नैनीताल सीट ही नहीं, बल्कि वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव किसी भी सीट से नहीं लड़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह संजीव आर्य का व्यक्तिगत फैसला है और पार्टी इसका सम्मान करती है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के मुताबिक संजीव आर्य फिलहाल संगठनात्मक कार्यों पर ध्यान देना चाहते हैं। पार्टी हाईकमान उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगा, उसे वे पूरी निष्ठा के साथ निभाएंगे। ऐसे में उनका फोकस चुनावी राजनीति से ज्यादा संगठन को मजबूत करने पर रहेगा। संजीव आर्य के इस फैसले का असर कांग्रेस के भीतर टिकट वितरण की राजनीति पर भी पड़ सकता है। खासकर उन नेताओं और परिवारों पर, जो अपने बेटे, बहू या अन्य परिजनों को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं。
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किशनगंज में जीविका दीदियाँ मासिक धर्म स्वच्छता के लिए ग्रामीण महिलाओं को जागरूक करेंगी

Kishanganj, Bihar:किशनगंज के जीविका दीदियों और ग्रामीण महिलाओं को स्वास्थ्य बनाने की दिशा में जीविका एक नई पहल कर रही है। मासिक धर्म स्वच्छता कार्यक्रम के तहत जीविका की दर्जनों दीदियों को किशनगंज के खगड़ा स्थित सम्राट अशोक भवन में चिकित्सकों के द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा है और एक ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (TOT) तैयार किया जा रहा है, जो ट्रेनर्स ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर जीविका दीदियों को मासिक धर्म स्वच्छता, साफ-सफाई और इससे जुड़ी जरूरी जानकारियां देगी। वही जीविका की डीपीएम अनुराधा चंद्रा ने बताया कि जिले में कुल तीन लाख बीस हजार महिलाएं जीविका से जुड़ी हुई हैं।उन्होंने कहा कि जीविका के कैडर्स हेल्थ एंड न्यूट्रिशन पर भी काम करती है।उन्होंने बताया कि जीविका दीदी मासिक धर्म स्वच्छता से संबंधित जानकारी के अभाव में खासकर ग्रामीण क्षेत्र की दीदी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाती हैं। वैसे महिलाओं को जागरूक करने के लिए मासिक धर्म स्वच्छता की प्रशिक्षण ली दीदियां ग्रामीण क्षेत्र में जाकर अन्य दीदियों को जानकारी देगी, ताकि वे स्वयं सुरक्षित रहें और अन्य महिलाओं को भी जागरूक कर सकें।
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सहकारिता विभाग देगा जनऔषधि केंद्र से हर जिले में 50-80% सस्ती दवाएं

Jaipur, Rajasthan:चिकित्सा के बाद अब सहकारिता में IAS समित शर्मा की जन औषधि क्रांति, हर जिले में खुलेगे जन औषधि केंद्र, मिलेगी 50 से 80% तक सस्ती दवाएं जयपुर-चिकित्सा विभाग के बाद अब सहकारिता विभाग जन औषधि केंद्र खोलेगा. हर जिले में एक औषधी केंद्र खोले जाएंगे. इन औषधि केंद्रों पर मार्केट रेट से बहुत सस्ते दामों पर दवा मिलेगी. सहकारी उपभोक्ता भंडार के जरिए ये औषधी केंद्र खोलने की तैयारी है. जेनरिक दवाओं के जनक फिर चर्चा में- राजस्थान में जेनेरिक दवाओं और विशेष रूप से 'निःशुल्क दवा योजना' के जनक और सूत्रधार आईएएस डॉ. समित शर्मा माने जाते हैं. उन्होंने ही वर्ष 2011 में राज्य के सरकारी अस्पतालों में आम जनता को मुफ्त और सस्ती जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराने की इस क्रांतिकारी पहल को लागू किया था. लेकिन अब इस पहल को समित शर्मा और आगे बढा रहे है. अब चिकित्सा विभाग के बाद सहकारिता विभाग भी जन औषधि केंद्र खोलेगा. इस कदम से जेनेरिक दवाओं का ग्राफ और बढ़ेगा. हर जिले में एक जन औषधि केंद्र खोले जाएंगे. 41 में से अब तक 29 जिलों में जन औषधि केंद्र के लाइसेंस मिल चुके है. जिल े के सरकारी अस्पताल या जिला उपभोक्ता भंडार में ये केंद्र खुलेंगे. जयपुर में कॉनफैड एसएमएस अस्पताल के चरक भवन में जन औषधि केंद्र खोलेगा. जेनरिक और ब्रांडेड दवाओं में अंतर- जेनेरिक दवाएं वे दवाएं होती हैं जो किसी ब्रांडेड दवा के फॉर्मूले का पेटेंट समाप्त होने के बाद बनाई जाती हैं. ये ब्रांडेड दवाओं के समान ही सुरक्षित, असरदार और गुणवत्ता वाली होती हैं, लेकिन उनकी तुलना में 50-80% तक सस्ती होती है. ब्रांडेड दवाएं एक विशेष ट्रेडमार्क नाम से बेची जाती हैं. वहीं, जेनरिक दवाएं अपने असली फॉर्मूले या सॉल्ट के नाम से बेची जाती हैं. ब्रांडेड कंपनियों को दवा की खोज और मार्केटिंग पर बहुत खर्च करना पड़ता है, इसलिए वे महंगी होती हैं. जेनरिक दवाएं सीधे सॉल्ट आधारित होती हैं, इसलिए ये बहुत सस्ती होती हैं. कंपनी और पैकिंग अलग होने के कारण इनका रंग या आकार ब्रांडेड दवा से अलग हो सकता है, लेकिन शरीर पर असर बिल्कुल समान होता है दवाओं की संख्या भी बढेगी- फिलहाल जयपुर के SMS अस्पताल और झुंझुनू में जन औषधि केंद्र खुले हुए है. दूसरें जिलों में औषधि केंद्र खोलने के लिए सहकारिता सचिव डॉ.समित शर्मा ने सभी जिला कलक्टर्स को जगह के आवंटन के लिए पत्र भी लिखा था. अब जल्द ही जयपुर के चरक भवन में नए जन औषधि केंद्र का उद्घाटन किया जाएगा. वहीं कॉनफैड के मेडिकल स्टोर्स पर दवाओं की संख्या 18 से बढकर 250 तक पहुंच गई है. यानी अब अधिकतर दवा सहकारिता के औषधि केंद्रों पर उपलब्ध होगी. इसके साथ साथ सर्जिकल आईटम भी सस्ती दर पर मिलेंगे.
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राजस्थान रोडवेज में पहली बार इलेक्ट्रिक बसें, 240 किमी तक सफर संभव

Jaipur, Rajasthan:जयपुर। राजस्थान रोडवेज में ऐसा पहली बार होने जा रहा है, जब डीजल बसों के अलावा इलेक्ट्रिक बसें भी संचालित होंगी। रोडवेज प्रशासन ने इसके लिए 300 इलेक्ट्रिक बसें लेने की तैयारी की है। दरअसल अभी तक रोडवेज प्रशासन 2 तरह से बसें संचालित करता है। एक तरफ जहां खुद की करीब 2600 बसें हैं, जो कि रोडवेज प्रशासन ने खरीदी हुई हैं। वहीं दूसरी तरफ 800 से अधिक बसें अनुबंध पर लगाई हुई हैं। लेकिन ये सभी बसें डीज़ल से संचालित हैं। इलेक्ट्रिक व्हीकल की श्रेणी में रोडवेज के पास एक भी बस नहीं है। लेकिन अब रोडवेज प्रशासन पहली बार इलेक्ट्रिक श्रेणी की बसें अपने बेडे में शामिल करने जा रहा है। ईवी बसें 2 कम्पनियों से अनुबंध पर ली जा रही हैं। इसके लिए रोडवेज प्रशासन ने दोनों कम्पनियों को कार्य आदेश दे दिये हैं। एक कम्पनी से 54 बसें, जबकि दूसरी कम्पनी से 246 बसें ली जा रही हैं। दोनों कम्पनियों ने दिसंबर 2026 तक बसें मुहैया कराने की बात कही है। हालांकि रोडवेज प्रशासन बसें आने से पहले चार्जिंग प्वाइंट विकसित करने पर कार्य कर रहा है। दरअसल चार्जिंग प्वाइंट रोडवेज के डिपो में ही विकसित किए जाएंगे। पहली बार राज्य सरकार के किसी निगम में इतनी कम दरों पर ईवी बसें मिल रही हैं। इसके लिए रोडवेज एमडी पुरुषोत्तम शर्मा के प्रयासों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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वैध दस्तावेज़ के बावजूद भूखण्ड स्वामियों को महावीर नगर पाल में कब्जा नहीं मिल रहा

Jodhpur, Rajasthan:अगर आपके पास जमीन के पूरे वैध दस्तावेज हों, रजिस्ट्री हो, पट्टे हों और राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज हो, फिर भी आप अपनी ही जमीन तक नहीं पहुंच सकें, तो इसे क्या कहेंगे? कुछ ऐसी ही पीड़ा लेकर जोधपुर के महावीर नगर पाल क्षेत्र के सैकड़ों भूखण्ड स्वामी अब प्रशासन के दरवाजे पर पहुंचे हैं। महावीर नगर पाल विकास समिति से जुड़े लोगों ने जिला कलेक्टर, जेडीए आयुक्त और पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर अपनी जमीनों पर कब्जा दिलाने और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। भूखण्ड स्वामियों का दावा है कि उनके पास सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं और वर्ष 1985 में भूमि उपयोग परिवर्तन की स्वीकृति भी मिल चुकी है। इसके बावजूद वे अपनी ही संपत्तियों तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पीड़ितों का आरोप है कि कुछ लोगों ने कॉलोनी क्षेत्र में अतिक्रमण कर रखा है और वास्तविक मालिकों को भूखण्डों तक जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना है कि पहले भी चारदीवारी और अन्य निर्माण कार्यों को नुकसान पहुंचाया गया था, जिसकी शिकायत पुलिस में दर्ज हुई और न्यायालय में आरोप-पत्र भी पेश किया गया। इसके बाद भी हालात नहीं बदले। समidi का कहना है कि जब उन्होंने सीमांकन और विकास कार्य शुरू कराने की कोशिश की तो कथित तौर पर विरोध का सामना करना पड़ा। इतना ही नहीं, हाल ही में जेसीबी और ट्रैक्टर की मदद से पुराने सीमांकन चिन्हों को भी नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। इससे भूखण्ड स्वामियों में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि दस्तावेज वैध हैं और किसी न्यायालय का स्थगन आदेश भी नहीं है, तो फिर भूखण्ड स्वामी अपनी जमीन पर कब्जा क्यों नहीं ले पा रहे हैं? यही सवाल अब प्रशासन के सामने भी खड़ा हो गया है। ज्ञापन में भूखण्ड स्वामियों ने मांग की है कि उन्हें उनकी जमीनों तक निर्भय पहुंच दिलाई जाए, पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए, अतिक्रमण हटाया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही संबंधित विभागों की भूमिका की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की गई है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। फिलहाल महावीर नगर पाल के सैकड़ों भूखण्ड स्वामी एक ही सवाल पूछ रहे हैं—"जब कागज हमारे हैं, तो जमीन पर हमारा हक कब मिलेगा?"
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राजस्थान रोडवेज 300 ईवी बसें लेकर पहली बार इलेक्ट्रिक सेवा शुरू करेगी

Jaipur, Rajasthan:जयपुर के राजस्थान रोडवेज के बेड़े में पहली बार इलेक्ट्रिक बसें शामिल होने जा रही हैं। रोडवेज प्रशासन 300 ईवी बसें लेने की तैयारी कर रहा है और इनमें से 54 बसें एक कंपनी से और 246 बसें दूसरी कंपनी से अनुबंध पर ली जाएंगी, जो दिसंबर 2026 तक पहुंचेंगी। बसों के लिए दर 34.41 रुपए प्रति किमी तय कही गई है। 53-सीटर एसी इलेक्ट्रिक बसें 13.5 मीटर लंबी होंगी। चार्जिंग प्वाइंट अभी नहीं बने हैं, पर 16 लोकेशनों पर चार्जिंग प्वाइंट बनाने की योजना है; निजी कंपनियां इन्फ्रास्ट्रक्चर लगाएंगी और रोडवेज भुगतान करेगी। बिजली का दर 12 रुपए प्रति यूनिट होगा। एक बस एक चार्जिंग में लगभग 240 किमी यात्रा करेगी, पर अधिकतम 210 किमी के रूट पर चलाने की योजना है ताकि ब्रेकडाउन का जोखिम कम रहे। इसके साथ ही 300 ईवी बसों के साथ पहली बार सिर्फ स्लीपर बर्थ वाली 30 बसों की खरीदने के कार्य आदेश जारी कर दिए गए थे; ये अगस्त 2026 तक मिल सकती हैं, और निजी कंपनियों की स्लीपर बसों को प्रतिस्पर्धा देंगी—हर बस में नीचे और ऊपर 18-18 स्लीपर बर्थ होंगे और बैठने की सीटें नहीं होंगी। राजस्थान के 16 शहरों के बीच ईवी बसें चलेंगी, जिनमें अलवर, भरतपुर, खैरथल तिजारा (एनसीआर), अजमेर, भीलवाड़ा, केकड़ी, कोटा, जोधपुर, जयपुर, ब्यावर, झुंझुनूं, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, सिरोही, डूंगरपुर, टोंक और सवाईमाधोपुर शामिल हैं; दिल्ली रूट पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित न होने के कारण फिलहाल EV नहीं चलेंगी। कुल मिलाकर EV बसों के आने से रोडवेज के बेड़े में सुविधाजनक एसी बसों की शुरुआत होगी और 30 स्लीपर बर्थ के साथ विविधता आएगी।
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मुखर्जी नगर की कोचिंग क्लासेस: सुरक्षा नहीं, हादसे के बाद प्रशासन पर सवाल

Delhi, Delhi:लखनऊ में हुए लाइब्रेरी में आग लगने से 13 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हुई. उसके बाद भी प्रशासन अभी भी नहीं जागा है. हम इस समय दिल्ली के मुखर्जी नगर में मौजूद हैं जहाँ आज भी कोई भी हादसा हो सकता है. अगर मुखर्जी नगर की बात करें तो बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों में लाइब्रेरी और कोचिंग क्लासेस चल रही हैं जिनमें कई बच्चे मौजूद रहते हैं. न तो किसी के पास फायर की noc है और न ही exit के दो गेट जिससे अगर हादसा हो तो दूसरे गेट से बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके. यहाँ पर तमाम कोचिंग क्लासेस चलती हैं; दूर-दूर से बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं. जब कोई हादसा होता है तो सरकार जाती है और फिर थोड़ा दिन बाद सुस्त होकर बैठ जाती है, जिसका हर्जाना यहाँ आने वाले छात्रों को भुगतना पड़ता है. जब जी मीडिया की टीम मुखर्जी नगर पहुंचे तो पढ़ने वाले विद्यार्थियों ने अपना दर्द कैमरे के सामने बयान किया. देखिए हमारे संवाददाता नीरज शर्मा की यह खास रिपोर्ट
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चानौत के टी-कनेक्शन विवाद पर ग्रामीणों का बड़ा आंदोलन, पानी के लिए तैयारी

Hansi, Haryana:हांसी के चानौत गांव में भाखड़ा जल आपूर्ति से जुड़े टी-कनेक्शन विवाद को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन जारी है। ग्रामीणों ने पूरे गांव में जंजीरों में बंधकर मार्च निकाला और सरकार के प्रति विरोध दर्ज कराया। गांव पेयजल समस्या से जूझ रहा है और वे चाहते हैं कि शहरी पाइपलाइन की टी से ही पानी मिले, अन्यथा आंदोलन चलता रहेगा। सरकार ने टी लगवाई थी, जिसका विरोध हुआ और विधायक विनोद भयाना पर टी हटवाने के लिए लाठीचार्ज और पुलिसReports के आरोप लगे। चानौत के विवादित स्थल को छोड़कर जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू किया है, जो हांसी से बरवाला के राजली हेड तक जाएगी। अब विभाग ने चानौत के हिस्से को छोड़ते हुए राजली हेड की दिशा में पाइपलाइन बढ़ाने का काम शुरू किया है, ताकि पानी की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। इस बीच ग्राम सभाओं के बीच राष्ट्रपति के नाम इच्छामृत्यु की मांग तक की चर्चा हुई और आंदोलन का समर्थन बढ़ रहा है। धरना स्थल पर सोमेश पंडित ने बताया कि आमरण अनशन तोड़वाने के प्रयास के बावजूद टी-कनेक्शन हटवाने की रणनीति जारी है और विधायक विनोद भयाना इसकी भूमिका के आरोप लगाते रहे। आगे भी पानी के स्थायी समाधान तक आंदोलन जारी रहने की शर्त दोहराई गई।
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