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UvaisUvaisFollow30 Jan 2025, 12:29 pm

इटावाः सपा सांसद ने डीसीडीएफ के चुनाव पर प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

Etawah, Uttar Pradesh:

समाजवादी पार्टी के सांसद जितेंद्र दोहरे ने आरोप लगाया है कि सत्ता के इशारे पर जिला सहकारी विकास संघ (डीसीडीएफ) के चुनाव में प्रशासन ने भाजपा का पक्ष लिया है। नियम के खिलाफ एक सदस्य को नामित करके मत का अधिकार दिया गया है जिसके आधार पर भाजपा की जीत का रास्ता खुला। डीसीडीएफ चुनाव में मात्र 13 सदस्य ही जीते थे, लेकिन रातों रात जिलाधिकारी इटावा में एक सदस्य को नामित कर वोट डालने का अधिकार दे दिया। जबकि डीएम को ना तो किसी भी सदस्य को चुनाव से पहले नामित करने और मतदान करने का अधिकार नहीं था। लेकिन इसके बावजूद डीएम ने मनमाने तरह से सदस्य नामित किया जिसके कारण चुनाव प्रभावित हुआ है।

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SARTHAK-PDS योजना से NFSA लाभार्थियों तक पहुंच और पारदर्शिता में बड़ा सुधार

Noida, Uttar Pradesh:2705ZUP_DEL_PDS_INFO_D SARTHAK-PDS योजना प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई Cabinet Committee on Economic Affairs (CCEA) की बैठक में SARTHAK-PDS योजना को मंजूरी दी गई। केंद्र सरकार अगले 5 वर्षों में 25,530 करोड़ रुपये खर्च करेगी। यह योजना 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी。 SARTHAK-PDS के तहत दो योजनाओं को एक साथ जोड़ा गया है: 1. NFSA के तहत खाद्यान्न के राज्य के भीतर परिवहन और FPS डीलरों के मार्जिन सहायता योजना 2. SMART PDS योजना योजना का उद्देश्य पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है। सरकार का लक्ष्य 81.35 करोड़ NFSA लाभार्थियों तक खाद्यान्न की बेहतर और अंतिम छोर तक डिलीवरी सुनिश्चित करना है। राशन दुकानदारों (FPS Dealers) को अधिक कमीशन और राज्यों को परिवहन व हैंडलिंग के लिए वित्तीय सहायता जारी रहेगी। योजना में AI, Machine Learning, NLP और Blockchain जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इससे रियल टाइम मॉनिटरिंग, डेटा आधारित निगरानी और शिकायत निवारण प्रणाली मजबूत होगी। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में e-PoS मशीन, आधार सीडिंग और डिजिटल राशन कार्ड व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। “मेरा राशन”, “अन्न मित्र”, “अन्न सहायता” और “राइटफुल टार्गेटिंग डैशबोर्ड” जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी बढ़ावा मिलेगा। योजना का मुख्य उद्देश्य लीकेज रोकना, पारदर्शिता बढ़ाना और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है।
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राजस्थान में CETP के लिए 150 करोड़ रुपये का अनुदान, जल पुनः उपयोग योजना

Jaipur, Rajasthan:सीईटीपी स्थापना के लिए 150 करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। क्लस्टर-स्तर के सीईटीपी की स्थापना के दौरान ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ तकनीक वाले प्लांट लगाए जाएंगे। योजना के अनुसार 80 प्रतिशत तक अनुदान या अधिकतम 150 करोड़ रुपये दिया जाएगा, 60 प्रतिशत अनुदान तीन किस्तों में 20-20-20 वर्षों में उपलब्ध कराया जाएगा। नॉन-रीको औद्योगिक क्षेत्रों में भी वित्तीय सहायता दी जाएगी। रीको और नॉन रीको दोनों क्षेत्रों में एसपीवी बनाकर परियोजना लागत का 80 प्रतिशत या अधिकतम 150 करोड़ रुपये का अनुदान मिलेगा। शर्तें पुरानी योजना का दायरा बढ़ाकर 100 करोड़ का अनुदान और नॉन रीको क्षेत्र को भी शामिल कर दी गई।
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SC ruling clarifies SIR process and voter list reforms, keeping the commission impartial

Noida, Uttar Pradesh:सुप्रीम कोर्ट के लिखित फैसले में निष्कर्ष और दिशानिर्देश:-1 SIR की प्रकिया जनप्रतिनिधत्व कानून के खिलाफ नहीं है।यह संविधान के अनुच्छेद 324 और RP एक्ट के सेक्शन 21 के तहत के तहत चुनाव आयोग की अधिकार क्षेत्र ने आती है। SIR का मकसद निष्पक्ष और सही चुनाव सुनिश्चित करना है। 2 SIR प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग जो कदम उठाए , वे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के मुताबिक पूरी तरह और संतुलित हैं।इसका मुख्य मकसद मतदाता सूची को सही और अपडेट करना है।जिन लोगों के नाम गलत तरीके से हटे है, उनके लिए भी इसमें राहत और अपील का मौका दिया है。 3 अगर किसी का नाम पहले से मतदाता सूची में है तो यह माना जा सकता है कि वो वैध मतदाता है। लेकिन वोटर लिस्ट में नाम होना अंतिम प्रमाण नहीं है।उसे जांचकर बदला जा सकता है।चुनाव आयोग को पूरी मतदाता सूची की जांच करने का अधिकार है。 4 मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 21A के खिलाफ नहीं है। जिन लोगों के नाम हटाए गए, उनकी प्रक्रिया कानून के अनुसार ही की गई है। उन्हे नोटिस दिया गया और उन्हें अपनी बात रखने का मौक़ा भी दिया गया। 5 चुनाव आयोग ने यह तय किया कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने/ जांचने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज मान्य होंगे। वह उसका सोच-समझकर लिया गया प्रशासनिक फैसला है। आधार कार्ड को शामिल करने का आदेश भी इस कोर्ट ने 8 सितंबर 2025 को दिया गया था।इसलिए उसे भी दस्तावेजों शामिल किया गया है।दस्तावेजों को चयन मनमाने तरीके से नहीं किया गया है। इसके पीछे वाजिब आधार है। 6 चुनाव आयोग अपने संवैधानिक अधिकार के तहत यह सीमित जांच कर सकता है कि कोई व्यक्ति नागरिक है या नहीं लेकिन सिर्फ यह तय करने के लिए कि उसे वोटर लिस्ट में शामिल किया जाए या नहीं। चुनाव आयोग की जांच केवल मतदाता सूची के लिए होती है।इसका मतलब यह नहीं है कि चुनाव आयोग किसी व्यक्ति की नागरिकता का अंतिम और कानूनी फैसला कर रहा हो। अगर किसी व्यक्ति को नागरिक न मानकर वोटर लिस्ट से हटाया जाता है, तो इसका असर सिर्फ इतना है कि वह वोट नहीं दे पाएगा।लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसकी नागरिकता खत्म हो गई है।नागरिकता का असली और अंतिम फैसला केंद्र सरकार के सक्षम ऑथरिटी करती है 7 चुनाव आयोग केवल यह देखता है कि व्यक्ति वोटर लिस्ट में रहने योग्य है या नहीं। लेकिन वह नागरिकता पर अंतिम फैसला नहीं दे सकता। अगर चुनाव आयोग को यह लगता है कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में शामिल होने की कानूनी शर्तें पूरी नहीं करता, तो आयोग को उस व्यक्ति का मामला केंद्र सरकार के सक्षम ऑथरिटी के पास भेजना होगा। वही नागरिकता तय कर सकता है 8 1SIR की प्रकिया जनप्रतिनिधत्व कानून के खिलाफ नहीं है।यह संविधान के अनुच्छेद 324 और RP एक्ट के सेक्शन 21 के तहत के तहत चुनाव आयोग की अधिकार क्षेत्र ने आती है। SIR का मकसद निष्पक्ष और सही चुनाव सुनिश्चित करना है。 2 SIR प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग जो कदम उठाए , वे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के मुताबिक पूरी तरह और संतुलित हैं।इसका मुख्य मकसद मतदाता सूची को सही और अपडेट करना है।जिन लोगों के नाम गलत तरीके से हटे है, उनके लिए भी इसमें राहत और अपील का मौका दिया है। 3 अगर किसी का नाम पहले से मतदाता सूची में है तो यह माना जा सकता है कि वो वैध मतदाता है। लेकिन वोटर लिस्ट में नाम होना अंतिम प्रमाण नहीं है।उसे जांचकर बदला जा सकता है।चुनाव आयोग को पूरी मतदाता सूची की जांच करने का अधिकार है। 4 मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 21A के खिलाफ नहीं है। जिन लोगों के नाम हटाए गए, उनकी प्रक्रिया कानून के अनुसार ही की गई है। उन्हे नोटिस दिया गया और उन्हें अपनी बात रखने का मौक़ा भी दिया गया。 5 आयोग ने यह तय किया कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने/ जांचने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज मान्य होंगे। वह उसका सोच-समझकर लिया गया प्रशासनिक फैसला है। आधार कार्ड को शामिल करने का आदेश भी इस कोर्ट ने 8 सितंबर 2025 को दिया गया था।इसलिए उसे भी दस्तावेजों शामिल किया गया है।दस्तावेजों को चयन मनमाने तरीके से नहीं किया गया है। इसके पीछे वाजिब आधार है। 6चुनाव आयोग अपने संवैधानिक अधिकार के तहत यह सीमित जांच कर सकता है कि कोई व्यक्ति नागरिक है या नहीं लेकिन सिर्फ यह तय करने के लिए कि उसे वोटर लिस्ट में शामिल किया जाए या नहीं। चुनाव आयोग की जांच केवल मतदाता सूची के लिए होती है।इसका मतलब यह नहीं है कि चुनाव आयोग किसी व्यक्ति की नागरिकता का अंतिम और कानूनी फैसला कर रहा हो। अगर किसी व्यक्ति को नागरिक न मानकर वोटर लिस्ट से हटाया जाता है, तो इसका असर सिर्फ इतना है कि वह वोट नहीं दे पाएगा।लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसकी नागरिकता खत्म हो गई है। नागरििता का असली और अंतिम फैसला केंद्र सरकार के सक्षम ऑथरिटी करती गया 7 चुनाव आयोग केवल यह देखता है कि व्यक्ति वोटर लिस्ट में रहने योग्य है या नहीं। लेकिन वह नागरिकता पर अंतिम फैसला नहीं दे सकता। अगर चुनाव आयोग को यह लगता है कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में शामिल होने की कानूनी शर्तें पूरी नहीं करता, तो आयोग को उस व्यक्ति का मामला केंद्र सरकार के सक्षम ऑथरिटी के पास भेजना होगा। वही नागरिकता तय कर सकता है 8 चुनाव आयोग ने जिन लोगों के नाम 2003 की वोटर लिस्ट में होने के बावजूद उन्हें भारतीय नागरिक नहीं मानते हुए हटाए है, उनके मामलों को आयोग को 4 हफ्तों में नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत बनी सक्षम ऑथिरिटी को भेजेगा।ऑथरिटी कानून के अनुसार यह तय करेगी कि व्यक्ति वास्तव में भारतीय नागरिक है या नहीं।। यह फैसला अगली चुनाव प्रक्रिया (लोकसभा, विधानसभा या स्थानीय निकाय चुनाव) से पहले करने की कोशिश की जाएगी।जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें भी ऑथरिटी की ओर से नोटिस दिया जाएगा उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। अगर कोई अथॉरिटी केस नतीजे पर पहुँचती है कि वह व्यक्ति भारतीय नागरिक है, तो उसका नाम फिर से वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा। 9 अगर बिहार में रहने वाले किसी व्यक्ति का नाम गलती से काटा गया है ।तो वह व्यक्ति चुनाव आयोग के फैसले को अदालत में चुनौती दे सकता है। चुनाव आयोग ने जिन लोगों के नाम 2003 की वोटर लिस्ट में होने के बावजूद उन्हें भारतीय नागरिक नहीं मानते हुए हटाए है, उनके मामलों को आयोग को 4 हफ्तों में नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत बनी सक्षम ऑथिरिटी को भेजेगा।ऑथरिटी कानून के अनुसार यह तय करेगी कि व्यक्ति वास्तव में भारतीय नागरिक है या नहीं।। यह फैसला अगली चुनाव प्रक्रिया (लोकसभा, विधानसभा या स्थानीय निकाय चुनाव) से पहले करने की कोशिश की जाएगीजिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें भी ऑथरिटी की ओर से नोटिस दिया जाएगा उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। अगर कोई अथॉरिटी केस नतीजे पर पहुँचती है कि वह व्यक्ति भारतीय नागरिक है, तो उसका नाम फिर से वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा। * *अगर बिहार में रहने वाले किसी व्यक्ति का नाम गलती से काटा गया है ।तो वह व्यक्ति चुनाव आयोग के फैसले को अदालत में चुनौती दे सकता है।
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SIR फैसले से चुनाव आयोग को राहत, गहलोत-मेघवाल के तेवर चर्चा में

Jaipur, Rajasthan:सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल इंटेंसिव रीविजन (SIR) प्रक्रिया को वैध ठहराते हुए चुनाव आयोग को बड़ी राहत दी है। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची की विशेष समीक्षा करने का पूरा अधिकार है। SIR पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सियासत शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने SIR के सवाल पर कहा कि देश को बर्बाद कर रहे हैं ये लोग... डेमोक्रेसी को खत्म कर रहे हैं। बंगाल की तरह देशभर में चुनाव होने लग गए तो डेमोक्रेसी बर्बाद होगी। बंगाल में IPS ने लोगों को धमकाया। युवा पीढ़ी नहीं चेतेगी तो भुगतेगी। 27 लाख वोट बंगाल में कटे। वोट का अधिकार छीना जा रहा है... मैंने कहा था चुनाव पोस्टमैन होने चाहिए थे। 27 लाख का जब तक फैसला नहीं होता, तब तक चुनाव नहीं होना चाहिए था। चुनाव आयोग बीजेपी और NDA का डिपार्टमेंट बन गया है। आज ज्यूडिशरी दबाव में है। क्या हो रहा है देश में... पूरा देश चुप है। जो हो रहा है धर्म के नाम पर हो रहा है। समय आ गया है, नौजवानों को समझना चाहिए। वहीं SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल का भी बयान सामने आया। मेघवाल ने कहा कि SIR का जब मुद्दा आया था तो विपक्ष ने चर्चा की डिमांड की थी। जब चर्चा हुई तो हमने कहा कि ये इलेक्शन कमीशन का काम है। वोटर लिस्ट से नाम हटाना और जोड़ना SIR की प्रक्रिया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी आज इस संबंध में फैसला सुनाया है। मेघवाल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पांच राज्यों के चुनाव में चुनाव आयोग ने अपनी निष्पक्षता सिद्ध की। ये लोग केरल में कैसे जीत गए। संवैधानिक संस्थाओं पर राहुल गांधी अनाप-शनाप बयान दे रहे हैं। राहुल गांधी को संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना चाहिए और भाषा पर संयम रखना चाहिए।
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सीएमओ ने अनुपस्थित डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी

Farrukhabad, Uttar Pradesh:फर्रुखाबाद नहीं सुधार रही जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं सीएमओ ने जिला अस्पताल लोहिया पुरुष का किया औचक निरीक्षण, चार डॉ० मिले अनुपस्थिति एनआरसी वार्ड के प्लेइंग रूम में लटका मिला ताला फर्रुखाबाद : शहर आवास विकास स्थित डॉ राममनोहर लोहिया जिला अस्पताल पुरुष का सीएमओ डॉक्टर अवनींद्र कुमार ने मंगलवार सुबह औचक निरीक्षण किया। जहां सीएमओ को पोषण पुनर्वास केंद्र प्रभारी डॉक्टर विवेक सक्सेना सहित चार डॉक्टर अनुपस्थित मिले वहीं पोषण पुनर्वास केंद्र के प्लान रूम में ताला लटका मिला जिसकी चाबी डॉक्टर विवेक सक्सेना अपने साथ ले गए सीएमओ ने कार्रवाई किए जाने की बात कही है। सीएमओ जिला अस्पताल लोहिया में बने एनआरसी वार्ड में पहुंचे। एनआरसी वार्ड में इलाज के संबंध में तीमारदारों से बात की। वार्ड के प्लेइंग रूम में ताला लटका मिला। जब उन्होंने स्टाफ से प्लेइंग रूम की चाबी मांगी। तो पता चला की प्लेइंग रूम की चाबी डॉक्टर विवेक सक्सेना के पास है। डॉ विवेक सक्सेना ड्यूटी पर तैनात नहीं मिले। तभी सीएमओ ने कहा। कि यहां बच्चों के खेलने के लिए प्ले रूम बनाया गया है या ताला लगाने के लिए यह प्ले रूम बनाया गया है। जिसके सीएमओ सीएमएस कार्यालय में पहुंचे उन्होंने डॉक्टर रजिस्टर को चेक किया। जिसमें डॉक्टर विवेक सक्सेना समेत चार डॉक्टर अनुपस्थित मिले। डॉ विवेक सक्सेना कुछ देर बाद सीएमएस कार्यालय में पहुंचे। अब यह कोई अस्पताल आने का समय है। उन्होंने तत्काल डीएम को डॉ०विवेक सक्सेना के खिलाफ लेटर लिखने की चेतावनी दी। कहा कि कभी समय पर अस्पताल में नहीं आते हो। उसके बाद इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों के हाल-चाल जाना। अस्पताल में साफ सफाई की व्यवस्था भी ठीक मिला। बाइट :-- डॉ अवनींद्र कुमार, सीएमओ फर्रुखाबाद
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सिद्धार्थनगर सीमा पर डीजल-पेट्रोल संकट, नेपाल स्मगलिंग बढ़ा रही कीमत

Naugarh, Uttar Pradesh:भारत नेपाल सीमा पर स्थित सिद्धार्थनगर जिले में डीजल पेट्रोल की क्राइसिस रुकने का नाम नहीं ले रही है। इस क्राइसिस के पीछे की एक वजह तो अमेरिका ईरान के बीच चल रही जंग को लेकर तेल की आपूर्ति में कमी तो है ही। साथ ही इसकी एक बड़ी वजह पेट्रोल और डीजल की नेपाल देश में हो रही स्मगलिंग भी बताई जा रही है। भारत की अपेक्षा नेपाल में प्रति लीटर करीब 35 रुपये डीजल और पेट्रोल के मूल ज्यादा है। ऐसे में इसकी तस्करी बड़ी संख्या में इन दिनों हो रही है। सिद्धार्थनगर जिले की 68 किलोमीटर की सीमा नेपाल मुल्क से लगती है। खुली सीमा होने की वजह से यह क्षेत्र हमेशा से तस्करों के लिए बहुत ही आसान रास्ता साबित होता रहा है। जब भी नेपाल में किसी चीज की मांग अधिक होती है तो भारतीय क्षेत्र से इसकी तस्करी शुरू हो जाती है। जिसमें खाद्य पदार्थों के साथ-साथ डीजल और पेट्रोल भी शामिल है सिद्धार्थनगर जिले में इस वक्त डीजल और पेट्रोल को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। जिले के करीब 130 पेट्रोल पंप में से 25 परसेंट पेट्रोल पंपों पर डीजल और पेट्रोल की आपूर्ति हो रही है ऐसे में जहां पर पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता होती है वहां जरूरतमंदों की लंबी कतार सुबह से ही देखने को मिल रही है। जो पेट्रोल पंप के खुले रहने तक लगातार वैसी ही बनी रहती है। लोगों की माने तो इस डीजल और पेट्रोल के क्राइसिस के पीछे दो वजह हैं अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के अलावा जो भी डीजल पेट्रोल सिद्धार्थनगर जिला सहित भारत नेपाल सीमा से सेट पेट्रोल पंपों को मिलता है उसमें से भारी मात्रा में यह डीजल और पेट्रोल स्मगलिंग कर नेपाल भेज दिया जा रहा है। इस स्मगलिंग के लिए तस्करों ने कई रास्ते अपनाए हैं । सूत्रों की माने तो तस्कर डीजल और पेट्रोल के अपने मोटरसाइकिल और अन्य चार पहिया वाहनों के टैंक फुल कर लेते हैं और आसानी से नेपाल में जाकर टंकी खाली कर देते हैं ऐसे में उन्हें एक लीटर के पीछे करीब ₹30 तक की प्रॉफिट मिल जाती है। भारत से नेपाल डीजल और पेट्रोल के बड़ी मात्रा में स्मगलिंग की वजह से स्थानीय लोगों को डीजल और पेट्रोल नहीं मिल पा रहा है जिसकी वजह से उनके सामने भारी दिक्कतें खड़ी है
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खूँटी में डबल मर्डर: दोस्त की पत्नी के कारण हत्या, तीन गिरफ्तार

Khunti, Jharkhand:खूंटी में विगत 17 मई को हुई डबल मर्डर केस से पर्दा उठा लिया है। जो कि सयको थाना क्षेत्र के मारंगबुरु पहाड़ में लड़की व लड़की का शव बरामद हुआ था। सयको 17 मई को जिवरी गाँव के दो लोग नाबालिग लड़का विशु पाहन और 17 वर्षीय सुमी मुण्डू की मारंगबुरु पहाड़ में धारदार हथियार से हत्या कर छिपाया गया मिला था। इस हत्याकांड पर पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के अनुसार, 17 और 18 मई की रात सायको गांव में आयोजित छाउ नृत्य मेला देखने जिउरी बड़ा टोला निवासी 17 वर्षीय विशु पाहन और 17 वर्षीय सुमी मुण्डू पहुंचे थे। इसी दौरान मेला स्थल से करीब 300 मीटर दूर अज्ञात अपराधियों ने तेज धारदार हथियार से दोनों की हत्या कर शव को मारंगबुरु पहाड़ में छुपा दिया था। गिरफ्तार आरोपियों में जिउरी बड़ा टोला निवासी सुम्बर सिंह मानकी, सायको निवासी गोमेया सोय और बुधराम सोय शामिल हैं। उक्त घटना में प्रयुक्त टांगी, खून लगी मिट्टी, चप्पल और खून लगे कपड़े पुलिस ने बरामद किए हैं। एसपी ऋषभ गर्ग ने बताया कि सुम्बर सिंह मानकी और विशु पाहन दोनों दोस्त थे। और सुम्बर की नयी नयी शादी हुई थी इसलिए उसने विशु पाहन को पत्नी का ख्याल रखने के लिए कहकर काम करने दूसरा प्रदेश चला गया था। इसी बीच पता चला कि उसकी पत्नी का किसी अन्य लड़के से हिल मिल बढ़ गया था। जिसकी जानकारी विशु ने सुम्बर को नहीं दिया और पता उसे चल गया। जिसका गुस्सा से उसने विशु की हत्या कर दिया। लेकिन सुम्बर को सुमी मारने नहीं दे रही थी और उसके बीच आ जा रही थी इसलिए उसने सुमी की भी हत्या कर दिया। जिसके बाद सयको के दो लड़के गोमेया सोय और बुधराम सोय के सहयोग से शव को छिपाने के लिए पहाड़ के गुफा तक ले गये थे। इस हत्याकांड में सहयोग करने पर सुम्बर के साथ इन don को भी गिरफ्तार किया गया है।
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