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Lucknow
K N VermaK N VermaFollow24 Nov 2024, 10:59 am

जिलाधिकारी के सख्त निर्देश: गौ-आश्रय स्थलों पर ठंड से बचाव की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करें

Bajeharo, Uttar Pradesh:

गोंडा-कड़ाके की ठंड के मद्देनज़र गोंडा जिले की जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने गौ-आश्रय स्थलों और कान्हा गौशालाओं में ठंड से बचाव के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन निर्देशों का पालन न करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया है कि सभी गौ-आश्रय स्थलों पर ठंड से बचाव के लिए अलाव जलाने की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जाए। इसके साथ ही पशुओं के लिए भूसे, तिरपाल, बोरी आदि से बिछावन तैयार करने और उन्हें ठंड से बचाने की व्यवस्था करे

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ईंधन बचाओ अभियान से प्रेरित राजस्थान कुश्ती संघ ने विशाल साइक्लोथॉन का आयोजन किया

Jaipur, Rajasthan:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के “ईंधन (Fuel) बचाओ अभियान” से प्रेरणा लेकर राजस्थान राज्य कुश्ती संघ के तत्वावधान में एक विशाल साइक्लोथॉन का आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य आमजन में ईंधन संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा एवं स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता फैलाना है। राजस्थान राज्य कुश्ती संघ के अध्यक्ष एवं माननीय लोकसभा अध्यक्ष के विशेषाधिकारी आदरणीय श्री राजीव दत्ता जी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों, खिलाड़ियों, युवाओं एवं गणमान्य नागरिकों की सहभागिता रहेगी। कार्यक्रम के माध्यम से “स्वस्थ भारत – स्वच्छ भारत” का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
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दिल्ली में प्रदूषण घटाने के दावे: हर कोने में सुधार, लुटियन जोन बाहर भी एक्सपेरिमेंट

New Delhi, Delhi:दिल्ली में धूल की समस्या पर और की सिर्फ कुछ इलाकों में ही सफाई हो रही है बाकी स्लम वाले एरिया में नहीं, इस पर हरीश खुराना बोले- कुछ वर्ग को कुछ लोगों को दिल्ली का विकास कार्य हजम नहीं हो रहा है वह एक माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं की दिल्ली सिर्फ लुटियन जोन की राजधानी बनकर रह गई है लेकिन सच्चाई से कोसों दूर है सच्चाई यह है कि दिल्ली के हर कोने में काम हो रहा है दिल्ली के हर कोने पर प्रदूषण को दूर करने के लिए दिल्ली के अंदर सफाई व्यवस्था अच्छी हो दिल्ली के अंदर सके अच्छी हो सीवर अच्छा हो पानी अच्छा हो इस पर काम चल रहा है बहुत लंबा टाइम नहीं हुआ अभी 4 दिन पहले ही मेरी ही विधानसभा में माननीय मुख्यमंत्री द्वारा में ज्यादा दूर नहीं जा रहा जो लुटियन जोन से बाहर आती है वहां पर एक्सपेरिमेंट के तौर पर नए इक्विपमेंट लगाए गए हैं ताकि वह पीएम 2.5 को खींचे और साफ हवा दे सके दो स्टार्टअप को मौका दिया गया है और काम शुरू हो गया है बाकी भी एरियाज में इस तरीके से एक्सपेरमेंट किए जा रहे हैं यह कहना कि सिर्फ लुटियन जोन में हो रहा है यह गलत है इसीलिए एक और कदम भी उठाया गया है कि अब जो सड़क बनेगी वह पूरी वॉल टू वॉल बनेगी यानी कि जो साइड पर मिट्टी रह जाती है उसे प्रदूषण होता है उसको भी दूर किया जाएगा ऐसे बहुत सारे कम है जो लिए जा रहे हैं आने वाले कुछ दिनों में जब प्रदूषण की समस्या बेहद हो जाती है इस बार हमें बदलाव देखने को मिलेगा अभी कुछ दिन पहले नहीं मशीन आई हैं smog गन भी आई हैं पिछले कुछ साल सिर्फ पेपर में काम हुआ है पर सच्चाई में कुछ नहीं भ्रष्टाचार के नाम पर खरीदी गई पर कुछ हुआ नहीं तमाम ऐसी चीज जो पिछली सरकारों के विभिन्न हम कर रहे हैं उसके सरकार ने सिर्फ विज्ञापन जीबी सरकार थे हम कमजीवी सरकार हैं हम एक्सपेरिमेंट से नहीं डरते हैं प्रदूषण एक दिन की समस्या नहीं है यह निरंतर काम है और लगातार होता रहेगा पिछले साल हमने एक्सपेरिमेंट किया क्लाउड सीडिंग करिए रिजल्ट क्या निकला वह बाद की बात है लेकिन हमने एक्सपेरिमेंट किया यह सब काम आने वाले टाइम में असर दिखाएंगे और आप देखेंगे दिल्ली में स्वच्छ हवा मिलेगी
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मुजफ्फरपुर की शाही लीची उत्पादन घटने से बाजार महँगा, मांग पूरी नहीं

Muzaffarpur, Uttar Pradesh:मुजफ्फरपुर की विश्व प्रसिद्ध शाही लीची का उत्पादन कम होने से लिची का बजार हुआ मंहगा, मांग के अनुरूप नहीं मिल रही लिची. प्रति वर्ष मुजफ्फरपुर में प्रतिवर्ष 1 लाख 25 हजार टन निकलती थीं लीची, लेकिन इस वर्ष लीची का उत्पादन क्षमता घट के 30 हजार टन ही हुआ. मुजफ्फरपुर की शाही लीची के उत्पादन की बात कर ले तो इसका बागान और उत्पादन जिले के कई क्षेत्रो में होता है. जिसमे मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर, मुसहरी, बोचहा और कांटी जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर लीची के बागान हैं और पूरे जिले में करीब 12,000 हेक्टेयर भूमि पर लीची की खेती होती है. जो पूरे बिहार के उत्पादन के हिसाब से मुजफ्फरपुर में 40 परसेंट लीची का उत्पादन होता है. अकेले मुजफ्फरपुर जिला से देश दुनिया मे हर वर्ष 1 लाख 25 हजार टन शाही लीची भेजी जाती थी, इस वर्ष मौसम अनुकूल नहीं होने के कारण लीची का उत्पादन बहुत कम मात्रा में हुआ है जिससे इस बार उम्मीद जताई जा रही है कि 30 हजार टन के आसपास लीची का उत्पादन हुआ है. इतना कम मात्रा में लीची का उत्पादन होने से एक तरफ किसानों को काफी क्षति उठानी पड़ रही है तो दूसरे तरफ लोगों को महंगे लीची की खरीदारी करना पड़ रहा है. खास बात यह कि लीची का एक सीमित समय होता है. शाही लीची का मुख्य सीजन बहुत छोटा होता है. यह आमतौर पर मई के दूसरे-तीसरे हफ्ते से शुरू होकर जून के पहले हफ्ते तक (करीब 15 दिनों तक) ही बाजार में रहती है और इसी सीमित समय के अंदर देश-विदेश में पहुंचती है. मुजफ्फरपुर की शाही लीची दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों के साथ-साथ लंदन और दुबई जैसे विदेशी बाजारों तक भेजी जाती है. राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक विकास कुमार दास ने बताया कि दिसंबर महीने से ही लीची की पौधा लीची के फलन को लेकर तैयार हो जाता है, लेकिन आमतौर पर जो लीची के पौधे के लिए तापमान होना चाहिए वह तापमान नहीं था और जब पौधे में मंजर आया उस वक्त बारिश हो गई और फिर धूप के कारण हाई तापमान हो गया जिससे पेड़ में लगे मंजर झरने लगे उसके बाद जब पेड़ में दाना आया तब बिन मौसम बारिश हो गई जिससे लीची के फलों को नुकसान पहुंचा और फिर वारिस के बाद हाई तापमान होने के कारण लीची को काफी नुकसान पहुंचा है जिससे मुजफ्फरपुर में लीची उत्पादन कम हुआ है. WT महंगे लीची को लेकर हमारे संवाददाता मणितोष कुमार ने लीची किसानों से लीची बगान में की बातचीत. बाइट विकास कुमार दास, निदेशक, राष्ट्रीय लिची अनुसंधान केन्द्र, मुजफ्फरपुर. *इनपुट - मणितोष कुमार*
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SC ने SIR को वैध माना, झारखंड में राजनीतिक बयानबाजी तेज

Ranchi, Jharkhand:एसआईआर को सुप्रीम कोर्ट ने वैध माना, झारखंड में राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई। कोर्ट के फैसले के बाद सूबे की सत्ताधारी दल ने कहा कि एसआईआर सही है, पर सिस्टम और प्रक्रिया सही नहीं है। कांग्रेस कोटे के मंत्री इरफान अंसारी ने कहा, एसआईआर गलत नहीं है पर जो सिस्टम है, जिस प्रक्रिया को यूज किया गया है, वह गलत है। बंगाल-बिहार में जो हुआ वह गलत है; झारखंड में जो करने जा रहे हैं, वह भी गलत है। विपक्ष इसे रोकने की मांग कर रहा है और जनता से भी सहयोग की अपील है। मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा, एसआईआर गलत नहीं, प्रक्रिया और मंशा पर सवाल उठते हैं। यह सामान्य पुनरीक्षण है, लेकिन इसे दुरुढ़ बनाकर किसी विशेष दल को लाभ पहुंचाने की कोशिश है, जिसका विरोध किया जायेगा। वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा, एक समीक्षा होनी चाहिए, चाहे नाम एसआईआर हो या पूर्व गाइडलाइन हो—यह उनका अधिकार है; अगर किसी का नाम हटते हैं, तो कारण स्पष्ट करके रेलवे निर्वाचन आयोग और एसआईआर के बीच पारदर्शिता के साथ स्थिति समझानी चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीश आए, यह सामान्य प्रक्रिया है, पर कारण बताने होंगे। विधानसभा अध्यक्ष रबिन्द्र नाथ महतो ने कहा, हमारे क्षेत्र में तैयारी की है ताकि मतदाता की मौलिक अधिकार संरक्षित रहें; किसी भी व्यक्ति का नाम नहीं काटा जाना चाहिए और सभी वंचित न हों, इसके लिए संगठन स्तर पर अलर्ट और बैठकों का संचालन किया जाएगा।
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दिल्ली की भीषण गर्मी में राजनगर में पानी की किल्लत पर आप का मटका फोड़ प्रदर्शन

New Delhi, Delhi:दिल्ली में भीषण गर्मी बढ़ती के बीच दिल्ली में पानी की भारी किल्लत हुई लोगो का फूटा गुस्सा, बिजवासन विधानसभा में आप पार्टी का मटका फोड़ प्रदर्शन राजनगर में पानी गन्दा आ रहा है कई इलाकों में पानी एक बूंद नहीं आ रही है दिन रात पानी मोटर चलने पर भी पानी नहीं आ रहा है जनता परेशान हुई दिल्ली सरकार के खिलाफ भारी गुस्सा लोकेशन...राज नगर राजनगर वार्ड में आप पार्टी की निगम पार्षद पूनम भारद्वाज ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव के दौरान स्थानीय विधायक ने हर घर पानी पहुंचाने का वादा किया था, लेकिन आज भी इलाके के लोग पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं बदबूदार पानी गन्दा पानी आ रहा है कई कालोनियों में एक बूंद पानी नहीं आ रही है बिजवासन की जनता परेशान है जनता पानी खरीदने को मजबूर हो गये है
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राजस्थान ने दिवंगत किसान क्लेम के निस्तारण के लिए नॉमिनी अनिवार्य कर दिया

Jaipur, Rajasthan:काशीराम चौधरी दिवंगत बीमित किसानों के परिजनों को मिल सकेगा बीमा क्लेम, अब नहीं चाहिए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र - राजस्थान कृषि विभाग ने किसानों के हित में उठाया बड़ा कदम, दिवंगत किसानों के लंबित क्लेम मिल सकेंगे - प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़ी राहत, CEO को कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने लिखा पत्र जयपुर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत दिवंगत बीमित किसानों के लंबित फसल बीमा दावों के निस्तारण को लेकर राजस्थान सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। कृषि आयुक्तालय ने परिपत्र जारी कर बीमा कंपनियों और कृषि विभाग के अधिकारियों को लंबित मामलों के निस्तारण के निर्देश दिए हैं। इसमें कहा है कि दिवंगत किसानों के लंबित क्लेम मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाए, ताकि किसान परिवारों को राहत मिल सके। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने परिपत्र में कहा है कि राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे मामले लंबित हैं, जिनमें बीमित किसान की मृत्यु हो चुकी है और उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के अभाव में बीमा राशि का भुगतान अटका हुआ है। विभाग के अनुसार उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया लंबी, खर्चीली और समय लेने वाली होती है। कई मामलों में फसल बीमा क्लेम की राशि इतनी कम होती है कि किसान परिवार उत्तराधिकार प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में नहीं पड़ते। इससे वर्षों तक दावे लंबित रह जाते हैं। इसलिए कृषि विभाग ने प्रक्रिया को सरल बनाते हुए नई व्यवस्था लागू की है। विभाग ने सभी बीमा कंपनियों को निर्देशित किया है कि यदि राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर किसान द्वारा नामांकन यानी नॉमिनी दर्ज किया गया है तो उसी के आधार पर क्लेम राशि का भुगतान तुरंत किया जाए। पारिवारिक सहमति के आधार पर होगा भुगतान - यदि नॉमिनी दर्ज नहीं है, तब भी क्लेम भुगतान रोका नहीं जाएगा - ऐसे मामलों में संबंधित तहसीलदार या पटवारी द्वारा जारी वारिसनामा - न्यायालय द्वारा जारी वैध उत्तराधिकार प्रमाण पत्र अथवा - पारिवारिक सहमति के आधार पर बीमा राशि का भुगतान किया जा सकेगा - यदि परिवार के सभी सदस्य किसी एक को क्लेम लेने के लिए अधिकृत कर देते हैं - तो उस सदस्य के बैंक खाते में बीमा राशि जमा की सकेगी - 50 रुपए के स्टांप पारिवारिक सहमति शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा - दिवंगत बीमित किसान का मृत्यु प्रमाण पत्र देना होगा - उत्तराधिकार प्रमाण पत्र अथवा तहसीलदार/पटवारी द्वारा जारी वारिसनामा - भुगतान प्राप्त करने वाले सदस्य के बैंक खाते की प्रति या रद्द चेक - संबंधित सदस्य के आधार कार्ड की प्रति अगले सत्र से नॉमिनी दर्ज करना होगा अनिवार्य विभागीय सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत राज्य में हजारों किसानों के दावे विभिन्न तकनीकी और दस्तावेजी कारणों से लंबित चल रहे थे। इनमें बड़ी संख्या दिवंगत किसानों से जुड़े मामलों की है। किसान संगठनों और जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार यह मांग उठाई जा रही थी कि छोटे क्लेम मामलों में उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त की जाए। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने इसे लेकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को भी पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने बीमा कंपनियां को निर्देशित करने का आग्रह किया है कि आगामी मौसम सत्रों में किसानों के बीमा के समय राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर नॉमिनी दर्ज करना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। विभाग का मानना है कि इससे भविष्य में इस प्रकार की समस्याओं से बचा जा सकेगा और दिवंगत किसानों के परिवारों को समय पर बीमा लाभ मिल सकेगा। बीमा कंपनियों को दिए सख्त निर्देश कृषि विभाग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि सभी अधिकृत बीमा कंपनियां विभाग द्वारा जारी परिपत्र की पालना सुनिश्चित करें और लंबित प्रकरणों का त्वरित निस्तारण करें। विभाग ने यह भी कहा है कि किसान हित सर्वोपरि है और किसी भी पात्र परिवार को तकनीकी कारणों से राहत से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए। राज्य सरकार के इस निर्णय को किसान हित में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे उन परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है जो लंबे समय से फसल बीमा राशि मिलने का इंतजार कर रहे थे।
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अहिल्यानगर विधानपरिषद उम्मीदवार पर बीजेपी में हलचल; तनपुरे के नाम पर चर्चा तेज

Shirdi, Maharashtra:विखे पाटील बाईट ऑन अहिल्यानगर विधानपरिषद उमेदवार - सुजय विखेंच नाव कुठून चर्चेत आलं मला माहित नाही.. पार्लमेंट्री बोर्डाने जी नावं सुचवली त्यात सुजय विखेंचं नाव नाही.. लोक विनाकारण मुक्ताफळं का उधळतात.. ? सुजय विखेंना का लक्ष केलं जातंय..? कल्पना नाही.. पार्लमेंट्री बोर्डात तिन्ही जिल्हाध्यक्षांची नावे कळवण्यात आली होती.. प्राजक्त तनपुरे यांच्या नावाची शिफारस करण्यात आली आहे.. अहिल्यानगरचे पालकमंत्री विखे पाटलांचा गौप्यस्पोट... दिल्लीतील पक्षश्रेष्ठी उमेदवारीबाबत निर्णय घेतील... आज किंवा उद्या उमेदवार जाहीर होईल... तनपुरे यांच्या भाजप प्रवेशाबाबत मला कल्पना नाही.. ऑन आमदार विवेक कोल्हे टीका - राजकारणात टिका चालूच असते , विखे विरोधात जिल्हा होताच... मात्र फडणविस गंभीर आहेत , जिल्हयाची घडी त्यांनी पक्षाची व्यवस्थित घडी बसवलीय... विवेक कोल्हे , राम शिंदे , सत्यजित तांबे यांना पाठींबा देवून त्यांनाही संधी दिलीय... आता विधानपरिषदेतही कोणाला तरी संधी दिली जाईल.. कोल्हे यांचे मी सर्वात पहिलं अभिनंदन केले नाही.. कोणतेही मतभेद नाही... गणेश कारखाना संदर्भात राजकीय भुमिका आणि सहकाराची भुमिका वेगळी त्यात विरोधकांचा काही संबंध नाही....
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JNPT बंदर में आयात-निर्यात प्रभावित, ट्रांसपोर्टर्स ने लोडिंग- unloadिंग फीस के खिलाफ आंदोलन

Navi Mumbai, Maharashtra:Anchor -: उरण येथील जेएनपीए बंदरातील आयात निर्यातवर परिणाम होण्याची शक्यता आहे. परदेशातून माल घेऊन आलेला कंटेनर ट्रेलर वर लोड करण्यासाठी दीड हजार रूपये आकारले जात असून कंटेनर मधील माल खाली करून परत आलेला कंटेनर MT yard मध्ये ठेवून घेण्यास 5 हजार ते 10 हजार रूपये आकारले जात आहेत. लोडिंग आणि अनलोडिंग करण्यासाठी एका कंटेनर मागे पाच ते आठ हजारोंचा भुर्दंड बसत असून हा पैसा वाहतूकदारांकडून वसूल केला जात आहे. यात भ्रष्टाचार होत असल्याचा आरोप देखील ट्रान्सपोर्ट र/shipping कंपन्यांनी हा पैसा भरणे गरजेचे असताना ट्रेलर वाहतूकदारांच्या माथी हे पैसे मारले जात असल्याने याविरोधात न्हावा शेवा कंटेनर ॲापरेशन असोसिएशन तर्फे कामबंद आंदोलन पुकारण्यात आलेय. यामाध्यमातून मोठा भ्रष्टाचार होत असल्याचा इशारा वाहतूकदरांनी दिलाय.
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संभल में बाग के पास बकरीद नमाज को लेकर ईदगाह बनाम निजी खेत विवाद

Sambhal, Uttar Pradesh:संभल। संभल में निजी आम के बाग में बकरीद की नमाज पढ़े जाने पर बखेड़ा... संभल में ईदगाह से सटे आम के बाग में बकरीद की नमाज पर विवाद... बाग मालिक हाजी मोहम्मद हफीज ने बाग में नमाज अदा किए जाने पर जताया कसार एतराज। बाग उनकी निजी संपत्ति, बिना उनकी अनुमति के बाग में नमाज गलत... ईदगाह के चबूतरे पर ही हो नमाज। हाजी मोहम्मद हफीज ने बाग में नमाज पढ़े जाने पर नाराजगी जताते हुए उलेमा और ईदगाह कमेटी आने वक्त में नमाज के लिए जगह का खुद इंतजाम करे। हाजी मोहम्मद हफीज ने प्रशासन से दखल की मांग की... मुस्लिम उलेमाओं से भी शिकायत करने की बात कही। बाग मालिक हाजी मोहम्मद हफीज ने उलेमाओं पर चंदा इकट्ठा करने के ईद और अन्य मौकों पर अधिक भीड़ जुटाने का भी आरोप लगाया। ईद और अन्य मौकों पर नमाजियों की संख्या अधिक होने की वजह से नमाजी वर्षों से ईदगाह से सटे बाग में नमाज पढ़ते आ रहे हैं। ईद के मौके पर हजारों की संख्या में संभल शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों से लोग पहुंचकर ईदगाह से सटे बाग में नमाज पढ़ते हैं। संभल के हयातनगर थाना इलाके की बड़ी ईदगाह का मामला।
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104 वर्षीय सहीराम बिश्नोई का निधन, बिश्नोई समाज ने रत्न सम्मान की घोषणा की

Sirsa, Haryana:एंकर रीड सिरसा जिले के गांव सक्ताखेड़ा निवासी सही राम बिश्नोई का पिछले दिनों निधन हो गया। सही राम बिश्नोई 104 साल के थे। सही राम बिश्नोई 1957 में सिरसा जिला के साथ लगते पंजाब के अबोहर से पहली बार में चुनाव लड़कर विधायक बने थे। सही राम बिश्नोई पूर्व सीएम भजन लाल के समधी थे। सही राम बिश्नोई पिछले काफी समय से लंबी बीमारी से ग्रसित थे। अब 29 मई को अखिल भारतीय बिश्नोई समाज की तरफ से बिश्नोई रत्न का सम्मान दिया जाएगा। 29 मई को सही राम बिश्नोई की श्रद्धांजलि समारोह और रस्म क्रिया होगी जिसमें काफी संख्या में राजनेताओं और गणमान्य लोगों के आने की संभावनाएं है। बताना दे कि इससे पहले अब तक बिश्नोई समाज के तीन ही लोगों को ही बिश्नोई रत्न सम्मान मिल चुका है । इससे पहले पूर्व सीएम भजन लाल , पूर्व सांसद और पूर्व विधायक कुलदीप बिश्नोई को बिश्नोई रत्न सम्मान मिल चुका है । सही राम बिश्नोई के पोते सोम प्रकाश बिश्नोई ने जानकारी देते हुए कहा कि सन् 1957 में उन्होंने भारतीय जनसंघ के टिकट पर अबोहर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और विधायक निर्वाचित हुए। सादगी, संघर्ष, कृषि नवाचार और समाज सेवा की जीवित मिसाल थे। वोल 1 बताया जाता है कि हरियाणा के डबवाली क्षेत्र के गांव सकताखेड़ा की धरती से जुड़ा एक ऐसा व्यक्तित्व, जिसने एक सदी से अधिक समय तक समाज सेवा, राष्ट्रभक्ति, कृषि विकास, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय मूल्यों की अलख जगाई थी। 104 वर्ष 4 माह 10 दिन की लंबी आयु पूर्ण कर 22 मई 2026 को उन्होंने इस संसार को अलविदा कह गए है। सही राम बिश्नोई अपने पीछे संघर्ष, सादगी, सेवा और प्रेरणा की ऐसी विरासत छोड़ गए, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव मार्ग दिखाती रहेगी। अखंड भारतवर्ष के कोहिनूर, बिश्नोई समाज के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, सेवक दल के संस्थापक, हिंदी आंदोलन सेनानी, जनसंघ के पूर्व विधायक, कृषि नवाचार के समर्थक और पर्यावरण प्रेमी एडवोकट सहीराम बिश्नोई केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि एक विचारधारा, एक संस्कार और एक युग की पहचान थे। सोम प्रकाश बिश्नोई ने बताया कि दादाजी सही राम बिश्नोई का जन्म उस दौर में हुआ था जब भारत अंग्रेजी शासन के अधीन था। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना, देश विभाजन की पीड़ा, संयुक्त पंजाब का दौर और हरियाणा निर्माण तक का इतिहास अपनी आंखों से देखा। ग्रामीण परिवेश में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने शिक्षा को महत्व दिया और आगे चलकर कानून की पढ़ाई कर वकालत के क्षेत्र में कदम रखा। वे गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता को अपना कर्तव्य मानते थे। उनका मानना था कि समाज की असली ताकत गांव, किसान और आम जनता होती है। यही कारण था कि उनका जीवन हमेशा जमीन से जुड़ा रहा। 1946-47 में सेवक दल की स्थापना देश विभाजन से पहले ही उन्होंने समाज सेवा को संगठित रूप देने का संकल्प लिया। वर्ष 1946-47 में संयुक्त भारत में “सेवक दल” की स्थापना की गई, जिसका पंजीकरण फरवरी 1947 में लाहौर में हुआ। उस समय देश अशांति और विभाजन की परिस्थितियों से गुजर रहा था, लेकिन दादाजी समाज में भाईचारा, अनुशासन और सेवा भावना को मजबूत करने में जुटे रहे। उन्होंने युवाओं को यह संदेश दिया कि सच्चा जीवन वही है जो समाज और मानवता के काम आए। विभाजन के दौर में मानवता की मिसाल 1947 का विभाजन मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक था। लाखों लोग उजड़ गए, परिवार बिछड़ गए और चारों ओर भय का माहौल था। ऐसे कठिन समय में सहीराम बिश्नोई मानवता के साथ खड़े रहे। उन्होंने अनेक परिवारों और 36 बिरादरी के लोगों को सुरक्षित भारत पहुंचाने और बसाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे जाति, धर्म और राजनीति से ऊपर उठकर इंसानियत को सबसे बड़ा धर्म मानते थे। राजनीति में सेवा और सिद्धांतों की पहचान सन् 1957 में उन्होंने भारतीय जनसंघ के टिकट पर अबोहर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और विधायक निर्वाचित हुए। उस दौर में राजनीति सेवा और विश्वास का माध्यम मानी जाती थी। विधायक बनने के बाद भी उन्होंने सादगी नहीं छोड़ी। वे हमेशा सामान्य Rural व्यक्ति की तरह रहे। न कोई दिखावा, न सत्ता का अहंकार और न विशेष सुविधाओं की चाह रखी थी। वे हर व्यक्ति से आत्मीयता और सम्मान के साथ मिलते थे। चाहे गरीब किसान हो, मजदूर हो या बड़ा अधिकारी सबको समान सम्मान देना उनका संस्कार था。 हिंदी आंदोलन में सक्रिय भूमिका और जेल यात्रा सोम प्रकाश बिश्नोई ने बताया कि दादाजी हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रबल समर्थक थे। 1958 के हिंदी आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई और संघर्ष करते हुए जेल यात्रा भी की। वे मानते थे कि मातृभाषा और राष्ट्रभाषा समाज की आत्मा होती है। उन्होंने जीवनभर हिंदी, भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों के संरक्षण की आवाज उठाई। दादाजी केवल सामाजिक और राजनीतिक व्यक्ति ही नहीं थे, बल्कि कृषि क्षेत्र की गहरी समझ रखने वाले प्रगतिशील किसान भी थे। उन्होंने खेती में नवाचार, आधुनिक सोच और किसानों को नई तकनीकों की ओर प्रेरित करने का कार्य किया। उस दौर में जब पारंपरिक खेती ही सामान्य मानी जाती थी, तब वे कृषि सुधार और उत्पादकता बढ़ाने की बात करते थे। वे किसानों को आत्मनिर्भर बनने, जल संरक्षण और खेती में वैज्ञानिक सोच अपनाने के लिए प्रेरित करते थे। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि विकास को वे राष्ट्र निर्माण का आधार मानते थे। दादाजी सही राम बिश्नोई ने क्षेत्र में नहर परियोजनाओं और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे अच्छी तरह समझते थे कि किसान की समृद्धि पानी से जुड़ी है। इसलिए उन्होंने क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने और किसानों तक नहरी पानी पहुंचाने के प्रयासों में सक्रिय योगदान दिया। ग्रामीण विकास और खेती की मजबूती के लिए उनका यह योगदान आज भी लोगों द्वारा सम्मान के साथ याद किया जाता है。 पर्यावरण और पौधारोपण के प्रति समर्पण सोम प्रकाश बिश्नोई ने बताया कि दादाजी सही राम बिश्नोई प्रकृति प्रेमी और पर्यावरण संरक्षण के समर्थक थे। उन्होंने जीवनभर पौधारोपण और हरियाली को बढ़ावा देने का संदेश दिया। वे मानते थे कि पेड़ केवल प्रकृति की शोभा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य हैं। गांवों में वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने में उनकी विशेष रुचि रहती थी। उनका जीवन बिश्नोई समाज की प्रकृति संरक्षण की परंपरा का भी सुंदर उदाहरण था। दादाजी की सबसे बड़ी पहचान थी — सादगी, ईमानदारी और अपना कार्य स्वयं करना। उन्होंने जीवनभर कभी पद, प्रतिष्ठा या सत्ता का प्रदर्शन नहीं किया। वे स्वयं अनुशासित जीवन जीते थे और दूसरों को भी मेहनत, ईमानदारी और आत्मनिर्भरता की प्रेरणा देते थे। उनकी आत्मीयता ऐसी थी कि जो भी उनसे मिलता, उन्हें परिवार के बुजुर्ग की तरह सम्मान देता था। नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा 104 वर्षों से अधिक का उनका जीवन केवल लंबी आयु का उदाहरण नहीं, बल्कि आदर्श जीवन का प्रतीक था। उन्होंने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि सेवा सबसे बड़ा धर्म है। सादगी सबसे बड़ा आभूषण है .ईमानदारी सबसे बड़ी पूंजी है। समाज के लिए जिया गया जीवन ही सबसे सफल जीवन होता है。 श्रद्धांजलि सभा दादाजी की पावन स्मृति में 29 मई 2026, शुक्रवार को उनके निवास स्थान गांव सकताखेड़ा (डबवाली), हरियाणा में श्रद्धांजलि सभा एवं स्मृति समारोह आयोजित किया जाएगा। समाज, राजनीति और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे。 दादाजी सहीराम बिश्नोई का निधन केवल एक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि एक ऐसे युग का अंत है जिसमें राजनीति सेवा थी, समाज परिवार था और चरित्र सबसे बड़ी पहचान माना जाता था। वे भले आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, संस्कार, संघर्ष और प्रेरणाएं सदैव जीवित रहेंगी। “एक युग का अंत नहीं… प्रेरणाओं की अमर शुरुआत है।” बाइट सोम प्रकाश बिश्न्नोई , पोता।
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