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राजस्थान हाईकोर्ट ने एनओसी देरी पर कड़ा निर्देश देकर डिजिटाइज्ड फ्रेमवर्क 2026 लागू कराने को कहा
RKRakesh Kumar Bhardwaj
Feb 18, 2026 17:03:58
Jodhpur, Rajasthan
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच ने नर्सिंग कॉलेजों को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने में हो रही देरी पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक निष्क्रियता को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। हेल्थ एंड एज्युकेशन केयर सोसायटी, गुप्ता नर्सिंग कॉलेज, उदयपुर की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य को आठ सप्ताह में डिजिटल फ्रेमवर्क तैयार कर लागू करने के निर्देश दिए। याचिका में बताया गया कि 13 जुलाई 2025 को निरीक्षण टीम ने कॉलेज का निरीक्षण कर बीएससी नर्सिंग और जीएनएम पाठ्यक्रम के लिए 30-30 सीटों पर अनुमति की सिफारिश की थी। आवश्यक आधारभूत ढांचे, अस्पताल सुविधा और अन्य मानकों की पूर्ति के बावजूद आठ माह बीत जाने के बाद भी एनओसी जारी नहीं की गई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता श्रेयांश मार्डिया ने तर्क दिया कि आवेदन को अनावश्यक रूप से लंबित रखा गया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि वर्ष 2024 में जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार एनओसी प्रक्रिया 90 दिनों में तथा निरीक्षण रिपोर्ट प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर पूरी कीジャानी चाहिए। इसके बावजूद निर्णय न लेना राज्य की लापरवाही दर्शाता है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि निरीक्षण समिति की स्पष्ट सिफारिश के बाद भी आठ माह तक फाइल लंबित रखना निंदनीय है और यह सार्वजनिक हित के प्रति उदासीनता का संकेत है। ऐसी स्थिति संस्थानों को बार-बार न्यायालय की शरण लेने के लिए मजबूर कर रही है। हाईकोर्ट ने हाल के एक अन्य प्रकरण का भी उल्लेख किया, जिसमें निरीक्षण के समय वैध अग्निशमन एवं बायोमेडिकल एनओसी प्रशासनिक देरी के कारण समाप्त हो गई, जिससे संस्थान को पूरी प्रक्रिया दोबारा करनी पड़ी। इसे न्यायालय ने प्रशासनिक जड़ता का उदाहरण बताया। कोर्ट ने राजस्थान गारंटीड डिलीवरी ऑफ पब्लिक सर्विसेज एक्ट, 2011 का हवाला देते हुए कहा कि नागरिकों को निर्धारित समय में सेवा प्राप्त करने का वैधानिक अधिकार है और आवेदन लंबित रखना इस कानून की भावना के विपरीत है। कोर्ट ने राज्य सरकार को आठ सप्ताह के भीतर राजस्थान ग्रांट ऑफ एनओसी/अप्रूवल/परमिशन (एजुकेशन) फ्रेमवर्क-2026 तैयार कर अधिसूचित करने का निर्देश दिया। इसके तहत पूर्णत डिजिटाइज्ड ऑनलाइन पोर्टल स्थापित किया जाएगा, जिसमें रियल-टाइम ट्रैकिंग, प्रत्येक चरण के लिए निश्चित समयसीमा, नामित नोडल अधिकारी, समयबद्ध निरीक्षण रिपोर्ट अपलोड, देरी पर दंड प्रावधान, नोटिस बोर्ड डिस्प्ले और आरटीआई अनुपालन जैसे पारदर्शिता उपाय शामिल होंगे। हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से आदेश की अनुपालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अतिरिक्त महाधिवक्ता एन.एस. राजपुरोहित ने आश्वासन दिया कि 15 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता संस्थान को आवश्यक एनओसी जारी कर दी जाएगी। इस पर फिलहाल व्यक्तिगत लागत नहीं लगाई गई, लेकिन कोर्ट ने चेतावनी दी कि तय समय में पालन नहीं होने पर संबंधित अधिकारी पर भारी व्यक्तिगत लागत लगाई जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।
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